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ब्राजील के राष्ट्रपति ने पुतिन की गिरफ्तारी को लेकर कही ये अहम बात...
क्योंकि ब्राजील रोम संविधि कर्ता का हस्ताक्षर कर्ता है, जिसके कारण आईसीसी की स्थापना हुई है. ऐसे में अगर पुतिन ब्राजील आते हैं तो उनके लिए उन्हें गिरफ्तार करना अनिवार्य हो जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत द्वारा इस साल बिना किसी तनाव के सफलतापूर्वक जी-20 समिट आयोजित कराए जाने के बाद अब अगले साल ब्राजील में ये समिट होने जा रहा है. लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध का तनाव उस पर अभी से दिखाई देने लगा है. ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डी सिल्वा ने कहा है कि अगर पुतिन अगले साल उनके देश में आयोजित होने वाले समिट में भाग लेते हैं तो वो उन्हें गिरफ्तार नहीं करेंगे. जी-20 समिट वर्ष 2024 में ब्राजील में आयोजित होने जा रहा है. इसके लिए लिए उसे भारत की ओर से अध्यक्षता सौंपी जा चुकी है.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में अपनी बात कहते हुए ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने कहा कि अगर अगले साल रियो डी जेनेरेयो में होने वाले शिखर सम्मेलन में ब्लादिमिर पुतिन भाग लेते हैं तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि उन्हें इस सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि अगर अगले साल होने वाले जी-20 सम्मेलन से पहले उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस जाने की भी योजना बनाई है.
आखिर क्यों पुतिन की गिरफ्तारी की हो रही है बात
दरअसल पुतिन की गिरफ्तारी की बात इसलिए हो रही है क्योंकि आईसीसी (अंतराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय) ने मार्च में पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसमें उन पर यूक्रेन से सैकड़ों बच्चों को अवैध रूप से निर्वासित करने के युद्ध अपराध का आरोप लगाया गया था. जबकि रूस की ओर से इन अपराधों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है कि उन्होंने बच्चों को अपनी हिरासत में लिया है या उन्हें निर्वासित किया है. क्योंकि ब्राजील रोम संविधि कर्ता का हस्ताक्षर कर्ता है, जिसके कारण आईसीसी की स्थापना हुई है. ऐसे में अगर पुतिन ब्राजील आते हैं तो उनके लिए उन्हें गिरफ्तार करना अनिवार्य हो जाएगा. ये बाध्यता सिर्फ ब्राजील पर ही नहीं है बल्कि आईसीसी के 123 सदस्यों के लिए ये बेहद अनिवार्य है. रूस चीन, अमेरिका इसका हिस्सा नहीं है.
घोषणापत्र में कही गई है ये बात
10 सितंबर को जी 20 सदस्य देशों ने जिस घोषणापत्र को अपनाया है उसमें कहा गया है कि सभी क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए बल का प्रयोग नहीं कर सकते हैं. यूक्रेन युद्ध ही ऐसा कारण है जिसके चलते संयुक्त बयान के लिए इसे विवाद का विषय समझा जा रहा था. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारी टीम की कड़ी मेहनत के कारण इस नई दिल्ली शिखर सम्मेलन पर सहमति बनी है. उन्होंने कहा कि मैं इसके लिए शेरपा से लेकर मंत्री और दूसरे लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने इसके लिए मेहनत की है.
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