Adobe ने भारतीय AI स्टार्टअप रिलो का किया अधिग्रहण, एआई आधारित विपणन में बढ़ाएगी पकड़

एजेंटिक एआई और स्वचालन पर अडोबी (Adobe) का फोकस तेज, रिलो का अधिग्रहण भारत में कंपनी का दूसरा ज्ञात अधिग्रहण

Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindi

सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अडोबी (Adobe) ने भारतीय एआई स्वचालन स्टार्टअप रिलो का अधिग्रहण कर लिया है. कंपनी ने यह कदम एजेंटिक एआई, विपणन स्वचालन और एआई आधारित कार्यप्रवाह के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए उठाया है. हालांकि, इस सौदे की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया गया है.

सितंबर 2025 में आईआईटी बॉम्बे के स्नातक ध्रुव जगलान और जॉर्जी बॉबी द्वारा स्थापित रिलो ऐसा मंच विकसित करता है, जिसके जरिए तकनीकी जानकारी नहीं रखने वाले उपयोगकर्ता भी सामान्य अंग्रेजी में जटिल कार्यप्रवाह बता सकते हैं. इसके बाद एआई एजेंट इन कार्यों को तैयार कर सैकड़ों अलग-अलग डिजिटल उपकरणों पर पूरा कर सकते हैं.

विपणन टीमों के लिए एआई कर्मचारियों का मंच

शुरुआत में कार्यप्रवाह स्वचालन पर ध्यान देने वाला रिलो बाद में विपणन और बाजार विस्तार टीमों के लिए "एआई कर्मचारियों" के मंच के रूप में विकसित हुआ. इसके जरिए प्रतिस्पर्धी कंपनियों की जानकारी जुटाने, संभावित ग्राहकों की पहचान, लिंक्डइन पर संपर्क, रेडिट विपणन, सामाजिक मीडिया सामग्री और प्रचार अभियानों के लिए शोध जैसे काम स्वचालित किए जा सकते हैं. शुरुआत के कुछ ही महीनों में रिलो के 10,000 से अधिक उपयोगकर्ता हो गए थे. कंपनी को एंथ्रोपिक के क्लॉड काउवर्क का शुरुआती प्रतिस्पर्धी भी माना गया.

पीक एक्सवी और जेड47 से मिला था निवेश

रिलो ने पीक एक्सवी पार्टनर्स और जेड47/डीविसी से निवेश जुटाया था. रिपोर्टों के मुताबिक, निवेश के समय कंपनी का मूल्यांकन करीब 1 करोड़ डॉलर था. रिलो के निवेशक और डे जीरो वेंचर्स के प्रबंध साझेदार राहुल गुप्ता ने कंपनी के कार्यप्रवाह निर्माण मंच की तारीफ करते हुए कहा कि यह "समय से काफी आगे" था और इससे एडोबी को ग्राहक अनुभव और उत्पादकता बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

भारत में एडोबी का दूसरा ज्ञात अधिग्रहण

रिलो का अधिग्रहण भारत में एडोबी का दूसरा ज्ञात अधिग्रहण है. इससे पहले 2023 में कंपनी ने जनरेटिव एआई वीडियो स्टार्टअप रीफ्रेज.एआई का अधिग्रहण किया था. इस सौदे के जरिए अडोबी को रिलो की तकनीकी टीम भी मिलेगी. ऐसे समय में यह अधिग्रहण महत्वपूर्ण है जब एआई आधारित विपणन और कार्यप्रवाह स्वचालन के क्षेत्र में बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है.

रिलो के सह-संस्थापक ध्रुव जगलान इससे पहले एआई भर्ती मंच बैबलबाट्स.एआई की सह-स्थापना कर चुके हैं. वहीं, जॉर्जी बॉबी कुकिंग-रोबोटिक्स कंपनी क्लाउडशेफ में प्रौद्योगिकी का नेतृत्व कर चुके हैं. रिलो की टीम में आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान के स्नातक भी शामिल हैं. इनमें भावेश ढींगरा भी हैं, जिन्होंने 2016 की जेईई एडवांस परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया था.

एआई कंपनियों की नजर अब विपणन क्षेत्र पर

अडोबी का यह अधिग्रहण ऐसे समय हुआ है जब प्रमुख एआई कंपनियां विपणन क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं. एंथ्रोपिक भी विपणन पेशेवरों के लिए क्लॉड आधारित समाधान पेश कर चुकी है.

रिलो की स्वचालन तकनीक एडोबी को बड़े उद्यम ग्राहकों के लिए विपणन से जुड़े विभिन्न कार्यों को एक ही मंच से तैयार करने और संचालित करने की क्षमता दे सकती है. इससे कंपनी की एआई आधारित विपणन रणनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
 


नोएल टाटा को बड़ी राहत, टाटा संस के 833 शेयरों के हस्तांतरण की जांच बंद; धर्मार्थ आयुक्त ने दी क्लीन चिट

1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नेवल एच. टाटा को शेयर हस्तांतरित करने के मामले में महाराष्ट्र के धर्मार्थ आयुक्त का फैसला, कानून के मुताबिक हुई थी पूरी प्रक्रिया

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindia

टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष नोएल टाटा को एक पुराने शेयर हस्तांतरण विवाद में बड़ी राहत मिली है. महाराष्ट्र के धर्मार्थ आयुक्त ने 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से नेवल एच. टाटा को टाटा संस के 833 शेयरों के हस्तांतरण की जांच की मांग वाली शिकायत को बंद कर दिया है. 2 सितंबर 2026 को जारी आदेश में धर्मार्थ आयुक्त ने कहा कि यह हस्तांतरण उस समय लागू कानून के मुताबिक किया गया था और मामले में आगे किसी जांच की जरूरत नहीं है.

यह शिकायत नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय सिंह ने 10 जून 2026 को ईमेल के जरिए दाखिल की थी. उन्होंने शेयर हस्तांतरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी. धर्मार्थ आयुक्त ने शिकायत, ट्रस्ट के जवाब और इससे जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद यह फैसला सुनाया.

कानून के मुताबिक हुआ था शेयरों का हस्तांतरण

टाटा ट्रस्ट के मुताबिक, धर्मार्थ आयुक्त ने पाया कि शेयरों की बिक्री उस समय लागू वैधानिक जरूरतों के कारण आवश्यक थी और इसके लिए उचित दस्तावेज भी मौजूद थे. शेयरों के लिए भुगतान की गई राशि आयकर आयुक्त द्वारा तय मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित की गई थी.

