विल्मर की हिस्सेदारी बिक्री से एकमुश्त लाभ को समायोजित करने के बाद अडाणी एंटरप्राइजेज का नेट प्रॉफिट 1313 करोड़ रुपये रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गौतम अडानी के नेतृत्व वाली अडानी एंटरप्राइजेज ने मार्च 2025 को खत्म हुई चौथी तिमाही में जबरदस्त नतीजे पेश किए हैं.कंपनी का मुनाफा 752% उछलकर ₹3,845 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ये आंकड़ा सिर्फ ₹451 करोड़ था.इतनी बड़ी बढ़त की बड़ी वजह रही ₹3,286 करोड़ का एक बार का खास फायदा (एक्सेप्शनल गेन). हालांकि, कम कारोबार के चलते कंपनी की ऑपरेशनल रेवेन्यू 8% घटकर ₹26,966 करोड़ रह गया.खासकर इसके IRM बिजनेस में गिरावट देखने को मिली.अच्छी खबर यह रही कि तिमाही में कंपनी का EBITDA 19% बढ़कर ₹4,346 करोड़ हो गया.
नतीजों पर गौतम अडानी ने क्या कहा?
गौतम अडानी ने चौथी तिमाही के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा -FY25 में हमारी मजबूत परफॉर्मेंस, हमारे स्केल, स्पीड और सस्टेनेबिलिटी की ताकत को दिखाती है. उन्होंने कहा कि हमारी इन्क्यूबेटिंग बिजनेस में प्रभावशाली वृद्धि, हमारे अनुशासित क्रियान्वयन, भविष्य-नियंत्रित निवेशों, और ऑपरेशनल एक्सीलेंस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. जैसे-जैसे हम ऊर्जा परिवर्तन, एयरपोर्ट्स, डेटा सेंटर्स और माइनिंग सर्विसेज में विस्तार कर रहे हैं, हम नए मार्केट लीडर्स बना रहे हैं जो आने वाले दशकों तक भारत की विकास यात्रा को गति देंगे.
डिविडेंड का भी किया ऐलान
अडानी एंटरप्राइजेज ने FY25 के लिए ₹1.3 प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) देने की घोषणा की है और 13 जून को रिकॉर्ड डेट तय की है.इसके साथ ही बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ जुटाने के लिए इक्विटी इश्यू करने को भी मंजूरी दी है, जो प्राइवेट प्लेसमेंट, क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) या प्रेफरेंशियल इश्यू के माध्यम से होगा.
सेगमेंट-वाइज परफॉर्मेंस
अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ANIL), जो समूह के ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस को संभालता है, उसने 32% की सालाना ग्रोथ के साथ ₹3,661 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया.वहीं, EBITDA में 73% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,110 करोड़ पर पहुंच गया.कंपनी ने 990 MW के मॉड्यूल सेल्स और 60 विंड टरबाइन के डिस्पैचेस की रिपोर्ट की.
एयरपोर्ट्स बिजनेस ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जहां राजस्व 29% बढ़कर ₹2,831 करोड़ हो गया और EBITDA 44% बढ़कर ₹953 करोड़ तक पहुंच गया. तिमाही में 24.7 मिलियन यात्री यात्रा पर गए, जो पिछले साल से 6% ज्यादा है. रोड्स सेक्टर में 144% की बढ़त देखी गई, जहां 695 लेन किलोमीटर सड़क निर्माण हुआ. माइनिंग सर्विसेज ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जहां 30% की ग्रोथ के साथ 14 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) डिस्पैच किया गया, और पारसा कोल ब्लॉक में ऑपरेशंस शुरू हो गए.
पूरे वित्त वर्ष का रेवेन्यू ₹1 लाख करोड़ रहा
FY25 के पूरे वित्त वर्ष के लिए अडानी एंटरप्राइजेज ने ₹1 लाख करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया है, जो 2% की सालाना बढ़ोतरी है. EBITDA में 26% की वृद्धि हुई और यह ₹16,722 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि टैक्स के बाद मुनाफा दो गुना बढ़कर ₹7,112 करोड़ हो गया. भविष्य में कंपनी ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर्स, एयरपोर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के सेक्टर में विस्तार जारी रखने की योजना बना रही है.
प्रजनन दर में गिरावट और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी से पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी वित्त पर बढ़ सकता है दबाव; उत्पादकता बढ़ाना और श्रमबल का विस्तार होगा अहम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक, देश 2049 तक ‘वृद्ध समाज’ और करीब 2065 तक ‘अति वृद्ध समाज’ की श्रेणी में पहुंच सकता है. इसका असर आने वाले दशकों में सिर्फ पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमबल की उपलब्धता, खपत, सरकारी वित्त और आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी पड़ सकता है.
मूडीज की वैश्विक जनसांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत करीब 2024 में ‘बुजुर्ग होती आबादी’ वाले समाज की श्रेणी में शामिल हो चुका है. जिस समाज में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 7 फीसदी होती है, उसे ‘एजिंग’ समाज माना जाता है. यह हिस्सेदारी 14 फीसदी होने पर ‘वृद्ध’ और 21 फीसदी पहुंचने पर ‘अति वृद्ध’ समाज की श्रेणी बनती है.
कुछ दशकों में तेजी से बदलेगी आबादी की उम्र संरचना
मूडीज का अनुमान है कि भारत 2049 तक ‘वृद्ध’ और करीब 2065 तक ‘अति वृद्ध’ समाज बन सकता है. यानी भारत को इन दोनों चरणों तक पहुंचने में अपेक्षाकृत कम समय लगेगा. तुलना में अमेरिका के 2033-34 के आसपास ‘अति वृद्ध’ समाज बनने का अनुमान है, जबकि इंडोनेशिया के लिए यह समय करीब 2077-78 बताया गया है.
मूडीज के मुताबिक, भारत की आबादी अभी भी अपेक्षाकृत युवा है, लेकिन इसकी उम्र संरचना में बदलाव शुरू हो चुका है. देश की प्रजनन दर भी 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गई है. इससे इस सदी के उत्तरार्ध में बुजुर्ग आबादी का अनुपात काफी बढ़ सकता है.
घटता श्रमबल बनेगा बड़ी चुनौती
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, लंबे समय तक बढ़ती आबादी भारत के आर्थिक विकास और साख के लिए अनुकूल रही है. हालांकि, घटती प्रजनन दर अब इस तस्वीर को बदल रही है. कम कामगारों से उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है, जबकि परिवारों और उपभोक्ताओं की संख्या घटने से मांग भी कमजोर हो सकती है.
मूडीज ने कहा कि ऐसे माहौल में आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए देशों को उत्पादकता बढ़ाने पर अधिक निर्भर रहना होगा. हालांकि, भारत के पास श्रमबल की भागीदारी बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है. रिपोर्ट में शामिल 19 अर्थव्यवस्थाओं में भारत की महिला श्रमबल भागीदारी दर 32 फीसदी के साथ सबसे कम बताई गई है.
पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा दबाव
बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और दीर्घकालिक देखभाल पर सरकारी खर्च बढ़ सकता है. इसके साथ ही सार्वजनिक वित्त और स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ने की संभावना है.
मूडीज के मुताबिक, आबादी के उम्रदराज होने और आश्रितों का अनुपात बढ़ने के साथ पेंशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और राजकोषीय ढांचे में बदलाव करना जरूरी होगा. जो देश इन बदलावों के लिए समय रहते तैयारी करेंगे, वे जनसांख्यिकीय दबावों से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं.
प्रजनन दर घटने के पीछे कई कारण
मूडीज ने प्रजनन दर में गिरावट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए हैं. शिक्षा का स्तर बढ़ने और महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी बढ़ने से परिवार शुरू करने में देरी हो रही है. वहीं, आवास, बच्चों की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत ने बच्चों के पालन-पोषण को महंगा बना दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि सोशल मीडिया और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संपर्क से कम प्रजनन दर की प्रवृत्ति अलग-अलग देशों में तेजी से फैल रही है. वहीं, अन्य शोधकर्ता आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक अस्थिरता और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को परिवार के आकार से जुड़े फैसलों का कारण मानते हैं.
कारोबार और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ेगा असर
बढ़ती उम्रदराज आबादी का असर कारोबार के स्वरूप पर भी पड़ सकता है. कंपनियों को ऐसे उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों और खर्च की प्राथमिकताओं के अनुरूप अपने उत्पादों और सेवाओं में बदलाव करना होगा. वहीं, वित्तीय बाजारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. मूडीज के मुताबिक, आने वाले वर्षों में बुजुर्ग पीढ़ियों के पास मौजूद बड़ी मात्रा में संपत्ति उनके उत्तराधिकारियों, परोपकारी संस्थाओं और अन्य लाभार्थियों को हस्तांतरित होगी. इससे पूंजी के प्रवाह और निवेश के पैटर्न में बदलाव आ सकता है.
तकनीक और उत्पादकता पर बढ़ेगी निर्भरता
मूडीज का कहना है कि नीतिगत उपाय और तकनीक उम्रदराज होती आबादी के साथ तालमेल बैठाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे जनसांख्यिकीय रुझानों को पूरी तरह पलट नहीं सकते. ऐसे में श्रमबल का विस्तार, उत्पादकता में वृद्धि और संस्थागत सुधार भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
आने वाले दशकों में आर्थिक और साख संबंधी परिणाम इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेंगे कि देश घटते श्रमबल की चुनौती से कैसे निपटते हैं, महिलाओं की श्रमबल भागीदारी कितनी बढ़ती है और उत्पादकता को किस तरह मजबूत किया जाता है.
S&P के मुताबिक, टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियां स्वतंत्र पेशेवर प्रबंधन के तहत काम करती हैं, लेकिन टाटा संस उनकी रणनीतिक दिशा को प्रभावित करती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग और टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने अहम आकलन पेश किया है. एजेंसी के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में टाटा संस की लिस्टिंग या नेतृत्व में बदलाव से टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग पर तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है. हालांकि, लंबी अवधि में समूह की संरचना, रणनीति, पूंजी आवंटन और कमजोर कंपनियों को मिलने वाले समर्थन में बदलाव होने पर क्रेडिट आकलन प्रभावित हो सकता है.**
S&P Global Ratings ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि टाटा समूह के लंबे इतिहास और अपेक्षाकृत रूढ़िवादी प्रबंधन दृष्टिकोण को देखते हुए वित्तीय नीतियों में किसी भी बदलाव के धीरे-धीरे होने की संभावना है. एजेंसी के अनुसार, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और समूह में नेतृत्व परिवर्तन फिलहाल समूह की कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल के लिए तटस्थ रहने की उम्मीद है.
टाटा संस का ग्रुप कंपनियों पर कितना प्रभाव?
