अमेरिका के लोगों को खूब भा रहे हैं भारत के बने स्‍मार्टफोन, बना सबसे बड़ा खरीदार

2022-23 के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूएई सबसे बड़ा खरीदार था वहीं 2023-24 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उसमें अमेरिका हमारे स्‍मार्टफोन का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है. 

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Friday, 14 June, 2024
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भारत की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था को दुनिया की रेटिंग एजेंसिया यूं ही स्थिर नहीं बता रही हैं. दुनिया की सभी टॉप रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत की ग्रोथ इसी तरह तेज बनी रहेगी. दरअसल उनके इस अनुमान के पीछे छिपा है भारत के मेड इन इंडिया प्रोग्राम का सच. कॉमर्स मंत्रालय के मई महीने के ट्रेड डेटा अनुसार भारत के स्‍मॉर्टफोन का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है. जबकि पिछले साल भारत के स्‍मार्टफोन को सबसे ज्‍यादा यूनाइटेड अरब अमीरात खरीद रहा था. यही नहीं भारत में बने दूसरे कई प्रोडक्‍ट भी दुनिया के कई देशों को भा रहे हैं. 

क्‍या कह रहे हैं आंकड़े? 
भारत में पिछले 10 सालों में स्‍मार्टफोन प्रोडक्‍शन तेजी से आगे बढ़ा है. 2014 के मुकाबले आज देश में कई गुना ज्‍यादा कंपनियां भारत में स्‍मार्टफोन का निर्माण कर रही हैं. भारत के स्‍मार्टफोन एक्‍सपोर्ट के आंकड़े बता रहे हैं कि 2022-23 में हमने जहांे 10.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्‍मार्टफोन का निर्यात किया. वहीं 2023-24 में रहने 15.57 अमेरिकी बिलियन डॉलर का निर्यात कर चुके हैं. वहीं अगर साल दर साल के अनुसार, हर महीने के फीगर पर नजर डालें तो उसमें भी हर महीने इजाफा देखने को मिला है.

जानिए किस महीने में हुआ कितना एक्‍सपोर्ट? 

अप्रैल 23 में जहां भारत ने 498.3 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया वहीं अप्रैल 24 में ये बढ़करद 1067.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इसी तरह मई में 444.5 बिलियन डॉलर के मुकाबले मई 24 में 1362.97 बिलियन डॉलर का निवेश मिला है. इसी तरह से अगर जून में 707.36 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1291.13 बिलियन डॉलर, जुलाई में 691.92 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1291.13 बिलियन डॉलर, अगस्‍त में 668.93 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 953.6 बिलियन डॉलर, सितंबर में  में 890.72 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 912.25 बिलियन डॉलर, अक्‍टूबर में 907.98 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1266.66 बिलियन डॉलर, नवंबर में 1194.23 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1265.01 बिलियन डॉलर, दिसंबर में 1190.08 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1443.05 बिलियन डॉलर, जनवरी में 1165.12 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1315.72 बिलियन डॉलर, फरवरी में 951.27 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1755.44 बिलियन डॉलर और मार्च में 1644.84 बिलियन डॉलर के मुकाबले इस साल 1988.42 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट किया है. 

ये भी पढ़ें: इंपोर्ट-एक्‍सपोर्ट के मोर्चे पर कैसे हुआ इजाफा, लेकिन वित्‍तीय घाटे में हुई कमी

अमेरिका खरीद रहा है सबसे ज्‍यादा स्‍मार्टफोन 
कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़े बता रहे हैं कि जहां वर्ष 2022-23 में हमारे टॉप फाइव सबसे बड़े खरीदारों में यूनाइटेड अरब अमीरात 23.5 प्रतिशत, अमेरिका 19.7 प्रतिशत, नीदरलैंड 9.7 प्रतिशत यूके 7.8 प्रतिशत और इटली 6.5 प्रतिशत के साथ शामिल है. जबकि 2023-24 में एक्‍सपोर्ट के आंकड़े बता रहे हैं कि अमेरिका हमारे स्‍मार्टफोन का सबसे बड़ा खरीददार बन चुका है. आज अमेरिका हमसे 35.8 प्रतिशत स्‍मार्टफोन खरीद रहा है जबकि दूसरे नंबर पर यूएई आ चुका है. यूएई हमसे 16.5 प्रतिशत मोबाइल खरीद रहा है जबकि नीदरलैंड 7.6 प्रतिशत फोन खरीद रहा है, यूके 7.3 प्रतिशत मोबाइल का खरीददार है, और इटली 5.1 प्रतिशत मोबाइल खरीद रहा है. 