ट्रस्ट को इस लेनदेन से मुनाफा भी हुआ था, जिसे 31 मार्च 1989 को समाप्त वित्त वर्ष की तुलन-पत्र में दर्ज किया गया था. शेयरों का हस्तांतरण इस शर्त के साथ किया गया था कि इन्हें किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचा जाएगा और ये प्राप्तकर्ता के परिवार के भीतर ही रहेंगे.

धर्मार्थ आयुक्त ने निष्कर्ष दिया कि यह हस्तांतरण उस समय लागू कानून के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप था. इसलिए महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत इस मामले में आगे किसी कार्यवाही की जरूरत नहीं है.

ट्रस्टी के आचरण पर भी धर्मार्थ आयुक्त की टिप्पणी

धर्मार्थ आयुक्त ने शिकायत दाखिल करने वाले ट्रस्टी विजय सिंह के आचरण पर भी टिप्पणी की. टाटा ट्रस्ट के बयान के अनुसार, आयुक्त ने कहा कि सिंह ने 10 जून को भेजे गए अपने ईमेल को ट्रस्ट के सामने उपलब्ध नहीं कराया. इससे यह संकेत मिलता है कि उनका उद्देश्य इस मामले को "अन्य ट्रस्टियों और पूरे ट्रस्ट से छिपाना" था.

आदेश में सिंह के आचरण को नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और साख को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया. आयुक्त के मुताबिक, उनका व्यवहार "नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के लिए अशोभनीय" था.

बैठक के दो दिन बाद दाखिल की शिकायत

धर्मार्थ आयुक्त ने सिंह की ओर से उठाए गए कदमों के क्रम पर भी हैरानी जताई. आदेश के मुताबिक, सिंह ने 8 जून को हुई ट्रस्ट मंडल की बैठक में हिस्सा लिया था. इस बैठक में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से धर्मार्थ आयुक्त के समक्ष मामले का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके महज दो दिन बाद, 10 जून को सिंह ने खुद शेयर हस्तांतरण की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए शिकायत दाखिल कर दी. धर्मार्थ आयुक्त ने इस घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए.

इस आदेश के साथ 1989 में हुए टाटा संस के 833 शेयरों के इस पुराने हस्तांतरण को लेकर चल रही जांच की मांग पर फिलहाल विराम लग गया है. अब इसमें अंग्रेजी के शब्दों जैसे ट्रांसफर, चैरिटी कमिश्नर, बोर्ड, बैलेंस शीट, गुडविल, क्लीन चिट आदि को भी हिंदी रूप में रखा गया है.


भारत के विंड पावर सेक्टर में नई छलांग, 2030 तक 100 GW का लक्ष्य; मैन्युफैक्चरिंग, ऑफशोर और रिपावरिंग पर बढ़ा फोकस

58.14 GW पहुंची भारत की पवन ऊर्जा क्षमता, FY26 में रिकॉर्ड 6.05 GW जुड़ी; 43 GW से अधिक परियोजनाएं निर्माणाधीन और 1,164 GW तक आंकी गई क्षमता

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindia

भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र अब सिर्फ क्लीन एनर्जी का जरिया नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और एनर्जी सिक्योरिटी का भी अहम आधार बनता जा रहा है. देश की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर 58.14 गीगावाट (GW) पहुंच गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 GW नई क्षमता जुड़ी, जो अब तक की सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है. सरकार ने 2030 तक पवन ऊर्जा क्षमता को 100 GW और 2035 तक 155 GW करने का लक्ष्य रखा है.

इसी बढ़ते बाजार और सेक्टर की अगली विकास यात्रा पर चर्चा के लिए Windergy India 2026 का 8वां संस्करण 7 से 9 अक्टूबर 2026 तक चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित किया जाएगा. इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) के मुताबिक, 100 GW के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत को हर साल करीब 10 GW नई पवन क्षमता जोड़नी होगी. फिलहाल 43 GW से अधिक की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 150 मीटर हब हाइट पर देश की संभावित पवन ऊर्जा क्षमता 1,164 GW तक आंकी गई है.

100 GW के लक्ष्य के लिए उद्योग को साथ आना होगा

IWTMA के मानद सचिव और Suzlon Energy Ltd के प्रेसिडेंट - कॉरपोरेट अफेयर्स एंड रिटेल बिजनेस, दिनेश जगदाले ने कहा, "भारत के विंड सेक्टर ने साबित कर दिया है कि वह एक शुरुआती उद्योग से बढ़कर 58 GW से अधिक की स्थापित क्षमता और दुनिया भर में टर्बाइन निर्यात करने वाले मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस तक पहुंच सकता है. अब आगे का रास्ता स्पष्ट है - 2030 तक 100 GW और 2035 तक 155 GW. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मैन्युफैक्चरर्स, डेवलपर्स, नीति निर्माताओं और इनोवेटर्स के बीच सहयोग जरूरी है." उन्होंने कहा कि सेक्टर को अगले चरण में तेजी से विस्तार के लिए मिलकर काम करना होगा.

24 GW हुई घरेलू टर्बाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता

विंड पावर की बढ़ती मांग के साथ भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी तेजी से मजबूत हुई है. देश में विंड टर्बाइन बनाने की वार्षिक क्षमता 2014 के करीब 10 GW से बढ़कर अब 24 GW हो गई है. इसमें 70-80 फीसदी तक घरेलू वैल्यू एडिशन है.

भारत अब सिर्फ घरेलू जरूरत पूरी करने वाला बाजार नहीं रहा. वित्त वर्ष 2025-26 में विंड इक्विपमेंट का एक्सपोर्ट 12,000 करोड़ रुपये को पार कर गया, जो करीब 50 फीसदी की वृद्धि है. इससे भारत के ग्लोबल विंड मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं.

Envision Energy India के ग्लोबल बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख और IWTMA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य सुमन नाग ने कहा, "जैसे-जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियां भारत से मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ा रही हैं, हम देश को ग्लोबल विंड एक्सपोर्ट हब के रूप में मजबूत करने और भारत के व्यापक एक्सपोर्ट लक्ष्य में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

WT-MARUT से सप्लाई चेन को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट

मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने IWTMA के साथ मिलकर WT-MARUT पहल शुरू की है. इसे भारत का पहला विंड सप्लाई-चेन पोर्टल बताया जा रहा है. इसका उद्देश्य विंड सेक्टर में तकनीकी क्षमता, सप्लाई चेन, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना है.

दिल्ली में Windergy India 2026 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम में MNRE के जॉइंट सेक्रेटरी राजेश कुलहरी ने कहा, "भारत का एनर्जी ट्रांजिशन अब सिर्फ मेगावाट जोड़ने तक सीमित नहीं है. यह एक पूरा इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने के बारे में है, जो कुशल रोजगार पैदा करे, विंड मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करे और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके सिस्टम लागत घटाए."

