SBI को लेकर CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, सरकार पर भी सवाल

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विभाग ने पूंजी डाले जाने से पहले अपने मानकों के तहत पूंजी जरूरत का आकलन नहीं किया.

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Tuesday, 28 March, 2023
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देश की सबसे बड़ी सरकारी बैंक 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया' (SBI) को लेकर कैग ने अपनी रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है. कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने बिना मांगे ही SBI को 8800 करोड़ रुपए दिए थे. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विस (DFC) की तरफ से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को ये रकम बिना मांगे ही दी गई थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक की ओर से वित्त वर्ष 2018 में मांग किए बिना ही उसे 8800 करोड़ रुपए कैपिटलाइजेशन एक्सरसाइज के रूप में दिए गए थे.

संसद में पेश हुई रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि DFC ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डाले जाने की पहल के तहत वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को 8,800 करोड़ रुपए दिये थे. जबकि SBI ने इस राशि की मांग नहीं की थी. कैग की यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई है. कैग ने मार्च, 2021 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में कहा कि वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विभाग ने पूंजी डाले जाने से पहले अपने मानकों के तहत पूंजी जरूरत का आकलन नहीं किया.

नहीं किया गया आकलन
कैग ने केंद्र सरकार (आर्थिक और सेवा मंत्रालयों) पर 2023 की रिपोर्ट में कहा है कि वित्तीय सेवा विभाग (DFC) ने 2017-18 में 8,800 करोड़ की पूंजी एसबीआई में डाली. यह राशि देश के सबसे बड़े बैंक में कर्ज वृद्धि के मकसद से डाली गई थी, हालांकि इसकी कोई मांग नहीं की गई थी. विभाग ने पूंजी डालने से पहले अपने मानदंडों के तहत पूंजी जरूरतों का आकलन नहीं किया. 

RBI के मानदंड नहीं माने 
रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में पूंजी डालते समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित मानदंडों से भी आगे बढ़कर राशि जारी की. आरबीआई ने पहले ही देश में बैंकों को लेकर एक प्रतिशत की अतिरिक्त पूंजी आवश्यकता निर्धारित की थी. इसके परिणामस्वरूप 7,785.81 करोड़ रुपए का अतिरिक्त पूंजी प्रवाह हुआ था.


बजाज ऑटो का मुनाफा 46% उछला, रिकॉर्ड एक्सपोर्ट और घरेलू मांग से पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन

जून तिमाही में राजस्व 65% बढ़कर ₹21,689 करोड़ पहुंचा. घरेलू और निर्यात बाजार में रिकॉर्ड बिक्री से कंपनी ने बनाया नया कीर्तिमान, विशेषज्ञों ने आगे भी सकारात्मक रुख जताया.

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Tuesday, 21 July, 2026
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दोपहिया और तिपहिया वाहन निर्माता बजाज ऑटो (Bajaj Auto) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं. जून तिमाही में कंपनी के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 46% बढ़ोतरी दर्ज हुई है. जबकि परिचालन से होने वाला राजस्व 65% की तेज बढ़ोतरी के साथ 21,689 करोड़ रुपये रहा. रिकॉर्ड एक्सपोर्ट, घरेलू बाजार में मजबूत मांग और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स ने कंपनी के प्रदर्शन को नई ऊंचाई पर पहुंचाया.

खर्च बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर नहीं पड़ा असर

कंपनी ने मंगलवार को जारी नतीजों में बताया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान उसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 3,225.63 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 45.9% अधिक है. परिचालन से राजस्व बढ़कर 21,688.83 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कुल आय 22,376.69 करोड़ रुपये रही, जिसमें 687.86 करोड़ रुपये की अन्य आय भी शामिल है.

तिमाही के दौरान कंपनी का कुल खर्च 68% बढ़कर 17,949.85 करोड़ रुपये हो गया. कच्चे माल और कंपोनेंट की लागत बढ़कर 13,261.30 करोड़ रुपये रही, जबकि कर्मचारी लाभ पर खर्च भी बढ़कर 1,387.09 करोड़ रुपये हो गया. इसके बावजूद बेहतर कीमत, अनुकूल प्रोडक्ट मिक्स, विदेशी मुद्रा से हुई कमाई और लागत नियंत्रण के चलते कंपनी ने मजबूत लाभप्रदता बनाए रखी.

स्टैंडअलोन कारोबार में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन

स्टैंडअलोन आधार पर बजाज ऑटो का राजस्व 37% बढ़कर रिकॉर्ड 17,244 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी ने बताया कि इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक वाहनों, घरेलू और निर्यात बाजारों के साथ-साथ दोपहिया और तिपहिया दोनों श्रेणियों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई.

