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पाक को बेची बैलिस्टिक मिसाइल तो अमेरिका ने चीन की 3 कंपनियों पर लगाया बैन

अमेरिका एक ओर जहां चाइना के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है वहीं दूसरी ओर पाकिस्‍तान उसके लिए एक अहम राष्‍ट्र है.अमेरिका ने हाल ही में उसे IMF से बड़ा बेलआउट दिलाया है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत और अमेरिका के संबंधों की गहराई को बढ़ाने को लेकर दोनों देश पिछले लंबे समय से काम कर रहे हैं. लेकिन इस बीच अमेरिका ने चाइना की 3 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इन कंपनियों पर आरोप है उन्‍होंने पाकिस्‍तान को बैलिस्टिक मिसाइल सप्‍लाई की है. ये तीनों कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है. 

आखिर अमेरिका ने इस पर क्‍या कहा? 
अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्‍ता मैथ्‍यू मिलर ने कहा है कि ये कंपनियां उन सामूहिक विनाश हथियारों के वितरण में लगी हुई हैं. ये कंपनियां जहां उन हथियारों का निर्माण कर रही हैं वहीं अधिग्रहण, मालिकाना हक, उनके टांसपोर्टेशन, जैसे कामों को कर रही हैं. उन्‍होंने कहा कि इसके द्वारा पाकिस्‍तान उनका इस्‍तेमाल करेगा. अमेरिका की ओर से जिन कंपनियों पर रोक लगाई गई है उनमें शीआन लॉन्गडे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, चीन की तियानजिन क्रिएटिव सोर्स इंटरनेशनल ट्रेड और ग्रैनपेक्ट कंपनी लिमिटेड और बेलारूस की मिन्स्क व्हील ट्रैक्टर प्लांट शामिल है. मिलर ने ये भी कहा कि अमेरिका इन पर प्रतिबंध लगाकर इस खरीद चेन को बंद करना चाहता है. 

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कौन सी कंपनी क्‍या कर रही थी सप्‍लाई 
जिन तीनों कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें मिंस व्‍हील ट्रैक्‍टर प्‍लांट पाकिस्‍तान की लंबी दूसरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए स्‍पेशल व्‍हीकल की सप्‍लाई कर रही थी. इसी तरह शीऑन लॉन्‍गडे टेक्‍नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए फिलामेंट वाइंडिंग मशीन और उपकरण की आपूर्ति से जुड़ी हुई थी जो एनडीसी से जुड़ा हुआ था. 

क्‍या कह रहे हैं एक्‍सपर्ट 
विदेश मामलों के जानकार कमर आगा का कहना है कि अमेरिका की ये कार्रवाई पाकिस्‍तान से ज्‍यादा चीन के खिलाफ है. अमेरिका अब तक चाइना की कई कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगा चुका है. ये वो कंपनियां हैं जो उनको भी आईटम सप्‍लाई करती हैं और दूसरे देशों को भी आईटम सप्‍लाई करती हैं. सबसे अहम बात ये है कि पाकिस्‍तान उनके लिए रणनीति के तौर पर बेहद अहम है. वो उसको समय समय पर मदद भी करते रहते हैं. उन्‍होंने पाकिस्‍तान को आईएमएफ से लोन दिलवाकर बेलआउट करने में मदद भी की. पिछले दिनों अमेरिका के कई स्‍टेटमेंट ऐसे भी आए जो  पाकिस्‍तान के फेवर में थे.

उसकी ये पुरानी रणनीति रही है कि पाकिस्‍तान के साथ भी संबंध बनाकर रखो और भारत के साथ भी संबंध बनाकर रखो. एक तरफ तो वो ये भी नहीं चाहते कि उनका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम चले और दूसरी ओर उन्‍होंने पाकिस्‍तान के न्‍यूक्लियर मिसाइल प्रोग्राम को आगे बढ़ने में भी काफी मदद की. अब सवाल ये है कि क्‍या इससे चाइना को कोई असर पड़ेगा. इस पर कमर आगा कहते हैं कि इससे चाइना को कोई बड़ा असर नहीं पड़ता है. वो नई कंपनियां बनाकर इस काम को आगे बढ़ाने लगता है. उनके देश में कोई प्रिंसिपल नहीं है. उनका बॉर्डर भी मिलता है. कोई नियम चाइना नहीं मानता है.

आज भारत अमेरिका के बीच होता है इतने अरब का कारोबार 
भारत और अमेरिका के बीच हर बीतते दिन के साथ कारोबार में इजाफा हो रहा है. पिछले 10 सालों में अब तक पीएम मोदी अमेरिका की कई यात्राएं कर चुके हैं. अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों के बीच लगभग 200 अरब डॉलर का कारोबार हुआ है. उन्‍होंने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में ये इससे भी ज्‍यादा होगा और नए आंकड़े स्‍थापित करेगा. मौजूदा समय में भारत और अमेरिका के बीच सैन्‍य कारोबार से लेकर दूसरे तरह का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है.

आने वाले समय में भारत अमेरिका के बीच कारोबार एआई से लेकर इलेक्ट्रिक कार, और सेमीकंडक्‍टर के क्षेत्र में कारोबार होने की उम्‍मीद है. यही नहीं अमेरिका भारत के साथ मिलकर जेट इंजन वाले एफ 414 विमानों के उत्‍पादन को लेकर समझौता कर चुका है. इसी तरह जल्‍द टेस्‍ला भी भारत आ सकती है. दोनों देशों के बीच बीतते हर साल के साथ कारोबार में इजाफा हो रहा है. यही वजह है कि अमेरिका चीन के खिलाफ ज्‍यादा सख्‍ती से कार्रवाई कर रहा है. 
 

 


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