जान लीजिए क्‍या है इसके पीछे का कारण?   
कॉमर्स मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका सीधा कंज्‍यूमर है, वहीं यूनाइटेड अरब अमीरात सिर्फ गल्‍फ क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि अफ्रीका में भी डिस्‍ट्रीब्‍यूट करता है. इसलिए अफ्रीकन डिमांड और गल्‍फ डिमांड को यूएई पूरा करता है. वहीं अमेरिका में डिमांड में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जैसा कि हम जानते हैं कि अमेरिका एक बहुत अमीर देश है, और वहां स्‍मार्टफोन का एक बड़ा बाजार है. इसलिए अमेरिका का शेयर बहुत ज्‍यादा है. 
 


RBI की स्वैप योजना का असर, FCNR(B) जमा बढ़ते ही बैंकों की CD पर निर्भरता घटी

FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं.

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Tuesday, 04 August, 2026
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विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा में तेज बढ़ोतरी का असर अब बैंकों की फंडिंग रणनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रियायती स्वैप सुविधा के बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने पर जोर दिया, जिससे सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) के जरिए धन जुटाने की जरूरत कम हो गई. इसी का नतीजा है कि जुलाई में बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने CD के जरिए करीब 95,000 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि जून में यह आंकड़ा 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. बढ़ी हुई नकदी के चलते CD की ब्याज दरों में भी 70 आधार अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई.

जून के मुकाबले जुलाई में आधा रह गया CD जुटाव

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में बैंकों ने CD के जरिए 45,700 करोड़ रुपये जुटाए थे. यह आंकड़ा मई में बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये और जून में 1.8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. उस समय जमा की तुलना में ऋण वितरण तेज रहने और नकदी की जरूरत बढ़ने के कारण बैंकों को CD बाजार का अधिक सहारा लेना पड़ा था.

RBI की स्वैप सुविधा से बढ़ा FCNR(B) जमा

जून की शुरुआत में RBI ने रियायती स्वैप सुविधा शुरू की थी, जिसके बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ा दी. रिजर्व बैंक के अनुसार, 31 जुलाई तक बैंकों ने इस सुविधा के तहत करीब 41 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिनमें 36.7 अरब डॉलर नई FCNR(B) जमा के जरिए आए हैं. इससे बैंकों को घरेलू बाजार के बजाय विदेशी स्रोतों से अपेक्षाकृत सस्ती फंडिंग मिलने लगी.

सस्ती फंडिंग से CD दरों में भी आई गिरावट

FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब बैंकों को कम लागत पर विदेशी मुद्रा में फंड मिल रहा है, तो उन्हें घरेलू बाजार से महंगी उधारी लेने की जरूरत कम पड़ रही है.

क्या कहते हैं बैंकिंग विशेषज्ञ?

एक वरिष्ठ बैंकर के मुताबिक, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी के बाद CD पर निर्भरता कम होना स्वाभाविक है. RBI की स्वैप योजना ने बैंकों को सस्ती फंडिंग का विकल्प दिया है, जिससे घरेलू बाजार से धन जुटाने की आवश्यकता घटी है. वहीं, दूसरे वरिष्ठ बैंकर का कहना है कि पहली तिमाही में फंडिंग की मांग असामान्य रूप से अधिक थी, जबकि वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद आमतौर पर CD दरों में नरमी देखने को मिलती है.

क्या होता है सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD)?

सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) बैंकों द्वारा जारी किया जाने वाला एक अल्पकालिक वित्तीय साधन है, जिसकी अवधि आमतौर पर 7 दिन से लेकर 1 वर्ष तक होती है. बैंक इसका उपयोग नकदी प्रबंधन, परिसंपत्ति और देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा फंडिंग के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के लिए करते हैं.
 


लगातार चार दिन की तेजी के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

सोमवार को सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 390.70 अंक यानी 1.60 फीसदी उछलकर 24,774.30 के स्तर पर पहुंच गया.