S&P के मुताबिक, टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियां स्वतंत्र पेशेवर प्रबंधन के तहत काम करती हैं, लेकिन टाटा संस उनकी रणनीतिक दिशा को प्रभावित करती है. एजेंसी फिलहाल टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा कैपिटल और जगुआर लैंड रोवर की रेटिंग करती है.
रेटिंग एजेंसी इन कंपनियों को टाटा संस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानती है. समूह से मिलने वाले समर्थन को देखते हुए इन कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में अधिकतम तीन पायदान तक का लाभ शामिल किया जाता है.
लिस्टिंग से तुरंत नहीं बदलेगा क्रेडिट प्रोफाइल
S&P ने कहा कि टाटा संस की मौजूदा संरचना में सामान्य तरीके से लिस्टिंग होने की स्थिति में समूह की कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल पर तत्काल कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, लिस्टिंग के बाद सार्वजनिक शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़ने से निवेश संबंधी फैसलों, पूंजी आवंटन और कमजोर समूह कंपनियों को समर्थन देने की प्रक्रिया पर अधिक निगरानी हो सकती है.
एजेंसी के मुताबिक, संभावित आईपीओ का आकार बड़ा होने और सार्वजनिक शेयरधारकों को स्वामित्व ढांचे में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने में समय लगने के कारण लिस्टिंग का प्रभाव धीरे-धीरे सामने आ सकता है.
लंबी अवधि में इन बदलावों पर रहेगी नजर
S&P के अनुसार, टाटा समूह की लीडरशिप, ग्रुप स्ट्रक्चर या लाभार्थियों की प्राथमिकताओं में बदलाव होने पर लंबी अवधि में समूह की रणनीति और वित्तीय नीति की निरंतरता पर सवाल उठ सकते हैं. इसका असर खासतौर पर टाटा स्टील, टाटा पावर और टाटा कैपिटल जैसी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनकी विस्तार योजनाएं बड़ी हैं. वहीं, जगुआर लैंड रोवर फिलहाल कारोबारी बदलाव के दौर से गुजर रही है. ऐसे में समूह की रणनीतिक प्राथमिकताओं और कंपनियों को मिलने वाले समर्थन की निरंतरता S&P के भविष्य के क्रेडिट आकलन में अहम कारक रह सकती है.
फिलहाल 'न्यूट्रल' है आकलन
कुल मिलाकर, S&P का मौजूदा आकलन यह है कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और नेतृत्व परिवर्तन का टाटा समूह की रेटिंग वाली कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल पर **शॉर्ट टर्म में कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा**. हालांकि, आगे चलकर टाटा संस की भूमिका, स्वामित्व संरचना, पूंजी आवंटन और समूह की कंपनियों को समर्थन देने की नीति में किसी महत्वपूर्ण बदलाव पर रेटिंग एजेंसी की नजर रहेगी.
मंगलवार को सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी इंडेक्स 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट के बावजूद मंगलवार को निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी देखने को मिली. हालांकि, बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 60 अंक कमजोर होकर 22,800 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे बाजार की शुरुआत दबाव में रहने के संकेत मिल रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तरों से नरमी और एशियाई बाजारों में तेजी कुछ राहत दे सकती है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव बाजार की दिशा के लिए अहम बने हुए हैं.
कल क्या था बाजार का हाल
मंगलवार को घरेलू बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोर रही. सेंसेक्स करीब 200 अंक गिरकर 72,633.68 पर खुला और दिन के दौरान 700 अंकों से अधिक फिसल गया. हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से इंडेक्स ने मजबूत रिकवरी की और अंत में 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 22,732.45 पर खुलने के बाद 22,569.65 के निचले स्तर तक फिसला. बाद में इसमें भी निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली और इंडेक्स 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 22,716.20 पर बंद हुआ. इस तरह बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान जरूर दिखा, लेकिन लगातार दूसरे दिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए.
अडानी पोर्ट्स, टाटा स्टील में खरीदारी
मंगलवार के कारोबार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स में अडानी पोर्ट्स 4.39 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. सनफार्मा 1.09 फीसदी, टाटा स्टील 1.05 फीसदी, कोटक महिंद्रा बैंक 1 फीसदी और एनटीपीसी 0.92 फीसदी चढ़े. इसके उलट टाइटन 2.72 फीसदी की गिरावट के साथ सेंसेक्स का सबसे बड़ा लूजर रहा. एचसीएल टेक 2.29 फीसदी, टीसीएस 1.72 फीसदी, अल्ट्राटेक सीमेंट 1.57 फीसदी और हिंदुस्तान यूनिलीवर 1.53 फीसदी टूटे.
निफ्टी में अडानी एंटरप्राइजेज 5.01 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा चढ़ा. अडानी पोर्ट्स 4.49 फीसदी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 2.53 फीसदी, सनफार्मा 1.47 फीसदी और इन्फोसिस 1.22 फीसदी मजबूत हुए. वहीं, टाइटन 3 फीसदी, विप्रो 2.95 फीसदी, एचसीएल टेक 2.44 फीसदी, अपोलो हॉस्पिटल्स 2.27 फीसदी और टेक महिंद्रा 2.06 फीसदी कमजोर रहे.
गिफ्ट निफ्टी से शुरुआती दबाव के संकेत
बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 60 अंक टूटकर 22,800 के आसपास कारोबार कर रहा था. ऐसे में घरेलू बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत दे रही है.
Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय बाजार को शुरुआती कारोबार में राहत मिल सकती है. उनके अनुसार WTI क्रूड 89-90 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 95-96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है. एशियाई बाजारों में तेजी और टेक शेयरों में मजबूती भी बाजार को शुरुआती सहारा दे सकती है.
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते कच्चे तेल में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर बाजार की रिकवरी को सीमित कर सकता है. टिकाऊ तेजी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी अहम होगी.
कच्चे तेल की चाल भी अहम
कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को ऊपरी स्तरों से नरमी आई. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.6 फीसदी टूटकर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. हालांकि, बुधवार सुबह इसमें करीब 1.25 फीसदी की तेजी के साथ कीमत 103.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि लंबे समय तक ऊंची कीमतों से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
आज इन शेयरों पर भी रहेगी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की व्यापक दिशा के साथ कुछ कंपनियों से जुड़ी खबरें भी बुधवार के कारोबार में शेयरों की चाल प्रभावित कर सकती हैं. रामको सीमेंट्स ने आंध्र प्रदेश के जयंतीपुरम संयंत्र में क्षमता विस्तार पूरा किया है. जेएसडब्ल्यू सीमेंट के बोर्ड ने शिवा सीमेंट के विलय को मंजूरी दी है. एवलॉन टेक्नोलॉजीज में प्रमोटर समूह से जुड़े निवेशकों द्वारा ब्लॉक डील के जरिए 6 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की खबर है.
टाटा स्टील ने टी स्टील होल्डिंग्स के 393.51 करोड़ शेयर 34 करोड़ डॉलर में खरीदे हैं. साथ ही एक कर मामले में कंपनी की देनदारी 427 करोड़ रुपये घटकर 1,259 करोड़ रुपये रह गई है. एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने अमोल जोशी को नया CFO नियुक्त किया है.
बीएसई में गोल्डमैन सैक्स और बीएनपी पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स ने कुल करीब 2,186 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जबकि यूटीआई म्युचुअल फंड और निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड ने खरीदारी की है. केएसबी को डांगोटे प्रोजेक्ट्स फ्री जोन एंटरप्राइज से 118 करोड़ रुपये तक का निर्यात ऑर्डर मिला है. वहीं, कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल से जुड़ी संयुक्त उद्यम इकाई के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मध्यस्थता के फैसले को बरकरार रखा है.
बाजार के लिए आज क्या अहम?
कुल मिलाकर, मंगलवार की गिरावट के बाद निचले स्तरों से आई रिकवरी ने बाजार में खरीदारी की कोशिश जरूर दिखाई है, लेकिन बुधवार सुबह कमजोर गिफ्ट निफ्टी इस रिकवरी की स्थिरता को लेकर सतर्क संकेत दे रहा है. ऐसे में निवेशकों की नजर निफ्टी के 22,600-22,800 के दायरे, कच्चे तेल की कीमतों, एशियाई बाजारों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी. बाजार की आगे की दिशा इन घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच बनने वाले संतुलन पर निर्भर करेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
2032 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, भारत में पहले ही करीब 25 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है यूएई
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत में करीब 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रहा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि संभावित निवेश के लिए पोर्ट, शिपबिल्डिंग, ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है. यह प्रस्तावित निवेश भारत में यूएई के पहले से किए गए करीब 25 अरब डॉलर के निवेश के अतिरिक्त होगा.
यूएई ने भारत में लंबी अवधि में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है. वहीं, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.
पोर्ट और शिपबिल्डिंग पर विशेष जोर
समुद्री बुनियादी ढांचा यूएई के संभावित निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में उभरकर सामने आया है. दोनों देशों ने सहयोग के छह क्षेत्रों को कवर करने वाले एक द्विपक्षीय वर्किंग ग्रुप की स्थापना पर सहमति जताई है. इनमें जहाजों का स्वामित्व, आधुनिक पोर्ट का विकास, शिपबिल्डिंग, जहाजों की मरम्मत और रखरखाव, जहाजों को तोड़ना और कंटेनर निर्माण शामिल हैं.
पीयूष गोयल ने कहा कि यूएई के निवेशक नए पोर्ट के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा पोर्ट सुविधाओं के विस्तार में भी भाग ले सकते हैं. इसमें महाराष्ट्र में बन रहे वधावन पोर्ट के अलावा भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर मौजूद विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं.
सरकार के अनुसार, भारत और यूएई के बीच आर्थिक साझेदारी ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रही है. दोनों देश 200 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
ऊर्जा सुरक्षा भी दोनों देशों के बीच बातचीत का एक प्रमुख विषय रही. भारत और यूएई रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है और इस क्षेत्र में यूएई की ओर से आगे निवेश किए जाने की उम्मीद है.
भारत यूएई से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और अन्य गैसों की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है. भारत तक गैस पहुंचाने के लिए समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने की व्यवहार्यता का भी अध्ययन किया जा रहा है. इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक और नया क्षेत्र खुल सकता है.
भारत और यूएई के बीच व्यापक निवेश सहयोग के साथ ऊर्जा संबंध भी मजबूत हो रहे हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में यूएई भारत के कच्चे तेल, LNG और LPG के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था.
स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप में निवेश की तैयारी
यूएई स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी भारत में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रहा है. इसमें ऑर्बिटल डेब्रिस यानी अंतरिक्ष में मौजूद मलबे से संबंधित तकनीक विकसित करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.
दोनों देशों ने पहले ही स्पेस इंडस्ट्री के विकास और कमर्शियल सहयोग को गहरा करने के क्षेत्रों की पहचान की थी. इसमें स्पेस स्टार्टअप्स को समर्थन देना भी शामिल है.
