BW Businessworld Latest Issue: ग्लोबल बॉन्ड मार्केट से भारतीय स्टॉक्स को मिल रहा ये मैसेज!

BW बिजनेसवर्ल्ड मैगजीन का लेटेस्ट एडिशन आ चुका है और इस एडिशन में कई प्रमुख मुद्दों पर गहन रूप से चर्चा की गई है.

Last Modified:
Tuesday, 14 November, 2023
BW Businessworld Latest Issue

18 नवंबर 2023 को BW बिजनेसवर्ल्ड (BW Businessworld) का लेटेस्ट एडिशन आने वाला है. इस एडिशन में अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा प्रमुख ब्याज दरों पर लिए गए फैसले से भारतीय स्टॉक्स की कीमतों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में गहन रूप से चर्चा की गई है. इसके साथ ही फेडरल रिजर्व के फैसले से ग्लोबल बॉन्ड मार्केट पर पड़ने वाले प्रभावों और मार्केट से मिल रहे गिरावट के संदेश के बारे में भी बात की जा रही है. 

स्टॉक मार्केट की दिशा
BW बिजनेसवर्ल्ड (BW Businessworld) मैगजीन के इस एडिशन में इंडस्ट्री के जाने-माने दिग्गजों के द्वारा लिखे गए जबरदस्त लेख शामिल हैं और साथ ही एक्सक्लूजिव इंटरव्यू और देश के व्यवसाय पर प्रकाश डालने वाले शानदार फीचर लेख भी शामिल हैं. मैगजीन की कवर स्टोरी में भारत के स्टॉक की कीमतों की दिशा के बारे में विशेष रूप से चर्चा की गई है. तेल की कीमतों से लग रहे झटके, भू-राजनैतिक चिंताओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों की बदौलत अक्टूबर में देश के प्रमुख स्टॉक बाजार यानी BSE और NSE के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली थी. मैगजीन के इस एडिशन में मौजूद एक लेख में 2020 से शुरू हुई स्टॉक मार्केट की जबरदस्त दौड़ के थमने के बारे में बात की गई है. मैगजीन के इस एडिशन में मार्केट में मौजूद ट्रेंड की जांच की गई है और स्टॉक मार्केट की लगातार जारी दौड़ पर अब रोक क्यों लग सकती है इस बारे में भी मैगजीन में गहन रूप से चर्चा की गई है. दुनिया भर में जारी क्षेत्रीय विवादों और अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा इन्फ्लेशन से लड़ने के लिए उठाये जा रहे कदम भी भारतीय मार्केट की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं. 

अर्बन ट्रेवल को बदलेंगे
वित्तीय मार्केट की जांच के साथ-साथ मैगजीन के इस एडिशन में भारत में बढ़ रहे अर्बन ट्रांसपोर्टेशन के परिदृश्य और उसकी वजह से हवा, सड़क और रेल यात्राओं पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी गहन रूप से चर्चा की गई है. मैगजीन में केंद्रीय एविएशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक एक्सक्लूजिव इंटरव्यू भी शामिल है और मैगजीन में भारत के एविएशन क्षेत्र के बारे में भी बात की गई है. मैगजीन में एक फीचर भी मौजूद है जो नमो भारत ट्रेन की मदद से लाये गए बदलावों के विषय में बात करता है. इतना ही नहीं, मैगजीन के इस एडिशन में NCRTC के MD विनय कुमार सिंह से की गई खास बातचीत भी मौजूद है. 

वित्तीय एक्सीलेंस को मिली पहचान
मैगजीन के एक विशेष हिस्से में नौजवान CFOs द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया है. BW CFO वर्ल्ड फाइनेंस 40 अंडर 40 अवार्ड्स के माध्यम से ऐसे वित्तीय लीडर्स की उपलब्धियों का जश्न मना रहा है जिन्होंने 40 साल की उम्र के भीतर ही इंडस्ट्री में प्रमुख रूप से जबरदस्त योगदान किया है. इन अवार्ड्स के द्वारा वित्तीय क्षेत्र में मौजूद ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया गया है जिनकी रणनीतियों ने इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से बदलाव किया है. इस मैगजीन के लेटेस्ट एडिशन में मौजूद लास्ट वर्ड नामक अपने लेख में ExxonMobil Lubricants इंडिया के CEO विपिन राणा ने लुब्रिकेंट इंडस्ट्री और एक देश की इकॉनमी के बीच मौजूद प्रमुख रिश्ते के बारे में बताया है. इसके साथ ही विपिन राणा ने भारतीय इकॉनमी की वृद्धि को प्रमुख बताया है.
 

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अब FSSAI के रडार पर नेस्ले और जायडस वेलनेस, लैक्टोजेन और कॉम्प्लान के दावों पर मांगा जवाब

FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नेस्ले के शिशु आहार उत्पाद 'लैक्टोजेन प्रो 1' में व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने के दावे, जबकि कॉम्प्लान के '2X तेजी से विकास' के दावे पर नियामक ने सवाल उठाए हैं. दोनों कंपनियों से अपने दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण पेश करने को कहा गया है. यह कार्रवाई खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की जांच के तहत की गई है.

लैक्टोजेन के पाचन संबंधी दावे पर सवाल

FSSAI ने नेस्ले इंडिया को उसके शिशु आहार उत्पाद लैक्टोजेन प्रो 1 को लेकर नोटिस भेजा है. नियामक के अनुसार, उत्पाद की पैकेजिंग या विज्ञापन सामग्री में दावा किया गया है कि इसमें मौजूद व्हे प्रोटीन आसानी से पच जाता है.

व्हे प्रोटीन दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन है. FSSAI ने नेस्ले से इस दावे के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और जरूरी दस्तावेज मांगे हैं. कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब और संबंधित सबूत जमा करने को कहा गया है.

कॉम्प्लान के '2X तेजी से विकास' के दावे की जांच

कॉम्प्लान बनाने वाली कंपनी जायडस वेलनेस को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस उत्पाद के '2X तेजी से विकास' के दावे को लेकर है. नियामक ने कंपनी से इस दावे को प्रमाणित करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य पेश करने को कहा है.

FSSAI की कार्रवाई का उद्देश्य यह जांचना है कि खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जा रहे दावे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं या नहीं. नियामक ने खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों को नियमों के अनुरूप लेबलिंग और विज्ञापन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है.