अब सिर्फ कम टैरिफ नहीं, प्रोजेक्ट की व्यवहारिकता भी अहम

विंड सेक्टर के लिए टैरिफ और कॉस्ट ऑफ एनर्जी भी Windergy India 2026 के प्रमुख एजेंडे में रहेंगे. उद्योग का मानना है कि अब परियोजनाओं की व्यवहारिकता केवल सबसे कम बोली वाले टैरिफ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. समय पर पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA), ट्रांसमिशन की उपलब्धता और ऐसे बिडिंग स्ट्रक्चर जरूरी हैं, जो विंड, हाइब्रिड और फर्म रिन्यूएबल पावर से मिलने वाली अतिरिक्त सिस्टम वैल्यू को ध्यान में रखें.

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी बाजार में स्टैंडअलोन विंड और सोलर से आगे बढ़कर विंड-सोलर हाइब्रिड, स्टोरेज-बैक्ड और Firm & Dispatchable Renewable Energy (FDRE) परियोजनाओं की भूमिका बढ़ रही है. इससे बिजली की उपलब्धता को ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है.

लॉजिस्टिक्स और ग्रिड कनेक्टिविटी बनेगी अहम कड़ी

विंड टर्बाइन और उनके बड़े कंपोनेंट्स की आवाजाही के लिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी सेक्टर के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. रूट प्लानिंग, परमिट, हेवी-लिफ्ट मूवमेंट, वेयरहाउसिंग और स्पेयर-पार्ट लॉजिस्टिक्स में दक्षता परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन और रखरखाव के लिए जरूरी है.

डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स सिस्टम से सप्लाई चेन में विजिबिलिटी बढ़ाने के साथ उपकरणों की आवाजाही को भी अधिक कुशल बनाया जा सकता है. वहीं, जमीन, ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी और विभिन्न मंजूरियों से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना भी सेक्टर की तेज ग्रोथ के लिए जरूरी होगा.

रिपावरिंग से पुराने प्रोजेक्ट्स की क्षमता बढ़ाने का मौका

भारत में 19,000 से अधिक विंड टर्बाइन जनरेटर (WTG) पहले से स्थापित हैं, जिनमें बड़ी संख्या पुरानी और 1 MW से कम क्षमता वाली टर्बाइनों की है. खासकर हाई-विंड जोन में मौजूद इन पुराने प्रोजेक्ट्स को आधुनिक टर्बाइन टेक्नोलॉजी से रिपावर करने की बड़ी संभावना है.

उद्योग के मुताबिक, रिपावरिंग के जरिए पुराने टर्बाइनों की क्षमता उपयोग दर (CUF) को मौजूदा 14-15 फीसदी से बढ़ाकर करीब 30 फीसदी तक ले जाया जा सकता है. इससे बिना बड़े पैमाने पर नई जमीन की जरूरत के मौजूदा विंड साइट्स से ज्यादा बिजली उत्पादन संभव होगा.

ऑफशोर विंड बनेगा अगला बड़ा फ्रंटियर

भारत के विंड सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी ऑफशोर विंड एनर्जी हो सकती है. सरकार और उद्योग की ओर से ऑफशोर विंड परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है और 1 GW के पायलट प्रोजेक्ट को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ऑफशोर विंड के विस्तार से भारत के तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्वच्छ बिजली उत्पादन के साथ-साथ नए मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं.

Windergy India बनेगा ग्लोबल विंड इंडस्ट्री का मंच

IWTMA और PDA Ventures Pvt. Ltd. द्वारा आयोजित Windergy India 2026 को Ministry of Power और MNRE का समर्थन प्राप्त है. आयोजन में 20,000 से अधिक प्रतिभागियों, 400 से ज्यादा डेलीगेट्स और 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है. करीब 350 प्रदर्शक अपनी तकनीक, उत्पाद और समाधान पेश करेंगे.

PDA Ventures Pvt. Ltd. के चेयरमैन एवं CEO प्रदीप देवैया ने कहा, "Windergy India एक इंटरनेशनल ट्रेड फेयर और कॉन्फ्रेंस के रूप में पूरे विंड इकोसिस्टम को एक मंच पर लाने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है. भारत जब अपनी क्षमता से जुड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, तब हम इस उद्योग को कनेक्ट और ग्रो करने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे."

इस वर्ष कार्यक्रम की थीम 'Wind – Powering India's Energy Resilience' रखी गई है. दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के साथ Academia Session भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विंड सेक्टर की बढ़ती कुशल वर्कफोर्स जरूरतों पर चर्चा होगी. आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब भारत की विंड इंडस्ट्री घरेलू क्षमता विस्तार, एक्सपोर्ट, ऑफशोर विंड और रिपावरिंग के जरिए अपने अगले बड़े ग्रोथ फेज में प्रवेश कर रही है.


भारत में NRIs का बढ़ा भरोसा, बैंकों में आया ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा का विदेशी फंड; जानिए वजह

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की खास डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा को प्रवासी भारतीयों का जबरदस्त रिस्पॉन्स, FCNR(B) डिपॉजिट से ही 127.23 अरब डॉलर जुटे

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindia

भारतीय बैंकों में प्रवासी भारतीयों (NRIs) का भरोसा बढ़ता दिख रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुरू की गई विशेष डॉलर-रुपया फॉरेन करेंसी स्वैप सुविधा के तहत 31 अगस्त 2026 तक देश में कुल 136.377 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ. इसमें अकेले FCNR(B) डिपॉजिट से 127.226 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम आई है. इस योजना को मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि RBI ने इसे तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद कर दिया.

8 जून को शुरू हुई थी खास सुविधा

RBI ने वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच देश की बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत करने और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 8 जून 2026 को यह विशेष सुविधा शुरू की थी. इसके तहत FCNR(B) जमा, विदेशों से विदेशी मुद्रा में कर्ज और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई गई.

FCNR(B) से आया सबसे ज्यादा विदेशी फंड

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक इन उपायों के जरिए कुल 136.377 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ. इसमें FCNR(B) डिपॉजिट का योगदान सबसे बड़ा रहा और इसके जरिए 127.226 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि जुटाई गई.

इसके अलावा विदेशों से विदेशी मुद्रा में कर्ज के जरिए 5.26 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी के जरिए 3.891 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ. इस तरह कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 136.377 अरब डॉलर से अधिक रहा.

तय समय से पहले बंद करनी पड़ी योजना

FCNR(B) डिपॉजिट सुविधा को पहले 30 सितंबर 2026 तक जारी रखा जाना था, लेकिन प्रवासी भारतीयों की मजबूत प्रतिक्रिया के बाद RBI ने इसे 31 अगस्त को ही बंद कर दिया. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, सुविधा ने अपने तय उद्देश्य को समय से पहले हासिल कर लिया.