इसके अलावा, भारत और यूएई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीकों और फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. बातचीत में भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी क्षमताओं के साथ जोड़कर वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के विकल्प भी शामिल हैं.
यूएई के निवेशक भारतीय इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर देख रहे हैं. वित्तीय क्षेत्र में सहयोग के तहत स्थानीय मुद्रा में लेनदेन, पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम तथा सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया जा रहा है.
CEPA के तहत व्यापार संबंध मजबूत करने पर जोर
भारत और यूएई के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने की ये बातचीत दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत व्यापार संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों के बीच हो रही है.
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा. वहीं, 2025 में दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब डॉलर रहा.
खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात पर भी सहयोग
निवेश और व्यापार के अलावा, दोनों देश खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इसका उद्देश्य भारतीय किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को खाद्य और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में मदद करना है.
इस तरह भारत और यूएई के बीच आर्थिक सहयोग अब पारंपरिक व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों से आगे बढ़कर पोर्ट, शिपबिल्डिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, फिनटेक और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है.
भाग 2: बॉम्बे रेयॉन की दिवाला प्रक्रिया में उसके सप्लायर्स द्वारा किए गए कुल दावों में से आधे से अधिक का कंपनी के अपने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो सका, इनमें से ₹317 करोड़ चार ट्रेडिंग कंपनियों के थे, जिनके पास कोई मिल नहीं है. संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किए गए केवल दो दावे प्रमोटर्स से जुड़े थे, और दोनों का पूरा भुगतान किया गया, जबकि 2,027 कर्मचारियों को प्रति रुपये पर 14 पैसे की वसूली हुई. यह वही कंपनी है, जिसकी खरीद के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज दिया, तीन बार पुनर्गठन किया और अंततः ₹1,300 करोड़ से अधिक की रकम को बट्टे खाते में डाल दिया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
उन बही-खातों की अंदरूनी कहानी, जिनका मिलान नहीं हो सका
जब कोई मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ढह जाती है, तो उसके सप्लायर बिल इस बात की कहानी बताते हैं कि उसने क्या खरीदा — धागा, डाई, केमिकल और वे चीजें जो कपड़े में इस्तेमाल होती हैं. ये सप्लायर्स दिवाला प्रक्रिया में उस रकम के लिए दावे दाखिल करते हैं, जो अभी उन्हें मिलनी बाकी होती है, और एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल हर दावे का कंपनी के अपने बही-खातों और दस्तावेजों से मिलान करता है.
बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड में इस बिलिंग का आधे से अधिक हिस्सा जांच में टिक नहीं सका.
सप्लायर्स ने ₹853.04 करोड़ के दावे पेश किए. जब 31 अगस्त 2023 को सूची को अंतिम रूप दिया गया, तो ₹314.41 करोड़ के दावे स्वीकार किए गए. ₹483.10 करोड़ को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया गया.
किसी दावे को खारिज करना उस भुगतान में कटौती नहीं है, जिसकी उम्मीद दिवाला प्रक्रिया में हर क्रेडिटर करता है. यह उस कर्ज को पहली जगह मान्यता देने से इनकार है: कंपनी के रिकॉर्ड में बिल में बताए गए लेनदेन का कोई उल्लेख नहीं है. भुलोक इंटरनेशनल रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दाखिल किए गए ऐसे ही एक खारिज दावे के खिलाफ रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने साफ शब्दों में कारण दर्ज किया, इसे "बही-खातों में उपलब्ध नहीं होने और दस्तावेजों से प्रमाणित नहीं किए जाने" के कारण स्वीकार नहीं किया गया. चार सबसे बड़े खारिज दावों के लिए फाइल में कोई कारण दर्ज नहीं है.
यह वही कंपनी है, जिसकी खरीद और बिक्री के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एक कंसोर्टियम ने हजारों करोड़ रुपये का कर्ज दिया, तीन बार कर्ज का पुनर्गठन किया और अंततः सार्वजनिक धन के ₹1,300 करोड़ से अधिक को बट्टे खाते में डाल दिया.
ये आंकड़े भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के पास दाखिल किए गए क्रेडिटर्स की सूचियों से लिए गए हैं, जो सार्वजनिक दस्तावेज हैं. इनकी पहले रिपोर्टिंग नहीं हुई है. ये ऐसे समय सामने आए हैं जब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने कंपनी के मामलों की जांच शुरू की है.
जनार्दन अग्रवाल और प्रशांत अग्रवाल ने बॉम्बे रेयॉन को प्रमोट किया था, जिसकी महाराष्ट्र, बेंगलुरु, केरल और इंदौर में टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स थीं. प्रमोटर्स कर्ज चुकाने में विफल रहे और उन्हें कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग और कई राहत पैकेज मिले.
SFIO की जांच और बैंक का रेस्क्यू
BW द्वारा देखे गए 5 अगस्त 2026 के समन में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 212(1)(c) के तहत 30 अक्टूबर 2025 को जांच का आदेश दिया था. SFIO के निदेशक ने दो इंस्पेक्टरों के साथ एक जांच अधिकारी नियुक्त किया है और कंपनी से जुड़े लोगों को नई दिल्ली में पूछताछ के लिए समन भेजना शुरू कर दिया है.
जांचकर्ता एक लंबी कहानी के अंत में पहुंचे हैं. 2013 से 2017 के बीच SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने BRFL को तीन बार बचाया: 2013 में कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग, 2016 में ₹934.26 करोड़ के कर्ज और बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलना और 2017 में S4A पैकेज, जिसके तहत लेंडर्स को कंपनी की करीब 40% हिस्सेदारी मिली. उस आखिरी रेस्क्यू के 15 महीने बाद SBI ने BRFL में अपनी ₹2,260.79 करोड़ की एक्सपोजर को JM Financial ARC को ₹900 करोड़ में बेच दिया.
हर रेस्क्यू इसी धारणा पर आधारित था कि पैसा एक चल रहे टेक्सटाइल कारोबार के जरिए आ-जा रहा है. दिवाला रिकॉर्ड इस बारे में एक कठिन सवाल उठाते हैं कि वास्तव में पैसा कहां जा रहा था और किसके पास जा रहा था.
चार दावेदार, ₹317 करोड़, केवल ₹77 लाख मान्यता प्राप्त
खारिज किए गए कुल दावों में से दो-तिहाई हिस्से के लिए चार नाम जिम्मेदार हैं.
दावेदार दावा स्वीकार किया गया
कृष्णा कंपनी ₹122.11 करोड़ शून्य
ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज ₹102.79 करोड़ शून्य
प्रध्वी मल्टीट्रेड ₹59.13 करोड़ शून्य
दशबाहु मल्टीट्रेड ₹33.07 करोड़ ₹77.37 लाख
इन चारों ने मिलकर एक टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर से ₹317 करोड़ की मांग की और उनके बीच केवल ₹77 लाख की राशि को मान्यता दी गई.
ये टेक्सटाइल मिलें नहीं हैं
मुंबई में पंजीकृत प्रध्वी मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के कंपनी रिकॉर्ड के मुताबिक, इसे फरवरी 2011 में ₹2 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ शुरू किया गया था. इसे होलसेल और कमीशन-एजेंट श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है और इसका पता रूम नंबर 12, माता रामदेवी निवास, एन.एस. रोड, मुलुंड वेस्ट है. इसके निदेशक सुधीर विजय गोयल और राजपाल सिंह दौधर हैं; इसकी आखिरी दाखिल बैलेंस शीट मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष की है और CRISIL ने दर्ज किया था कि इसने रेटिंग एजेंसी के साथ सहयोग करना बंद कर दिया था.
मुंबई में पंजीकृत ग्रीन शील्ड एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना जुलाई 2008 में ₹2 करोड़ की पेड-अप कैपिटल के साथ हुई थी. इसे "बिजनेस एक्टिविटीज एन.ई.सी." के तहत वर्गीकृत किया गया है और इसका पता रूम नंबर 5, हेतल अपार्टमेंट, एन.एस. रोड, मुलुंड वेस्ट है, यही सड़क. इसके निदेशक सुधीर विजय गोयल हैं, जो प्रध्वी के बोर्ड में भी हैं, और आरती आशीष कनोडिया हैं. ग्रीन शील्ड की मौजूदा स्थिति "Under CIRP" है: यानी वह खुद भी दिवाला प्रक्रिया में जा चुकी है.
₹2 करोड़ की पूंजी वाली दो कंपनियां, एक ही निदेशक और मुलुंड वेस्ट की एक ही सड़क साझा करती हैं, जिन्होंने एक मुंबई की टेक्सटाइल कंपनी से ₹162 करोड़ का दावा किया और कुछ भी स्वीकार नहीं किया गया.
इसकी तुलना उन सप्लायर्स से करें जिनके दावे स्वीकार किए गए: मिलें, डाई वर्क्स, केमिकल कंपनियां, ट्रांसपोर्टर्स, पैकेजिंग फर्म्स, ऐसे कारोबार जिनके पास प्लांट और पेरोल हैं.
इसमें एक और कनेक्शन है. सुधीर गोयल नाम का एक व्यक्ति बॉम्बे रेयॉन की कर्मचारी क्रेडिटर्स की अपनी सूची में भी दिखाई देता है, जिसमें ₹22.81 लाख का दावा पूरी तरह स्वीकार किया गया. क्या यह वही व्यक्ति है जो प्रध्वी मल्टीट्रेड और ग्रीन शील्ड का निदेशक है? एक सुधीर गोयल को कर्मचारी के रूप में और दूसरे को बॉम्बे रेयॉन से पैसे का दावा करने वाली कंपनी के निदेशक के रूप में दिखाया गया है. सूत्रों का कहना है कि दोनों एक ही व्यक्ति हो सकते हैं.
वह अवधि जब ₹472 करोड़ ध्वस्त हो गए
दावों को धीरे-धीरे खारिज नहीं किया गया. वे एक ही बार में बड़ी संख्या में खारिज हुए.
18 नवंबर 2022 की सूची में सप्लायर के ₹624.89 करोड़ के दावे अभी भी "सत्यापन के तहत" दर्ज थे और केवल ₹74,43,673 को खारिज किया गया था. चारों सबसे बड़े दावे, कृष्णा कंपनी के ₹122.11 करोड़, ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज के ₹102.79 करोड़, प्रध्वी मल्टीट्रेड के ₹59.13 करोड़ और दशबाहु मल्टीट्रेड के ₹32.30 करोड़, इसी कॉलम में लंबित थे.
13 फरवरी 2023 की अगली सूची तक स्वीकार नहीं किए गए दावे बढ़कर ₹471.94 करोड़ हो गए थे. इसी अवधि में नवंबर में एक सामान्य सप्लायर के रूप में दर्ज और संबंधित पक्ष नहीं मानी गई स्कॉट्स प्लांटेशंस की ₹65.70 करोड़ की दावे की राशि को अलग श्रेणी में ले जाकर संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किया गया.