कंपनी का स्टैंडअलोन EBITDA पहली बार 3,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जबकि कर पश्चात लाभ (PAT) 2,983 करोड़ रुपये रहा. दोनों आंकड़ों में सालाना आधार पर 40% से अधिक की वृद्धि हुई.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा एक्सपोर्ट

बजाज ऑटो ने कहा कि जून तिमाही में कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक तिमाही एक्सपोर्ट वॉल्यूम और एक्सपोर्ट रेवेन्यू दर्ज किया. पहली बार निर्यात 7 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गया.

लैटिन अमेरिका में मजबूत मांग, अफ्रीका में तेज वृद्धि और खासतौर पर नाइजीरिया में कारोबार तीन गुना होने से कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ा फायदा मिला. वहीं, कमर्शियल वाहनों के निर्यात में भी करीब 70% की वृद्धि दर्ज की गई.

घरेलू बाजार में भी सभी प्रमुख सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ रही, जिससे घरेलू राजस्व 26% बढ़ा. कंपनी ने कहा कि आने वाले समय में 125cc-160cc मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो में अपग्रेड से उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत होगी.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों के अनुसार, बजाज ऑटो के पहली तिमाही के नतीजे बाजार के अनुमान से बेहतर रहे हैं. मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ और बेहतर मार्जिन ने सप्लाई चेन और इनपुट लागत की चुनौतियों के बावजूद प्रदर्शन को सहारा दिया. उनका मानना है कि EV और एक्सपोर्ट कारोबार को लेकर मैनेजमेंट की आगे की रणनीति निवेशकों के लिए अहम रहेगी.

विशेषज्ञों ने कहा कि घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में मजबूत मांग के चलते कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि, उन्होंने निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में मार्जिन, मानसून के असर और मांग की स्थिरता पर नजर रखने की सलाह दी.

नतीजों के बाद बजाज ऑटो का शेयर शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. हालांकि कारोबार के समय करीब 1% की गिरावट रही. इसके बावजूद वर्ष 2026 में अब तक कंपनी का शेयर करीब 9% का रिटर्न दे चुका है.
 


ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ा निवा बूपा, साइना-मीराबाई के साथ लॉन्च किया 'सेटबैक से कमबैक तक' अभियान

इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों और आम लोगों की उन प्रेरक कहानियों को सामने लाना है, जिन्होंने बीमारी, चोट या अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों से उबरकर दमदार वापसी की.

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Tuesday, 21 July, 2026
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निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के ऑफिशियल हेल्थ इंश्योरेंस प्रिंसिपल पार्टनर बनने की घोषणा की है. इसके साथ कंपनी ने 'सेटबैक से कमबैक तक' नाम से नया ब्रांड अभियान भी शुरू किया है, जो स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बाद दोबारा मजबूत होकर खड़े होने वाले लोगों के जज्बे को सलाम करता है. कंपनी का कहना है कि खिलाड़ियों की असली जीत केवल मेडल तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी शुरुआत चोट, असफलता और मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की प्रक्रिया से होती है. यही कहानी हर उस व्यक्ति की भी है, जो गंभीर बीमारी, दुर्घटना या बड़ी सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में लौटता है.

साइना और मीराबाई बनेंगी अभियान का चेहरा

इस अभियान में ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल तथा ओलंपिक पदक विजेता, विश्व चैंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू को साथ लाया गया है. दोनों खिलाड़ियों की संघर्ष और वापसी की कहानी के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि चुनौतियां किसी विजेता की पहचान नहीं, बल्कि उनसे उबरने का साहस ही उसकी असली ताकत है.

निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के डिजिटल बिजनेस यूनिट के डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर निमिष अग्रवाल ने कहा कि ग्लासगो 2026 के साथ यह साझेदारी कंपनी के उस विश्वास को मजबूत करती है कि स्वास्थ्य संबंधी झटके के बाद भी लोग आत्मविश्वास के साथ नई शुरुआत कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि 'सेटबैक से कमबैक तक' अभियान उन लाखों लोगों को समर्पित है, जो कठिन स्वास्थ्य परिस्थितियों से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को फिर से संवारते हैं.

ग्राहक-केंद्रित प्रोडक्ट रणनीति और इनोवेशन से 2.5 गुना बढ़ी मार्केट हिस्सेदारी

निमिष अग्रवाल ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में बताया कि निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस ने पिछले छह वर्षों में अपनी मार्केट हिस्सेदारी में बड़ा सुधार दर्ज किया है. कंपनी के अनुसार, 5-6 साल पहले उसकी मार्केट हिस्सेदारी करीब 4% थी, जो अब बढ़कर पहली तिमाही के नतीजों के मुताबिक करीब 11% हो गई है. यानी इस अवधि में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगभग 2.5 गुना बढ़ी है. उन्होंने बताया कि इस वृद्धि के पीछे ग्राहक-केंद्रित प्रोडक्ट रणनीति और इनोवेशन की अहम भूमिका रही है. कंपनी का फोकस केवल इंश्योरेंस प्रोडक्ट बेचने पर नहीं, बल्कि ग्राहकों की जरूरतों के आधार पर समाधान तैयार करने पर है. इसी रणनीति के तहत कंपनी ने ऐसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट पेश किए हैं, जो ग्राहकों की बदलती जरूरतों और मेडिकल महंगाई को ध्यान में रखते हैं.