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Tuesday, 04 August, 2026
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घरेलू शेयर बाजार ने पिछले चार कारोबारी सत्रों में लगातार शानदार तेजी दर्ज की है. सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले एक महीने का उच्च स्तर छुआ. अब मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर रहेगी. आज अडानी ग्रुप, पेटीएम, एलआईसी, मीशो, इंडियन ऑयल समेत कई कंपनियों से जुड़ी बड़ी खबरों के चलते इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.

सोमवार को चौथे दिन भी तेजी के साथ बंद हुआ बाजार

सोमवार को बॉम्बे स्टॉरक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 390.70 अंक यानी 1.60 फीसदी उछलकर 24,774.30 के स्तर पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक चढ़ा, जबकि निफ्टी 24,800 के स्तर को भी पार कर गया. वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर एक महीने के उच्च स्तर 95.12 पर पहुंच गया.

आईटी और बैंकिंग शेयरों ने संभाली बाजार की कमान

सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. इंडिगो 4.22 फीसदी की तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा. टीसीएस और इन्फोसिस में 3 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा इटरनल, आईटीसी, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, एचसीएल टेक और ट्रेंट के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर, सन फार्मा, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.

कच्चे तेल में नरमी से मिला बाजार को सहारा

सोमवार की तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही. अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत शुरू होने के संकेत मिलने के बाद ब्रेंट क्रूड 83.82 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 79.76 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया. इससे वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना और भारतीय शेयर बाजार को भी समर्थन मिला.

आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर

आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे. अदाणी ग्रुप ने ओडिशा में 1 गीगावाट क्षमता के एआई आधारित डेटा सेंटर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. SAIF Partners ब्लॉक डील के जरिए Paytm में 2.3 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकता है. केंद्र सरकार आज और कल OFS के जरिए LIC में 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है. वहीं, Peak XV Partners और Elevation Capital, Meesho में करीब 1,900 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील कर सकते हैं. Essar Group ने ब्रिटेन में लो-कार्बन ऊर्जा परियोजनाओं में 4.3 अरब पाउंड निवेश की योजना बनाई है. UPL Corporation के CEO माइक फ्रैंक ने इस्तीफा दिया है. MobiKwik अपने लेंडिंग कारोबार में AI का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि Indian Oil अगले पांच से छह वर्षों में पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं पर 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर काम कर रही है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


 


भारत-यूके FTA से टेक्सटाइल निर्यात को मिल सकती है 1 अरब डॉलर की बढ़त: रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA का फायदा ब्रिटिश सप्लायर्स की तुलना में भारतीय निर्यातकों को अधिक मिलेगा. पहले भारतीय उत्पादों पर 12 प्रतिशत का टैरिफ नुकसान था, जो अब खत्म हो गया है.

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Monday, 03 August, 2026
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भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते से मध्यम से लंबी अवधि में भारत के टेक्सटाइल निर्यात में करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 900 मिलियन डॉलर) की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक लाभ कंपनियों की क्षमता विस्तार, लागत नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन पर निर्भर करेगा.

भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ा अवसर

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. एजेंसी का मानना है कि यह समझौता टेक्सटाइल कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल को भी मजबूत करेगा.

Ind-Ra के कॉरपोरेट रेटिंग्स के निदेशक रोहित सडाका ने कहा कि बड़ी और एकीकृत (इंटीग्रेटेड) टेक्सटाइल कंपनियां अपने मजबूत वित्तीय संसाधनों, स्थापित ग्राहक नेटवर्क और बड़े कारोबार के कारण इस अवसर का बेहतर लाभ उठा सकेंगी. वहीं, छोटी कंपनियों के लिए विस्तार के दौरान अत्यधिक कर्ज लेने की स्थिति में वित्तीय दबाव और नकदी संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

भारत के लिए अहम बाजार है UK

रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम भारत के टेक्सटाइल निर्यात का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां देश के कुल टेक्सटाइल निर्यात का करीब 6.1 प्रतिशत जाता है. दूसरी ओर, भारत में ब्रिटेन से आने वाले टेक्सटाइल उत्पादों की हिस्सेदारी घरेलू खपत के 1 प्रतिशत से भी कम है. वर्तमान में ब्रिटेन के कुल टेक्सटाइल आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 6.9 प्रतिशत है, जिससे आगे विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं.

