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ब्लैक मनी कानून में बड़ा बदलाव: 20 लाख तक की विदेशी संपत्ति पर न जुर्माना, न केस
इस कदम से यह संदेश स्पष्ट है कि सरकार और इनकम टैक्स विभाग अब "मामूली चूकों" पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ब्लैक मनी छिपाने वालों पर सख्त कार्रवाई करना चाहते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
सरकार ने ब्लैक मनी कानून में अहम बदलाव किया है जिससे छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिली है. अब अगर किसी व्यक्ति के पास विदेश में बैंक खाता, शेयर या कोई अन्य चल संपत्ति है जिसकी कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और इसकी जानकारी गलती से इनकम टैक्स विभाग को नहीं दी गई, तो उस पर न तो जुर्माना लगेगा और न ही केस दर्ज होगा. यह नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू हो चुका है.
CBDT का नया निर्देश
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने ब्लैक मनी एक्ट 2015 में संशोधन करते हुए 18 अगस्त 2025 को एक आंतरिक आदेश जारी किया. इसके मुताबिक, छोटे मामलों में अब सेक्शन 49/50 के तहत केस नहीं चलाया जाएगा, बशर्ते कि उन पर सेक्शन 42/43 के तहत कोई जुर्माना न लगाया गया हो.
पहले छोटी रकम पर भी लगता था भारी जुर्माना
पहले नियमों के तहत अगर किसी ने विदेश में बैंक खाता खोला और उसकी जानकारी सरकार को नहीं दी, तो चाहे उसमें रकम 5 लाख से भी कम क्यों न हो, भारी जुर्माना और केस का सामना करना पड़ता था. अब 20 लाख रुपये तक की विदेशी चल संपत्तियों जैसे बैंक बैलेंस, शेयर, बॉन्ड या निवेश पर ऐसी कार्रवाई नहीं होगी.
किन्हें नहीं मिलेगी छूट?
यह छूट सभी पर लागू नहीं होगी. जिन लोगों पर 1 अक्टूबर 2024 से पहले ही केस दर्ज हो चुका है, वे इसका लाभ नहीं ले पाएंगे. यह राहत केवल उन टैक्सपेयर्स को मिलेगी जिनकी विदेशी चल संपत्ति 20 लाख रुपये से कम है और जिन पर अभी तक कोई जुर्माना नहीं लगा है. साथ ही, यह नियम सिर्फ चल संपत्तियों तक सीमित है. विदेश में खरीदी गई अचल संपत्तियां जैसे घर या जमीन इसमें शामिल नहीं हैं.
बदलाव के पीछे सरकार का तर्क
इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि छोटी-छोटी चूक पर केस चलाना समय और संसाधनों की बर्बादी है. बहुत से टैक्सपेयर्स अनजाने में विदेशी संपत्ति की जानकारी देने से चूक जाते हैं, लेकिन उनका मकसद गलत नहीं होता. विभाग अब बड़े पैमाने पर ब्लैक मनी छिपाने वालों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है, जहां करोड़ों रुपये की संपत्तियां छुपाई जाती हैं.
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