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UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर! संसद से पास हुआ टैक्स बिल, लेनदेन पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है. बिल के तहत सरकार को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के ऐसे माध्यम और ट्रांजैक्शन तय करने का अधिकार मिलेगा, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
संसद ने सोमवार को कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation and Other Laws (Amendment) को मंजूरी दे दी. राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित किया. लोकसभा पहले ही पिछले सप्ताह इस बिल को मंजूरी दे चुकी है. बिल का उद्देश्य डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों को कानूनी आधार देना और सरकार को यह तय करने की शक्ति देना है कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड और ट्रांजैक्शन शुल्क-मुक्त रहेंगे.
UPI पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि इस कानून का मतलब यह नहीं है कि UPI यूजर्स से ट्रांजैक्शन चार्ज लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि UPI की शुरुआत से ही ग्राहकों के लिए यह सुविधा मुफ्त रही है और आगे भी लोग बिना किसी ट्रांजैक्शन शुल्क के इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि ग्राहक को UPI ट्रांजैक्शन के लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा. यानी आम लोगों के लिए UPI के जरिए तत्काल डिजिटल भुगतान पहले की तरह मुफ्त बना रहेगा.
सरकार को मिलेगी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड तय करने की शक्ति
नए कानून के तहत केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड या ट्रांजैक्शन निर्धारित करने का अधिकार मिलेगा, जिन्हें शुल्क-मुक्त रखना जरूरी होगा. यह बदलाव Payment and Settlement Systems Act को इनकम टैक्स एक्ट से अलग करने के लिए किया गया है. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से यूजर्स से शुल्क नहीं ले सकते. हालांकि, नया कानून UPI यूजर्स पर कोई नया ट्रांजैक्शन चार्ज लागू नहीं करता. इसके बजाय यह एक वैधानिक व्यवस्था तैयार करता है, जिसके तहत सरकार यह अधिसूचित कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों और ट्रांजैक्शन को शुल्क-मुक्त रखना है.
MDR को लेकर बहस के बीच आया बदलाव
यह प्रावधान Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आया है. MDR डिजिटल पेमेंट की प्रोसेसिंग लागत को पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच बांटने से संबंधित है. बिल के प्रावधानों से सरकार को मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था को लेकर ज्यादा लचीलापन मिलेगा. हालांकि, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इससे ग्राहकों के लिए UPI भुगतान पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा.
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की भी कोशिश
टैक्स बिल में डिजिटल पेमेंट के अलावा विदेशी निवेश आकर्षित करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं. साथ ही विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है.
बिल 5 जून को जारी किए गए उस अध्यादेश की जगह लेता है, जिसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs को मिलने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स छूट दी गई थी.
भारत में फंड मैनेजरों को लाने की कोशिश
इस कानून में निवेश फंड्स से जुड़ी कुछ शर्तों को भी आसान बनाने का प्रावधान है. इसका उद्देश्य फंड मैनेजरों को भारत में स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि कुछ परिस्थितियों में उनके वैश्विक आय पर भारत में टैक्स लगाने का जोखिम कम हो.
दोनों सदनों से बिल पारित होने के बाद अब केंद्र सरकार के पास इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के उन माध्यमों और ट्रांजैक्शन को अधिसूचित करने का कानूनी ढांचा है, जिन्हें शुल्क-मुक्त रखना होगा. हालांकि, UPI को लेकर वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आम ग्राहकों से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा.
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