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BW Security: पिछले एक दशक में सुरक्षा को लेकर चिंताओं में इजाफा हुआ है
पिछले दो दशक में हमारे देश में हुए कई आंतकी हमलों के बाद अब हमारी तैयारियों में बड़ा इजाफा हुआ है. हमने कई तरह के इंतजामों में इजाफा किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
BW Security 40under40 अवॉर्ड कार्यक्रम के पहले सेशन में सिक्योरिटी फील्ड के कई जानकारों ने भागीदारी की. किसी ने जहां एक ओर अहमदाबाद में हुए ब्लास्ट के बाद आए बदलावों को लेकर बताया तो किसी ने मेट्रो शहरों में सुरक्षा को लेकर बढ़ाए गए इंतजामों पर अपनी बात कही. इस सेशन में Eros Group के Group Chief Security Officer, ऋषि चौधरी, Accenture Solutions के CPP, VP - Global Assistance & Pro-tection (GAP), IndiaRegional Protective Services, पुण्यश्लोका पांडा, G4S Secure Solutions India की Manager-Risk & Integrated Security Solutions, आंचल सक्सेना, Fortis Healthcare Ltd-Shalimar Bagh, New Delhi के CSO, जितेन्द्र सिंह ने इस पैनल में भाग लिया. इस सेशन को Nokia के Head Personnel Security (Global), Col Shakti Rana ने चेयर किया.
बम ब्लास्ट के बाद कई तरह के बदलाव आए हैं
Fortis Healthcare Ltd-Shalimar Bagh, New Delhi के CSO, जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अहमदाबाद में 2008 में हुए बम ब्लास्ट के बारे में याद दिलाना चाहता हूं. दरअसल हुआ ये था कि अहमदाबाद बम ब्लास्ट के दौरान जब घायल हुए लोग हॉस्पिटल की ओर जा रहे थे तो उस दौरान वहां एक बम पहले से प्लांट किया हुआ था और बम ब्लास्ट हो गया. अब आप उस स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जिसमें अफरातफरी किस तरह से फैली होगी. जब कभी भी किसी भी अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ ज्यादा मरीजों को साथ लाया जाता है तो उससे तनाव और दबाव दोनों बढ़ जाते हैं.
मै उसी स्थिति को लेकर अपनी बात कहना चाहता हूं. 2008 को आज 16 साल हो चुके हैं और उस दौरान कई तरह के चेंज आ चुके हैं. NABL तब से लेकर अब तक कई तरह के बदलाव लेकर आ चुकी है. ये बदलाव इसी तरह डिजास्टर को लेकर भी आए हैं. जब कभी भी इस तरह के घटनाक्रम होते हैं तो अब ये सभी के लिए जरूरी हो गया है कि अस्पताल के सीनियर प्रबंधन से लेकर सभी डिपार्टमेंट के प्रमुख के लिए अस्पताल पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है. ऐसे समय में होने वाले क्राउड को मैनेज करने के लिए भी कई तरह के नियम बनाए गए हैं. इनमें पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम को सेटअप करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं.
केवल सीसीटीवी लगाने से अपराध नहीं रुकेगा
Accenture Solutions के CPP, VP - Global Assistance & Pro-tection (GAP), IndiaRegional Protective Services, पुण्यश्लोका पांडा ने कहा कि भीड़ हमेशा से ही एक सॉफ्ट टारगेट होता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो किसी मेट्रो सिटी में है या किसी दूसरे शहर में है. सबसे अहम सवाल ये है कि हम क्राउड मैनेजमेंट को लेकर किस तरह से काम करते हैं. ये एक तथ्यात्मक बात है कि जिन इलाकों में ज्यादा आबादी होती है वहां कम अपराध देखने को मिलते हैं. आप देख सकते हैं साउथ कोरिया और टोक्यो इसके उदाहरण हैं.
