दिशानिर्देशों के अनुसार, एमएफआई को प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग 3 महीने के भीतर नए ऋण वितरण में करना होगा. साथ ही योजना से जुड़े ऋणों के लिए अलग खाता रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र को मजबूत करने और ऋण प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी योजना की शुरुआत की है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सेक्टर नकदी की कमी और घटते बैंक फंडिंग के दबाव से जूझ रहा है. इस योजना से खासकर छोटे और मध्यम माइक्रोफाइनैंस संस्थानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
योजना का उद्देश्य और अवधि
सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना 20 मार्च 2026 से लागू हो गई है और 30 जून 2026 तक या ₹20,000 करोड़ की कुल गारंटी सीमा पूरी होने तक प्रभावी रहेगी. इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को माइक्रोफाइनैंस संस्थानों (एमएफआई) को दिए जाने वाले ऋण पर गारंटी कवर प्रदान करना है, ताकि वे बिना जोखिम के अधिक फंडिंग कर सकें.
नए ऋण पर फोकस, पुराने कर्ज नहीं होंगे शामिल
इस योजना के तहत दी जाने वाली फंडिंग केवल नए ऋण के लिए होगी. इसका उपयोग पुराने कर्ज को चुकाने में नहीं किया जा सकेगा. इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि सेक्टर में ताजा पूंजी का प्रवाह बढ़े और नई ऋण संपत्तियां तैयार हों.
गारंटी कवरेज का ढांचा
1.योजना में एमएफआई के आकार के अनुसार गारंटी कवर तय किया गया है.
2.छोटे एमएफआई (₹500 करोड़ से कम एयूएम) को 80 प्रतिशत तक गारंटी मिलेगी.
3.मध्यम एमएफआई (₹500 करोड़ से ₹2,000 करोड़) के लिए यह 75 प्रतिशत है.
4.बड़े एमएफआई (₹2,000 करोड़ से अधिक) को 70 प्रतिशत गारंटी कवरेज दिया जाएगा.
इस संरचना का उद्देश्य छोटे संस्थानों को अधिक लाभ पहुंचाना है, जिन्हें आमतौर पर बैंक ऋण मिलने में ज्यादा कठिनाई होती है.
सेक्टर में गिरते ऋण प्रवाह की चुनौती
माइक्रोफाइनैंस सेक्टर पिछले कुछ समय से फंडिंग संकट का सामना कर रहा है. वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही से लेकर 2025-26 की तीसरी तिमाही तक बैंकों से मिलने वाले ऋण में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. अनुमान के मुताबिक करीब 50 लाख उधारकर्ता औपचारिक ऋण प्रणाली से बाहर हो चुके हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है.
ब्याज दरों पर सख्त नियंत्रण
योजना के तहत बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण की ब्याज दर पर सीमा तय की गई है. यह दर बाहरी बेंचमार्क उधारी दर या 1-वर्षीय एमसीएलआर के साथ अधिकतम 2 प्रतिशत अतिरिक्त तक सीमित होगी. इसके अलावा एमएफआई को अपने छोटे उधारकर्ताओं के लिए ब्याज दर को पिछले 6 महीनों की औसत दर से कम से कम 1 प्रतिशत कम रखना होगा.
छोटे और मध्यम एमएफआई के लिए विशेष प्रावधान
योजना में यह भी अनिवार्य किया गया है कि कुल ऋण का कम से कम 5 प्रतिशत छोटे एमएफआई और 10 प्रतिशत मध्यम एमएफआई को दिया जाए. इससे सेक्टर में संतुलित विकास सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है.
दिशानिर्देशों के अनुसार, एमएफआई को प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग 3 महीने के भीतर नए ऋण वितरण में करना होगा. साथ ही योजना से जुड़े ऋणों के लिए अलग खाता रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गारंटी योजना बैंकों का भरोसा बहाल करेगी और माइक्रोफाइनैंस सेक्टर में फंडिंग की रफ्तार को फिर से बढ़ाएगी. खासकर छोटे और मध्यम संस्थानों के लिए यह योजना नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है, जिससे लाखों छोटे उधारकर्ताओं तक फिर से ऋण पहुंच सकेगा.
