प्री-दिवाली धमाका: अंबानी की ₹13 लाख करोड़ की जियो और ट्रंप डील दलाल स्ट्रीट की ओर

Jio के ₹13 लाख करोड़. 30 दिनों की समयसीमा में तेजी से आगे बढ़ रही ट्रंप ट्रेड डील. रिकॉर्ड FII शॉर्ट्स. अब साल के दो सबसे बड़े संभावित मार्केट ट्रिगर एक ही समय में दलाल स्ट्रीट की ओर बढ़ रहे हैं. शॉर्ट पोजीशन? 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स.

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Tuesday, 29 September, 2026
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पलक शाह

क्यों यह बाजार को बदल सकता है

बाजार नीचे है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है, मंदड़ियों ने शॉर्ट किया है और अब अंबानी आ रहे हैं.

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस ग्रुप जियो (Jio) को दलाल स्ट्रीट पर ला रहा है और इसके साथ इतनी बड़ी संख्या आ रही है कि यह कॉरपोरेट इंडिया का नक्शा बदल सकती है. चर्चा में चल रहे प्राइस बैंड पर जियो की लिस्टिंग के समय वैल्यूएशन करीब ₹13 लाख करोड़ हो सकती है और कीमत में बढ़ोतरी बाजार पूंजीकरण के मामले में एक बड़ी छलांग हो सकती है, इस मामले से परिचित लोगों के मुताबिक. जियो को रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोड़ दें तो एक ही परिवार के नियंत्रण वाला एक कारोबारी समूह ₹30 लाख करोड़ से अधिक की लिस्टेड मार्केट वैल्यू के साथ खड़ा हो सकता है. यह भारतीय शेयर बाजारों पर संपत्ति का ऐसा पहाड़ होगा, जो अंबानी परिवार को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देगा. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी अधिक हो सकता है.

₹30 लाख करोड़, एक परिवार, एक समूह

इस मेगा IPO को दुनिया तक पहुंचाने वाले लोग कॉन्फ्रेंस रूम के दरवाजों के पीछे छिपे बैंकर नहीं हैं. आकाश, ईशा और अनंत अंबानी, भारत के सबसे शक्तिशाली कारोबारी साम्राज्य के तीन उत्तराधिकारी, खुद सिंगापुर से खाड़ी और फिर अमेरिका और लंदन तक यात्रा कर रहे हैं और दुनिया के सबसे बड़े निवेश फंड्स को जियो के बारे में बता रहे हैं.

वे यह ऐसे समय में कर रहे हैं जब पिछले नौ महीनों में भारत के शेयर बाजार को हर तरफ से दबाव का सामना करना पड़ा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹2.4 लाख करोड़ निकाले हैं, जो पूरे 2025 में उनकी कुल बिकवाली से कहीं अधिक है. रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 96 के स्तर पर है. विदेशी फंड लगातार 330 से अधिक कारोबारी सत्रों से Nifty फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट हैं, जो रिकॉर्ड में सबसे लंबी ऐसी अवधि है. मंदड़ियों ने अपनी पोजीशन बनाई है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है और बाजार गिरा है. अब भारत का सबसे बड़ा IPO इसके बीच में सीधे प्रवेश कर रहा है.

और Jio सिर्फ बम नंबर 1 है.

बम नंबर 2 वॉशिंगटन में है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सप्ताह 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका जा रहे हैं और उनके सिर पर एक समयसीमा चल रही है. 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए, जो उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है. 30 दिन की समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को टैरिफ पर फैसला करना होगा. इस समयसीमा ने धीमी गति से चल रही बातचीत को एक दौड़ में बदल दिया है और बातचीत से परिचित लोगों के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बातचीत शुरू होने के बाद किसी भी समय की तुलना में अब अंतिम चरण के करीब है.

बातचीत में सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, व्यापक समझौता प्रभावी रूप से हो चुका है और दोनों पक्ष अब अंतिम रूप दे रहे हैं. भारत और अमेरिका सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकमत हैं: भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों, टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर मिलेगी. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली की इस प्रमुख मांग पर भी सहमति जताई है कि समझौता टिकाऊ होना चाहिए. आसान शब्दों में, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसकी शर्तों में बार-बार बदलाव नहीं होना चाहिए, ताकि भारतीय निर्यातकों को व्हाइट हाउस की हर नई टैरिफ घोषणा के साथ अनिश्चितता का सामना न करना पड़े.

अगर समझौता होता है, तो यह ऐसे बाजार में नहीं आएगा जो जश्न मना रहा हो. यह ऐसे बाजार में आएगा जो अच्छी खबर के लिए बेताब है और यही आने वाले हफ्तों को असाधारण बनाता है. यह एक ट्रिगर नहीं है और न ही बाजार से जुड़ी सामान्य खबरों के दो हिस्से हैं. यह लगभग एक साथ अंबानी और ट्रंप का ऐसे बाजार में आना है, जहां शॉर्ट पोजीशन बहुत ज्यादा है. जियो वैश्विक निवेशकों को फिर से बाजार में ला सकता है. एक व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ की कहानी को बदल सकता है. और शॉर्ट सेलर्स पहले से उसी जगह बैठे हैं, जहां उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है.

बाजार किसी अफवाह को नजरअंदाज कर सकता है. वह ₹13 लाख करोड़ के IPO को नजरअंदाज नहीं कर सकता. वह अमेरिकी व्यापार समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकता. और निश्चित तौर पर दोनों के एक साथ आने को नजरअंदाज नहीं कर सकता. Nifty का प्राइस-टू-बुक 2.75 है, जो 2020 के बाद सबसे निचला स्तर है. प्राइस-टू-अर्निंग्स 19.26 पर निचले स्तर के करीब है.

दोनों प्रक्रियाओं के करीब लोगों का मानना है कि यह संयोजन बाजार की धारणा में वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी रिकवरी को जन्म दे सकता है. बाजार ने 2026 में भारत से दूरी बनाई है. अब भारत के पास पैसे को वापस बुलाने के दो बड़े कारण हैं और दोनों दिवाली के दीये जलने से पहले आने वाले हैं.

