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बड़े प्लान पर काम कर रहा Adani Group, कई बैंकों से चल रही है बात!
अडानी समूह हिंडनबर्ग के प्रभाव से बाहर निकलकर फिर से बड़ी योजनाओं पर काम कर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
अडानी ग्रुप (Adani Group) हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के प्रभाव को काफी पीछे छोड़ आया है. ग्रुप फिर से इतनी मजबूत स्थिति में पहुंच गया है कि हाल में आई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की रिपोर्ट भी उसका कुछ खास बिगाड़ नहीं पाई. इस 'मजबूत' स्थिति की बदौलत ही तमाम बैंक समूह को किसी भी तरह का लोन देने के लिए कतार में खड़े हैं. अब खबर है कि गौतम अडानी (Gautam Adani) के नेतृत्व वाला समूह अपने एक बड़े लोन को रीफाइनेंस कराना चाहता है और इसके लिए बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है.
इसलिए लिया था Loan
मीडिया रिपोर्ट्स में न्यूज एजेंसी 'ब्लूमबर्ग' के हवाले से बताया गया है कि अंबुजा सीमेंट्स (Ambuja Cements) को खरीदने के लिए लिए गए लोन को अडानी समूह रीफाइनेंस कराना चाहता है. इसके लिए बैंकों को 3 कैटेगरी में बांटा गया है और यह इस साल एशिया के सबसे बड़े लोन सौदों में से एक हो सकता है. अडानी समूह की कई बैंकों से बातचीत चल रही है और बैंक लगभग 3.5 अरब डॉलर (करीब 29,000 करोड़ रुपए) के लोन को रीफाइनेंस कर सकते हैं. हालांकि, अडानी ग्रुप की तरफ से इसे लेकर अभी कोई बयान सामने नहीं आया है.
इनके नाम आए सामने
रिपोर्ट्स बताती हैं कि अरबपति कारोबारी गौतम अडानी का अडानी ग्रुप करीब 3.8 अरब डॉलर के लोन को रीफाइनेंस कराने के लिए पिछले कई महीनों से बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है और ये बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. First Abu Dhabi Bank, DBS ग्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड, मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप इंक, मित्सुबिशी UFJ फाइनेंशियल ग्रुप और सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प के साथ-साथ कुछ दूसरे बैंक भी अडानी समूह के इस प्लान का हिस्सा बन सकते हैं. प्रत्येक बड़ा लेंडर समूह को 40 करोड़ डॉलर का लोन दे सकता है.
शंका की गुंजाइश नहीं
रीफाइनेंस को लेकर बातचीत के अंतिम चरण में पहुंचने का मतलब साफ है कि दुनियाभर के दिग्गज लेंडर्स को अब अडानी समूह को लोन देने में कोई परेशानी नहीं है. क्योंकि उन्हें नजर आ रहा है कि समूह हिंडनबर्ग के प्रभाव को पीछे छोड़ आया है. हिंडनबर्ग के आरोपों के चलते अडानी ग्रुप की मार्केट वैल्यूएशन करीब 150 अरब डॉलर तक घट गई थी. इससे कहीं न कहीं बैंकों के मन में लोन के रीपेमेंट को लेकर शंकाओं ने जन्म लिया था. हालांकि,अब ऐसी किसी शंका की गुंजाइश नहीं है. ब्लूमबर्ग का कहना है कि यदि रीफाइनेंस की डील होती है, तो यह इस साल जापान के बाहर एशिया की चौथे सबसे बड़ी डील होगी.
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