अडानी विल्मर के मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट से पता चलता है कि कंपनी और भी मजबूत हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
कुछ समय पहले तक गौतम अडानी (Gautam Adani) का जिस कंपनी में मन नहीं लग रहा था, वो लगातार मजबूत होती जा रही है. हम बात कर रहे हैं अडानी विल्मर (Adani Wilmar) की. अडानी समूह की इस कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट जारी किए हैं, जिनसे पता चलता है कि लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है. कंपनी ने बताया है कि जून तिमाही में उसकी वॉल्यूम ग्रोथ सालाना आधार पर 13% रही है.
खूब बेचा चावल
अडानी विल्मर के अनुसार, उसके अल्टरनेटिव चैनल्स ने भी पहली तिमाही में 19 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ अपनी रफ्तार बनाए रखी है. इस चैनल में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स शामिल हैं. कंपनी के ब्रांडेड एक्सपोर्ट की वैल्यू में सालाना आधार पर 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. कंपनी का कहना है कि उसने तिमाही की बिक्री के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त एजेंसियों को गैर-बासमती चावल बेचा, जिसने उसके तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाने में मदद की.
सुस्त मांग में भी ग्रोथ
अडानी की इस कंपनी का कहना है कि उसके फूड एंड FMCG बिजनेस के वॉल्यूम में पिछले साल की तुलना में 23% का इजाफा हुआ है. कंपनी का एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल का बिजनेस मजबूत सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन के चलते फलफूल रहा है. अडानी विल्मर के अनुसार, एडिबल ऑयल इंडस्ट्री को जून तिमाही में सुस्त मांग का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उसने ग्रोथ दर्ज की है. गौरतलब है कि अडानी विल्मर ग्रोथ के लिए ब्रांडेंड फूड सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है. खासतौर से स्टेपल, मसाले, चीनी, दालें, गेहूं का आटा जैसे सेगमेंट पर उसने काफी काम किया है.
बस सही मौके का इंतजार
पिछले साल खबर आई थी कि अडानी अपनी कंपनी अडानी विल्मर लिमिटेड में पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. हालांकि, इस साल की शुरुआत में खबर आई कि प्राइसिंज को लेकर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए अडानी समूह सही डील मिलने तक इंतजार करेगा. इस लिहाज से देखें तो अडानी, विल्मर से बाहर निकलना चाहते हैं, बस सही मौके के इंतजार में हैं. अडानी समूह और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. कंपनी फॉर्च्यून ब्रैंड (Fortune Brand) नाम से खाद्य तेल और पैकेज्ड ग्रोसरी बेचती है. Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बात करें, तो अडानी ग्रुप की 43.97% और विल्मर इंटरनेशनल की इसमें 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 12.06 प्रतिशत है.
क्या-क्या बेचती है कंपनी?
अडानी विल्मर ने IPO के जरिए 3600 करोड़ रुपए जुटाए थे. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Adani Wilmar पर फोकस करने के बजाए अडानी अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, जहां ग्रोथ की संभावना काफी ज्यादा है. लिहाजा, इस जॉइंट वेंचर से अलग होने से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपने कोर बिजनस के लिए पैसा मिल जाएगा. विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.
महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोक्ता खर्च में सतर्कता बढ़ी है, जिससे रिटेल सेक्टर की रफ्तार धीमी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश में रिटेल बिक्री की रफ्तार मई 2026 में धीमी पड़ गई. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई में रिटेल बिक्री वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जो अप्रैल 2026 में 7 प्रतिशत थी. हालांकि, आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी श्रेणियां अब भी उपभोक्ता मांग को सहारा दे रही हैं.
पश्चिम भारत सबसे आगे, पूर्वी भारत की रफ्तार धीमी
RAI के मासिक बिजनेस सर्वे के 71वें दौर के अनुसार, पश्चिम भारत में रिटेल बिक्री में सबसे अधिक 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उत्तर और दक्षिण भारत में 5-5 प्रतिशत की वृद्धि रही, जबकि पूर्वी भारत में वृद्धि दर 4 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता मांग में अपेक्षाकृत धीमी गति को दर्शाती है.
महंगाई और वैश्विक तनाव का असर
RAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कुमार राजगोपालन ने कहा, “मई में वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जबकि अप्रैल में यह 7 प्रतिशत थी. वैश्विक संघर्षों के कारण बढ़े महंगाई के दबाव ने उपभोक्ता भावना को प्रभावित किया है. खुदरा कारोबारी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि उपभोक्ता खर्च अधिक सतर्क हो गया है.”
QSR और किराना श्रेणी में सबसे अधिक बढ़ोतरी
विभिन्न श्रेणियों में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद खाद्य एवं किराना श्रेणी में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही. फुटवियर श्रेणी में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि परिधान एवं कपड़े, आभूषण और खेल सामग्री की बिक्री में 5-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
मूल्य आधारित खरीदारी की ओर बढ़ रहे उपभोक्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता अब अधिक सतर्कता के साथ खर्च कर रहे हैं और मूल्य आधारित खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका असर लगभग सभी श्रेणियों की मांग पर दिखाई दे रहा है. RAI ने कहा कि खुदरा कारोबारियों का फोकस इन्वेंट्री ऑप्टिमाइजेशन, ग्राहक जुड़ाव और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर बना हुआ है.
AI और डिजिटल तकनीक का बढ़ रहा इस्तेमाल
रिटेल कंपनियां अब निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, ग्राहकों के अनुभव को मजबूत करने और लाभप्रदता बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं.उद्योग जगत का मानना है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित रणनीतियां आने वाले समय में रिटेल कारोबार की वृद्धि और प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकती हैं.
इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अर्ली लर्निंग स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. यह निवेश Zeropearl VC की अगुवाई में हुआ है. कंपनी 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित और BIS-प्रमाणित शैक्षणिक उत्पाद विकसित कर रही है. इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.
0-3 वर्ष के बच्चों के लिए अर्ली लर्निंग प्रोडक्ट्स बनाने वाले स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. इस निवेश दौर का नेतृत्व Zeropearl VC ने किया. व्यक्तिगत क्षमता में निवेश करने वालों में CRED के संस्थापक कुणाल शाह, Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल और उपभोक्ता एवं सप्लाई चेन क्षेत्र के कई निवेशक शामिल रहे.