अंबानी बम

जियो का रोडशो पहले ही शुरू हो चुका है और जिस पैमाने पर इसे पेश किया जा रहा है, उसे समझना भी मुश्किल है. जियो प्लेटफॉर्म्स को 28 अगस्त को SEBI की मंजूरी मिल गई थी, जिसमें 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की अनुमति है और बैंकरों को उम्मीद है कि इससे करीब ₹37,800 करोड़ जुटाए जाएंगे. इससे 2024 में Hyundai Motor India द्वारा बनाए गए करीब ₹27,870 करोड़ के रिकॉर्ड को तोड़ा जा सकेगा और यह NSE की ओर से तैयार किए जा रहे ₹31,000 करोड़ के इश्यू से भी बड़ा होगा. प्राप्त राशि में से करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा.

योजना से परिचित लोगों का हवाला देते हुए आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस प्राइस बैंड पर चर्चा हो रही है वह करीब ₹1,350 से ₹1,450 प्रति शेयर है. इससे जियो का पोस्ट-इश्यू वैल्यूएशन बैंड के निचले स्तर पर करीब ₹12.4 लाख करोड़ और ऊपरी स्तर पर ₹13.4 लाख करोड़ हो जाता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू करीब ₹17.3 लाख करोड़ है, जिसका मतलब है कि जियो अपने पैरेंट की करीब तीन-चौथाई वैल्यू के साथ ही एक्सचेंज पर आ जाएगा.

बच्चा पैरेंट से बड़ा हो सकता है

और जियो बाजार में सिर्फ एक और टेलीकॉम स्टॉक के रूप में नहीं आ रहा है. यह दुनिया का एकमात्र ऑपरेटर है जिसके पास अपनी एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक है, जिसे 6,817 पेटेंट आवेदनों का समर्थन प्राप्त है. इसके 524 मिलियन ग्राहक हैं, जिनमें से 268 मिलियन 5G पर हैं. चीन के बाहर किसी एक देश में यह सबसे बड़ा 5G बेस है. यह JioAICloud चलाता है, रिलायंस जामनगर में गीगावाट स्तर के AI डेटा सेंटर बना रहा है और जियो भारत के लिए एक सॉवरेन लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की संभावना का आकलन कर रहा है. FY26 में इसने ₹1,49,759 करोड़ के राजस्व पर ₹30,053 करोड़ का मुनाफा कमाया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 50 फीसदी से अधिक रहा. इसलिए बाजार जियो की जो कीमत तय करेगा, वह सिर्फ IPO की कीमत नहीं होगी. यह इस बात पर दुनिया का फैसला होगा कि अंबानी के डिजिटल साम्राज्य की कीमत कितनी है.

इस बार अंबानी के बच्चे निवेशकों के सामने खड़े हैं. जून की AGM में मुकेश अंबानी ने आकाश, ईशा और अनंत को IPO प्रक्रिया के केंद्र में रखा और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के मुताबिक, मुकेश अंबानी और उनके लंबे समय से सहयोगी मनोज मोदी अब पीछे से पूरी प्रक्रिया को संभाल रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में सूत्रों के मुताबिक, इन भाई-बहनों ने अबू धाबी के Mubadala और सऊदी अरब के Public Investment Fund सहित क्षेत्र के बड़े निवेशकों से मुलाकात की है. दोनों ने 2020 में जियो की ऐतिहासिक फंडरेजिंग के दौरान इसमें निवेश किया था और दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन फंड्स ने इसमें मजबूत रुचि दिखाई है. Meta और Google से लेकर KKR, Silver Lake, Mubadala और PIF तक जियो के किसी भी प्रमुख निवेशक ने IPO में एक भी शेयर नहीं बेचने का फैसला किया है.

लिस्टिंग 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली के आसपास होने की उम्मीद है और एंकर बुक के कुछ ही हफ्तों में खुलने की संभावना है. ऐसे में अक्टूबर रिलायंस का महीना बनता नजर आ रहा है. दलाल स्ट्रीट के पुराने जानकार जानते हैं कि इसका क्या मतलब है: जब रिलायंस चलता है तो बाजार चलता है. विदेशी फंड जिन्होंने इस साल भारत से डॉलर निकाले हैं, उन्हें जियो में बोली लगाने के लिए पैसा वापस लाना होगा और यही वह फ्लो है जिसका कमजोर रुपया इंतजार कर रहा है.

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ट्रंप बम: 30 दिनों की घड़ी

दूसरा बम वॉशिंगटन में तैयार हो रहा है और टाइमर सभी को दिखाई दे रहा है. 18 सितंबर को ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित Sanctioning Russia and Iran Act व्हाइट हाउस को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का हथियार देता है और भारत सीधे इसकी जद में है. 18 अक्टूबर की समयसीमा वह तारीख है जब अमेरिका को इस शक्ति के इस्तेमाल पर फैसला करना होगा और दोनों पक्ष चाहते हैं कि इस तलवार के गिरने से पहले समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएं.

यही वजह है कि गोयल की यात्रा इतनी महत्वपूर्ण है. वह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को मिलवॉकी में G20 Trade Ministerial में शामिल होंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. सरकार के अपने बयान के मुताबिक, लक्ष्य अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है. पिछले सप्ताह गोयल ने समझौते को लगभग पूरा बताया था और एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे 90 फीसदी से अधिक पूरा बताया. सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, दोनों पक्ष एकमत हैं और अमेरिकी पक्ष के साथ बैठकें अच्छी रही हैं. गोयल G20 बैठक के दौरान संवेदनशील वीजा मुद्दे को भी उठा सकते हैं, जबकि भारत वॉशिंगटन से इस बात की प्रतिबद्धता मांग रहा है कि समझौता कायम रहेगा और बाद में इसे वापस नहीं लिया जाएगा.

सूत्रों से सामने आने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर पसंदीदा टैरिफ दर मिलेगी: टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम से बेहतर, 24 जुलाई से लागू Section 301 शुल्क के तहत भारत पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क है, जो बांग्लादेश के बराबर है. बांग्लादेश को टेक्सटाइल कोटा में राहत भी मिलती है, जबकि वियतनाम और चीन पर 12.5 फीसदी शुल्क है और चीन पर इसके अलावा पुराने Section 301 शुल्क भी लागू हैं. अगर समझौते के बाद भारत इन तीनों से नीचे आ जाता है तो भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स को ऐसे बाजार में कीमत का फायदा मिलेगा, जिसने 2025 में भारत से 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा था.

