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Akasa Air के साथ हुई इस घटना में पूरी इंडस्ट्री के लिए छिपा है एक सबक

अकासा एयरलाइन के 43 पायलट्स बिना नोटिस पीरियड सर्व किए कंपनी छोड़कर चले गए हैं. उनके टाटा समूह का दामन थमने की खबर है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

एविएशन सेक्टर के लिए 'अच्छे दिन' लौट रहे हैं. घरेलू विमान यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है और आगे भी यही स्थिति बने रहने की संभावना है. इस बीच, दिवंगत इन्वेस्टर राकेश झुनझुनवाला की कंपनी 'अकासा एयरलाइन' के साथ कुछ ऐसा हुआ है, जिसने पूरी इंडस्ट्री को कुछ बातों पर गौर करने के लिए मजबूर कर दिया है. अकासा 43 पायलटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है. कंपनी का कहना है कि इन पायलट्स के चलते उसे न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि कंपनी की इमेज भी प्रभावित हुई.

नुकसान की भरपाई करें Pilot
चलिए सबसे पहले जानते हैं कि आखिर पूरा मामला है क्या. दरअसल, Akasa Air का आरोप है कि उसके 43 पायलट्स ने नोटिस पीरियड सर्व किए बिना नौकरी छोड़ दी. इन सभी पायलट्स ने दूसरी कंपनी के लिए अकासा की नौकरी छोड़ी, लेकिन नियमानुसार नोटिस पीरियड पूरा नहीं किया. नियमों के मुताबिक उन्हें छह महीने का नोटिस पीरियड पूरा करने के बाद अपनी सेवाएं बंद करनी चाहिए थी. कंपनी का दावा है कि पायलट्स के इस रुख के चलते उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. लिहाजा, अब हर आरोपी पायलट को इस नुकसान की भरपाई करनी चाहिए. Akasa ने अपने इन पायलटों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में केस कर दिया है. 

बढ़ गया कैंसिलेशन रेट 
Akasa Air थोड़े से समय में ही इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान स्थापित करने में कामयाब रही है. कंपनी दूसरी लो-कॉस्ट एयरलाइन्स को कड़ी टक्कर दे रही है. इस घटना से पहले तक उसका कैंसिलेशन रेट काफी कम था, जिसमें पायलट्स के इस्तीफों के चलते एकदम से उछाल आ गया. पायलटों की इस अचानक विदाई के परिणामस्वरूप पिछले महीने यानी अगस्त में अकासा एयरलाइन को कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. एयरलाइन का कैंसिलेशन रेट दोगुना हो गया. इस मामले में कंपनी स्पाइसजेट से भी पिछड़ गई, जबकि जून में इसकी रैंकिंग स्पाइसजेट से ऊपर थी. 

टाटा का थाम लिया हाथ!
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, अकासा एयर की फ्लाइट्स का कैंसिलेशन रेट केवल 0.45% था, मगर अगस्त में ये बढ़कर 1.17 प्रतिशत तक पहुंच गया. कंपनी का कहना है कि केवल उन पायलटों के एक छोटे समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिन्होंने अपना कर्तव्‍य नहीं निभाया और नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ही चले गए. यह न केवल उनके नोटिस का उल्लंघन था, बल्कि देश के नागरिक उड्डयन नियमों का भी सीधे तौर पर उल्लंघन है. इन पायलट्स की वजह से अगस्त में कई उड़ानों को रद्द किया गया. आखिरी मिनट में फ्लाइट्स रद्द होने से यात्रियों को भी भारी असुविधा हुई. बताया जा रहा है कि इन पायलट्स ने अकासा एयरलाइन छोड़कर टाटा की एयरलाइंस को ज्वाइन किया है. 

कर्मचारियों की अनदेखी तो नहीं?
यह घटना भले ही किसी एक एयरलाइन के साथ हुई है, लेकिन इसने पूरी इंडस्ट्री को कुछ बातों पर गौर करने के लिए मजबूर कर दिया है. सबसे पहली तो यही कि क्या स्टाफ प्रबंधन की नीतियों से खुश है? कई बार प्रबंधन की नीतियां कर्मचारियों के हित की अनदेखी करते हुए तैयार की जाती हैं, जिसकी वजह से कर्मचारी असहज महसूस करने लगते हैं और ऐसे में उनके पास आखिरी विकल्प इस्तीफा ही बचता है. एविएशन सेक्टर में अब पायलट्स और दूसरे स्टाफ के पास कई ऑप्शन हो गए हैं. टाटा के एयर इंडिया को खरीदने के बाद से इसके प्रति कर्मचारियों का आकर्षण बढ़ा है. टाटा समूह के वर्किंग एनवायरनमेंट की भी काफी तारीफ की जाती है. इस स्थिति में बाकी कंपनियों को अपने स्टाफ की जरूरतों पर और भी ज्यादा ध्यान देना जरूरी हो गया है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि ये घटना एयर इंडिया के साथ नहीं हो सकती. जहां भी कामकाजी माहौल और वेतन कर्मचारियों के अनुरूप नहीं होगा. उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलेंगी, उनकी समस्याओं को अनसुना कर दिया जाएगा, उन्हें पर्याप्त सम्मान से वंचित रखा जाएगा, वहां रिएक्शन ऐसे ही मिलेंगे.  

सबकुछ नहीं चल रहा है ठीक      
Akasa Air से बगैर नोटिस पीरियड सर्व किए कंपनी छोड़ने वाले पायलट्स की संख्या 43 है, जो ये साफ संकेत देता है कि कंपनी में सबकुछ ठीक नहीं है. कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अकासा को अब उस मुद्दे पर भी गौर करने की जरूरत है. पायलट, क्रू सदस्य और ग्राउंड स्टाफ किसी भी एयरलाइन के लिए उतने ही जरूरी हैं, जितने कि प्लेन. जैसे खराब विमान के साथ उड़ान नहीं भरी जा सकती, वैसे ही इनके बिना भी उड़ान संभव नहीं है, लिहाजा Akasa Air के साथ-साथ सभी कंपनियों के लिए अपनी वर्कफोर्स को खुश रखना आवश्यक है. कोई कितनी भी सफल एयरलाइन क्यों न हो, यदि पायलट ने हाथ खड़े कर दिए, तो उसे आसमान से जमीं पर आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा.
 


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