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इस कंपनी ने एक-दो नहीं पूरे 19 बैंकों के साथ की करोड़ों की धोखाधड़ी
सीबीआई ने एक ऐसी कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिसने 19 बैंकों के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
बैंकों से धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. ट्रांसपोर्टेशन बिजनेस से जुड़ी एक कंपनी ने एक -दो नहीं बल्कि 19 बैंकों के साथ कथित रूप से धोखाधड़ी को अंजाम दिया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में आरोपी कंपनी IL&FS Transportation Networks (ITNL) और उसके निदेशकों के खिलाफ केस दर्ज किया है. आरोप है कि इस कंपनी ने 2016 से 2018 के बीच 19 बैंकों से 6,524 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया.
इन बैंकों को लगाई चपत
जानकारी के मुताबिक, IL&FS Transportation ने जिन बैंकों के साथ धोखाधड़ी की, उनमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (BOI), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एक्सिस बैंक और यस बैंक भी शामिल हैं. बता दें कि IL&FS ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क, IL&FS की सहायक कंपनी है, जिसने 2018 में बैंकरप्सी के लिए आवेदन किया था. इस मामले में केनरा बैंक द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी. बैंक की SBI से की गई शिकायत में कहा गया है कि कंपनी द्वारा 6,524 करोड़ रुपए से अधिक के सार्वजनिक धन का गबन किया गया और इस तरह सभी लेंडर्स यानी उधारदेने वालों को धोखा दिया गया है. आरोपी वाइट कॉलर क्रिमिनल हैं और कानून की पेचीदगियों को अच्छी तरह से जानते हैं. उन्हें पता है कि कानून के शिकंजे से खुद को कैसे बचाना है.
इस तरह हुआ खुलासा
FIR में बताया गया है कि इस मामले का खुलासा तब हुआ जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribuna) ने 2018 में नए निदेशक मंडल की नियुक्ति की, जिसने पैरेंट कंपनी IL&FS का चार्ज अपने हाथों में लिया. FIR में आगे कहा गया है कि ग्रांट थॉर्टन ने IL&FS और उसकी 348 ग्रुप कंपनियों का फोरेंसिक ऑडिट किया था. जिसमें पाया गया कि खर्चों के लिए रिपोर्टिंग प्रावधानों में संभावित अनियमितताएं थीं, जिसका कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है. IL&FS ने कथित तौर पर अपनी आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताया, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति की सही तस्वीर सामने नहीं आ सकी.
बड़े पैमाने पर फंड ट्रांसफर
FIR में यह भी कहा गया है कि IL&FS ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क ने बिना अकाउंटिंग या कंपनी सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड दर्ज किए बिना बड़े पैमाने पर फंड ट्रांसफर किया. ITNL और ग्रुप की अन्य कंपनियों के बीच सर्कुलर ट्रांजैक्शन की अनुमति के लिए कमर्शियल पेपर की व्यवस्था की गई. इसके अलावा, यह भी सामने आया कि सब-कांट्रेक्टर्स से फेक कोटेशन ली गई और टायर विक्रेता के रूप में पंजीकृत एक वेंडर से 459 टन स्टील खरीदते समय गलत खर्च किए गए.
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