18 सितंबर: कानून पर हस्ताक्षर, 18 अक्टूबर: समयसीमा, 3 नवंबर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, 8 नवंबर: दिवाली

एक ऐसा समझौता जिसमें सभी जीतते हैं

इस समझौते के पिछले झूठे संकेतों की तुलना में अधिक संभावित होने की वजह यह है कि दोनों नेताओं को इसकी जरूरत है और अभी जरूरत है. 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के साथ ट्रंप मतदाताओं के सामने एक बड़ी व्यापारिक जीत पेश करना चाहते हैं और वह दावा कर सकेंगे कि रूस प्रतिबंध कानून की तलवार ने भारत को बातचीत की मेज पर ला दिया. भारत में मोदी सरकार देश को बता सकेगी कि किसानों या डेयरी पर समझौता किए बिना भारत ने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश से बेहतर टैरिफ दर हासिल की है, जिससे यह एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी समझौता बनता है. जब दोनों पक्षों को एक ही हेडलाइन की इतनी जरूरत होती है, तो वह हेडलाइन आमतौर पर सामने आ जाती है.

330 दिनों के शॉर्ट्स

विदेशी संस्थागत निवेशक 13 मई 2025 से हर एक कारोबारी दिन Nifty इंडेक्स फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट रहे हैं. यह 330 से अधिक सत्रों की अवधि है और पिछले रिकॉर्ड से दोगुने से भी अधिक है. उनका लॉन्ग रेशियो घटकर करीब 11 फीसदी रह गया है, यानी हर एक लॉन्ग के मुकाबले करीब नौ शॉर्ट बेट हैं. सोमवार को उनके पास करीब 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की नेट शॉर्ट पोजीशन थी. मार्केट टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉट साइज के हिसाब से समायोजित करने पर यह अब तक की सबसे बड़ी पोजीशन है. सितंबर के पहले 11 कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹14,477 करोड़ की बिकवाली की.

इसके बावजूद बाजार नहीं टूटा, क्योंकि घरेलू संस्थानों ने विदेशी निवेशकों की लगभग पूरी बिकवाली को सोख लिया. 1 से 25 सितंबर के बीच घरेलू फंड्स ने ₹52,617 करोड़ के शेयर खरीदे, जो विदेशी बिकवाली से करीब तीन गुना अधिक है. इस दौरान भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी घटकर करीब 14.7 फीसदी रह गई, जो 14 वर्षों का निचला स्तर है. न तो बाजार में पूरी तरह बिकवाली हुई है और न ही जबरन शॉर्ट कवरिंग, जिसका मतलब है कि शॉर्ट पोजीशन अभी भी मजबूती से बनी हुई हैं. इतनी ज्यादा भीड़ वाली पोजीशन को खत्म होने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत नहीं है. इसे एक ट्रिगर की जरूरत है और अक्टूबर एक साथ दो ट्रिगर दे सकता है.

टैक्स के वाइल्ड कार्ड

एक और कार्ड टैक्स का है और यह सभी में सबसे बड़ा हो सकता है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली इक्विटी मार्केट टैक्स में बदलाव पर विचार कर रही है. Securities Transaction Tax और Long-Term Capital Gains में बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है. घोषणा फरवरी 2027 के बजट में या उससे पहले भी हो सकती है. इसकी तैयारी पहले से की जा रही है. अगस्त में सरकार और SEBI ने विदेशी फंड्स के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने लिस्टेड शेयरों पर LTCG खत्म करने और STT कम करने की मांग की थी. जून में सरकार ने बजट का इंतजार नहीं किया और एक अध्यादेश के जरिए सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन और विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर दिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य डॉलर आकर्षित करना और रुपये को समर्थन देना था. भारी उधारी के चलते सरकार कमजोर रुपये का जोखिम नहीं उठा सकती और इक्विटी टैक्स में राहत बचा हुआ सबसे स्पष्ट विकल्प है. अगर यह कदम आता है तो यह एक दशक में भारतीय शेयरों के लिए सबसे मजबूत संरचनात्मक तेजी का आधार हो सकता है.

दिवाली का फैसला

2026 के अधिकांश समय में भारत वह बाजार रहा है जिसे दुनिया शॉर्ट करना पसंद करती रही है. Nifty सितंबर 2024 के शिखर से करीब 13 फीसदी नीचे है, विदेशी पूंजी रिकॉर्ड गति से बाहर गई है और रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में रहा है. यही वजह है कि आने वाले कुछ सप्ताह इतने महत्वपूर्ण हैं. जब पोजीशन इतनी एकतरफा हो, तो बाजार को दस चीजों के सही होने की जरूरत नहीं होती. उसे एक ही समय में कुछ बड़ी चीजों के सही होने की जरूरत होती है.

जोखिम वास्तविक हैं, व्यापार वार्ता पहले भी कई बार अंतिम चरण के करीब पहुंचकर अटक चुकी है, जियो का प्राइस बैंड और तारीखें अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुई हैं और ईरान वार्ता सार्वजनिक रूप से अभी भी गतिरोध में है.

लेकिन कैलेंडर शायद ही कभी इस तरह एक साथ आया हो: इस सप्ताह गोयल अमेरिका में हैं, 18 अक्टूबर को रूस प्रतिबंधों की समयसीमा है, इसके बाद आने वाले हफ्तों में जियो की एंकर बुक, 3 नवंबर को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और धनतेरस तथा दिवाली के आसपास जियो की लिस्टिंग

एक बम मुंबई से आ रहा है और दूसरा वॉशिंगटन से. अगर दोनों समय पर फटते हैं, तो संवत 2083 की शुरुआत उस धमाके के साथ हो सकती है जिसका दलाल स्ट्रीट पूरे साल इंतजार कर रहा है.

(यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है. IPO से जुड़ी जानकारी, जिसमें प्राइस बैंड और तारीखें शामिल हैं, कंपनी के अंतिम ऑफर दस्तावेजों के अधीन हैं.)

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


भारत के 500 GW स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के साथ जरूरी होगी ग्रिड स्थिरता की तैयारी: FICCI-Nangia

FICCI और Nangia की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रिड स्थिरता से जुड़े समानांतर लक्ष्य तय करने की जरूरत है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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भारत के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता के लक्ष्य के साथ देश को ग्रिड स्थिरता के लिए भी स्पष्ट और समानांतर मील के पत्थर तय करने होंगे. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और Nangia की संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

‘Grid Stability in India: From Diagnostic Assessment to a Reform and Implementation Roadmap’ नाम से जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश का पावर ग्रिड छोटी क्षमता वाली, मौसम पर निर्भर और पावर-इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित बिजली उत्पादन को लगातार अधिक मात्रा में अपने नेटवर्क में शामिल कर रहा है. हालांकि, ट्रांसमिशन, एनर्जी स्टोरेज और संस्थागत क्षमता का विस्तार हर जगह इसी गति से नहीं हुआ है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ ग्रिड के संचालन और स्थिरता से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रिड की तकनीकी और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा.

ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी के लिए कानूनी ढांचा

रिपोर्ट में ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी के लिए मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे को स्पष्ट करने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही 50 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए एक समान परिभाषा और क्षमता सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है.

रिपोर्ट में देशभर में ग्रिड स्थिरता से जुड़े कुछ न्यूनतम मानक लागू करने की भी बात कही गई है. इनमें ग्रिड इनर्शिया, फ्रीक्वेंसी में बदलाव की दर (Rate of Change of Frequency) और सिस्टम स्ट्रेंथ जैसे मानक शामिल हैं. इन मानकों को खासतौर पर उन क्षेत्रों में लागू करने की जरूरत बताई गई है जहां नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी अधिक है.

ट्रांसमिशन और भीड़ प्रबंधन पर जोर

FICCI-Nangia की रिपोर्ट में ग्रिड-एन्हांसिंग टेक्नोलॉजी और पावर ट्रांसमिशन में कंजेशन मैनेजमेंट के लिए जरूरी कॉरिडोर की पहचान का काम पूरा करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा, बिजली उत्पादन और खपत में अंतर से जुड़े सेटलमेंट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक ढांचा बनाने का सुझाव दिया गया है.

रिपोर्ट में डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी के लिए भी राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार करने की बात कही गई है. प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ निश्चित मानक और पैरामीटर तय किए जाएंगे, जबकि राज्यों को इन सहमत सीमाओं के भीतर अपने स्तर पर निर्णय लेने की गुंजाइश दी जाएगी.

ग्रिड स्थिरता परियोजनाओं के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस

रिपोर्ट में ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी और सिस्टम स्ट्रेंथ से जुड़े शुरुआती चरण या अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले प्रोजेक्ट्स के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की वित्तीय व्यवस्था नई तकनीकों और ग्रिड स्थिरता से जुड़ी परियोजनाओं में शुरुआती निवेश को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है.

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार तेजी से हो रहा है. ऐसे में 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता के लक्ष्य के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, स्टोरेज क्षमता, ग्रिड तकनीक और नियामकीय व्यवस्था को समान गति से विकसित करना बिजली व्यवस्था की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा.


अगस्त में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बढ़ी, IIP ग्रोथ 8%; मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर का दमदार प्रदर्शन

औद्योगिक उत्पादन में तेजी के पीछे मैन्युफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र का अहम योगदान रहा. हालांकि, माइनिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसमें 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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भारत के औद्योगिक क्षेत्र के लिए अगस्त के आंकड़े बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहे हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में सालाना आधार पर 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. जुलाई में IIP ग्रोथ 7.4 फीसदी रही थी. औद्योगिक उत्पादन में तेजी के पीछे मैन्युफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र का अहम योगदान रहा. हालांकि, माइनिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसमें 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

मैन्युफैक्चरिंग और बिजली ने दिया बड़ा सहारा

अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन सालाना आधार पर 9 फीसदी बढ़ा. वहीं, बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 12.3 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. इसके उलट माइनिंग एवं संबद्ध गतिविधियों में 5.6 फीसदी की गिरावट आई. इसकी तुलना में अगस्त 2025 में माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 15.8 फीसदी रही थी.

अगस्त 2025 में देश के औद्योगिक उत्पादन में 4.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी. इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल अगस्त में IIP की वृद्धि दर में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है.

अप्रैल-अगस्त में IIP ग्रोथ 6.7 फीसदी

चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त के दौरान IIP में 6.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 4.2 फीसदी रही थी. यानी चालू वित्त वर्ष में अब तक औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार पिछले साल की तुलना में तेज रही है.

वहीं, जुलाई के IIP के शुरुआती अनुमान को भी संशोधित किया गया है. जुलाई में IIP की वृद्धि दर पहले 6.7 फीसदी के अस्थायी अनुमान के साथ जारी की गई थी, जिसे अब संशोधित कर 7.4 फीसदी कर दिया गया है.

मैन्युफैक्चरिंग के 23 में से 18 उद्योग समूहों में बढ़त

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की. इनमें वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर विनिर्माण में 25.2 फीसदी, विद्युत उपकरण विनिर्माण में 30.9 फीसदी और अन्य परिवहन उपकरणों के विनिर्माण में 25.3 फीसदी की मजबूत वृद्धि रही.

वाहन और संबंधित उपकरणों की श्रेणी में वाहन कलपुर्जों, सहायक उपकरणों, यात्री कारों और वाणिज्यिक वाहनों ने उत्पादन वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया. वहीं, विद्युत उपकरणों के क्षेत्र में स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, स्विच, कंट्रोल एवं मीटर पैनल, ऑप्टिकल फाइबर और केबल कनेक्टर, यूपीएस तथा सॉलिड-स्टेट ड्राइव जैसे उत्पादों का योगदान रहा.

अन्य परिवहन उपकरणों के विनिर्माण में दोपहिया वाहन, रेलवे के डिब्बे और कलपुर्जे, रखरखाव एवं सेवा वाहन तथा मोटरसाइकिल, मोपेड और साइडकार के कलपुर्जों ने वृद्धि को सहारा दिया.

कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी तेजी

उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, अगस्त में कैपिटल गुड्स में 16.9 फीसदी और इंटरमीडिएट गुड्स में 13.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स गुड्स में 11.1 फीसदी, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कंस्ट्रक्शन गुड्स में 6.4 फीसदी और प्राइमरी गुड्स में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

नॉन-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स गुड्स में भी 2.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त में IIP की वृद्धि में इंटरमीडिएट गुड्स, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का प्रमुख योगदान रहा.

अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने रखता है IIP का आंकड़ा?

औद्योगिक उत्पादन में लगातार बेहतर वृद्धि अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश गतिविधियों की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है. अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग, बिजली और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के संकेत हैं. हालांकि, माइनिंग सेक्टर में गिरावट एक कमजोर कड़ी बनी हुई है, जिस पर आगे के आंकड़ों में नजर रहेगी.
 