नवंबर 2022 के मध्य और फरवरी 2023 के मध्य के बीच हुई किसी जांच के कारण करीब आधा अरब रुपये की सप्लायर बिलिंग खारिज कर दी गई और प्रमोटर से जुड़ी एक कंपनी को दोबारा वर्गीकृत किया गया. वह जो भी था, बही-खातों का मिलान, लेनदेन का ऑडिट, फॉरेंसिक समीक्षा, उसके निष्कर्ष कभी सार्वजनिक नहीं किए गए.
संबंधित के तौर पर चिन्हित दो दावे, दोनों प्रमोटर परिवार से
क्रेडिटर की सूचियों में एक कॉलम है, जिसका शीर्षक है "क्या संबंधित पक्ष?" इसका एक कारण है. दिवाला कानून के तहत संबंधित पक्षों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है: संबंधित पक्ष के वित्तीय क्रेडिटर के पास क्रेडिटर्स की समिति में वोट नहीं होता और संबंधित पक्ष के लेनदेन वे चीजें हैं, जिनकी जांच रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को प्राथमिकता, कम मूल्यांकन या धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए करनी होती है.
हर एनेक्सर में 413 ऑपरेशनल क्रेडिटर्स, 36 सरकारी विभाग, पांच अनसिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, 2,027 वर्कमेन और 423 कर्मचारी, यह कॉलम ठीक दो दावों के लिए भरा गया है. दोनों अग्रवाल परिवार से संबंधित हैं.
पहला दावा अपनी अलग श्रेणी में है. स्कॉट्स प्लांटेशंस प्राइवेट लिमिटेड, कर्नाटक की एक कंपनी, जिसमें BRFL के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत जनार्दन अग्रवाल निदेशक हैं, ने 23 जून 2022 को ₹65.69 करोड़ का दावा किया. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने NIL स्वीकार किया, पूरी राशि को अस्वीकार के रूप में दर्ज किया और दावेदार को संबंधित पक्ष: हां के रूप में चिन्हित किया. यह दावा पहले सामान्य सप्लायर्स में जून 2022 की सूची में क्रम संख्या 150 पर दिखाई दिया था, बाद में इसे वहां से हटा दिया गया.
स्कॉट्स प्लांटेशंस की अपनी भी परेशानियां हैं. इसे JM Financial Asset Reconstruction Company की ओर से रिकवरी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, यही वह ARC है जिसने 2018 में SBI की BRFL में ₹2,260.79 करोड़ की एक्सपोजर को ₹900 करोड़ में खरीदा था और जिसके ₹6,080 करोड़ के दावे ने बाद में उसे 90.80% वोट दिए, जिससे BRFL को लिक्विडेशन में भेजा गया.
दूसरा चिन्हित दावा कर्मचारियों की सूची में है. बॉम्बे रेयॉन के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अमन जनार्दन अग्रवाल ने ₹2,15,15,008 का कर्मचारी दावा दाखिल किया, जिसे संबंधित पक्ष के तौर पर चिन्हित किया गया और पूरी तरह स्वीकार किया गया. प्रशांत अग्रवाल ने ₹1,03,78,125 का कर्मचारी दावा दाखिल किया, जिसे भी पूरी तरह स्वीकार किया गया.
अब इसकी तुलना शॉप फ्लोर से करें. 2,027 वर्कमेन ने बकाया भुगतान के रूप में ₹29.93 करोड़ का दावा किया. ₹4.10 करोड़ स्वीकार किए गए यानी प्रति रुपये करीब 14 पैसे. बाकी अधिकांश राशि को आकस्मिक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड कामगार संघ के जरिए दाखिल बेंगलुरु प्रोसेसिंग मिल के कर्मचारियों के दावे अभी असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के सामने लंबित हैं.
दो प्रमोटर्स, उनके बीच ₹3.19 करोड़, पूरी तरह स्वीकार किए गए. दो हजार कर्मचारी, ₹29.93 करोड़, जिनमें से ₹4.10 करोड़ स्वीकार किए गए.
और वे दो सब्सिडियरीज जिन्हें चिन्हित नहीं किया गया
यही कॉलम फाइल में कहीं और एक विपरीत कहानी बताता है.
BRFL इटालिया, बॉम्बे रेयॉन होल्डिंग्स लिमिटेड के जरिए रखी गई इटली की सब्सिडियरी, ने ₹55.52 करोड़ का दावा किया. रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने ₹1 की सांकेतिक राशि स्वीकार की और दर्ज किया कि कॉरपोरेट डेटर की बही-खातों में कोई बकाया नहीं था और यह मामला अदालतों के सामने विवादित था, जबकि बाकी राशि को आकस्मिक के रूप में वर्गीकृत किया गया.
BRFL टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड, जिसे अगस्त 2020 में BRFL का तारापुर उपक्रम हासिल करने के लिए बनाया गया था और जिसका 70% स्वामित्व BRFL के पास था, ने ₹7.46 करोड़ का दावा किया. इसे शून्य पर स्वीकार किया गया और दर्ज किया गया कारण चौंकाने वाला है. मिलान किए गए आंकड़े सब्सिडियरी को भेजे गए थे, सबसे हाल में 11 जुलाई 2023 को ईमेल के जरिए, जिसमें सब्सिडियरी द्वारा BRFL को देय राशि दिखाई गई थी और कभी कोई जवाब नहीं मिला.
दोनों को संबंधित पक्ष नहीं माना गया. चेयरमैन और उसके भाई द्वारा निर्देशित एक कंपनी की पहचान करने के बाद, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने किस आधार पर BRFL की दो सब्सिडियरीज को असंबंधित दर्ज किया? इसका जवाब केवल सतीश कुमार गुप्ता दे सकते हैं और यह उन शुरुआती सवालों में से एक है, जो SFIO और CBI को उनसे पूछने चाहिए.
टैक्स विभाग का ₹173 करोड़ का दावा और धारा 66 का संकेत
सरकार के दावे अपनी अलग कहानी बताते हैं. विभागों ने कुल ₹742.12 करोड़ के 36 दावे दाखिल किए.
सबसे बड़ा दावा डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस, मुंबई का है, जिसने 2 सितंबर 2022 को ₹1,73,20,06,258 का दावा दाखिल किया. इसे पूरी तरह स्वीकार किया गया.
यह अगस्त 2021 में DGGI द्वारा BRFL के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत अग्रवाल को गिरफ्तार किए जाने के समय लगाए गए ₹55.8 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड के आरोप से तीन गुना से भी अधिक है.
इसके साथ लगी टिप्पणी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी रकम. दावा विभाग द्वारा दाखिल DRC-01A के आधार पर स्वीकार किया गया था, यानी देय निर्धारित टैक्स की सूचना और यह "इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 43 से 51 और 66 के तहत जांच के अधीन" था. धारा 66 धोखाधड़ी वाले कारोबार से संबंधित प्रावधान है.
कर्मचारियों का बकाया इसी सूची में है: बेंगलुरु प्रोविडेंट फंड कार्यालय को ₹23.68 करोड़, EPFO कांदिवली को ₹23.30 करोड़, EPFO ठाणे द्वारा दावा किए गए ₹57.47 करोड़ में से ₹18.51 करोड़ स्वीकार किए गए, ESIC पीण्या को ₹10.16 करोड़ और अन्य. दो मामलों में EPFO ने कंपनी के बैंक खातों को अटैच किया था; मार्च 2023 में NCLT द्वारा आदेश दिए जाने के बाद कि प्रोविडेंट फंड योगदान के बराबर रकम उन शेष राशियों से अलग रखकर जमा की जाए, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने उस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील की.
एक ऐसी देनदारी भी है, जो बही-खातों में दिखाई नहीं देती थी. मैनेजमेंट ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को बताया कि एडवांस और EPCG लाइसेंस के बदले करीब ₹29.80 करोड़ की कस्टम ड्यूटी बकाया थी, लेकिन नोट में दर्ज है कि यह कंपनी की बही-खातों या वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज नहीं है.
क्या ये दावेदार वास्तविक हैं? इसकी जांच जरूरी है
हर बड़े दावे को खारिज नहीं किया गया और सूची यह स्पष्ट करती है कि वास्तविक क्रेडिटर्स कौन थे.
केडिया समूह सबसे बड़ा सप्लायर ब्लॉक है: केडिया ब्रदर्स ने ₹162.53 करोड़ का दावा किया और ₹105.13 करोड़ स्वीकार किए गए; केडिया टेक्सफैब एंड इंडस्ट्रीज ने ₹44.49 करोड़ का दावा किया और ₹21.96 करोड़ स्वीकार किए गए; केडिया एंटरप्राइजेज ने ₹4.95 करोड़ का दावा किया. वित्तीय कर्ज के तौर पर दाखिल छोटे दावों के साथ, एक परिवार के समूह का BRFL में ₹200 करोड़ से अधिक का पैसा लगा हुआ था.
यार्न सप्लायर्स भी सूची में हैं: वीएम यार्न्स ने ₹29.75 करोड़ का दावा किया और ₹12.75 करोड़ स्वीकार किए गए; चिरंजी लाल यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹5.32 करोड़ का दावा किया; और चिरंजी लाल यार्न ट्रेडर्स, वह छोटा ट्रेडर जिसके ₹1.61 करोड़ के बकाया ने अंततः BRFL को दिवाला प्रक्रिया में पहुंचाया, का ₹97.87 लाख का दावा स्वीकार किया गया.
इन सबके मुकाबले, दो सिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स JM Financial ARC और एक्सिस बैंक ने ₹6,690.98 करोड़ का दावा किया, जो अंततः स्वीकार किए गए ₹7,358.95 करोड़ का 90.92% था.
गणित को एक साथ देखना जरूरी है. केडिया समूह जैसे वास्तविक सप्लायर्स ने ₹200 करोड़ से अधिक की रकम पर कटौती झेली. कर्मचारियों को ₹29.93 करोड़ में से ₹4.10 करोड़ की वसूली हुई. प्रोविडेंट फंड और ESIC कार्यालय अभी भी करोड़ों रुपये की वसूली के लिए प्रयासरत हैं. प्रमोटर्स के अपने कर्मचारी दावों का पूरा भुगतान किया गया. और ₹317 करोड़ की बिलिंग चार ऐसी कंपनियों से आई, जिनके पास कोई मिल नहीं है.
SFIO और CBI को क्या पूछना चाहिए
किसी दावे को खारिज करने का मतलब केवल इतना है कि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल इस बात से संतुष्ट नहीं था कि कर्ज देय था. लेकिन किसी कंपनी की अपनी दिवाला प्रक्रिया के भीतर ₹483 करोड़ की सप्लायर बिलिंग का सत्यापन में विफल होना स्पष्टीकरण की मांग करता है और ये स्पष्टीकरण उन दस्तावेजों में मौजूद हैं, जिन्हें जांचकर्ता हासिल कर सकते हैं.
