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रेलवे को खुश करके, रेलकर्मियों के माथे पर शिकन छोड़ गईं वित्त मंत्री!

वित्त मंत्री ने बजट में रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान की घोषणा की है, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 में रेलवे के लिए भी बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान की घोषणा की है, जो 2013-14 बजट से करीब 9 गुना ज्यादा है. 2013 में रेलवे के लिए करीब 63,363 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया था. जबकि पिछले साल यानी 2022 में रेलवे का कुल बजट 140367.13 करोड़ रुपए था. इस लिहाज से देखें तो रेलवे पर वित्त मंत्री ने खासी मेहरबानी दिखाई है, लेकिन साथ ही उन्होंने कुछ ऐसा भी जोड़ दिया है जिससे रेलवे कर्मचारियों के माथे पर शिकन पड़ गए हैं.

पहले से चल रहा काम
वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि रेलवे में निजी भागेदारी बढ़ाई जाएगी. इसका मतलब है कि सरकार रेलवे के कई कामकाज निजी हाथों में सौंप सकती है. वैसे, ये कोई पहला मौका नहीं है जब रेलवे में निजी भागीदारी बढ़ाने की बात हुई है. मोदी सरकार काफी समय से इस दिशा में काम कर रही है. रेलवे यूनियन ने निजीकरण का विरोध भी किया है, लेकिन सरकार पर उसका खास असर नहीं हुआ. अब बजट में निजी भागेदारी बढ़ाए जाने की घोषणा करके सरकार ने साफ कर दिया है कि वो अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटने वाली.

कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
रेलवे से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बजट में 2.4 लाख करोड़ का प्रावधान अच्छी बात है, लेकिन निजी भागीदारी की बात करके सरकार ने रेल कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. सरकार सीधे तौर पर भले ही कुछ न कहे, मगर निजी भागीदारी बढ़ने का असर रेलवे कर्मचारियों पर पड़ना लाजमी है. उनका यह भी कहना है कि निजी भागीदारी बढ़ना न केवल रेल कर्मियों के लिए बल्कि यात्रियों के लिए भी नुकसानदायक है. अधिकारियों ने कहा कि रेलवे में निजीकरण सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिमपूर्ण है. उन्होंने सवाल किया कि क्या एक निजी ठेकेदार सुरक्षा जैसे मुद्दे पर रेलवे स्टाफ से ज्यादा गंभीर हो सकता है? 

51000 करोड़ जुटाएगी सरकार
वहीं, सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अपने विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्य को घटा दिया है और अगले वित्त वर्ष 2023 के लिए विनिवेश यानी सरकारी संपत्तियों को बेचकर 51000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है. वर्तमान वित्त वर्ष के लिए सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 50,000 करोड़ रुपए कर दिया है. पहले यह 65,000 करोड़ था. वैसे ये पहली बार नहीं है. इससे पहले वित्त वर्ष 2022 में विनिवेश के जरिए सरकार का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का था, जिसे बाद में घटाकर 78,000 करोड़ करना पड़ा था. लगातार टारगेट कम करना साफ दर्शाता है कि सरकार की विनिवेश प्रक्रिया में निवेशक कम रुचि रख रहे हैं.


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