अल्‍फाबेट अब इतने कर्मचारियों की संख्‍या में करने जा रहा है कमी, कंपनी ने लिया बड़ा फैसला 

अल्‍फाबेट इससे पहले जनवरी में 12000 लोगों को नौकरी से निकालकर अपनी संख्‍या में 6 प्रतिशत की कमी कर चुका है.

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Thursday, 14 September, 2023
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साल की शुरुआत में कर्मचारियों को निकाले जाने का फैसला लेने के बाद अब एक बार फिर अल्‍फाबेट की ओर से अपने दुनिया भर में काम करने वाले कर्मचारियों को निकाले जाने का फैसला किया गया है. कंपनी द्वारा लिया गया ये फैसला चालू तिमाही में किसी कंपनी के द्वारा लिया गया पहला फैसला है. इसने सभी जानकारों से लेकर कर्मचारियों को चौंका दिया है. 

क्‍या है कंपनी की योजना? 
अल्‍फाबेट कंपनी की योजना है कि वो छंटनी की इस प्रक्रिया में इस बात का भी ध्‍यान रख रही है कि महत्‍वपूर्ण पदों को भरने के लिए अधिकांश लोगों को रहने दिया जाए, जबकि बावजूद उसके जो लोग प्रभावित हो रहे हैं उन्‍हें  दूसरे संस्‍थानों या दूसरी कंपनियों में जॉब सर्च में सक्रिय रूप से मदद भी करे. अल्‍फाबेट ऐसी कंपनी बनकर सामने आई है जो इस तिमाही में ले ऑफ करने वाली पहली कंपनी है. इससे पहल मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन सहित अन्‍य तकनीकी दिग्‍गजों ने इस साल की शुरुआत में ही कई लोगों को बाहर का रास्‍ता दिखा दिया था. 

अमेरिका में बढ़ गई है छंटनी 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार फर्म चैलेंजर ग्रे और क्रिसमस की रिपोर्ट से पता चलता है कि अमेरिका में जुलाई की तुलना में अगस्‍त में छंटनी तीन गुना तक बढ़ गई है. वहीं अगर इसकी पिछले सााल से तुलना की जाए तो ये चार गुना तक बढ़ गई है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा छंटनी हो रही है. मीडिया रिपोर्ट ये भी कहती है कि 9 सितंबर को जो हफ्ता खत्‍म हुआ है बेरोजगारी के नए दावों में 8 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है. जोकि पिछले एक हफ्ते के दौरान 13000 से ज्‍यादा रहा है. 

जनवरी में कई कंपनियां कर चुकी हैं ले ऑफ  
इस साल की शुरुआत को इसीलिए अच्‍छा नहीं कहा गया था क्‍योंकि उसमें कई कंपनियों ने अपने हजारों कर्मचारियों को बाहर कर दिया था. ऐसा करने वाली कोई एक कंपनी नहीं बल्कि छोटी से लेकर बड़ी तक कई कंपनियां इसमें शामिल थी. उनमें अल्‍फाबेट के अलावा डेलॉय और दूसरी कंपनियां शामिल रही हैं. अमेजन ने 18000 लोगों को बाहर करने का ऐलान किया था तो माइक्रोसॉफ्ट ने 10 हजार कर्मचारियों को बाहर करने की बात कही थी. कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो साल की शुरुआत में कई कंपनियों ने अपनी ऑपरेटिंग कॉस्‍ट को कम करने के साथ-साथ कई दूसरी वजहों को लेकर ले ऑफ की बात कही थी.  

 


 


टियर-2 शहरों में बस रहा भारत के रियल एस्टेट का भविष्य, लखनऊ, नागपुर और कोयंबटूर बने नए हॉटस्पॉट

CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच देश के प्रमुख टियर-2 शहरों में आवासीय मांग 14% की सालाना दर से बढ़ी, जबकि लखनऊ, नागपुर और कोयंबटूर जैसे शहरों में यह वृद्धि करीब 20% रही.

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Friday, 10 July, 2026
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भारत का रियल एस्टेट बाजार अब केवल दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रहा. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज शहरीकरण और बढ़ते रोजगार के अवसरों के चलते टियर-2 शहर निवेश और हाउसिंग डिमांड के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं. क्रिसिल (CRISIL) की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच देश के प्रमुख टियर-2 शहरों में आवासीय मांग 14% की सालाना दर से बढ़ी, जबकि लखनऊ, नागपुर और कोयंबटूर जैसे शहरों में यह वृद्धि करीब 20% रही.

टियर-2 शहरों की ओर बढ़ रहा है खरीदारों का रुझान

क्रिसिल की 'हाउसिंग हॉटस्पॉट्स' रिपोर्ट के अनुसार, देश के 10 प्रमुख टियर-2 शहर अब रियल एस्टेट सेक्टर के नए ग्रोथ सेंटर बन रहे हैं. इन शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों ने आवासीय बाजार को नई गति दी है. यही वजह है कि अब घर खरीदारों और निवेशकों की दिलचस्पी पारंपरिक महानगरों से हटकर इन शहरों की ओर बढ़ रही है.

