एम्स के डॉक्टर ने शादी के लिए मांगा 50 करोड़ का दहेज, सोशल मीडिया पर हुई खूब किरकिरी

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी ज्यादा वायरल हो रही है. इस पोस्ट में एम्स के एक डॉक्टर द्वारा अपनी शादी के लिए दहेज में 50 करोड़ रुपये की मांग करने का दावा किया गया है.

Last Modified:
Tuesday, 29 October, 2024
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एक ओर पढ़ा-लिखा समाज दहेज प्रथा के विरोध में खड़ा है, तो वहीं कुछ ऐसे भी पढ़े-लिखे लोग हैं, जो इसे बढ़ावा भी दे रहे हैं. दरअसल, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी ज्यादा वायरल हो रही है. इस पोस्ट में किए गए दावे के अनुसार एम्स के एक डॉक्टर ने अपनी शादी के लिए दहेज में 50 करोड़ रुपये की मांग की है. वहीं, दहेज के पैसे जुटाने के लिए लड़की वाले अपनी पूरी कमाई दांव पर लगाने के लिए तैयार हो गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि लड़की खुद भी एक डॉक्टर है. सोशल मीडिया पर इस पोस्ट की खूब चर्चा हो रही है. लोग डॉक्टर की समझदारी पर तो सवाल उठा ही रहे हैं. साथ ही लड़की के माता -पिता पर भी दहेज को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं. तो चलिए जानते हैं क्या है ये पूरा मामला?

पीड़िता की सहेली ने किया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर डॉक्टर फीनिक्स (@inbetweenOTs) नाम के ट्विटर हैंडल वाली महिला यूजर ने दावा किया है कि उसकी सहेली से एम्स का एक टॉप रैकिंग यूरोलॉजिस्ट दहेज में 50 करोड़ रुपये मांगा रहा है. पोस्ट के अनुसार जिस लड़की से उसकी शादी की बात चली वह हैदराबाद में लिवर ट्रांसप्लांट एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट है. बताया जा रहा है कि डॉक्टर लड़के की इस मांग से लड़की बुरी तरह से टूट गई. उसका परिवार यह भारी-भरकम रकम जुटाने के लिए तमाम इंतजाम में लगा रहा. लड़का और लड़की दोनों तेलुगु परिवार से हैं. लड़की के परिवार वालों का तर्क है कि तेलुगु समुदाय में दहेज अनिवार्य है. पोस्ट करने वाली महिला ने लिखा है कि आखिर इतनी पढ़ाई-लिखाई, मैरिट और रैंक का क्या फायदा जब दहेज ही लेना है.

दहेज के लिए माता-पिता रिटारमेंट के पैसे भी दांव पर लगाने को तैयार
एक्स पर यह पोस्ट 28 अक्टूबर को दिन में सुबह पौने 11 बजे के करीब की गई है. इस पोस्ट को एक मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा है. दहेज की 50 करोड़ की मांग पूरी करने के लिए लड़की के माता-पिता ने रिटायरमेंट के पैसों को दांव पर लगाने का फैसला कर लिया था. इनका तर्क है कि शादी तेलुगू समुदाय में हो रही है तो दहेज देना होगा, जबकि इस फैसले से उनका भविष्य तो असुरक्षित होगा ही, साथ ही आगे उनकी छोटी बेटी के लिए भी मुश्किल होगी. 

यूजर्स ने पोस्ट पर कमेंट लिखकर की डॉक्टर की आलोचना
इस पोस्ट पर तमाम कमेंट्स आए हैं. इनमें लोगों ने पढ़े-लिखे लोगों द्वारा दहेज प्रथा को बढ़ावा देने पर आलोचना की है. पोस्ट पर कमेंट करने वालों ने दहेज मांगने वाले डॉक्टर को जमकर लानतें भेजी हैं. लोगों ने उसे लालची भी बताया है. वहीं, कुछ लोगों ने कहा है कि इस मामले में लड़की और उसके माता-पिता को स्टैंड लेने की जरूरत है. इनका तर्क है कि लड़की खुद पढ़ी-लिखी है और नौकरी कर रही है. वह अपनी जिंदगी बहुत अच्छे से बिता सकती है और खुद की पहचान बना सकती है. एक यूजर ने लिखा है कि बहुत ही शर्मनाक है. मुझे समझ नहीं आता कि लोग इतने बेशरम ढंग से पैसे कैसे मांग लेते हैं.
 