क्या होता है FCNR(B) डिपॉजिट?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) जमा विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली सावधि जमा होती है. इसमें जमा की गई मूल राशि और उस पर मिलने वाले ब्याज का भुगतान उसी विदेशी मुद्रा में किया जाता है, जिसमें डिपॉजिट रखा गया है. वहीं, विदेशों से विदेशी मुद्रा में कर्ज और ECB के लिए उपलब्ध स्वैप सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी.
 


भारत की आर्थिक ताकत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा, 35 साल बाद JCR ने दी ‘A-’ रेटिंग

मजबूत आर्थिक ग्रोथ, घटता राजकोषीय घाटा और बेहतर होती बैंकिंग व्यवस्था के बीच JCR ने भारत की सॉवरेन रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी है. एजेंसी ने रेटिंग का आउटलुक ‘स्टेबल’ रखा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindia

भारत की आर्थिक साख को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR ने करीब 35 साल बाद भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर ‘A-’ कर दिया है. एजेंसी ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- की है और आउटलुक ‘स्टेबल’ रखा है. JCR ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, राजकोषीय स्थिति में सुधार, मजबूत वित्तीय प्रणाली और बेहतर बाहरी स्थिति को प्रमुख वजह बताया है. यह अपग्रेड ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं.

35 साल बाद मिली A- रेटिंग

JCR के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में करीब 7 फीसदी की मजबूत विकास दर बनाए रखी है. निजी खपत और सरकारी निवेश से ग्रोथ को लगातार समर्थन मिला है. पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, जो RBI के 7 फीसदी के अनुमान से अधिक है. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा घटकर GDP के 4.4 फीसदी पर आ गया, जो एक साल पहले 4.7 फीसदी था.

मजबूत इकोनॉमी बनी अपग्रेड की बड़ी वजह

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार ने आर्थिक विकास और उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत कदम उठाए हैं. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, GST जैसे सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता पूंजीगत खर्च अर्थव्यवस्था की बुनियाद को मजबूत कर रहे हैं. JCR को उम्मीद है कि भारत चालू वित्त वर्ष में भी 6 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकता है.

बैंकिंग सेक्टर की बेहतर सेहत का भी असर

JCR ने भारत की वित्तीय प्रणाली में आए सुधार को भी रेटिंग अपग्रेड का अहम आधार माना है. दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC), सरकारी पूंजी निवेश और RBI की निगरानी से बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है. इससे भारतीय बैंकिंग सिस्टम पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हुआ है.

फिस्कल डेफिसिट और सरकारी कर्ज पर फोकस

सरकार लगातार राजकोषीय घाटे और कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में काम कर रही है. वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटा GDP के 4.3 फीसदी के बराबर रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, केंद्र का कर्ज-GDP अनुपात 2025-26 के 56.1 फीसदी से घटकर 2026-27 में 55.6 फीसदी रहने का अनुमान है. सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक इस अनुपात को 50 फीसदी तक लाना है.

विदेशी मुद्रा भंडार ने भी दिया सहारा

भारत की बाहरी स्थिति को भी JCR ने मजबूत बताया है. एजेंसी के मुताबिक चालू खाते का घाटा नियंत्रण में है और सेवाओं के निर्यात से मिलने वाला अधिशेष इसे सहारा देता है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त स्तर पर है. 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया था.

दूसरी रेटिंग एजेंसियां भी भारत पर भरोसा जता रहीं

JCR का यह अपग्रेड ऐसे समय हुआ है जब कई अन्य रेटिंग एजेंसियां भी भारत की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार कर चुकी हैं. S&P Global Ratings, Morningstar DBRS और जापान की R&I समेत कई एजेंसियों ने पिछले समय में भारत की रेटिंग में सुधार किया है या सकारात्मक आकलन दिया है. हालांकि, JCR ने राजकोषीय घाटे, राज्यों के बीच आर्थिक असमानता और चुनावों के दौरान राजकोषीय प्रबंधन जैसे जोखिमों को अभी भी चुनौती बताया है.

कुल मिलाकर, JCR की A- रेटिंग भारत की मजबूत होती आर्थिक बुनियाद, बेहतर राजकोषीय स्थिति और वित्तीय प्रणाली पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है. रेटिंग में सुधार से भारत की अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होने के साथ भविष्य में विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी समर्थन मिल सकता है.


कल की गिरावट के बाद आज संभलेगा बाजार? क्रूड नरम, गिफ्ट निफ्टी 24,000 के पार; इन शेयरों पर नजर

बुधवार को सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 800 अंक तक फिसला, हालांकि बाद में रिकवरी के चलते यह 373.93 अंक की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 पर बंद हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को राहत के संकेत मिल रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी और एशियाई बाजारों में मजबूती से निवेशकों का सेंटीमेंट सुधरा है. गिफ्ट निफ्टी करीब 90 अंकों की बढ़त के साथ 24,000 के अहम स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा है. ऐसे में घरेलू बाजार में आज शुरुआती तेजी देखने को मिल सकती है. हालांकि, पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और क्रूड की चाल बाजार की दिशा के लिए अहम बनी रहेगी.

कल क्यों गिरा था बाजार?

बाजार जानकारों के अनुसार, बुधवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ गया था. सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 800 अंक तक फिसला, हालांकि बाद में रिकवरी के चलते यह 373.93 अंक की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 पर बंद हुआ.

बिकवाली का सबसे ज्यादा असर ऑटो, मीडिया और IT सेक्टर पर पड़ा, जहां करीब 1.2% से 1.8% तक की गिरावट रही. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 लाल निशान में बंद हुए. एशियन पेंट्स, HDFC, महिंद्रा एंड महिंद्रा, HCL Tech, BEL, Infosys और SBI में गिरावट रही. हालांकि, अडानी पोर्ट्स, पावरग्रिड, NTPC, बजाज फिनसर्व और टाइटन जैसे शेयरों में तेजी ने बाजार की गिरावट को कुछ सीमित किया.

आज बाजार को कहां से मिल रही राहत?

गुरुवार को वैश्विक संकेत बुधवार की तुलना में बेहतर हैं. ब्रेंट क्रूड करीब आधा फीसदी कमजोर होकर 95.10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है. कच्चे तेल में नरमी भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि महंगा क्रूड देश की महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ाता है.

एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिल रही है. कोरियाई कॉस्पी करीब 1.5% ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि जापान का निक्केई भी बढ़त में है. शंघाई और हॉन्गकॉन्ग के बाजारों में भी सकारात्मक रुख है. इन संकेतों का असर भारतीय बाजार की शुरुआती चाल पर पड़ सकता है.

