अडानी ग्रीन एनर्जी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के बीच कंपनी लगातार अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
अडानी समूह की प्रमोटर इकाई अडानी इंफ्रा (इंडिया) ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) में 1.03 फीसदी हिस्सेदारी 2,380 करोड़ रुपये में खरीद ली है. यह सौदा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ब्लॉक डील के जरिए हुआ. हालांकि, यह लेनदेन प्रमोटर समूह के भीतर हुआ है, इसलिए कंपनी की कुल प्रमोटर हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं आया है.
अडानी इंफ्रा ने खरीदे 1.7 करोड़ शेयर
अडानी इंफ्रा (इंडिया) ने ब्लॉक डील के जरिए अडानी ग्रीन एनर्जी के 1.7 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदे. यह खरीदारी औसतन 1,400 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर की गई, जिसकी कुल वैल्यू करीब 2,380 करोड़ रुपये रही.
ये शेयर अडानी ग्रीन एनर्जी की ही एक अन्य प्रमोटर समूह इकाई Ardour Investment Holding Ltd से खरीदे गए. चूंकि यह सौदा प्रमोटर समूह के भीतर हुआ है, इसलिए इसे इंटर-प्रमोटर ट्रांसफर माना गया है.
कुल प्रमोटर हिस्सेदारी में नहीं हुआ कोई बदलाव
इस सौदे के बाद अडानी इंफ्रा की अडानी ग्रीन एनर्जी में हिस्सेदारी बढ़ गई है, जबकि Ardour Investment Holding Ltd की हिस्सेदारी समान अनुपात में घट गई है. हालांकि, चूंकि शेयर प्रमोटर समूह के भीतर ही ट्रांसफर हुए हैं, इसलिए कंपनी की कुल प्रमोटर हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
दो महीने में दूसरी बड़ी खरीद
यह सौदा ऐसे समय हुआ है, जब जून 2026 में भी अडानी इंफ्रा ने इसी प्रमोटर इकाई से बाजार के जरिए अडानी ग्रीन एनर्जी में 1.31 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी. उस समय यह सौदा 3,246 करोड़ रुपये का था.
नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार में भरोसा बरकरार
ताजा हिस्सेदारी खरीद को अडानी ग्रीन एनर्जी के कारोबार में प्रमोटर समूह के मजबूत भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. अडानी ग्रीन एनर्जी देश की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है और अडानी समूह की स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) रणनीति में इसकी अहम भूमिका है. कंपनी लगातार सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार कर रही है, ताकि भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) लक्ष्यों को समर्थन मिल सके.
निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह ब्लॉक डील कंपनी के परिचालन या कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर कोई खास असर नहीं डालेगी, क्योंकि यह प्रमोटर समूह के भीतर हुआ लेनदेन है. हालांकि, इस तरह की हिस्सेदारी खरीद को आमतौर पर निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि इससे कंपनी के दीर्घकालिक विकास को लेकर प्रमोटरों का भरोसा झलकता है.
अडानी ग्रीन एनर्जी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के बीच कंपनी लगातार अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही है.
बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक बाजार में सप्लाई गैप का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, रूस की ओर से डीजल निर्यात पर रोक और यूरोप में ईंधन की बढ़ती मांग ने भारत के पेट्रोलियम निर्यात को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. जुलाई 2026 में देश का रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट 12 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया. बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक बाजार में सप्लाई गैप का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली.
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का फ्यूल एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर
वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच भारत ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में नया रिकॉर्ड बनाया है. जुलाई 2026 में देश का रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट बढ़कर 1.53 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) पहुंच गया, जो पिछले 12 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. शिपिंग एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक यह मात्रा पिछले एक साल के औसत से 27 फीसदी अधिक रही. 2017 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद किसी भी जुलाई महीने में यह सबसे ज्यादा निर्यात है.
इन वजहों से बढ़ा निर्यात
विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस द्वारा डीजल निर्यात पर रोक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और यूरोप में डीजल की कमी ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ा अवसर पैदा किया. कुछ समय के लिए ईरान-अमेरिका के बीच तनाव कम होने से कच्चे तेल की आपूर्ति भी बेहतर हुई, जिससे भारतीय रिफाइनरियां अधिक क्षमता के साथ काम कर सकीं.