एक ओर जहाँ फाइनेंस लीडरशिप और एंटरप्राइज लीडरशिप के बीच की सीमा पूरी तरह समाप्त हो रही है. वहीं, CFO की भूमिका के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने के उद्देश्य से भारत के टॉप फाइनेंस लीडर्स 8 से 10 मई तक लखनऊ में एकत्र होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
BW बिजनेसवर्ल्ड को यह घोषणा करते हुए गर्व है कि 'The Future Finance Office' का दूसरा संस्करण 8 से 10 मई 2026 तक द सेंट्रम, लखनऊ में आयोजित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जो इस आयोजन को न केवल राजनीतिक महत्व देगा बल्कि यह भी संकेत देगा कि राज्य भारत के वित्तीय नेतृत्व संवाद के केंद्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है.
2021 में BW बिजनेसवर्ल्ड ने एक प्रवृत्ति की भविष्यवाणी की थी कि CFO अपनी एंटरप्राइज-व्यापी दृश्यता और रणनीतिक नियंत्रण के कारण तेजी से शीर्ष नेतृत्व पदों तक पहुंचेंगे. यह भविष्यवाणी सही साबित हुई है. आज CFO केवल संख्याओं के संरक्षक नहीं हैं बल्कि CEO, बोर्ड सदस्य और संगठनात्मक दिशा तय करने वाले प्रमुख नेता बन चुके हैं. The Future Finance Office इसी विकसित भूमिका को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसका दूसरा संस्करण इसी मिशन को और अधिक सशक्त बनाता है.
सम्मेलन के बारे में
नवंबर 2025 में आयोजित पहले संस्करण में भारत की सबसे बड़ी कंपनियों के 70 वित्तीय नेताओं ने भाग लिया था. जिनका संयुक्त राजस्व 2,000 करोड़ रुपये से अधिक था. इस आयोजन को अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. उसी आधार पर और प्रतिभागियों से मिले प्रत्यक्ष फीडबैक के आधार पर दूसरा संस्करण अधिक परिष्कृत एजेंडा, व्यापक दायरा और एक महत्वपूर्ण प्रश्न के साथ लौट रहा है. आधुनिक वित्त विभाग खुद को संरचनात्मक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से भविष्य के लिए कैसे तैयार करे.
सभी सत्र पूरी तरह इंटरैक्टिव होंगे और वित्तीय नेताओं द्वारा ही संचालित किए जाएंगे. हर प्रतिभागी योगदानकर्ता होगा केवल दर्शक नहीं. यह सम्मेलन केवल विचार नहीं देगा बल्कि ऐसे व्यावहारिक फ्रेमवर्क तैयार करेगा जिन्हें प्रतिभागी अपने संगठनों में लागू कर सकें.
एजेंडा और प्रमुख सत्र
दूसरा संस्करण एक समृद्ध और व्यावहारिक एजेंडा पर आधारित होगा. जिसमें मैक्रोइकोनॉमिक्स और भारत की भू-राजनीतिक स्थिति, वित्तीय कार्य में तकनीक और एआई, डिजिटल फाइनेंस ऑफिस, विनियमन और गवर्नेंस, फंडरेजिंग, और ESG एवं स्थिरता जैसे विषय शामिल होंगे. ये केवल पैनल चर्चा नहीं हैं बल्कि CFO और वित्तीय नेताओं द्वारा संचालित कार्य सत्र हैं. जो वास्तविक अनुभव पर आधारित हैं.
प्रतिष्ठित वक्ता
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन देंगे, जिसमें वह शासन, विकास और वित्तीय नेतृत्व के बीच संबंध पर नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे. विशेष रूप से उस समय जब उत्तर प्रदेश भारत के प्रमुख निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर विशेष संबोधन देंगी, जिसमें वह 2026 और उससे आगे की वित्तीय रणनीति को आकार देने वाले मैक्रोइकोनॉमिक परिदृश्य पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत करेंगी.
अदफैक्टर्स PR के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक मदन बहल मुख्य भाषण देंगे, जिसमें वे यह विश्लेषण करेंगे कि तेजी से बदलते सूचना युग में वित्तीय नेताओं को संचार, प्रतिष्ठा और विश्वास की संरचना को कैसे संभालना चाहिए.
