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Cipla को बेचने की डील में फंसा पेंच, हामिद फैमिली बदल सकती है मन?
दिग्गज कंपनी सिप्ला की फाउंडर फैमिली और संभावित खरीदारों के बीच कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आजादी से पहले अस्तित्व में आई दिग्गज दवा कंपनी सिप्ला (Cipla) की बिक्री योजना अटकती दिखाई दे रही है. कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर सिप्ला की फाउंडर फैमिली और संभावित खरीदारों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. लिहाजा माना जा रहा है कि फिलहाल के लिए कंपनी को दूसरे हाथों में सौंपे जाने की प्रक्रिया पर ब्रेक लग सकता है. हालांकि, सिप्ला के फाउंडर की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान अब तक नहीं आया है.
कितनी की गई है डिमांड?
मीडिया रिपोर्ट्स में ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया गया है कि Cipla के संभावित खरीदार 1.09 ट्रिलियन रुपए के वैल्यूएशन पर अड़े हुए हैं. कुछ फार्मा कंपनियों और निजी इक्विटी फर्मों सहित अन्य संभावित खरीदार के साथ सिप्ला की बातचीत अब आगे नहीं बढ़ रही है. दरअसल, सिप्ला की फाउंडर फैमिली प्रति शेयर लगभग 1,350 रुपए की मांग कर रही है, जबकि शेयर की मौजूदा वैल्यू 1,234.80 रुपए है. देखने में भले ही ये अंतर छोटा नजर आ रहा है, लेकिन जब करोड़ों शेयर की बात, तो ये छोटा अंतर काफी बड़ा साबित होगा. इसलिए संभावित खरीदार इसके लिए तैयार नहीं हैं.
कितनी है हिस्सेदारी?
सिप्ला के प्रमोटर हामिद परिवार के पास कंपनी में 33.47% हिस्सेदारी है, जिसे वह बेचना चाहते हैं. जो खरीदार इस हिस्सेदारी को अपना बनाएगा, वो ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत Cipla की अतिरिक्त 26 प्रतिशत हिस्सेदारी पर भी दावा कर सकेगा. ऐसे में उसे तकनीकी रूप से सिप्ला में 59.4% की हिस्सेदारी मिल जाएगी. हाल ही में खबर आई थी कि गुजरात की टोरेंट फार्मा सिप्ला की हिस्सेदारी खरीदने के लिए जेपी मॉर्गन के साथ काम कर रही है. इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया था कि दुनिया का सबसे बड़ा प्राइवेट इक्विटी फंड (Private Equity Fund) ‘ब्लैकस्टोन’ (Blackstone) Cipla में हिस्सेदारी के लिए बोली लगा सकता है. लेकिन Cipla ने इस खबर को खारिज कर दिया था.
टूट जाएगा 88 साल का रिश्ता
ब्लूमबर्ग के अनुसार, Cipla की डील पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि कंपनी की फाउंडर फैमिली के सदस्य डिमांड की गई कीमत को कम करेंगे या बिक्री पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला लेंगे. वैसे, यदि डील पूरी हो जाती है, तो करीब 88 साल बाद हामिद परिवार Cipla से बाहर हो जाएगा. इस दवा कंपनी की नींव ख्वाजा अब्दुल हामिद ने साल 1935 में रखी थी. 1972 में पिता के निधन के बाद यूसुफ हामिद और उनके भाई मुस्तफा ने कारोबार की कमान अपने हाथों में ली. यूसुफ हामिद ने एड्स जैसी बीमारियों के लिए कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की पेशकश करते हुए बड़ी दवा कंपनियों को कड़ी टक्कर दी. आज के समय में राजस्व के हिसाब से CIpla देश की तीसरी सबसे बड़ी जेनेरिक दवा कंपनी है. यूसुफ हामिद इस समय सिप्ला के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष हैं और वह 33.47% हिस्सेदारी बेचकर कंपनी से बाहर निकलना चाहते हैं.
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