Kpler के रिफाइनिंग विश्लेषक निखिल दुबे के अनुसार, डीजल पर बेहतर मार्जिन मिलने के कारण भारतीय कंपनियों ने उन बाजारों में तेजी से आपूर्ति बढ़ाई, जहां पहले रूस और पश्चिम एशिया से फ्यूल पहुंचता था.
यूरोप और तुर्की ने बढ़ाई खरीद
रूस और पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित होने के बाद यूरोप और तुर्की जैसे देशों ने भारतीय डीजल की खरीद बढ़ा दी. यूरोप में डीजल का स्टॉक कम होने और पश्चिम एशिया से सीमित आपूर्ति के कारण भारत वहां का प्रमुख सप्लायर बनकर उभरा. जुलाई के दौरान यूरोप को करीब 40 से 50 लाख बैरल और ब्राजील को लगभग 28 लाख बैरल डीजल निर्यात किया गया.
रिलायंस और नायरा ने निभाई अहम भूमिका
भारत के कुल रिफाइंड फ्यूल निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की रही, जिसका योगदान करीब 75 फीसदी बताया गया है. वहीं, नायरा एनर्जी ने भी मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद उत्पादन बढ़ाया और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात तेज किया. रिपोर्ट के अनुसार, नायरा ने जुलाई में रूस को भी फ्यूल की खेप भेजी.
भारत बना भरोसेमंद सप्लायर
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर खुद को दुनिया के भरोसेमंद फ्यूल सप्लायर के रूप में स्थापित किया है. वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन का फायदा भारतीय कंपनियों को मिला, जिससे देश का पेट्रोलियम निर्यात एक साल के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया.
इमामी लिमिटेड के निदेशक मंडल ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के गैर-ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी है. कंपनी ने बताया कि Q1 FY27 में समेकित परिचालन राजस्व 15 फीसदी बढ़कर 1,039 करोड़ रुपये रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एफएमसीजी कंपनी इमामी लिमिटेड (Emami) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़कर 1,039 करोड़ रुपये पहुंच गया. हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर अंतरराष्ट्रीय कारोबार और मार्जिन पर देखने को मिला.
इमामी का Q1 राजस्व 15 फीसदी बढ़ा
इमामी लिमिटेड के निदेशक मंडल ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के गैर-ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी है. कंपनी ने बताया कि Q1 FY27 में समेकित परिचालन राजस्व 15 फीसदी बढ़कर 1,039 करोड़ रुपये रहा.
घरेलू कारोबार ने इस वृद्धि में अहम योगदान दिया. कंपनी का घरेलू कारोबार 20 फीसदी बढ़ा, जबकि तुलनात्मक (Like-to-Like) आधार पर यह वृद्धि 12 फीसदी रही. इस दौरान वॉल्यूम ग्रोथ 8 फीसदी दर्ज की गई.
अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर पश्चिम एशिया संकट का असर
इमामी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार पहली तिमाही में 12 फीसदी घट गया. कंपनी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऑर्डर निष्पादन प्रभावित हुआ, जिससे अंतरराष्ट्रीय बिक्री पर असर पड़ा.
हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसने इस दौरान बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने, प्राइसिंग स्ट्रक्चर में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर काम किया है. बाजार सामान्य होने के साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार में फिर से तेजी आने की उम्मीद है.
EBITDA और मुनाफे में भी बढ़ोतरी
बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 6 फीसदी बढ़कर 226 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, कर पूर्व लाभ (PBT) 4 फीसदी बढ़कर 195 करोड़ रुपये रहा. कंपनी ने बताया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, पैकेजिंग सामग्री और अन्य प्रमुख कच्चे माल की महंगाई के कारण ग्रॉस मार्जिन 360 बेसिस प्वाइंट घटकर 65.8 फीसदी रह गया. इसके बावजूद लागत नियंत्रण और परिचालन दक्षता के बल पर कंपनी लाभ बढ़ाने में सफल रही.
हेयर एंड स्कैल्प केयर से मिला सबसे बड़ा सहारा
उत्पाद श्रेणियों की बात करें तो हेयर एंड स्कैल्प केयर सेगमेंट ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. स्किन केयर कारोबार में 3 फीसदी और हेल्थ केयर सेगमेंट में 2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
रणनीतिक निवेश पोर्टफोलियो बना ग्रोथ इंजन
कंपनी का स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार रहा. तुलनात्मक आधार पर इसमें 61 फीसदी की वृद्धि हुई और अब यह कंपनी के घरेलू कारोबार में लगभग 18 फीसदी का योगदान दे रहा है.