बाजार में बिकवाली का दबाव बरकरार, ग्लोबल संकेत कमजोर; निवेशकों की नजर इन बड़े ट्रिगर्स पर

सोमवार को सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 फीसदी गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56 फीसदी टूटकर 22,780.25 पर आ गया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को आई तेज गिरावट के बाद मंगलवार के कारोबार में भी दबाव बने रहने के संकेत हैं. सोमवार को सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 फीसदी गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56 फीसदी टूटकर 22,780.25 पर आ गया. दोनों प्रमुख सूचकांक करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए. इस भारी गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 8 लाख करोड़ रुपये घट गया.

मंगलवार की शुरुआत से पहले ग्लोबल संकेत भी बाजार के पक्ष में नहीं हैं. अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स 0.67 फीसदी, एसएंडपी 500 करीब 0.77 फीसदी और नैस्डैक 0.92 फीसदी नीचे रहे. एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी दबाव में कारोबार कर रहे थे. वहीं, गिफ्ट निफ्टी करीब 22,800-22,820 के आसपास बना हुआ था.

सोमवार को 30 में से 29 सेंसेक्स शेयर टूटे

सोमवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 गिरावट के साथ बंद हुए. इन्फोसिस एकमात्र ऐसा शेयर रहा, जो करीब 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ. निफ्टी में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इन्फोसिस और एचडीएफसी लाइफ ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई, जबकि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, अडानी एंटरप्राइजेज, जियो फाइनेंस, पावरग्रिड और लार्सन एंड टुब्रो पर दबाव रहा.

₹8 लाख करोड़ घटा बाजार का मार्केट कैप

सोमवार की बिकवाली का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 8 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 474 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी एक ही कारोबारी सत्र में बाजार की कुल वैल्यू में इतनी बड़ी कमी दर्ज की गई.

महंगा क्रूड बाजार के लिए बड़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड करीब 105-106 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी अनिश्चितता के कारण तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची कीमतें आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर नजर

अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड करीब 5.24 फीसदी के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर बना हुआ है. सोमवार को रुपया 28 पैसे गिरकर 96.03 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

एफआईआई की बिकवाली भी बनी चुनौती

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रही है. सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों से निकासी 25,682 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. ऐसे में बाजार की दिशा तय करने में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी अहम रहेंगी.

आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को कई शेयर कॉरपोरेट गतिविधियों और महत्वपूर्ण कारोबारी घोषणाओं के चलते फोकस में रहेंगे. होनासा कंज्यूमर में करीब 400 करोड़ रुपये की संभावित ब्लॉक डील और क्यूब हाईवेज ट्रस्ट में करीब 688 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बिक्री की खबर पर नजर रहेगी. टाटा समूह की कंपनियां टाटा संस के प्रस्तावित रणनीतिक पुनर्गठन के चलते चर्चा में रहेंगी. रेडिको खेतान के ब्रिटेन में विस्तार, एचसीएल टेक्नोलॉजीज की सॉफ्टवेयर इकाई के रोबोटिक डॉट एआई के अधिग्रहण और आईटीसी द्वारा स्प्राउटलाइफ फूड्स में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की खबरें भी शेयरों को प्रभावित कर सकती हैं. आईआरएफसी का दामोदर वैली कॉरपोरेशन के साथ 4,200 करोड़ रुपये का टर्म लोन समझौता, एलेनबैरी इंडस्ट्रियल गैसेज को बीएचईएल से मिला 481 करोड़ रुपये का ऑर्डर और एनसीसी को मिला 1,076.71 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भी बाजार के रडार पर रहेगा. इसके अलावा अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पावर, अदाणी पोर्ट्स और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस से जुड़े सेबी मामलों के निपटारे तथा ओला इलेक्ट्रिक के 1,000 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावित राइट्स इश्यू से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

आज बाजार के लिए ये संकेत रहेंगे अहम

मंगलवार के कारोबार में ग्लोबल बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री प्रमुख संकेतक रहेंगे. इसके अलावा पश्चिम एशिया से जुड़ी किसी भी नई खबर का असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. सोमवार की तेज गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की स्थिति में निवेशकों की नजर इन सभी ट्रिगर्स पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


टाटा संस के पुनर्गठन की तैयारी, NBFC और CIC ढांचे से बाहर निकलने की योजना

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. पुनर्गठन के बाद टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखने का रास्ता साफ हो सकता है.

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पुनर्गठन की योजना सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्तावित विलय के बाद टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी एनबीएफसी या कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी यानी सीआईसी के रूप में वर्गीकृत होने की स्थिति खत्म हो सकती है.

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी के लिए टाटा संस के निदेशक मंडल को पत्र भेजा है. प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा.

1.05 लाख करोड़ रुपये का होगा परिचालन राजस्व

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठित इकाई का 31 मार्च 2026 तक परिचालन राजस्व 1,05,043 करोड़ रुपये था, जबकि वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये थी. इस तरह संयुक्त इकाई की कुल आय में परिचालन राजस्व की हिस्सेदारी 64.3 फीसदी होगी.

ट्रस्ट्स का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर पुनर्गठित इकाई एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत होने के लिए जरूरी प्रमुख कारोबारी मानदंडों को पूरा नहीं करेगी. साथ ही, यह कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी पर लागू शर्तों के दायरे में भी नहीं आएगी.

प्रस्ताव के अनुसार, पुनर्गठित इकाई की कुल शुद्ध परिसंपत्तियां 2,00,158 करोड़ रुपये होंगी. इनमें समूह की कंपनियों में 1,77,120 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है. ट्रस्ट्स के मुताबिक, समूह की कंपनियों में निवेश कुल शुद्ध परिसंपत्तियों के 90 फीसदी से कम रहेगा.

भारतीय रिजर्व बैंक से लेनी होगी मंजूरी

प्रस्तावित विलय को भारतीय रिजर्व बैंक के 2025 के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के स्वैच्छिक विलय संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. इसके तहत केंद्रीय बैंक से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा.

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठन के बाद टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में योग्य नहीं रहने की स्थिति में उसे अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र भी वापस करना होगा.

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ मिलकर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ प्रस्तावित पुनर्गठन और इससे जुड़ी नियामकीय जरूरतों पर बातचीत करेगा. टाटा संस के निदेशक मंडल को भी विलय और नियामकीय प्रक्रिया के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे.