भारतीय निर्यातकों को मिलेगा प्रतिस्पर्धी लाभ

रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA का फायदा ब्रिटिश सप्लायर्स की तुलना में भारतीय निर्यातकों को अधिक मिलेगा. पहले भारतीय उत्पादों पर 12 प्रतिशत का टैरिफ नुकसान था, जो अब खत्म हो गया है. इससे ब्रिटेन में भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कम होगी और समय के साथ भारत चीन के मुकाबले अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है.

हालांकि, बांग्लादेश से मुकाबला आसान नहीं होगा, क्योंकि वहां उत्पादन लागत कम है और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता मौजूद है. इसके बावजूद यदि ब्रिटेन के टेक्सटाइल आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी मौजूदा 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए करीब 900 मिलियन डॉलर के अतिरिक्त निर्यात का अवसर पैदा हो सकता है.

मुनाफे में बढ़ोतरी आने में लगेगा समय

रिपोर्ट में कहा गया है कि FTA से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त जरूर मिलेगी, लेकिन कंपनियों के मुनाफे में तुरंत बड़ा सुधार होने की संभावना नहीं है. ब्रिटेन के खरीदार टैरिफ में मिली राहत का कुछ हिस्सा कम कीमत के रूप में मांग सकते हैं, जिससे शुरुआती दौर में मार्जिन पर दबाव रह सकता है.

हालांकि, लंबे समय में निर्यात बढ़ने से कंपनियों की परिचालन क्षमता (ऑपरेटिंग लीवरेज) बेहतर होगी और लाभप्रदता को समर्थन मिलेगा. वहीं, ईंधन, बिजली, माल ढुलाई और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी से अल्पावधि में कुछ लाभ कम हो सकता है.
 


चीन पर भारत की सख्ती बरकरार, FY26 में सिर्फ ₹1 करोड़ के एक FDI प्रस्ताव को मिली मंजूरी

आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े देशों के निवेश पर लागू 'प्रेस नोट-3' के तहत सरकार अब भी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए है.

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Monday, 03 August, 2026
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भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से आए केवल एक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसकी कुल राशि महज 1 करोड़ रुपये रही. वहीं, हांगकांग से आए 13 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनका कुल मूल्य 610.42 करोड़ रुपये है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश पर अब भी कड़ी निगरानी बनाए हुए है.

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सरकार ने कुल 63 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनकी कुल कीमत 10,292.67 करोड़ रुपये (करीब 1.18 अरब डॉलर) रही.

प्रेस नोट-3 के तहत होती है जांच

अप्रैल 2020 में लागू किए गए प्रेस नोट-3 के तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी. यह फैसला कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के उद्देश्य से लिया गया था.

मार्च 2026 में सरकार ने इस नियम में आंशिक राहत देते हुए कुछ निवेशों को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी, लेकिन यह छूट चीन, हांगकांग और भारत की भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं होती. ऐसे मामलों में अब भी सरकारी मंजूरी जरूरी है.

सिंगापुर रहा सबसे बड़ा निवेशक

मंजूर किए गए प्रस्तावों के मूल्य के आधार पर सिंगापुर सबसे बड़ा निवेश स्रोत रहा. उसके 3,259.88 करोड़ रुपये के पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली. इसके बाद ब्रिटेन के पांच प्रस्ताव (2,477.67 करोड़ रुपये) और थाईलैंड के दो प्रस्ताव (1,600 करोड़ रुपये) स्वीकृत हुए.

भारत में चीन का FDI अब भी बेहद सीमित

DPIIT के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में कुल एफडीआई इक्विटी निवेश में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत रही. इस अवधि में चीन से 2.51 अरब डॉलर (करीब 16,162.25 करोड़ रुपये) का निवेश आया, जिससे वह निवेश करने वाले देशों की सूची में 23वें स्थान पर रहा.

वहीं, हांगकांग 15वें स्थान पर रहा. इस अवधि में वहां से 4.91 अरब डॉलर (करीब 31,220.30 करोड़ रुपये) का निवेश भारत आया, जो कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का 0.62 प्रतिशत है.

पिछले वित्त वर्ष में भी यही रुझान

वित्त वर्ष 2024-25 में भी सरकार ने चीन के केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसकी कीमत 28.71 करोड़ रुपये थी. उस वर्ष सरकारी मार्ग के तहत कुल 82 निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति मिली थी, जिनका मूल्य 39,758 करोड़ रुपये था. इनमें हांगकांग के 11 प्रस्ताव शामिल थे, जिनकी कुल कीमत 1,225.28 करोड़ रुपये थी.