भ्रामक विज्ञापनों पर FSSAI की सख्ती

खाद्य नियामक की यह कार्रवाई पैकेटबंद खाद्य और पेय उत्पादों की लेबलिंग तथा विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की निगरानी बढ़ाने के बीच हुई है. FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजित पुन्हानी ने इस महीने की शुरुआत में 'द इकोनॉमिक टाइम्स' को बताया था कि नियामक ने हाल के महीनों में खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली 150 से अधिक कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं.

ये नोटिस उत्पादों की सामग्री के बारे में भ्रामक दावों से लेकर लेबलिंग संबंधी नियमों का पालन नहीं करने जैसे मामलों में दिए गए हैं. नियामक का मानना है कि बड़ी खाद्य कंपनियों को नियमों का पालन करने और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावों से बचने के मामले में उदाहरण पेश करना चाहिए.

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी नियम सख्त करने की तैयारी

FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है. इसके तहत उत्पादों की निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और बैच नंबर जैसी जानकारियां उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है.

इस पहल का उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों के बारे में जरूरी जानकारी देना और उन्हें सोच-समझकर खरीदारी करने में मदद करना है.

नेस्ले इंडिया और जायडस वेलनेस को जारी किए गए नोटिस के बाद अब इन कंपनियों के जवाब और दावों के समर्थन में पेश किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे. फिलहाल, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित दावे नियामक की जांच में अंतिम रूप से भ्रामक साबित हो चुके हैं.


GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा, लेकिन महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता; दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट

RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
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Thursday, 22 October, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. हालांकि, अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार के बीच महंगाई का बढ़ता दबाव केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के कार्यवृत्त में कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ने से आर्थिक विकास की संभावनाओं पर जोखिम पैदा हो सकता है. वहीं, कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है.

चार साल बाद RBI ने बढ़ाई ब्याज दर

RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार था, जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की.

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के मौजूदा माहौल के बीच RBI के लिए मौद्रिक नीति में पर्याप्त अंतर बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है.

महंगाई का दायरा बढ़ने से बढ़ी चिंता

RBI गवर्नर ने अपने वक्तव्य में महंगाई के व्यापक होने के संकेतों पर चिंता जताई. बैठक के कार्यवृत्त के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी में शामिल 37% वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में 4% से अधिक थी. मार्च में ऐसी वस्तुओं का अनुपात केवल 20% था.

यह आंकड़ा संकेत देता है कि महंगाई का दबाव पहले की तुलना में अधिक वस्तुओं तक फैल रहा है. ऐसे में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ महंगाई को नियंत्रित करना केंद्रीय बैंक के लिए अहम चुनौती बन गया है.

मजबूत अर्थव्यवस्था से RBI को भरोसा

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है. इसी आधार पर RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान अगस्त में लगाए गए 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. यह पिछले अनुमान से 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है.

केंद्रीय बैंक का मानना है कि अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि के कारण वह विकास दर पर बड़ा नकारात्मक असर पड़े बिना कुछ हद तक मौद्रिक सख्ती को सहन कर सकती है. हालांकि, महंगाई के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर आगे का फैसला आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगा.

दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट

आने वाले महीनों में रेपो रेट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अनुमान जताया है कि महंगाई का दबाव जारी रहने पर RBI दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर सकता है. कुछ विश्लेषकों को फरवरी की बैठक में भी इतनी ही बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है.

अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो लगातार तीन मौद्रिक नीति बैठकों में कुल 0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, यह फिलहाल विश्लेषकों का अनुमान है, RBI की ओर से भविष्य की ब्याज दरों को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं की गई है.

आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, आर्थिक विकास की गति और वैश्विक परिस्थितियां RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगी. केंद्रीय बैंक के सामने अब आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और महंगाई पर काबू पाने के बीच संतुलन साधने की चुनौती है.
 


शेयर बाजार में आज भी गिरावट का खतरा, गिफ्ट निफ्टी 22,700 के नीचे; क्रूड 110 डॉलर पार

बुधवार को सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 फीसदी गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 फीसदी टूटकर 22,811.35 पर आ गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
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Thursday, 22 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत कमजोर रहने की आशंका है. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच GIFT Nifty करीब 50 अंक गिरकर 22,690 के आसपास पहुंच गया, जो 22,700 के अहम स्तर से नीचे है. बुधवार को घरेलू बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे. ऐसे में गुरुवार को बाजार में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखने को मिल सकती है. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के कारण भी कारोबार में उतार-चढ़ाव रहने की आशंका है.

पिछले कारोबारी सत्र में कैसा रहा बाजार?

बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन कारोबार के दौरान मुनाफावसूली हावी हो गई. सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 फीसदी गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 फीसदी टूटकर 22,811.35 पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 1,400 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई, जबकि निफ्टी 22,700 के नीचे तक फिसल गया था.

बाजार में बिकवाली के कारण BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 6.13 लाख करोड़ रुपये घटकर 461.80 लाख करोड़ रुपये रह गया. सोमवार को बाजार बंद होने के बाद यह 467.93 लाख करोड़ रुपये था.

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो IT शेयरों को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में दबाव रहा. निफ्टी के 34 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि बजाज फाइनेंस करीब 3.2 फीसदी टूटकर प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा. दूसरी ओर, इंफोसिस, HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और TCS जैसे IT शेयरों में 2-3 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. IT शेयरों की मजबूती के बावजूद दूसरे सेक्टरों में बिकवाली ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा.

क्रूड ऑयल 110 डॉलर के पार, बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हैं. ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि WTI क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा कंपनियों की लागत, मुनाफे और रुपये की चाल भी प्रभावित हो सकती है.

भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.43 फीसदी तक पहुंच गई है, जो 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी की लागत बढ़ सकती है और शेयरों के मूल्यांकन पर भी असर पड़ सकता है.

एशियाई बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं. शुरुआती कारोबार में जापान का निक्केई 225 करीब 0.30 फीसदी नीचे था, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी एक फीसदी से ज्यादा गिरा. महंगे तेल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं.

निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर अहम

टेक्निकल विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,800 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा. बुधवार को आखिरी आधे घंटे में आई रिकवरी के कारण इंडेक्स इस स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा था. अब इस स्तर को बनाए रखना बाजार के लिए अहम होगा. ऊपर की ओर 23,000 के आसपास निफ्टी को प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, जहां बिकवाली बढ़ने की आशंका है.