भाग लेने वाले संगठन
दूसरे संस्करण में भारत की प्रमुख कंपनियों के CFO और सीनियर फाइनेंस लीडर्स शामिल होंगे, जो विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, वित्तीय सेवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा, तकनीक, एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे. भाग लेने वाले संगठनों में गोदरेज एंड बॉयस, फीनिक्स मिल्स, टीवीएस सुंदरम इंडस्ट्रीज, आदित्य बिड़ला कैपिटल, आदित्य बिड़ला केमिकल, ऑलकार्गो, आनंद ग्रुप, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, बायर क्रॉपसाइंस, बायर फार्मास्यूटिकल्स, बीपीटीपी, कैडिला फार्मास्यूटिकल्स, डॉ. लाल पैथलैब्स, ईकॉम एक्सप्रेस, इमामी, एप्सिलॉन कार्बन, अर्न्स्ट एंड यंग ग्लोबल डिलीवरी सर्विसेज, अर्न्स्ट एंड यंग सर्विसेज, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, जुबिलेंट फार्मोवा, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मैनकाइंड फार्मा, प्राज इंडस्ट्रीज, रेमंड, रॉकमैन इंडस्ट्रीज (हीरो ग्रुप), सनसेरा इंजीनियरिंग, सीमेंस एनर्जी इंडिया, स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी, सायजीन इंटरनेशनल, टाटा मेडिकल एंड डायग्नॉस्टिक्स, उमेेश मोदी ग्रुप, अपोलो टायर्स, हीरो एंटरप्राइज, गोल्डीसोलर, मारुति सुजुकी इंडिया, स्पंदना सूर्ति फाइनेंस, प्रोसीमार्ट, बालाजी वेफर्स, क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज, वर्से इनोवेशन, वेल्सपुन कॉर्प, सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स इंडिया, और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज शामिल हैं.
आयोजन विवरण
सम्मेलन: The Future Finance Office, द्वितीय संस्करण
दिन: 8–10 मई, 2026
स्थान: द सेंट्रम, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मुख्य अतिथि: बृजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
वेबसाइट: bwevents.co.in/bw/the-future-finance-office-2026/
साझेदारी संबंधी जानकारी
अर्पणा सेनगुप्ता: [aparna@businessworld.in](mailto:aparna@businessworld.in) | +91 9958000128
होशी गसवाला: [hoshie@businessworld.in](mailto:hoshie@businessworld.in) | +91 9811010037
पार्टनर्स
BW बिजनेसवर्ल्ड का The Future Finance Office, द्वितीय संस्करण BW CFO World के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसे Invest UP प्रस्तुत कर रहा है. इस सम्मेलन में SAP Concur डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनर, CCH Tagetik कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस मैनेजमेंट पार्टनर, Adfactors PR कैपिटल मार्केट कम्युनिकेशन पार्टनर और SalarySe फाइनेंशियल वेलनेस पार्टनर के रूप में शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें अब ऊर्जा उद्योग की कार्यक्षमता को तेजी से बदल रही हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ऊर्जा उद्योग में 2026 के दौरान भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारक बनकर उभर सकता है. नई रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाएं ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बना रही हैं, जबकि ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी बदलाव जैसे विषय फिलहाल पीछे छूटते नजर आ रहे हैं.
भू-राजनीति बनेगी सबसे बड़ा प्रभावशाली कारक
कंसल्टेंसी कंपनी GlobalData की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में तेल और गैस उद्योग को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला फैक्टर भू-राजनीतिक तनाव होगा. विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष और प्रमुख समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, में संभावित रुकावटें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर कर सकती हैं. इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी उद्योग पर दबाव बनाए रखेगी, हालांकि इसका प्रभाव पहले की तुलना में कुछ कम बताया गया है.
तेल की कीमतों पर बड़ा असर
GlobalData के तेल और गैस विश्लेषक रविंद्र पुराणिक के अनुसार मध्य पूर्व में नए सिरे से बढ़े संघर्ष ने समुद्री यातायात को प्रभावित किया है. इसके चलते मार्च 2026 तक कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तरों की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत तक बढ़ गईं. इस स्थिति से निपटने के लिए कई देशों ने आपातकालीन वित्तीय उपाय, ईंधन राशनिंग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख किया है.
ईरान-अमेरिका तनाव के बावजूद अस्थिरता बरकरार
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम हुआ है, लेकिन रिपोर्ट चेतावनी देती है कि स्थायी समाधान न होने के कारण क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी. मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान का स्तर ही भविष्य में तेल और गैस निर्यात की रिकवरी की गति तय करेगा.