पश्चिम एशिया पर बाजार की नजर

बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. बुधवार को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव लौट सकता है. इसके उलट, अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और क्रूड 95 डॉलर के आसपास या इससे नीचे बना रहता है, तो बाजार में रिकवरी की गुंजाइश बढ़ सकती है.

आज ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज की लिस्टिंग

गुरुवार को Lumino Industries के शेयर BSE और NSE पर लिस्ट होंगे. कंपनी के IPO को निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इश्यू अंतिम दिन 118.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था. कंपनी ने IPO के जरिए 700 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसमें 500 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 200 करोड़ रुपये का OFS शामिल है.

इन शेयरों पर भी रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज कई कंपनियों के कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते भी शेयरों में हलचल रह सकती है. Meesho में SoftBank की करीब 1.5% हिस्सेदारी बेचने के लिए ब्लॉक डील प्रस्तावित है. Hexaware Technologies ने विवेक जेटली को नया डेजिगनेट CEO नियुक्त किया है. ICICI Bank ने ICICI Prudential Life Insurance में करीब 2% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदकर अपनी हिस्सेदारी लगभग 52.8% कर ली है.

HUDCO ने बिहार सरकार के साथ 25,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय मदद से जुड़ा MoU किया है. Power Grid को राजस्थान REZ Phase-IV के लिए 3,244.33 करोड़ रुपये के सालाना ट्रांसमिशन शुल्क वाले प्रोजेक्ट का LoI मिला है. वहीं, Page Industries को दुबई कोर्ट से 11.35 करोड़ AED के दावे से जुड़ा नोटिस मिला है.

इसके अलावा Pine Labs, Altius Telecom Infrastructure Trust, Aster DM Quality Care, Wonder Electricals और Shreeji Shipping Global में हुए बड़े ब्लॉक और बल्क डील भी आज संबंधित शेयरों में हलचल बढ़ा सकते हैं. मेनबोर्ड सेगमेंट में Lumino Industries और SME सेगमेंट में Quick Forensic Solutions की लिस्टिंग होगी, जबकि एक दर्जन से अधिक शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे.

कुल मिलाकर, बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार को बाजार के लिए शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं. क्रूड में नरमी और ग्लोबल मार्केट्स की मजबूती बाजार को सहारा दे सकती है, लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव और तेल की कीमतें तेजी की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेंगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


 


₹22,006 करोड़ के कर्ज के बीच सुभाष चंद्रा की NCLT प्रक्रिया पर आपत्ति, NCLAT में उठाए 5-सदस्यीय बेंच पर सवाल

जी ग्रुप (Zee Group) के संस्थापक की ओर से कहा गया- ₹6.5 करोड़ के रीपेमेंट प्लान को लेकर पिछले 15 दिनों से ‘मीडिया ट्रायल’, जबकि अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
BWHindia

जी समूह (ZEE Group) के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने अपने खिलाफ चल रही दिवाला कार्यवाही में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. बुधवार को
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में हुई सुनवाई के दौरान चंद्रा की ओर से पेश वकील सस्मित पात्रा ने खास तौर पर एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ के गठन और उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए.

चंद्रा के वकील ने कहा कि करीब ₹22,006 करोड़ के स्वीकृत लेनदार दावों के मुकाबले प्रस्तावित ₹6.5 करोड़ के भुगतान प्रस्ताव को लेकर पिछले 15 दिनों से उनके मुवक्किल को देशभर में बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मामले की अत्यधिक सार्वजनिक चर्चा ने कानूनी विवाद को ‘मीडिया ट्रायल’ में बदल दिया है और इससे चंद्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.

‘अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं’

एनसीएलएटी में सस्मित पात्रा ने कहा कि इस मामले में फिलहाल कोई अंतिम आदेश मौजूद नहीं है, लेकिन पिछले कई दिनों से सुभाष चंद्रा की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. यह मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूके), केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की ओर से दायर अपीलों से जुड़ा है. इन ऋणदाताओं ने 25 अगस्त को एनसीएलटी की ओर से भुगतान योजना को लेकर दिए गए मत और उससे जुड़ी प्रक्रिया को चुनौती दी है.

केंद्र सरकार के वरिष्ठ विधि अधिकारी तुषार मेहता ने ‘मीडिया ट्रायल’ वाली दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एनसीएलएटी की कार्यवाही का इस्तेमाल मीडिया में प्रकाशित होने वाले बयानों के लिए नहीं किया जा सकता. एनसीएलएटी ने इस टिप्पणी पर कोई आदेश पारित नहीं किया और कहा कि चंद्रा अपनी शिकायत एनसीएलटी के सामने उठा सकते हैं, जहां मूल दिवाला कार्यवाही लंबित है.

पांच सदस्यीय एनसीएलटी पीठ के गठन पर सवाल

सुनवाई के दौरान सबसे अहम मुद्दों में से एक एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ के गठन और उसके अधिकारों का रहा. इस पीठ ने भुगतान योजना पर नए सिरे से सुनवाई शुरू की है.

पात्रा ने कंपनी अधिनियम की धारा 419(5) का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान के तहत सदस्यों के बीच मतभेद होने की स्थिति में सीमित तरीके से मामले को दूसरे सदस्य या सदस्यों के सामने रखा जा सकता है. उनके मुताबिक, यह प्रावधान एनसीएलटी को पांच सदस्यीय पीठ गठित करने का अधिकार नहीं देता. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पांच सदस्यीय पीठ ने एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा की 25 अगस्त की राय पर रोक किस अधिकार के तहत लगाई. हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि ऋणदाताओं की ओर से दायर मौजूदा अपीलों में पांच सदस्यीय पीठ के गठन की वैधता को सीधे चुनौती नहीं दी गई है. न्यायाधिकरण ने कहा कि अगर चंद्रा इस पीठ के गठन या उसके कामकाज से असंतुष्ट हैं, तो वह 1 सितंबर के आदेश को अलग से चुनौती दे सकते हैं.

‘एनसीएलटी सदस्यों की राय पूरी तरह अलग नहीं’

चंद्रा के वकील ने ऋणदाताओं की उस दलील को भी चुनौती दी कि भुगतान प्रस्ताव पर विचार करने वाले तीन एनसीएलटी सदस्यों की राय पूरी तरह अलग थी. पात्रा के मुताबिक, न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और निलेश शर्मा इस बुनियादी सवाल पर काफी हद तक सहमत थे कि चंद्र दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की धारा 79 के तहत भुगतान योजना के लिए पात्र हैं.