इमामी ने इस दौरान Axiom Ayurveda (AloFrut) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर उसे पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बना लिया है. इसके अलावा कंपनी ने IncNut में बहुमत हिस्सेदारी खरीदकर Vedix और SkinKraft जैसे पर्सनलाइज्ड ब्यूटी एवं पर्सनल केयर ब्रांड्स के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत की है.
क्विक कॉमर्स से बढ़ी बिक्री
कंपनी की ओम्नीचैनल रणनीति भी मजबूत होती दिखी. संगठित बिक्री चैनलों (Organised Channels) में तुलनात्मक आधार पर 19 फीसदी की वृद्धि हुई और अब इनका घरेलू कारोबार में 32 फीसदी योगदान है. मॉडर्न ट्रेड और ई-कॉमर्स में अच्छी वृद्धि जारी रही. वहीं, क्विक कॉमर्स अब कंपनी की कुल ई-कॉमर्स बिक्री का 35 फीसदी हिस्सा बन चुका है.
भविष्य को लेकर कंपनी आशावादी
इमामी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हर्षा वी. अग्रवाल ने कहा कि चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बावजूद कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. उन्होंने कहा कि कंपनी की रणनीतिक निवेश इकाइयों का बढ़ता योगदान भविष्य की विकास रणनीति को मजबूत बना रहा है. साथ ही डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को कारोबार के विभिन्न क्षेत्रों में शामिल कर कंपनी भविष्य के लिए खुद को तैयार कर रही है.
वहीं, वाइस चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक मोहन गोयनका ने कहा कि बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद लागत अनुकूलन और परिचालन दक्षता की बदौलत कंपनी EBITDA और मुनाफे में वृद्धि दर्ज करने में सफल रही. उन्होंने कहा कि कच्चे माल की लागत में नरमी और नए उत्पादों के दम पर आने वाली तिमाहियों में लाभप्रदता और विकास दोनों को गति मिलने की उम्मीद है.
FSSAI के आदेश के मुताबिक, जिन उत्पादों पर कार्रवाई की गई है उनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी, नारियल का दूध और अन्य खाद्य उत्पाद शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अगर आप '100% प्योर', '100% नेचुरल' या '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों को देखकर खाद्य उत्पाद खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर इंडिया के कई उत्पादों पर '100%' जैसे भ्रामक दावों के साथ बिक्री करने पर तत्काल रोक लगा दी है. नियामक का कहना है कि ऐसे दावे खाद्य विज्ञापन एवं दावा विनियम, 2018 का उल्लंघन हैं और उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं.
डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर रोक
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया के खिलाफ बड़ा नियामकीय कदम उठाया है. प्राधिकरण ने कंपनी को '100% प्योर', '100% नेचुरल', '100% प्योरिटी गारंटीड' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों के साथ कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया है. FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित नहीं किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले हैं.
किन उत्पादों पर हुई कार्रवाई?
FSSAI के आदेश के मुताबिक, जिन उत्पादों पर कार्रवाई की गई है उनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी, नारियल का दूध और अन्य खाद्य उत्पाद शामिल हैं. इन उत्पादों की पैकेजिंग और वेबसाइट पर '100%' से जुड़े दावे किए जा रहे थे, जिन्हें नियामक ने नियमों के खिलाफ माना है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
FSSAI के अनुसार, डाबर की वेबसाइट पर कई उत्पादों के लिए '100% Natural', '100% Pure', '100% Purity Guaranteed', '100% Organic' और '100% Tender Coconut Water' जैसे दावे किए गए थे. खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 के तहत ऐसे दावों की अनुमति नहीं है, क्योंकि इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता और ये उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं.
नियामक ने यह भी बताया कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक शहद पर वैध FSSAI ऑर्गेनिक प्रमाणन के बिना 'जैविक भारत' (Jaivik Bharat) लोगो का इस्तेमाल किया गया. वहीं, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क को '100% प्योरिटी' के दावे के साथ बेचा जा रहा था, जबकि कंपाउंड फूड के लिए इस तरह का दावा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं है.
पहले भी जारी हो चुका था नोटिस
FSSAI ने कहा कि उसने इससे पहले भी डाबर को भ्रामक '100%' दावों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद अब बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है.