निमिष अग्रवाल ने आगे बताया कि कंपनी ने हाल ही में ReAssure 3.0 लॉन्च किया है, जिसमें अनलिमिटेड सब-इंश्योरेंस की सुविधा दी गई है. इससे पहले हेल्थ इंश्योरेंस में सब-इंश्योरेंस की सीमा आमतौर पर 5 लाख, 10 लाख या 15 लाख रुपये तक होती थी. बढ़ती मेडिकल महंगाई को देखते हुए कंपनी ने ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया है, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक पर्याप्त हेल्थ कवर मिल सके.

उन्होंने क्लेम सेटलमेंट को अपनी प्रमुख ताकत बताया है. उन्होंने कहा कि कंपनी 30 मिनट में कैशलेस क्लेम की शुरुआती मंजूरी देने का दावा करती है और वर्तमान में इस प्रक्रिया में औसत समय करीब 19 मिनट है. कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक के जरिए इस समय को और कम करने पर काम कर रही है.

कंपनी के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में भरोसा सबसे अहम फैक्टर है और इसके लिए वह तीन प्रमुख क्षेत्रों- ग्राहक संवाद, निरंतर सेवा और तेज क्लेम सेटलमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रही है. कंपनी का मानना है कि बेहतर प्रोडक्ट और आसान क्लेम प्रक्रिया के जरिए वह बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है.

साइना नेहवाल ने कही यह बात

साइना नेहवाल ने कहा कि लोग अक्सर खिलाड़ियों की जीत और मेडल को याद रखते हैं, लेकिन असली लड़ाई कोर्ट के बाहर लड़ी जाती है. चोट केवल शरीर की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य की भी परीक्षा लेती है. उन्होंने कहा कि कमबैक की शुरुआत मैदान में वापसी से पहले ही हो जाती है और असली चैंपियन रिकवरी के दौरान तैयार होते हैं.

डिजिटल और सोशल मीडिया पर भी पहुंचेगा अभियान

कंपनी ने बताया कि 'सेटबैक से कमबैक तक' अभियान को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, ताकि ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले देशभर में स्वास्थ्य, रिकवरी और मजबूत वापसी का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके.


पेटीएम की दमदार वापसी, मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ पहुंचा; आय में भी तेज उछाल

वन97 कम्युनिकेशंस का परिचालन राजस्व 28% बढ़ा, पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस में मजबूत ग्रोथ से मिली रफ्तार

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Tuesday, 21 July, 2026
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देश की प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 79 फीसदी बढ़कर 220 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी के मुताबिक, पेमेंट बिजनेस और फाइनेंशियल सर्विसेज में मजबूत वृद्धि के चलते मुनाफे में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

कंपनी ने सोमवार को जून तिमाही के नतीजे जारी किए. इस दौरान वन97 कम्युनिकेशंस की कुल आय 22 फीसदी बढ़कर 2,630 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,159 करोड़ रुपये थी.

परिचालन राजस्व और EBITDA में भी मजबूत बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,448 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी का EBITDA पिछले साल के मुकाबले 182 फीसदी की तेज बढ़त के साथ रिकॉर्ड 203 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसके साथ ही EBITDA मार्जिन बढ़कर 8 फीसदी हो गया.

कंपनी ने बताया कि मर्चेंट पेमेंट वॉल्यूम में सालाना आधार पर 31 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज से होने वाली आय में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

GMV 31% बढ़ा, नेट पेमेंट रेवेन्यू में भी तेजी

वन97 कम्युनिकेशंस के अनुसार, जून तिमाही में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंट वैल्यू (GMV) सालाना आधार पर 31 फीसदी बढ़कर 7.1 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, नेट पेमेंट रेवेन्यू में भी 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 601 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी ने कहा कि पेमेंट इकोसिस्टम में बढ़ती गतिविधियों और फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस के विस्तार से प्रदर्शन को मजबूती मिली है.

पेटीएम शेयर सपाट बंद

नतीजों के दिन शेयर बाजार में गिरावट के बीच पेटीएम के शेयर में ज्यादा बदलाव नहीं देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 0.04 फीसदी की गिरावट के साथ 1,348 रुपये पर बंद हुआ. सोमवार को शेयर 1,355 रुपये पर खुला था और कारोबार के दौरान 1,357.15 रुपये के ऊपरी स्तर और 1,335.10 रुपये के निचले स्तर तक गया. कंपनी के शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,407 रुपये है.
 