ऊर्जा संक्रमण और तकनीक भी बने रहेंगे अहम
भू-राजनीतिक जोखिमों के अलावा रिपोर्ट में ऊर्जा क्षेत्र के कई संरचनात्मक और तकनीकी बदलावों का भी उल्लेख किया गया है. इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज, जैव ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
साथ ही तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और शेल गैस जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत भी निवेश योजनाओं में महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
नई तकनीकें बदल रही हैं उद्योग की दिशा
रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें अब ऊर्जा उद्योग की कार्यक्षमता को तेजी से बदल रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंपनियां सही तकनीकी और रणनीतिक बदलाव अपनाएंगी, वे आगे बढ़ेंगी, जबकि बदलाव से चूकने वाली कंपनियां पिछड़ सकती हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत फिर सामने
GlobalData ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं ने फारस की खाड़ी से होने वाले ऊर्जा प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला अभी भी क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति संवेदनशील है, भले ही दुनिया पहले की तुलना में मध्य पूर्वी ऊर्जा पर कम निर्भर हो गई हो.
कंपनियों के लिए रणनीति पर फोकस
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को अपने निवेश और रणनीति को प्रमुख वैश्विक रुझानों के अनुसार ढालना होगा. GlobalData की स्ट्रैटेजिक इंटेलिजेंस सॉल्यूशन जैसी रिसर्च प्लेटफॉर्म कंपनियों को भू-राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों को समझने में मदद कर रही हैं.
कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकेत देती है कि 2026 में ऊर्जा उद्योग का फोकस ऊर्जा संक्रमण से ज्यादा “सप्लाई सिक्योरिटी” और भू-राजनीतिक जोखिम प्रबंधन पर रहेगा. हालांकि डीकार्बोनाइजेशन और डिजिटल तकनीकें आगे भी विकसित होती रहेंगी, लेकिन तत्काल निर्णयों में भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा प्रभाव डालता रहेगा.
सोमवार को निफ्टी 122 अंकों की तेजी के साथ 24,119 पर और सेंसेक्स 356 अंकों की बढ़त के साथ 77,269 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार के लिए आज यानी मंगलवार का दिन मिश्रित लेकिन सतर्कता भरा रहने वाला है. जहां एक तरफ वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें दबाव बना रही हैं, तो दूसरी ओर हफ्ते की शुरुआत घरेलू बाजार में मजबूती के साथ हुई थी. ऐसे में आज का कारोबार इस बात की परीक्षा होगा कि बाजार सकारात्मक रुझान को बरकरार रख पाता है या वैश्विक दबाव के आगे झुकता है.
आज के कारोबार से पहले GIFT Nifty करीब 165 अंकों की गिरावट के साथ 24,041 के स्तर पर नजर आया. इससे संकेत मिलता है कि बाजार की ओपनिंग दबाव में रह सकती है और शुरुआती घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
कल बाजार ने दिखाई थी मजबूती
हफ्ते की शुरुआत घरेलू बाजार के लिए उत्साहजनक रही. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए. निफ्टी 122 अंकों की तेजी के साथ 24,119 पर और सेंसेक्स 356 अंकों की बढ़त के साथ 77,269 पर बंद हुआ. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही. हालांकि बैंक निफ्टी ऊपरी स्तरों से फिसलकर लगभग सपाट बंद हुआ.
कल के कारोबार में रियल्टी और मेटल सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. फार्मा, पीएसयू और ऑटो इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जिसने बाजार की कुल तेजी को थोड़ा सीमित किया. यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल सेक्टर-विशेष रणनीति अपना रहे हैं.
रुपया गिरा, बढ़ी चिंता
एक महत्वपूर्ण संकेत करेंसी मार्केट से भी आया. रुपया डॉलर के मुकाबले 18 पैसे कमजोर होकर 95.09 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही ऊंची बनी हुई हैं. इससे महंगाई और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,167–24,209 का स्तर पहला रेजिस्टेंस हो सकता है. इसके ऊपर 24,261–24,333 का दायरा मजबूत बाधा के रूप में देखा जा रहा है. अगर बाजार इन स्तरों को पार करता है तो तेजी को और मजबूती मिल सकती है, वहीं नीचे की ओर दबाव बढ़ने पर गिरावट तेज हो सकती है.
ग्लोबल फैक्टर्स रखेंगे बाजार को प्रभावित
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ती अनिश्चितता निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है, जो अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. इसके अलावा, वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.