बड़े और प्रीमियम घरों की बढ़ी मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में कुल आवासीय आपूर्ति में 2BHK और 3BHK घरों की हिस्सेदारी 75% से अधिक रही. वहीं, प्रीमियम सेगमेंट में बड़े आकार के घरों की मांग लगातार बढ़ी है. इससे साफ है कि खरीदार अब बेहतर सुविधाओं और अधिक खुले रहने के स्थान को प्राथमिकता दे रहे हैं.

₹2 करोड़ से अधिक के घरों की बढ़ी हिस्सेदारी

इंदौर, लखनऊ और सूरत जैसे शहर अब प्रीमियम हाउसिंग मार्केट के रूप में तेजी से उभर रहे हैं. इन शहरों में सक्रिय आवासीय आपूर्ति का 20% से अधिक हिस्सा 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों का है. रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेक्टर के विस्तार और उद्यमियों की बढ़ती आय ने इस ट्रेंड को मजबूती दी है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉर्पोरेट विस्तार से मिल रही रफ्तार

विशेषज्ञों के मुताबिक, नए एक्सप्रेसवे, क्षेत्रीय एयरपोर्ट, बेहतर सड़क नेटवर्क और मेट्रो परियोजनाओं ने टियर-2 शहरों को बड़े आर्थिक केंद्रों से जोड़ दिया है. वहीं, वर्क-फ्रॉम-होम और वर्कफोर्स के विकेंद्रीकरण के चलते कई कंपनियां इन शहरों में सैटेलाइट ऑफिस खोल रही हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और हाउसिंग की मांग दोनों बढ़ रही हैं.

लग्जरी हाउसिंग का बढ़ रहा बाजार

पहले जहां टियर-2 शहरों का रियल एस्टेट स्थानीय डेवलपर्स तक सीमित था, वहीं अब यहां राष्ट्रीय स्तर की रियल एस्टेट कंपनियां भी तेजी से निवेश कर रही हैं. गेटेड कम्युनिटी, स्मार्ट होम, हरित क्षेत्र और प्रीमियम सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है. लखनऊ और कोयंबटूर जैसे शहरों में खरीदार अब महानगरों जैसी लाइफस्टाइल की उम्मीद कर रहे हैं.

स्मार्ट सिटीज मिशन से मिली नई दिशा

स्मार्ट सिटीज मिशन ने भी इन शहरों के विकास में अहम भूमिका निभाई है. इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट, जल आपूर्ति और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाओं ने शहरों की कार्यक्षमता में सुधार किया है. इससे इन शहरों में निवेश और रियल एस्टेट विकास की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर के अनुसार, भारत के शहरी विकास का अगला चरण टियर-2 शहरों से संचालित होगा. उनका कहना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इन शहरों में लोगों की आकांक्षाएं और प्रीमियम जीवनशैली की मांग तेजी से बढ़ रही है. खासकर लखनऊ जैसे शहर दीर्घकालिक रियल एस्टेट विकास के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई देते हैं. 
मेट्रो, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट विस्तार जैसी परियोजनाएं निश्चित रूप से शहर की विकास क्षमता को मजबूत कर रही हैं, लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव यहां के लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं और आत्मविश्वास में दिखाई देता है. आज के खरीदार सोच-समझकर डिजाइन किए गए घर, बेहतर सुविधाएं और ऐसे समुदाय चाहते हैं, जहां अपनापन महसूस हो. आवास की मांग लगातार आपूर्ति से अधिक बनी हुई है और शहर का आर्थिक एवं सामाजिक ढांचा लगातार मजबूत हो रहा है. हमारा मानना है कि लखनऊ दीर्घकालिक विकास के लिए पूरी तरह तैयार है और यहां ऐसे समुदाय विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं, जिन पर लोग गर्व कर सकें.

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां टियर-1 शहरों का रियल एस्टेट बाजार धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है, वहीं टियर-2 शहर अभी विकास के शुरुआती चरण में हैं. बेहतर रिटर्न की संभावना, बढ़ती आबादी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए अवसर इन्हें भविष्य के सबसे आकर्षक रियल एस्टेट बाजारों में शामिल कर रहे हैं.
 


Gen Z और टियर-2 शहरों ने बढ़ाई फ्लिपकार्ट की रफ्तार, फूड एंड न्यूट्रिशन बिजनेस 50% बढ़ा: रिपोर्ट

कंपनी के मुताबिक, कुल मांग का 65% हिस्सा टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आया, जबकि 25% ऑर्डर Flipkart Minutes के जरिए पूरे किए गए.

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Friday, 10 July, 2026
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भारत में हेल्दी, प्रीमियम और मॉडर्न फूड प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा फ्लिपकार्ट (Flipkart) को मिला है. कंपनी के अनुसार, उसकी फूड एंड न्यूट्रिशन कैटेगरी में सालाना आधार पर 50% की वृद्धि दर्ज की गई है. इस ग्रोथ में Gen Z उपभोक्ताओं, टियर-2 और उससे छोटे शहरों की बढ़ती हिस्सेदारी तथा क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart Minutes की अहम भूमिका रही है.