FTCCI के अध्यक्ष बने केके माहेश्वरी, श्रीनिवास गरिमेला को मिली वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी

109 साल पुराने फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) ने नई नेतृत्व टीम का किया चुनाव

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Tuesday, 21 July, 2026
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भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित उद्योग संगठनों में शामिल फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FTCCI) ने कृष्ण कुमार माहेश्वरी (केके माहेश्वरी) को अध्यक्ष और श्रीनिवास गरिमेला को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना है. बुधवार को हैदराबाद के रेड हिल्स स्थित FTCCI कार्यालय में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में सदस्यों ने दोनों पदाधिकारियों का चुनाव किया.

केके माहेश्वरी ने आर. रवि कुमार का स्थान लिया है और बुधवार से ही उन्होंने पदभार संभाल लिया. इससे पहले 2025-26 के दौरान केके माहेश्वरी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और श्रीनिवास गरिमेला वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत थे.

दोनों नए पदाधिकारी कई वर्षों से FTCCI से जुड़े हुए हैं और विभिन्न भूमिकाओं में संगठन को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने नीति निर्माण, औद्योगिक विकास, व्यापार संवर्धन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. दोनों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा.

चार दशक से अधिक का कारोबारी अनुभव रखते हैं केके माहेश्वरी

कृष्ण कुमार माहेश्वरी एक अनुभवी उद्यमी और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं. उनके पास चार दशक से अधिक का कारोबारी अनुभव है. वह विविध वित्तीय सेवा कंपनी CIL Securities Limited के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. इसके अलावा वह CIL ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं.

ग्रुप की प्रमुख कंपनी CIL Securities Limited बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया की सदस्य है. कंपनी रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट, मर्चेंट बैंकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के रूप में भी सेवाएं प्रदान करती है.

माहेश्वरी ने कई उद्योग संगठनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह एसोसिएशन ऑफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) के पूर्व अध्यक्ष और निदेशक तथा डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं.

वह तेलंगाना स्टेट टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया वेटरन्स कमेटी के चेयरमैन भी हैं.

समावेशी विकास में विश्वास रखने वाले माहेश्वरी चिन्नीलाल जाजू चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलों का समर्थन करते हैं. वह गिरिजन विकास केंद्र, वेदुरुनगरम के उपाध्यक्ष भी हैं, जो आदिवासी बच्चों के लिए शैक्षणिक संस्थान संचालित करता है.

श्रीनिवास गरिमेला बने वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी

नवनिर्वाचित वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास गरिमेला एक अनुभवी उद्यमी, उद्योगपति और रणनीतिक सलाहकार हैं. उन्हें मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, लॉजिस्टिक्स और फूड टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है.

वह HETC Foods Pvt. Ltd. में निदेशक और रणनीतिक सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. यह कंपनी स्प्राउटिंग रिसर्च और फूड साइंस के क्षेत्र में काम करती है. इसके अलावा वह जापानी बहुराष्ट्रीय कंपनी Daifuku की भारतीय सहायक कंपनी Daifuku Intralogistics India Pvt. Ltd. के चेयरमैन हैं.

गरिमेला ने Vega Conveyors & Automation Ltd. की सह-स्थापना की थी, जो Daifuku द्वारा अधिग्रहण से पहले भारत की प्रमुख ऑटोमेशन और मटेरियल हैंडलिंग कंपनियों में शामिल हो गई थी.

वह एक दशक से अधिक समय से FTCCI से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और मैनेजिंग कमेटी सदस्य तथा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमेटी के चेयरमैन के रूप में योगदान दे चुके हैं. वह MSME, मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा, उद्यमिता, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग के मजबूत समर्थक रहे हैं.

गरिमेला विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की अकादमिक परिषदों से भी जुड़े हैं और स्टार्टअप्स तथा युवा उद्यमियों को मार्गदर्शन देते हैं. वह उद्योग मंचों और शैक्षणिक संस्थानों में उद्यमिता, तकनीक अपनाने, नवाचार, सतत विकास और मेक इन इंडिया पहल पर नियमित रूप से विचार रखते हैं.

उद्योग और सरकार के बीच सहयोग मजबूत करने पर रहेगा फोकस: माहेश्वरी

चुनाव के बाद FTCCI अध्यक्ष केके माहेश्वरी ने कहा कि FTCCI ने एक सदी से अधिक समय में तेलंगाना और भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

उन्होंने कहा, "मेरा फोकस उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने, MSME क्षेत्र को समर्थन देने, निवेश को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और तेलंगाना के कारोबारों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने पर रहेगा. हम समावेशी और सतत विकास के लिए काम करते हुए उद्योग की मजबूत आवाज बने रहेंगे."