टाटा संस के पुराने कारोबारी मॉडल की वापसी

टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित ढांचा टाटा संस के उस कारोबारी मॉडल को फिर से स्थापित करेगा, जिसे कंपनी ने अपने इतिहास के बड़े हिस्से में अपनाया था. कंपनी के करीब 100 साल के इतिहास में लगभग 80 वर्षों तक टाटा संस के पास परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व था. इस राजस्व का इस्तेमाल टाटा समूह के नए कारोबारों को विकसित करने में किया जाता था.

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी 2004 में अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग होने से पहले टाटा संस का एक कारोबारी प्रभाग थी. इसके अलावा कई अन्य परिचालन कारोबार भी पहले टाटा संस का हिस्सा रहे थे और बाद में उन्हें अलग सहायक कंपनियों में बदल दिया गया.

प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद टाटा संस के पास फिर से अपने परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व होगा, जबकि वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की भूमिका भी निभाता रहेगा.

टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने की योजना

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि यह प्रस्ताव सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के निदेशक मंडल द्वारा जुलाई 2025 में पारित सर्वसम्मत प्रस्तावों के अनुरूप भी है. इन प्रस्तावों के तहत टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाने थे. ट्रस्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचा टाटा समूह के मौजूदा संगठनात्मक मॉडल को बनाए रखते हुए उसे दीर्घकालिक रणनीतिक पहलों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा


डिफेंस सेक्टर की Tonbo Imaging के IPO को सेबी की मंजूरी, OFS के जरिए बिकेंगे 1.81 करोड़ शेयर

कंपनी के IPO में 18,085,246 इक्विटी शेयर तक की बिक्री की जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है. OFS के तहत प्रमोटर शेयर बेचने वाले शेयरधारक, प्रमोटर ग्रुप का एक शेयरधारक और निवेशक शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और इमेजिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी Tonbo Imaging India Limited को प्रस्तावित Initial Public Offering (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है. कंपनी के IPO में नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे, बल्कि Offer for Sale (OFS) के जरिए मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.

OFS के जरिए 1.81 करोड़ शेयरों की बिक्री

कंपनी के IPO में 18,085,246 इक्विटी शेयर तक की बिक्री की जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है. OFS के तहत प्रमोटर शेयर बेचने वाले शेयरधारक, प्रमोटर ग्रुप का एक शेयरधारक और निवेशक शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. इस इश्यू में कोई Fresh Issue शामिल नहीं है. यानी IPO से मिलने वाली राशि कंपनी के पास नए शेयर जारी करने के जरिए नहीं आएगी, बल्कि OFS के तहत शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी.

2003 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

Tonbo Imaging की स्थापना 2003 में हुई थी. वर्ष 2012 में कंपनी ने डिफेंस-केंद्रित उत्पादों के निर्माण की दिशा में अपना कारोबार बढ़ाया. यह बदलाव कंपनी के पूर्व पैरेंट के प्रमोटर्स द्वारा अधिग्रहण के बाद हुआ. कंपनी भारत और विदेशी बाजारों में सरकारी और डिफेंस ग्राहकों के लिए डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और इमेजिंग सिस्टम विकसित करती है.

Tonbo Imaging के निवेशकों में Qualcomm Ventures, Artiman, Celesta, Edelweiss Value and Growth Fund, HBL Engineering, Tenacity Ventures, Export-Import Bank of India और Florintree शामिल हैं.

थर्मल इमेजिंग में मजबूत मौजूदगी

कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में उद्धृत Frost & Sullivan की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत में सरकारी और डिफेंस एजेंसियों को सप्लाई किए गए थर्मल इमेजिंग सिस्टम के बिक्री मूल्य के आधार पर Tonbo Imaging देश की सबसे बड़ी निर्माता थी. रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में कंपनी ने भारत से निर्यात किए गए थर्मल इमेजिंग सिस्टम की कुल यूनिट्स में 94.3 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की.

24 देशों में 28,000 से ज्यादा सिस्टम तैनात

31 मार्च 2026 तक Tonbo Imaging ने 24 देशों में 28,000 से अधिक सिस्टम तैनात किए थे. कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में थर्मल इमेजिंग कोर, वेपन साइट्स, थर्मल बाइनोक्युलर, टारगेटिंग सिस्टम, मिसाइल सीकर्स, फायर-कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल-गाइडेंस सिस्टम शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 से उसके पास अपनी बौद्धिक संपदा (IP) का 100 फीसदी स्वामित्व है. इसमें ऑप्टिक्स, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी तकनीक शामिल है.

मैन्युफैक्चरिंग के लिए बाहरी साझेदारों पर निर्भरता

Tonbo Imaging अपने उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए Electronics Manufacturing Services (EMS) पार्टनर्स का इस्तेमाल करती है. इनमें Kaynes Technology India और Avalon Technology शामिल हैं. वहीं, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, सिस्टम इंटीग्रेशन और क्वालिफिकेशन टेस्टिंग जैसी गतिविधियां कंपनी अपने स्तर पर करती है. IPO के लिए JM Financial और IIFL Capital Services बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं.
 


UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक से इनकार, केंद्र-NPCI से 4 हफ्ते में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.

96 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा चार्ज

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि नई व्यवस्था के तहत 96 फीसदी लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. जरूरी सेवाओं से जुड़े कुछ भुगतानों के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 5 रुपये तय की गई है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चार्ज न तो कर है और न ही सरकारी शुल्क. सरकार को इन चार्ज से कोई राशि नहीं मिलेगी. उनके अनुसार, यह भुगतान एग्रीगेटर और बैंकों के बीच लगने वाला निपटान शुल्क है.

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में सरकार से हलफनामे के जरिए विस्तृत जानकारी मांगी. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं.

2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित है 0.4% शुल्क

एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर व्यापारी छूट दर यानी एमडीआर लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी शुल्क प्रस्तावित है. 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है.

हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से करीब 96 फीसदी व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे.

छोटे दुकानदारों को शुल्क से छूट

नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है. यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क प्रस्तावित किया गया है.

याचिका में क्या है चुनौती?

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना किया गया है. याचिका में जनवरी 2020 से लागू शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव को भी चुनौती दी गई है.

अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. फिलहाल अदालत ने प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है. मामले की अगली सुनवाई संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद होगी.