हेल्दी और प्रीमियम फूड की ओर बढ़ रहा है ग्राहकों का रुझान

फ्लिपकार्ट ने बताया कि उसके फूड एंड न्यूट्रिशन कारोबार में सालाना आधार पर 50% की वृद्धि हुई है. इस तेजी में धुलिया, इंफाल, धारवाड़, उज्जैन, हुबली, मीरगंज और लहरपुर जैसे टियर-2 और छोटे शहरों के ग्राहकों का बड़ा योगदान रहा. कंपनी के मुताबिक, कुल मांग का 65% हिस्सा टियर-2 और उससे छोटे शहरों से आया, जबकि 25% ऑर्डर Flipkart Minutes के जरिए पूरे किए गए.

Gen Z बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन

रिपोर्ट के अनुसार, इस कैटेगरी की कुल सालाना वृद्धि में लगभग 60% योगदान Gen Z उपभोक्ताओं का रहा. सोशल मीडिया, फूड क्रिएटर्स और वेलनेस ट्रेंड्स से प्रभावित युवा प्रोटीन ओट्स, हाई-प्रोटीन पीनट बटर, प्रोटीन म्यूसली, गॉरमे चॉकलेट और कोरियन फ्लेवर वाले स्नैक्स जैसे प्रोडक्ट्स तेजी से खरीद रहे हैं. इन प्रोडक्ट्स की मांग खासकर बेंगलुरु और नई दिल्ली जैसे बड़े शहरों में अधिक देखी गई.

महिलाओं और पुरुषों की खरीदारी में भी बदला ट्रेंड

कंपनी के मुताबिक, पुरुष ग्राहकों में नट्स, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट और जैम-एंड-स्प्रेड्स की मांग बढ़ी है. वहीं महिला ग्राहक वैल्यू-एडेड चाय, कॉफी और खाने योग्य बीज (Edible Seeds) को प्राथमिकता दे रही हैं. इससे फंक्शनल न्यूट्रिशन और प्रीमियम स्नैकिंग सेगमेंट को बढ़ावा मिला है.

छोटे शहरों में बढ़ी वेलनेस प्रोडक्ट्स की मांग

फ्लिपकार्ट के अनुसार, टियर-2 और टियर-3 शहरों के ग्राहक अब कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल, ऑलिव ऑयल, प्रोटीन ओट्स, प्रोटीन म्यूसली, प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स, ऑथेंटिक घी और खजूर (Dates) जैसे हेल्दी प्रोडक्ट्स तेजी से खरीद रहे हैं. पिछले एक साल में इन प्रोडक्ट्स की ऑनलाइन सर्च करीब 80% बढ़ी है, जो छोटे शहरों में बदलती लाइफस्टाइल और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है.

Flipkart Minutes की बढ़ती भूमिका

कंपनी ने बताया कि उसकी क्विक कॉमर्स सेवा Flipkart Minutes अब फूड एंड न्यूट्रिशन कैटेगरी की कुल मांग का 25% पूरा कर रही है. इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता अब तेजी से डिलीवरी और सुविधा को भी प्राथमिकता दे रहे हैं.

फूड फेस्ट 3.0 में दिखी फूड कॉमर्स की नई तस्वीर

फ्लिपकार्ट ने अपने तीसरे Food Fest का भी आयोजन किया, जिसमें 50 से अधिक प्रमुख फूड एवं बेवरेज ब्रांड, 1,000 से ज्यादा क्रिएटर्स और कई सेलिब्रिटी शेफ व कलाकार शामिल हुए. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 10 से अधिक नए प्रोडक्ट लॉन्च किए गए और चोकोलैंड, ब्रेकफास्ट, बेवरेज तथा किचन स्टेपल्स जैसे थीम आधारित अनुभव तैयार किए गए.

फ्लिपकार्ट के वाइस प्रेसिडेंट (कंज्यूमेबल्स) निशांत दलाल ने कहा कि भारत में भोजन अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि वेलनेस, पहचान और नई चीजों को आजमाने का माध्यम बनता जा रहा है. उनके अनुसार, डिजिटल कॉमर्स ने देशभर के उपभोक्ताओं तक बेहतर और आधुनिक फूड विकल्प पहुंचाना आसान बना दिया है, जबकि छोटे-बड़े ब्रांडों को भी तेजी से बढ़ने का अवसर मिल रहा है.
 


फूड सर्विस इंडस्ट्री में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 150 अरब डॉलर का होगा बाजार: रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक संगठित फूड सर्विसेज सेक्टर की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 17-18% रहने का अनुमान है. वहीं असंगठित बाजार की ग्रोथ केवल 3-4% रहने की उम्मीद है.

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Friday, 10 July, 2026
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भारत का फूड सर्विसेज बाजार अगले पांच वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की ओर है. रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती सुविधा-आधारित खपत, संगठित रेस्तरां चेन की लोकप्रियता और ऑनलाइन फूड डिलीवरी के विस्तार के दम पर यह बाजार 2025 के करीब 90 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

संगठित फूड सर्विसेज सेक्टर की होगी तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक संगठित (Organised) फूड सर्विसेज सेक्टर की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 17-18% रहने का अनुमान है. वहीं असंगठित (Unorganised) बाजार की ग्रोथ केवल 3-4% रहने की उम्मीद है.