श्रीनिवास गरिमेला ने कहा कि भारत तकनीक, उद्यमिता और मैन्युफैक्चरिंग विकास के माध्यम से आर्थिक बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर में है.

उन्होंने कहा, "FTCCI हर आकार के व्यवसायों को समर्थन देना जारी रखेगा, नवाचार को बढ़ावा देगा, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगा, कौशल विकास पहलों को मजबूत करेगा और भविष्य के लिए तैयार उद्योगों के लिए अवसर पैदा करेगा. हम औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

नई नेतृत्व टीम से उम्मीद है कि वह व्यापार, उद्योग और आर्थिक विकास के लिए FTCCI की भूमिका को और मजबूत करेगी तथा उद्योग, सरकार और समाज के बीच एक भरोसेमंद सेतु के रूप में संगठन की स्थिति को आगे बढ़ाएगी.
 


नौवीं अनुसूची पर उठे सवाल: "कानूनी है, लेकिन जवाबदेह नहीं", 75 साल बाद पहले संविधान संशोधन की समीक्षा

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, एएसजी समेत पैनल के सदस्यों ने बेंगलुरु में आयोजित गोलमेज चर्चा में 1951 के उस संशोधन पर विचार किया, जिसने कानूनों को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा प्रदान की थी.

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Tuesday, 21 July, 2026
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भारत के संविधान में पहला संशोधन किए जाने के 75 साल बाद, शनिवार को कर्नाटक के कुछ प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ यहां एक असहज सवाल पर विचार करने के लिए एकत्र हुए: क्या संविधान में किए गए पहले ही बदलाव ने ऐसे कानूनों के लिए रास्ता खोल दिया, जिनका जवाब किसी अदालत के प्रति नहीं है?

संविधान (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित गोलमेज चर्चा का आयोजन जैन पीयू कॉलेज, वी.वी. पुरम में किया गया. इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े, कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.वी. चंद्रशेखर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीधर पोताराजू, के.जी. राघवन, उदय होला, जयना कोठारी और ए.पी.एस. अहलूवालिया समेत कई अन्य न्यायविद शामिल हुए.

ज्योत और गीतार्थ गंगा द्वारा जैन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) तथा एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बैंगलोर के सहयोग से आयोजित यह चर्चा ‘वसुधैव कुटुम्बकम की ओर 5.0 कॉन्क्लेव सीरीज’ के पहले लीगल प्रीकर्सर सत्र के रूप में आयोजित की गई.

संविधान लागू होने के 16 महीने के भीतर लागू किए गए पहले संशोधन के जरिए अनुच्छेद 31A और 31B जोड़े गए और नौवीं अनुसूची बनाई गई, एक ऐसा संवैधानिक सुरक्षा कवच, जिसमें ऐसे कानून रखे जा सकते थे, जिन्हें न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सके. पैनल के सदस्यों ने कहा कि यही व्यवस्था इस संशोधन की सबसे अधिक विवादित विरासत बनी हुई है.

वरिष्ठ अधिवक्ता उदय होला ने कहा, "एक बार जब आप किसी कानून को नौवीं अनुसूची में डाल देते हैं, तो अदालतें उसे छू नहीं सकतीं, भले ही वह अमान्य हो. यह पूरी तरह असंवैधानिक है. यही कारण है कि आई.आर. कोएल्हो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई प्रावधान मूल संरचना का उल्लंघन करता है, तो अदालतों के पास अब भी उसकी समीक्षा करने का अधिकार है और मुझे लगता है कि यही सही दृष्टिकोण है."

कामथ ने इस समस्या को कानून और न्याय के बीच टूटन के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा, "कोई व्यवस्था पूरी तरह कानूनी हो सकती है, लेकिन वह न्यायसंगत होने में विफल हो सकती है. नौवीं अनुसूची ने ऐसा स्थान बनाया, जिसमें यदि कोई कानून डाल दिया जाए तो उसे खुद को समझाने की जरूरत नहीं होती. यह कानूनी है, लेकिन जवाबदेह नहीं है." संस्कृत व्याकरणाचार्य पाणिनि के सूत्र ध्रुवमपाये अपादानम् का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "किसी गतिशील वस्तु का वर्णन करने के लिए आपको ऐसी चीज की जरूरत होती है जो गतिहीन हो. किसी चीज के गति करने को निर्धारित करने के लिए एक स्थिर बिंदु आवश्यक होता है."

यह सत्र जैनाचार्य युगभूषणसूरी जी महाराज, जो तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के 79वें उत्तराधिकारी हैं, के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया. उन्होंने 1951 की बहसों को व्यापक सभ्यतागत न्यायशास्त्र के संदर्भ में रखा. उन्होंने कहा, "शासन का उद्देश्य न्याय और सुरक्षा प्रदान करना है. इसलिए शासकीय प्राधिकरण को यह जिम्मेदारी निभाने के लिए शक्ति दी जाती है. पूर्ण शक्ति इस सिद्धांत का मूल रूप से विरोध करती है; यह अनैतिकता और अन्याय को बढ़ावा देती है."

