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भारत की नाराजगी से नासाज हुई Maldives की आर्थिक सेहत, इस तरह लग रहे झटके!
विवाद के बाद से बड़े पैमाने पर भारतीय पर्यटकों ने मालदीव से दूरी बना ली है, जिसके चलते उसे नुकसान उठाना पड़ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भारत को नाराज करना मालदीप (Maldives) को भारी पड़ रहा है. बॉयकॉट मालदीप (Boycott Maldives) अभियान के चलते उसे भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो PM मोदी के खिलाफ मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी के बाद से भारतीयों ने मालदीव से दूरी बना ली है, जिसकी वजह से मालदीव को तगड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. बता दें कि मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी है. ताजा विवाद से पहले तक यहां हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पहुंच रहे थे.
हर दिन होगा इतना नुकसान
रिपोर्ट्स के अनुसार, बिगड़ते हालातों के बीच पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मालदीव ने अपने यहां घूमने का खर्चा भी आधा कर दिया, लेकिन इसके बावजूद भारतीय वहां जाने को तैयार नहीं हैं. नतीजतन मालदीव को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. 2023 में बड़ी संख्या में भारतीय मालदीप गए थे और उन्होंने 38 करोड़ डॉलर यानी करीब 3,152 करोड़ रुपए खर्च किए थे. इस लिहाज से देखें, तो भारतीय पर्यटकों की नाराजगी से मालदीव को हर दिन कम से कम 8.6 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है. उधर, भारत अगले महीने होने वाली उच्च स्तरीय कोर समूह की वार्ता के दौरान मालदीव से अपने सैनिकों की वापसी की योजना पर चर्चा के लिए तैयार है. हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा था कि भारत उनके देश से अपने सैनिकों को वापस बुला ले.
पर्यटन की बड़ी भूमिका
करीब 4 लाख की आबादी वाले मालदीव में धिवेही और इंग्लिश भाषा बोली जाती है. मालदीव जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है. इसका कोई भी द्वीप समुद्र तल से छह फुट से अधिक ऊंचा नहीं है. इस देश की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी हुई है. यहां के द्वीपों की अर्थव्यवस्था भी पर्यटन पर ही निर्भर है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस देश की अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय का एक चौथाई से अधिक हिस्सा पर्यटन से आता है. मालदीव भारतीयों का पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस रहा है. बीते साल यानी 2023 में करीब दो लाख भारतीय मालदीव गए थे. 2021 में लगभग तीन लाख और 2022 में यह संख्या ढाई लाख के आसपास थी. कोरोना से पहले तक यहां हर साल दुनियाभर के करीब 20 लाख सैलानी आते थे. कोरोना के बाद इसमें कमी देखने को मिली है.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे मामले की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद हुई थी. पीएम मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा करने के बाद एक वीडियो शेयर किया था. उन्होंने भारतीयों से अपील की थी कि वह यहां घूमने के लिए आए. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे कि लाखों रुपए खर्च कर मालदीव जाने से बेहतर होगा कि लक्षद्वीप जाएं. बस इसी बात से मालदीव के मंत्री माल्शा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्लाह महजूम माजिद नाराज हो गए और आपत्तिजनक पोस्ट कर बैठे. इन मंत्रियों ने PM मोदी के खिलाफ टिप्पणी की साथ ही भारत में पर्यटन को लेकर भी कमेंट किए. विवाद बढ़ने के बाद मालदीव की सरकार ने तीनों मंत्रियों को निलंबित कर दिया.
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