संगठित कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 2025 में 45-50% से बढ़कर 2030 तक 60-70% हो सकती है. यह दर्शाता है कि उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से ब्रांडेड रेस्तरां और फूड सर्विस चेन की ओर बढ़ रहा है.

ऑनलाइन फूड डिलीवरी बनेगी सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी उद्योग की सबसे बड़ी ग्रोथ इंजन बनी रहेगी. वित्त वर्ष 2026 में कुल फूड सर्विसेज बाजार में ऑनलाइन डिलीवरी की हिस्सेदारी 11% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 18% हो सकती है. इस वृद्धि के पीछे डिजिटल अपनाने की बढ़ती दर और टियर-2 तथा छोटे शहरों से बढ़ती मांग प्रमुख वजह है.

छोटे शहरों में तेजी से बढ़ा ऑनलाइन ऑर्डर

रेडसीर के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 के बाद से टियर-2 और छोटे शहरों में फूड डिलीवरी ट्रांजैक्शन लगभग तीन गुना बढ़ चुके हैं. वहीं हर महीने ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले सक्रिय उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1 करोड़ से बढ़कर लगभग 3 करोड़ हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, नई पीढ़ी के फूड ब्रांड अपनी करीब 90% आय ऑनलाइन माध्यम से हासिल कर रहे हैं, जबकि पारंपरिक रेस्तरां चेन के लिए यह आंकड़ा लगभग 50% है. इससे डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस मॉडल की बढ़ती अहमियत साफ होती है.

क्लाउड किचन और प्रीमियम ब्रांड्स से मिलेगी रफ्तार

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज वृद्धि के बावजूद भारत का संगठित फूड सर्विसेज उद्योग अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है. देश में 1,000 से अधिक संगठित फूड सर्विस कंपनियां हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 2% कंपनियों का सालाना राजस्व 500 करोड़ रुपये से अधिक है. इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावनाएं अभी भी मौजूद हैं.

रेडसीर के अनुसार, क्लाउड किचन मॉडल, सीमित लेकिन फोकस्ड मेन्यू और प्रीमियम ब्रांड पोजिशनिंग कंपनियों की लाभप्रदता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

स्नैक्स, डेजर्ट और बेवरेज सेगमेंट में सबसे ज्यादा अवसर

रिपोर्ट में स्नैक्स, डेजर्ट और पेय पदार्थ (बेवरेज) को सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट बताया गया है. खासतौर पर प्रीमियम चाय और कॉफी चेन के व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना जताई गई है. इसकी वजह बेहतर मार्जिन और स्टोर स्तर पर मजबूत ग्रोथ मानी गई है.
 


सरकार ने दी Dixon-Vivo डील को हरी झंडी, भारत में मिलकर बनाएंगे स्मार्टफोन

नई कंपनी में Dixon Technologies की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि Vivo Mobile India के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी. बहुमत हिस्सेदारी होने के कारण नई इकाई का नियंत्रण Dixon के पास रहेगा.

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Friday, 10 July, 2026
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घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Dixon Technologies और चीन की स्मार्टफोन कंपनी Vivo की भारतीय इकाई Vivo Mobile India के संयुक्त उद्यम (JV) को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है. इस मंजूरी के साथ दोनों कंपनियां भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार देंगी. JV में Dixon की 51% और Vivo Mobile India की 49% हिस्सेदारी होगी. इस खबर के बाद निवेशकों का उत्साह भी बढ़ा और Dixon Technologies के शेयर में तेजी भी देखने को मिली है.  

दिसंबर 2024 में हुआ था समझौता

Dixon Technologies ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि Vivo Mobile India के साथ प्रस्तावित जॉइंट वेंचर को सरकार की मंजूरी मिल गई है. दोनों कंपनियों ने इस साझेदारी के लिए दिसंबर 2024 में समझौता किया था. अब नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद संयुक्त उद्यम औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकेगा.

Dixon के पास रहेगा कंट्रोल

नई कंपनी में Dixon Technologies की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि Vivo Mobile India के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी. बहुमत हिस्सेदारी होने के कारण नई इकाई का नियंत्रण Dixon के पास रहेगा. यह जॉइंट वेंचर केवल Vivo के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में अन्य स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं उपलब्ध करा सकेगा.

सरकार की मंजूरी क्यों थी जरूरी?

Vivo चीन की मूल कंपनी से जुड़ा ब्रांड है. भारत में चीन सहित पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर लागू प्रेस नोट-3 के तहत ऐसे निवेश या संयुक्त उद्यम के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है. इसी प्रावधान के तहत इस JV को भी स्वीकृति दी गई है.