 


पर्यटन के लिए राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा शुरू, 2028 तक 23 हजार अनुभव और होमस्टे डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे

राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ONDC मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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केंद्र सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की शुरुआत की है. इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक 23,000 पर्यटन अनुभवों और होमस्टे को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है. पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत पर्यटकों को अलग-अलग डिजिटल मंचों के बजाय एक साझा नेटवर्क के माध्यम से पर्यटन सेवाओं को खोजने और बुक करने की सुविधा मिलेगी.

पर्यटन सेवाओं को एक डिजिटल नेटवर्क पर लाने की तैयारी

राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.

इस पहल के तहत 14,000 पर्यटन अनुभवों और 9,000 होमस्टे को डिजिटल नेटवर्क पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. खास तौर पर उन पर्यटन अनुभवों पर ध्यान दिया जाएगा, जो अभी डिजिटल रूप से उपलब्ध नहीं हैं या जिनकी ऑनलाइन मौजूदगी सीमित है. पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में इस परियोजना की शुरुआत की.

पहचान से लेकर भुगतान और शिकायत निवारण तक की सुविधा

मंत्रालय के अनुसार, ओएनडीसी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन एंड एडवांसमेंट (आईसीडीआईए) के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस डिजिटल ढांचे में कई सुविधाएं शामिल होंगी. इनमें सत्यापित पहचान और सेवा प्रदाताओं की जानकारी, खोज और सेवा चयन, भुगतान, रेटिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि इस पहल के सामने वाले हिस्से में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार की व्यापक योजना भविष्य में ‘एक टिकट, एक पास’ व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे पर्यटक की यात्रा के अलग-अलग हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ा जा सके.

उन्होंने कहा कि फिलहाल उड़ान, होटल, टैक्सी, नाव की सवारी या किसी मंदिर में आरती जैसी सेवाओं की बुकिंग के लिए अलग-अलग वेबसाइटों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण यात्रा की योजना बनाना पर्यटकों के लिए डिजिटल रूप से मुश्किल हो जाता है.

तीन चरणों में लागू होगी योजना

परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसकी तैयारी और विकास का काम होगा. इसके बाद जनवरी से जून 2027 के बीच पायलट चरण चलाया जाएगा, जिसमें पर्यटन अनुभवों और होमस्टे का पहला समूह डिजिटल नेटवर्क पर उपलब्ध कराया जाएगा.

जुलाई 2027 से दिसंबर 2028 के बीच देशभर में इसका विस्तार किया जाएगा और अधिक से अधिक पर्यटन सेवाओं को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.

मंत्रालय के अनुसार, परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है. पर्यटन मंत्रालय इसका नेतृत्व करेगा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर पर्यटन अनुभवों को सूचीबद्ध और सत्यापित करेगा. पर्यटन उद्योग की भागीदारी के लिए एक संचालन समिति भी बनाई जाएगी.

कम चर्चित पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ेगा ध्यान

सरकार का कहना है कि इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का उद्देश्य पर्यटन की योजना और यात्रा को आसान, सुरक्षित और पर्यटकों की पसंदीदा भाषाओं में अधिक सुलभ बनाना है. इससे कागजी प्रक्रिया कम करने और कम चर्चित पर्यटन स्थलों तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है, जब सरकार देश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करने और स्थानीय समुदायों तथा छोटे पर्यटन कारोबारियों तक आर्थिक अवसर पहुंचाने पर जोर दे रही है.

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यटक अब स्थानीय खान-पान, कला, परंपराओं और अन्य स्थानीय अनुभवों को भी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन के अगले चरण में विकास का लाभ लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे स्थानीय समुदायों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचना जरूरी है.

दो अन्य पर्यटन पहलों की भी शुरुआत

कार्यक्रम के दौरान सरकार ने ‘कम चर्चित पर्यटन स्थलों की मांग बढ़ाने के लिए पर्यटन मांग पुनर्वितरण मिशन’ और ‘देखो अपना देश 2.0’ की भी शुरुआत की. इस अवसर पर ‘भारत पर्यटन सांख्यिकी 2026’ जारी की गई. इसके अलावा एयरबीएनबी, फ्लिक्सबस, ग्लांस डिजिटल एक्सपीरियंस, आइशर ग्रुप फाउंडेशन और मेकमायट्रिप के साथ पांच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया. इन समझौतों का उद्देश्य पर्यटन स्थलों के प्रचार, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है.


तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में बढ़ा MF निवेश, AUM 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंचा; 25% निवेशक महिलाएं

देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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तेलंगाना और आंध्र प्रदेश म्युचुअल फंड निवेश के तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभर रहे हैं. जुलाई 2026 तक दोनों राज्यों का कुल म्युचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. खास बात यह है कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड निवेशकों में करीब 25 फीसदी महिलाएं हैं. वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.

तेलंगाना का एयूएम 19 फीसदी बढ़ा

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (MFs) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में तेलंगाना का म्युचुअल फंड एयूएम 2,12,856 करोड़ रुपये रहा. जुलाई 2025 की तुलना में इसमें 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा.

देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.

आंध्र प्रदेश में 23 फीसदी बढ़ा एयूएम

आंध्र प्रदेश में जुलाई 2026 में म्युचुअल फंड एयूएम 82,409 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले के मुकाबले इसमें 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1 फीसदी रही. एयूएम के मामले में आंध्र प्रदेश देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 15वें स्थान पर रहा. राज्य में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 79.44 लाख को पार कर गई.

हैदराबाद में तेलंगाना के एयूएम का 87 फीसदी

तेलंगाना में म्युचुअल फंड निवेश का सबसे बड़ा केंद्र हैदराबाद बना हुआ है. जुलाई में शहर का म्युचुअल फंड एयूएम 1,84,261 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 87 फीसदी है. एक साल में हैदराबाद के एयूएम में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

देश के शीर्ष 30 शहरों में हैदराबाद एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में शहर की हिस्सेदारी 2.10 फीसदी रही. हैदराबाद में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 54.44 लाख रही, जो तेलंगाना के कुल फोलियो का 66.2 फीसदी है.

विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा भी आगे

आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम म्युचुअल फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहा. जुलाई में शहर का एयूएम 16,614 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद विजयवाड़ा 8,337 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश केवल एक शहर तक सीमित नहीं है और राज्य के प्रमुख शहरों में इसकी पहुंच बढ़ रही है.