चर्चाओं के साथ-साथ संविधान, प्रथम संशोधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक इंटरैक्टिव प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें "व्हाट इफ एआई वेयर द कॉन्स्टिट्यूशन" शीर्षक वाला प्रदर्शन भी शामिल था. इस प्रदर्शनी ने छात्रों और कानूनी पेशेवरों का काफी ध्यान आकर्षित किया.

यह श्रृंखला जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले ‘वसुधैव कुटुम्बकम की ओर 5.0 मेन कॉन्क्लेव, ध्रुव तत्वम्, टाइमलेस प्रिंसिपल्स’ की ओर अग्रसर है. अगला प्रीकर्सर सत्र आर्थिक क्षेत्र पर केंद्रित होगा, जो 8–9 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा. इसमें एस. गुरुमूर्ति, शौर्य डोभाल और सचिन चतुर्वेदी समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे.
 


NPCIL और ECIL की साझेदारी, भारत में विकसित होंगी स्वदेशी परमाणु तकनीकें

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती देने के लिए दोनों कंपनियों ने किया MoU पर हस्ताक्षर, कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम से लेकर साइबर सिक्योरिटी समाधान तक विकसित किए जाएंगे.

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
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भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) ने दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मौजूदा और आगामी परमाणु रिएक्टरों के लिए स्वदेशी तकनीकों का संयुक्त रूप से विकास करेंगी.

दोनों संस्थान परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अंतर्गत आते हैं. इस सहयोग का उद्देश्य भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है.

स्वदेशी परमाणु तकनीकों के विकास पर जोर

इस साझेदारी के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए स्वदेशी कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (C&I) सिस्टम, कंप्यूटर आधारित सिस्टम, न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन, ट्रेनिंग सिमुलेटर, साइबर सिक्योरिटी समाधान और अन्य उन्नत तकनीकों को विकसित किया जाएगा.

इसके अलावा, यह सहयोग मौजूदा परमाणु रिएक्टरों के लिए लंबे समय तक लाइफसाइकिल सपोर्ट उपलब्ध कराने, पुरानी हो रही तकनीकों के समाधान और परमाणु बेड़े में महत्वपूर्ण प्रणालियों के मानकीकरण में भी मदद करेगा.

आयात पर निर्भरता कम करने की पहल

NPCIL और ECIL की यह साझेदारी भारत के परमाणु बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी.

स्वदेशी तकनीकों के विकास और उन्हें वर्तमान व भविष्य की परमाणु परियोजनाओं में लागू करने से भारत का घरेलू परमाणु तकनीकी इकोसिस्टम मजबूत होगा. यह पहल देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और एक मजबूत व सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है.


अब बिना इंटरनेट भी होगा UPI पेमेंट, NPCI ला रहा NFC आधारित 'Tap-to-Pay' फीचर

रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए POS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना होगा.

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Tuesday, 21 July, 2026
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भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है. दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसी UPI सुविधा विकसित कर रहा है, जिससे इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी भुगतान किया जा सकेगा. नई व्यवस्था के तहत NFC (Near Field Communication) तकनीक की मदद से यूजर्स ऑफलाइन पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनल पर फोन टैप कर ₹2,000 तक का भुगतान कर सकेंगे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NPCI इस साल प्रमुख POS टर्मिनल निर्माता कंपनियों के डिवाइस का सर्टिफिकेशन शुरू कर सकता है. इसके बाद व्यापारी ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे. यह सुविधा खासतौर पर हवाई जहाज, भूमिगत मेट्रो और कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में उपयोगी होगी, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होती.

कैसे करेगा काम?

इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को पहले इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने UPI Lite वॉलेट में रकम लोड करनी होगी. इसके बाद NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन को POS मशीन पर टैप करते ही भुगतान हो जाएगा. ऑफलाइन ट्रांजैक्शन के लिए UPI PIN दर्ज करने की भी जरूरत नहीं होगी. POS टर्मिनल भुगतान की जानकारी अपने सिस्टम में सुरक्षित रखेगा और जैसे ही नेटवर्क उपलब्ध होगा, ट्रांजैक्शन को वेरिफिकेशन के लिए सर्वर पर भेज देगा.

POS कंपनियों को लेना होगा NPCI का सर्टिफिकेशन

रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए POS टर्मिनल बनाने वाली कंपनियों को NPCI से सर्टिफिकेशन लेना होगा. सर्टिफिकेशन मिलने के बाद कंपनियां अपने डिवाइस में इस फीचर को सक्षम कर सकेंगी. वहीं, बैंक और थर्ड-पार्टी UPI ऐप प्रदाता भी अपने ऐप में इस सुविधा को जोड़ने पर काम कर रहे हैं.

