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FY26 तक करीब 1.3% ROA बनाए रखने का लक्ष्य, मार्जिन दबाव के बीच Indian Bank की ग्रोथ पर नजर
इंडियन बैंक का फोकस FY26 तक ROA को 1.3 प्रतिशत के आसपास बनाए रखने और बैलेंस्ड ग्रोथ पर टिका हुआ है. हालांकि, मार्जिन दबाव, फंडिंग की चुनौती और ECL ट्रांजिशन जैसे फैक्टर आने वाले समय में बैंक की रणनीति और प्रदर्शन की असली परीक्षा लेंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
सरकारी बैंक इंडियन बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) तक अपने रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) को करीब 1.3 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है. यह जानकारी एलारा कैपिटल की एक एनालिस्ट रिपोर्ट में बैंक मैनेजमेंट की टिप्पणी के हवाले से दी गई है. हालांकि, बैंकिंग सिस्टम में फंडिंग की सख्त स्थिति और मार्जिन पर बढ़ते दबाव के चलते आगे की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
दिसंबर तिमाही में ऑपरेशनल प्रदर्शन स्थिर
FY26 की दिसंबर तिमाही में इंडियन बैंक का ऑपरेशनल प्रदर्शन स्थिर रहा, लेकिन ज्यादा क्रेडिट कॉस्ट के चलते मुनाफा बाजार के अनुमान से कम रहा. प्रोविजनिंग में बढ़ोतरी की वजह अपेक्षित क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क में बदलाव से पहले बफर मजबूत करने की बैंक की रणनीति रही.
NII में तिमाही आधार पर 5.3% की बढ़ोतरी
तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 5.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसे घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में मामूली सुधार से सपोर्ट मिला. वहीं, लोन ग्रोथ सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से ज्यादा रही, जो मजबूत क्रेडिट डिमांड को दर्शाती है.
जमाओं को जुटाना अब भी चुनौती
बैंक मैनेजमेंट के मुताबिक, क्रेडिट डिमांड मजबूत रहने के बावजूद डिपॉजिट जुटाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. घरेलू क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो करीब 80 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है. ऐसे में बैंक ग्रोथ, फंडिंग मिक्स और मार्जिन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
CASA पर बढ़ेगा फोकस, बॉन्ड से फंडिंग विकल्प रहेगा
इंडियन बैंक अब कम लागत वाले CASA डिपॉजिट पर ज्यादा फोकस करने की योजना बना रहा है, खासतौर पर सैलरी अकाउंट और सरकारी से जुड़े बिजनेस के जरिए. साथ ही, जरूरत पड़ने पर बॉन्ड मार्केट से उधारी को बैकअप ऑप्शन के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.
मार्जिन में सीमित बढ़त की उम्मीद
आने वाले समय में मार्जिन में ज्यादा सुधार की उम्मीद नहीं जताई जा रही है. रेपो से जुड़े लोन की री-प्राइसिंग और डिपॉजिट रेट में आगे कटौती की सीमित गुंजाइश के चलते बैंक ने संकेत दिया है कि अगले दो तिमाहियों में NIM में 1 से 2 बेसिस प्वाइंट तक की मामूली गिरावट हो सकती है.
एसेट क्वालिटी स्थिर, लेकिन कुछ PSU खातों पर नजर
बैंक की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है. तिमाही आधार पर स्लिपेज ₹10 अरब से नीचे सीमित रहे हैं और ग्रॉस व नेट NPA रेशियो में लगातार सुधार देखने को मिला है. हालांकि, कुछ PSU कॉरपोरेट खातों में दबाव के चलते SMA-2 लेवल में बढ़ोतरी हुई है, जिस पर बैंक की कड़ी नजर बनी हुई है.
पूंजी स्थिति मजबूत, लेकिन निवेशकों की नजर आगे की रणनीति पर
बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16 प्रतिशत से ज्यादा है, जो मजबूत प्रोविजन कवरेज और स्थिर रिकवरी के चलते संभव हुआ है. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन में हालिया सुधार काफी हद तक शामिल हो चुका है. ऐसे में आगे निवेशकों की नजर रिटर्न की स्थिरता, CASA ग्रोथ पर अमल और ECL लागू करने को लेकर मिलने वाली स्पष्टता पर बनी रहेगी.
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