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बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत! सरकार डिपॉजिट इंश्योरेंस राशि बढ़ाने पर कर रही विचार
सरकार की ओर से मौजूदा समय में बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस के तहत ग्राहकों को मिलने वाली 5 लाख रुपये तक की जमा राशि की लिमिट को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हाल ही में महाराष्ट्र के एक निजी बैंक, न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक (New India Co-operative Bank) पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैन लगा दिया, जिसके बाद बैंक के बाहर ग्राहकों की लंबी लाइनें लग गईं. ये सभी लोग अपनी जमा राशि निकालने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे. इस बैन के बाद ग्राहकों को चिंता थी कि अगर बैंक डूबता है या चोरी हो जाती है, तो उन्हें केवल 5 लाख रुपये ही वापस मिलेंगे, भले ही उनके अकाउंट में लाखों रुपये जमा हों. हालांकि, अब ऐसी स्थिति में सरकार आपके बैंक में जमा पैसे पर डिपॉजिट इंश्योरेंस को बढ़ा सकती है, जिससे आपको 5 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा मिल सकता है.
डिपॉजिट इंश्योरेंस बढ़ाने पर विचार है
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने हाल ही में कहा कि सरकार जमा बीमा की सीमा को मौजूदा पांच लाख रुपये से बढ़ाने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है. उनका यह बयान न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के कथित घोटाले के कुछ दिन बाद आया. नागराजू ने कहा कि इस प्रस्ताव पर काम जारी है, और जैसे ही सरकार इसे मंजूरी देगी, इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी. यह कदम बैंकों के जमाकर्ताओं को सुरक्षा की भावना प्रदान करेगा, जिससे उनका पैसा सुरक्षित रहेगा और बैंक के डूबने की स्थिति में वे 5 लाख रुपये से ज्यादा वापस पा सकेंगे.
कब मिलता है जमा बीमा?
नागराजू ने हालांकि न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के संकट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, और कहा कि इस मामले को आरबीआई देख रहा है. उल्लेखनीय है कि जमा बीमा दावा तब शुरू होता है, जब कोई बैंक डूब जाता है. पिछले कुछ वर्षों में, निक्षेप बीमा व प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) ने ऐसे दावों का भुगतान किया है. यह निकाय बैंकों से प्रीमियम एकत्र करता है और अधिकांश दावे सहकारी बैंकों से संबंधित होते हैं.
वर्तमान में कितनी है बीमा सीमा?
आपको बता दें कि पीएमसी बैंक घोटाले के बाद 2020 में डीआईसीजीसी ने बीमा सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था. आर्थिक मामलों के सचिव, अजय सेठ ने इस बात पर जोर दिया कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र आरबीआई की निगरानी में सही ढंग से विनियमित है और इसमें कोई बड़ा संकट नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी एक बैंक में संकट आने से पूरे क्षेत्र की स्थिति पर संदेह नहीं करना चाहिए, और नियामक का काम दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करना है.
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक का घोटाला
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में हुई घोटाले के बाद, बैंक के 1.3 लाख जमाकर्ताओं में से 90 प्रतिशत को उनका पैसा डीआईसीजीसी से वापस मिलने की संभावना है. भौतिक जांच में सामने आया कि बैंक के बही-खाते में दर्शाई गई 122 करोड़ रुपये की नकदी गायब है. जांच में यह भी पाया गया कि बैंक के महाप्रबंधक-वित्त, हितेश मेहता ने इस गबन की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा एक स्थानीय बिल्डर को दे दिया था. इस घोटाले ने ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन अब सरकार द्वारा डिपॉजिट इंश्योरेंस सीमा को बढ़ाने पर विचार किए जाने से बैंकों में जमा राशि रखने वालों को राहत मिल सकती है.
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