बैंक निफ्टी के लिए 54,500 से 55,500 की रेंज महत्वपूर्ण मानी जा रही है. विश्लेषकों के मुताबिक, लगातार 56,000 के ऊपर बंद होने पर ही इसमें तेजी की मजबूती का संकेत मिल सकता है. बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगी.

जियो प्लेटफॉर्म्स IPO को पहले दिन अच्छा रिस्पॉन्स

बाजार में कमजोरी के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को पहले दिन निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू कुल 2.8 गुना सब्सक्राइब हुआ. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की कैटेगरी 8.4 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों की कैटेगरी 1.4 गुना सब्सक्राइब हुई. रिटेल निवेशकों की कैटेगरी में करीब 60 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला, जबकि कर्मचारियों की कैटेगरी 1.2 गुना और पात्र शेयरधारकों की कैटेगरी 1.3 गुना भरी. गुरुवार को IPO का दूसरा दिन है और निवेशकों की नजर सब्सक्रिप्शन के नए आंकड़ों पर रहेगी.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुवार को Eternal (जोमैटो), महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, NHPC, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाटा कम्युनिकेशंस, ओला इलेक्ट्रिक, KEI इंडस्ट्रीज और PC ज्वेलर के शेयर चर्चा में रह सकते हैं. Eternal का सितंबर तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 92 फीसदी बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन से राजस्व 78 फीसदी बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये पहुंच गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज का स्टैंडअलोन मुनाफा 54.8 फीसदी बढ़कर 881.5 करोड़ रुपये और शुद्ध ब्याज आय 13.2 फीसदी बढ़कर 2,391.4 करोड़ रुपये रही. NHPC ने सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की 250 मेगावॉट क्षमता वाली पांचवीं यूनिट का व्यावसायिक संचालन शुरू किया है. BEL को 13 अक्टूबर के बाद से 1,011 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं. टाटा कम्युनिकेशंस की स्पेन स्थित सहायक कंपनी को अदालत से राहत मिली है. अदालत ने 1.55 करोड़ यूरो की वैट मांग और 1.81 करोड़ यूरो का जुर्माना रद्द कर दिया है. ओला इलेक्ट्रिक का राइट्स इश्यू 22 अक्टूबर से खुल रहा है. कंपनी 27 रुपये प्रति शेयर की दर से करीब 999.54 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.

KEI इंडस्ट्रीज का सितंबर तिमाही में राजस्व सालाना आधार पर 38.5 फीसदी बढ़कर 3,776 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 28.7 फीसदी बढ़कर 262 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, कंपनी का एबिटा और मुनाफा बाजार के अनुमानों से कम रहा. PC ज्वेलर का शुद्ध मुनाफा 58 फीसदी बढ़कर 331.1 करोड़ रुपये और राजस्व 27.8 फीसदी बढ़कर 1,054.5 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके अलावा HD फायर प्रोटेक्ट में एलियांज ग्लोबल इन्वेस्टर्स की ओर से 55.73 करोड़ रुपये की शेयर खरीदारी हुई है.

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

गुरुवार को स्विगी, कोलगेट-पामोलिव इंडिया, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी टोटल गैस, ब्लूस्टोन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल, चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण, साएजिलिटी, हैवेल्स इंडिया और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इनके अलावा जम्मू एंड कश्मीर बैंक, जिंदल स्टेनलेस, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट, नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन, रैलिस इंडिया, सैफायर फूड्स इंडिया और टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

कुल मिलाकर, गुरुवार को बाजार की दिशा ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों से तय हो सकती है. निवेशकों के लिए निफ्टी का 22,800 का स्तर अहम रहेगा, जबकि 23,000 के आसपास तेजी को प्रतिरोध मिल सकता है. ऐसे माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव और चुनिंदा शेयरों में हलचल बने रहने की आशंका है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

 


दीपिंदर गोयल ने Dark.ai का दिया संकेत, Eternal का टेक्नोलॉजी कारोबार में विस्तार

नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल 28 अक्टूबर को लॉन्च हो सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसके प्रोडक्ट और बिजनेस मॉडल को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
BWHindia

Eternal के वाइस चेयरमैन दीपिंदर गोयल ने बुधवार, 21 अक्टूबर को अपनी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल Dark.ai का संकेत दिया. Zomato और Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal की यह पहल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और कदम मानी जा रही है. कंपनी ने संकेत दिया है कि यह वेंचर जल्द ही लॉन्च होगा.

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब गोयल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे बढ़कर दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार की संभावनाएं तलाश रहे हैं. हालांकि, Eternal ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि Dark.ai के तहत कौन-सा प्रोडक्ट या सेवा पेश की जाएगी, इसके संभावित ग्राहक कौन होंगे और कंपनी इससे कमाई कैसे करेगी. ऐसे में समूह के कारोबार में इसकी भूमिका फिलहाल स्पष्ट नहीं है.

Dark.ai: अब तक क्या पता चला है?

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नई पहल की जानकारी दी. उन्होंने इसे “Eternal के घर से” बताते हुए लिखा, “Coming soon”. पोस्ट में कंप्यूटर मॉनिटर और लैपटॉप पर “DARK BY ETERNAL” की ब्रांडिंग दिखाई गई, लेकिन इसके पीछे की तकनीक या संभावित इस्तेमाल के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai एक AI मॉडल होगा, सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट होगा, उपभोक्ताओं के लिए कोई सेवा होगी या कंपनियों के इस्तेमाल के लिए टेक्नोलॉजी समाधान होगा. Eternal ने इस वेंचर में निवेश, इसके नेतृत्व या बिजनेस मॉडल से जुड़ी जानकारी भी साझा नहीं की है.

डिलीवरी से आगे गोयल के टेक्नोलॉजी निवेश

Dark.ai, गोयल की टेक्नोलॉजी से जुड़ी पहल Temple के बाद सामने आया है. Temple एक हेल्थ-टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट है, जिसके तहत मस्तिष्क में रक्त प्रवाह (सेरेब्रल ब्लड फ्लो) की निगरानी करने वाला एक पहनने योग्य डिवाइस विकसित किया जा रहा है. यह पहल Temple Private Limited के माध्यम से विकसित की जा रही है और Eternal के मुख्य उपभोक्ता कारोबार से अलग है.