100 नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी
कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक 18-36 महीने की आयु के बच्चों के लिए 100 नए उत्पाद लॉन्च करने, क्विक कॉमर्स वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, सप्लाई चेन विस्तार और ब्रांड निर्माण पर किया जाएगा.
भारत में तेजी से बढ़ रहा है अर्ली लर्निंग बाजार
भारत में हर साल लगभग 2.3 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जो दुनिया में सबसे बड़ा जन्म समूह है. इसके बावजूद छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रमाणित शैक्षणिक उत्पादों के विकल्प सीमित हैं. देश का खिलौना बाजार वर्ष 2025 में करीब 2.1 अरब डॉलर का था, जो 2034 तक बढ़कर लगभग 4.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. शिक्षा और विकास आधारित खिलौने इस बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले वर्गों में शामिल हैं.
सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती
कंपनी का कहना है कि भारत में खिलौनों के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य होने के बावजूद बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जिनके पास सुरक्षा प्रमाणन नहीं है. ऐसे खिलौनों में भारी धातुएं जैसे सीसा (Lead) पाए जाने के मामले सामने आए हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं. LiLLBUD का पूरा उत्पाद पोर्टफोलियो BIS-प्रमाणित है, जिससे कंपनी माता-पिता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है.
आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्रों ने की स्थापना
कंपनी की स्थापना अभिषेक शर्मा और आयुष बंसल ने की है. अभिषेक शर्मा आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और इससे पहले Shadowfax तथा CityMall से जुड़े रहे हैं. वहीं, आयुष बंसल आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं तथा BCG और BYJU'S में काम कर चुके हैं.
कंपनी मोंटेसरी पद्धति से प्रेरित खिलौने और लर्निंग प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक, संवेदी और मोटर कौशल के विकास में मदद करते हैं.
तीन साल की उम्र तक होता है 80% मस्तिष्क विकास
कंपनी के अनुसार, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास तीन वर्ष की उम्र से पहले हो जाता है. इसी कारण 0-3 वर्ष की आयु को संज्ञानात्मक और संवेदी विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है.
LiLLBUD को अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्लेटफॉर्म Rocket Learning के सह-संस्थापक अजीज गुप्ता का भी मार्गदर्शन मिल रहा है, जो कंपनी में निवेशक और सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं.
पिता बनने के अनुभव से जन्मा स्टार्टअप का विचार
कंपनी के सह-संस्थापक आयुष बंसल ने बताया कि पिता बनने की तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में सुरक्षित, वैज्ञानिक आधार वाले और भरोसेमंद अर्ली लर्निंग उत्पादों की कमी है. इसी अनुभव ने LiLLBUD की नींव रखी.
एक साल में 3.5 करोड़ रुपये की रन रेट
मई 2025 में लॉन्च होने के बाद कंपनी ने 3.5 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व रन रेट हासिल कर ली है. वर्तमान में कंपनी के पास 200 से अधिक उत्पाद हैं, जो उसकी वेबसाइट के अलावा Amazon, Flipkart और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं.
कंपनी का भविष्य का रोडमैप
LiLLBUD आने वाले समय में क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स चैनलों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, BIS-प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़ाने और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भरोसेमंद ब्रांड बनने की दिशा में काम करेगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में अर्ली चाइल्डहुड प्रोडक्ट्स के लिए सुरक्षा और विकास का नया मानक स्थापित करना है.
राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई की दलाल स्ट्रीट की तरह अब कोलकाता की ऐतिहासिक लायन्स रेंज भी एक बार फिर शेयर कारोबार की हलचल से गुलजार हो सकती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने का ऐलान किया है. राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से पूर्वी भारत में पूंजी बाजार को नई ऊर्जा मिलेगी, कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा और कोलकाता को फिर से एक प्रमुख वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.
बजट में सरकार ने किया बड़ा ऐलान
पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने बजट में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को पुनर्जीवित करने की मंशा जाहिर की. सरकार ने कहा कि 118 साल पुरानी यह संस्था कानूनी और नियामकीय अड़चनों के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गई है, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.
क्यों अहम है CSE की वापसी?
कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है. एक समय यह पूर्वी भारत की कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का बड़ा मंच था. राज्य सरकार के मुताबिक, एक्सचेंज के फिर से सक्रिय होने से क्षेत्रीय कंपनियों को लिस्टिंग और ट्रेडिंग की कम लागत पर सुविधा मिल सकेगी. इसके अलावा नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को पूंजी तक आसान पहुंच मिल सकेगी.
उद्योग मंत्री से मिला था CSE का प्रतिनिधिमंडल
हाल ही में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से एक्सचेंज को बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू करने में मदद की मांग की. CSE अधिकारियों ने सरकार को बताया कि वे सेबी को दी गई अपनी स्वैच्छिक निकास (वॉलंटरी एग्जिट) की अर्जी वापस लेना चाहते हैं और दोबारा ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं. उद्योग मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार और सेबी से बातचीत करेगी.
2013 से बंद है ट्रेडिंग
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अप्रैल 2013 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी. इसके बाद लगभग एक दशक तक नियामकीय और कानूनी विवाद जारी रहे. फरवरी 2025 में एक्सचेंज ने स्वेच्छा से स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक सेबी की ओर से अंतिम एग्जिट आदेश जारी नहीं किया गया है.
SEBI और केंद्र से सहयोग की उम्मीद
राज्य सरकार का मानना है कि यदि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज को मुंबई से परिचालन की अनुमति मिल सकती है, तो पर्याप्त बुनियादी ढांचे, वित्तीय संसाधनों और राष्ट्रीय उपस्थिति वाले कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को भी दोबारा अवसर मिलना चाहिए. CSE से जुड़े लोगों का कहना है कि एक्सचेंज के पास मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, जिनका उपयोग दोबारा शेयर कारोबार शुरू करने के लिए किया जा सकता है.
पूर्वी भारत के वित्तीय केंद्र के रूप में उभर सकता है कोलकाता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज दोबारा शुरू होता है, तो इससे पूर्वी भारत के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा फायदा मिल सकता है. इससे क्षेत्रीय कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ेंगे और कोलकाता एक बार फिर देश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में अपनी जगह बना सकता है.
फंड जुटाने की इस योजना में 6,555 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 947.7 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर समूह की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सज्जन जिंदल समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने अपने विस्तार कार्यक्रम और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए 7,502.7 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च किया है. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल नए निवेश, परियोजनाओं के विस्तार, कर्ज कम करने और रणनीतिक विकास योजनाओं के लिए करेगी.