आज का बाजार दिशा के लिहाज से निर्णायक हो सकता है. एक तरफ घरेलू मजबूती के संकेत हैं, तो दूसरी ओर वैश्विक दबाव हावी है. ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर कदम उठाने चाहिए. खासतौर पर करेंसी मूवमेंट, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज बाजार में कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं, जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. इनमें Aadhar Housing Finance, AAVAS Financiers, Ajanta Pharma, Coforge, Dalmia Bharat Sugar, Emcure Pharmaceuticals, Hero MotoCorp, Jammu & Kashmir Bank, Larsen & Toubro, Mahindra & Mahindra, Marico, Punjab National Bank, Raymond, SRF और United Breweries जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके साथ ही प्राइमरी मार्केट में भी हलचल बनी हुई है, जहां OnEMI Technology Solutions का IPO अंतिम दिन में प्रवेश कर चुका है और अब तक इसे सीमित सब्सक्रिप्शन मिला है, जबकि Bagmane Prime Office IPO और Recode Studios IPO दोनों अपने-अपने सब्सक्रिप्शन के दूसरे दिन में पहुंच चुके हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर की प्रमुख कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड (Associated Alcohols & Breweries Limited) ने केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्लूनल (National Company Law Tribunal) की कोच्चि बेंच से SDF इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है. यह सौदा ₹30.85 करोड़ में पूरा किया जाएगा.
NCLT से मिली औपचारिक स्वीकृति
कंपनी के अनुसार 16 अप्रैल 2026 को पारित आदेश के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस अधिग्रहण को मंजूरी दी है. अधिग्रहण पूरा होने के बाद SDF Industries Ltd, AABL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी.
केरल बाजार में मजबूत होती पकड़
एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज़ लिमिटेड ने साल 2018 में केरल बाजार में एंट्री की थी और तब से यह कंपनी के लिए एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट बन गया है. वर्तमान में कंपनी राज्य के शीर्ष 3 निजी खिलाड़ियों में शामिल है और हर महीने लगभग 1.5 लाख केस की बिक्री दर्ज करती है.
इन-हाउस बॉटलिंग से बढ़ेगी दक्षता
इस अधिग्रहण के जरिए कंपनी केरल में अपनी बॉटलिंग ऑपरेशंस को इन-हाउस लाने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन पर बेहतर नियंत्रण, लागत में कमी और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार की उम्मीद है.
कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसन्न केडिया ने कहा कि केरल में कंपनी को खासकर White Brandy से शानदार सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि यह अधिग्रहण ऑपरेशनल कंट्रोल बढ़ाने और नए प्रोडक्ट लॉन्च करने में मदद करेगा, साथ ही भविष्य में निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे.
ग्रोथ और नए अवसरों पर फोकस
कंपनी का मानना है कि इस अधिग्रहण से ऑपरेटिंग लीवरेज का फायदा मिलेगा, जिससे मार्जिन में सुधार होगा और लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, अतिरिक्त बॉटलिंग क्षमता का उपयोग कर कंपनी नए राजस्व स्रोत भी तलाशेगी.
सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है नई यूनिट
अधिग्रहण के बाद कंपनी इस यूनिट को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करेगी, ताकि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन किया जा सके. नई सुविधाओं के साथ संचालन सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है.
एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड का यह कदम केरल बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा. SDF इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण से कंपनी को उत्पादन, गुणवत्ता और विस्तार योजनाओं में नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे वह देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगी.
यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राजधानी में ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी की परेशानी को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने मेट्रो नेटवर्क के बड़े विस्तार को मंजूरी दे दी है. करीब ₹48,204 करोड़ की लागत से दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के तहत 7 नए मेट्रो रूट बनाए जाएंगे, जिनमें 97 किलोमीटर लंबी नई लाइन और 65 स्टेशन शामिल होंगे. इस परियोजना का लक्ष्य 2029 तक प्रमुख कॉरिडोर शुरू करना है.
फेज V-B के तहत शुरू होगा नया विस्तार
यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है और अब अंतिम वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा.
प्रमुख रूट्स पर सबसे ज्यादा फोकस
इतने बड़े प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. सात में से चार रूट्स को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए दिल्ली मेट्रो रेल निगम विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अलग-अलग चरणों में लागू करेगा.
आउटर दिल्ली को मिलेगी बड़ी राहत
इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा बाहरी इलाकों को होगा. नरेला, नजफगढ़, खेड़ा कलां और मिठापुर जैसे क्षेत्रों के लोगों को अब बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी. इससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का समय बचेगा और सफर ज्यादा आसान और सुरक्षित होगा.
इंटरचेंज और कनेक्टिविटी होगी मजबूत
नई योजना में अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों तरह के ट्रैक शामिल होंगे. कई नए इंटरचेंज स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन में बदलना आसान होगा. यह प्रोजेक्ट “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” को बेहतर बनाने पर भी खास ध्यान देगा.
