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2033 तक बनेगा भारत का हाई-स्पीड रोड नेटवर्क, सरकार ने पेश की ₹11 लाख करोड़ की योजना
भारत सरकार की यह हाई-स्पीड रोड नेटवर्क योजना न केवल देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाएगी, बल्कि लॉजिस्टिक कॉस्ट को भी कम करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत सरकार ने देश के हाई-स्पीड रोड नेटवर्क को व्यापक रूप से विस्तार देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है. इस योजना के तहत करीब 11 लाख करोड़ रुपये (125 बिलियन डॉलर) खर्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना और लॉजिस्टिक कॉस्ट को कम करना है.
2033 तक तैयार होगा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार की योजना 17,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क तैयार करने की है, जो ड्राइवरों को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से यात्रा करने की सुविधा देगा. यह पारंपरिक राजमार्गों की तुलना में तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा सुनिश्चित करेगा. प्रस्तावित नेटवर्क का लगभग 40% हिस्सा निर्माणाधीन है, जो 2030 से पहले तैयार हो सकता है. बाकी हिस्सों पर निर्माण कार्य 2028 तक शुरू होकर 2033 तक पूरा किया जाएगा.
वैश्विक स्तर पर भारत की रणनीति
भारत की यह योजना वैश्विक परिवहन रणनीतियों की तर्ज पर है. चीन अब तक 1.8 लाख किलोमीटर एक्सप्रेसवे बना चुका है, जबकि अमेरिका 75,000 किलोमीटर से अधिक इंटरस्टेट हाइवे का रखरखाव करता है. वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1.46 लाख किलोमीटर लंबा है, लेकिन इनमें से सिर्फ 4,500 किलोमीटर ही हाई-स्पीड मानकों पर खरे उतरते हैं. हालांकि भारत का एक्सप्रेसवे नेटवर्क चीन और अमेरिका जितना बड़ा नहीं है, लेकिन इसकी अत्यधिक समयबद्ध योजना और हाइब्रिड फाइनेंसिंग मॉडल निजी निवेश को आकर्षित करने में मददगार साबित हो रही है.
निजी कंपनियों की होगी भागीदारी
सरकार इस प्रोजेक्ट में निजी कंपनियों को भी शामिल करने जा रही है. 15% या उससे अधिक रिटर्न देने वाली परियोजनाओं को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के तहत बोली के लिए खोला जाएगा, जिससे निजी कंपनियां टोल वसूली के जरिए अपनी लागत निकाल सकेंगी. वहीं, कम मुनाफे वाली परियोजनाओं के लिए हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) अपनाया जाएगा, जिसमें सरकार निर्माण लागत का 40% अग्रिम भुगतान करती है. सूत्रों के मुताबिक, अभी अधिकतर निर्माण योजनाएं इसी मॉडल पर आधारित हैं.
सड़क मंत्रालय और NHAI की भूमिका
इस परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के पास है. NHAI ने मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष में निर्माण पर 2.5 ट्रिलियन रुपये खर्च किए, जो पिछले साल के मुकाबले 21% अधिक है. सरकार ने मार्च 2026 तक के वित्तीय वर्ष के लिए इस क्षेत्र का बजट बढ़ाकर 2.9 ट्रिलियन रुपये कर दिया है.
अडानी ग्रुप और विदेशी निवेशक भी करेंगे निवेश
इस मेगा प्रोजेक्ट में कई घरेलू और विदेशी कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है. ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट, ब्लैकस्टोन, मैक्वेरी ग्रुप और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड जैसे बड़े निवेशकों ने पूंजी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. वहीं, अडानी ग्रुप ने सड़कों समेत विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में 18.4 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है. विशेषज्ञों के अनुसार नीतिगत समर्थन, तेजी से बढ़ती मांग और बड़े पैमाने पर योजनाएं भारत को अगले तीन वर्षों में सैकड़ों अरब डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आकर्षित करने में सक्षम बनाएंगी.
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