6,555 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी कंपनी
फंड जुटाने की इस योजना में 6,555 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 947.7 करोड़ रुपये के शेयर प्रमोटर समूह की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाएंगे. कंपनी ने शेयर का सांकेतिक इश्यू प्राइस 285 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो 22 जून को एनएसई पर बंद भाव के मुकाबले लगभग 7.2 प्रतिशत कम है.
इक्विटी हिस्सेदारी में होगा बदलाव
प्रस्तावित लेनदेन के तहत नए शेयर जारी होने से कंपनी की पोस्ट-इश्यू इक्विटी में लगभग 9.9 प्रतिशत का डाइल्यूशन होगा. वहीं, ऑफर फॉर सेल के कारण अतिरिक्त 1.4 प्रतिशत हिस्सेदारी में कमी आएगी. कंपनी ने कहा कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय, सहायक कंपनियों में निवेश, कर्ज चुकाने और रणनीतिक विस्तार योजनाओं के लिए किया जाएगा.
फंड का एक हिस्सा चल रही परियोजनाओं के विकास के लिए सहायक कंपनियों में लगाया जाएगा, जबकि दूसरी ओर इसका इस्तेमाल मूल कंपनी और उसकी सहयोगी इकाइयों के कर्ज को चुकाने या समय से पहले भुगतान करने में किया जाएगा. इसके अलावा, कंपनी अधिग्रहण, रणनीतिक निवेश और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी इस राशि का उपयोग करेगी.
फ्लोर प्राइस 290.35 रुपये तय
सोमवार को कंपनी की फाइनेंस कमेटी ने क्यूआईपी जारी करने को मंजूरी देते हुए प्रति शेयर 290.35 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया था. अंतिम इश्यू मूल्य बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ परामर्श के बाद तय किया जाएगा. कंपनी को फ्लोर प्राइस पर अधिकतम 5 प्रतिशत तक की छूट देने की भी अनुमति है.
प्रमोटर समूह भी बेचेगा हिस्सेदारी
इस ऑफर के तहत कंपनी अधिकतम 230 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी, जबकि सज्जन जिंदल फैमिली ट्रस्ट की ओर से 33.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी. लेनदेन की शर्तों के अनुसार कंपनी 60 दिनों की लॉक-इन अवधि का पालन करेगी, जबकि प्रमोटर समूह इश्यू बंद होने के बाद 12 सप्ताह तक लॉक-इन अवधि में रहेगा.
30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी
यह फंड जुटाने की प्रक्रिया कंपनी के दीर्घकालिक विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है. जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने वित्त वर्ष 2025 से 2030 के बीच लगभग 30,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई है, जिसमें वित्त वर्ष 2028 तक करीब 16,500 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है.
संस्थागत निवेशकों का दायरा बढ़ाने की रणनीति
कंपनी का मानना है कि यह क्यूआईपी केवल विस्तार योजनाओं को ही समर्थन नहीं देगा, बल्कि सार्वजनिक शेयरधारिता संबंधी नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने और संस्थागत निवेशकों के आधार को मजबूत करने में भी मदद करेगा.
राज्य सरकार 'पश्चिम बंगाल निवेश ढांचा' लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत औद्योगिक क्लस्टरों और कॉरिडोर के जरिए निवेश आकर्षित किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए 'विकसित बांग्ला' का विजन सामने रखा है. 4.38 लाख करोड़ रुपये के बजट में सरकार ने बुनियादी ढांचे, औद्योगीकरण, कनेक्टिविटी और निवेश को विकास की नई धुरी बनाया है. वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पश्चिम बंगाल को 'विकसित भारत' का एक मजबूत और आधुनिक हिस्सा बनाना है.
'विकसित बांग्ला' को बनाया विकास का आधार
वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि नई सरकार एक ऐसे पश्चिम बंगाल का निर्माण करना चाहती है, जो विकसित, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हो. राज्य सरकार केंद्र की 'पूर्वोदय' पहल के तहत बंगाल के लिए एक व्यापक विकास खाका तैयार करेगी, जिसमें औद्योगिक गलियारों, विनिर्माण केंद्रों और पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जाएगी.
औद्योगिक गलियारों और निवेश पर सरकार का जोर
राज्य सरकार 'पश्चिम बंगाल निवेश ढांचा' लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत औद्योगिक क्लस्टरों और कॉरिडोर के जरिए निवेश आकर्षित किया जाएगा. सरकार दुर्गापुर में सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई स्थापित करने की संभावना पर काम कर रही है, जबकि बांकुरा और बीरभूम में रक्षा विनिर्माण केंद्र विकसित करने की योजना है. इसके अलावा, राज्य की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का लाभ उठाने के लिए सरकार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति भी लाने जा रही है.
ताजपुर पोर्ट परियोजना को मिल सकती है नई गति
वर्षों से लंबित ताजपुर डीप-सी पोर्ट परियोजना को पुनर्जीवित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं. पूर्वी मेदिनीपुर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत इस परियोजना को विकसित करने पर विचार किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे राज्य में लॉजिस्टिक्स और व्यापार को नई गति मिलेगी.
मेट्रो और एयरपोर्ट परियोजनाओं पर बड़ा फोकस
कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुर्गापुर-आसनसोल और सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी के बीच मेट्रो लिंक की व्यवहार्यता का अध्ययन कराया जाएगा. वहीं, केंद्र की उड़ान योजना के तहत पुरुलिया, बालुरघाट और मालदा में नए हवाई अड्डों के निर्माण की घोषणा की गई है. इसके अलावा, कोलकाता एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए कल्याणी के पास 1,000 से 1,500 एकड़ जमीन पर एक नए एयरपोर्ट की योजना भी बनाई जा रही है.
कर्ज का बोझ बना बड़ी चुनौती
वित्त मंत्री ने राज्य पर 8.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को गंभीर चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और वित्तीय सुधारों के जरिए राज्य के वित्तीय हालात को स्थिर करने की कोशिश की जाएगी. सरकार के अनुमान के अनुसार, 2026-27 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का 1.02 प्रतिशत रहेगा, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 2.07 प्रतिशत से काफी कम है. वहीं, राजकोषीय घाटा 2.91 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.
आर्थिक सुधारों के जरिए विकास की उम्मीद
सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे, निवेश, उद्योग और कनेक्टिविटी पर केंद्रित यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा. साथ ही, केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत के एक प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी आएगी.
आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में कमजोर पड़ते मॉनसून ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा अर्थव्यवस्था स्थिति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर और महंगाई के अनुमान पर पड़ सकता है. हालांकि, आरबीआई ने यह भी कहा है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद, नियंत्रित चालू खाता घाटा और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है.
बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 जून तक देश में बारिश की कमी 28.4 प्रतिशत थी, जो 21 जून तक बढ़कर 42.2 प्रतिशत हो गई. आरबीआई की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मॉनसून कृषि उत्पादन, खाद्य कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकता है.
विकास दर और महंगाई पर पड़ सकता है असर
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 प्रतिशत के शुरुआती अनुमान से कम है. वहीं, खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मॉनसून इन अनुमानों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.
वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में अधिक मजबूत है. पिछले कुछ वर्षों में देश ने मजबूत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित महंगाई, राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखा है.
निजी खपत और निवेश से मिली अर्थव्यवस्था को ताकत
आरबीआई के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिसका मुख्य आधार निजी खपत और स्थिर निवेश रहा. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों के संकेतक भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं.
खाद्य और ईंधन कीमतों से बढ़ी महंगाई
महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में खाद्य और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.5 प्रतिशत थी. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और खाद्य वस्तुओं की महंगाई जून में भी बनी रहने के संकेत मिले हैं.
विदेशी मुद्रा भंडार और एफडीआई से मिला सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बाह्य क्षेत्र भी मजबूत बना हुआ है. चालू खाता घाटा नियंत्रित है और विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त स्तर पर है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में तेजी आई है, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में कुछ निकासी देखने को मिली है. आरबीआई का मानना है कि सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने वाले कदमों से आने वाले समय में पूंजी प्रवाह को समर्थन मिल सकता है.
Meta ने CRED में किया बड़ा निवेश, कंपनी की वैल्यू 4.5 अरब डॉलर पहुंची
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फिनटेक स्टार्टअप क्रेड (CRED) के संस्थापक कुणाल शाह अब मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मेटा ने क्रेड में करीब 90 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और इसी के साथ कुणाल शाह को व्हाट्सऐप (WhatsApp) के नए ग्लोबल हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस समझौते के तहत मेटा, क्रेड में लगभग 20 प्रतिशत अल्पांश हिस्सेदारी खरीदेगी. इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग 43,239 करोड़ रुपये आंका गया है. फंडिंग राउंड में प्राथमिक पूंजी निवेश के साथ सेकेंडरी शेयरों की खरीद भी शामिल है.
व्हाट्सऐप के अगले चरण की ग्रोथ का नेतृत्व करेंगे शाह
कुणाल शाह व्हाट्सऐप के विकास के अगले चरण का नेतृत्व करेंगे. उनकी प्राथमिकता विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन आधारित राजस्व मॉडल को बढ़ाना तथा प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एजेंट्स की तैनाती को तेज करना होगी. नेतृत्व परिवर्तन के तहत कुणाल शाह क्रेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद से हट जाएंगे और मेटा की वैश्विक नेतृत्व टीम में शामिल होंगे. वह विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्हें कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं.
मितेन संपत बने अंतरिम CEO
क्रेड में वर्ष 2020 से रणनीति और वित्त का नेतृत्व कर रहे मितेन संपत को तत्काल प्रभाव से अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. कंपनी फिलहाल दीर्घकालिक प्रबंधन ढांचे पर काम कर रही है और संभावित आईपीओ की तैयारियों में जुटी है.
17 मिलियन से अधिक सक्रिय सदस्य
वर्ष 2018 में स्थापित क्रेड क्रेडिट योग्य उपभोक्ताओं के लिए भुगतान, ऋण, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और लाइफस्टाइल सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी के अनुसार, उसके 1.7 करोड़ मासिक सक्रिय सदस्य हैं और भारत के 40 प्रतिशत से अधिक क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान उसके प्लेटफॉर्म के माध्यम से होते हैं. कंपनी का लेंडिंग कारोबार पार्टनर वित्तीय संस्थानों के लिए लगभग 24,000 करोड़ रुपये की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट तक पहुंच चुका है. क्रेड ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व और लाभप्रदता हासिल करने का भी दावा किया है.
भारत के फिनटेक सेक्टर पर मेटा का बड़ा दांव
मेटा का यह निवेश भारत के फिनटेक क्षेत्र में उसके सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है. कंपनी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना चाहती है.
कुणाल शाह ने इस बदलाव पर कहा कि क्रेड एक साधारण रिवॉर्ड प्लेटफॉर्म से विकसित होकर लाखों सदस्यों की सेवा करने वाला लाभदायक मंच बन चुका है और मौजूदा नेतृत्व टीम कंपनी को अगले चरण तक ले जाने के लिए पूरी तरह सक्षम है.
सोमवार को BSE सेंसेक्स 291 अंक की बढ़त के साथ 77,094 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 24,100 के ऊपर 24,103 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 291 अंक की बढ़त के साथ 77,094 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,100 के ऊपर 24,103 अंक पर बंद हुआ. आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी, विदेशी निवेशकों की सक्रियता और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार को मजबूती मिली थी. पिछले सप्ताह आईटी शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को बाजार में रिकवरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ. तो चलिए जानते हैं आज कौन-से शेयर फोकस में रहने वाले हैं.
कल किन शेयरों ने दिखाई तेजी, किन पर रहा दबाव
सोमवार के कारोबारी सत्र में आईटी, फार्मा और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. टेक महिंद्रा और सन फार्मा निफ्टी के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक ने भी बाजार को मजबूती दी.
