रवीना टंडन को 2025 में PETA इंडिया का पर्सन ऑफ द ईयर भी नामित किया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
पेटा (PETA) इंडिया के वार्षिक समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री रवीना टंडन को उनके दो दशकों से अधिक समय से पशु कल्याण के प्रति समर्पित योगदान के सम्मान में मानद निदेशक नियुक्त किया गया. इसी अवसर पर लोकप्रिय अभिनेत्री रूपाली गांगुली को उनकी पशु कल्याण गतिविधियों के लिए ह्यूमनिटेरियन अवार्ड से सम्मानित किया गया, जबकि अन्य पुरस्कार विजेताओं में विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी समर्थक शामिल थे. यह कार्यक्रम मुंबई के विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब, टारदेओ में आयोजित किया गया, जिसमें PETA इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी और वैश्विक संस्थापक भी उपस्थित थे.
अन्य पुरस्कार विजेता और कार्यक्रम का आयोजन
इंजिरंजदपिली श्री कृष्ण मंदिर के पुजारी राकुमार पी.आई. को कंपैशनट लीडरशिप अवार्ड मिला, क्योंकि उन्होंने पूजा स्थल में पहला यांत्रिक हाथी स्वागत किया. PETA इंडिया की निदेशक पूर्वा जोशीपुरा ने पुरस्कार प्रदान किए और PETA की वैश्विक संस्थापक इंग्रिड न्युकिर्क ने प्रेरक भाषण दिया.
पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता और स्टैंड-अप कॉमिक जीवेशु अहलूवालिया को डिजिटल एक्टिविज्म अवार्ड दिया गया और प्रसिद्ध ज्वैलरी डिजाइनर राहुल लूथरा को प्रोग्रेसिव डिज़ाइनर अवार्ड मिला, जिन्होंने अपने डिजाइन में पंख का उपयोग न करने और प्लांट लेदर शामिल करने की प्रतिबद्धता दिखाई.
रवीना टंडन की पशु कल्याण गतिविधियाँ
रवीना टंडन ने पिछले वर्षों में पशु कल्याण के क्षेत्र में कई योगदान दिए हैं, जैसे:
1. मांसाहार से दूर रहना
2. कर्नाटक के थाउजेंड पिलर्स जैन मंदिर में जीवन आकार के यांत्रिक हाथी का उपहार देना
3. गांव में मानवों द्वारा तेंदुए को मारने पर अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग करना
4. सांप, मगरमच्छ और अन्य जानवरों के शोषण पर ध्यान आकर्षित करना
5. PETA इंडिया की अभियान में भाग लेकर जानवरों को पालतू स्टोर या ब्रीडर से खरीदने के खिलाफ जागरूकता फैलाना
6. युवा छात्रों में सहानुभूति बढ़ाने वाले दयालु नागरिक (Compassionate Citizen) प्रोग्राम को बढ़ावा देना
7. मुंबई की सड़कों से व्यक्तिगत रूप से जानवरों को बचाना
रवीना टंडन को 2025 में PETA इंडिया का पर्सन ऑफ द ईयर भी नामित किया गया था. उन्होंने कहा, “PETA इंडिया की मानद निदेशक बनने का यह सम्मान मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी है. मैं सभी जीवों के लिए एक अधिक दयालु दुनिया बनाने के PETA इंडिया के महत्वपूर्ण कार्य को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हूं.”
रूपाली गांगुली का संदेश
रूपाली गांगुली ने कहा, “PETA इंडिया का ह्यूमनिटेरियन अवार्ड पाकर मैं बहुत अभिभूत हूं. जानवर हमारे सहयोग पर निर्भर हैं, चाहे यह कुत्ते और बिल्लियों को गोद दिलाने के लिए जागरूकता फैलाना हो या शहर की सड़कों पर घोड़े की गाड़ियों के लिए बोलना. गोद लेना जीवन बचाता है और सहानुभूति समाज को बेहतर बनाती है.”
PETA इंडिया के अन्य पुरस्कार विजेता
PETA इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट सच्चिन बंगेड़ा ने कहा, “जानवरों की जरूरतों के लिए रवीना टंडन, रूपाली गांगुली, जीवेशु अहलूवालिया, राहुल लूथरा और राजकुमार नंबूद्री जैसे नायक हमेशा उनके साथ हैं. मांस मुक्त आहार, एथिकल फैशन और हाथी-घोड़े की सुरक्षा से लेकर पशु अधिकारों के लिए प्रेरणा देना, ये समर्थक जानवर मुक्ति के सशक्त स्तंभ हैं.”