दोनों के बीच मुख्य मतभेद इस बात को लेकर था कि भुगतान योजना उन लेनदारों पर कैसे लागू होगी, जिन्होंने इसका समर्थन नहीं किया है. भारद्वाज का मत था कि योजना को उन लेनदारों पर लागू किया जाए, जिन्होंने इसका समर्थन किया है, जबकि असहमति जताने वाले ऋणदाताओं को दूसरे वसूली उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी जाए. वहीं, शर्मा का मानना था कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की धारा 115 के तहत भुगतान योजना सभी लेनदारों पर बाध्यकारी होगी, जिसमें असहमति जताने वाले ऋणदाता भी शामिल हैं.

चंद्रा के वकील ने कहा कि धारा 79 के तहत पात्रता के सवाल पर दोनों सदस्य मूल रूप से एक ही राय रखते थे. इसलिए पूरे मामले को दोबारा शुरू से सुनने की जरूरत नहीं है.

ऋणदाताओं ने अपील वापस लेने का फैसला बदला

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने शुरुआत में ऋणदाताओं की अपील वापस लेने और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उसे फिर से उठाने की अनुमति मांगी. उनका तर्क था कि पांच सदस्यीय एनसीएलटी पीठ पहले ही शर्मा की राय पर रोक लगा चुकी है और मामले की नए सिरे से सुनवाई कर रही है. ऐसे में फिलहाल एनसीएलएटी में अपील पर सुनवाई जरूरी नहीं हो सकती.

हालांकि, चंद्रा के वकील ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि शर्मा की राय कभी एनसीएलटी के अंतिम आदेश में तब्दील ही नहीं हुई. इसलिए ऋणदाताओं की अपील की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठता है.

बाद में मेहता ने अपील वापस लेने की अर्जी पर जोर नहीं दिया और मामले को लंबित रखने का अनुरोध किया. एनसीएलएटी ने इसे स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर के लिए तय कर दी.

₹6.5 करोड़ बनाम ₹22,006 करोड़ का विवाद

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ₹6.5 करोड़ के भुगतान प्रस्ताव को करीब ₹22,006 करोड़ के स्वीकृत लेनदार दावों के संदर्भ में कैसे देखा जाए. चंद्रा की कानूनी टीम का कहना है कि मामले को सिर्फ ‘₹22,000 करोड़ के दावे के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान’ के तौर पर पेश करना सही नहीं है. उसके मुताबिक, भुगतान योजना को मंजूरी देने वाला अभी कोई अंतिम और लागू करने योग्य एनसीएलटी आदेश मौजूद नहीं है और अलग-अलग एनसीएलटी सदस्यों की राय की कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है. दूसरी ओर, ऋणदाताओं का जोर भुगतान प्रस्ताव से जुड़ी एनसीएलटी की प्रक्रिया, उसके प्रभाव और असहमति जताने वाले लेनदारों के अधिकारों पर है.

एनसीएलएटी की ओर से ऋणदाताओं की अपीलों को लंबित रखने का मतलब है कि यह कानूनी चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है. अब एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ भुगतान योजना पर आगे सुनवाई करेगी. मामले में अगली अहम सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी.


मोदी की अपील- गैर-जरूरी सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचें, ‘स्वदेशी’ पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- वैश्विक संकट और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद भारत ने 7.8% GDP ग्रोथ हासिल की, अब आत्मनिर्भरता की रफ्तार बनाए रखना जरूरी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
BWHindia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी खर्च और विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल को कम करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जब तक बेहद जरूरी न हो, विदेश यात्रा से बचें, विदेश में शादियां आयोजित न करें और सोना न खरीदें. किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से जारी वीडियो संदेश में मोदी ने एक बार फिर ‘स्वदेशी’ और आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया.

प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय की है जब भारत वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितता के बीच तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8% रही.

‘आत्मनिर्भर भारत बनाना जरूरी’

मोदी ने कहा कि भारत को आर्थिक वृद्धि की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखना होगा और इसके लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है. उन्होंने कहा कि स्वदेशी को अपनाने से देश के युवाओं को 2047 तक विकसित भारत बनाने में मदद मिलेगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध और संकट की स्थिति बनी हुई है, आपूर्ति श्रृंखला बाधित है और कोविड-19 के बाद से वैश्विक स्तर पर स्थिरता का अभाव रहा है. इसके बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में 7.8% की आर्थिक वृद्धि दर देश में बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाती है. प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय देश की जनता के सामूहिक प्रयासों को दिया.

मई में भी की थी ऐसी अपील

प्रधानमंत्री इससे पहले 10 मई को हैदराबाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भी लोगों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचने, विदेश में शादियां आयोजित न करने और सोना नहीं खरीदने की अपील कर चुके हैं. उस समय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारत के सामने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां थीं और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा था.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अमेरिका में एक कार्यक्रम से इतर कहा कि विदेशी मुद्रा के गैर-जरूरी इस्तेमाल को कम करने की अपील ऐसे समय में की गई है जब भारत कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आयातक है और उसे बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

‘निराशावाद’ फैलाने वालों पर निशाना

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सरकार की आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए आलोचकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश ने उन लोगों के दावों को गलत साबित किया है जो निराशा का माहौल बनाने में लगे हैं. मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियां अच्छी हैं और उसकी नीयत स्पष्ट है, जिसकी वजह से भारत प्रगति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है.

कांग्रेस ने GDP आंकड़ों पर उठाए सवाल

वहीं, कांग्रेस ने सरकार के GDP आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने GDP के आंकड़ों को ‘आंकड़ों की कलाबाजी’ बताया. उन्होंने दावा किया कि GDP की गणना की पद्धति में बार-बार बदलाव किया गया है.

रमेश ने नॉमिनल और वास्तविक GDP के बीच के अंतर को लेकर भी सवाल उठाया. उनके मुताबिक, जून तिमाही में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 9% से अधिक रही, जबकि सरकार के आंकड़ों में नॉमिनल और वास्तविक GDP के बीच का अंतर केवल 2.3% है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस वर्ष GDP की गणना की पद्धति में दो बार बदलाव किया है और जून में GDP के अनुमान के समय थोक मूल्य सूचकांक का इस्तेमाल करना बंद कर दिया.


डेटा सेंटर में ₹250 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश, फिर भी 2030 तक GDP में योगदान सिर्फ 0.13%

मूडीज के मुताबिक भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में भारी निवेश के बावजूद आर्थिक वृद्धि और रोजगार पर सीमित असर पड़ेगा. 2030 तक डेटा सेंटर से GDP में करीब 0.13% और रोजगार में महज 0.02% की बढ़ोतरी का अनुमान है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
BWHindia

भारत में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणाएं हो चुकी हैं. हालांकि, इतनी बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं के बावजूद 2030 तक इस सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) के मुताबिक, 2030 तक डेटा सेंटर सेक्टर भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सिर्फ 0.13% का योगदान दे सकता है.