वहीं, कुछ आईटी और मेटल शेयरों में दबाव बना रहा. विप्रो में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चुनिंदा धातु शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली. निवेशकों का रुख फिलहाल मजबूत फंडामेंटल, नए ऑर्डर, पूंजी जुटाने की योजनाओं और सकारात्मक कॉरपोरेट अपडेट वाली कंपनियों की ओर बना हुआ है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
आज शेयर बाजार में कई कंपनियां अपने कारोारी अपडेट्स, नए ऑर्डर, निवेश योजनाओं और विस्तार रणनीतियों के कारण निवेशकों के रडार पर रहेंगी, ऐसे में बाजार की शुरुआत सकारात्मक रहने की उम्मीद है. हिंदुस्तान जिंक ने ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए नई साझेदारी की है, जबकि इन्फो एज ने एआई और डीपटेक स्टार्टअप्स में अपने बड़े निवेश से बाजार का ध्यान खींचा है. लेमन ट्री होटल्स ने नेपाल के जनकपुर में नए होटल की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय विस्तार को गति दी है. वहीं, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर ने 290.35 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर अपना क्यूआईपी लॉन्च किया है. वोडाफोन आइडिया को आदित्य बिड़ला समूह की इकाई से प्रमोटर निवेश मिलने जा रहा है, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को 1,081 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा, बाजार स्टाइल रिटेल में हिस्सेदारी बिक्री और इलेक्ट्रॉनिक्स मार्ट इंडिया के नए स्टोर विस्तार जैसे घटनाक्रम भी निवेशकों की नजर में रहेंगे.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
राज ठाकरे उस समय कोहिनूर सौदे में शामिल हुए जब पैसा आ रहा था. नुकसान होने और घाटा सामने आने से पहले वह बाहर निकल गए. ED ने उनसे 8.5 घंटे तक पूछताछ की. महाराष्ट्र अब भी एक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है. राज ठाकरे की कोहिनूर कहानी महाराष्ट्र के सबसे कम जांचे गए वित्तीय रहस्यों में से एक बनी हुई है.
राज ठाकरे
कल्पना कीजिए कि यह दुनिया के किसी और हिस्से में हुआ होता.
एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है. और फिर, यहीं पर दिमाग रुक जाता है, वही संस्था उसी कंपनी को, जिसमें वह अभी-अभी नुकसान उठा चुकी है, और अधिक पैसा उधार देती है. कुल जोखिम बढ़कर ₹860 करोड़ तक पहुंच जाता है. राजनेता इस लेन-देन से बाहर निकल जाता है. वर्षों बाद कंपनी ढह जाती है. संस्था भी संकट में आ जाती है. भारत भर के निवेशक नुकसान झेलते हैं.
किसी को भी कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं मिलता.
यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है.
यह राज ठाकरे की कोहिनूर कहानी है. यह मुंबई में हुई. इसमें वास्तविक धन शामिल था. इसमें IL&FS शामिल थी, एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी, जिसके शेयरधारकों में LIC भी शामिल है. इस सौदे के केंद्र में मौजूद व्यक्तियों में से एक, महाराष्ट्र की सबसे पहचान योग्य राजनीतिक हस्तियों में से एक, ने आज तक सार्वजनिक रूप से कभी नहीं बताया कि आखिर हुआ क्या था.
एक बार भी नहीं. कभी नहीं.
प्रमुख जमीन, सार्वजनिक धन और राजनीतिक नाम
अगस्त 2005. मुंबई में Kohinoor CTNL Infrastructure Company Private Limited नामक कंपनी का गठन हुआ. इसके संस्थापक थे: राज ठाकरे, जो मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इसमें शामिल हुए, पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री मनोहर जोशी के पुत्र उन्मेष जोशी, और बिल्डर राजन शिरोडकर, जिन्हें उस समय की हर रिपोर्ट में ठाकरे का "करीबी सहयोगी" बताया गया.
इस समूह ने दादर पश्चिम में स्थित बंद पड़ी कोहिनूर मिल की 4.8 एकड़ जमीन के लिए बोली लगाई. स्थान: शिवसेना भवन के सामने. शिवाजी पार्क से पैदल दूरी पर. दादर स्टेशन से कुछ ही मिनट की दूरी पर. भारत की सबसे मूल्यवान शहरी जमीनों में से एक.
उन्होंने नीलामी जीत ली. कीमत थी: ₹421 करोड़.
योजना एक शॉपिंग मॉल बनाने की थी. इसके वित्तीय समर्थक थे IL&FS, Infrastructure Leasing & Financial Services, एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी, जिसके शेयरधारकों में भारतीय जीवन बीमा निगम भी शामिल है. IL&FS ने ₹225 करोड़ की इक्विटी का चेक जारी किया.
इस सौदे के पहले दिन से ही इसमें राजनीतिक रूप से जुड़े संस्थापक, सार्वजनिक संस्थागत धन और मुंबई की प्रमुख रियल एस्टेट शामिल थी.
पैसा आ चुका था. परियोजना शुरू हो चुकी थी.
IL&FS ने लगाए ₹225 करोड़
IL&FS रियल एस्टेट परियोजनाओं को यूं ही ₹225 करोड़ नहीं देती. यह एक अवसंरचना वित्तीय संस्था है. इसका धन अंततः सार्वजनिक व्यवस्था से आता है, सरकारी हिस्सेदारी, आम भारतीयों द्वारा चुकाए गए LIC प्रीमियम और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए गए ऋण.
उसी धन में से ₹225 करोड़ वर्ष 2005 में Kohinoor CTNL में लगाए गए. दादर की सबसे मूल्यवान मिल भूमि पर दो प्रमुख राजनीतिक नामों वाले समूह का समर्थन किया गया. शॉपिंग मॉल की योजना आगे बढ़ी. निर्माण शुरू हुआ. परियोजना जीवित थी.
IL&FS को ₹135 करोड़ का नुकसान और बाहर निकलना
तीन साल बाद. मॉल की योजना विफल हो गई, बाजार गिर चुका था, खुदरा किराए बुरी तरह नीचे आ गए थे. परियोजना अपनी मूल अवधारणा के अनुसार अब काम नहीं कर रही थी. IL&FS ने Kohinoor CTNL में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी से बाहर निकलने का फैसला किया.
उसे वापस मिले: ₹90 करोड़.
उसने लगाए थे: ₹225 करोड़.
सार्वजनिक धन का प्रबंधन करने वाली एक सरकारी संस्था से जुड़ी कंपनी IL&FS ने दादर की प्रमुख रियल एस्टेट पर ₹135 करोड़ का नुकसान दर्ज किया. उसी जमीन पर जहां बाद में लग्जरी अपार्टमेंट ₹46,000 प्रति वर्ग फुट की दर से बिके. मुंबई की ऐसी जमीन, जहां इतिहास में कभी स्थायी गिरावट नहीं देखी गई.
₹135 करोड़. चले गए. नुकसान के रूप में दर्ज किए गए.