रवीना टंडन PETA इंडिया की मानद निदेशक बनने वाली दूसरी व्यक्ति हैं, जो अभिनेता जॉन अब्राहम के बाद इस पद पर आई हैं. उन्होंने PETA की अंतरराष्ट्रीय मानद निदेशकों की सूची में भी स्थान बनाया है, जिसमें पामेला एंडरसन, जेम्स क्रॉमवेल, एंजेलिका हस्टन और अन्य शामिल हैं. रूपाली गांगुली उन सेलेब्स में शामिल हुई हैं, जिन्होंने PETA इंडिया के ह्यूमनिटेरियन और अन्य पुरस्कार जीते हैं.
PETA इंडिया का उद्देश्य
PETA इंडिया का आदर्श वाक्य है “जानवरों का शोषण करना हमारा अधिकार नहीं है.” संगठन प्रजातिवाद (speciesism) के खिलाफ है और सभी जीवों के प्रति समान दया और सम्मान का समर्थन करता है.
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के शीर्ष नीति संस्थान नीति आयोग में एक ऐतिहासिक नियुक्ति के तहत अरुणाचल प्रदेश की शिक्षाविद् जोरम अनिया को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है. यह कदम राष्ट्रीय नीति निर्माण में आदिवासी और पूर्वोत्तर भारत के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
आदिवासी समुदाय से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
जोरम अनिया अरुणाचल प्रदेश से आने वाली एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं और डेरा नटुंग गवर्नमेंट कॉलेज में हिंदी विभाग की प्रमुख हैं. उनकी नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश के नीति तंत्र में क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधता को शामिल करने की दिशा में बड़ा संकेत भी है.
पहली न्यीशी महिला PhD और हिंदी की विदुषी
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया. उनका अकादमिक कार्य साहित्य, संस्कृति और विशेष रूप से आदिवासी ज्ञान पर आधारित रहा है.
शोध, लेखन और नीति से जुड़ा लंबा अनुभव
18 वर्षों से अधिक के अपने करियर में अनिया ने शिक्षण, शोध और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है. वह अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल रेगुलेटरी कमीशन की सदस्य भी हैं. उन्होंने न्यीशी साहित्य और संस्कृति पर कई किताबें लिखी और संपादित की हैं, साथ ही अनेक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं.
नीति आयोग में बड़ा पुनर्गठन
यह नियुक्ति उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है, जिसकी घोषणा 24 अप्रैल को की गई थी. 2015 में प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग में यह पहला बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है. इस दौरान अशोक लाहिरी को उपाध्यक्ष बनाया गया, जिन्होंने सुमन बेरी की जगह ली. इसके अलावा अभय करमदिकर और एम श्रीनिवास को भी पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया.
रणनीतिक समय पर अहम नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब चाइना लगातार अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है. भारत ने इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में अनिया की नियुक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर की मजबूत भागीदारी के रूप में भी देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरम अनिया को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और समझ नीति निर्माण को नई दिशा देगा. उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों के योगदान से विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा.
राष्ट्रीय नीति में बढ़ेगा पूर्वोत्तर और आदिवासी प्रतिनिधित्व
जोरम अनिया की नियुक्ति को न केवल उनके अकादमिक और सांस्कृतिक योगदान की पहचान माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और आदिवासी समुदायों की आवाज को राष्ट्रीय नीति निर्माण में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है.
जोरम अनिया का नीति आयोग में शामिल होना देश के नीति ढांचे को और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है. इससे जमीनी और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय रणनीतियों में शामिल करने की उम्मीद बढ़ी है.
पेशे से एक प्रशिक्षित डॉक्टर रहे बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में विकास और नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकार के प्रमुख नीति थिंक टैंक नीति आयोग में एक अहम बदलाव के तहत प्रख्यात पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ, लेखक और विकास कार्यकर्ता आर बालासुब्रमण्यम को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति नीति आयोग की कार्यप्रणाली को जमीनी अनुभव से और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
जमीनी विकास और नीति निर्माण का मजबूत अनुभव
पेशे से एक प्रशिक्षित डॉक्टर रहे बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में विकास और नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट और ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट जैसे संगठनों की स्थापना की, जिन्होंने जमीनी स्तर पर विकास और सार्वजनिक नीति के बीच सेतु का काम किया है. उनका अनुभव उन्हें नीति निर्माण और वास्तविक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम बनाता है.
