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क्‍या वास्‍तव में डूबने वाले हैं नोएडा के एक दर्जन से ज्‍यादा बिल्‍डर? 

नोएडा अथॉरिटी ने उन बिल्‍डरों की जानकारी साझा की है जो अपने मामलों को लेकर एनसीएलटी में जा चुके हैं, ये 15 बिल्‍डर हैं जिन पर अथॉरिटी का करोड़ों रुपया बकाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

रियल स्‍टेट की देश में जब भी बात सामने आती है तब हमेशा ही नोएडा का नाम सामने जरूर आता है. ये शहर रियल स्‍टेट के लिए हमेशा ही एक हॉट स्‍पॉट रहा है. कभी यहां महंगी जमीन बिकने का रिकॉर्ड बनता है तो कभी यहां बड़े निवेश की खबर आती है. रियल स्‍टेट के इसी हॉट बाजार से इस बार एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभी को चौंका कर रख दिया है. खबर ये आ रही है कि नोएडा के 15 से ज्‍यादा बिल्‍डर डूबने की कगार पर हैं. ये बात इसलिए कही जा रही है क्‍योंकि ये बिल्‍डर एनसीएलटी में जा चुके हैं. अब सवाल ये है कि क्‍या वास्‍तव में नोएडा के बिल्‍डर डूबने जा रहे हैं. 


आखिर क्‍या है ये पूरा मामला? 
दरअसल बिल्‍डर को जब आज से कुछ साल पहले जमीन आवंटित की गई थी तो उस वक्‍त इनके 10 प्रतिशत भुगतान के बाद इन्‍हें जमीन दे दी गई थी. लेकिन उसके बाद से अब तक इन लोगों का नोएडा अथॉरिटी में काफी पैसा पेंडिंग चल रहा है. इसी पैसे की वसूली के लिए अब नोएडा अथॉरिटी ने प्रयास तेज कर दिए हैं. इसके कारण इन बिल्‍डरों के फलैटों की जहां रजिस्‍ट्री रूकी हुई है वहीं दूसरी ओर इन्‍हें कंप्‍लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं दिया जा रहा है. 


एनसीएलटी पहुंचे नोएडा के एक दर्जन से ज्‍यादा बिल्‍डर 
नोएडा के अलग-अलग सेक्‍टरों में प्रोजेक्‍ट बनाने वाले डेढ़ दर्जन से ज्‍यादा बिल्‍डरों के मामले एनसीएलटी में पहुंच चुके हैं. इनमें सुरपटेक, अजनारा, रेड फोर्ट जहांगीर, ग्रेनाइट गेट प्रापर्टीज, IVRCL इ्ंफ्रास्‍ट्रक्‍चर एंड प्रोजेक्‍ट लिमिटेड, शुभकामना बिल्‍डटेक, लॉजिक्‍स सिटी डेवलपर, थ्री प्रोजेक्‍ट प्रा लि, टूडे होम प्रा लि, सुपरटेक लिमिटेड, जीएसएस प्रोकोन प्रा लि, ऑप्‍यूलेंट इंफ्रारेड डेवलपर लि, हैसीएंडा प्रोहेक्‍टस प्रा लि, लॉजिक्‍स इंफ्राटेक प्रा लि, डोसाइल बिल्‍टेक जैसे बिल्‍डर शामिल हैं. बिल्‍डरों की ये सूची नोएडा अथॉरिटी ने अपनी बेवसाइट पर जारी की है. 


बिल्‍डरों पर कितना है बकाया 
इन 15 बिल्‍डरों पर अलग-अलग अमाउंट की राशि बाकी है. नोएडा अथॉरिटी की वेबसाइट के अनुसार सुपरटेक पर 676.64 करोड़ रुपये, M/S AJNARA INDIA LTD. पर 47.66 करोड़ रुपये, M/S RED FORT JAHANGIR PROPERTIES PVT. LTD. पर 393.96 करोड़ रुपये, M/s GRANITE GATE PROPERTIES PVT. LTD, पर 877.00 करोड़ रुपये, M/s Logix City Developers P. Ltd. पर 555.58 करोड़ रुपये बकाया है. ऐसे सभी बिल्‍डरों पर पैसा बकाया है. 

क्‍या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील  

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर लॉयर विशाल तिवारी बताते हैं कि NCLT में जाने का मतलब होता है कि वो बिल्‍डर बैककरप्‍ट हो चुका है इंसाल्‍वेंसी में लाना चाहता है. इसका सबसे बड़ा असर बॉयर पर पड़ता है जिसने उसके प्रोजेक्‍ट में पैसा लगाया है. वो लोग इस परेशानी में आ जाते हैं कि आखिर उस प्रोजेक्‍ट का क्‍या होगा जिस पर उन्‍होंने पैसा लगाया था. अब इससे आईबीसी में जाता है तो इसका मतलब ये है कि वो अपने फाइनेंशियल ऑब्‍लीगेशन मीट नहीं कर पा रही है. इसमें एनसीएलटी क्‍या करता है या तो वो रिजॉल्‍यूशन करता है या वो लिक्‍वीडेशन करता है, उसकी फाइनेंशियल स्थिति देखी जाती है कि वो कैसी है. लिक्‍वीडेशन में ये होता है कि जितने भी लोगों की देनदारी है, सभी एसेट बेचकर उनका पैसा दिया जाए. 
 


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