इस निकासी से उठने वाले सवालों के जवाब आज तक नहीं मिले. IL&FS द्वारा बेची गई इक्विटी किसने खरीदी? किस कीमत पर? किन शर्तों पर? क्या मूल संस्थापकों से जुड़े किसी व्यक्ति ने इस हिस्सेदारी को रियायती दर पर वापस खरीदा? ये सार्वजनिक MCA रिकॉर्ड हैं. लेकिन इन्हें कभी प्राप्त कर प्रकाशित नहीं किया गया.
इसी दौरान राज ठाकरे ने भी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से Kohinoor CTNL से बाहर निकल गए.
वह बाहर थे.
IL&FS की वापसी
अब ध्यान दीजिए. क्योंकि घटनाक्रम का यही हिस्सा कहीं अधिक गहन जांच की मांग करता है.
अपनी इक्विटी निकासी पर ₹135 करोड़ का नुकसान दर्ज करने के बाद IL&FS फिर से Kohinoor CTNL में लौटी. एक इक्विटी निवेशक के रूप में नहीं. बल्कि एक ऋणदाता के रूप में. उसी कंपनी को नया ऋण दिया गया जिसमें वह अभी-अभी ₹135 करोड़ गंवा चुकी थी. वही परियोजना. वही कॉर्पोरेट इकाई. वही लोग जो इसे चला रहे थे.
इस लेन-देन का क्रम ऐसे सवाल खड़े करता है जिन्हें सामान्य व्यावसायिक तर्क से समझाना कठिन है.
कोई भी क्रेडिट समिति इसे मंजूरी नहीं देती. कोई जोखिम अधिकारी इस पर हस्ताक्षर नहीं करता. किसी कंपनी की इक्विटी पर ₹135 करोड़ का नुकसान उठाने के बाद उसी कंपनी को फिर से ऋण देना तब तक समझ में नहीं आता, जब तक कि कुछ ऐसे कारण न हों जो सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट नहीं होते.
Kohinoor CTNL में IL&FS की कुल हिस्सेदारी, इक्विटी और बाद के सभी ऋणों सहित अंततः ₹860 करोड़ तक पहुंच गई. ₹135 करोड़ गंवाने से लेकर ₹860 करोड़ के कुल जोखिम तक. उसी कंपनी में.
इस पूरे क्रम को केवल एक सामान्य निवेश निर्णय या मानक ऋण मूल्यांकन के रूप में समझाना कठिन है. संस्थागत वित्त इस तरह काम नहीं करता. दोबारा प्रवेश करने का निर्णय, पहले से नौ अंकों का नुकसान दे चुकी संरचना में लगातार पैसा भेजते रहने का निर्णय, कुछ विशेष लोगों द्वारा लिया गया था जिन्होंने इन लेन-देन को मंजूरी दी.
वे लोग कौन थे? उन्हें क्या बताया गया? उनसे यह करने को किसने कहा?
इन सवालों के जवाब IL&FS के आंतरिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं. लेकिन उन्हें कभी सार्वजनिक नहीं किया गया.
राज ठाकरे की हिस्सेदारी के पीछे छोटी कॉरपोरेट इकाई
राज ठाकरे के बाहर निकलने से पहले, उनकी हिस्सेदारी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, CIN U45203MH2007PTC173437 के माध्यम से रखी गई थी.
कागजों पर मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर कुछ इस तरह दिखाई देती है.
चुकता पूंजी: ₹1 लाख.
एक लाख रुपये.
₹1 लाख की चुकता पूंजी वाली एक कंपनी वह माध्यम थी जिसके जरिए राज ठाकरे उस सौदे में हिस्सेदार थे, जिसमें IL&FS ने ₹225 करोड़ लगाए थे और केवल जमीन अधिग्रहण की लागत ₹421 करोड़ थी. मातोश्री का गठन 2007 में हुआ, उस समय जब Kohinoor CTNL पहले से ही दो वर्षों से सक्रिय थी. उसने प्रवेश किया. उसने हिस्सेदारी रखी. वह 2008 में बाहर निकल गई.
इसकी अंतिम दाखिल बैलेंस शीट: मार्च 2020. इसकी अंतिम AGM: दिसंबर 2020. तब से यह निष्क्रिय है. MCA21 के अनुसार वर्तमान निदेशक: राजन गणेश शिरोडकर, आशुतोष गुणवंत अभ्यंकर, शिरीष गुणवंत सावंत. दाखिल रिकॉर्ड में कहीं भी राज ठाकरे का नाम दिखाई नहीं देता.
2008 में Kohinoor CTNL से बाहर निकलते समय मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्या प्राप्त हुआ? वह राशि कहां गई? वह किन खातों में जमा की गई?
ये जटिल प्रश्न नहीं हैं. 2008, 2009 और 2010 की बैलेंस शीट इनके उत्तर दे सकती हैं. वे बैलेंस शीट MCA के सार्वजनिक रिकॉर्ड हैं. लेकिन उन पर कभी रिपोर्ट नहीं की गई.
कंपनी का क्षरण
2008 के बाद, जब IL&FS ₹135 करोड़ का नुकसान सह चुकी थी, ऋणदाता के रूप में दोबारा प्रवेश कर चुकी थी, कुल जोखिम ₹860 करोड़ की ओर बढ़ रहा था और राज ठाकरे बाहर निकल चुके थे, परियोजना लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ती रही.
मॉल की योजना दो टावरों की योजना में बदल गई. एक 203 मीटर ऊंचा व्यावसायिक टावर. एक 135 मीटर ऊंचा आवासीय टावर. BMC ने सार्वजनिक पार्किंग मंजिलों के लिए अतिरिक्त FSI प्रदान की. डेवलपर्स ने प्रस्तावित 13 मंजिलों में से सात का निर्माण किया. फिर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 2011 में पार्किंग नीति समाप्त कर दी. BMC ने काम रोकने और ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए. अदालतों में मामले बढ़ते गए.
मार्च 2015 तक Kohinoor CTNL ने ऋणों का भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया. कंपनी संस्थागत धन का उपयोग कर रही थी, जो अंततः ₹860 करोड़ तक पहुंच गया और अब वह अपने दायित्वों का भुगतान करने में सक्षम नहीं थी.
2017 में, आंध्रा बैंक से एक ऋण खरीदने वाली Edelweiss Asset Reconstruction Company ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण में दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन किया. केवल उस एक ऋण पर बकाया राशि: ₹50.97 करोड़. NCLT ने मामले को स्वीकार कर लिया.