भारत की फैक्ट्री ग्रोथ पड़ी धीमी, जुलाई में PMI फिसलकर 53.5 पर पहुंचा

नए ऑर्डर और भर्ती में सुस्ती, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

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Monday, 03 August, 2026
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जुलाई में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ गई. HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 53.5 पर आ गया, जो अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है. नए ऑर्डर, कच्चे माल की खरीद और भर्तियों की गति कमजोर रहने से फैक्ट्री गतिविधियों में सुस्ती देखने को मिली, हालांकि मजबूत निर्यात मांग और सप्लाई चेन में सुधार ने सेक्टर को कुछ राहत दी.

जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI 53.5 पर आया

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि जुलाई में धीमी पड़ गई. सोमवार को जारी HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार, जुलाई में PMI घटकर 53.5 पर आ गया, जो जून में 54.2 था. यह अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है और इसके साथ ही इंडेक्स अपने दीर्घकालिक औसत 54.2 से भी नीचे रहा. हालांकि PMI का 50 से ऊपर बने रहना इस बात का संकेत है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां अब भी विस्तार के दौर में हैं, लेकिन उनकी रफ्तार काफी धीमी हो गई है.

नए ऑर्डर और उत्पादन में सुस्ती

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को जुलाई में नए ऑर्डर मिलते रहे, लेकिन उनकी वृद्धि पिछले चार वर्षों से अधिक समय में दूसरी सबसे कमजोर रही. बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कुछ प्रमुख उत्पादों की मांग में कमी का असर ऑर्डर बुक पर दिखाई दिया. उत्पादन में बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन इसकी गति भी कमजोर बनी रही. कंज्यूमर गुड्स कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा, जबकि इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स से जुड़े उद्योगों ने बेहतर प्रदर्शन किया.

निर्यात मांग बनी मजबूत

घरेलू बाजार में सुस्ती के बावजूद निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनियों ने बताया कि कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों से मांग मजबूत बनी रही, जिससे उत्पादन को सहारा मिला.

सप्लाई चेन में सुधार, लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव चिंता

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि जुलाई में सप्लायर्स की डिलीवरी में सुधार हुआ, जिससे सप्लाई चेन की दिक्कतें कम होने के संकेत मिले हैं. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भविष्य में सप्लाई पर असर डाल सकते हैं. इसी आशंका के चलते कंपनियां कच्चे माल और तैयार उत्पादों का स्टॉक बढ़ा रही हैं.

कच्चे माल की खरीद और भर्ती की रफ्तार घटी

कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कच्चे माल की खरीद जारी रखी, लेकिन इसकी रफ्तार पिछले 31 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई. वहीं, तैयार माल का स्टॉक 11 वर्षों से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा. रोजगार के मोर्चे पर लगातार 29वें महीने नई भर्तियां हुईं, लेकिन भर्ती की रफ्तार लगातार तीसरे महीने कमजोर रही और मौजूदा विस्तार चक्र में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.

लागत का दबाव कम, कंपनियों ने बढ़ाईं कीमतें

जुलाई में कच्चे माल की लागत बढ़ने का दबाव घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गया. हालांकि, परिवहन लागत अब भी ऊंची बनी हुई है. कंपनियों ने बढ़ती लागत का असर ग्राहकों पर डालते हुए उत्पादों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की. इसके बावजूद कंपनियों का कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, नए ग्राहकों और बेहतर मार्केटिंग के दम पर कारोबार में तेजी आएगी.
 


Happy Birthday Sunil Grover: 'गुत्थी' से बने विज्ञापन जगत के 'मार्केटिंग गोल्ड', जानें कितनी है नेटवर्थ

आज के दौर में, जब विज्ञापन जगत तेजी से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ओर बढ़ रहा है, सुनील ग्रोवर अपनी अभिनय क्षमता और किरदारों के दम पर अलग पहचान बनाए हुए हैं. उनकी खासियत यह है कि दर्शक उनके निभाए किरदार को भी याद रखते हैं और उससे जुड़े ब्रांड को भी नहीं भूलते.

