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जिस कंपनी का साथ छोड़ना चाहते हैं Adani, उसने बाजार में दिखाई मजबूती

पिछले साल खबर आई थी कि गौतम अडानी जॉइंट वेंचर से खुद को अलग करना चाहते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

गौतम अडानी अपनी जिस कंपनी से हाथ छुड़ाना चाहते हैं, उसके कारोबार में जबरदस्त तेजी आई है. अडानी विल्मर ने मार्च तिमाही के कारोबार को लेकर एक अपडेट जारी किया है, जिसमें कंपनी ने बताया कि 31 मार्च को खत्म हुई तिमाही में उसके एडिबल ऑयल और फूड बिजनेस सेगमेंट की ग्रोथ दोहरे अंकों में रही. कंपनी ने बताया कि छोटे बाजारों तक फोकस करने की उसकी रणनीति कारगर रही है. कंपनी को होली जैसी फेस्टिवल सीजन के दौरान मांग बढ़ने से भी लाभ हुआ है.

दक्षिण भारत में बढ़ी पैठ
अडानी विल्मर ने यह भी बताया कि उसने मार्च तिमाही के दौरान अपना अबतक का सबसे अधिक वॉल्यूम दर्ज किया है और इसके साथ ही उसके मार्केट शेयर में इजाफा भी हुआ है. कंपनी के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2024 के दौरान उसके ब्रांडेड खाने के तेल या एडिबल ऑयल की ग्रोथ 15 प्रतिशत रही है और दक्षिण भारतीय बाजारों में इसकी पैठ बढ़ी है. इसके साथ ही उसके फूड और FMCG सेगमेंट का रिवेन्यु पिछले 2 सालों में करीब दोगुना होकर 4700 करोड़ रुपए पहुंच गया है. गौरतलब है कि Adani विल्मर ग्रोथ के लिए ब्रांडेंड फूड सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है. खासतौर से स्टेपल, मसाले, चीनी, दालें, गेहूं का आटा जैसे सेगमेंट पर उसने काफी काम किया है. 

सोमवार को दिखेगा असर
Adani विल्मर ने ग्रोथ की खबर बाजार बंद होने के बाद सुनाई है. ऐसे में इस खबर से कंपनी के शेयरों पर क्या असर होता है, इसका पता सोमवार को ही चलेगा. कंपनी के शेयर शुक्रवार को करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 352.15 रुपए पर बंद हुए थे. हालांकि, पिछले 5 दिनों में इसमें 5.47% की तेजी भी देखने को मिली है. इस शेयर का 52 वीक का हाई लेवल 509 और लो लेवल 285.80 रुपए है. यानी अभी इस शेयर में बढ़त की काफी गुंजाइश मौजूद है. इस शेयर के लिए पिछला कुछ समय अच्छा नहीं रहा है, लेकिन बीते 5 सत्रों में इसमें तेजी जरूर आई है.     

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किसकी, कितनी हिस्सेदारी?
पिछले साल खबर आई थी कि अडानी अपनी कंपनी अडानी विल्मर लिमिटेड में पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. हालांकि, इस साल की शुरुआत में खबर आई कि प्राइसिंज को लेकर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए अडानी समूह सही डील मिलने तक इंतजार करेगा. यानी अडानी, विल्मर से बाहर निकलना चाहते हैं, बस सही मौके के इंतजार में हैं. अडानी समूह और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. कंपनी फॉर्च्यून ब्रैंड (Fortune Brand) नाम से खाद्य तेल और पैकेज्ड ग्रोसरी बेचती है. Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बात करें, तो अडानी ग्रुप की 43.97% और विल्मर इंटरनेशनल की इसमें 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 12.06 प्रतिशत है.  

क्यों बेच रहे हैं हिस्सेदारी?
अडानी समूह (Adani Group) की तरफ से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि समूह इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाना चाहता है. इसके अलावा, विल्मर का घाटा भी समूह को इसका साथ छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है. कंपनी को पिछले वित्त वर्ष की जून तिमाही में 79 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था. खाने के तेल की कीमत में आई कमी और हाई-कॉस्ट इंवेंट्री के कारण उसे नुकसान का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2023-24 के दूसरे क्वार्टर (Q2FY24) के नतीजे भी अच्छे नहीं रहे थे. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी को 131 करोड़ रुपए का लॉस हुआ. जबकि इससे पहले के पिछले वित्त वर्ष के समान अवधि के दौरान कंपनी ने 48.76 करोड़ का मुनाफा कमाया था. हालांकि, अब कंपनी ने अपने बिजनेस अपडेट में मजबूती की बात कही है.

क्या-क्या बेचती है कंपनी?
अडानी विल्मर ने IPO के जरिए 3600 करोड़ रुपए जुटाए थे. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Adani Wilmar पर फोकस करने के बजाए अडानी अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, जहां ग्रोथ की संभावना काफी ज्यादा है. लिहाजा, इस जॉइंट वेंचर से अलग होने से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपने कोर बिजनस के लिए पैसा मिल जाएगा. विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई थी. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.


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