जनवरी 2019 तक एक अंतरिम समाधान पेशेवर ने सिफारिश की कि पूरी परियोजना को वास्तुशिल्प फर्म Sandeep Shirke & Associates को हस्तांतरित कर दिया जाए. उन्मेष जोशी ने नियंत्रण खो दिया. राजनीतिक रूप से जुड़े समूह द्वारा बनाई गई परियोजना अब समाधान प्रक्रिया के हाथों में थी.
MCA21 के अनुसार Kohinoor CTNL के वर्तमान निदेशक हैं: दीपक अरुण लाडे, शीतल गणेश नाइक, संदीप माधव शिकरे, मोना मनुभाई शाह. किसी भी संस्थापक का नाम नहीं. जब तक वित्तीय संकट सामने आया, मूल प्रवर्तक कंपनी की परिचालन संरचना से जुड़े नहीं रहे थे.
IL&FS का पतन, आम भारतीयों ने चुकाई कीमत
सितंबर 2018. IL&FS अपने ऋण दायित्वों का भुगतान करने में विफल रही. समूह का कुल जोखिम: ₹91,000 करोड़.
इसका असर तत्काल और गंभीर था. IL&FS के कागजात रखने वाले डेट म्यूचुअल फंडों ने रातोंरात अपनी NAV में 3-5 प्रतिशत की कटौती की. लाखों सामान्य निवेशकों ने, जिन्होंने तथाकथित "सुरक्षित" डेट फंडों में पैसा लगाया था, अपने खातों में ऐसे नुकसान देखे जिनकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी और जिन्हें वे समझ नहीं सके. पेंशन फंड प्रभावित हुए. सेंसेक्स एक ही सत्र में 1,000 से अधिक अंक गिर गया. NBFC शेयरों में भारी गिरावट आई.
Kohinoor CTNL में जोखिम: इक्विटी और ऋण मिलाकर ₹860 करोड़. Kohinoor CTNL सहित बड़े रियल एस्टेट मामलों में वसूली दर: लगभग 60 प्रतिशत. केवल इस एक कंपनी में अनुमानित मूलधन हानि: ₹340 करोड़.
₹340 करोड़ हवा में गायब नहीं हुए. यह राशि अंततः समाधान प्रक्रिया के भीतर नुकसान के रूप में समाहित हो गई. यह उन संस्थानों के पोर्टफोलियो में मौजूद थी जिनका वित्तपोषण आम भारतीयों द्वारा किया जाता है. बचत खातों के माध्यम से. बीमा प्रीमियम के माध्यम से. भविष्य निधि अंशदानों के माध्यम से.
यह नुकसान चुपचाप उस व्यवस्था द्वारा वहन किया गया और उससे जुड़े लोगों द्वारा जिन्हें यह भी नहीं पता था कि यह कंपनी अस्तित्व में थी या इसके भीतर क्या हुआ था.
संस्थापक वे लोग जिन्होंने 2005 में यह ढांचा तैयार किया, जो उस समय मौजूद थे जब IL&FS का पैसा आया, और जो पतन से कई वर्ष पहले इस व्यवस्था का हिस्सा थे, उन्होंने इसका कोई बोझ नहीं उठाया.
साढ़े आठ घंटे, पूर्ण चुप्पी
22 अगस्त 2019. राज ठाकरे सुबह 11:25 बजे प्रवर्तन निदेशालय के मुंबई कार्यालय पहुंचे. उनसे 2005-2012 की लेन-देन श्रृंखला इक्विटी निवेश, बाजार से कम कीमत पर निकासी और बाद के ऋण के संबंध में पूछताछ की गई, जो ED की जांच के दायरे में थी.
वे रात 8:15 बजे बाहर निकले.
साढ़े आठ घंटे.
इसके बाद क्या हुआ: कुछ नहीं. कोई आरोप नहीं. कोई FIR नहीं. कोई और समन नहीं. ED की ओर से यह भी नहीं बताया गया कि क्या स्थापित हुआ, क्या पूछा गया, क्या उत्तर मिला या जांच आगे क्यों नहीं बढ़ी.
राज ठाकरे ने कभी भी उन सवालों के मूल विषय पर बात नहीं की जो ED ने उनसे पूछे थे. उन्होंने कभी IL&FS की इक्विटी निकासी की व्याख्या नहीं की. उन्होंने कभी मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर की भूमिका स्पष्ट नहीं की. उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि ₹135 करोड़ के नुकसान के बाद IL&FS उसी कंपनी में फिर से पैसा देने क्यों लौटी. उन्होंने ₹340 करोड़ के लेनदार नुकसान पर भी कभी टिप्पणी नहीं की.
न किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में. न किसी इंटरव्यू में. न किसी बयान में. कभी नहीं.
चुप्पी
इस एक कॉरपोरेट ढांचे के भीतर जो कुछ हुआ, उसका पूरा लेखा-जोखा यहां है.
भूमि अधिग्रहण पर ₹421 करोड़. शुरुआत में IL&FS की ₹225 करोड़ की इक्विटी. उस इक्विटी की बिक्री पर ₹135 करोड़ का नुकसान. उसी कंपनी को अधिक ऋण देने के लिए IL&FS की वापसी. IL&FS का कुल जोखिम ₹860 करोड़. 2015 में डिफॉल्ट. 2017 में दिवालियापन. 2018 में IL&FS का पतन. ₹340 करोड़ का लेनदार नुकसान. 2019 में ED द्वारा 8.5 घंटे की पूछताछ. कोई आरोप नहीं. कोई स्पष्टीकरण नहीं.
अब वह प्रश्न पूछिए जिसे पर्याप्त जोर से नहीं पूछा गया.
यदि यही लेन-देन क्रम, इक्विटी निवेश, नुकसान दर्ज होना, ऋणदाता के रूप में पुनः प्रवेश, जोखिम का तीन गुना होना, राजनीतिक रूप से जुड़े संस्थापकों का पतन से पहले बाहर निकल जाना और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा नुकसान वहन करना, राज ठाकरे के अलावा किसी और से जुड़ा होता, तो महाराष्ट्र इसे कैसे देखता?
क्या इसे एक असफल रियल एस्टेट परियोजना कहा जाता?
या फिर इसे वही कहा जाता जैसा यह दिखाई देता है?
इन सवालों के जवाब देने वाले दस्तावेज मौजूद हैं. Kohinoor CTNL का MCA21 शेयरहोल्डिंग रजिस्टर. 2008 से 2011 तक की मातोश्री इन्फ्रास्ट्रक्चर की बैलेंस शीट. NCLT की समाधान योजना. 2005-2012 की अवधि को कवर करने वाला IL&FS का फॉरेंसिक ऑडिट. अगस्त 2019 की पूछताछ से जुड़े ED के आंतरिक निष्कर्ष.
