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क्या ऑफिस में सबसे ज्यादा थक रहे हैं भारतीय कर्मचारी? सामने आया ये सर्वे
सर्वे रिपोर्ट में वर्क प्रेशर के साथ-साथ हेल्थ को लेकर अलग-अलग देशों में स्टडी की गई है. दोनों ही पक्षों में भारत की स्थिति बहुत बेहतर देखने को नहीं मिली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
हाल ही में इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति ने कहा था कि अगर हमें दुनिया की नंबर वन इकोनॉमी बनना है तो हमारे युवाओं को 70 घंटे काम करना होगा. उनके इस बयान पर इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने अपनी बात कही थी. लेकिन अब एक सर्वे निकलकर सामने आया है जो कहता है कि दुनियाभर के युवाओं में भारतीय सबसे ज्यादा थक रहे हैं. इस लिस्ट में भारत के बाद जापान का नंबर है.
क्या कहता है ये पूरा सर्वे?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मैकिन्से हेल्थ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि भारत के युवाओं को अपने वर्कप्लेस पर कोई 59 प्रतिशत काम का प्रेशर है. इस सर्वे में 18 से 24 साल के युवा कर्मचारियों के अलावा सभी गैर प्रबंधन कर्मचारियों ने इस प्रेशर की जानकारी दी है. वहीं अगर सबसे कम थकान या कहें बर्नआउट की बात करें तो वो मध्य एशिया में देखने को मिला है. वहां कर्मचारियों का बर्नआउट मात्र 9 प्रतिशत रहा है. जबकि दुनिया भर में बर्नआउट का औसत स्तर 20 प्रतिशत था.
भारत के बाद कौन से देश में ज्यादा है वर्क बर्नआउट?
मैकिन्से हेल्थ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार इसमें भारत 61 प्रतिशत के साथ नंबर वन पर है जबकि दूसरे नंबर पर जापान है. यहां के युवा भी भारत के युवाओं के समान बर्नआउट के शिकार हैं. यहां का औसत 61 प्रतिशत है. इसके बाद तीसरे नंबर पर आता है स्विटजरलैंड. यहां भी बनआउट का स्तर पर एवरेज बर्नआउट से कुछ ही ज्यादा है. समूची दुनिया में एवरेज बर्नआउट जहां 20 प्रतिशत है वहीं स्विटजरलैंड में ये 22 प्रतिशत है.
कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर क्या कहती है ये रिपोर्ट?
मैकिन्से हेल्थ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कर्मचारियों की हेल्थ को लेकर भी विस्तार से बताया गया है. रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर हुए परीक्षण में भारत तुर्की के बाद दूसरे नंबर पर है. सर्वे एजेंसी ने 30 हजार कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच की है. रिपोर्ट कह रही है कि कर्मचारियों की भलाई का आंकलन शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक स्तर पर किया गया है. इस आंकलन की रिपोर्ट कह रही है कि जापान मात्र 25 प्रतिशत के साथ सबसे निचले स्थान पर रहा है. तुर्की 78 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर आया है जबकि भारत 76 प्रतिशत और चीन 75 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है. जबकि स्वास्थ्य के मामले में दुनिया का औसत 57 प्रतिशत रहा है.
किन कर्मचारियों का स्वास्थ्य रहा है बेहतर?
इस सर्वे रिपोर्ट में ये भी निकलकर सामने आया है कि लगभग 250 कर्मचारियों से ज्यादा वाली बड़ी कंपनियों के का हेल्थ स्कोर छोटी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा रहा है. सर्वे की फाइंडिंग ये भी कह रही है कि छोटे कर्मचारियों के मुकाबले प्रबंधकों की स्वास्थ्य रिपोर्ट बेहतर रही है. रिपोर्ट ये भी कह रही है कि जिन कर्मचारियों के पास सकारात्मक काम का अनुभव रहा है उनका स्वास्थ्य बेहतर देखा गया है. उनका प्रोडक्टिविटी भी बेहतर देखी गई है.
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