ये हैं प्रस्तावित 7 नए मेट्रो रूट
नई योजना के तहत सात नए कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जो राजधानी के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ेंगे:
1. धंसा बस स्टैंड से नांगलोई (11.859 किमी)
2. सेंट्रल सेक्रेटेरिएट से किशनगढ़ (15.969 किमी)
3. समयपुर बादली से नरेला (12.89 किमी)
4. कीर्ति नगर से पालम (9.967 किमी)
5. जोर बाग से मिठापुर (16.991 किमी)
6. शास्त्री पार्क से मयूर विहार फेज-3 (13.197 किमी)
7. केशवपुरम से रोहिणी सेक्टर-34 (16.285 किमी)
इन रूट्स के जरिए शहर के कई अहम और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.
दिल्ली मेट्रो का यह विस्तार राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव लाने वाला है. दिल्ली मेट्रो रेल निगम के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद न सिर्फ ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि यात्रा का अनुभव भी ज्यादा सुविधाजनक और तेज होगा. आने वाले वर्षों में यह योजना दिल्ली को वैश्विक स्तर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के करीब ले जाएगी.
इस फंडिंग के साथ CHOSEN भारत के स्किनकेयर बाजार में साइंस-आधारित और डर्मेटोलॉजिस्ट-ड्रिवन इनोवेशन को नई दिशा देने की तैयारी में है. आने वाले समय में कंपनी के विस्तार और नए प्रोडक्ट्स पर बाजार की नजर रहेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की पहली एक्सपोज़ोम आधारित स्किनकेयर ब्रांड CHOSEN ने सीरीज A फंडिंग राउंड में 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं. इस निवेश का नेतृत्व Fireside Ventures ने किया, जबकि BOLD, L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड और Alkemi Growth Capital ने भी इसमें भागीदारी की.
निवेशकों का मजबूत भरोसा, डॉक्टरों की भी भागीदारी
इस फंडिंग राउंड में एंजेल निवेशक अवनीश आनंद के साथ कई प्रसिद्ध त्वचा विशेषज्ञों, डॉ. चंदन असोकन, डॉ. केसी निश्चल, डॉ. पुनीत सराओगी, डॉ. निशिता रांका और डॉ. मिक्की सिंह ने भी निवेश किया. इससे कंपनी की क्लिनिकल विश्वसनीयता और मजबूत होती है.
R&D और प्रोडक्ट इनोवेशन पर फोकस
कंपनी इस फंड का उपयोग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करने, नए क्लिनिकली वैलिडेटेड प्रोडक्ट्स विकसित करने, और अपने “Centre of Excellence” को विस्तार देने में करेगी. इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में टैलेंट हायरिंग पर भी जोर दिया जाएगा.
भारतीय त्वचा के लिए साइंस आधारित समाधान
CHOSEN एक्सपोजोम साइंस पर आधारित स्किनकेयर प्रोडक्ट्स विकसित करती है, जो खासतौर पर भारतीय त्वचा के लिए डिजाइन किए गए हैं. कंपनी पिग्मेंटेशन, स्किन टेक्सचर, कंटूर और हेयर एजिंग जैसे चार प्रमुख पहलुओं पर काम करती है.
इसका पोर्टफोलियो टॉपिकल फॉर्मुलेशंस और न्यूट्रास्यूटिकल्स दोनों को कवर करता है, जो “क्लिनिक-टू-कंज्यूमर” मॉडल पर आधारित है.
फाउंडर का बयान
कंपनी की संस्थापक और सीईओ डॉ. रेनिता रंजन ने कहा कि भारतीय त्वचा के लिए वैज्ञानिक और डर्मेटोलॉजिस्ट-आधारित स्किनकेयर की कमी को पूरा करने के लिए CHOSEN की शुरुआत की गई थी. उन्होंने कहा कि यह निवेश उनके साइंस-आधारित अप्रोच की पुष्टि करता है और इससे R&D को और मजबूत किया जाएगा.
निवेशकों को दिखा ग्रोथ का बड़ा अवसर
वरुण वर्मा ने कहा कि CHOSEN क्लिनिकल रिसर्च और उपभोक्ता भरोसे का एक अनोखा संयोजन है. वहीं, समंथा ने इसे साइंस और डर्मेटोलॉजी नेटवर्क का मजबूत मेल बताया. अल्का गोयल के अनुसार, कंपनी तेजी से बढ़ते डर्माकोस्मेटिक बाजार में मजबूत स्थिति में है और लंबे समय में वैल्यू क्रिएशन की क्षमता रखती है.
