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चाइनीज लोन ऐप केस में ED की कार्रवाई, इन कंपनियों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी के दौरान मर्चेंट आईडी और चीन के लोगों की ओर से नियंत्रित संस्थाओं के बैंक खातों में रखे करीब 17 करोड़ रुपए जब्त किए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
चाइनीज लोन ऐप से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रडार पर कई कंपनियां हैं. इसी सिलसिले में ऑनलाइन पेमेंट गेटवे- Razorpay, Paytm, Cashfree के बेंगलुरु स्थित छह ठिकानों पर छापेमारी की गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में ED के हवाले से बताया गया है कि शुक्रवार को शुरू हुई छापे की कार्रवाई अब भी जारी है.
ऐसे फंसाते हैं जाल में
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी के दौरान मर्चेंट आईडी और चीन के लोगों की ओर से नियंत्रित संस्थाओं के बैंक खातों में रखे करीब 17 करोड़ रुपए जब्त किए हैं. ED ने बताया कि चाइनीज लोन ऐप से जुड़ीं संस्थाओं का काम करने का तरीका यह है कि वे भारतीय लोगों के जाली दस्तावेजों का उपयोग कर उन्हें डमी निदेशक बनाते हैं. इन संस्थाओं को चीन के व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. ये संस्थाएं अलग-अलग मर्चेंट आईडी, पेमेंट गेटवे / बैंकों के साथ रखे गए खातों के माध्यम से अवैध व्यवसाय कर रही थीं.
होती है जबरन वसूली
ईडी के मुताबिक यह जांच बेंगलुरु के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज की गईं 18 FIR पर आधारित है. यह एफआईआर कई संस्थाओं / व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई हैं. आरोप है कि मोबाइल ऐप के माध्यम से छोटी राशि का लोन लेने वालों से जबरन वसूली की जाती है और उनका उत्पीड़न किया जाता है. ईडी ने बताया कि रेजरपे प्राइवेट लिमिटेड, कैशफ्री पेमेंट्स, पेटीएम पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड और चीनी व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित या संचालित संस्थाओं के परिसरों को तलाशी अभियान में शामिल किया गया है.
कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
चाइनीज लोन ऐप मामले को लेकर कांग्रेस केंद्र सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा चुकी है. पार्टी के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने हाल ही में कहा था कि जनवरी और फरवरी 2021 के बीच की गई एक जांच में पाया गया कि प्ले स्टोर पर 1,100 से अधिक डिजिटल लोन ऐप उपलब्ध हैं. आरबीआई ने स्वीकार किया है कि कम से कम 600 ऐसे ऐप अवैध रूप से काम कर रहे थे. RBI के मुताबिक, 2017 से 2020 के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर्ज में 12 गुना का उछाल आया है. हमारे देश में कई लोगों ने इन लोन ऐप्स द्वारा ब्लैकमेलिंग के कारण आत्महत्या कर ली हैं, लेकिन केंद्र सरकार चुप है.
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