इनमें से हर एक सार्वजनिक या उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड है.
इनमें से किसी को भी प्राप्त नहीं किया गया. इनमें से किसी को भी प्रकाशित नहीं किया गया. इनमें से किसी को भी राज ठाकरे के सामने रखकर जवाब नहीं मांगा गया.
यह कहानी का अंत नहीं है. इस घटनाक्रम के सबसे असामान्य हिस्से के लिए कभी कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. आखिर एक वित्तीय संस्था ने पहले इस सौदे में पैसा क्यों गंवाया और फिर उसी ढांचे में और अधिक पैसा भेजने का फैसला क्यों किया?
जब तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता, कोहिनूर की कहानी महाराष्ट्र के सबसे कम जांचे गए वित्तीय रहस्यों में से एक बनी रहेगी.
स्रोत: ThePrint, मानसी फडके, 21 अगस्त 2019- Kohinoor CTNL और ED समन का मूल विस्तृत विवरण. The Quint, 22 अगस्त 2019 - ED पूछताछ की समयरेखा. Moneylife - IL&FS-Kohinoor ED जांच. Business Standard, अगस्त 2024 - IBBI रियल एस्टेट समाधान डेटा और Kohinoor CTNL वसूली आंकड़े. M&A Critique- Edelweiss की NCLT याचिका. MCA21- Kohinoor CTNL (CIN: U45200MH2005PTC155800), Matoshree Infrastructure (CIN: U45203MH2007PTC173437). Financial Express अभिलेखागार - Kohinoor Mills नीलामी, ₹421 करोड़ की बोली. Square Yards - Kohinoor Square Phase 2 मूल्य निर्धारण, Q1 2026. Groww / VRD Nation - IL&FS संकट का बाजार पर प्रभाव.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ट्रूहोम फाइनेंस लिमिटेड (Truhome Finance- पूर्व में श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) को अपने प्रस्तावित 3,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है. कंपनी के 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ में 1,500 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों का नया निर्गम और 1,500 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है. प्रमोटर शेयरधारक मैंगो क्रेस्ट इन्वेस्टमेंट लिमिटेड द्वारा 1,500 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों की बिक्री की जाएगी.
कंपनी ने कहा कि आईपीओ से प्राप्त शुद्ध आय का उपयोग पूंजी आधार को मजबूत करने, भविष्य की पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने, सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों और ऋण वितरण को बढ़ाने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा, यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित पूंजी पर्याप्तता संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित करने में भी उपयोग होगी. कंपनी वित्त वर्ष 2027 और 2028 के दौरान इन निधियों का उपयोग करेगी.
साल 2010 में स्थापित ट्रूहोम फाइनेंस एक खुदरा-केंद्रित किफायती आवास वित्त कंपनी है. पहले यह श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी श्रीराम हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी. दिसंबर 2024 में न्यूयॉर्क स्थित वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फर्म वारबर्ग पिंकस ने इसका अधिग्रहण किया था.
कंपनी हाउसिंग लोन, प्रॉपर्टी के विरुद्ध ऋण और अन्य सुरक्षित ऋण उत्पादों की व्यापक श्रृंखला उपलब्ध कराती है. 31 दिसंबर 2025 तक इसका औसत टिकट आकार 21.3 लाख रुपये था. कंपनी मुख्य रूप से स्वरोजगार करने वाले ग्राहकों को लक्षित करती है और 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में फैली 216 शाखाओं के नेटवर्क के माध्यम से सेवाएं प्रदान करती है.
भौगोलिक रूप से विविध पोर्टफोलियो
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में किसी भी एक राज्य की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से अधिक नहीं थी. महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु कंपनी के सबसे बड़े बाजार हैं, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 49.70 प्रतिशत रही.
कंपनी 1.10 लाख से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे चुकी है. इसके कुल एयूएम में 76.96 प्रतिशत योगदान स्वरोजगार करने वाले ग्राहकों का है. इसके अलावा, 85.32 प्रतिशत एयूएम ऐसे ग्राहकों से संबंधित है जिनका सिबिल स्कोर 700 या उससे अधिक है. वहीं, 94.78 प्रतिशत ऋणों में महिलाएं आवेदक या सह-आवेदक के रूप में शामिल हैं.
देश की तीसरी सबसे बड़ी किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनी
31 दिसंबर 2025 तक 21,124.32 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ ट्रूहोम फाइनेंस भारत की तीसरी सबसे बड़ी किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है. वित्त वर्ष 2023 से 2025 के दौरान 48.58 प्रतिशत की एयूएम सीएजीआर के साथ यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में शामिल रही है. कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.
ऋण वितरण और परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत
वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कंपनी ने 6,382.45 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए. इस अवधि में कंपनी की ग्रॉस स्टेज-3 परिसंपत्तियां 1.60 प्रतिशत और नेट स्टेज-3 परिसंपत्तियां 1.09 प्रतिशत रहीं. 30 दिन से अधिक की देयता (डीपीडी) 3.15 प्रतिशत दर्ज की गई.
कंपनी का सोर्सिंग नेटवर्क 3,000 से अधिक इन-हाउस बिक्री कर्मियों, 6,600 कनेक्टर्स और 821 डीएसए पर आधारित है. 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी ने 48 ऋणदाताओं से फंड जुटाया, जिनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक तथा वित्तीय संस्थान शामिल हैं.
मुनाफे में मजबूत वृद्धि
दिसंबर 2025 तक समाप्त नौ महीनों में कंपनी का कर पश्चात लाभ (पीएटी) 333.53 करोड़ रुपये रहा. इस अवधि में परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) 2.66 प्रतिशत और इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) 11.62 प्रतिशत रहा.
कंपनी की कुल आय वित्त वर्ष 2023 में 780.50 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,905.48 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, कर पश्चात लाभ 137.75 करोड़ रुपये से बढ़कर 286.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
हाल ही में कंपनी ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा को पांच वर्ष के लिए अपना नया चेयरपर्सन नियुक्त किया है. कंपनी का नेतृत्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि सुब्रमणियन कर रहे हैं, जिन्हें वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है.
जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड इस आईपीओ के बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं.