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आखिर कौन बनेगा देश की इस सबसे बड़ी ऑयल कंपनी का चेयरमैन?
नए चेयरमैन की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब कंपनी के चौथी तिमाही के आंकड़े बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. कंपनी के नए चेयरमैन को इन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
देश की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी के चेयरमैन की तलाश शुरू हो चुकी है. तेल मंत्रालय की ओर से इस पद के लिए इच्छुक और योग्य आवेदकों से विज्ञापन के जरिए आवेदन मांगे गए हैं. मौजूदा समय में इस पद पर तैनात एस एम वैद्य का पद जुलाई में समाप्त होने वाला है. उन्हें सरकार की ओर से पहले ही रिटायर होने के बाद एक साल का एक्सटेंशन मिल चुका है.
चेयरमैन के लिए क्या होनी चाहिए योग्यता?
सरकार की ओर से जारी किए गए विज्ञापन के अनुसार, इस पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र 58 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर उम्मीदवार बाहरी है तो उसकी उम्र 57 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. विज्ञापन में बताया गया है कि सेवानिवृत्ति की उम्र 60 साल होगी. मौजूदा चेयरमैन को एस एम वैद्य को इस पर 1 जुलाई 2020 को नियुक्त किया गया है. एक अप्रत्याशित मूव के तहत उन्हें एक साल से के लिए एक्सटेंशन दिया जा चुका है. हालांकि कुछ समय पहले तक ये कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें एक बार फिर एक्सटेंशन दिया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
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चयन समिति ने शुरू किया अपना काम
तेल मंत्रालय की ओर से नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक सर्च कम सलेक्शन चयन समिति बनाई गई है जिसमें सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड की अध्यक्ष मल्लिका श्रीनिवासन, तेल सचिव पंकज जैन और रत्नागिरी रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड के सीईओ मुकेश सुराणा शामिल हैं. ये सभी इस भूमिका के लिए उम्मीदवारों का मूल्यांकन करेंगे.
नए चेयरमैन के सामने क्या होंगी नई चुनौतियां?
देश की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल के चौथी तिमाही के नतीजों पर नजर डालें तो मुनाफे में साल दर साल के मुकाबले 52 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है. इंडियन ऑयल का मुनाफा 10059 करोड़ रुपये से गिरकर 4838 करोड़ रुपये तक आ गया है. वहीं कंपनी के रेवेन्यू पर नजर डालें तो ये साल दर साल इसमें 3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है. कंपनी का रेवेन्यू गिरावट के बाद 219876 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि इस गिरावट के बावजूद कंपनी ने अपने शेयर धारकों के लिए 7 रुपये के लाभांश की घोषणा की है. इन आंकड़ों के बीच नए चेयरमैन के सामने जहां इस घाटे को कम करने की चुनौती होगी वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में हो रही गिरावट को रोककर फायदे में लाना सबसे बड़ी चुनौती है.
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