सरकार ने मार्च 2026 में प्रेस नोट-3 के कुछ प्रावधानों में राहत दी थी. नए नियमों के अनुसार कुछ मामलों में 10% तक की गैर-नियंत्रण (Non-controlling) हिस्सेदारी के लिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि, नियंत्रण वाले संयुक्त उद्यमों के लिए सरकारी अनुमति अब भी अनिवार्य है.

Dixon को मिलेगा बड़ा कारोबारी फायदा

कंपनी का मानना है कि इस साझेदारी से उसकी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. साथ ही एंड्रॉयड स्मार्टफोन सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी. JV के जरिए कंपनी को नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 


AI और इनोवेशन से बदलेगी भारत की तस्वीर, 2030 तक खुलेंगे 5,000 GCC: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अब केवल कम लागत वाले सेवा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और बौद्धिक संपदा (IP) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है.

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Friday, 10 July, 2026
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भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा विजन पेश किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2030 तक देश में 5,000 GCC स्थापित करने का लक्ष्य रखा और इसे पूरी तरह हासिल किया जा सकने वाला बताया. उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कम लागत वाले सेवा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और बौद्धिक संपदा (IP) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है.

वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का दिया संदेश

'CII GCC Business Summit 2026' को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि GCCs को अब केवल बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्हें वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ते हुए बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने, रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) में नेतृत्व करने, AI आधारित समाधान तैयार करने, उत्पाद डिजाइन का स्वामित्व लेने और वैश्विक नवाचार को गति देने पर ध्यान देना होगा.

2030 तक 5,000 GCC का लक्ष्य

निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2030 तक भारत में 5,000 GCC स्थापित करने का लक्ष्य यथार्थवादी और पूरी तरह हासिल किया जा सकने वाला है. उन्होंने बताया कि Fortune Global 2000 की करीब दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में अपना GCC स्थापित नहीं किया है, जिससे भविष्य में निवेश और विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं.

भारत में 2,100 से ज्यादा GCC, 23 लाख लोगों को रोजगार

वित्त मंत्री के मुताबिक, वर्तमान में भारत में 2,100 से अधिक GCC संचालित हो रहे हैं, जहां करीब 23 लाख पेशेवर कार्यरत हैं. इन केंद्रों से हर साल लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है. उन्होंने बताया कि Forbes Global 2000 की 500 से अधिक कंपनियां भारत में GCC स्थापित कर चुकी हैं और दुनिया के आधे से अधिक GCC अब भारत में मौजूद हैं.

अब हर दिन खुल रहा नया GCC

सीतारमण ने कहा कि भारत में GCC विस्तार की रफ्तार लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2024 में जहां हर सप्ताह एक नया GCC स्थापित हो रहा था, वहीं अब औसतन हर दिन एक नया केंद्र शुरू हो रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि नए स्थापित होने वाले आधे से अधिक GCC 'AI-First' मॉडल पर आधारित हैं.

AI से बढ़ेगा अवसर, लेकिन चुनौतियां भी रहेंगी

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन GCC के लिए चुनौती बन सकता है, जो कम लागत वाले और बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यों पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि भारत को AI को केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अवसर के रूप में अपनाना होगा ताकि वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी बढ़त बनाए रख सके.

टियर-2 शहर बनेंगे अगला ग्रोथ इंजन

वित्त मंत्री ने कहा कि GCC का अगला विस्तार केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. वाराणसी, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम, तिरुचिरापल्ली और मैसूरु जैसे उभरते शहर भी भविष्य के इनोवेशन हब बन सकते हैं. उन्होंने बताया कि कम से कम 10 राज्यों ने GCC नीति लागू की है या उस पर काम कर रहे हैं.

'लो-कॉस्ट' से 'हाई-कैपेबिलिटी' तक भारत की पहचान

सीतारमण ने कहा कि भारत की पहचान अब केवल कम लागत पर सेवाएं देने वाले देश की नहीं रही. देश तेजी से उच्च क्षमता, नवाचार, AI, पेटेंट, एल्गोरिद्म, प्लेटफॉर्म और वैश्विक उत्पाद विकास के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. आने वाले दशक में भारत की सफलता GCC की संख्या से नहीं, बल्कि यहां से विकसित होने वाले वैश्विक विचारों और तकनीकों से तय होगी.
 


AI कारोबार के दम पर चमकी TCS, पहली तिमाही में मुनाफा 4.6% बढ़कर ₹13,349 करोड़

पहली तिमाही में TCS के AI कारोबार ने मजबूत वृद्धि दर्ज की. कंपनी ने बताया कि AI से होने वाला राजस्व बढ़कर 2.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 13.6% अधिक है.

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Friday, 10 July, 2026
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देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कारोबार और बड़े डील्स के दम पर कंपनी की आय और मुनाफा दोनों में बढ़ोतरी दर्ज हुई. तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ 4.6% बढ़कर ₹13,349 करोड़ रहा, जबकि राजस्व 13.9% बढ़कर ₹72,275 करोड़ पहुंच गया. कंपनी का प्रदर्शन राजस्व के मामले में बाजार के अनुमानों से बेहतर रहा.