Moody’s का अनुमान है कि अगले चार वर्षों में डेटा सेंटर उद्योग से रोजगार में केवल 0.02% की बढ़ोतरी होगी. एजेंसी के मुताबिक, यह योगदान मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों के अनुमानित योगदान से भी कम है.

सरकार के अनुमान के मुताबिक, भारत 2030 तक 7.3 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इस आधार पर GDP में 0.13% योगदान करीब 9.5 अरब डॉलर के बराबर होगा.

डेटा सेंटर में तेजी से बढ़ रहा निवेश

डेटा सेंटर भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं. घरेलू कारोबारी समूहों, वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों और स्वतंत्र ऑपरेटरों की ओर से इस सेक्टर में बड़े निवेश की घोषणाएं की गई हैं. पिछले 12 महीनों में डेटा सेंटर क्षेत्र में 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश का ऐलान हुआ है. गूगल और अडानी ने विशाखापत्तनम में 1 गीगावाट (GW) क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. वहीं, Tata Consultancy Services (TCS) ने अक्टूबर 2025 में 1 GW क्षमता वाले HyperVault प्रोजेक्ट के लिए 7 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी. रिसर्च फर्म Wood Mackenzie ने 27 जुलाई को अनुमान लगाया था कि भारत की नेट एक्टिव डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 12 GW तक पहुंच सकती है.

सरकार भी दे रही है बढ़ावा

भारत को ग्लोबल डेटा सेंटर हब बनाने के लिए सरकार की ओर से भी कई कदम उठाए गए हैं. 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 2047 तक पूरी टैक्स छूट देने का ऐलान किया था. यह सुविधा भारत के डेटा सेंटर में डेटा होस्ट करने या वर्कलोड चलाने वाली कंपनियों के लिए है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच डेटा सेंटर की अहमियत और बढ़ गई है. AI के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और स्टोरेज क्षमता की जरूरत होती है. इसी वजह से Tata Sons, Reliance Industries, Adani Enterprises, Larsen & Toubro और Bharti Enterprises जैसे बड़े कारोबारी समूह भी इस सेक्टर में उतर चुके हैं.

बड़े निवेश के बावजूद GDP पर सीमित असर क्यों?

Moody’s के मुताबिक, डेटा सेंटर में होने वाला निवेश और निर्माण से पैदा होने वाला रोजगार रकम के लिहाज से काफी बड़ा है, लेकिन देश की पूरी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में इसका प्रभाव छोटा है. Moody’s के विश्लेषकों Deborah Tan और अन्य ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डेटा सेंटर में प्रस्तावित निवेश रणनीतिक और स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन फिलहाल यह इतना बड़ा नहीं है कि देश की कुल आर्थिक वृद्धि की तस्वीर में बड़ा बदलाव ला सके.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत की कुल नेट राष्ट्रीय बिजली खपत में डेटा सेंटर की हिस्सेदारी 5% से कम रहने का अनुमान है. इसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों की खपत पर भी इसका असर सीमित रहने की संभावना है.

पूंजी-आधारित उद्योग होने से रोजगार कम

डेटा सेंटर उद्योग के GDP और रोजगार पर सीमित प्रभाव की एक बड़ी वजह इसका पूंजी-आधारित बिजनेस मॉडल है. डेटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए जमीन, बिजली, कूलिंग सिस्टम और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च करना पड़ता है. इसके बावजूद इन सुविधाओं में निवेश के आकार की तुलना में कर्मचारियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है. यही वजह है कि डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में अरबों डॉलर का निवेश होने के बावजूद GDP और रोजगार में उसी अनुपात में बढ़ोतरी जरूरी नहीं है.

कुल मिलाकर, भारत में डेटा सेंटर सेक्टर AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोनॉमी की बढ़ती जरूरतों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन रहा है. हालांकि, Moody’s के आकलन के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस सेक्टर का राष्ट्रीय GDP और रोजगार पर प्रत्यक्ष प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित ही रहने की संभावना है.


कैनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट्स से वसूले ₹510 करोड़, डीआरटी के आदेश के बाद चुकाया पूरा बकाया

2020 में एनपीए बने खाते से जुड़ी लंबे समय से चल रही वसूली प्रक्रिया खत्म, दिवालिया प्रक्रिया और संपत्ति बिक्री की कार्रवाई के बीच बैंक को मिली पूरी रकम

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
BWHindia

कैनरा बैंक ने सोने और आभूषण निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स से करीब ₹510 करोड़ की बकाया राशि वसूल कर ली है. ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के आदेश के बाद कंपनी ने बैंक का पूरा बकाया चुका दिया. इसके साथ ही कंपनी के खिलाफ बैंक की लंबे समय से चल रही वसूली प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है.

राजेश एक्सपोर्ट्स का बैंक खाता 2020 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए बन गया था. इसके बाद कैनरा बैंक ने बकाया वसूली के लिए कई कानूनी रास्ते अपनाए. बैंक ने 2021 में ऋण वसूली न्यायाधिकरण का रुख किया था. इसके अलावा राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की याचिका दायर की गई थी. बैंक ने वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन कानून यानी सरफेसी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की थी.

डीआरटी ने कैनरा बैंक के पक्ष में दिया फैसला

ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने अंततः कैनरा बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स को बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया था. आदेश में कहा गया था कि यदि कंपनी बकाया नहीं चुकाती है तो बैंक अपनी गिरवी रखी संपत्तियों को बेच सकता है.

इस आदेश को लागू कराने के लिए कैनरा बैंक ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया. उच्च न्यायालय ने डीआरटी के आदेश को लागू करने की अनुमति दे दी. इसके बाद राजेश एक्सपोर्ट्स की ओर से बैंक को बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया.

राजेश एक्सपोर्ट्स का सबसे बड़ा कर्जदाता था कैनरा बैंक

कैनरा बैंक, राजेश एक्सपोर्ट्स का सबसे बड़ा कर्जदाता था. बैंक का बकाया करीब ₹509-510 करोड़ था. दिवालिया प्रक्रिया के जरिए खाते के समाधान की कोशिशों में अड़चन आने के बाद बैंक ने वसूली के लिए कई कानूनी विकल्पों का सहारा लिया.