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Monday, 03 August, 2026
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टीवी के लोकप्रिय किरदार 'गुत्थी' और 'डॉ. मशहूर गुलाटी' से दर्शकों का दिल जीतने वाले कॉमेडियन और अभिनेता सुनील ग्रोवर आज यानी 03 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अलग-अलग किरदारों में ढलने की कला के दम पर उन्होंने न सिर्फ मनोरंजन जगत, बल्कि विज्ञापन की दुनिया में भी खास पहचान बनाई है. यही वजह है कि कई बड़े ब्रांड उन्हें अपने विज्ञापन अभियानों का चेहरा बनाते हैं. उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनकी अनुमानित नेटवर्थ, कमाई के प्रमुख स्रोत और उन यादगार विज्ञापनों के बारे में, जिन्होंने उन्हें विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया. 

कितनी है सुनील ग्रोवर की नेटवर्थ, कहां-कहां से होती है कमाई?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनील ग्रोवर की अनुमानित नेटवर्थ 21 से 25 करोड़ रुपये के बीच है. हालांकि, उनकी कुल संपत्ति को लेकर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. उनकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा टीवी शो, फिल्मों, वेब सीरीज, लाइव कॉमेडी परफॉर्मेंस, ब्रांड एंडोर्समेंट और विज्ञापनों से आता है. इसके अलावा वह सोशल मीडिया प्रमोशन, स्टेज शो और कॉर्पोरेट इवेंट्स में परफॉर्मेंस के जरिए भी अच्छी आय अर्जित करते हैं. हाल के वर्षों में 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में वापसी और कई बड़े ब्रांड्स के साथ किए गए विज्ञापन अभियानों ने उनकी कमाई और लोकप्रियता दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. आइए जानते हैं उन पांच विज्ञापन अभियानों के बारे में, जिन्होंने सुनील ग्रोवर को विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया.

1. फिगारो ऑलिव ऑयल: एक विज्ञापन में पांच किरदार

इस साल फिगारो ऑलिव ऑयल ने अपनी नई ब्रांड पहचान के साथ एक नया कैंपेन लॉन्च किया, जिसमें सुनील ग्रोवर एक साथ पांच अलग-अलग किरदार निभाते नजर आए. विज्ञापन का संदेश था कि जिस तरह ग्रोवर आसानी से अलग-अलग किरदार निभा लेते हैं, उसी तरह फिगारो ऑलिव ऑयल भी खाना बनाने से लेकर पर्सनल केयर तक कई कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

यह अभियान कंपनी डियोलियो (Deoleo) की नई ब्रांडिंग रणनीति का हिस्सा था. कंपनी के अनुसार, भारत में फिगारो के कारोबार का करीब 48% हिस्सा मल्टीपर्पज कैटेगरी से आता है.

2. गोआईबिबो की 'डीलपंती': जब बने डोनाल्ड ट्रंप

गोआईबिबो के 'डीलपंती' कैंपेन में सुनील ग्रोवर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजेदार नकल की. विज्ञापन में वह होटल की कीमतों पर बहस करते नजर आते हैं, जिसके बाद क्रिकेटर ऋषभ पंत ब्रांड का ऑफर पेश करते हैं.

इस डिजिटल अभियान की खास बात यह थी कि इसमें कॉमेडियन कीकू शारदा भी शामिल थे. दोनों ने अपने हास्य अभिनय से ट्रैवल डील्स को भी मनोरंजक बना दिया.

3. एयरटेल-एडोबी एक्सप्रेस: डिजाइनिंग को बनाया आसान

'झटपट फटाफट' कैंपेन में सुनील ग्रोवर एक ऐसे पारिवारिक ज्योतिषी की भूमिका में दिखे, जो शादी के कार्ड की डिजाइन पर टिप्पणी करता है और फिर Adobe Express से खुद तैयार किया गया निमंत्रण पत्र दिखाता है.

इस अभियान का उद्देश्य Airtel ग्राहकों को Adobe Express Premium की सुविधा से परिचित कराना था. बाद में इसे जन्मदिन की शुभकामनाओं, मीम्स, व्हाट्सऐप क्रिएटिव, पार्टी इनविटेशन और छोटे कारोबारों के प्रमोशनल मटेरियल तक भी विस्तार दिया गया.

4. मेंटोस का 'एंग्री चिकन डैड': जो मीम बन गया

परफेटी वैन मेल (Perfetti Van Melle) के मेंटोस #FarakPadega अभियान में सुनील ग्रोवर ने गुस्सैल मुर्गे की आवाज दी थी. विज्ञापन का डायलॉग, "इनको फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आपको #FarakPadega", इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स पर मीम के रूप में खूब वायरल हुआ.