कृष्णा कंपनी, ग्रीन शीड एंटरप्राइजेज, प्रध्वी मल्टीट्रेड और दशबाहु मल्टीट्रेड के दावे किन आधारों पर खारिज किए गए और इन कंपनियों ने क्या सप्लाई किया था?
नवंबर 2022 और फरवरी 2023 के बीच क्या जांच की गई और क्या ट्रांजैक्शन ऑडिट किया गया था?
क्या इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 43, 45 या 66 के तहत NCLT के समक्ष आवेदन दाखिल किए गए थे और DGGI के दावे पर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के फ्लैग का क्या हुआ?
स्कॉट्स प्लांटेशंस का ₹65.70 करोड़ का दावा किससे संबंधित था और चेयरमैन के ₹2.15 करोड़ के कर्मचारी दावे का आधार क्या था?
और उन दोनों को चिन्हित करने के बाद, 70% स्वामित्व वाली एक भारतीय सब्सिडियरी और एक इटली की सब्सिडियरी को दोनों को असंबंधित क्यों दर्ज किया गया?
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर के कई नए इलाकों तक पहुंचा ‘द बिग बिलियन डेज’; ईकार्ट नेटवर्क में जुड़े 750 से ज्यादा नए पिन कोड
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली ई-कॉमर्स मांग को संभालने के लिए फ्लिपकार्ट ने अपनी सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार किया है. कंपनी के लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म ईकार्ट ने 1.4 करोड़ क्यूबिक फीट नई वेयरहाउसिंग क्षमता जोड़ी है. इससे उसकी कुल स्टोरेज क्षमता में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही 750 से ज्यादा नए पिन कोड को नेटवर्क में जोड़ा गया है, जिनमें लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर भारत के कई ऐसे इलाके शामिल हैं, जहां अब तक लॉजिस्टिक्स की पहुंच सीमित रही है.
कंपनी के मुताबिक, इस विस्तार का उद्देश्य आगामी ‘द बिग बिलियन डेज’ और त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ने वाली मांग के बीच ऑर्डर प्रोसेसिंग और डिलीवरी क्षमता को मजबूत करना है. तकनीक और ऑटोमेशन में किए गए सुधारों के बाद ईकार्ट की पीक प्रोसेसिंग क्षमता में भी 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.
8,200 से ज्यादा लॉजिस्टिक्स सुविधाएं
तेज डिलीवरी की मांग को देखते हुए ईकार्ट ने देशभर में 900 से अधिक अतिरिक्त डिलीवरी हब जोड़े हैं. इसके बाद ईकार्ट के फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और लास्ट-माइल डिलीवरी ऑपरेशंस समेत कुल नेटवर्क सुविधाओं की संख्या 8,200 से अधिक हो गई है.
इसके अलावा, 150 से अधिक शहरों में फ्लिपकार्ट मिनट्स के करीब 1,200 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर संचालित हो रहे हैं. कंपनी का कहना है कि इन सुविधाओं के विस्तार से त्योहारी सीजन में सेम-डे और नेक्स्ट-डे डिलीवरी को सपोर्ट मिलेगा.
2.5 करोड़ से ज्यादा उत्पाद पहले से स्टॉक
त्योहारी मांग के दौरान ऑर्डर्स की तेजी से पूर्ति के लिए ईकार्ट के फुलफिलमेंट सेंटरों में एमएसएमई, छोटे विक्रेताओं, बुनकरों और कारीगरों के 2.5 करोड़ से ज्यादा उत्पाद पहले ही पहुंचाए जा चुके हैं. इसके अलावा, प्रमुख सेलर हब्स पर 70 नए पिक-अप स्टेशन जोड़े गए हैं. इनका उद्देश्य सेलर्स से उत्पादों के उठाव और फुलफिलमेंट में लगने वाले समय को कम करना है.
ईकार्ट के 3पीएल यानी थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स फ्रेंचाइज नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है. कंपनी के अनुसार, लॉन्च के दो महीने के भीतर यह नेटवर्क दोगुना होकर 600 तक पहुंच गया है. इसके जरिए फ्लिपकार्ट मार्केटप्लेस के बाहर काम करने वाले सेलर्स और एमएसएमई को भी देशभर में लॉजिस्टिक्स सेवाओं का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा.
लेह, कारगिल और पूर्वोत्तर के नए इलाकों तक पहुंच
फ्लिपकार्ट ने अपने नेटवर्क में 750 से अधिक नए पिन कोड जोड़े हैं. इनमें लद्दाख के लेह और कारगिल के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश के दूरदराज के इलाके तथा पूर्वोत्तर के कई क्षेत्र शामिल हैं.
पूर्वोत्तर में मिजोरम के कमलानगर और जामुआंग, मेघालय के तुरासिटी, रेसुबेलपारा और राजाबाला तथा अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला और तेजू जैसे इलाकों को नेटवर्क में जोड़ा गया है. कंपनी के मुताबिक, इन क्षेत्रों में इस साल पहली बार ‘द बिग बिलियन डेज’ की पहुंच होगी.
डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बीमा और इंसेंटिव
त्योहारी सीजन के दौरान डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने के लिए फ्लिपकार्ट ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स यानी विशमास्टर्स के लिए बीमा और कमाई से जुड़े प्रावधान भी किए हैं. कंपनी के अनुसार, प्रत्येक विशमास्टर को टर्म लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और मेडिक्लेम की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा, विशमास्टर्स और उनके परिवार के लिए ‘डॉक्टर ऑन कॉल’ सेवा भी उपलब्ध कराई गई है.
इस त्योहारी सीजन में विशमास्टर्स को जॉइनिंग और रिटेंशन बोनस के साथ रेफरल इंसेंटिव का भी लाभ मिलेगा. वहीं, ‘फ्लिपकार्ट डिलीवरी पार्टनर्स ऐप’ के जरिए एआई आधारित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाता है. कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से 10 मिनट से कम समय में ऑनबोर्डिंग पूरी की जा सकती है. ऐप के जरिए नए डिलीवरी पार्टनर्स को पहली शिफ्ट से पहले जरूरी ट्रेनिंग भी दी जाती है.
फ्लिपकार्ट समूह के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और सप्लाई चेन प्रमुख हेमंत बद्री ने कहा, “हर साल ‘द बिग बिलियन डेज’ ग्राहकों की उम्मीदों को नई ऊंचाई देता है, खासकर तेज डिलीवरी और व्यापक पहुंच के मामले में. इस साल लेह और कारगिल के ग्राहक पहली बार बिग बिलियन डेज का अनुभव करेंगे. ईकार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स को मिलाकर हमारे पास अब 8,200 से अधिक सुविधाएं हैं, जो हमें ज्यादा ग्राहकों तक त्योहारी खरीदारी पहुंचाने और विक्रेताओं को नए खरीदारों तक पहुंचने में मदद करती हैं.”
2.5 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर
फ्लिपकार्ट ने इस त्योहारी सीजन के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की भी घोषणा की है. इनमें करीब 75,000 अवसर ऐसे लोगों के लिए हैं, जो पहली बार वर्कफोर्स में शामिल हो रहे हैं.
कंपनी के अनुसार, इन नए रोजगार अवसरों में करीब 60 प्रतिशत लास्ट-माइल डिलीवरी से जुड़े हैं. यह त्योहारी मांग के दौरान डिलीवरी नेटवर्क में बढ़ने वाली जरूरत के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 बाजारों में फ्लिपकार्ट मिनट्स के विस्तार से भी जुड़ा है.
अडानी ग्रुप से जुड़े मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 28 सितंबर को दो अहम आदेश जारी किए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी ग्रुप से जुड़े मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 28 सितंबर को दो अहम आदेश जारी किए. एक सेटलमेंट ऑर्डर के तहत अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस समेत संबंधित पक्षों ने कुल ₹1.48 करोड़ का भुगतान कर कार्यवाही का निपटारा किया. वहीं, एक अलग फाइनल ऑर्डर में विनोद अडानी समेत 12 लोगों के खिलाफ MPS नियमों के उल्लंघन और फ्रॉड्यूलेंट ट्रेड प्रैक्टिस से जुड़े आरोप स्थापित नहीं पाए गए.
चार कंपनियों से जुड़ा था मामला
SEBI के सेटलमेंट ऑर्डर में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अडानी ट्रांसमिशन, जिसे अब अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के नाम से जाना जाता है, से जुड़ी कार्यवाही शामिल थी. मामले में ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और अन्य निदेशकों समेत कई लोगों का नाम भी शामिल था. मामला मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन से संबंधित था. भारतीय शेयर बाजार के नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना जरूरी है.
SEBI के मुताबिक, इस मामले में 2020 में शिकायतें मिली थीं और इसके बाद नियामक ने जांच शुरू की थी. बाद में सितंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस और मार्च 2025 में सप्लीमेंट्री नोटिस जारी किया गया.
क्या था आरोप?
मामले में आरोप था कि दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) EIFF यानी Emerging India Focus Fund और EM Resurgent Fund ने अडानी ग्रुप की चार कंपनियों में निवेश किया था. जांच के दौरान यह सवाल उठा कि क्या इन निवेशों को वास्तव में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग माना जा सकता है या इन पर प्रमोटर ग्रुप से जुड़े व्यक्तियों का प्रभावी नियंत्रण था.
SEBI के आरोपों के मुताबिक, निवेश संरचना के जरिए करीब ₹1,984 करोड़ का अनुचित लाभ हासिल किए जाने का दावा किया गया था. मामले में Opal से जुड़े निवेश की भी जांच की गई थी.
विनोद अडानी पर क्या कहा SEBI ने?
अलग फाइनल ऑर्डर में SEBI ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह साबित नहीं हुआ कि विनोद अडानी का EIFF और EM Resurgent Fund पर प्रभावी नियंत्रण था. इसी वजह से MPS नियमों के उल्लंघन और फ्रॉड्यूलेंट ट्रेड प्रैक्टिस से जुड़े आरोप स्थापित नहीं पाए गए. SEBI ने यह भी कहा कि संबंधित विदेशी निवेशकों के निवेश को केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग मानने का पर्याप्त आधार नहीं मिला.
इस महीने अडानी ग्रुप से जुड़े कई आदेश
SEBI की वेबसाइट के मुताबिक, सितंबर 2026 में अडानी ग्रुप से संबंधित कई आदेश जारी हुए हैं. 22 सितंबर को भी अडानी ग्रुप से जुड़ा एक सेटलमेंट ऑर्डर जारी किया गया था, जबकि 28 सितंबर को MPS मामले में सेटलमेंट ऑर्डर और अलग फाइनल ऑर्डर दोनों सूचीबद्ध किए गए.