वैश्विक शिक्षा और प्रशासनिक समझ
बालासुब्रमण्यम ने हावर्ड कैनेडी स्कूल से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की है. इससे उन्हें शासन और प्रशासन की गहरी समझ मिली है, जो उनके जमीनी अनुभव के साथ मिलकर उन्हें एक प्रभावशाली नीति विशेषज्ञ बनाती है.
नीति आयोग में बड़ा बदलाव
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब 2015 में प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग में पहली बड़ी पुनर्रचना की गई है. 24 अप्रैल को सरकार ने नए उपाध्यक्ष और कई पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति की. प्रख्यात अर्थशास्त्री अशोक लहीरी को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिन्होंने सुमन बेरी का स्थान लिया. इसके अलावा अभय करनदिकर और एम श्रीनिवासको भी सदस्य नियुक्त किया गया है.
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर बालासुब्रमण्यम को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और विभिन्न मुद्दों की समझ नीति निर्माण को मजबूत करेगी. उन्होंने विश्वास जताया कि उनका योगदान अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार और विकास को गति देगा.
जमीनी अनुभव से राष्ट्रीय नीति तक का सफर
डॉक्टर से विकास कार्यकर्ता और फिर नीति विशेषज्ञ बनने तक का बालासुब्रमण्यम का सफर अब देश के सर्वोच्च नीति संस्थान में औपचारिक भूमिका तक पहुंच गया है. माना जा रहा है कि उनका फील्ड-आधारित अनुभव राष्ट्रीय स्तर की नीतियों को और व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में मदद करेगा.
आर बालासुब्रमण्यम की नियुक्ति से NITI Aayog को जमीनी हकीकतों से जुड़ी नई दृष्टि मिलने की उम्मीद है. इससे सरकार की नीतियों में व्यावहारिकता और प्रभावशीलता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
कंपनी के अनुसार, हर्ष दीप छाबड़ा SPNI की एंटरप्राइज प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, नए बिजनेस अवसर तलाशने और तेजी से बदलते मीडिया बाजार में ग्रोथ रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोनी पिक्चर नेटवर्क (SPNI) ने हर्ष दीप छाबड़ा को स्ट्रैटेजी एंड न्यू बिजनेस हेड नियुक्त किया है. कंपनी ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की. इस भूमिका में वह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ गौरव बनर्जी को रिपोर्ट करेंगे और नेतृत्व टीम के साथ मिलकर कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करेंगे.
ग्रोथ और नए अवसरों पर रहेगा फोकस
कंपनी के अनुसार, हर्ष दीप छाबड़ा SPNI की एंटरप्राइज प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, नए बिजनेस अवसर तलाशने और तेजी से बदलते मीडिया बाजार में ग्रोथ रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. साथ ही वह विभिन्न बिजनेस यूनिट्स के साथ मिलकर राजस्व बढ़ाने और लागत दक्षता सुधारने पर भी काम करेंगे.
इससे पहले गोदरेज कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स में रहे
हर्ष दीप छाबड़ा इससे पहले गोदरेज कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स में ग्लोबल मीडिया हेड के पद पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने इंटीग्रेटेड मीडिया रणनीतियों और बड़े स्तर पर ब्रांड कम्युनिकेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र में दो दशक का अनुभव
हर्ष दीप के पास मीडिया, विज्ञापन और डिजिटल इकोसिस्टम में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने Mindshare, GroupM, Zee Entertainment, Turner International और Radio City जैसी कंपनियों में भी काम किया है. उनकी विशेषज्ञता मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन बिक्री, मार्केटिंग, एनालिटिक्स, अकाउंट मैनेजमेंट और डिजिटल बिजनेस इनिशिएटिव्स में मानी जाती है.
गौरव बनर्जी ने कहा कि हर्ष दीप छाबड़ा रणनीतिक सोच और इंडस्ट्री अनुभव का मजबूत मिश्रण लेकर आए हैं. उनका नेतृत्व कंपनी के लिए नए अवसर पैदा करेगा और प्रतिस्पर्धी बढ़त मजबूत करेगा.
हर्ष दीप छाबड़ा ने कहा कि वह ऐसे समय SPNI से जुड़कर उत्साहित हैं जब मीडिया सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि कंपनी के नेतृत्व के साथ मिलकर वह भविष्य की क्षमताएं विकसित करने और नए ग्रोथ अवसरों पर काम करेंगे.