Eternal के अंतर्गत Zomato, Blinkit, Hyperpure और District जैसे कारोबार आते हैं. Dark.ai की लॉन्चिंग से समूह के टेक्नोलॉजी पोर्टफोलियो का विस्तार हो सकता है, लेकिन इसका मौजूदा कारोबार से क्या संबंध होगा, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.

यह भी स्पष्ट नहीं है कि Dark.ai Eternal के मौजूदा कारोबार को तकनीकी सहायता देने के लिए विकसित किया जाएगा या इसे एक स्वतंत्र प्रोडक्ट के रूप में पेश किया जाएगा.

Eternal के तिमाही नतीजों के दिन आया ऐलान

Dark.ai को लेकर यह संकेत ऐसे दिन आया है, जब Eternal को 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं. कंपनी के लिए यह पहल फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से आगे टेक्नोलॉजी के नए क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने की दिशा में एक और कदम हो सकती है. हालांकि, इसके वास्तविक कारोबारी प्रभाव का आकलन प्रोडक्ट, बिजनेस मॉडल और कंपनी की आगे की योजनाओं की जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा.


Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal का मुनाफा 92% बढ़ा, रेवेन्यू 24 हजार करोड़ रुपये के पार

इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 92.3% बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 65 करोड़ रुपये था. हालांकि, कंपनी का मुनाफा बाजार के 304 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा.

कंपनी का परिचालन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 77.6% बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 13,590 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA भी बढ़कर 752 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 239 करोड़ रुपये था.

हालांकि, कंपनी के कुल खर्च में भी तेज बढ़ोतरी हुई. दूसरी तिमाही में कुल खर्च 75% बढ़कर 24,166 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 13,813 करोड़ रुपये था.

Eternal के क्विक कॉमर्स कारोबार Blinkit का रेवेन्यू तिमाही के दौरान लगभग दोगुना हो गया. इसके एडजस्टेड EBITDA में भी सुधार हुआ और यह 156 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया.

फूड डिलीवरी कारोबार की ग्रोथ 21.5% रही

Eternal के फूड डिलीवरी कारोबार Zomato ने दूसरी तिमाही में नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में सालाना आधार पर 21.5% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 11,445 करोड़ रुपये हो गई. कंपनी के मुताबिक, लगातार पांच तिमाहियों से इस कारोबार की ग्रोथ में तेजी आ रही है.

इस कारोबार का एडजस्टेड EBITDA सालाना आधार पर 25% बढ़कर 627 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन मामूली रूप से घटकर NOV का 5.5% रह गया.

कंपनी के औसत मासिक लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या सालाना आधार पर 16% बढ़कर 2.8 करोड़ हो गई. कंपनी के संस्थापक और CEO दीपिंदर गोयल ने कहा कि हालिया ग्रोथ की मुख्य वजह अधिक ग्राहकों का खाना ऑर्डर करना और मौजूदा ग्राहकों द्वारा ज्यादा बार ऑर्डर देना है.

गोयल ने फूड डिलीवरी कारोबार में सालाना 20% से अधिक ग्रोथ की कंपनी की दीर्घकालिक उम्मीद को दोहराया. उन्होंने कहा कि इस कारोबार की NOV वित्त वर्ष 2021-22 के 18,160 करोड़ रुपये से दोगुने से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 37,993 करोड़ रुपये हो गई. इस दौरान इसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 20% रही.

Blinkit मुनाफे में आया

Eternal के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 79.3% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 20,940 करोड़ रुपये हो गई. पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 22.2% की वृद्धि हुई. कंपनी ने तिमाही के दौरान 308 नए स्टोर जोड़े. इसके साथ ही Blinkit के कुल स्टोर की संख्या बढ़कर 2,751 हो गई.

Blinkit का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन लगातार छठी तिमाही में बेहतर हुआ और NOV का 0.9% रहा. इसका एडजस्टेड EBITDA 184 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में 156 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.

District और Hyperpure के प्रदर्शन में सुधार

Eternal के आउटिंग कारोबार District ने दूसरी तिमाही में NOV में सालाना आधार पर 58% की वृद्धि दर्ज की. यह बढ़कर 3,259 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले इसकी ग्रोथ 1.3% तक सीमित रही.

District का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के लगभग बराबर 64 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -3.1% से सुधरकर NOV का -2% हो गया.

Eternal के बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सप्लाई कारोबार Hyperpure ने 1,154 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. समान आधार पर इसमें 22.7% की वृद्धि हुई. Hyperpure का एडजस्टेड EBITDA भी 5 करोड़ रुपये के नुकसान से सुधरकर 10 करोड़ रुपये के मुनाफे में पहुंच गया. इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के -0.5% से सुधरकर 0.9% हो गया.

ग्रोथ के लिए निवेश जारी रखेगी कंपनी

Eternal के अन्य कारोबारों, जिनमें Bistro और Nugget शामिल हैं, ने 132 करोड़ रुपये का एडजस्टेड रेवेन्यू दर्ज किया. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह 95 करोड़ रुपये था. इन कारोबारों का एडजस्टेड EBITDA नुकसान पिछली तिमाही के 94 करोड़ रुपये से घटकर 91 करोड़ रुपये रह गया.

दीपिंदर गोयल ने कहा कि कंपनी अपने प्रदर्शन का आकलन करते समय किसी एक तिमाही के नतीजों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं देती. उन्होंने कहा कि ऐप खुलने की संख्या, नए ग्राहकों को जोड़ने और बाजार हिस्सेदारी जैसे संकेतक सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. गोयल के मुताबिक, कंपनी उन क्षेत्रों में निवेश जारी रखेगी, जहां उसे आकर्षक रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है.
 


HDFC बैंक में गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप में दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक की व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने का आरोप

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गोपनीय व्यावसायिक रणनीतियों और बाजार को प्रभावित करने वाली संभावित संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों के साथ साझा करने के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के प्रमुख कारोबार और कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले इन अधिकारियों ने बाहरी पक्षों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी. हालांकि, दोनों अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने संभावित सूचना लीक को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद यह जांच शुरू की गई. HDFC बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि साझा की गई जानकारी का बाद में किसी ने गलत इस्तेमाल तो नहीं किया. जांच अभी जारी है.