इस तरह 28 सितंबर के दोनों आदेशों में कार्रवाई की प्रकृति अलग है. एक मामले में संबंधित पक्षों ने सेटलमेंट के जरिए कार्यवाही का निपटारा किया है, जबकि दूसरे में नियामक ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को स्थापित नहीं पाया.
विश्व बैंक के ग्लोबल फिनडेक्स 2025 के मुताबिक, 2024 में भारत में 89.2 फीसदी महिलाओं और 88.8 फीसदी पुरुषों के पास किसी वित्तीय संस्थान या मोबाइल मनी सेवा में खाता था. यानी खाता स्वामित्व के मामले में महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर लगभग खत्म हो चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में वित्तीय समावेशन की कहानी अब सिर्फ बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रह गई है. खासकर ग्रामीण और छोटे कस्बों में महिलाएं अब बैंकिंग व्यवस्था की केवल ग्राहक नहीं, बल्कि उसे लोगों तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी भी बन रही हैं. ग्राहक सेवा केंद्र यानी कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) के जरिए महिलाएं अपने लिए आय का जरिया तैयार करने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का काम कर रही हैं. यह बदलाव महिलाओं की पारंपरिक घरेलू और वित्तीय भूमिका को घर की चारदीवारी से बाहर सामुदायिक स्तर तक ले जा रहा है.
वित्तीय समावेशन के आंकड़े भी इस बदलाव की व्यापक तस्वीर सामने रखते हैं. विश्व बैंक (World Bank) के ग्लोबल फिनडेक्स 2025 के मुताबिक, 2024 में भारत में 89.2 फीसदी महिलाओं और 88.8 फीसदी पुरुषों के पास किसी वित्तीय संस्थान या मोबाइल मनी सेवा में खाता था. यानी खाता स्वामित्व के मामले में महिलाओं और पुरुषों के बीच अंतर लगभग खत्म हो चुका है. हालांकि, बैंक खाता होने और उसका सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने के बीच अभी भी अंतर मौजूद है. डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में कम है, जो वित्तीय समावेशन के अगले चरण की चुनौती को दिखाता है.
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत भी महिलाओं की बैंकिंग पहुंच में विस्तार हुआ है. 16 सितंबर 2026 तक योजना के तहत कुल 59.31 करोड़ लाभार्थी खाते थे, जिनमें 33.04 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के थे. ऐसे में बैंकिंग सेवाओं को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने वाले CSPs महिलाओं के लिए आर्थिक गतिविधि और वित्तीय जागरूकता का एक नया माध्यम बन रहे हैं.
सेव ग्रुप के प्रबंध निदेशक एवं सह-संस्थापक अजीत कुमार सिंह के मुताबिक, महिला CSPs का उभरना वित्तीय समावेशन के साथ महिलाओं की बदलती आर्थिक भूमिका को भी दिखाता है. उनका कहना है कि ग्रामीण महिलाओं की भूमिका लंबे समय से परिवार की आर्थिक जरूरतों को संभालने में रही है, लेकिन अब वही जिम्मेदारी उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के करीब ला रही है.
अजीत कुमार सिंह के अनुसार, महिलाओं के लिए CSP मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें अपने समुदाय में बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने और दूसरों को जोड़ने का अवसर मिलता है. स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिला CSPs बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के साथ महिलाओं को अपनी आय और वित्तीय निर्णयों से जोड़ने में भी मदद कर सकती हैं.
CSP के जरिए महिलाओं की आर्थिक भूमिका में बदलाव
विभवंगल अनुकूलरा प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ मौर्य कहते हैं, "कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) ऑपरेटर के तौर पर काम करने वाली महिलाओं का उदाहरण दिखाता है कि महिलाएं फाइनेंशियल सिस्टम में अलग-अलग तरीकों से कैसे काम करती हैं. घर की जिम्मेदारियों की वजह से, ज़्यादातर महिलाओं के लिए घर के बाहर फाइनेंशियल ज़िम्मेदारियां संभालना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन अब एक साफ़ बदलाव दिख रहा है, जिसमें महिलाएं अपनी फाइनेंशियल और दूसरी ज़िम्मेदारियों को एक साथ निभा रही हैं."
वह आगे कहते हैं, "CSP के तौर पर, महिलाएं कमाई कर सकती हैं और अपने समुदाय में बैंकिंग सेवाएँ दे सकती हैं. चूंकि इनमें से ज़्यादातर महिलाएं ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से आती हैं, इसलिए CSP बनने से उन्हें घर में पैसे से जुड़े फ़ैसले लेने का मौका मिलता है और साथ ही उन्हें यह जानकारी भी मिलती है कि फाइनेंशियल सिस्टम और अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है."
सिद्धार्थ मौर्य के मुताबिक, "यह साफ़ है कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सिर्फ़ कमाई करने से कहीं ज़्यादा है. महिला CSPs, महिलाओं के फाइनेंशियल समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण को हासिल करने में निश्चित रूप से अहम भूमिका निभा रही हैं."
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में बैंक खाता रखने वाली महिलाओं की संख्या काफी बढ़ चुकी है, लेकिन डिजिटल वित्तीय सेवाओं के इस्तेमाल में अभी भी लैंगिक अंतर मौजूद है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिला CSPs बैंकिंग सेवाओं और उन महिलाओं के बीच संपर्क का माध्यम बन सकती हैं, जो तकनीक या औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से अभी पूरी तरह परिचित नहीं हैं.
पैसों के प्रबंधन से वित्तीय सेवा तक
पीआरपी ग्रुप की अकाउंट डायरेक्टर प्रेरणा दलाकोटी** महिलाओं की इस भूमिका को घर में निभाई जाने वाली पारंपरिक वित्तीय जिम्मेदारियों से जोड़कर देखती हैं. वह कहती हैं, "सच कहूं तो महिलाएं हमेशा से ही पैसों का हिसाब-किताब रखने में माहिर रही हैं, बस हमने कभी इसे इस नजरिए से नहीं देखा. घर में अक्सर महिला ही जानती है कि कितने पैसे बचे हैं, कौन-सा बिल पहले भरना है और महीने के अंत में जब पैसों की तंगी हो, तो कहां खर्च कम करना है. यह अपने आप में एक बड़ा हुनर है."
वह कहती हैं, "इसलिए जब मैं महिलाओं को CSP (ग्राहक सेवा केंद्र) के रूप में काम करते देखती हूं, तो यह मुझे बिल्कुल स्वाभाविक लगता है. वे अपनी कमाई कर रही हैं, अपने परिवार का सहारा बन रही हैं और आसपास के लोग भी खाता खुलवाने, पैसे जमा करने या भुगतान से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास आते हैं."
दलाकोटी के मुताबिक, "आज जब बैंकिंग सेवाएं तेजी से मोबाइल और डिजिटल माध्यमों पर आ रही हैं, तो ये महिलाएं गांवों और कॉलोनियों में ही लोगों को ये सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं. खासकर उन लोगों को, जो शायद कभी बैंक की शाखा तक नहीं गए हों."
वह आगे कहती हैं, "इस बदलाव का असर उन महिलाओं के आत्मविश्वास में भी साफ दिखाई देता है. जब लोग अपने पैसों से जुड़े कामों के लिए उन पर भरोसा करते हैं और बार-बार उनके पास आते हैं, तो उनका खुद पर विश्वास और भी बढ़ता है. मेरे लिए यह कमाई जितना ही महत्वपूर्ण है. सबसे बड़ी बात यह है कि अब उनके पास अपनी कमाई है, अपनी पहचान है और कुछ ऐसा है, जिस पर वे अपना अधिकार महसूस करती हैं."
घरेलू जिम्मेदारी से सामुदायिक वित्तीय भूमिका तक
प्रेरणा दलाकोटी कहती हैं, "महिलाएं लंबे समय से परिवार की घरेलू और वित्तीय जरूरतों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं. आज महिला CSPs के रूप में वे इस जिम्मेदारी को अपने घर की चारदीवारी से आगे बढ़ाकर पूरे समुदाय की वित्तीय जरूरतों तक ले जा रही हैं."
वह आगे कहती हैं, "एक CSP के तौर पर वे सिर्फ बैंकिंग सेवाओं को लोगों के करीब नहीं ला रहीं, बल्कि महिलाओं, बुजुर्गों और वित्तीय रूप से वंचित वर्गों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं."
उनके मुताबिक, "इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की पहचान और आत्मविश्वास दोनों का विस्तार हो रहा है. जो महिलाएं पहले मुख्य रूप से अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के लिए जानी जाती थीं, वे आज अपने समुदाय में एक भरोसेमंद वित्तीय सेवा प्रदाता और आर्थिक रूप से सक्रिय सदस्य के रूप में पहचान बना रही हैं." दलाकोटी कहती हैं, "महिला CSPs का बढ़ता योगदान वित्तीय समावेशन के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है."
घरेलू अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई में सुधार के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ऊंची ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और सख्त मौद्रिक परिस्थितियां शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव डाल सकती हैं. मोतीलाल ओसवाल ने इक्विटी पर न्यूट्रल रुख बरकरार रखते हुए मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के शेयर बाजार के सामने मजबूत घरेलू फंडामेंटल और चुनौतीपूर्ण वैश्विक मैक्रो माहौल के बीच खींचतान बढ़ रही है. मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के मुताबिक, आर्थिक विकास और कॉरपोरेट कमाई में तेजी आई है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और मौद्रिक परिस्थितियों के सख्त होने से शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है.
100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म के मुताबिक, सितंबर में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई. वहीं, प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 3.75-4 फीसदी कर दिया. 2023 के बाद यह फेड की पहली दर वृद्धि थी. अमेरिका में महंगाई अभी भी फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है.
भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत
वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद यानी Real GDP की वृद्धि दर सालाना आधार पर बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, खपत, निवेश और सर्विसेज सेक्टर का योगदान रहा. इस दौरान निजी खपत में 7.1 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण यानी Gross Fixed Capital Formation 11.9 फीसदी बढ़ा.
कॉरपोरेट कमाई में भी सुधार
कंपनियों की कमाई के मोर्चे पर भी सुधार देखने को मिला है. पहली तिमाही में Nifty 50 कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी बढ़ा. वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई उम्मीदों से बेहतर बनी रही. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) यूनिवर्स में अपग्रेड और डाउनग्रेड का अनुपात 1.5 गुना रहा. यह पिछले 22 तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है.
मजबूत कमाई से बाजार का री-रेटिंग जरूरी नहीं
हालांकि, फर्म ने सावधान किया है कि कंपनियों की कमाई में सुधार अपने आप पूरे बाजार के वैल्यूएशन में व्यापक री-रेटिंग में तब्दील नहीं हो सकता. घरेलू निवेश का मजबूत प्रवाह लगातार बढ़ रही इक्विटी सप्लाई में समाहित हो रहा है.
