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भारतीय स्टील दिग्गजों पर सीसीआई की सख्त नजर, कथित कार्टेलाइजेशन की जांच तेज

सीसीआई की यह जांच भारतीय स्टील उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है. अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो कंपनियों को भारी आर्थिक दंड और बाजार में प्रतिस्पर्धा की कमी के गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने स्टील सेक्टर में कथित कार्टेलाइजेशन के मामलों की जांच तेज कर दी है. यह जांच प्रमुख स्टील कंपनियों द्वारा मूल्य निर्धारण में आपसी तालमेल और उत्पादन में समन्वित कटौती के आरोपों पर केंद्रित है. मीडिया द्वारा देखी गई एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुछ सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनियां इस जांच के दायरे में हैं.

टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, सेल और आरआईएनएल जांच के घेरे में

रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) ने कई वर्षों तक अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ संवेदनशील मूल्य योजनाएं साझा कीं और आपूर्ति में सामूहिक रूप से बदलाव किए. यह कथित गतिविधियां 2018 से 2023 के बीच की बताई जा रही हैं.

व्हाट्सऐप ग्रुप चैट और आंतरिक दस्तावेज बने जांच का आधार

जांच के दौरान सीसीआई ने आंतरिक दस्तावेजों, मूल्य निर्धारण से जुड़े आंकड़ों और उद्योग से जुड़े छापों के दौरान जब्त किए गए दर्जनों व्हाट्सऐप ग्रुप चैट्स का विश्लेषण किया. इनमें “Friends of Steel” और “Steel Live Market” जैसे ग्रुप शामिल हैं. जांचकर्ताओं ने इन चर्चाओं को बाद में किए गए मूल्य संशोधनों और उत्पादन फैसलों से जोड़कर देखा.

बाजार पर गहरा असर डाल सकती है जांच

उद्योग परामर्श संस्थाओं के अनुसार, जांच के दायरे में आई ये चारों कंपनियां मिलकर भारत के कुल स्टील बाजार का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करती हैं. ऐसे में यदि सीसीआई की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर पूरे स्टील उद्योग पर पड़ सकता है.

भारी जुर्माने का खतरा, कंपनियों से मांगा गया जवाब

यह जांच हाल के वर्षों में भारतीय स्टील उद्योग से जुड़ी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा-विरोधी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है. यदि सीसीआई इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि कंपनियों ने मिलकर प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियां की हैं, तो प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत उन पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है. कानून के अनुसार, कंपनियों पर संबंधित वर्षों के मुनाफे का तीन गुना या टर्नओवर का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

कंपनियों की प्रतिक्रिया

टाटा स्टील ने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इनकार किया है और कहा है कि उसके मूल्य निर्धारण पूरी तरह से बाजार परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से तय किए जाते हैं. वहीं, जेएसडब्ल्यू स्टील, सेल और आरआईएनएल की ओर से अब तक जांच को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

आने वाले महीनों में आ सकता है अंतिम फैसला

सीसीआई की अंतिम रिपोर्ट और किसी भी संभावित कार्रवाई को लेकर फैसला आने वाले महीनों में अपेक्षित है. तब तक यह मामला भारतीय स्टील उद्योग और निवेशकों की नजरों में बना रहेगा.

 


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