UPI Lite X का होगा विस्तार

NPCI ने सितंबर 2023 में UPI Lite X लॉन्च किया था, जिससे दो NFC-सक्षम स्मार्टफोन के बीच ऑफलाइन भुगतान संभव हुआ था. अब नए फीचर के जरिए इसी तकनीक को पहली बार POS टर्मिनलों तक विस्तारित किया जा रहा है. इससे व्यापारी भी बिना इंटरनेट के UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे.

कार्ड पेमेंट का मजबूत विकल्प बनेगा UPI

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा कार्ड आधारित 'टैप-टू-पे' और UPI के बीच मौजूद अंतर को काफी हद तक खत्म कर देगी. एयरलाइंस और अन्य ऑफलाइन वातावरण में जहां कार्ड पेमेंट का इस्तेमाल होता है, वहां अब UPI भी एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा.

जून में रिकॉर्ड UPI ट्रांजैक्शन

NPCI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में UPI के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 28.92 लाख करोड़ रुपये रहा. ऐसे में ऑफलाइन UPI पेमेंट की शुरुआत डिजिटल भुगतान को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
 


CDSL की साइबर सुरक्षा में बड़ी चूक, SEBI ने ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

जांच में पता चला कि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के कारण हमलावर करीब एक साल तक सिस्टम में मौजूद रहे और इससे शेयर बाजार की अहम सेवाएं कई घंटों तक प्रभावित हुईं.

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Tuesday, 21 July, 2026
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सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने साइबर सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (CDSL) पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए मालवेयर हमले की जांच के बाद की गई है. SEBI के मुताबिक, CDSL की साइबर सुरक्षा व्यवस्था में कई अहम कमियां थीं, जिनकी वजह से यह हमला इतना व्यापक असर डाल सका.

SEBI के आदेश के अनुसार, मालवेयर हमले के कारण CDSL की कई महत्वपूर्ण सेवाएं लंबे समय तक बाधित रहीं. सेटलमेंट प्रक्रिया करीब 46 घंटे तक प्रभावित रही, जबकि इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर सिस्टम लगभग 54.5 घंटे तक ठप रहा. रेगुलेटर ने कहा कि इस घटना का असर केवल CDSL तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे पूरे सिक्योरिटीज बाजार के संचालन पर असर पड़ा.

एक साल तक सिस्टम में मौजूद रहे हमलावर

जांच में सामने आया कि साइबर हमला अचानक नहीं हुआ था. SEBI के अनुसार, नवंबर 2021 में ही हमलावर CDSL के सर्वर तक पहुंच बनाने में सफल हो गए थे, लेकिन इस घुसपैठ का पता नवंबर 2022 में चला. यानी करीब एक साल तक सिस्टम में सेंध लगी रही और इसकी जानकारी तक नहीं हो सकी. रेगुलेटर ने यह भी कहा कि समय-समय पर साइबर सुरक्षा नियमों में दी गई छूट, लागू न किए गए नियामकीय निर्देश और जरूरी सुरक्षा उपायों की अनदेखी ने इस हमले की जमीन तैयार की.

जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां

SEBI की जांच में यह भी पाया गया कि CDSL ने 2021 में एक एडमिन अकाउंट बनाया था, जिसका पासवर्ड कभी एक्सपायर न होने के लिए सेट किया गया था. इसके अलावा, लगातार तीन बार गलत पासवर्ड दर्ज होने पर अकाउंट लॉक करने जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था भी लागू नहीं की गई थी.

रेगुलेटर के मुताबिक, इन कमियों को मालवेयर हमले के बाद जाकर दूर किया गया. SEBI ने अपने आदेश में कहा कि डिपॉजिटरी सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इसलिए किसी एक संस्थान की साइबर सुरक्षा में कमजोरी पूरे शेयर बाजार के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है. इसी को देखते हुए CDSL पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है.
 


पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ा दबाव, आज इन बड़े ट्रिगर्स पर रहेगी बाजार की नजर

सोमवार को BSE सेंसेक्स 442.93 अंक (0.57%) की गिरावट के साथ 77,708.52 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 95.80 अंक (0.39%) फिसलकर 24,238.50 के स्तर पर आ गया.

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Tuesday, 21 July, 2026
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भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है. सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए थे. ऐसे में आज निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, कच्चे तेल की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, कॉर्पोरेट घोषणाओं और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों पर रहेगी, जो पूरे दिन बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

घरेलू शेयर बाजार पर दिखा भू-राजनीतिक तनाव का असर

सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया. कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूट गया था, जबकि अंत में 442.93 अंक (0.57%) की गिरावट के साथ 77,708.52 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 95.80 अंक (0.39%) फिसलकर 24,238.50 के स्तर पर आ गया. डॉलर के मुकाबले रुपया भी 14 पैसे कमजोर होकर 96.44 पर बंद हुआ.

बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाया दबाव

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 11 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग शेयरों में देखने को मिला. Axis Bank और HDFC Bank के शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूट गए. इसके अलावा Maruti Suzuki, Kotak Mahindra Bank, Infosys और TCS में भी गिरावट दर्ज की गई.

वहीं दूसरी ओर Trent, Power Grid, NTPC, Bharti Airtel, SBI, UltraTech Cement, ICICI Bank, HCLTech, Sun Pharma और ITC जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली.

ब्रॉडर मार्केट ने दिखाया दम

मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार अपेक्षाकृत मजबूत रहा. निफ्टी मिडकैप 0.60 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 0.16 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा दबाव में रहे, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी PSU बैंक में अच्छी तेजी दर्ज की गई.

आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में InterGlobe Aviation (IndiGo), Redington, Ashiana Housing, Wanbury, Sammaan Capital, Gandhar Oil Refinery, Horizon Reclaim, Sterling Holiday Resorts और Shapoorji Pallonji Group से जुड़े कॉर्पोरेट अपडेट निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं.

इसके अलावा Bajaj Auto, Bandhan Bank, JSW Infrastructure, Mahindra & Mahindra Financial Services, Adani Energy Solutions, Adani Total Gas, Indian Hotels, CRISIL, TVS Motor और कई अन्य कंपनियां आज पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी करेंगी, जिनका असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार के रुख पर भी देखने को मिल सकता है.

कच्चे तेल और वैश्विक संकेतों पर नजर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. यदि कच्चे तेल में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव बरकरार रहता है, तो इसका असर आज भी भारतीय शेयर बाजार की चाल पर पड़ सकता है. ऐसे में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


LTCG Tax पर सरकार का बड़ा अपडेट, शेयर निवेशकों को नहीं मिलेगी राहत; टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं

सरकार को इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से बड़ी आय हुई है. वित्त वर्ष 2023-24 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2024-25 में LTCG कलेक्शन 72,249 करोड़ रुपये रहा था.

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Monday, 20 July, 2026
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शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म निवेश करने वाले निवेशकों को फिलहाल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. सरकार ने साफ कर दिया है कि इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगाए जाने वाले LTCG टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी.

LTCG टैक्स खत्म करने की कोई योजना नहीं

सरकार से पूछा गया था कि क्या रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए LTCG टैक्स को खत्म करने की कोई योजना है, ताकि शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सके और घरेलू निवेशकों को राहत मिल सके. इसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. उन्होंने बताया कि कैपिटल गेन्स टैक्स समेत टैक्स नीतियों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है. यह प्रक्रिया बजट और कानूनी बदलावों के तहत मैक्रो इकोनॉमिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जाती है.

दो साल में LTCG से सरकार ने जुटाए 2 लाख करोड़ रुपये

सरकार को इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से बड़ी आय हुई है. वित्त वर्ष 2023-24 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2024-25 में LTCG कलेक्शन 72,249 करोड़ रुपये रहा था. वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 से जुड़े असेसमेंट ईयर 2025-26 में यह बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी इन दो वर्षों में सरकार ने LTCG टैक्स के जरिए करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये जुटाए.

इक्विटी निवेश पर 12.5% LTCG टैक्स

लिस्टेड इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर फिलहाल 12.5 फीसदी है. यह टैक्स हर वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म मुनाफे पर लागू होता है. अगर किसी एसेट को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है.

घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स दर समान

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs), घरेलू निवेशकों और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स की दर समान है. पंकज चौधरी ने कहा कि इक्विटी में निवेश करने वाले FPIs पर भी 12.5 फीसदी LTCG टैक्स लागू है. हालांकि, इनकम टैक्स संशोधन अध्यादेश, 2026 के जरिए केवल सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में FPIs के निवेश से जुड़े टैक्स नियमों को तर्कसंगत बनाया गया है. उन्होंने बताया कि ऐसे निवेशों से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन को इनकम टैक्स से छूट दी गई है.

निवेशकों ने की थी LTCG और STCG में बदलाव की मांग

शेयर बाजार से जुड़े निवेशक और इंडस्ट्री लंबे समय से LTCG और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स की समीक्षा की मांग कर रहे हैं. मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार स्टॉक मार्केट निवेशकों की टैक्स से जुड़ी चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा था कि LTCG और STCG टैक्स समेत सभी मुद्दों पर मिले सुझावों पर सरकार विचार करेगी. हालांकि, फिलहाल सरकार ने LTCG टैक्स खत्म करने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है.