यह नियुक्ति भारत में उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल बिलिंग और भुगतान समाधान प्रदाता कंपनी इनवॉइसक्लाउड (InvoiceCloud) ने श्रीनिवास अलुरी को भारत में इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष (Vice President of Engineering) के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की है. यह नियुक्ति भारत को एक रणनीतिक इंजीनियरिंग और उत्पाद केंद्र के रूप में कंपनी के बढ़ते निवेश को दर्शाती है. साथ ही अगली पीढ़ी की डिजिटल भुगतान क्षमताओं को आगे बढ़ाने, एआई-आधारित रोडमैप को तेज करने और वैश्विक स्तर पर उत्पाद नवाचार में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
भारत में इंजीनियरिंग और उत्पाद नेतृत्व की नई भूमिका
अपने नए पद पर, श्रीनिवास अलुरी बिजु दविस के साथ मिलकर काम करेंगे, जो हैदराबाद स्थित कंपनी के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया साइट लीडर हैं. वे भारत केंद्र में उत्पाद इंजीनियरिंग का नेतृत्व करेंगे. उनका फोकस उत्पाद नवाचार को बढ़ावा देने, स्केलेबल आर्किटेक्चर तैयार करने और उच्च प्रभाव वाली डिलीवरी सुनिश्चित करने पर रहेगा.
एआई-आधारित नवाचार और प्लेटफॉर्म रणनीति पर फोकस
श्रीनिवास अलुरी एआई-आधारित उत्पाद रोडमैप को आगे बढ़ाने, प्लेटफॉर्म रणनीति को आकार देने, इंजीनियरिंग क्षमताओं का विस्तार करने और तकनीकी प्रतिभा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. भारत की इंजीनियरिंग टीम कंपनी के मुख्य उत्पाद विकास में अहम योगदान देती है, जिसमें आर्किटेक्चर तय करना, रोडमैप प्राथमिकताएं निर्धारित करना और दीर्घकालिक नवाचार रणनीति को आगे बढ़ाना शामिल है.
24 वर्षों का व्यापक अनुभव
श्रीनिवास अलुरी के पास 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने उपभोक्ता बैंकिंग, कोर बैंकिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन करने वाली इंजीनियरिंग टीमों का नेतृत्व किया है. उनकी विशेषज्ञता एंटरप्राइज मॉडर्नाइजेशन, प्लेटफॉर्म स्केलेबिलिटी और इंजीनियरिंग रणनीति को व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में है.
पूर्व कार्य अनुभव
इनवॉइसक्लाउड से पहले, वे कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में टेक्नोलॉजी लीडर (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ट्रांसफॉर्मेशन) के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने कोर और कंज्यूमर बैंकिंग प्लेटफॉर्म्स के बड़े पैमाने पर परिवर्तन का नेतृत्व किया. इससे पहले वे अमेजन (Amazon) में सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर रहे, जहां उन्होंने अमेज़न ट्रांसपोर्टेशन फाइनेंशियल सर्विसेज में इंजीनियरिंग डिलीवरी का नेतृत्व किया.
उन्होंने वेल्स फॉर्गो (Wells Fargo) में 14 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं. वहां उन्होंने अमेरिका और भारत में डिजिटल बैंकिंग और भुगतान पोर्टफोलियो का नेतृत्व किया. साथ ही मोबाइल नवाचार, एजाइल प्रक्रियाओं और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म मॉडर्नाइजेशन को बढ़ावा दिया. उन्होंने पोलारिस सॉफ्टवेयर लैब (Polaris Software Lab) और सिटीबैंक (Citibank- बहरीन) के साथ भी काम किया है.
कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
बीजू डेविस, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया साइट लीडर ने कहा कि भारत को एक रणनीतिक इंजीनियरिंग हब के रूप में मजबूत करने के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है. उन्होंने कहा कि श्रीनिवास का अनुभव एआई-आधारित नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगा.
श्रीनिवास अलुरी का वक्तव्य
श्रीनिवास अलुरी ने कहा कि वे भारत में कंपनी की विकास यात्रा के इस महत्वपूर्ण चरण का हिस्सा बनकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि वे वैश्विक टीमों के साथ मिलकर स्केलेबल तकनीकी इकोसिस्टम बनाने और एआई-आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे.
जेड मैकजूबा (Jed Maczuba) ने कहा कि एआई कंपनी के उत्पाद विकास का मुख्य आधार है और श्रीनिवास की नियुक्ति भारत टीम की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करती है. यह नियुक्ति भारत में उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख नीति थिंक टैंक नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए वरिष्ठ अर्थशास्त्री और भाजपा विधायक अशोक कुमार लाहिड़ी को नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इस फैसले को संस्थागत स्तर पर बड़े बदलाव और नई नीति दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
पीएम मोदी ने दी बधाई, बताया “नीति निर्माण का अहम स्तंभ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है. उन्होंने एक मुलाकात के दौरान लाहिड़ी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका अनुभव भारत को “विकसित भारत” बनाने की दिशा में सुधारों को और मजबूती देगा.
नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति
सरकार ने आयोग में पांच नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति की है. इनमें राजीव गौबा, के. वी. राजू, गोवर्धन दास, अभय करंदीकर और एम. श्रीनिवास शामिल हैं.
कौन हैं अशोक कुमार लाहिड़ी
अशोक कुमार लाहिड़ी पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से भाजपा विधायक हैं और 2026 के चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वे अर्थशास्त्र, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं. वे अक्टूबर 2002 से जून 2007 तक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं. इस दौरान उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह दोनों सरकारों के साथ काम किया. इसके अलावा वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय और शैक्षणिक अनुभव
लाहिड़ी का करियर अकादमिक और वैश्विक संस्थानों से भी जुड़ा रहा है. उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के निदेशक भी रह चुके हैं और बंधन बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रहे हैं. इसके अलावा वे एशियन डेवलपमेंट बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से 2013 में रिटायर हुए.
आर्थिक मुद्दों पर स्पष्ट राय
लाहिड़ी वित्तीय अनुशासन और राज्यों की आर्थिक स्थिति पर अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं. अपनी किताब 'India in Search of Glory' में उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र ने देश निर्माण को मजबूत किया है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दशकों में सामाजिक-आर्थिक विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा. उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, गरीबी घटेगी, शिक्षा में सुधार होगा और शहरीकरण बढ़ेगा, वैसे-वैसे आर्थिक विकास तेज होगा.
फ्रीबी योजनाओं पर जताई चिंता
लाहिड़ी ने चुनावों से पहले घोषित की जाने वाली लोकलुभावन योजनाओं की आलोचना भी की है. उनका मानना है कि अनियंत्रित सरकारी खर्च राज्यों को वित्तीय संकट की ओर धकेल सकता है. उन्होंने राज्यों द्वारा बुनियादी सेवाओं में कम निवेश को भी एक बड़ी चुनौती बताया है.
बदलाव के दौर में नई जिम्मेदारी
यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब नीति आयोग में कई अहम बदलाव हुए हैं. सुमन बेरी पिछले चार वर्षों से उपाध्यक्ष थे, जबकि हाल ही में CEO बीवीआर सुब्रह्मण्यम पद छोड़ चुके हैं. ऐसे में लाहिड़ी की एंट्री को नीति आयोग के लिए नए दिशा-निर्देशन और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है.
अशोक कुमार लाहिड़ी के नेतृत्व में नीति आयोग से आर्थिक सुधार, वित्तीय नीति और संस्थागत सुधारों को नई गति मिलने की उम्मीद है. सरकार के “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है.
एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था संचालन में निरंतरता बनाए रखने के लिए की गई है. साथ ही, एयरपोर्ट के निर्माण और विकास से जुड़े सभी काम तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नोइडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) ने अपने शीर्ष प्रबंधन में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नीतू समरा को अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है. यह फैसला नियामकीय दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया है.
नियमों के चलते हुआ नेतृत्व परिवर्तन
एयरपोर्ट की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बयूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी एयरपोर्ट का CEO भारतीय नागरिक होना जरूरी है. इसी कारण प्रबंधन में तत्काल बदलाव किया गया.
क्रिस्टोफ श्नेलमैन को नई जिम्मेदारी
स्विट्जरलैंड के नागरिक क्रिस्टोफ श्नेलमैन, जो अगस्त 2020 से सीईओ के पद पर थे, अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे. इस पद पर वे रणनीतिक योजना और परियोजना की निगरानी में योगदान देते रहेंगे.
तुरंत प्रभाव से संभाला पदभार
नीतू समरा ने तत्काल प्रभाव से अंतरिम CEO का पद संभाल लिया है. वह इस भूमिका में तब तक रहेंगी, जब तक बोर्ड स्थायी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेता.
समरा अक्टूबर 2021 से एयरपोर्ट के CFO के रूप में जुड़ी हुई हैं.
परियोजना पर नहीं पड़ेगा असर
एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था संचालन में निरंतरता बनाए रखने के लिए की गई है. साथ ही, एयरपोर्ट के निर्माण और विकास से जुड़े सभी काम तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे.
देश की अहम ग्रीनफील्ड परियोजना
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही एक बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. इसके अलावा, यह परियोजना कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी.