AI कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

पहली तिमाही में TCS के AI कारोबार ने मजबूत वृद्धि दर्ज की. कंपनी ने बताया कि AI से होने वाला राजस्व बढ़कर 2.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 13.6% अधिक है. अब कंपनी के कुल राजस्व में AI कारोबार की हिस्सेदारी करीब 9% हो गई है.

आय और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी

अप्रैल-जून तिमाही में TCS का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 4.6% बढ़कर ₹13,349 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹12,760 करोड़ था. वहीं, कंपनी का राजस्व 13.9% बढ़कर ₹72,275 करोड़ पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह ₹63,437 करोड़ था. तिमाही-दर-तिमाही आधार पर कंपनी की आय में 2.2% की वृद्धि हुई, जबकि स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर 0.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

राजस्व में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन

राजस्व के मामले में TCS ने बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया. ब्लूमबर्ग ने कंपनी के लिए ₹71,862 करोड़ के राजस्व और ₹13,394 करोड़ के शुद्ध लाभ का अनुमान लगाया था. हालांकि मुनाफा अनुमान से थोड़ा कम रहा, लेकिन आय में कंपनी का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा.

AI से जुड़े कई बड़े सौदे मिले

तिमाही के दौरान TCS ने AI आधारित कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए. इनमें SKF के साथ 80 करोड़ डॉलर का बड़ा सौदा और ServiceNow के साथ मल्टी-मिलियन डॉलर का करार शामिल है. कंपनी के अनुसार, पिछले पांच तिमाहियों में उसने AI क्षेत्र में छह बड़े रणनीतिक सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं.

ऑर्डर बुक मजबूत बनी रही

पहली तिमाही में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक (TCV) 9.5 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल की समान अवधि के 9.4 अरब डॉलर से अधिक है. हालांकि यह पिछली तिमाही के 12 अरब डॉलर के मुकाबले कम रही. कुल TCV में उत्तरी अमेरिका का योगदान 4.7 अरब डॉलर, BFSI सेक्टर का 2.5 अरब डॉलर और कंज्यूमर बिजनेस का 1.4 अरब डॉलर रहा.

दूसरी तिमाही को लेकर जताया भरोसा

TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक के. कृत्तिवासन ने कहा कि भू-राजनीतिक और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने पहली तिमाही में लगातार वृद्धि बनाए रखी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरी तिमाही में मांग में सुधार देखने को मिलेगा और कंपनी आगे भी सकारात्मक प्रदर्शन जारी रखेगी.

भारतीय कारोबार में तेज वृद्धि

घरेलू बाजार में भी TCS का प्रदर्शन मजबूत रहा. कंपनी के भारतीय कारोबार में सालाना आधार पर 22.9% और पिछली तिमाही की तुलना में 7.6% की वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आईटी सेवाओं की मजबूत मांग को दर्शाता है.
 


ग्लोबल बाजारों से मिले पॉजिटिव संकेत, आज इन शेयरों में दिख सकती है हलचल

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 238.22 अंक चढ़कर 76,741.82 और निफ्टी 80.75 अंक की तेजी के साथ 23,962.80 पर बंद हुआ.

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
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गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुए घरेलू शेयर बाजार के बाद शुक्रवार को भी मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच GIFT Nifty 100 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया समेत प्रमुख एशियाई बाजारों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिल रही है. ऐसे में आज निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों की चाल, पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों, प्रमुख कारोबारी अपडेट्स, कच्चे तेल की कीमतों और IPO बाजार से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी.

कल क्या था हाल?
गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 238.22 अंक चढ़कर 76,741.82 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 80.75 अंक की तेजी के साथ 23,962.80 पर बंद हुआ. 

GIFT Nifty ने दिए मजबूत शुरुआत के संकेत

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच शुक्रवार सुबह GIFT Nifty 100 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 24,100 के ऊपर कारोबार करता दिखा. इससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत मजबूत रह सकती है और शुरुआती कारोबार में खरीदारी का माहौल देखने को मिल सकता है.

एशियाई बाजारों में जोरदार खरीदारी

एशियाई शेयर बाजारों में भी शुक्रवार को अच्छी तेजी दर्ज की गई. टेक्नोलॉजी, चिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में खरीदारी बढ़ने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ. जापान का निक्केई 225 करीब 2.3% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4% से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा. इसका सकारात्मक असर अन्य एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला.

अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.27%, एसएंडपी 500 में 0.81% और नैस्डैक कंपोजिट में 1.3% की तेजी दर्ज की गई. अमेरिकी बाजारों की मजबूती ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है.

कच्चे तेल में नरमी, सोना-चांदी पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों से बाजार को राहत मिली, जिससे ब्रेंट क्रूड करीब 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा. वहीं, कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में दबाव रहा. दोनों की वायदा कीमतों में करीब 0.3% की गिरावट दर्ज की गई.

इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार,  आज निवेशकों की नजर आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS पर रहेगी. पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसके अलावा कई और कंपनियों के शेयर भी फोकस में रह सकते हैं. जैसे Sunteck Realty में Fidelity Investment Trust ने करीब ₹32.33 करोड़ के शेयर खरीदे हैं, जबकि Schroder International Selection Fund ने ₹42.47 करोड़ के शेयर बेचे हैं. Cognizant ने 15,000 AI प्रोफेशनल्स तैयार करने और वैश्विक स्तर पर AI टैलेंट हायर करने की योजना घोषित की है. Nissan India ने FY28 तक घरेलू बिक्री और निर्यात को 1-1 लाख यूनिट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. Knack Packaging में Bank of India Mutual Fund ने ₹13.76 करोड़ का निवेश किया है. Dixon Technologies ने Vivo Mobile India के साथ 51:49 हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर बनाने का समझौता किया है. Vikram Solar ने Evervolt Solar Technology India के साथ 130 मेगावाट सोलर सेल सप्लाई का करार किया है. Power Grid को एक बड़े ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है. Havells India ने नॉर्वे की Pixii AS के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की है. Greaves Cotton ने Greaves Electric Mobility के राइट्स इश्यू में ₹331.12 करोड़ तक निवेश को मंजूरी दी है. Restaurant Brands Asia के 20.81 करोड़ शेयरों के लिए ₹1,464.55 करोड़ का ओपन ऑफर आया है. वहीं, Torrent Pharmaceuticals ने एहतियात के तौर पर Semalix Injection Disposable Pens के कुछ बैच वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन सभी कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते आज इन शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


आज से खुला ₹742 करोड़ का Laser Power & Infra IPO, जानें प्राइस बैंड, GMP और पूरी डिटेल

यह पब्लिक इश्यू 13 जुलाई तक खुला रहेगा, जबकि कंपनी के शेयर 16 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने की संभावना है.

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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कोलकाता स्थित पावर केबल और कंडक्टर निर्माता कंपनी Laser Power & Infra का ₹742 करोड़ का शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) गुरुवार, 9 जुलाई से निवेशकों के लिए खुल गया है. IPO खुलने से एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹222.6 करोड़ जुटाए. यह पब्लिक इश्यू 13 जुलाई तक खुला रहेगा, जबकि कंपनी के शेयर 16 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने की संभावना है.

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹223 करोड़

IPO लॉन्च से पहले 8 जुलाई को कंपनी ने 15 संस्थागत निवेशकों को 1.04 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित कर ₹222.6 करोड़ जुटाए. इन एंकर निवेशकों में सोसाइटी जेनरल, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस, मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट, बंधन म्यूचुअल फंड और एडेलवाइस समेत कई बड़े संस्थागत निवेशक शामिल रहे.

₹203-214 प्रति शेयर तय हुआ प्राइस बैंड

कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड ₹203 से ₹214 प्रति शेयर तय किया है. निवेशकों को कम से कम 70 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा. इसके बाद निवेशक 70 शेयरों के गुणकों में बोली लगा सकेंगे.

ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई नरमी

IPO खुलने से पहले ग्रे मार्केट में Laser Power & Infra के शेयरों को लेकर उत्साह कुछ कम हुआ है. Investorgain के अनुसार, कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 6 जुलाई को ₹28 था, जो 8 जुलाई तक घटकर ₹19 रह गया. मौजूदा GMP के आधार पर शेयर करीब 10% प्रीमियम पर लिस्ट होने का संकेत मिल रहा है. हालांकि, GMP केवल अनौपचारिक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन इससे अलग हो सकता है.

फ्रेश इश्यू और OFS का होगा मिश्रण

₹742 करोड़ के इस IPO में ₹542 करोड़ के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा शेयरधारक ₹200 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे. यह इश्यू 13 जुलाई तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा.

DRHP के मुकाबले घटाया गया IPO का आकार

कंपनी ने सितंबर 2025 में दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में ₹1,200 करोड़ का IPO प्रस्तावित किया था. बाद में इसका आकार घटाकर ₹742 करोड़ कर दिया गया. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने फरवरी 2026 में कंपनी को IPO लाने की मंजूरी दी थी.

लिस्टिंग के बाद ₹3,000 करोड़ से अधिक होगी मार्केट वैल्यू

प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर ₹214 प्रति शेयर के आधार पर कंपनी का अनुमानित बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लिस्टिंग के बाद करीब ₹3,004 करोड़ होगा.

निवेशकों के लिए कितना आरक्षण?

IPO का 50% हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs) के लिए आरक्षित है. वहीं 15% हिस्सा गैर-संस्थागत निवेशकों (NIIs) और शेष 35% हिस्सा खुदरा (रिटेल) निवेशकों के लिए रखा गया है.

अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीख

IPO का अलॉटमेंट 14 जुलाई को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. इसके बाद कंपनी के शेयर 16 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं.

जुटाई गई राशि का कैसे होगा इस्तेमाल?

कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से ₹490 करोड़ का उपयोग अपने कर्ज का भुगतान करने में करेगी. शेष राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा. 17 जून 2026 तक कंपनी पर कुल ₹935.6 करोड़ का बकाया कर्ज था.

क्या करती है कंपनी?