IPO, ब्लॉक और बल्क डील, प्रमोटर सेल और अन्य लेनदेन के जरिए बाजार में शेयरों की आपूर्ति बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के बीच केवल IPO के जरिए करीब ₹46,000 करोड़ जुटाए गए. इसके अलावा नए इश्यू की संभावित पाइपलाइन भी काफी बड़ी है. मोतीवाल ओसवाल के मुताबिक, बढ़ती इक्विटी सप्लाई और ऊंचे वैल्यूएशन के इस माहौल में शेयर और सेक्टर का चयन पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
इक्विटी पर न्यूट्रल रुख, मिडकैप-स्मॉलकैप पसंद
फर्म ने इक्विटी पर अपना न्यूट्रल रुख बरकरार रखा है और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है. Nifty 50 फिलहाल अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले 18.3 गुना के वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है. यह उसके 20.9 गुना के ऐतिहासिक औसत से करीब 12 फीसदी कम है.
दूसरी ओर, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत से अभी भी प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, हालांकि सितंबर 2024 के स्तर की तुलना में यह प्रीमियम कम हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में बाजार न तो इतना सस्ता है कि आक्रामक खरीदारी की जरूरत हो और न ही इतना महंगा है कि पूरी तरह सतर्क रुख अपनाया जाए. ऐसे में व्यापक बाजार के बजाय अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.
फिक्स्ड इनकम में 'Higher for Longer' यील्ड का अनुमान
फिक्स्ड इनकम के मोर्चे पर मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ का अनुमान है कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दर और यील्ड नया सामान्य स्तर बन सकता है. भारत की 10 साल की सरकारी सिक्योरिटी की यील्ड करीब 7 फीसदी की ओर बढ़ी है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक मौद्रिक नीति के सख्त होने की उम्मीदों और महंगाई के जोखिम के बीच यील्ड कर्व में भी तेजी आई है.
फर्म अवधि आधारित रणनीति के बजाय एक्यूरल स्ट्रेटर्जीज को प्राथमिकता दे रही है. इसमें Private Credit, High-Yield Non-Convertible Debentures (NCDs) और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) जैसे आय देने वाले एसेट शामिल हैं.
सोने को चांदी पर प्राथमिकता
कीमती धातुओं पर फर्म का कुल रुख Neutral है, लेकिन वह सोने को चांदी की तुलना में प्राथमिकता देती है. अगस्त में सोने की कीमत अमेरिकी डॉलर में 13 फीसदी बढ़कर करीब 4,563 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई. इसी दौरान ग्लोबल गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में करीब 18 अरब डॉलर का निवेश आया. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी सोने के लिए एक संरचनात्मक समर्थन बनी हुई है. चीन ने अगस्त में 20 टन सोना खरीदा और लगातार 22वें महीने अपनी खरीदारी जारी रखी.
'चयनात्मक निवेश पर ध्यान जरूरी'
मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीपन रॉय ने कहा कि वैश्विक जोखिमों और भारत के घरेलू फंडामेंटल के बीच अंतर बढ़ने से निवेश में चयनात्मकता का महत्व बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि खपत, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश में वृद्धि व्यापक हो रही है और कंपनियों की कमाई के अनुमान में भी सुधार हो रहा है. ऐसे में बाजार में निवेश बढ़ाने के बजाय सही सेक्टर और कंपनियों का चयन अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
Jio के ₹13 लाख करोड़. 30 दिनों की समयसीमा में तेजी से आगे बढ़ रही ट्रंप ट्रेड डील. रिकॉर्ड FII शॉर्ट्स. अब साल के दो सबसे बड़े संभावित मार्केट ट्रिगर एक ही समय में दलाल स्ट्रीट की ओर बढ़ रहे हैं. शॉर्ट पोजीशन? 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
क्यों यह बाजार को बदल सकता है
बाजार नीचे है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है, मंदड़ियों ने शॉर्ट किया है और अब अंबानी आ रहे हैं.
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस ग्रुप जियो (Jio) को दलाल स्ट्रीट पर ला रहा है और इसके साथ इतनी बड़ी संख्या आ रही है कि यह कॉरपोरेट इंडिया का नक्शा बदल सकती है. चर्चा में चल रहे प्राइस बैंड पर जियो की लिस्टिंग के समय वैल्यूएशन करीब ₹13 लाख करोड़ हो सकती है और कीमत में बढ़ोतरी बाजार पूंजीकरण के मामले में एक बड़ी छलांग हो सकती है, इस मामले से परिचित लोगों के मुताबिक. जियो को रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोड़ दें तो एक ही परिवार के नियंत्रण वाला एक कारोबारी समूह ₹30 लाख करोड़ से अधिक की लिस्टेड मार्केट वैल्यू के साथ खड़ा हो सकता है. यह भारतीय शेयर बाजारों पर संपत्ति का ऐसा पहाड़ होगा, जो अंबानी परिवार को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देगा. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी अधिक हो सकता है.
₹30 लाख करोड़, एक परिवार, एक समूह
इस मेगा IPO को दुनिया तक पहुंचाने वाले लोग कॉन्फ्रेंस रूम के दरवाजों के पीछे छिपे बैंकर नहीं हैं. आकाश, ईशा और अनंत अंबानी, भारत के सबसे शक्तिशाली कारोबारी साम्राज्य के तीन उत्तराधिकारी, खुद सिंगापुर से खाड़ी और फिर अमेरिका और लंदन तक यात्रा कर रहे हैं और दुनिया के सबसे बड़े निवेश फंड्स को जियो के बारे में बता रहे हैं.
वे यह ऐसे समय में कर रहे हैं जब पिछले नौ महीनों में भारत के शेयर बाजार को हर तरफ से दबाव का सामना करना पड़ा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹2.4 लाख करोड़ निकाले हैं, जो पूरे 2025 में उनकी कुल बिकवाली से कहीं अधिक है. रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 96 के स्तर पर है. विदेशी फंड लगातार 330 से अधिक कारोबारी सत्रों से Nifty फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट हैं, जो रिकॉर्ड में सबसे लंबी ऐसी अवधि है. मंदड़ियों ने अपनी पोजीशन बनाई है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है और बाजार गिरा है. अब भारत का सबसे बड़ा IPO इसके बीच में सीधे प्रवेश कर रहा है.
और Jio सिर्फ बम नंबर 1 है.
बम नंबर 2 वॉशिंगटन में है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सप्ताह 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका जा रहे हैं और उनके सिर पर एक समयसीमा चल रही है. 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए, जो उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है. 30 दिन की समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को टैरिफ पर फैसला करना होगा. इस समयसीमा ने धीमी गति से चल रही बातचीत को एक दौड़ में बदल दिया है और बातचीत से परिचित लोगों के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बातचीत शुरू होने के बाद किसी भी समय की तुलना में अब अंतिम चरण के करीब है.
बातचीत में सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, व्यापक समझौता प्रभावी रूप से हो चुका है और दोनों पक्ष अब अंतिम रूप दे रहे हैं. भारत और अमेरिका सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकमत हैं: भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों, टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर मिलेगी. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली की इस प्रमुख मांग पर भी सहमति जताई है कि समझौता टिकाऊ होना चाहिए. आसान शब्दों में, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसकी शर्तों में बार-बार बदलाव नहीं होना चाहिए, ताकि भारतीय निर्यातकों को व्हाइट हाउस की हर नई टैरिफ घोषणा के साथ अनिश्चितता का सामना न करना पड़े.
अगर समझौता होता है, तो यह ऐसे बाजार में नहीं आएगा जो जश्न मना रहा हो. यह ऐसे बाजार में आएगा जो अच्छी खबर के लिए बेताब है और यही आने वाले हफ्तों को असाधारण बनाता है. यह एक ट्रिगर नहीं है और न ही बाजार से जुड़ी सामान्य खबरों के दो हिस्से हैं. यह लगभग एक साथ अंबानी और ट्रंप का ऐसे बाजार में आना है, जहां शॉर्ट पोजीशन बहुत ज्यादा है. जियो वैश्विक निवेशकों को फिर से बाजार में ला सकता है. एक व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ की कहानी को बदल सकता है. और शॉर्ट सेलर्स पहले से उसी जगह बैठे हैं, जहां उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है.
बाजार किसी अफवाह को नजरअंदाज कर सकता है. वह ₹13 लाख करोड़ के IPO को नजरअंदाज नहीं कर सकता. वह अमेरिकी व्यापार समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकता. और निश्चित तौर पर दोनों के एक साथ आने को नजरअंदाज नहीं कर सकता. Nifty का प्राइस-टू-बुक 2.75 है, जो 2020 के बाद सबसे निचला स्तर है. प्राइस-टू-अर्निंग्स 19.26 पर निचले स्तर के करीब है.
दोनों प्रक्रियाओं के करीब लोगों का मानना है कि यह संयोजन बाजार की धारणा में वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी रिकवरी को जन्म दे सकता है. बाजार ने 2026 में भारत से दूरी बनाई है. अब भारत के पास पैसे को वापस बुलाने के दो बड़े कारण हैं और दोनों दिवाली के दीये जलने से पहले आने वाले हैं.
अंबानी बम
जियो का रोडशो पहले ही शुरू हो चुका है और जिस पैमाने पर इसे पेश किया जा रहा है, उसे समझना भी मुश्किल है. जियो प्लेटफॉर्म्स को 28 अगस्त को SEBI की मंजूरी मिल गई थी, जिसमें 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की अनुमति है और बैंकरों को उम्मीद है कि इससे करीब ₹37,800 करोड़ जुटाए जाएंगे. इससे 2024 में Hyundai Motor India द्वारा बनाए गए करीब ₹27,870 करोड़ के रिकॉर्ड को तोड़ा जा सकेगा और यह NSE की ओर से तैयार किए जा रहे ₹31,000 करोड़ के इश्यू से भी बड़ा होगा. प्राप्त राशि में से करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा.
योजना से परिचित लोगों का हवाला देते हुए आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस प्राइस बैंड पर चर्चा हो रही है वह करीब ₹1,350 से ₹1,450 प्रति शेयर है. इससे जियो का पोस्ट-इश्यू वैल्यूएशन बैंड के निचले स्तर पर करीब ₹12.4 लाख करोड़ और ऊपरी स्तर पर ₹13.4 लाख करोड़ हो जाता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू करीब ₹17.3 लाख करोड़ है, जिसका मतलब है कि जियो अपने पैरेंट की करीब तीन-चौथाई वैल्यू के साथ ही एक्सचेंज पर आ जाएगा.