बड़ा एविएशन हब बनने की तैयारी
यह एयरपोर्ट चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है और इसे भारत के प्रमुख आगामी एविएशन हब्स में गिना जा रहा है. यह देश के एयरपोर्ट विस्तार कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
नियामकीय बदलावों के चलते किया गया यह नेतृत्व परिवर्तन अस्थायी है, लेकिन इससे परियोजना की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ने की उम्मीद है. आने वाले समय में स्थायी CEO की नियुक्ति के साथ एयरपोर्ट के विकास को और गति मिलने की संभावना है.
भल्ला के पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें सेल्स, मार्केटिंग और जनरल मैनेजमेंट के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर (Dabur) ने अपने इंडिया बिजनेस के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की है. कंपनी ने हरजीत एस भल्ला को इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना है. नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, हरजीत एस भल्ला को 23 अप्रैल 2026 से डाबर के इंडिया बिजनेस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. इस पद पर वह कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा को रिपोर्ट करेंगे.
ग्लोबल अनुभव के साथ मजबूत प्रोफाइल
भल्ला के पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें सेल्स, मार्केटिंग और जनरल मैनेजमेंट के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कई देशों में काम करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. डाबर से पहले, भल्ला The Hershey Company में ग्लोबल एग्जीक्यूटिव के तौर पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने कई अहम अंतरराष्ट्रीय भूमिकाएं निभाईं और कंपनी के विस्तार में योगदान दिया.
यूनिलीवर से की थी करियर की शुरुआत
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Unilever के साथ की थी, जहां 2000 से 2016 तक विभिन्न सेल्स और मार्केटिंग भूमिकाओं में काम किया. इस दौरान 2009 से 2012 के बीच उन्होंने मॉस्को में मार्केटिंग डायरेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई.
मेट्रो कैश एंड कैरी में भी निभाई अहम भूमिका
इसके बाद 2016-17 में उन्होंने Metro Cash & Carry में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के रूप में काम किया और कंपनी के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य भी रहे.
डाबर के लिए नई दिशा की उम्मीद
हरजीत एस भल्ला की नियुक्ति को डाबर के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है. उनके व्यापक अनुभव और वैश्विक दृष्टिकोण से कंपनी को भारत में अपने बिजनेस को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
प्रशांत आर. मेनन के पास रणनीति, संचालन और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन में 20 वर्षों से अधिक का वैश्विक अनुभव है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मैन्युफैक्चरिंग ऐज ए सर्विस (MaaS) कंपनी वेंटअप (Venttup) ने पूर्व टेस्ला (Tesla) इंडिया निदेशक प्रशांत आर. मेनन को स्ट्रैटेजिक एडवाइजर के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की है. कंपनी के अनुसार वे वेंटअप की स्केल-अप रणनीति, वैश्विक विस्तार योजनाओं और दीर्घकालिक विकास रोडमैप को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसमें लाभप्रदता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
दो दशकों का वैश्विक नेतृत्व अनुभव
प्रशांत आर. मेनन के पास रणनीति, संचालन और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन में 20 वर्षों से अधिक का वैश्विक अनुभव है. हाल ही में वे टेस्ला इंडिया के डायरेक्टर रहे जहां उन्होंने भारत में कंपनी के प्रवेश की रणनीति तैयार की और विभिन्न क्षेत्रों में संचालन स्थापित किया. वे टेस्ला इंडिया बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं.
वेंटअप नेतृत्व की प्रतिक्रिया
वेंटअप के सह-संस्थापक और सीईओ संदीप नायर ने कहा. “हम प्रशांत आर. मेनन का वेंटअप में स्वागत करते हैं. रणनीति और ट्रांसफॉर्मेशन में उनका अनुभव और वैश्विक संगठनों को स्केल करने की उनकी क्षमता हमें भारत से एक विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप बनाने में मदद करेगी.” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी लोकलाइजेशन और महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के तेज विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि डीप-टेक इकोसिस्टम को सपोर्ट किया जा सके.
टेस्ला में पिछली भूमिकाएं
इससे पहले मेनन ने Tesla यूएस में डायरेक्टर एडवाइजरी के रूप में कार्य किया. इस दौरान उन्होंने रेवेन्यू बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और लागत अनुकूलन से जुड़ी वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया. उन्होंने कई देशों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफॉर्मेशन और पुनर्गठन परियोजनाएं भी संभालीं.
EY में शुरुआती करियर
अपने करियर के शुरुआती चरण में प्रशांत आर. मेनन ने EY में काम किया. यहां उन्होंने सीएक्सओ स्तर के अधिकारियों को कॉर्पोरेट रणनीति, विलय और अधिग्रहण, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और वर्किंग कैपिटल ऑप्टिमाइजेशन पर सलाह दी.
