होम / बिजनेस / क्लिनिकल रिसर्च और बायोफार्मा में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाएगा बजट 2026
क्लिनिकल रिसर्च और बायोफार्मा में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाएगा बजट 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि संघीय बजट 2026 न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को वैश्विक बायोफार्मा और अनुसंधान केंद्र बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.
रितु राणा 3 months ago
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत आम बजट 2026 में स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान को भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया. इस बजट ने न केवल आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मजबूती देने का लक्ष्य रखा है, बल्कि मरीजों तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया है. विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से देश में स्वास्थ्य नवाचार, अनुसंधान और दीर्घकालिक देखभाल की दिशा में नई गति मिलने की उम्मीद है.
गैर-संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान
रोश फार्मा इंडिया और नेबरिंग मार्केट्स के एमडी और सीईओ राजविंदर मेहदवान ने कहा, “संघीय बजट 2026 ने स्वास्थ्य को भारत की आर्थिक प्रगति के केंद्र में रखा है. कैंसर और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों पर ध्यान उनके बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करता है और परिणाम-उन्मुख देखभाल की आवश्यकता को दर्शाता है.” उन्होंने कहा कि यह पहल मरीजों तक तेज और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
बायोफार्मा शक्ति और CDSCO का सुदृढ़ीकरण
बजट में बायोफार्मा शक्ति पहल के तहत अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की गई है. राजविंदर मेहदवान ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि CDSCO (सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) को वैश्विक मानकों तक सुदृढ़ करना नवोन्मेषी दवाओं को तेजी और गुणवत्ता के साथ मरीजों तक पहुंचाने में मदद करेगा.
क्लिनिकल रिसर्च और NIPER का विस्तार
बजट में NIPER की क्षमता का विस्तार और देशभर में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे भारत को वैश्विक बायोफार्मा और अनुसंधान केंद्र के रूप में मजबूत बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली क्लिनिकल रिसर्च में व्यापक और समावेशी भागीदारी सुनिश्चित होगी.
रोगियों के लिए राहत और उपचार तक आसान पहुंच
बजट में कैंसर और दुर्लभ रोगों के लिए आयात शुल्क में छूट की घोषणा की गई है, जिससे मरीजों के लिए महंगे उपचारों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों और सहयोगी स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश से स्वास्थ्य सेवा वितरण को विकेंद्रीकृत किया जा सकेगा और अंतिम स्तर तक सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी.
नवाचार और मूल्य-आधारित फार्मास्युटिकल नेतृत्व
बायर फार्मास्युटिकल्स, इंडिया और कंट्री डिविजन हेड साउथ एशिया और एमडी श्वेता राय ने कहा, “बजट ने स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाया है. बायोफार्मा शक्ति पहल और R&D कर प्रोत्साहन नवाचार और घरेलू उत्पादन को सशक्त करेंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि “API, कच्चे माल और मेडिकल उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी में समायोजन, 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी की छूट और सात दुर्लभ रोगों के लिए आयात शुल्क में छूट, मरीजों तक महत्वपूर्ण उपचारों की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी.”
पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूती
हमदर्द लेबोरेटरीज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी अब्दुल मजीद ने कहा कि बजट में AYUSH फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को बेहतर बनाने, कुशल हेल्थ प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ाने और एविडेंस पर आधारित रिसर्च को बढ़ावा देने जैसे कदमों से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही, तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना को प्रस्ताव पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम संकेत बताया है.
उन्होंने कहा कि भारत में स्वास्थ्य चुनौतियां तेजी से मधुमेह, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज की ओर बढ़ रही हैं, जहां रोकथाम और दीर्घकालिक देखभाल बेहद अहम है. ऐसे समय में, जैविक दवाओं और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की भूमिका स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती, सुलभ और टिकाऊ बनाने में और बढ़ जाती है. अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के निवेश के साथ प्रस्तावित ‘बायोफार्मा शक्ति’ पहल इस दिशा में एक मजबूत कदम है. इस से भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई गति मिलने की उम्मीद है.
टैग्स