15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
प्राधिकरण ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह नोटिस में शामिल सभी उत्पादों के साथ-साथ ऐसे अन्य सभी खाद्य उत्पादों की बिक्री तुरंत रोके, जिन पर '100%' जैसे भ्रामक दावे किए गए हैं. साथ ही कंपनी को 15 दिनों के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) भी जमा करनी होगी.
डाबर ने क्या कहा?
डाबर इंडिया ने बयान जारी कर कहा है कि उसे FSSAI का नोटिस प्राप्त हो गया है और कंपनी नोटिस में उठाए गए सभी बिंदुओं की समीक्षा कर रही है. कंपनी नियामक के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करेगी.
हाल के महीनों में FSSAI खाद्य उत्पादों पर भ्रामक दावों और विज्ञापनों के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रहा है. सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्राधिकरण विभिन्न कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक कर रहा है.
AI आधारित 'पर्सनल करियर रिप्रेजेंटेटिव' तैयार करेगा स्टार्टअप, Swiggy, Razorpay और OfBusiness के दिग्गजों ने किया निवेश
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) के पूर्व अधिकारियों अनुज राठी और प्रशांत पराशर ने AI स्टार्टअप 'Profound' लॉन्च किया है. कंपनी ने मंगलवार को बताया कि उसने सीड फंडिंग राउंड में 15 लाख डॉलर (USD 1.5 Million) जुटाए हैं. यह स्टार्टअप एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जो प्रोफेशनल्स के लिए व्यक्तिगत करियर प्रतिनिधि (Personal Career Representative) की तरह काम करेगा.
इस फंडिंग राउंड में टेक इंडस्ट्री के कई बड़े नामों ने निवेश किया है. इनमें Swiggy के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्रीहर्ष मजेटी, Swiggy के सह-संस्थापक नंदन रेड्डी, Zomato के पूर्व अधिकारी पंकज चड्ढा, Razorpay के CEO हर्षिल माथुर, WhatsApp के ग्लोबल हेड कुणाल शाह और OfBusiness के सह-संस्थापक भुवन गुप्ता शामिल हैं. इसके अलावा वेंचर कैपिटल फर्म Stellaris Venture Partners और 3one4 Capital ने भी इस निवेश में भाग लिया.
कंपनी के अनुसार, जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीम का विस्तार करने, AI क्षमताओं को मजबूत बनाने और अपने मैचमेकिंग व इंट्रोडक्शन इंजन के विकास में तेजी लाने के लिए किया जाएगा.
AI Rep करेगा करियर की देखभाल
बेंगलुरु स्थित Profound खुद को AI-नेटिव प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रहा है. इस प्लेटफॉर्म पर हर यूजर को एक "AI Rep" मिलेगा. यह AI एजेंट शुरुआती 30 मिनट की वॉयस बातचीत के जरिए यूजर के कार्य अनुभव, विशेषज्ञता, करियर लक्ष्य और निर्णय लेने की शैली को समझेगा. इसके बाद यही AI एजेंट यूजर की ओर से बेहतर करियर अवसर खोजने, प्रोफेशनल परिचय कराने और उपयोगी नेटवर्किंग कनेक्शन सुझाने का काम करेगा.
Profound के सह-संस्थापक और CEO अनुज राठी ने कहा, "जिस तरह अभिनेता के पास एजेंट और खिलाड़ियों के पास मैनेजर होते हैं, उसी तरह Profound हर प्रोफेशनल को उसका अपना AI Rep उपलब्ध कराता है."
कंपनियों को भी मिलेगा AI हायरिंग असिस्टेंट
यह प्लेटफॉर्म केवल नौकरी तलाशने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए भी उपयोगी होगा. हायरिंग मैनेजर अपनी ओपन पोजिशन और टीम के लिए AI प्रतिनिधि बना सकेंगे. इससे कंपनियां पारंपरिक जॉब डिस्क्रिप्शन की बजाय बातचीत के माध्यम से अपनी भर्ती आवश्यकताओं को समझा सकेंगी, जिससे सही उम्मीदवारों की पहचान और बेहतर मैचिंग संभव होगी.
Profound के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) प्रशांत पराशर ने कहा कि वॉयस AI में हुई प्रगति के कारण अब किसी प्रोफेशनल के अनुभव, सोच और निर्णय क्षमता को केवल रिज्यूमे या ऑनलाइन प्रोफाइल के कीवर्ड से कहीं बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.