मेनन ने कहा. “वेंटअप की लीडरशिप टीम की सोच और ऊर्जा प्रभावशाली है. कंपनी का लक्ष्य एक सस्टेनेबल और लोकल सप्लाई चेन बनाना है. यह मॉडल ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप है. मैं कंपनी के विकास और संचालन लक्ष्यों को हासिल करने में मार्गदर्शन देने के लिए उत्सुक हूं.”
भविष्य की भूमिका और जिम्मेदारियां
मेनन वेंटअप की संस्थापक टीम के साथ मिलकर रणनीतिक विकास रोडमैप तैयार करेंगे. वे वैश्विक विस्तार, बाजार में प्रवेश, संचालन दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने पर काम करेंगे. साथ ही निवेशक संबंधों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने में भी सहयोग देंगे.
Unicorn India Ventures के मैनेजिंग पार्टनर भास्कर मजूमदार ने कहा. “हम प्रशांत मेनन का वेंटअप एडवाइजरी टीम में स्वागत करते हैं. वैश्विक सप्लाई चेन की उनकी समझ और भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम में योगदान की उनकी रुचि कंपनी की ग्रोथ रणनीति को मजबूत करेगी.”
यह नेतृत्व बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब माइक्रोसॉफ्ट अपने ऑफिस प्रोडक्ट्स और लिंक्डइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स को तेजी से लागू कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन के लिए डैन शेपेरो को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है. कंपनी ने बुधवार को यह घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला प्रमुख व्यवसायों में नेतृत्व बदलाव के तहत लिया गया है.
डैन शेपेरो, रयान रोसलांस्की का स्थान लेंगे, जो वर्ष 2020 से लिंक्डइन का नेतृत्व कर रहे थे. रोसलांस्की ने पिछले वर्ष माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस प्रोडक्टिविटी ग्रुप में अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी संभाली थीं. वह माइक्रोसॉफ्ट में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे.
कंपनी के अहम हिस्सों में अनुभव
रयान रोसलांस्की ने लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि डैन शेपेरो ने कंपनी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे सेल्स, मार्केटिंग और प्रोडक्ट में नेतृत्व किया है. उन्होंने कहा कि शेपेरो को यूजर्स और ग्राहकों दोनों की गहरी समझ है.
2008 से जुड़े, पांच साल रहे सीओओ
डैन शेपेरो वर्ष 2008 में बैन एंड कंपनी में कंसल्टिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करने के बाद लिंक्डइन से जुड़े थे. पिछले पांच वर्षों से वह कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) के रूप में कार्य कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के साथ काम और करियर में लिंक्डइन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जा रही है.
लिंक्डइन की मजबूत ग्रोथ
रोसलांस्की के नेतृत्व में लिंक्डइन के सदस्य लगभग 70 करोड़ से बढ़कर 1.3 अरब तक पहुंच गए. कंपनी ने चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत राजस्व वृद्धि दर्ज की. हालांकि, 2016 में माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 27 अरब डॉलर में अधिग्रहण के बाद से वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी हुई है.
प्रतिस्पर्धा में मेटा आगे
तुलना में, प्रतिस्पर्धी सोशल मीडिया कंपनी मेटा का राजस्व लिंक्डइन से 10 गुना से अधिक है और उसी तिमाही में उसने लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की.
एआई पर माइक्रोसॉफ्ट का बड़ा फोकस
यह नेतृत्व बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब माइक्रोसॉफ्ट अपने ऑफिस प्रोडक्ट्स और लिंक्डइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर्स को तेजी से लागू कर रहा है. साथ ही, क्लाउड ग्राहकों से बढ़ती एआई कंप्यूटिंग की मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया जा रहा है.
कंपनी में कई वरिष्ठ बदलाव
हाल के महीनों में माइक्रोसॉफ्ट में कई वरिष्ठ स्तर पर बदलाव हुए हैं. ऑफिस प्रमुख राजेश झा ने हाल ही में सेवानिवृत्ति की योजना जताई है. वहीं, गेमिंग प्रमुख फिल स्पेंसर ने लगभग चार दशक बाद कंपनी छोड़ दी. साइबर सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स लीडर चार्ली बेल ने भी नई भूमिका संभाली है.