इसका कारण ये है कि वहां की सुरक्षा एजेंसिया अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हैं. दूसरी अहम बात ये भी है कि वहां सीसीटीवी का नेटवर्क जबरदस्त है. जब मैं सीसीटीवी लगाने की बात करता हूं तो वो सिर्फ सीसीटीवी लगाना नहीं है बल्कि सीसीटीवी ऐसा जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस हो. जो कि हमें अराजक तत्वों को पहचानने में मदद करे. अकेला सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम सही से काम नहीं कर सकता है. एक कहावत है कि अपराध का निर्णय कर चुके अपराधी को रोका नहीं जा सकता है, या तो वो डिले हो सकता है या उसे नहीं रोका जा सकता है. हम अपने शहर को सुरक्षा के साधनों से लैस कर सकते हैं लेकिन हम ये तय नहीं कह सकते हैं कि अपराध नहीं होगा.
रिस्क मैनेजमेंट सिक्योरिटी का अहम पहलू है
G4S Secure Solutions India की Manager-Risk & Integrated Security Solutions, आंचल सक्सेना ने कहा कि जब कभी भी हम फिजिकल सिक्योरिटी की बात करते तो है लेकिन हम रिस्क मैनेजमेंट को भूल जाते हैं. हम टियर 1,2, 3 शहरों के रिस्क के बारे में जानते तो हैं लेकिन हम उसे कैसे मैनेज करें ये नहीं समझ पाते हैं. अगर हम टियर 1 सिटी की बात करें तो दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर इसमें आते हैं और उसके रिस्क के बारे में तो समझ पाते हैं, लेकिन जब हम टियर 2 सिटी के बारे में बात करते हैं तो जानते हैं तो वहां बहुत तेजी से रिटेल सेक्टर में ग्रोथ हो रही है. इन शहरों में इंदौर, पुणे, भोपाल, और इस तरह के कई और शहर शामिल हैं. मैं देखती हूं कि पिछले कुछ सालों में इन शहरों की सुरक्षा में भी कई सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं.
लेकिन समस्या यहां आती है कि हम अपने सिस्टम को इंटीग्रेट कैसे करें, और उसका फायदा कैसे उठाएं. टियर वन शहरों में हम देखते हैं कि वहां साइबर सुरक्षा और टेरेरिज्म जैसी समस्याएं सामने आती हैं. जबकि टियर 2 सिटी में चोरी, मनी लॉड्रिंग जैसे मामले सामने आते हैं. जहां तक बात करें एक कॉरपोरेट के तौर पर तो वो भले ही कोई एजेंसी हो या सर्विस प्रोवाइडर हो, हम अभी रिस्क को असेस नहीं करते हैं. कई बार हम उस रिस्क को नजरंदाज कर देते हैं जो अभी नहीं है.कई बार किसी बड़े रिस्क के बारे में भी सोच नहीं पाते हैं. लेकिन हमें रिस्क मैनेजमेंट को लेकर सही से आंकलन करना चाहिए.
सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाना बेहद जरूरी
Eros Group के Group Chief Security Officer, ऋषि चौधरी ने कहा कि किसी भी शहर में फैक्ट्री, रेजीडेंशियल सोसाइटी, कमर्शियल एक्टिविटी से लेकर कई तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. अगर किसी शहर के ये सभी स्टेकहोल्डर सुरक्षित हैं तो हम ये कह सकते हैं कि वो शहर सुरक्षित है. पिछले कुछ समय में आतंकवाद से लेकर प्राकृतिक आपदा के रिस्क में इजाफा हुआ है, शहरों में जो हम देख सकते हैं जो घटनाएं पिछले कुछ समय में हुई है इनमें चेन्नई में आई बाढ़, मुंबई अटैक और कोरोना बीमारी जैसी परेशानी शामिल हैं. कोविड ने सभी तरह की इंडस्ट्री को लेकर समस्या में इजाफा किया है.
अब वो कंपनी के बिजनेस प्लान हो, उनकी निरंतरता हो, या उनके विकास को लेकर दूसरे प्लान हो. फिजिकल थ्रेड एक बड़े पैमान पर फाइनेंशियल नुकसान पहुंचाता है. आज ये सभी संगठनों के लिए फिजिकल थ्रेड को लेकर रणनीति बनाने से लेकर उसका समाधान तलाशना सभी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. हम बतौर चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर, सिक्योरिटी डॉरेक्टर, सिक्योरिटी प्रोफेशनल होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने मैनेजमेंट के साथ काम करें और सुरक्षा को लेकर और पुख्ता प्लान बनाएं जिससे संपत्ति और इंसानी जान की रक्षा की जा सके.
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