इस साल की शुरुआत में कैनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर अपने ₹509.37 करोड़ के कर्ज को संकटग्रस्त कर्ज में निवेश करने वाले निवेशकों को बेचने की पेशकश भी की थी. बैंक की दिवालिया याचिका पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था. ऐसे में ₹510 करोड़ की ताजा वसूली बैंक की उस योजना से अलग है, जिसमें संकटग्रस्त कर्ज को बेचने का विकल्प अपनाया गया था.

सोने के आयात के लिए जारी साख पत्रों से जुड़ा था मामला

डीआरटी में चल रहा मामला राजेश एक्सपोर्ट्स के सोने के आयात के लिए कैनरा बैंक की ओर से जारी किए गए साख पत्रों से जुड़ा था. साख पत्रों की अवधि पूरी होने पर बैंक को संबंधित भुगतान करना पड़ा था, जबकि इसके बाद कंपनी को बैंक की राशि वापस करनी थी. 2020 में कंपनी की भुगतान क्षमता पर दबाव बढ़ने के बाद इन देनदारियों का संकट बढ़ गया और बैंक खाता एनपीए हो गया.

सेबी की कार्रवाई के बीच हुई ₹510 करोड़ की वसूली

राजेश एक्सपोर्ट्स से यह वसूली ऐसे समय हुई है जब कंपनी नियामकीय जांच का भी सामना कर रही है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने जून 2026 के अपने अंतरिम आदेश में कंपनी में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया था.

सेबी की जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया था कि कंपनी की ओर से रिपोर्ट किए गए राजस्व का 97-99 फीसदी तक हिस्सा कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है. इसके अलावा सेबी ने राजेश मेहता को कंपनी की प्रतिभूतियों में लेनदेन करने से भी रोक दिया था. कैनरा बैंक की ताजा वसूली के साथ 2020 में एनपीए बने खाते से जुड़ा करीब ₹510 करोड़ का पूरा बकाया बैंक को वापस मिल गया है.
 


NCLT ने सुभाष चंद्र की ₹6.25 करोड़ की रिपेमेंट योजना पर लगाई रोक, संपत्तियां ट्रांसफर करने पर भी पाबंदी

पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने 25 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्र को पर्सनल गारंटी से जुड़े दावों के निपटारे के लिए रिपेमेंट प्लान की मंजूरी दी गई थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 02 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 02 September, 2026
BWHindia

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्र को बड़ी राहत देने वाले अपने पिछले आदेश पर रोक लगा दी है. ट्रिब्यूनल ने 25 अगस्त के उस आदेश को फिलहाल लागू करने से रोक दिया है, जिसमें करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकार किए गए कर्जदाताओं के दावों के मुकाबले लगभग ₹6.25 करोड़ के भुगतान के जरिए मामले के निपटारे की योजना को मंजूरी दी गई थी.

NCLT की पांच सदस्यीय विशेष पीठ की अध्यक्षता ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने की. पीठ ने कहा कि रिपेमेंट प्लान को लेकर स्पष्ट बहुमत की राय सामने नहीं आई है. ऐसे में 25 अगस्त के आदेश को लागू नहीं किया जा सकता.

सुभाष चंद्र की संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक

ट्रिब्यूनल ने सुभाष चंद्र को पर्सनल गारंटर के तौर पर अपनी किसी भी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से बेचने, ट्रांसफर करने, अलग करने, उस पर किसी तरह का भार डालने या अन्य तरीके से उसका निपटारा करने से रोक दिया है. NCLT ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं. मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी.

यह आदेश चंद्र की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया को लेकर NCLT में लंबे समय से चले आ रहे मतभेद के बीच आया है.

दो सदस्यीय पीठ में बंट गया था फैसला

मामले की मूल दो सदस्यीय पीठ ने सितंबर 2025 में अलग-अलग फैसले दिए थे. न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी, जबकि तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने इसे खारिज कर दिया था. रीना सिन्हा पुरी ने दावों को स्वीकार करने और उन पर मतदान की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए योजना का विरोध किया था.

इसके बाद मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास भेजा गया. उन्होंने 25 अगस्त को विवादित दावों से जुड़े कुछ बदलावों के साथ रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी थी. हालांकि, अलग-अलग राय के चलते मामले में स्पष्ट बहुमत नहीं बन सका. इसके बाद NCLT ने विवाद को सुलझाने के लिए पांच सदस्यीय विशेष पीठ का गठन किया.

कर्जदाताओं ने रिकवरी पर उठाए सवाल

प्रस्तावित योजना के तहत ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को करीब ₹6.25-6.5 करोड़ की रिकवरी होने का अनुमान है. दस कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि HDFC Bank, LIC Housing Finance और Canara Bank समेत कई अन्य कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया.

विरोध करने वाले कर्जदाताओं ने इतनी कम रिकवरी पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सुभाष चंद्र की वित्तीय स्थिति और संपत्तियों की गहन जांच की जरूरत है. उन्होंने फॉरेंसिक जांच और संपत्तियों का पता लगाने की प्रक्रिया की संभावना पर भी जोर दिया है. कर्जदाताओं के मुताबिक, चंद्र से जुड़ी कुछ संस्थाओं के पास रिपेमेंट प्लान के समर्थन में पड़े वोटों का बड़ा हिस्सा था. इससे मतदान प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं.

₹22,006 करोड़ के दावे पर सुभाष चंद्र की आपत्ति

सुभाष चंद्र ने ₹22,006 करोड़ के दावे की प्रस्तुति पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा एस्सेल ग्रुप की उन कंपनियों की देनदारियों से जुड़ा है, जिनके लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी. यह राशि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज का प्रतिनिधित्व नहीं करती. उन्होंने अपनी व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर किए गए दावों का अनुमान करीब ₹3,990 करोड़ लगाया है.

पिछले NCLT आदेश में यह भी कहा गया था कि अगर चंद्र को दिवालिया प्रक्रिया में भेजा जाता है तो कर्जदाताओं को इससे भी कम रिकवरी हो सकती है. आदेश में यह भी उल्लेख था कि चंद्र की संपत्ति में अपेक्षाकृत कम संख्या में संपत्तियां हैं और उनका मूल्य भी बहुत अधिक नहीं है.

NCLAT में भी चल रहा है मामला

यह विवाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) तक भी पहुंच चुका है. रिपेमेंट प्लान का विरोध करने वाले कर्जदाताओं ने वहां भी इस योजना को चुनौती दी है. NCLT के ताजा आदेश के बाद पहले से मंजूर किया गया समझौता फिलहाल रुक गया है. अब पांच सदस्यीय विशेष पीठ NCLT की पिछली अलग-अलग राय और कर्जदाताओं की आपत्तियों पर विचार करेगी. मंगलवार के आदेश के बाद सुभाष चंद्र ने कहा कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर 'पूरा भरोसा और विश्वास' है.