बड़े टेक प्लेटफॉर्म का अनुभव
Profound के संस्थापक इससे पहले Swiggy, Zomato, Flipkart, Ola, Cleartrip और Walmart Labs जैसी कंपनियों में प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी लीडरशिप की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. कंपनी ने बताया कि कई महीनों के रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट के बाद उसने शुरुआती यूजर्स के लिए प्लेटफॉर्म का अर्ली एक्सेस शुरू कर दिया है. अगले एक साल में कंपनी वैश्विक स्तर पर 10 लाख (1 मिलियन) प्रोफेशनल्स का नेटवर्क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके बाद व्यापक बीटा रोलआउट किया जाएगा.
निवेशकों का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक रिज्यूमे और ऑनलाइन प्रोफाइल की सीमाओं को दूर करेगा. बातचीत आधारित AI के जरिए उम्मीदवार की कार्यशैली, निर्णय क्षमता और पेशेवर संदर्भ को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा, जिससे टैलेंट खोजने और भर्ती की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी.
एथर एनर्जी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए विनिर्माण क्षमता का विस्तार कर रही है. कंपनी भविष्य में हर महीने 60,000 वाहनों के उत्पादन की क्षमता हासिल करना चाहती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता एथर एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का घाटा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में काफी घटा है, जबकि राजस्व में करीब 89 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी हुई है. बढ़ती बिक्री, बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग ने कंपनी के नतीजों को मजबूती दी है. कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि उसका नया EL इलेक्ट्रिक स्कूटर अगस्त में पेश किया जाएगा.
51 करोड़ रुपये पर सिमटा शुद्ध घाटा
एथर एनर्जी का शुद्ध घाटा जून तिमाही में घटकर 51 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 178.2 करोड़ रुपये था. इस तरह कंपनी के घाटे में करीब 71 फीसदी की कमी आई है. वहीं, कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 88.8 फीसदी बढ़कर 1,217 करोड़ रुपये पहुंच गया. यह वृद्धि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की मजबूत बिक्री और बढ़ते वॉल्यूम का परिणाम है.
EBITDA घाटे में भी बड़ी कमी
कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है. जून तिमाही में EBITDA घाटा घटकर 33.4 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले यह 134.3 करोड़ रुपये था. कंपनी का कहना है कि उत्पादन और बिक्री बढ़ने से ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार हुआ है, जिससे लागत पर बेहतर नियंत्रण मिला.
EV सेक्टर को लेकर कंपनी का भरोसा कायम
एथर एनर्जी का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का माहौल आगे भी अनुकूल बना रहेगा. कंपनी के अनुसार, दिल्ली EV पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM E-Drive योजना जैसी पहलें देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं.
कंपनी का यह भी मानना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और ईंधन उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताएं इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को और मजबूत करेंगी. कंपनी के मुताबिक, हालिया पेट्रोल मूल्य वृद्धि से पहले ही EV की मांग में तेजी आने लगी थी.
अगस्त में पेश होगा नया EL स्कूटर
एथर एनर्जी अब अपने अगले ग्रोथ फेज की तैयारी कर रही है. कंपनी का नया EL इलेक्ट्रिक स्कूटर जल्द बाजार में आने वाला है. जून तिमाही के दौरान इस मॉडल का होमोलोगेशन पूरा हो चुका है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए ट्रायल भी शुरू हो गए हैं.
कंपनी के होसुर प्लांट में इस स्कूटर का व्यावसायिक उत्पादन वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में शुरू होगा. वहीं, अगस्त में आयोजित होने वाले Ather Community Day के दौरान इस स्कूटर से आधिकारिक तौर पर पर्दा उठाया जाएगा.
हर महीने 60,000 वाहन बनाने की तैयारी
एथर एनर्जी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए विनिर्माण क्षमता का विस्तार कर रही है. कंपनी भविष्य में हर महीने 60,000 वाहनों के उत्पादन की क्षमता हासिल करना चाहती है.
1,300 करोड़ रुपये जुटाकर मजबूत की वित्तीय स्थिति
उत्पादन विस्तार से पहले कंपनी ने 1,300 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके तहत एथर ने 1.08 करोड़ इक्विटी शेयर 1,202 रुपये प्रति शेयर के भाव पर जारी किए. यह इश्यू प्राइस नियामकीय फ्लोर प्राइस से 2.8 फीसदी प्रीमियम पर था, हालांकि बाजार मूल्य से कुछ कम रखा गया.