एसआईपी के जरिए बढ़ रहा नियमित निवेश

दोनों राज्यों में एसआईपी के जरिए निवेश भी बढ़ रहा है. तेलंगाना में एसआईपी एयूएम 47,975 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल म्युचुअल फंड एयूएम का करीब 22 फीसदी है. राज्य में एसआईपी फोलियो की संख्या 26.09 लाख से ज्यादा रही.

आंध्र प्रदेश में एसआईपी एयूएम 26,820 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 32 फीसदी है. यहां एसआईपी फोलियो की संख्या 26.47 लाख रही.

महिलाओं की भागीदारी करीब 25 फीसदी

म्युचुअल फंड निवेश में महिलाओं की भागीदारी भी दोनों राज्यों में उल्लेखनीय है. तेलंगाना में 19.60 लाख से ज्यादा विशिष्ट निवेशक हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 24.42 फीसदी है. आंध्र प्रदेश में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 20.94 लाख रही. इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 23.60 फीसदी है. देशभर में म्युचुअल फंड के विशिष्ट निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.74 फीसदी है.

आर्थिक आधार से भी निवेश को मिल रहा समर्थन

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश बढ़ने के पीछे दोनों राज्यों की आर्थिक गतिविधियों और आय के आधार का भी योगदान है. वित्त वर्ष 2025-26 में तेलंगाना की जीडीपी 17.82 लाख करोड़ रुपये रही, जो भारत की कुल जीडीपी का करीब 5 फीसदी है. वहीं, आंध्र प्रदेश की जीडीपी 17.62 लाख करोड़ रुपये रही, जो देश की कुल जीडीपी का करीब 4.9 फीसदी है.

एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट एन. चलसानी ने कहा कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ रही है. उनके मुताबिक, तेलंगाना में हैदराबाद की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है, जबकि आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में निवेश का दायरा बढ़ रहा है.

उन्होंने एसआईपी के बढ़ते चलन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, नियमित निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों के बीच अनुशासित निवेश की प्रवृत्ति को दर्शाती है. म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए सही जानकारी के आधार पर फैसला लेना और लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.
 


कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार में आएगी तेजी, 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार अगले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है. BCG और CII की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक यह बाजार 3-3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस बढ़ोतरी के साथ घरेलू स्तर पर पार्ट्स और मटीरियल के निर्माण में 40,000-50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वैल्यूएडिशन का अवसर पैदा हो सकता है.

भारत अगले पांच वर्षों में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती घरेलू आय, घरों में इन उत्पादों की पहुंच, सिंगल-फैमिली घरों की बढ़ती संख्या, आसान फाइनेंसिंग, व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग बाजार की वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे.

2030 तक 8-10% सालाना बढ़ सकता है बाजार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.

हालांकि, रिपोर्ट ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है. यदि देश में पार्ट्स और मटीरियल के उत्पादन की क्षमता पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ी, तो बाजार की बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा हो सकता है.

पार्ट्स के लोकल उत्पादन में अभी बड़ा अंतर

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटीरियल का घरेलू उत्पादन अलग-अलग श्रेणियों में 25 फीसदी से 70 फीसदी के बीच है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीविजन और एयर कंडीशनर के मामले में लोकल प्रोडक्शन का स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन में यह अधिक है.

2030 तक विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में लोकल प्रोडक्शन 30-80 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट ने टीवी डिस्प्ले पैनल, रूम एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर को उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है, जहां घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश है.

जिन क्षेत्रों में तकनीक कुछ चुनिंदा वैश्विक कंपनियों के पास है, वहां टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर की जरूरत हो सकती है. वहीं, क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग से बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.

ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 1% से कम

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट 900-950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. फिलहाल ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है.

भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट बढ़ रहा है, लेकिन इसकी बड़ी हिस्सेदारी पड़ोसी देशों और यूएई जैसे बाजारों तक सीमित है. बड़े वैश्विक इंपोर्ट बाजारों में भारत की मौजूदगी अभी अपेक्षाकृत कम है.

रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख एक्सपोर्टर्स की तुलना में भारत को मटीरियल लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और टेक्नोलॉजी के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और कंप्लायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित उपलब्धता भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में बाधा बनती है.

रिपोर्ट में थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि ग्लोबल एयर-कंडीशनर एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 2010 के 16 फीसदी से बढ़कर 2025 में 22 फीसदी हो गई. इससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एयर-कंडीशनर एक्सपोर्टर बन गया.

R&D पर खर्च बढ़ाने की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख लिस्टेड कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अपने रेवेन्यू का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करती हैं. इसके मुकाबले दुनियाभर की समान कंपनियां R&D पर करीब 1-4 फीसदी खर्च करती हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा. इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति बनाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

AI से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बिजनेस लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अधिक आशावादी हैं, हालांकि वर्कफोर्स की तैयारी अभी सीमित है.

जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट का विस्तार करने में मददगार हो सकता है.

 


बैंक हड़ताल टली, आज सामान्य रहेगा कामकाज; 5 दिन कामकाज पर बनेगी हाईलेवल कमेटी

बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टल गई है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है. इसके चलते सोमवार से बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से कामकाज होगा.

बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी. हड़ताल टलने के बाद ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी तरह की प्रस्तावित बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और सोमवार को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.

5 दिन कामकाज के मुद्दे पर बनेगी समिति

हड़ताल स्थगित करने के साथ ही बैंक यूनियनों और IBA के बीच बातचीत का रास्ता खुला है. UFBU के अनुसार, सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए IBA और UFBU की एक उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन किया जाएगा. समिति उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने के साथ सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जो ग्राहकों समेत सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य हो.

PLI योजना में बदलाव पर भी होगी चर्चा

बैंक यूनियनों की एक अन्य मांग प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी Performance Linked Incentive (PLI) से संबंधित है. UFBU ने कहा कि स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI योजना को लेकर IBA के साथ बातचीत शुरू की जा सकती है. यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए योजना में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के सामने रखने पर भी चर्चा होगी.

आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित

UFBU ने कहा कि IBA की ओर से इन मुद्दों पर बातचीत और विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उसने प्रस्तावित आंदोलन और तीन दिन की हड़ताल को स्थगित करने का फैसला किया. अब 5 दिन कामकाज और PLI योजना में बदलाव समेत अन्य मांगों पर आगे की बातचीत समिति के स्तर पर होगी.