इस विज्ञापन की खासियत यह थी कि इसमें उत्पाद को समस्या का जादुई समाधान नहीं बताया गया, बल्कि हास्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया गया.

5. कुरकुरे: जूही चावला के साथ बनाई अलग पहचान

OTT और सोशल मीडिया के दौर से पहले ही सुनील ग्रोवर कुरकुरे के टीवी विज्ञापनों में जूही चावला के साथ नजर आ चुके थे. इन विज्ञापनों में उन्होंने आम लोगों से जुड़े मजेदार किरदार निभाए, जिसने ब्रांड की चुलबुली और मनोरंजक छवि को और मजबूत किया. इन शुरुआती अभियानों ने यह साबित कर दिया कि सुनील ग्रोवर ऐसे कलाकार हैं, जो ब्रांड से ध्यान हटाए बिना विज्ञापन को यादगार बना सकते हैं.

 


भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता अंतिम चरण में, साल के अंत तक समझौते का लक्ष्य

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर वार्ता को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी. यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि अब तक CEPA पर वार्ता के तीन दौर पूरे हो चुके हैं. ताजा दौर 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था. उन्होंने कहा कि वार्ता के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति हुई है और दोनों देश 2026 के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.

क्या है CEPA?

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रस्तावित CEPA का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) स्थापित करना है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.

सरकार का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के लिए अधिक पारदर्शी एवं पूर्वानुमान योग्य ढांचा तैयार करेगा. साथ ही आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती मिलेगी.

भारत के लिए अहम बाजार है कनाडा

साल 2025 के अनुमान के अनुसार कनाडा की आबादी लगभग 4.16 करोड़ (41.65 मिलियन) है. क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के आधार पर उसकी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 2.34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. ऐसे में कनाडा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार और निवेश गंतव्य माना जाता है.

रिश्तों में सुधार के साथ तेज हुई वार्ता

भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता ऐसे समय तेज हुई है, जब दोनों देश पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. नई कनाडाई सरकार के साथ संबंधों में सुधार के प्रयासों के बीच व्यापार समझौते को नई गति मिली है.

प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष के अंत में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं. माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को और गति देने के साथ-साथ CEPA वार्ता को अंतिम रूप तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है.


SEBI के आदेश से ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर नहीं पड़ेगा असर: ZEE

कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के हालिया आदेश के बावजूद ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्रस्तावित ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह सेबी के अंतिम आदेश का कानूनी विशेषज्ञों के साथ अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार करेगी. कंपनी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "कंपनी को सेबी का आदेश प्राप्त हो गया है और इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है."

फंड जुटाने की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी

जी ने दोहराया कि सेबी का आदेश उसके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है. कंपनी ने कहा कि 31 जुलाई 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों की मंजूरी और स्टॉक एक्सचेंजों से आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद अब वह फंड जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी.

कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.

हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जाएंगे कानूनी कदम

जी ने कहा कि कंपनी और उसके प्रमोटरों पर लगाए गए आरोपों के संबंध में वह कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी ताकि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की जा सके.

क्या है पूरा मामला?

यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में सेबी ने ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को प्रमोटर समूह से जुड़ी एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण के लिए बिना अनुमति गिरवी रखने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया है.

सेबी ने जी एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्र और प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पुनीत गोयनका पर एक-एक वर्ष तक प्रतिभूति बाजार में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है. इसके अलावा कंपनी और दोनों अधिकारियों पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया गया है.

बिना मंजूरी गिरवी रखी गई थी संपत्ति

सेबी के अनुसार, ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को निदेशक मंडल, ऑडिट समिति या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना ऋण के लिए संपार्श्विक (Collateral) के रूप में गिरवी रखा गया था. साथ ही इस लेनदेन का पर्याप्त खुलासा भी नहीं किया गया, जो नियामकीय नियमों का उल्लंघन माना गया.


आज से शेयर बाजार में लागू हुए नए नियम, ट्रेडिंग टाइम से क्लोजिंग प्राइस तक बड़े बदलाव

नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा.

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Monday, 03 August, 2026
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अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आज से लागू हुए नए नियमों की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 3 अगस्त से शेयर बाजार के ट्रेडिंग ढांचे में कई अहम बदलाव लागू कर दिए हैं. नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा. इन बदलावों का मकसद बाजार को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है.