कनेक्टेड टेक्नोलॉजी पर भी फोकस
एथर एनर्जी अपने सॉफ्टवेयर और कनेक्टेड-व्हीकल इकोसिस्टम को भी लगातार मजबूत कर रही है. कंपनी ने हाल ही में Gen 2 और उसके बाद के मॉडल, जिनमें 450 Apex, 450X और Rizta Z शामिल हैं, के लिए 'Pothole+ Alerts' फीचर पेश किया है.
यह फीचर कंपनी के कनेक्टेड स्कूटर नेटवर्क से मिले डेटा के आधार पर सवारी के दौरान गड्ढों, टूटी या ऊबड़-खाबड़ सड़कों और स्पीड ब्रेकर की पहले से जानकारी देता है, जिससे राइडिंग को अधिक सुरक्षित और स्मार्ट बनाया जा सके.
केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने संसद में एक लिखित जवाब में कहा कि प्रस्तावित बिजली क्षमता वृद्धि को समर्थन देने के लिए व्यापक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता वित्त वर्ष 2031-32 तक बढ़कर 874 गीगावॉट (GW) पहुंचने का अनुमान है. सरकार का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार, ग्रिड का आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) प्रणालियों का बड़े पैमाने पर विकास जरूरी होगा. इससे नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर एकीकरण हो सकेगा और देश की लगातार बढ़ती बिजली मांग को विश्वसनीय तरीके से पूरा किया जा सकेगा.
राष्ट्रीय विद्युत योजना (National Electricity Plan) के आधार पर सरकार ने यह जानकारी दी है. केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने संसद में एक लिखित जवाब में कहा कि प्रस्तावित बिजली क्षमता वृद्धि को समर्थन देने के लिए व्यापक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी.
ट्रांसमिशन नेटवर्क और स्टोरेज होंगे ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़
सरकार के अनुसार, जैसे-जैसे देश के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ग्रिड को अधिक लचीला (Flexible) बनाना और ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. इससे ग्रिड की स्थिरता बनी रहेगी और बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होगी.
केंद्र सरकार ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाले राज्यों से देश के विभिन्न मांग केंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है. इसके साथ ही ग्रिड मॉडर्नाइजेशन और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम सौर और पवन ऊर्जा जैसी अनियमित (Intermittent) बिजली उत्पादन को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
RDSS योजना से बिजली वितरण व्यवस्था होगी मजबूत
सरकार ने बताया कि रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इस योजना के तहत बिजली वितरण नेटवर्क को आधुनिक बनाया जा रहा है और स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, ताकि बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बेहतर हो सके.
पश्चिम बंगाल में भी तेजी से बढ़ा बिजली नेटवर्क
उत्तर बंगाल से जुड़े एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क का व्यापक विस्तार किया गया है. RDSS के तहत राज्य में 19,893 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. वहीं, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY), इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (IPDS) और सौभाग्य योजना के तहत 11,049 करोड़ रुपये की बिजली वितरण परियोजनाएं लागू की गई हैं.
दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी मजबूत हुआ ट्रांसमिशन नेटवर्क
ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल में नए सबस्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया गया है. इनमें दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं भी शामिल हैं.
सरकार के मुताबिक, इन पहलों का उद्देश्य बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाना, वितरण के दौरान होने वाले नुकसान (Distribution Losses) को कम करना और क्षेत्र में बढ़ती बिजली मांग को बेहतर तरीके से पूरा करना है.
इस OFS के जरिए सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. साथ ही, इससे LIC को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए होने वाली इस हिस्सेदारी बिक्री का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू आज (4 अगस्त) से खुल गया है, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त को बोली लगा सकेंगे. इस OFS के जरिए सरकार करीब 31,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. साथ ही, इससे LIC को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) के नियमों को पूरा करने की दिशा में भी मदद मिलेगी.
दो चरणों में होगी हिस्सेदारी की बिक्री
निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के मुताबिक, सरकार पहले चरण में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. इसके साथ 4 फीसदी का ग्रीन शू विकल्प भी रखा गया है. यदि निवेशकों की मांग मजबूत रही तो कुल 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी. इस तरह सरकार 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बाजार में उतारेगी.