HDFC बैंक ने आंतरिक समीक्षा जारी होने की पुष्टि की है, लेकिन जांच में सामने आए कथित निष्कर्षों या संबंधित अधिकारियों के बारे में टिप्पणी नहीं की है. बैंक ने कहा है कि वह मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन कर रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई करेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की शुरुआत में जांच के निष्कर्ष बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड के कुछ सदस्यों के सामने रखे गए थे. दोनों अधिकारियों को भी इन निष्कर्षों के बारे में औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है. हालांकि, उनके खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

HDFC बैंक में नेतृत्व स्तर पर भी बदलाव

यह जांच ऐसे समय में सामने आई है, जब HDFC बैंक के शीर्ष नेतृत्व में बड़े बदलाव हो रहे हैं. ICICI समूह के अनुभवी अधिकारी अनूप बागची 27 अक्टूबर को बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद संभालने वाले हैं.

मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन छह साल तक इस पद पर रहने के बाद पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला किया है. बैंक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारियों में शामिल डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा ने भी दिसंबर के अंत में पद छोड़ने की इच्छा जताई है.

इस साल की शुरुआत में तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने व्यक्तिगत मूल्यों और बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों के बीच मतभेदों का हवाला दिया था. इसके बाद HDFC बैंक की ओर से कराई गई स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में पाया गया कि उनकी चिंताओं की पुष्टि नहीं हुई.

बाजार में बैंक की स्थिति पर भी नजर

ये घटनाक्रम भारत के बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़े बैंक के लिए महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं. HDFC बैंक का बाजार पूंजीकरण लगभग 115 अरब डॉलर है. बैंक ने ऐतिहासिक रूप से अपने सतर्क प्रबंधन, मजबूत आंतरिक नियंत्रण और लगातार लाभप्रदता के आधार पर अपनी पहचान बनाई है. हालांकि, इस साल अब तक बैंक के शेयरों में लगभग 28% की गिरावट आई है.

1994 में भारत के वित्तीय क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद स्थापित HDFC बैंक आज देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है. अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी यह बैंक एक प्रमुख निवेश विकल्प रहा है, जो भारत के उपभोक्ता और ऋण बाजारों में निवेश करना चाहते हैं.


AAAI ने उत्तर, दक्षिण और पूर्वी भारत में शुरू किए क्षेत्रीय चैप्टर, स्थानीय विज्ञापन उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

कुनाल ललानी, के. श्रीनिवास और प्रियंका चटर्जी संभालेंगे उत्तर, दक्षिण और पूर्वी क्षेत्र की कमान

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Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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एडवरटाइजिंग एजेंसिज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने विज्ञापन क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर, दक्षिण और पूर्वी भारत में तीन नए क्षेत्रीय चैप्टर शुरू किए हैं. इनका उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विज्ञापन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप काम करना और स्थानीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है.

इन क्षेत्रीय चैप्टर का नेतृत्व विज्ञापन एजेंसियों के CEO करेंगे. इन सभी को ब्रांड निर्माण और विज्ञापन सेवाओं के क्षेत्र में कई दशकों का अनुभव है. उन्होंने सरकार, वित्तीय संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और विभिन्न क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं के लिए काम किया है.

प्रत्येक चैप्टर अपने क्षेत्र के बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्यशालाओं, विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्रों और सहकर्मियों के बीच सीखने-सिखाने के कार्यक्रमों का आयोजन करेगा.

तीनों क्षेत्रीय चैप्टर की जिम्मेदारी किसे मिली?

उत्तर भारत के चैप्टर की अध्यक्षता क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड के कुनाल ललानी करेंगे. इसके सह-अध्यक्ष इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के संतोष कुमार और पैम एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के सुनील छाबड़ा होंगे.

दक्षिण भारत के चैप्टर की जिम्मेदारी स्लोका एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के के. श्रीनिवास को अध्यक्ष के रूप में सौंपी गई है. मैत्री एडवरटाइजिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के सी. मुथु सह-अध्यक्ष होंगे. पूर्वी भारत के चैप्टर की अध्यक्षता स्टैंडर्ड पब्लिसिटी प्राइवेट लिमिटेड की प्रियंका चटर्जी करेंगी.

राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन उद्योग को मजबूत करने की पहल

AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि भारत में विज्ञापन उद्योग को अधिक मजबूत और आपस में बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ बनाने के लिए क्षेत्रीय चैप्टर महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, "कुनाल, संतोष, सुनील, सी. मुथु, के. श्रीनिवास और प्रियंका के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्थानीय अनुभव और प्रतिभाएं राष्ट्रीय मानकों को आकार दें. इसका उद्देश्य एजेंसियों के नेतृत्वकर्ताओं को उन महत्वपूर्ण चर्चाओं के करीब लाना है, जो उद्योग के भविष्य को प्रभावित करती हैं."

ये क्षेत्रीय चैप्टर AAAI के राष्ट्रीय ढांचे के तहत काम करेंगे, लेकिन उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की स्वायत्तता भी होगी.
 


2,900 करोड़ रुपये की राहत से अंबानी और निप्पॉन के खिलाफ SEBI की बड़ी कार्रवाई का आधार कमजोर

यस बैंक के AT-1 बॉन्ड को बहाल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से SEBI की रिलायंस म्यूचुअल फंड जांच की मुख्य धारणा कमजोर पड़ गई है. इस मामले में यह माना गया था कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने जिन बॉन्ड में निवेश किया था, वे बेकार हो चुके थे.

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Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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पलक शाह 

सुप्रीम कोर्ट के यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को बहाल करने के फैसले ने SEBI के म्यूचुअल फंड से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक की मुख्य धारणा को कमजोर कर दिया है. इस मामले में माना गया था कि रिलायंस म्यूचुअल फंड द्वारा खरीदे गए बॉन्ड बेकार हो चुके थे.

15 अक्टूबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यस बैंक, उसके पूर्व प्रशासक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया, जो मार्च 2020 में बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने के फैसले को रद्द करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने का फैसला अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने प्रशासक की कार्रवाई को "पूरी तरह अवैध और अमान्य" बताया और निर्देश दिया कि बॉन्ड की मूल शर्तों के अनुसार कूपन भुगतान किया जाए.

अदालत ने पाया कि 13 मार्च, 2020 को अधिसूचित अंतिम पुनर्गठन योजना में जानबूझकर उस प्रावधान को हटा दिया गया था, जो मसौदा योजना में बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डालने की अनुमति देता था. इसके बावजूद प्रशासक ने अगले ही दिन बॉन्ड की रकम को बट्टे खाते में डाल दिया. यह कार्रवाई बहुत देर से की गई, क्योंकि नियमों के अनुसार योजना लागू होने से पहले ऐसा करना जरूरी था. इसके अलावा, यह प्रशासक के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर था, क्योंकि यह विकल्प RBI के पास था और उसने इसका इस्तेमाल नहीं किया था. अदालत ने RBI, प्रशासक और यस बैंक के आचरण को "संदेहास्पद" बताया.