Laser Power & Infra पावर केबल, कंडक्टर और ट्रांसमिशन से जुड़े उत्पादों का निर्माण करती है. कंपनी की पश्चिम बंगाल में तीन विनिर्माण इकाइयां हैं, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 85,448 मीट्रिक टन है.
 


भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई मजबूती: न्यूक्लियर एनर्जी, डिफेंस और क्रिटिकल मिनरल्स में हुए बड़े समझौते

दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा, ऊर्जा सहयोग पर साझा बयान और साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीकों तथा सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप जारी किया है.

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Thursday, 09 July, 2026
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भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देते हुए सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगाई है. मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, सप्लाई चेन और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ 'क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर' विकसित करने पर भी सहमति जताई.

न्यूक्लियर एनर्जी और रक्षा सहयोग को मिली नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण में ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, जहां मेलबर्न में उनकी प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई. बैठक के बाद दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा पर संयुक्त घोषणा, ऊर्जा सहयोग पर साझा बयान और साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीकों तथा सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप जारी किया.

भारत को यूरेनियम सप्लाई में करेगा सहयोग

वार्ता के दौरान सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौता सबसे अहम रहा. इसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की व्यावसायिक आपूर्ति बढ़ाने में सहयोग करेगा. इससे भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को गति मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने में मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.

इंडो-पैसिफिक में रक्षा साझेदारी होगी मजबूत

दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई. इसके तहत 'डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर' विकसित किया जाएगा और समुद्री सुरक्षा के लिए विशेष रोडमैप तैयार होगा. दोनों देश रक्षा स्टार्टअप्स, जहाज निर्माण और मरम्मत जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक केवल दो महासागरों का संगम नहीं, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान विचार वाले लोकतांत्रिक देशों की साझा आकांक्षाओं का प्रतीक भी है.

बनेगा 'क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर'

भविष्य की तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा उद्योग के लिए जरूरी लिथियम समेत अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 'क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर' विकसित करने का फैसला किया है. इससे दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत होगी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा.

व्यापार और तकनीकी सहयोग पर रहेगा फोकस

बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने और व्यापार को आसान बनाने पर भी जोर दिया. साथ ही साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीकों और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.

आतंकवाद पर सख्त संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान केवल कूटनीति और संवाद के जरिए ही संभव है. वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को वर्तमान दौर की सबसे महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताया.
 


घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, सरकार ने कई कंपोनेंट्स पर हटाई कस्टम ड्यूटी

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी पार्ट्स और मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है. यह छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी.

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनों व पुर्जों पर 31 मार्च 2029 तक कस्टम ड्यूटी में छूट देने का ऐलान किया है. इस फैसले से कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सस्ती कीमत पर मिल सकते हैं.

'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बूस्ट

भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है. इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी पार्ट्स और मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है. यह छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी. सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू विनिर्माण उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा.

उत्पादन लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए अब भी विदेशी आयात पर निर्भरता बनी हुई है. कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से कंपनियों की उत्पादन लागत कम होगी और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए निवेश आकर्षित होंगे. साथ ही 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती मिलेगी.

लिथियम-आयन बैटरी उद्योग को बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), स्मार्टफोन्स, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के निर्माण के लिए जरूरी मशीनों पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी गई है.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब बैटरी निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी 85 प्रकार की मशीनें रियायती कस्टम ड्यूटी के दायरे में आएंगी. इनमें पाउडर प्रोसेसिंग, स्लरी मिक्सिंग, कोटिंग, इलेक्ट्रोड वाइंडिंग, लेजर वेल्डिंग, टेस्टिंग, इंस्पेक्शन, पैकेजिंग और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट से जुड़ी मशीनें शामिल हैं.

डिस्प्ले कंपोनेंट्स पर भी मिली राहत

सरकार ने ऑटोमोबाइल, मेडिकल उपकरणों और औद्योगिक मशीनों में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले असेंबली के कई आयातित कंपोनेंट्स पर भी कस्टम ड्यूटी हटा दी है. अब डिस्प्ले सेल, बैकलाइट यूनिट, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA) और फ्रेम जैसे पुर्जे कम लागत पर आयात किए जा सकेंगे. हालांकि, यह छूट मोबाइल फोन, टेलीविजन, स्मार्टवॉच और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले के कंपोनेंट्स पर लागू नहीं होगी.

वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल बनाना होगा सस्ता

सरकार ने स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स पर भी कस्टम ड्यूटी में छूट दी है. इनमें NFC, इंडक्टर कॉइल, नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, PET लाइनर, PC शिम और NdFeB मैग्नेट जैसे पुर्जे शामिल हैं. इससे भविष्य में भारत में वायरलेस चार्जिंग तकनीक का स्थानीय उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.

उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जब कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी तो इसका फायदा धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक भी पहुंचेगा. भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और ग्राहकों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद मिलने की संभावना बढ़ेगी. इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से रोजगार सृजन, तकनीकी निवेश और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.