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बजट 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव पेश किया
बजट 2026 में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव भारत की आधुनिक परिवहन संरचना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 के दौरान सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव पेश किया. यह पहल भारत की परिवहन संरचना को आधुनिक बनाने और शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है. उन्होंने बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को भारत की विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बताया.
प्रस्तावित कॉरिडोर और उनका महत्व
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, बेंगलुरु–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं. इन कॉरिडोरों से यात्रा का समय काफी कम होगा, क्षेत्रीय एकीकरण मजबूत होगा और प्रमुख शहरों और उभरते आर्थिक केंद्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.
उत्पादकता और आर्थिक विकास में योगदान
वित्त मंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार उत्पादकता बढ़ाने, लॉजिस्टिक दक्षता सुधारने और लोगों व माल की आवाजाही को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. ये कॉरिडोर प्रमुख औद्योगिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और व्यावसायिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करेंगे, जिससे क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा.
रोजगार और निवेश के अवसर
प्रस्तावित नेटवर्क सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को रोजगार सृजन और सतत विकास का प्रमुख साधन माना गया है. निर्माण और संबंधित गतिविधियों से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे, जबकि बेहतर कनेक्टिविटी से निर्माण, सेवा, पर्यटन और रियल एस्टेट में निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर जोर
सीतारमण ने कहा कि तेजी से शहरीकरण और बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले भारत के लिए आधुनिक परिवहन संरचना आवश्यक है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इस बात का संकेत हैं कि सरकार भविष्य-उन्मुख, विश्व-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, कनेक्टिविटी बेहतर करेगा और नागरिकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाएगा.
इस घोषणा के साथ भारत की लंबी अवधि की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम रखा गया है, जिसका उद्देश्य देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना है.
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