बच्चा पैरेंट से बड़ा हो सकता है
और जियो बाजार में सिर्फ एक और टेलीकॉम स्टॉक के रूप में नहीं आ रहा है. यह दुनिया का एकमात्र ऑपरेटर है जिसके पास अपनी एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक है, जिसे 6,817 पेटेंट आवेदनों का समर्थन प्राप्त है. इसके 524 मिलियन ग्राहक हैं, जिनमें से 268 मिलियन 5G पर हैं. चीन के बाहर किसी एक देश में यह सबसे बड़ा 5G बेस है. यह JioAICloud चलाता है, रिलायंस जामनगर में गीगावाट स्तर के AI डेटा सेंटर बना रहा है और जियो भारत के लिए एक सॉवरेन लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की संभावना का आकलन कर रहा है. FY26 में इसने ₹1,49,759 करोड़ के राजस्व पर ₹30,053 करोड़ का मुनाफा कमाया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 50 फीसदी से अधिक रहा. इसलिए बाजार जियो की जो कीमत तय करेगा, वह सिर्फ IPO की कीमत नहीं होगी. यह इस बात पर दुनिया का फैसला होगा कि अंबानी के डिजिटल साम्राज्य की कीमत कितनी है.
इस बार अंबानी के बच्चे निवेशकों के सामने खड़े हैं. जून की AGM में मुकेश अंबानी ने आकाश, ईशा और अनंत को IPO प्रक्रिया के केंद्र में रखा और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के मुताबिक, मुकेश अंबानी और उनके लंबे समय से सहयोगी मनोज मोदी अब पीछे से पूरी प्रक्रिया को संभाल रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में सूत्रों के मुताबिक, इन भाई-बहनों ने अबू धाबी के Mubadala और सऊदी अरब के Public Investment Fund सहित क्षेत्र के बड़े निवेशकों से मुलाकात की है. दोनों ने 2020 में जियो की ऐतिहासिक फंडरेजिंग के दौरान इसमें निवेश किया था और दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन फंड्स ने इसमें मजबूत रुचि दिखाई है. Meta और Google से लेकर KKR, Silver Lake, Mubadala और PIF तक जियो के किसी भी प्रमुख निवेशक ने IPO में एक भी शेयर नहीं बेचने का फैसला किया है.
लिस्टिंग 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली के आसपास होने की उम्मीद है और एंकर बुक के कुछ ही हफ्तों में खुलने की संभावना है. ऐसे में अक्टूबर रिलायंस का महीना बनता नजर आ रहा है. दलाल स्ट्रीट के पुराने जानकार जानते हैं कि इसका क्या मतलब है: जब रिलायंस चलता है तो बाजार चलता है. विदेशी फंड जिन्होंने इस साल भारत से डॉलर निकाले हैं, उन्हें जियो में बोली लगाने के लिए पैसा वापस लाना होगा और यही वह फ्लो है जिसका कमजोर रुपया इंतजार कर रहा है.
एक IPO, एक उत्तराधिकार, एक ग्लोबल रोडशो, लिक्विडिटी का एक बड़ा नया स्रोत, सब एक साथ
ट्रंप बम: 30 दिनों की घड़ी
दूसरा बम वॉशिंगटन में तैयार हो रहा है और टाइमर सभी को दिखाई दे रहा है. 18 सितंबर को ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित Sanctioning Russia and Iran Act व्हाइट हाउस को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का हथियार देता है और भारत सीधे इसकी जद में है. 18 अक्टूबर की समयसीमा वह तारीख है जब अमेरिका को इस शक्ति के इस्तेमाल पर फैसला करना होगा और दोनों पक्ष चाहते हैं कि इस तलवार के गिरने से पहले समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएं.
यही वजह है कि गोयल की यात्रा इतनी महत्वपूर्ण है. वह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को मिलवॉकी में G20 Trade Ministerial में शामिल होंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. सरकार के अपने बयान के मुताबिक, लक्ष्य अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है. पिछले सप्ताह गोयल ने समझौते को लगभग पूरा बताया था और एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे 90 फीसदी से अधिक पूरा बताया. सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, दोनों पक्ष एकमत हैं और अमेरिकी पक्ष के साथ बैठकें अच्छी रही हैं. गोयल G20 बैठक के दौरान संवेदनशील वीजा मुद्दे को भी उठा सकते हैं, जबकि भारत वॉशिंगटन से इस बात की प्रतिबद्धता मांग रहा है कि समझौता कायम रहेगा और बाद में इसे वापस नहीं लिया जाएगा.
सूत्रों से सामने आने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर पसंदीदा टैरिफ दर मिलेगी: टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम से बेहतर, 24 जुलाई से लागू Section 301 शुल्क के तहत भारत पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क है, जो बांग्लादेश के बराबर है. बांग्लादेश को टेक्सटाइल कोटा में राहत भी मिलती है, जबकि वियतनाम और चीन पर 12.5 फीसदी शुल्क है और चीन पर इसके अलावा पुराने Section 301 शुल्क भी लागू हैं. अगर समझौते के बाद भारत इन तीनों से नीचे आ जाता है तो भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स को ऐसे बाजार में कीमत का फायदा मिलेगा, जिसने 2025 में भारत से 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा था.
18 सितंबर: कानून पर हस्ताक्षर, 18 अक्टूबर: समयसीमा, 3 नवंबर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, 8 नवंबर: दिवाली
एक ऐसा समझौता जिसमें सभी जीतते हैं
इस समझौते के पिछले झूठे संकेतों की तुलना में अधिक संभावित होने की वजह यह है कि दोनों नेताओं को इसकी जरूरत है और अभी जरूरत है. 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के साथ ट्रंप मतदाताओं के सामने एक बड़ी व्यापारिक जीत पेश करना चाहते हैं और वह दावा कर सकेंगे कि रूस प्रतिबंध कानून की तलवार ने भारत को बातचीत की मेज पर ला दिया. भारत में मोदी सरकार देश को बता सकेगी कि किसानों या डेयरी पर समझौता किए बिना भारत ने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश से बेहतर टैरिफ दर हासिल की है, जिससे यह एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी समझौता बनता है. जब दोनों पक्षों को एक ही हेडलाइन की इतनी जरूरत होती है, तो वह हेडलाइन आमतौर पर सामने आ जाती है.
330 दिनों के शॉर्ट्स
विदेशी संस्थागत निवेशक 13 मई 2025 से हर एक कारोबारी दिन Nifty इंडेक्स फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट रहे हैं. यह 330 से अधिक सत्रों की अवधि है और पिछले रिकॉर्ड से दोगुने से भी अधिक है. उनका लॉन्ग रेशियो घटकर करीब 11 फीसदी रह गया है, यानी हर एक लॉन्ग के मुकाबले करीब नौ शॉर्ट बेट हैं. सोमवार को उनके पास करीब 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की नेट शॉर्ट पोजीशन थी. मार्केट टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉट साइज के हिसाब से समायोजित करने पर यह अब तक की सबसे बड़ी पोजीशन है. सितंबर के पहले 11 कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹14,477 करोड़ की बिकवाली की.
इसके बावजूद बाजार नहीं टूटा, क्योंकि घरेलू संस्थानों ने विदेशी निवेशकों की लगभग पूरी बिकवाली को सोख लिया. 1 से 25 सितंबर के बीच घरेलू फंड्स ने ₹52,617 करोड़ के शेयर खरीदे, जो विदेशी बिकवाली से करीब तीन गुना अधिक है. इस दौरान भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी घटकर करीब 14.7 फीसदी रह गई, जो 14 वर्षों का निचला स्तर है. न तो बाजार में पूरी तरह बिकवाली हुई है और न ही जबरन शॉर्ट कवरिंग, जिसका मतलब है कि शॉर्ट पोजीशन अभी भी मजबूती से बनी हुई हैं. इतनी ज्यादा भीड़ वाली पोजीशन को खत्म होने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत नहीं है. इसे एक ट्रिगर की जरूरत है और अक्टूबर एक साथ दो ट्रिगर दे सकता है.
टैक्स के वाइल्ड कार्ड
एक और कार्ड टैक्स का है और यह सभी में सबसे बड़ा हो सकता है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली इक्विटी मार्केट टैक्स में बदलाव पर विचार कर रही है. Securities Transaction Tax और Long-Term Capital Gains में बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है. घोषणा फरवरी 2027 के बजट में या उससे पहले भी हो सकती है. इसकी तैयारी पहले से की जा रही है. अगस्त में सरकार और SEBI ने विदेशी फंड्स के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने लिस्टेड शेयरों पर LTCG खत्म करने और STT कम करने की मांग की थी. जून में सरकार ने बजट का इंतजार नहीं किया और एक अध्यादेश के जरिए सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन और विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर दिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य डॉलर आकर्षित करना और रुपये को समर्थन देना था. भारी उधारी के चलते सरकार कमजोर रुपये का जोखिम नहीं उठा सकती और इक्विटी टैक्स में राहत बचा हुआ सबसे स्पष्ट विकल्प है. अगर यह कदम आता है तो यह एक दशक में भारतीय शेयरों के लिए सबसे मजबूत संरचनात्मक तेजी का आधार हो सकता है.
दिवाली का फैसला
2026 के अधिकांश समय में भारत वह बाजार रहा है जिसे दुनिया शॉर्ट करना पसंद करती रही है. Nifty सितंबर 2024 के शिखर से करीब 13 फीसदी नीचे है, विदेशी पूंजी रिकॉर्ड गति से बाहर गई है और रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में रहा है. यही वजह है कि आने वाले कुछ सप्ताह इतने महत्वपूर्ण हैं. जब पोजीशन इतनी एकतरफा हो, तो बाजार को दस चीजों के सही होने की जरूरत नहीं होती. उसे एक ही समय में कुछ बड़ी चीजों के सही होने की जरूरत होती है.
जोखिम वास्तविक हैं, व्यापार वार्ता पहले भी कई बार अंतिम चरण के करीब पहुंचकर अटक चुकी है, जियो का प्राइस बैंड और तारीखें अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुई हैं और ईरान वार्ता सार्वजनिक रूप से अभी भी गतिरोध में है.
लेकिन कैलेंडर शायद ही कभी इस तरह एक साथ आया हो: इस सप्ताह गोयल अमेरिका में हैं, 18 अक्टूबर को रूस प्रतिबंधों की समयसीमा है, इसके बाद आने वाले हफ्तों में जियो की एंकर बुक, 3 नवंबर को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और धनतेरस तथा दिवाली के आसपास जियो की लिस्टिंग
एक बम मुंबई से आ रहा है और दूसरा वॉशिंगटन से. अगर दोनों समय पर फटते हैं, तो संवत 2083 की शुरुआत उस धमाके के साथ हो सकती है जिसका दलाल स्ट्रीट पूरे साल इंतजार कर रहा है.
(यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है. IPO से जुड़ी जानकारी, जिसमें प्राइस बैंड और तारीखें शामिल हैं, कंपनी के अंतिम ऑफर दस्तावेजों के अधीन हैं.)
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)