नई जिम्मेदारियां और नियुक्तियां
बदलाव के तहत, लिंक्डइन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (इंजीनियरिंग) मोहक श्रॉफ को माइक्रोसॉफ्ट में प्लेटफॉर्म और डिजिटल वर्क का प्रेसिडेंट बनाया जाएगा. वह रयान रोसलांस्की को रिपोर्ट करेंगे. साथ ही, लिंक्डइन के वाइस प्रेसिडेंट एरन बर्जर और रघु हिरेमगलूर कंपनी के इंजीनियरिंग कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे.
तकनीकी बदलाव के दौर में नेतृत्व पुनर्गठन
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फेरबदल ऐसे समय में हो रहा है जब टेक इंडस्ट्री तेजी से एआई-आधारित बदलावों से गुजर रही है. माइक्रोसॉफ्ट इस बदलाव में अग्रणी बने रहने के लिए अपनी रणनीति और नेतृत्व को मजबूत कर रहा है.
WPP का यह फैसला भारत में अपने क्रिएटिव बिजनेस को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर यह मॉडल सफल होता है, तो इसे एशिया-प्रशांत के अन्य बाजारों में भी लागू किया जा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक विज्ञापन समूह WPP ने भारत में अपनी रणनीति को मजबूत करते हुए हेफ्जिबाह पाठक को WPP Creative का भारत का सीईओ नियुक्त किया है. खास बात यह है कि वह अपनी मौजूदा भूमिका Ogilvy India (ओगिल्वी इंडिया) की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन के रूप में भी जारी रखेंगी. यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कंपनी की एकीकृत क्रिएटिव रणनीति को आगे बढ़ाने का हिस्सा माना जा रहा है.
भारत पर बढ़ा फोकस, नई रणनीति की झलक
WPP Creative का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक एजेंसी नेटवर्क्स के लिए तेजी से उभरता हुआ ग्रोथ मार्केट बन चुका है. बढ़ती डिजिटल खपत और ब्रांड्स की मार्केटिंग खर्च में इजाफा भारत को खास बनाता है. कंपनी अब एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है जिसमें लोकल लीडरशिप और रीजनल इंटीग्रेशन दोनों को साथ लेकर चला जाए.
‘कनेक्टेड क्रिएटिविटी’ पर जोर
WPP की एशिया-प्रशांत सीईओ क्योको मात्सुशिता ने आंतरिक नोट में कहा कि विविध बाजारों में मजबूत नेतृत्व कंपनी को क्लाइंट्स के लिए भरोसेमंद ग्रोथ पार्टनर बनने में मदद करेगा. कंपनी की रणनीति के तहत उसकी प्रमुख एजेंसियां जैसे VML (वीएमएल), Ogilvy (ओगिल्वी), Burson (बर्सन), AKQA (एक्यूक्यूए), Grey (ग्रे), Landor (लैंडोर) और Design Bridge & Partners (डिजाइन ब्रिज एंड पार्टनर्स) अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगी, लेकिन एक साथ मिलकर काम करेंगी.
पाठक की भूमिका और जिम्मेदारियां बढ़ीं
नई भूमिका में हेफ्जिबाह पाठक का फोकस ब्रांड की मौजूदगी मजबूत करने, क्लाइंट रिलेशनशिप गहरी करने और बिजनेस ग्रोथ को तेज करने पर रहेगा. वह अलग-अलग एजेंसियों के लीडर्स के साथ मिलकर बेहतर क्लाइंट वैल्यू देने और क्रिएटिव एक्सीलेंस को बनाए रखने का काम करेंगी. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ओगिल्वी इंडिया में उनका ट्रैक रिकॉर्ड इस नई जिम्मेदारी के लिए मजबूत आधार देता है.
APAC रणनीति में भारत की अहम भूमिका
WPP का यह कदम दिखाता है कि कंपनी भारत को अपने एशिया-प्रशांत बिजनेस के केंद्र में रख रही है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और डिजिटल इकोसिस्टम भारत को इस रणनीति में अहम बनाते हैं. कंपनी अब एक हाइब्रिड मॉडल अपना रही है, जिसमें लोकल स्तर पर तेजी से फैसले लेने की क्षमता और रीजनल स्तर पर स्केल दोनों शामिल हैं.
आगे की राह और चुनौतियां
WPP Creative की रणनीति का सबसे बड़ा चैलेंज अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल बैठाना होगा, बिना उनकी अलग पहचान को नुकसान पहुंचाए. हेफ्जिबाह पाठक के सामने अब यह जिम्मेदारी होगी कि वह इस संतुलन को बनाए रखते हुए ग्रोथ को आगे बढ़ाएं और Ogilvy India (ओगिल्वी इंडिया) की विरासत को भी मजबूत बनाए रखें.