इस फैसले का सीधा असर SEBI की 30 अगस्त, 2024 की कारण बताओ नोटिस पर पड़ता है. इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने 2016 और 2017 में यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,150 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि यस बैंक ने रिलायंस कैपिटल समूह की कंपनियों को लगभग 3,400 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. SEBI का कहना है कि यह लेनदेन बदले में लाभ पहुंचाने की व्यवस्था थी, जिसके जरिए फंड के अपने प्रायोजक समूह की कंपनियों की निजी तौर पर जारी प्रतिभूतियों में निवेश पर लगी रोक को दरकिनार किया गया.

इस नोटिस में अनिल अंबानी, जय अनमोल अंबानी, राणा कपूर, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC), जो अब निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट है, इसके पूर्व CEO संदीप सिक्का, फिक्स्ड इनकम प्रमुख अमित त्रिपाठी और मुख्य जोखिम अधिकारी मिलिंद नेसरिकर के नाम शामिल हैं. इन आरोपों को चुनौती दी गई है और अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है.

नोटिस में छह योजनाओं के पास बचे बॉन्ड का मूल्य शून्य आंका गया था, क्योंकि ये बॉन्ड "पूरी तरह बट्टे खाते में डाल दिए गए थे". इसमें निवेशकों को 1,828.70 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था. SEBI ने प्रमोटरों से यह रकम वापस योजनाओं में जमा कराने और AMC से प्रबंधन शुल्क के रूप में प्राप्त 88.59 करोड़ रुपये लौटाने की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन बॉन्ड की पूरी कीमत बहाल हो जाती है. छह से सात वर्षों के 9% से 9.5% की दर से बकाया कूपन भुगतान से लगभग 1,040 करोड़ से 1,150 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिल सकते हैं. इस तरह संबंधित योजनाएं SEBI द्वारा आंके गए नुकसान की तुलना में लगभग 2,900 करोड़ रुपये की वसूली कर सकती हैं. हालांकि, अदालत ने देरी से किए जाने वाले कूपन भुगतान पर ब्याज देने का आदेश नहीं दिया है. जिन यूनिटधारकों ने बॉन्ड की रकम बट्टे खाते में डाले जाने के बाद अपनी यूनिट भुना ली थीं, उन्हें इसका लाभ शायद नहीं मिले.

नोटिस पाने वाले पक्षों के वकीलों से यह तर्क देने की उम्मीद है कि इस फैसले के बाद नोटिस का मूल आधार समाप्त हो गया है. उनका कहना होगा कि जिन योजनाओं को पूरा पैसा वापस मिल रहा है, उनमें 1,828.70 करोड़ रुपये दोबारा जमा कराने का निर्देश दोहरी वसूली के समान होगा. वे यह भी तर्क दे सकते हैं कि SEBI पूरक नोटिस जारी किए बिना नुकसान के किसी नए सिद्धांत पर भरोसा नहीं कर सकता.

हालांकि, SEBI के पास भी अपने तर्क हैं. उसके धोखाधड़ी रोधी नियम ऐसे आचरण पर लागू होते हैं, "चाहे कोई गलत लाभ हुआ हो या किसी नुकसान से बचा गया हो या नहीं". सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों की व्यापक व्याख्या की है. इस दृष्टिकोण के अनुसार, बॉन्ड के साथ आगे क्या हुआ, इससे अलग कथित व्यवस्था नियमों का उल्लंघन हो सकती है. फैसले में यह भी कहा गया है कि अदालत की टिप्पणियों का लंबित कार्यवाहियों पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. नोटिस में AMC पर अपनी आंतरिक निवेश सीमा का उल्लंघन करने का अलग आरोप भी है. यह सीमा एक समय 88.92% तक पहुंच गई थी. यह आरोप नुकसान होने या न होने पर निर्भर नहीं करता.

समय भी महत्वपूर्ण है. SEBI के नए निपटान नियम नवंबर में लागू होंगे. इनके तहत उन पक्षों को एक बार 90 दिन का अवसर मिलेगा, जिनके पहले के निपटान आवेदन खारिज कर दिए गए थे, ताकि वे दोबारा आवेदन कर सकें. हालांकि, इन नियमों के तहत जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों और आर्थिक अपराध कर फरार हुए लोगों के लिए निपटान की अनुमति नहीं है.

SEBI, निप्पॉन लाइफ इंडिया AMC और नोटिस में नामित व्यक्तियों ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री पुस्तक के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के शेयर बाजार घोटाले और उन लोगों के गठजोड़ को उजागर करती है, जो कथित तौर पर बिना किसी कार्रवाई के बच निकले. मुंबई में लगभग दो दशक की जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान पलक ने वित्तीय बाजारों में धन, सत्ता और नियमन के बीच संबंधों की पड़ताल की है. उनके लेख द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेसलाइन जैसे प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित होने के बाद पलक ने महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई के गैंगवार की जगह कॉरपोरेट कार्यालयों में संचालित सफेदपोश अपराधों ने ले ली है. इसके बाद उन्होंने वित्तीय पत्रकारिता की ओर रुख किया और शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक के मामलों की पड़ताल की. उनका काम वित्तीय बाजारों की चमकदार सतह के पीछे छिपे गठजोड़ को सामने लाने पर केंद्रित है.)

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फेयरफैक्स की स्वीट डील: IDBI सस्ते में खरीदा, अपनी हिस्सेदारी पूरी कीमत पर बेचेगा

IDBI बैंक को 81 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदने के एक दिन बाद, प्रेम वत्स का समूह Go Digit और IIFL में 18,500 करोड़ रुपये की अपनी हिस्सेदारी बैंक को पूरी बाजार कीमत पर बेचने की योजना बना रहा है.

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Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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पलक शाह 

फेयरफैक्स ने सरकार और LIC से बैंक सस्ते में खरीदा.

अब अपनी हिस्सेदारी बैंक में पूरी कीमत पर डालने की तैयारी.

फेयरफैक्स को 6,100 करोड़ रुपये की छूट, क्या इसकी कीमत IDBI चुकाएगा?

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की योजना अपनी दो भारतीय वित्तीय कंपनियों में हिस्सेदारी को पूरी बाजार कीमत पर IDBI बैंक में स्थानांतरित करने की है. यह घोषणा सरकार द्वारा बैंक का नियंत्रण उसे बाजार मूल्यांकन से कम कीमत पर बेचने पर सहमति जताने के एक दिन बाद आई.

14 अक्टूबर को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने फेयरफैक्स की एक सहायक कंपनी को IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचने की मंजूरी दी. इस सौदे का कुल मूल्य लगभग 52,878 करोड़ रुपये है. सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेच रही है, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगा. इसके बाद सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी बच जाएगी.

उस दिन IDBI बैंक के शेयर 90.39 रुपये पर बंद हुए थे. इस लिहाज से बिक्री मूल्य बाजार भाव से लगभग 10% कम है. कुल 652.8 करोड़ शेयरों के आधार पर कीमत का यह अंतर लगभग 6,100 करोड़ रुपये बैठता है.

अगले दिन फेयरफैक्स के चेयरमैन प्रेम वत्स ने कहा कि समूह बीमा कंपनी Go Digit में अपनी लगभग 57% हिस्सेदारी और फेयरफैक्स इंडिया की ब्रोकिंग कंपनी IIFL Capital में 30.5% हिस्सेदारी IDBI बैंक में स्थानांतरित करेगा. इनका मूल्यांकन "उनकी संबंधित बाजार कीमतों" पर किया जाएगा. 19 अक्टूबर को बाजार बंद होने के भाव के अनुसार, इन हिस्सेदारियों का मूल्य लगभग 18,500 करोड़ रुपये था, जो फेयरफैक्स द्वारा बैंक खरीदने के लिए चुकाई जा रही रकम का लगभग एक-तिहाई है.

इस तरह फेयरफैक्स बैंक को छूट पर खरीद रहा है, जबकि अपनी कंपनियों की हिस्सेदारी उसी बैंक में पूरी कीमत पर डालने की योजना बना रहा है.

नकद या शेयर?

फेयरफैक्स ने यह नहीं बताया है कि IDBI बैंक इस हिस्सेदारी के लिए भुगतान कैसे करेगा. अभी तक कोई बाध्यकारी समझौता भी नहीं हुआ है.

अगर IDBI नकद भुगतान करता है, तो यह पैसा बैंक की पूंजी से आएगा, जिसका आधार आम जमाकर्ताओं की बचत है. फेयरफैक्स पहले ही कह चुका है कि वह IDBI को खरीदने के लिए "उपलब्ध नकदी, मौजूदा क्रेडिट सुविधाओं और संभावित परिसंपत्ति बिक्री" से धन जुटाएगा. IDBI से फेयरफैक्स के अपने कारोबारों के लिए मिलने वाला पैसा बैंक खरीदने की लागत चुकाने में उसकी मदद कर सकता है.

अगर IDBI नए शेयर जारी करके भुगतान करता है, तो फेयरफैक्स की हिस्सेदारी 60.72% से ऊपर चली जाएगी और सरकार तथा LIC की बची हुई कुल 34% हिस्सेदारी का अनुपात घट जाएगा.

इस योजना के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा बीमा नियामक IRDAI की मंजूरी जरूरी है. सरकार ने यह नहीं बताया है कि यह योजना फेयरफैक्स की बोली का हिस्सा थी या नहीं, और क्या सरकार के मूल्यांकनकर्ताओं ने इसे ध्यान में रखा था.

बोली के मुताबिक घटाई गई कीमत

2025-26 में बोली के पहले दौर के दौरान सरकार ने प्रति शेयर 94.42 रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया था. बोलियां इस स्तर तक नहीं पहुंच सकीं और उन्हें मंजूरी नहीं दी गई.

अक्टूबर तक सरकार का बेंचमार्क घटकर 75.99 रुपये रह गया, जो पहले से लगभग 20% कम था. यह उन एजेंसियों के दो मूल्यांकनों का औसत था, जिनके नाम सरकार ने सार्वजनिक नहीं किए हैं. उनकी रिपोर्ट भी प्रकाशित नहीं की गई है. फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की बोली इस बार तय सीमा से ऊपर रही.

इस सौदे में प्रतिस्पर्धा भी बहुत कम रह गई थी. कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा है कि उसने कभी वित्तीय बोली लगाई ही नहीं थी. जुलाई में रॉयटर्स ने खबर दी थी कि एमिरेट्स NBD "सौदे को सक्रिय रूप से आगे नहीं बढ़ा रहा था" और सबसे आगे चल रहा फेयरफैक्स "सरकार के साथ बातचीत कर रहा था".

8 सितंबर को फेयरफैक्स की 81 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की खबरें सामने आई थीं, जबकि किसी फैसले की घोषणा होने में अभी कई सप्ताह बाकी थे. उस दिन IDBI के शेयर 10.56% गिरकर 81.12 रुपये पर आ गए थे.

2003 का वादा

बैंक यूनियनें दिसंबर 2003 की ओर ध्यान दिलाती हैं, जब IDBI एक कंपनी बना था. द वायर के मुताबिक, तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने संसद में कहा था कि सरकार "हर परिस्थिति में" बैंक में कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखेगी. 2019 में LIC के नियंत्रण संभालने के बाद सरकार की अपनी हिस्सेदारी 51% से नीचे आ गई थी. मौजूदा बिक्री से बैंक पर सार्वजनिक क्षेत्र का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.

वत्स का प्रभाव

नवंबर 2014 में प्रेम वत्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. यह मुलाकात फेयरफैक्स इंडिया की शुरुआत से कुछ समय पहले हुई थी. उसी महीने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "श्री मोदी भारत के ली कुआन यू हैं." बिक्री को मंजूरी देने वाली समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं. हालांकि, ऐसा कोई सार्वजनिक साक्ष्य नहीं है कि इस मुलाकात का फैसले पर कोई असर पड़ा. आलोचकों का कहना है कि इस वजह से पूरी जानकारी सार्वजनिक करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि 81 रुपये प्रति शेयर की कीमत दोनों मूल्यांकनों से अधिक थी. एक मूल्यांकन में IDBI की तुलना दूसरे बैंकों से की गई थी, जबकि दूसरे में जमीन और संपत्ति सहित उसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किया गया था. सरकार का कहना है कि उसने बाजार मूल्य को अलग रखा, क्योंकि शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव बैंक के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाता था. IDBI के केवल लगभग 5% शेयरों का ही सार्वजनिक बाजार में कारोबार होता है.