382 रुपये रखा गया फ्लोर प्राइस
OFS के लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो सोमवार को बीएसई पर LIC के 424.35 रुपये के बंद भाव से करीब 10 फीसदी कम है. नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए इश्यू 4 अगस्त को खुला है, जबकि रिटेल निवेशक 5 अगस्त को इसमें भाग ले सकेंगे.
सरकार को मिल सकते हैं 31,000 करोड़ रुपये
अगर पूरा OFS सफल रहता है और सभी शेयर फ्लोर प्राइस पर बिक जाते हैं तो सरकार को करीब 31,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. यह विनिवेश कार्यक्रम सरकार के पूंजी जुटाने और सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.
क्यों जरूरी है यह OFS?
वर्तमान में LIC में सरकार की 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है. सेबी ने LIC को 16 मई 2027 तक न्यूनतम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) हासिल करने की छूट दी है. यह OFS उसी लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
2022 के IPO के बाद दूसरी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री
LIC का ऐतिहासिक IPO मई 2022 में आया था, जब सरकार ने 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. अब करीब चार साल बाद सरकार एक बार फिर OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी घटाने जा रही है. इससे बाजार में LIC के शेयरों की उपलब्धता बढ़ेगी और शेयर की लिक्विडिटी में सुधार होगा.
निवेशकों और शेयर पर क्या होगा असर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े OFS के दौरान शेयरों की अतिरिक्त सप्लाई के कारण अल्पावधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, लंबी अवधि में इससे शेयर की लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेशकों के लिए ट्रेडिंग आसान होती है. 382 रुपये का फ्लोर प्राइस उन निवेशकों के लिए भी आकर्षक अवसर हो सकता है, जो अब तक LIC के शेयर में निवेश नहीं कर पाए हैं.
सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के बाद लिया गया है. हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है. नए फैसले के तहत डीजल, पेट्रोल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर टैक्स बढ़ा दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के बाद लिया गया है. हालांकि, इस बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन निर्यात करने वाली निजी रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है.
डीजल, पेट्रोल और ATF पर कितना बढ़ा टैक्स?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 3 अगस्त से डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं, ATF के निर्यात पर यह शुल्क 14.5 रुपये से बढ़कर 22 रुपये प्रति लीटर हो गया है. पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स भी 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों या रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी के कारण तेल कंपनियों को अप्रत्याशित (Windfall) मुनाफा होता है, तब सरकार उस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वसूलती है. इस टैक्स का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और कंपनियों को केवल ऊंचे मुनाफे के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करने से रोकना है.
सरकार ने क्यों बढ़ाया निर्यात शुल्क?
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार ने मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था, जबकि मई से पेट्रोल भी इसके दायरे में आ गया. सरकार हर पखवाड़े वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा के आधार पर इस टैक्स में बदलाव करती है. ताजा बढ़ोतरी भी इसी समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है.
किन कंपनियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
इस फैसले का सबसे अधिक असर उन निजी रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ सकता है, जो अपने उत्पादों का बड़ा हिस्सा विदेशों में बेचती हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी जैसी कंपनियों के निर्यात मार्जिन पर इसका दबाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर, इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि उनका अधिकांश उत्पादन घरेलू बाजार में ही खपता है.
क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी का असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ेगा. यह टैक्स केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लगाया जाता है. इसलिए देशभर के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल किसी बदलाव की संभावना नहीं है.
FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा में तेज बढ़ोतरी का असर अब बैंकों की फंडिंग रणनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रियायती स्वैप सुविधा के बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने पर जोर दिया, जिससे सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) के जरिए धन जुटाने की जरूरत कम हो गई. इसी का नतीजा है कि जुलाई में बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने CD के जरिए करीब 95,000 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि जून में यह आंकड़ा 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. बढ़ी हुई नकदी के चलते CD की ब्याज दरों में भी 70 आधार अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई.
जून के मुकाबले जुलाई में आधा रह गया CD जुटाव
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में बैंकों ने CD के जरिए 45,700 करोड़ रुपये जुटाए थे. यह आंकड़ा मई में बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये और जून में 1.8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. उस समय जमा की तुलना में ऋण वितरण तेज रहने और नकदी की जरूरत बढ़ने के कारण बैंकों को CD बाजार का अधिक सहारा लेना पड़ा था.