प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और पहचान
कंपनी के प्रमुख प्रोडक्ट्स में SAFESCREEN® NEXGEN सनस्क्रीन और CHOSEN Sculpt प्रोटोकॉल शामिल हैं, जो क्लिनिकली वैलिडेटेड समाधान प्रदान करते हैं. डॉ. रेनिता राजन स्किनकेयर और लेजर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रमुख विशेषज्ञ मानी जाती हैं और “Sunscreens for Skin of Colour” पुस्तक की लेखिका भी हैं.
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स (Bharat Heavy Electricals Limited) ने मार्च 2026 तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी के मुनाफे में जोरदार उछाल और मजबूत राजस्व वृद्धि के चलते शेयर बाजार में भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां शेयर 13 प्रतिशत तक उछलकर नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया.
मुनाफे में 156% की जबरदस्त बढ़ोतरी
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 156 प्रतिशत बढ़कर 1290.47 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 504.45 करोड़ रुपये था. यह उछाल कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूत सुधार को दर्शाता है.
रेवेन्यू में भी शानदार ग्रोथ
तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37 प्रतिशत बढ़कर 12,310.37 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 8,993.37 करोड़ रुपये था. हालांकि, इस दौरान खर्च भी बढ़कर 10,842.69 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 8,448.14 करोड़ रुपये था. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का कुल रेवेन्यू 33,782.18 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 1,600.26 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड का तोहफा
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी. मंजूरी मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाएगा.
शेयर में जबरदस्त तेजी, नया हाई छुआ
नतीजों के बाद भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर बीएसई पर करीब 13 प्रतिशत चढ़कर 398.95 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर है. पिछले 3 महीनों में शेयर करीब 40 प्रतिशत और एक महीने में 50 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुका है. वहीं एक साल में 68 प्रतिशत और तीन साल में 340 प्रतिशत का रिटर्न दे चुका है.
मार्केट कैप और हिस्सेदारी
तेजी के चलते कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये हो गया है. मार्च 2026 तक कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 58.17 प्रतिशत रही.
मजबूत तिमाही नतीजों, बढ़ते ऑर्डर और बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन के दम पर Bharat Heavy Electricals Limited ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है. आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन और ऑर्डर बुक पर बाजार की नजर बनी रहेगी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त के रूप में ₹17,744.19 करोड़ जारी किए हैं. इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्धता और मजदूरी भुगतान व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है.
समय पर भुगतान और रोजगार उपलब्धता पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि मजदूरी मद के तहत जारी की गई है ताकि काम की मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा सके और भुगतान समय पर किया जा सके. इसके साथ ही प्रशासनिक और सामग्री मद के लिए अब तक ₹3,478 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी जारी किए जा चुके हैं.
नई योजना की ओर बदलाव की तैयारी
सूत्रों ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस योजना को नए नाम से बदला जा सकता है. सरकार “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” यानी विकसित भारत एवं रोजगार आजीविका मिशन (Gramin) लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे संक्षेप में VB-G RAM G भी कहा जा रहा है.
रोजगार में गिरावट पर सरकार का स्पष्टीकरण
हाल ही में मनरेगा रोजगार में लगभग 35.3% मासिक गिरावट दर्ज की गई थी, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना मांग आधारित है. इसलिए रोजगार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. अधिकारियों के अनुसार मौसम, स्थानीय आजीविका के अवसर और क्षेत्रीय जरूरतें रोजगार मांग को प्रभावित करती हैं.
रोजगार बजट में बढ़ोतरी के संकेत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने के लिए लगभग 30 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार निर्धारित किए गए थे, जबकि मई के लिए यह आंकड़ा 43 करोड़ व्यक्ति-दिन से अधिक रखा गया है. यह वित्त वर्ष की पहली छमाही में रोजगार मांग में बढ़ोतरी का संकेत देता है.
नए और पुराने ढांचे का साथ-साथ संचालन
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई योजना पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक MGNREGA जारी रहेगी. बजट में भी दोनों योजनाओं के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं.
वित्त वर्ष 2027 के बजट में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ और मनरेगा के लिए ₹30,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पुराने भुगतान और संक्रमण अवधि के खर्च पूरे किए जा सकें.
कुल मिलाकर सरकार का यह कदम ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को स्थिर रखने और मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. साथ ही नई रोजगार योजना की तैयारी से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में ग्रामीण विकास मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रैल महीने के दौरान सुधार देखने को मिला है. हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. निर्यात में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया, लेकिन लागत और महंगाई का दबाव भी लगातार बना हुआ है.
PMI में सुधार, लेकिन रफ्तार अब भी धीमी
पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. यह डेटा S&P Global और HSBC की रिपोर्ट में जारी किया गया है. हालांकि यह पिछले महीने के फ्लैश अनुमान 55.9 से कम रहा. PMI का 50 से ऊपर रहना विस्तार (growth) को दर्शाता है. यह लगातार 54वां महीना है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विस्तार के क्षेत्र में बना हुआ है.
पश्चिम एशिया संकट का असर जारी
अर्थशास्त्रियों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब महंगाई और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव बढ़ा है, जिससे उत्पादन लागत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है.
नए ऑर्डर और उत्पादन में हल्का सुधार
अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.
हालांकि, निर्यात ऑर्डर में तेज उछाल देखने को मिला और यह सात महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
लागत और महंगाई में तेज बढ़ोतरी
अप्रैल में एल्यूमिनियम, केमिकल्स, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनपुट कॉस्ट में तेज इजाफा हुआ. सर्वे में इसे सीधे तौर पर पश्चिम एशिया संकट से जोड़ा गया है.
इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी, जबकि आउटपुट कीमतों में भी पिछले छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई.
महंगाई 2022 के बाद उच्चतम स्तर पर
सर्वे के अनुसार कुल महंगाई दर अगस्त 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके चलते कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी की है. उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में लागत में थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन कुल मिलाकर दबाव अभी भी बना हुआ है.
रोजगार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रोजगार सृजन की दर 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. कंपनियां विस्तार योजनाओं के तहत नई भर्ती कर रही हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है.
कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार विस्तार के रास्ते पर बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी महंगाई और लागत का दबाव इसकी रफ्तार को प्रभावित कर रहा है. निर्यात में मजबूती फिलहाल इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है.
ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक तेल बाजार से जुड़ी अहम खबर में तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक (OPEC+) ने जून महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन लक्ष्य में मामूली बढ़ोतरी पर सहमति जताई है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण इसका वास्तविक सप्लाई पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं होगा.
1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी
ओपेक+ के सात सदस्य देशों ने जून में संयुक्त रूप से अपने उत्पादन लक्ष्य में 188,000 बैरल प्रति दिन (bpd) की वृद्धि करने का फैसला किया है. यह लगातार तीसरा महीना है जब समूह उत्पादन बढ़ा रहा है. यह बढ़ोतरी मई में तय किए गए समान स्तर के अनुरूप है, हालांकि इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का हिस्सा शामिल नहीं है, जिसने 1 मई को समूह से अलग होने की घोषणा की थी.
भू-राजनीतिक तनाव से सीमित रहेगा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम दिखाता है कि ओपेक+ मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद सामान्य स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. लेकिन सप्लाई में वास्तविक वृद्धि तब तक सीमित रहेगी जब तक शिपिंग स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं.
ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य, जो खाड़ी देशों के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है, वहां आवागमन बाधित बना हुआ है. इससे अतिरिक्त उत्पादन के बावजूद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ नहीं पा रही है.
सऊदी अरब का उत्पादन लक्ष्य बढ़ा
नई व्यवस्था के तहत प्रमुख उत्पादक देश साउदी अरब का उत्पादन लक्ष्य जून में बढ़कर 10.291 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा. हालांकि वास्तविक उत्पादन इससे काफी कम है. ओपेक के अनुसार, मार्च में सऊदी अरब का वास्तविक उत्पादन लगभग 7.76 मिलियन बैरल प्रतिदिन था.
बाजार को संतुलित रखने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक+ का यह फैसला इस बात का संकेत है कि समूह भविष्य में आपूर्ति तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन फिलहाल स्थिति को संतुलित बनाए रखना चाहता है. साथ ही यह भी संदेश दिया जा रहा है कि हाल के बदलावों के बावजूद समूह की एकजुटता और प्रभाव बरकरार है.
कुल मिलाकर, OPEC+ का यह निर्णय बाजार में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखाता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि भू-राजनीतिक हालात सामान्य होने पर उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक तेल आपूर्ति पर सबसे बड़ा असर डाल रही है.