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रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत भी हुआ है प्रभावित, सप्लाई चेन पर पड़ा है असर
2024 में भारत ही में ही नहीं बल्कि 15 देशों में चुनाव होने जा रहे हैं. जैसा कि मेरे साथी ने यहां बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी कहा गया है कि ये दुनिया में मौजूदा समय में सबसे बड़ा रिस्क है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
BW Security के दिल्ली में हुए इवेंट में कई अहम बातों लेकर एक्सपर्ट ने अपनी बातें रखी. इस सेशन में इजराइल हमास लेकर रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध से प्रभावित हो रहे कारोबार को लेकर सभी एक्सपर्ट ने अपनी बात कही. इस सेशन में जहां एक्सपर्ट ने क्लाइमेट चेंज को लेकर अपनी बात कही वहीं दूसरी ओर कई देशों में होने वाले चुनावों के चलते होने वाले असर को लेकर भी अपनी बात कही. इस सेशन में Highstuff Services के COO, Lt Col Sanjay Sehgal, Credit Suisse,
के Former Executive Director, Sanjeev Sabharwal, APAC, Securitas की Regional Security Advisor- अक्षिता माथुर, Advisory Leader-DridhG Security International के Safety & Risk Management Expert, Capt Ashok Datta, Global Security Manager India and SE Asia के Director- Maj Vashita Mehra (Retd) CPP, PSP, PCI CSP, CATS मौजूद रहे.
हूती विद्रोहियों से प्रभावित हुआ कारोबर
Services के COO, Lt Col Sanjay Sehgal, Credit Suisse,
के Former Executive Director, Sanjeev Sabharwal, ने कहा कि मीडिल ईस्ट में इजराइल और हमास के बीच चल रहा युद्ध सिर्फ किसी एक देश को ही प्रभावित नहीं कर रहा है बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है. इजराइल और हमास के बीच युद्ध अक्टूबर में शुरू हुआ था. इस यमन में मौजूद एक हमलावर गैंग ने व्यापारी जहाजों को निशाना बना दिया. सवाल ये है कि आखिर ये हूती विद्रोही हैं कौन? ये यमन के रहने वाले वो लोग हैं जो शिया समुदाय से संबंध रखते हैं. इस आंदोलन की शुरूआत अल हाउती ने की थी वहीं से इन उग्रवादियों को हाउती विद्रोही कहा जाने लगा.
यमन में आज भी एक बड़े हिस्से पर हाउती विद्रोहियों का ही राज है, और वो वहां अपनी समानांतर सरकार चलाते हैं. उनकी अपनी करेंसी हैं अपना सिस्टम है और अपनी ही कई दूसरी व्यवस्थाएं हैं. क्योंकि इन लोगों को ईरान से समर्थन मिला हुआ है तो ऐसे में ये इजराइल के पूरी तरह से खिलाफ हैं. इन्होंने इजराइल के कार्गो को निशाना बनाना शुरू कर दिया. इनके पास कई तरह के हथियार भी हैं. लेकिन पिछले कई महीनों से इन्होंने नॉन इजराइली जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया था. इसके कारण 30 प्रतिशत कार्गो व्यापार प्रभावित हुआ है. इससे इंडिया भी प्रभावित हुआ है क्योंकि भारत से यूरोप जाने का रास्ता वही सबसे नजदीकी है.
रूस यूक्रेन के कारण सप्लाई चेन पर असर
Advisory Leader-DridhG Security International के Safety & Risk Management Expert, Capt Ashok Datta ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच की लड़ाई को 2 साल से ज्यादा का समय हो चुका है, और रूक मजबूत हो रहा है. यूक्रेन को जहां NATO देशों से समर्थन मिल रहा है. अगर यूएस अपना समर्थन वापस ले लेता है तो यूक्रेन आज नहीं कल हार ही जाएगा. तरीबन 13 प्रतिशत हिस्सा पहले ही रूस के द्वारा कब्जा कर लिया गया है.
मुझे लगता है कि अमेरिका में होने वाले चुनाव इस युद्ध पर एक बड़ा असर डालेंगे.इस युद्ध के कारण हमारी सप्लाई चेन पर होने वाले असर को लेकर पहले दिन से ही आशंका जताई जाती रही है. सबसे बड़ी बात ये भी है कि अमेरिका चाइना के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं. इसके कारण इंडिया भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.यूक्रेन में मौजूद कंपनियां जो भारतीय सेना को इंजन और स्पेयर पार्ट्स सप्लाई कर रही थी वो अब नहीं कर पा रही हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि आप सप्लाई चेन को कैसे मैनेज करते हैं.
क्लाइमेट चेंज का असर तेजी से हो रहा है
Credit Suisse, Highstuff Services के COO, Lt Col Sanjay Sehgal ने कहा कि अभी तक हमने जियो पॉलिटिक्स के बारे में बहुत कुछ सुना है. मैं एक दूसरे एक्सिस पर बात करना चाहता हूं जिसके केन्द्र में क्लाइमेट चेंज है. ये बहुत ही तेजी से बदल रहा है और ये बिजनेस को प्रभावित कर रहा है. क्लाइमेट चेंज कोई शॉर्ट टर्म चीजों को प्रभावित नहीं कर रहा है बल्कि लॉन्ग टर्म असर छोड़ रहा है. वैसे हम बिजनेस में लॉन्ग टर्म प्रोवीजन करते हैं लेकिन शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म चीजें बड़ा असर छोड़ती हैं.क्लाइमेट चेंज एक रिस्क है जो दुनिया के पांच सबसे बड़े रिस्क में शामिल है. क्लाइमेट चेंज डे टू डे बिजनेस को प्रभावित कर रहा है. क्लाइमेट चेंज मुख्य रूप से तीन चीजों के तौर पर सामने आता है जिसमें भूकंप, अर्थ क्विक, और फायर की समस्या सामने आती है. पहले आग लगने की घटनाएं गर्मियों के मौसम में होती थी लेकिन अब ये पूरे साल हो रही हैं, जिससे बिजनेस बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं.
राजनीतिक अस्थिरता बहुत बड़ी चिंता है
APAC, Securitas की Regional Security Advisor- अक्षिता माथुर ने कहा कि 2024 में भारत ही में ही नहीं बल्कि 15 देशों में चुनाव होने जा रहे हैं. जैसा कि मेरे साथी ने यहां बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी कहा गया है कि ये दुनिया में मौजूदा समय में सबसे बड़ा रिस्क है. राजनीतिक अस्थिरता एक बहुत बड़ी चिंता बना हुआ है. अगर भारत की बात करें तो हमारे पड़ोसी देशों में भी कई देशों में चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में इन सभी बातों को समझते हुए सबसे अहम ये है कि हम हम एक कंपनी होने के नाते अपने कर्मचारियों अपने प्रॉफिट और दूसरी परिस्थितियों के बारे में कैसे सोच रहे हैं. इस बार के चुनावों में धु्रवीकरण और डीपफेक काफी बड़े मुद्दे होने जा रहे हैं.
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