RBI की स्वैप सुविधा से बढ़ा FCNR(B) जमा
जून की शुरुआत में RBI ने रियायती स्वैप सुविधा शुरू की थी, जिसके बाद बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ा दी. रिजर्व बैंक के अनुसार, 31 जुलाई तक बैंकों ने इस सुविधा के तहत करीब 41 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिनमें 36.7 अरब डॉलर नई FCNR(B) जमा के जरिए आए हैं. इससे बैंकों को घरेलू बाजार के बजाय विदेशी स्रोतों से अपेक्षाकृत सस्ती फंडिंग मिलने लगी.
सस्ती फंडिंग से CD दरों में भी आई गिरावट
FCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर CD की ब्याज दरों पर भी पड़ा और जून के आखिर से ये दरें 7.57 फीसदी से घटकर 6.85 फीसदी पर आ गईं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब बैंकों को कम लागत पर विदेशी मुद्रा में फंड मिल रहा है, तो उन्हें घरेलू बाजार से महंगी उधारी लेने की जरूरत कम पड़ रही है.
क्या कहते हैं बैंकिंग विशेषज्ञ?
एक वरिष्ठ बैंकर के मुताबिक, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी के बाद CD पर निर्भरता कम होना स्वाभाविक है. RBI की स्वैप योजना ने बैंकों को सस्ती फंडिंग का विकल्प दिया है, जिससे घरेलू बाजार से धन जुटाने की आवश्यकता घटी है. वहीं, दूसरे वरिष्ठ बैंकर का कहना है कि पहली तिमाही में फंडिंग की मांग असामान्य रूप से अधिक थी, जबकि वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद आमतौर पर CD दरों में नरमी देखने को मिलती है.
क्या होता है सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD)?
सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) बैंकों द्वारा जारी किया जाने वाला एक अल्पकालिक वित्तीय साधन है, जिसकी अवधि आमतौर पर 7 दिन से लेकर 1 वर्ष तक होती है. बैंक इसका उपयोग नकदी प्रबंधन, परिसंपत्ति और देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा फंडिंग के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के लिए करते हैं.
सोमवार को सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 390.70 अंक यानी 1.60 फीसदी उछलकर 24,774.30 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने पिछले चार कारोबारी सत्रों में लगातार शानदार तेजी दर्ज की है. सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले एक महीने का उच्च स्तर छुआ. अब मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर रहेगी. आज अडानी ग्रुप, पेटीएम, एलआईसी, मीशो, इंडियन ऑयल समेत कई कंपनियों से जुड़ी बड़ी खबरों के चलते इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.
सोमवार को चौथे दिन भी तेजी के साथ बंद हुआ बाजार
सोमवार को बॉम्बे स्टॉरक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 390.70 अंक यानी 1.60 फीसदी उछलकर 24,774.30 के स्तर पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक चढ़ा, जबकि निफ्टी 24,800 के स्तर को भी पार कर गया. वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर एक महीने के उच्च स्तर 95.12 पर पहुंच गया.
आईटी और बैंकिंग शेयरों ने संभाली बाजार की कमान
सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. इंडिगो 4.22 फीसदी की तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा. टीसीएस और इन्फोसिस में 3 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा इटरनल, आईटीसी, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, एचसीएल टेक और ट्रेंट के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर, सन फार्मा, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.
कच्चे तेल में नरमी से मिला बाजार को सहारा
सोमवार की तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही. अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत शुरू होने के संकेत मिलने के बाद ब्रेंट क्रूड 83.82 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 79.76 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया. इससे वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बना और भारतीय शेयर बाजार को भी समर्थन मिला.
आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर
आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे. अदाणी ग्रुप ने ओडिशा में 1 गीगावाट क्षमता के एआई आधारित डेटा सेंटर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. SAIF Partners ब्लॉक डील के जरिए Paytm में 2.3 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकता है. केंद्र सरकार आज और कल OFS के जरिए LIC में 6.5 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है. वहीं, Peak XV Partners और Elevation Capital, Meesho में करीब 1,900 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील कर सकते हैं. Essar Group ने ब्रिटेन में लो-कार्बन ऊर्जा परियोजनाओं में 4.3 अरब पाउंड निवेश की योजना बनाई है. UPL Corporation के CEO माइक फ्रैंक ने इस्तीफा दिया है. MobiKwik अपने लेंडिंग कारोबार में AI का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि Indian Oil अगले पांच से छह वर्षों में पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं पर 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पर काम कर रही है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)