F&O शेयरों की क्लोजिंग का तरीका बदला

आज से F&O सेगमेंट में शामिल शेयरों की क्लोजिंग प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है. इन शेयरों में सामान्य खरीद-बिक्री दोपहर 3:15 बजे तक होगी. इसके बाद शाम 3:20 बजे से 3:30 बजे तक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन चलेगा, जिसमें निवेशक अपने ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे. फिर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक ऑर्डर मैचिंग होगी और इसी प्रक्रिया से तय हुई कीमत को उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस माना जाएगा.

F&O ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ा

SEBI ने इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट की ट्रेडिंग अवधि भी बढ़ा दी है. अब इस सेगमेंट में कारोबार दोपहर 3:40 बजे तक किया जा सकेगा. हालांकि, यह बदलाव केवल F&O सेगमेंट पर लागू होगा. नकद बाजार (Cash Market) के वे शेयर जो F&O में शामिल नहीं हैं, उनमें पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे तक ही ट्रेडिंग होगी.

प्री-ओपनिंग सेशन का नया शेड्यूल

बाजार खुलने से पहले होने वाले प्री-ओपनिंग सेशन के समय में भी बदलाव किया गया है. नए नियमों के अनुसार सुबह 9:00 बजे से 9:07 बजे तक ऑर्डर एंट्री होगी. इसके बाद 9:07 बजे से 9:15 बजे तक ऑर्डर मैचिंग की जाएगी. हालांकि, नियमित ट्रेडिंग का समय पहले की तरह सुबह 9:15 बजे से ही रहेगा.

SEBI ने क्यों किए ये बदलाव?

SEBI का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू करने का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है. इससे बाजार में उपलब्ध लिक्विडिटी बेहतर तरीके से एकत्र होगी, सभी निवेशकों को समान अवसर मिलेगा और पैसिव फंड्स की ट्रैकिंग एरर कम होगी. साथ ही, भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगी.

निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?

नए नियमों के बाद F&O ट्रेडर्स को अपनी ट्रेडिंग रणनीति और ऑर्डर प्लेसमेंट के समय में बदलाव करना होगा. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के कारण अंतिम कीमत अधिक पारदर्शी तरीके से तय होगी, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए अतिरिक्त 10 मिनट मिलने से निवेशकों को अपनी पोजिशन मैनेज करने का अधिक समय मिलेगा. वहीं, प्री-ओपनिंग सेशन के नए शेड्यूल के कारण शुरुआती ऑर्डर प्रक्रिया भी पहले से अधिक व्यवस्थित होगी.
 


ट्रंप के फैसले से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, ब्रेंट 84 डॉलर के नीचे; ईरान तनाव कम होने की उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.

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Monday, 03 August, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला टालने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने के फैसले से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोमवार को ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 5% से ज्यादा फिसलकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा. निवेशकों को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा भी घट सकता है.

ट्रंप के फैसले से टूटा तेल बाजार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.

ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब समेत पश्चिम एशिया के कई सहयोगी देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की थी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की दिशा में प्रगति होती है तो बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.

तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट?

ट्रंप के बयान के बाद बाजार को भरोसा मिला कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घटेगा. इसी उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड 4% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड 5% से अधिक गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा.

जुलाई में रहा भारी उतार-चढ़ाव

हालांकि तेल बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है. जुलाई के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 25% चढ़ा था, जो मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त रही. युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले महीने ब्रेंट में करीब 32 डॉलर प्रति बैरल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया.

तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ

शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतों में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली. इसकी वजह ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर के निकट हुए विस्फोट की खबर रही. इस घटना ने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा संबंधी जोखिम अभी भी बने हुए हैं.

दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है.

OPEC बढ़ाएगा उत्पादन, सप्लाई को मिलेगा सहारा

इस बीच OPEC के प्रमुख देशों ने उत्पादन बढ़ाने की योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है. वहीं, इराक और तुर्किये ने अपनी तेल पाइपलाइन समझौते को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिससे प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख बैरल तेल का निर्यात संभव होगा.

ईरान-ओमान के बीच भी जारी है बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े नए शिपिंग रूट पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जलडमरूमध्य को खोलने या बंद करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं है.