अधिकारियों ने इसे भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश बताया है. फेयरफैक्स का कहना है कि वह "भारत से दुनिया का बेहतरीन वित्तीय संस्थान" बनाना चाहता है.

16 अक्टूबर को बैंक यूनियनों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था. मंजूरी मिलने के बाद के दो दिनों में IDBI के शेयर 7% से अधिक गिर गए.

वे सवाल जिनके जवाब अभी बाकी हैं

- क्या Go Digit और IIFL में हिस्सेदारी स्थानांतरित करने की योजना फेयरफैक्स की बोली का हिस्सा थी और क्या कैबिनेट को इसकी जानकारी थी?
- IDBI भुगतान नकद में करेगा या शेयरों के जरिए?
- फेयरफैक्स की कंपनियों का मूल्यांकन कौन करेगा और क्या सरकार तथा LIC को इस पर मतदान करने का अधिकार मिलेगा?
- क्या सौदा पूरा होने से पहले मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के सामने रखी जाएंगी?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)
 

 


हवाई किराये पर सरकार लगा सकती है लगाम, असाधारण परिस्थितियों में रूट के हिसाब से तय होगी सीमा

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार नए नियम लाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत आपात स्थिति या किसी खास रूट पर अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में सरकार किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकती है. हालांकि, सरकार का इरादा सभी उड़ानों के किराये को नियमित रूप से नियंत्रित करने का नहीं है. नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अलग-अलग रूट पर वसूले जाने वाले किराये का ब्योरा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा.

हवाई यात्रियों को महंगे टिकटों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा हवाई मार्गों पर किराये की सीमा तय करने का अधिकार अपने पास रखने पर विचार कर रही है. प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का उद्देश्य आपात स्थिति और अचानक बढ़ती मांग के दौरान एयरलाइंस की ओर से मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाना है.

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है. अदालत ने सरकार को 16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश दिया है.

हर रूट के किराये पर रखी जाएगी नजर

प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपने किराये की संरचना का ब्योरा समय-समय पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा. इसमें अलग-अलग हवाई मार्गों पर वसूले जाने वाले किराये की सीमा भी शामिल होगी.

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस नियामक के सामने घोषित अधिकतम किराये से ज्यादा वसूली न करें. इसके अलावा, किसी असाधारण परिस्थिति में किसी खास रूट पर मांग अचानक बढ़ने और टिकटों की कीमतों में अनुचित उछाल आने पर सरकार अस्थायी रूप से हस्तक्षेप कर सकेगी.

सरकार का प्रयास यात्रियों को अत्यधिक महंगे टिकटों से बचाने और एयरलाइंस को कारोबारी स्वतंत्रता देने के बीच संतुलन बनाने का है. सरकार सभी उड़ानों के किराये पर नियमित नियंत्रण लगाने के पक्ष में नहीं है. विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पहले से अधिक होने के कारण व्यापक स्तर पर किराया नियंत्रण से बचने की कोशिश की जा रही है.

त्योहारों के दौरान हवाई किराये में बढ़ोतरी से चिंता

त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस साल 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच कुछ प्रमुख रूट पर औसत एकतरफा हवाई किराये में भारी वृद्धि दर्ज की गई.

दिल्ली-हैदराबाद रूट पर औसत किराया 68 फीसदी, मुंबई-कोलकाता रूट पर 51 फीसदी और दिल्ली-गोवा रूट पर 39 फीसदी बढ़ा.

किराये में इस तरह की बढ़ोतरी से हवाई यात्रा की किफायत को लेकर चिंता बढ़ी है. इसका असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ता है, जिन्हें आपात स्थिति में या छुट्टियों के व्यस्त समय में अचानक यात्रा करनी पड़ती है.

ऐसे यात्रियों के पास यात्रा की तारीख बदलने या पहले से टिकट बुक करने का विकल्प सीमित होता है. ऐसे में उन्हें अधिक मांग के समय ऊंची कीमत पर टिकट खरीदना पड़ सकता है.

हवाई किराये पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई

हवाई टिकटों की मनमानी कीमतों और अतिरिक्त शुल्कों पर नियंत्रण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान अदालत ने एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से वसूले जाने वाले किराये में अंतर का मुद्दा उठाया और यात्रियों को राहत देने की जरूरत पर जोर दिया.

याचिका में दलील दी गई है कि डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण उन यात्रियों को अधिक परेशानी होती है, जिनके पास यात्रा की तारीख और समय बदलने की सुविधा नहीं होती. मांग अधिक होने पर उन्हें महंगे टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

सरकार का प्रस्तावित नियामकीय ढांचा इसी तरह की परिस्थितियों में हस्तक्षेप का विकल्प उपलब्ध करा सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर नियमों में तय शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.

एयरलाइंस की लागत और मुनाफे का भी रखना होगा ध्यान

हवाई किराये पर नियंत्रण की व्यवस्था तैयार करते समय सरकार को विमानन क्षेत्र की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना होगा. एयरलाइंस को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), विमान लीज, रखरखाव और एयरपोर्ट शुल्क जैसी कई बड़ी लागतों का सामना करना पड़ता है.

इसके अलावा, किसी रूट पर उड़ानों की सीमित उपलब्धता और यात्रियों की अचानक बढ़ती मांग से भी टिकटों की कीमतों में तेजी आ सकती है.

ऐसे में सभी रूट पर एक समान किराया सीमा लागू करने से एयरलाइंस की परिचालन लागत के अनुरूप कीमतें तय करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापक किराया नियंत्रण के बजाय असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा रूट पर सीमित अवधि के लिए हस्तक्षेप पर जोर दिया जा रहा है.

इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार असाधारण परिस्थितियों की परिभाषा कैसे तय करती है, एयरलाइंस की ओर से दिए गए किराये के ब्योरे की निगरानी कैसे होती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर किस तरह कार्रवाई की जाती है.

16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है. अदालत में चल रही सुनवाई के कारण सरकार के लिए हवाई किराये में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है.

यदि प्रस्तावित नियम अधिसूचित होते हैं, तो घरेलू हवाई टिकटों की कीमतों की निगरानी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है. अभी तक किराये मुख्य रूप से बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होते रहे हैं.

हालांकि, नियमों की औपचारिक अधिसूचना होने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि सरकार किन परिस्थितियों में किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी और यात्रियों को राहत देने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे.