सड़क हादसों से GDP को 3% की चोट, गडकरी ने सामूहिक प्रयासों पर दिया जोर

गडकरी ने बताया कि बेहतर और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए देश में 2,500 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं.

रितु राणा by
Published - Tuesday, 30 June, 2026
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Tuesday, 30 June, 2026
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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उबर के सुरक्षा कार्यक्रम में कहा कि सड़क दुर्घटनाएं भारत और दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या हैं. उन्होंने कहा कि सड़क हादसों के कारण देश को हर साल जीडीपी का करीब 3 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ता है. गडकरी ने कहा कि आतंकवाद, युद्ध और अन्य आपदाओं की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोगों की जान जाती है.

अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1999 में महाराष्ट्र में उनका भी एक गंभीर सड़क हादसा हुआ था. उन्होंने कहा कि ट्रक के नीचे लगी सुरक्षा संरचना की वजह से उनकी और उनके परिवार की जान बच सकी. इस घटना के बाद उन्होंने सड़क सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया.

ब्लैक स्पॉट सुधारने पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने देशभर में दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट की पहचान की है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इन स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए करीब 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो रहा सड़क निर्माण

गडकरी ने कहा कि नई सड़कों और हाईवे के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया जा रहा है. बेहतर साइनेज, मार्किंग सिस्टम, अंडरपास और अन्य सुरक्षा सुविधाओं को शामिल किया जा रहा है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके.

कैब कंपनियों से मांगा सहयोग

उन्होंने कहा कि देश में कैब सेवाओं का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और उबर की इसमें बड़ी हिस्सेदारी है. ऐसे में कैब कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. उन्होंने उबर और अन्य प्लेटफॉर्म से सड़क सुरक्षा अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की.

वाहन सुरक्षा और हेलमेट नियमों को किया सख्त

गडकरी ने बताया कि सरकार ने ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और वाहन सुरक्षा मानकों में कई सुधार किए हैं. दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया है. साथ ही वाहन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे बाइक बेचते समय हेलमेट भी उपलब्ध कराएं, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके.

दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को मिलेगा पुरस्कार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों को पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. सरकार ऐसे 'गुड सेमेरिटन' लोगों को 25 हजार रुपये का पुरस्कार भी देती है.

दुर्घटना पीड़ितों के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार

उन्होंने कहा कि देश की किसी भी सड़क पर दुर्घटना होने के बाद घायल व्यक्ति को किसी भी अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है. सरकार सात दिनों तक इलाज के लिए अधिकतम एक लाख रुपये तक का खर्च वहन कर रही है. इस योजना का लाभ हजारों लोगों को मिल चुका है.

देशभर में खुलेंगे 2,500 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल

गडकरी ने बताया कि बेहतर और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देने के लिए देश में 2,500 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं. इसके अलावा परिवहन विभाग की 16 सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे लोगों को सुविधा मिलेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा.

हिट एंड रन मामलों में बढ़ाया गया मुआवजा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिट एंड रन मामलों में मुआवजा राशि बढ़ा दी गई है. अब ऐसे मामलों में मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे परिवार को तत्काल राहत मिल सके.

अपने संबोधन के अंत में नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें कैब कंपनियों, परिवहन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने सभी से मिलकर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था बनाने की अपील की.
 

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तमिलनाडु में 2,500 करोड़ रुपये निवेश करेगा हिंदुजा ग्रुप, क्लीन एनर्जी और EV पर फोकस

हिंदुजा ग्रुप तमिलनाडु में रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा.

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Friday, 14 August, 2026
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हिंदुजा ग्रुप ने तमिलनाडु में 2,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में किया जाएगा. राज्य में मैन्युफैक्चरिंग और स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश आकर्षित किए जा रहे हैं और हिंदुजा ग्रुप का यह नया निवेश इसी दिशा में अहम माना जा रहा है.

क्लीन एनर्जी पर होगा बड़ा निवेश

इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा हिंदुजा रिन्यूएबल्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड यानी HREPL के जरिए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा. कंपनी सोलर, विंड और बैटरी टेक्नोलॉजी से जुड़ी 200 मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने की योजना बना रही है. यह पहल तमिलनाडु में क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और भारत के एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में भी अहम होगी.

हिंदुजा ग्रुप ऑफ कंपनीज (इंडिया) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा ने कहा कि यह निवेश तमिलनाडु के औद्योगिक इकोसिस्टम और राज्य की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर ग्रुप के भरोसे को दर्शाता है. उन्होंने राज्य में मजबूत टैलेंट बेस, बेहतर औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में मौजूद अवसरों को निवेश के प्रमुख कारणों में शामिल बताया.

इलेक्ट्रिक बस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर

मोबिलिटी सेक्टर में OHM Global Mobility Ltd राज्य में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही कंपनी तमिलनाडु में अपने मोबिलिटी सॉल्यूशंस वैल्यू चेन का विस्तार करेगी.

हिंदुजा ग्रुप अपने व्यापक निवेश रोडमैप के तहत बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल मोबिलिटी सॉल्यूशंस में भी अवसर तलाशेगा. इससे राज्य के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को और मजबूती मिल सकती है.

तमिलनाडु पहले से ही भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है और ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में लगातार निवेश आकर्षित कर रहा है. हिंदुजा ग्रुप का 2,500 करोड़ रुपये का नया निवेश राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विस्तार को गति देने में भी मददगार साबित हो सकता है.
 

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रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ की धमकी के बावजूद भारत-US ट्रेड डील पर कायम: वाणिज्य सचिव

अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई के बीच भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

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Friday, 14 August, 2026
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भारत और अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने से जुड़े संभावित अमेरिकी कानून के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत नियमित रूप से हो रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले प्रस्तावित अमेरिकी कानून के भारत पर संभावित असर को लेकर पूछे गए सवाल पर अग्रवाल ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने कहा, "यह अमेरिका की विधायी प्रक्रिया का मामला है, जो अभी जारी है. मुझे नहीं लगता कि हमें इस पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए. यह उनका आंतरिक मामला है."

ट्रेड डील पर जारी है बातचीत

वाणिज्य सचिव ने कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है. दोनों पक्षों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है. अग्रवाल ने कहा, "हम ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं और हमारे संपर्क नियमित हैं. दोनों पक्ष उस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं, जिस पर सहमति बनी है."

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दी थी. इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. हालांकि, इस विधेयक को आगे की विधायी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी विचार के लिए जाना होगा.

BTA के जरिए व्यापार बढ़ाने की तैयारी

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी Bilateral Trade Agreement (BTA) को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना और व्यापार से जुड़ी प्रमुख बाधाओं को दूर करना है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली के दौरे पर आए थे. इस दौरान उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के कई अहम पहलुओं की समीक्षा की थी. दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन की मजबूती, गैर-टैरिफ बाधाओं और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.

भारत और अमेरिका ने कहा है कि दोनों देशों की वार्ता टीमों ने समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की है. दोनों पक्ष एक ऐसे व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के कारोबार, किसानों, कामगारों और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाए.
 


JSW सीमेंट का मुनाफा 61% बढ़ा, आय में 22% का इजाफा; 500 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी

जून तिमाही में कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार दिखा, लेकिन ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत बनी चिंता. कंपनी के बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये तक जुटाने और JSW One Platforms के IPO में हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दी.

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Friday, 14 August, 2026
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जेएसडब्ल्यू (JSW Cement) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 61% बढ़कर 160.64 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ऑपरेशंस से होने वाली आय 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये पहुंच गई. हालांकि, इस दौरान बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग कॉस्ट में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. जून तिमाही के नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए गए. इससे पहले गुरुवार को BSE पर JSW Cement का शेयर 131.05 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ.

पिछले साल हुआ था भारी घाटा

वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में कंपनी को 1,356.17 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. हालांकि, उस तिमाही के नतीजों पर 1,466 करोड़ रुपये के एक असाधारण खर्च का असर पड़ा था. यह खर्च अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयरों के कन्वर्जन से जुड़े वैल्यूएशन इंपैक्ट के कारण हुआ था. अगर इस असाधारण मद को हटा दिया जाए तो पिछले साल की जून तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स करीब 100 करोड़ रुपये था. इस आधार पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी के मुनाफे में करीब 60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तिमाही के दौरान एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा 15.5% बढ़कर 190.2 करोड़ रुपये हो गया.

22% बढ़ी आय, लेकिन खर्च भी बढ़ा

JSW Cement की ऑपरेशंस से आय सालाना आधार पर 21.57% बढ़कर 1,896.41 करोड़ रुपये रही. कंपनी को अधिक बिजनेस वॉल्यूम से आय बढ़ाने में मदद मिली. हालांकि, कुल खर्च आय की तुलना में तेज गति से बढ़ा. डिप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट समेत कंपनी का कुल खर्च 26.49% बढ़कर 1,792.75 करोड़ रुपये हो गया. खर्च बढ़ने की मुख्य वजह बिजली और ईंधन, कच्चे माल तथा फ्रेट और हैंडलिंग लागत में इजाफा रहा.

पावर और फ्यूल एक्सपेंस 43.72% बढ़कर 305.29 करोड़ रुपये पहुंच गया. कच्चे माल की लागत 22.71% बढ़कर 443.72 करोड़ रुपये रही. वहीं, फ्रेट और हैंडलिंग खर्च सालाना आधार पर 14.23% बढ़कर 415.19 करोड़ रुपये हो गया.

मार्च तिमाही के मुकाबले मुनाफे में गिरावट

तिमाही आधार पर कंपनी की आय लगभग स्थिर रही, लेकिन मार्च 2026 तिमाही की तुलना में मुनाफा 56.73% घट गया. इसकी बड़ी वजह पिछली तिमाही का हाई बेस रहा, जब कंपनी के मुनाफे को एकमुश्त टैक्स बेनिफिट से बढ़ावा मिला था. मार्च 2026 तिमाही में JSW Cement ने 371.33 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. इसमें 211.2 करोड़ रुपये का टैक्स बेनिफिट शामिल था. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 से नई टैक्स व्यवस्था अपनाने का फैसला किया था, जिसके बाद नेट डिफर्ड टैक्स देनदारियों में कमी से यह फायदा मिला. एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले कंपनी का मुनाफा भी मार्च तिमाही के 219 करोड़ रुपये से घटकर जून तिमाही में करीब 190 करोड़ रुपये रह गया.

500 करोड़ रुपये जुटाएगी कंपनी

JSW Cement के बोर्ड ने अलग से 500 करोड़ रुपये तक की फंडरेजिंग को मंजूरी दी है. कंपनी प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर रेटेड और लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके यह राशि जुटाएगी. इससे कंपनी को अपने सीमेंट कारोबार के विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन मिलेगा.

इसके अलावा बोर्ड ने JSW One Platforms के प्रस्तावित IPO में प्रमोटर सेलिंग शेयरहोल्डर के तौर पर JSW Cement की भागीदारी को भी मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव के तहत कंपनी JSW One Platforms में अपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाली इक्विटी हिस्सेदारी में से कुल 123 करोड़ रुपये तक के शेयर IPO के जरिए बेच सकती है.
 


2047 तक भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकते हैं ये 4 सेक्टर, नीति आयोग ने बताई बड़ी चुनौतियां

केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग को नीति आयोग ने भारत के औद्योगिक विस्तार, रोजगार और निर्यात के लिए अहम सेक्टर बताया है.

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Friday, 14 August, 2026
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भारत के सामने 2047 तक दुनिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने का बड़ा लक्ष्य है. इस दिशा में केमिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट तथा सोलर फोटोवोल्टिक यानी सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग जैसे चार सेक्टर अहम भूमिका निभा सकते हैं. नीति आयोग ने गुरुवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर तेजी से बढ़ने की जरूरत होगी.

नीति आयोग की रिपोर्ट 'Key Sectors to Position India as a Global Manufacturing Hub' में इन चार सेक्टरों को औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने की बड़ी क्षमता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है.

भारत के पास कई बड़े फायदे

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं. इनमें बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, लगातार बेहतर होता इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार किया जा रहा नीतिगत माहौल शामिल है.

वैश्विक स्तर पर कंपनियों द्वारा अपनी सप्लाई चेन को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग देशों में फैलाने की कोशिश भी भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई नेटवर्क में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा.

आयात निर्भरता और स्किल की कमी बड़ी चुनौती

हालांकि, नीति आयोग ने साफ कहा कि सिर्फ इन फायदों के आधार पर भारत दुनिया की अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता. महत्वपूर्ण कच्चे माल और इनपुट के लिए आयात पर निर्भरता, बिखरी हुई सप्लाई चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की कमियां, घरेलू स्तर पर सीमित वैल्यू एडिशन, तकनीकी बाधाएं और कुशल श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियां भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही हैं.

इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों, वित्तीय संस्थाओं और इनोवेशन इकोसिस्टम को मिलकर काम करना होगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को केवल असेंबली आधारित उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय ग्लोबल वैल्यू चेन में गहरी भागीदारी बढ़ानी होगी.

केमिकल सेक्टर में बढ़ानी होगी घरेलू क्षमता

नीति आयोग ने केमिकल सेक्टर में घरेलू स्तर पर फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ाने, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने और डाउनस्ट्रीम वैल्यू एडिशन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है. इसी तरह अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.

एक नीति नहीं, लंबे समय की रणनीति जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्थाओं के अनुभव से पता चलता है कि औद्योगिक विकास किसी एक नीति या कदम से संभव नहीं है. इसके लिए नीतियों में निरंतरता, औद्योगिक क्लस्टर, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, लक्षित प्रोत्साहन, तकनीक और कौशल विकास में लगातार निवेश जरूरी होगा.

भारतीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया गया है. ग्लोबल वैल्यू चेन में ज्यादा भागीदारी से भारतीय कंपनियों को नई तकनीक तक पहुंच, निर्यात बढ़ाने और घरेलू स्तर पर ज्यादा वैल्यू एडिशन का अवसर मिल सकता है.

'विकसित भारत @2047' में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका

रिपोर्ट जारी करते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य के तहत देश के आर्थिक और औद्योगिक बदलाव में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की केंद्रीय भूमिका होगी.

उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग निवेश, इनोवेशन और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा कर सकता है, उत्पादकता बढ़ा सकता है और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत कर सकता है.

लाहिड़ी के मुताबिक, भारत की युवा आबादी भी देश के लिए बड़ी ताकत है. करीब 28 साल की औसत आयु वाले कार्यबल के जरिए भारत अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है. नीति आयोग का मानना है कि सही नीतियों, बेहतर कौशल, मजबूत सप्लाई चेन और तकनीकी क्षमता के साथ मैन्युफैक्चरिंग भारत को 2047 तक वैश्विक आर्थिक ताकत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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₹1 लाख करोड़ की मेगा डील! एयरफोर्स के लिए भारत में बनेंगे 60 नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट

रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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Friday, 14 August, 2026
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भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत में ही 60 नए सैन्य परिवहन विमान बनाए जाने का प्रस्ताव है. अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और ब्राजील की एम्ब्रेयर के बीच इस प्रोजेक्ट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है.

टाटा, अडानी, महिंद्रा और HAL को बुलावा

रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोग्राम के लिए टाटा समूह, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, महिंद्रा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL समेत प्रमुख भारतीय कंपनियों को शामिल किया है. ये कंपनियां किसी वैश्विक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर के साथ साझेदारी कर भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बोली लगाएंगी. चयन प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन, एयरक्राफ्ट ट्रायल और टेक्नो-कमर्शियल प्रस्तावों को आधार बनाया जाएगा. प्रोजेक्ट के बड़े आकार और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए अंतिम चयन में दो साल से ज्यादा का समय लग सकता है.

C-130J और C-390 के बीच हो सकता है मुकाबला

भारतीय वायुसेना की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए इस दौड़ में मुख्य मुकाबला लॉकहीड मार्टिन के C-130J और एम्ब्रेयर के C-390 मिलेनियम एयरक्राफ्ट के बीच होने की संभावना है. लॉकहीड मार्टिन ने भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को अपना साझेदार बनाया है. टाटा समूह पहले से ही एयरबस के साथ मिलकर वडोदरा में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण कर रहा है.

दूसरी ओर, एम्ब्रेयर ने पहले इस प्रोग्राम के लिए महिंद्रा के साथ साझेदारी की घोषणा की थी. हालांकि, कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ भी संभावित साझेदारी पर विचार कर सकती है. एम्ब्रेयर और अडानी ने हाल ही में नागरिक यात्री विमानों के निर्माण से जुड़े सहयोग की भी घोषणा की है.

AN-32 और IL-76 बेड़े की लेंगे जगह

नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना के पुराने AN-32 और IL-76 विमानों के बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे. इनका इस्तेमाल सैन्य बलों की रणनीतिक, सामरिक और ऑपरेशनल एयरलिफ्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा.

C-295 प्रोग्राम के बाद यह भारत में स्थापित होने वाली दूसरी बड़ी मिलिट्री एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग लाइन हो सकती है. करीब 1 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है, बल्कि देश में एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी बड़ा बढ़ावा मिल सकता है.
 


कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स ने बढ़ाया आयात का बिल, जुलाई में 6 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा व्यापार घाटा

जुलाई में आयात 76.22 अरब डॉलर के 9 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा. कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की भारी खरीदारी से व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, हालांकि निर्यात में करीब 20% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.

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Friday, 14 August, 2026
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भारत के विदेशी व्यापार मोर्चे पर जुलाई में आयात का दबाव बढ़ता नजर आया. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, उर्वरक और कोयले की खरीद में तेज बढ़ोतरी के चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. जुलाई में भारत का कुल आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जो 9 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि राहत की बात यह रही कि वस्तु निर्यात में भी करीब 20% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

31.98 अरब डॉलर पर पहुंचा व्यापार घाटा

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया. जून में यह 30.42 अरब डॉलर और जुलाई 2025 में 27.88 अरब डॉलर था. इस तरह एक महीने और एक साल, दोनों आधार पर व्यापार घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में वस्तुओं का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आयात पर हुआ यह खर्च अक्टूबर 2025 के 76.73 अरब डॉलर के बाद दूसरा सबसे अधिक है.

कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात तेजी से बढ़ा

जुलाई में कच्चे तेल का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 18.31 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 46% की तेज वृद्धि के साथ 14.37 अरब डॉलर पहुंच गया. इसके अलावा उर्वरक आयात 55% बढ़कर 2.48 अरब डॉलर और कोयले का आयात 29% बढ़कर 3.05 अरब डॉलर रहा. सोने का आयात भी जुलाई में बढ़कर 4.16 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 5% अधिक है. इन प्रमुख वस्तुओं की आयात मांग बढ़ने से देश का कुल आयात बिल काफी ऊंचा रहा.

निर्यात में करीब 20% की मजबूत बढ़त

आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद जुलाई में वस्तु निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा. भारत का वस्तु निर्यात करीब 20% बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया. यह मई में दर्ज 45.42 अरब डॉलर के बाद अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है. वाणिज्य विभाग के मुताबिक, निर्यात में वृद्धि के पीछे ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के बाद वहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ना प्रमुख कारण रहा. इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी जुलाई में 18% बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया.

सेवाओं से मिला सहारा

जुलाई में सेवा निर्यात करीब 6% बढ़कर 35.89 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि सेवा आयात करीब 10% बढ़कर 18.94 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इससे सेवाओं का व्यापार अधिशेष करीब 16.95 अरब डॉलर रहा.

भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने के अंत में सेवा व्यापार से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी कर सकता है. ऐसे में वस्तुओं के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के बावजूद सेवा क्षेत्र का मजबूत अधिशेष देश के समग्र बाहरी व्यापार संतुलन को कुछ राहत दे सकता है.
 


सेंसेक्स संभला, निफ्टी फिसला... आज इन शेयरों पर रहेगी नजर, बाजार खुलने से पहले जानें अहम संकेत

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15% की तेजी के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 40.10 अंक यानी 0.16% की गिरावट के साथ 24,395.85 अंक पर बंद हुआ.

Last Modified:
Friday, 14 August, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स आखिरी घंटे की खरीदारी से हरे निशान में लौट आया, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुआ. अब आज बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, रुपये की चाल और कॉरपोरेट खबरों पर रहेगी. SBI के 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड इश्यू से लेकर L&T के बड़े ऑर्डर, UltraTech Cement और Urban Company में हुई ब्लॉक डील तथा MSCI India Index में बदलाव तक कई ऐसे ट्रिगर हैं, जिनसे चुनिंदा शेयरों में आज जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है.

सेंसेक्स 113 अंक चढ़ा, निफ्टी 40 अंक फिसला

पिछले कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15% की तेजी के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 40.10 अंक यानी 0.16% की गिरावट के साथ 24,395.85 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के ज्यादातर हिस्से में दोनों प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे, लेकिन आखिरी घंटे में खरीदारी से सेंसेक्स हरे निशान में लौट आया. इस दौरान रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.1% गिरकर 95.44 पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.33 के स्तर पर बंद हुआ था.

सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयरों में तेजी

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 बढ़त के साथ बंद हुए. इंडिगो में सबसे ज्यादा 2.86% की तेजी रही. इसके अलावा एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इटरनल, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स और ट्रेंट के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस और टाटा स्टील दबाव में रहे.

मेटल शेयरों पर दबाव, केमिकल सेक्टर में तेजी

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और ग्रासिम इंडस्ट्रीज निफ्टी50 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे. वहीं, निफ्टी केमिकल इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.15% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.27% की तेजी के साथ बंद हुए.

आज इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई कॉरपोरेट खबरों के चलते चुनिंदा शेयरों में जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है. SBI की लंदन ब्रांच ने 5.25% कूपन दर पर बॉन्ड जारी कर 50 करोड़ डॉलर जुटाए हैं, जबकि Piramal Pharma में करीब 6% हिस्सेदारी की 1,750 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील की संभावना है. Saatvik Green Energy की सहायक कंपनी को 476 करोड़ रुपये का सोलर PV मॉड्यूल ऑर्डर मिला है, वहीं Aditya Birla Real Estate की सब्सिडियरी Birla Estates ने नवी मुंबई के वाशी में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में एंट्री की है, जिससे करीब 2,600 करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है. BHEL ने ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए नॉर्वे की Hystar AS के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. Urban Company में भी SBI Mutual Fund समेत कई बड़े निवेशकों के बीच करोड़ों रुपये के शेयरों की खरीद-बिक्री हुई है. वहीं MSCI की अगस्त समीक्षा में Adani Energy Solutions, Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, Laurus Labs और Lenskart Solutions को MSCI India Index में शामिल किया गया है, जबकि Balkrishna Industries, SBI Cards और Astral को बाहर किया जाएगा. L&T को 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के बीच का बड़ा AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मिला है, जबकि UltraTech Cement में प्रमोटर इकाई Pilani Investment and Industries Corporation ने करीब 2,896 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं. इसके अलावा Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी.

आज बाजार के लिए क्या होंगे अहम संकेत?

विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले असर पर रहेगी. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी महत्वपूर्ण होगी. पिछले सत्र में सेंसेक्स में आखिरी घंटे की रिकवरी ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की दिलचस्पी दिखाई, लेकिन निफ्टी का गिरावट के साथ बंद होना बाजार में अभी भी सतर्कता का संकेत देता है. ऐसे में आज बैंकिंग, मेटल, आईटी के साथ-साथ SBI, L&T, UltraTech Cement, Urban Company और MSCI से जुड़े शेयरों में खास हलचल देखने को मिल सकती है. निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ इन कॉरपोरेट ट्रिगर्स पर भी बनी रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फैसले का किया समर्थन, नए चेयरमैन की तलाश शुरू

एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते हैं. टाटा ट्रस्ट्स ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
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टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करने के फैसले का समर्थन किया है. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा. इसके बाद टाटा संस की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि उसके नॉमिनी डायरेक्टर्स को 12 अगस्त को चंद्रशेखरन का ईमेल मिला था, जिसमें उन्होंने बताया कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे. ट्रस्ट ने पिछले करीब एक दशक के दौरान टाटा संस और टाटा ग्रुप के नेतृत्व और योगदान के लिए चंद्रशेखरन की सराहना भी की.

नए चेयरमैन के लिए बनेगी चयन समिति

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने टाटा संस के Articles of Association के तहत एक चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया है. यह समिति टाटा संस के अगले चेयरमैन के लिए उम्मीदवार की सिफारिश करेगी.

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारू, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए टाटा संस को पूरा समर्थन देगा. यह प्रक्रिया टाटा संस और पूरे टाटा ग्रुप के मूल्यों और दीर्घकालिक हितों के अनुरूप होगी. ट्रस्ट ने कहा कि वह ग्रुप में महत्वपूर्ण बदलाव, विकास और परिवर्तन के दौर में चंद्रशेखरन के योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त करता है.

दोबारा नियुक्ति को नहीं मिला सर्वसम्मत समर्थन

चंद्रशेखरन ने दोबारा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उनकी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को टाटा संस के बोर्ड का सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला था. अपने पत्र में चंद्रशेखरन ने कहा कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने की सिफारिश करने का फैसला किया था. इसके बाद इस प्रस्ताव को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी रिकॉर्ड किया और इसकी सिफारिश की. हालांकि, उनके मुताबिक 24 फरवरी को टाटा संस के बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा गया, लेकिन एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका. चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में उन्होंने इस फैसले को टालना उचित समझा.

छह महीने तक नहीं हो सका फैसला

चंद्रशेखरन ने अपने पत्र में यह भी कहा कि बोर्ड की बैठक के करीब छह महीने बाद भी इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर समय रहते फैसला होना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों, निवेशकों, भागीदारों और अन्य हितधारकों के बीच स्पष्टता बनी रहे.

टाटा संस में ट्रस्ट्स की 65.9% हिस्सेदारी

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 65.9 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में ट्रस्ट्स की अहम भूमिका होगी. अब चंद्रशेखरन के मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने से पहले नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि टाटा संस और टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन सुचारू तरीके से हो सके.
 


AI सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, L&T बनाएगी चेन्नई में 10,000 GPU वाली देश की सबसे बड़ी AI फैक्ट्री

भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ा निवेश सामने आया है. लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को करीब ₹10,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत में बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है. इसी क्रम में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा करीब ₹10,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ का ऑर्डर मिला है. इस प्रोजेक्ट के तहत चेन्नई में भारत की सबसे बड़ी सिंगल-क्लस्टर AI फैक्ट्री विकसित की जाएगी.

कंपनी ने जानकारी दी है कि इस AI फैक्ट्री में 10,000 NVIDIA B300 GPU लगाए जाएंगे. यह प्रोजेक्ट अमेरिकी AI क्लाउड कंपनी Together AI के लिए तैयार किया जाएगा. इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर AI मॉडल की ट्रेनिंग, डेटा प्रोसेसिंग, इंफरेंस और फाइन-ट्यूनिंग जैसे कामों के लिए किया जाएगा.

L&T की AI फैक्ट्री में क्या होगा?

इस प्रोजेक्ट को L&T की AI इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडियरी LTN कम्यूट विकसित करेगी. यह Vyoma.AI का हिस्सा है. AI फैक्ट्री को चेन्नई में मौजूद Vyoma के डेटा सेंटर कैंपस में तैयार किया जाएगा. चेन्नई स्थित यह कैंपस आगे चलकर गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर साइट के रूप में विकसित करने की योजना है. प्रोजेक्ट के पहले चरण की क्षमता 250 मेगावाट रखी गई है, जबकि पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को 150 MVA के लिए तैयार किया जा रहा है. इससे भविष्य में AI फैक्ट्री की क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश रहेगी.

हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग से लेकर AI ऑपरेशंस तक

फैसिलिटी में डेटा सेंटर के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, तेज नेटवर्किंग, लो-लेटेंसी इंटरकनेक्ट, पैरेलल स्टोरेज और AI ऑपरेशंस से जुड़ी सुविधाएं शामिल होंगी. इसका उद्देश्य कंपनियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर बड़े AI वर्कलोड को शुरू करने और जरूरत के मुताबिक उसकी क्षमता बढ़ाने की सुविधा देना है. बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस तरह का हाई-एंड इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण माना जाता है.

L&T पहली बार बड़े स्तर पर AI Factory कारोबार में उतरेगी

यह प्रोजेक्ट L&T के लिए भी खास है, क्योंकि कंपनी पहली बार बड़े पैमाने पर AI Factory बिजनेस में प्रवेश कर रही है. कंपनी का लक्ष्य तेजी से बढ़ रहे AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है. L&T के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एसएन सुब्रह्मण्यन ने कहा कि AI अब लगभग हर इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है. उनके मुताबिक, यह AI फैक्ट्री भारत को अगली पीढ़ी के AI इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. Together AI के को-फाउंडर और CEO विपुल वेद प्रकाश ने भी इस साझेदारी को अहम बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया में AI को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए बहुत बड़े और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी.
 


RBI का बड़ा कदम: लोन की ब्याज दर और छिपे चार्ज पर लगेगी लगाम, ग्राहकों के लिए नए नियमों का प्रस्ताव

रिजर्व बैंक ने लोन की कीमत तय करने के लिए एक समान फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी किया है. इसमें फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल और MSME लोन को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने, स्प्रेड में मनमानी रोकने और छोटे कर्ज पर APR की सीमा तय करने का प्रस्ताव है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और अन्य रेगुलेटेड लेंडर्स के लिए लोन की ब्याज दर तय करने का एक समान फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसका मकसद कर्ज की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, अलग-अलग संस्थानों के बीच ब्याज दर तय करने के तरीकों में अंतर कम करना और उधार लेने वालों को मनमाने शुल्क या ब्याज से बचाना है.

RBI के ड्राफ्ट नियमों में बोर्ड से मंजूर प्राइसिंग पॉलिसी, बेंचमार्क आधारित ब्याज दर और रिस्क के आधार पर स्प्रेड तय करने की व्यवस्था का प्रस्ताव है. साथ ही कम वैल्यू वाले और माइक्रोफाइनेंस लोन में बहुत ज्यादा ब्याज वसूलने से बचाने के लिए भी सुरक्षा उपाय सुझाए गए हैं. ड्राफ्ट पर 11 सितंबर 2026 तक लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं. प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं.

फ्लोटिंग रेट लोन पर बड़ा बदलाव

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, कमर्शियल बैंकों के सभी फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल या पर्सनल लोन और MSME लोन को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी होगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि RBI की नीतिगत दरों में बदलाव का असर ग्राहकों तक ज्यादा पारदर्शी तरीके से पहुंचे.

बाहरी बेंचमार्क किसी एक बैंक के नियंत्रण में नहीं होता. ऐसे में रेपो रेट या अन्य संबंधित बेंचमार्क में बदलाव होने पर लोन की ब्याज दर में बदलाव का असर ग्राहकों तक अपेक्षाकृत स्पष्ट तरीके से पहुंच सकेगा. हालांकि, NBFCs, ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, रीजनल रूरल बैंक और कोऑपरेटिव बैंकों के लिए बाहरी बेंचमार्क अपनाना अनिवार्य नहीं होगा. उन्हें इस बारे में फैसला लेने की छूट रहेगी.

बैंक मनमाने तरीके से स्प्रेड नहीं बढ़ा सकेंगे

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में लोन की ब्याज दर को बेंचमार्क और रिस्क-बेस्ड स्प्रेड से जोड़ने की व्यवस्था है. स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिजनेस स्ट्रैटेजी प्रीमियम जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं.

RBI ने प्रस्ताव दिया है कि अगर उधार लेने वाले की क्रेडिट प्रोफाइल में बदलाव आता है, तभी क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में बदलाव किया जा सके. वहीं स्प्रेड के अन्य हिस्सों में आम तौर पर तीन साल से पहले बदलाव नहीं किया जा सकेगा, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है.

फ्लोटिंग रेट वाले लोन में बेंचमार्क, रीसेट की अवधि और रीसेट की तारीख की जानकारी लोन एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से देनी होगी. प्रस्ताव के तहत बेंचमार्क को आम तौर पर तीन महीने से ज्यादा के अंतराल पर रीसेट नहीं किया जा सकेगा.

छोटे लोन पर APR की सीमा का प्रस्ताव

RBI ने कम वैल्यू वाले और माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए अलग सुरक्षा उपाय का भी प्रस्ताव रखा है. रेगुलेटेड संस्थाओं को एनुअल परसेंटेज रेट यानी APR पर स्पष्ट सीमा तय करनी होगी. इसमें ब्याज के साथ अन्य शुल्क भी शामिल होंगे, ताकि छोटे कर्ज लेने वालों पर अत्यधिक लागत का बोझ न पड़े.

प्रस्ताव के मुताबिक, ₹50,000 तक के पर्सनल लोन को कम वैल्यू वाला लोन माना जाएगा. छोटे और सीमांत किसानों को दिए जाने वाले शॉर्ट-टर्म एग्रीकल्चरल लोन में कुल ब्याज और शुल्क मूल राशि से अधिक नहीं होने का भी प्रस्ताव है.

पुराने लोन को भी नए फ्रेमवर्क में लाने की तैयारी

ड्राफ्ट के अनुसार, मौजूदा लोन को 1 अप्रैल 2029 तक एक बार की मैपिंग प्रक्रिया के जरिए प्रस्तावित नए फ्रेमवर्क में शामिल किया जाना होगा. इससे पुराने और नए दोनों तरह के लोन पर ब्याज दर तय करने की व्यवस्था को धीरे-धीरे एक समान किया जा सकेगा.

₹1,000 करोड़ से ज्यादा डिपॉजिट वाले लेंडर्स के लिए अलग व्यवस्था

जिन लेंडर्स के पास कुल डिपॉजिट ₹1,000 करोड़ से अधिक है, उनके लिए प्रस्तावित इंटरनल बेंचमार्क मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स पर आधारित होगा. इसकी गणना घरेलू डिपॉजिट और उधारी की मार्जिनल कॉस्ट के तीन महीने के मूविंग एवरेज के आधार पर की जाएगी. ऐसे लेंडर्स को हर महीने के पहले कैलेंडर दिन अपना इंटरनल बेंचमार्क सार्वजनिक करना होगा.

RBI ने कहा है कि बैंकों के बीच MCLR तय करने की मौजूदा प्रक्रिया में काफी अंतर पाया गया है. इसी वजह से ज्यादा स्पष्ट और सिद्धांत आधारित फ्रेमवर्क की जरूरत महसूस हुई है.

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

नए प्रस्ताव से लोन लेने वालों के लिए सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता के रूप में सामने आ सकता है. ग्राहक यह बेहतर तरीके से समझ सकेंगे कि उनके लोन की ब्याज दर किस बेंचमार्क से जुड़ी है, स्प्रेड किन हिस्सों से बना है और ब्याज दर कब और कैसे रीसेट होगी.

खासकर फ्लोटिंग रेट वाले बैंक लोन में RBI की नीतिगत दरों में बदलाव का असर ग्राहकों तक ज्यादा स्पष्ट तरीके से पहुंचने की उम्मीद है. वहीं छोटे कर्ज और माइक्रोफाइनेंस लोन में APR की सीमा से अत्यधिक ब्याज और शुल्क पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.

RBI के प्रस्तावित निर्देश बैंक, NBFC, कोऑपरेटिव बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर लागू होंगे. हालांकि, अलग-अलग संस्थानों और लोन कैटेगरी के लिए कुछ विशेष प्रावधान और छूट भी तय की गई हैं.