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Adani ने FPO वापस लेकर सबको चौंकाया, इस फैसले की वजह क्या है?
अडानी समूह ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अडानी एंटरप्राइजेज का FPO वापस ले लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अडानी समूह पर अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने जिस तरह सबको चौंकाया था, वैसा ही चौंकाने वाला कदम समूह के प्रमुख गौतम अडानी (Gautam Adani) ने उठाया है. उन्होंने अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) का फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर यानी FPO वापस ले लिया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि निवेशकों के पैसे वापस किए जाएंगे. यानी जिन निवेशकों ने उनके FPO में पैसा लगाया है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. उन्हें उनका पूरा पैसा वापस किया जाएगा. बता दें कि ये अब तक का सबसे बड़ा फॉलो-ऑप-ऑफर था.
पूरी तरह हुआ था सब्सक्राइब
20,000 करोड़ रुपए का FPO पूरी तरह सब्सक्राइब होने के कुछ घंटों बाद ही अडानी ने यह फैसला लेकर सबको बुरी तरह चौंका दिया. Adani Group की तरफ से कहा गया है कि अडानी एंटरप्राइजेज 20 हजार करोड़ के अपने एफपीओ को वापस ले रही है. निवेशकों को पैसा जल्द ही लौटाया जाएगा. कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया है. गौरतलब है कि 27 जनवरी को अडानी एंटरप्राइजेज ने एफपीओ जारी किया था और 31 जनवरी को बंद हुआ था.
निवेशकों को कहा- शुक्रिया
गौतम अडानी ने उन निवेशकों को शुक्रिया कहा है, जिन्होंने कंपनी में भरोसा जताते हुए एफपीओ में पैसा लगाया. उन्होंने आगे कहा कि बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बोर्ड ने एफपीओ को वापस लेने फैसला लिया है. हम शेयर बाजार में जारी हलचल को देखते हुए निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पहुंचे हैं. एफपीओ से प्राप्त रकम को हम वापस करने जा रहे है. अडानी समूह द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले को हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जोड़कर देखा जा रहा है. मालूम हो कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ठीक ऐसे समय आई थी, जब अडानी समूह ने अपना एफपीओ लॉन्च किया.
कहीं ये कारण तो नहीं?
वैसे, यह भी कहा जा रहा है कि अडानी समूह की शेयरधारकों का मजबूत आधार बनाने की मुहिम फेल हो गई. इस वजह से FPO वापस लिया गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश का सबसे बड़ा एफपीओ सिर्फ 112 परसेंट सब्सक्राइब हुआ, जिसमें अबू धाबी स्थित कंपनी का सहयोग भी शामिल है. रिटेल यानी कि खुदरा निवेशकों ने इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई. रिटेल कैटेगरी में केवल 12 परसेंट कोटा ही सब्सक्राइब हुआ था. वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस फैसले से अडानी समूह ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि उसके लिए पैसा मायने नहीं रखता, उसे निवेशकों के विश्वास की ज्यादा चिंता है.
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