हस्तशिल्प कारीगरों के लिए डिजिटल बाज़ार का विस्तार, My eHeart पहल से अब तक 5 करोड़ रुपये की आमदनी

नोएडा में आयोजित My eHeart Conclave में HCL फ़ाउंडेशन ने बताया—40 से अधिक क्लस्टर और 5,000 कारीगर अब सीधे खरीदारों से जुड़ रहे हैं

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 12 December, 2025
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Friday, 12 December, 2025
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नोएडा में आयोजित तीसरे संस्करण के My eHeart Conclave में HCLTech की सीनियर वीपी – ग्लोबल CSR और HCL फ़ाउंडेशन की डायरेक्टर निधि पुंडीर ने कहा कि फ़ाउंडेशन की यह पहल देशभर के कारीगरों को डिजिटल बाज़ार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. पुंडीर के अनुसार 2021 में औपचारिक रूप से लॉन्च किए गए इस पोर्टल के ज़रिये अब तक 5,000 से अधिक कारीगरों को 40 से ज़्यादा क्लस्टर से जोड़ा गया है और उनकी कुल आय 5 करोड़ रुपये से अधिक रही है.

पुंडीर ने कहा कि फ़ाउंडेशन ने शहरी और ग्रामीण समुदायों के साथ काम करते हुए पाया कि कारीगरों के पास हुनर तो है, लेकिन उन्हें बाज़ार तक पहुंच, गुणवत्ता नियंत्रण और डिज़ाइन इनपुट की कमी का सामना करना पड़ता है. इसी कमी को दूर करने के लिए My eHeart को एक क्यूरेटेड ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां कारीगरों को गुणवत्ता प्रमाणन के बाद सूचीबद्ध किया जाता है. कॉन्क्लेव में इस प्लेटफ़ॉर्म का नया संस्करण भी लॉन्च किया गया.

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्य और क्षेत्रों से क्लस्टर्स ने भाग लिया. इनमें पोचमपल्ली, बनारस, लखनऊ, बराबंकी, महेश्वर, मायूरभंज, नागपुर, जयपुर, पूर्वोत्तर राज्यों सहित कई स्थानों के कारीगर शामिल रहे. यहाँ हैंडलूम, ब्लॉक प्रिंटिंग, टेराकोटा, ब्रासवर्क, बांस उत्पाद, ब्लू पॉटरी, वोरली आर्ट, मधुबनी और पटचित्रा जैसे शिल्प रूपों का प्रदर्शन किया गया.

पुंडीर ने कहा कि फ़ाउंडेशन केवल उन भौगोलिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां HCLTech मौजूद है, बल्कि देशभर के समुदायों के साथ काम किया जा रहा है.

हस्तशिल्प बाज़ार में नकली उत्पादों की समस्या को देखते हुए फ़ाउंडेशन डिजिटल टूल्स और AI आधारित समाधान भी विकसित कर रहा है. पुंडीर ने कहा, “जहां AI कला की मौलिकता को सुरक्षित रख सकता है, वहां हम उसका उपयोग कर रहे हैं.”

कमज़ोर और नए क्लस्टर्स के कारीगर अब औसतन 12,000–15,000 रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं. कुछ मज़बूत क्लस्टर्स में यह आय इससे कहीं अधिक है. फ़ाउंडेशन रजिस्ट्रेशन, समूह गठन, मार्केट लिंकज, बिज़नेस प्लानिंग, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने जैसे समर्थन भी प्रदान करता है.

किस क्लस्टर को कितने समय तक समर्थन की आवश्यकता है, यह उसकी स्थिति और क्षमता पर निर्भर करता है. उत्तर-पूर्व या दूरदराज़ के क्लस्टर्स के साथ लंबी अवधि की कार्यप्रणाली अपनाई जाती है.

राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह के अवसर पर आयोजित यह कॉन्क्लेव दो दिनों तक नोएडा और NCR के नागरिकों को कारीगरों से सीधे मिलकर उत्पाद खरीदने का अवसर देता है. फ़ाउंडेशन सेक्टर 104 में एक स्थायी My eHeart डिस्प्ले सेंटर भी संचालित करता है.

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भारत के PHWR विनिर्माण ढांचे से छोटे मॉड्यूलर रिऐक्टर कार्यक्रम को गति मिलने की उम्मीद

लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि PHWR के लिए विशेष उपकरण सप्लाई करने वाले उद्योग बड़े SMR सिस्टम बनाने की क्षमता रखते हैं और कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ इस प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 11 December, 2025
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Thursday, 11 December, 2025
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भारत का लंबे समय से विकसित प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिऐक्टर (PHWR) विनिर्माण इकोसिस्टम अब देश के छोटे मॉड्यूलर रिऐक्टर (SMR) कार्यक्रम की रीढ़ बनने की ओर बढ़ रहा है. केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि PHWR सप्लायर नए SMR तकनीक के लिए आवश्यक कई प्रमुख घटकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि PHWR के लिए विशेष उपकरण सप्लाई करने वाले उद्योग बड़े SMR सिस्टम बनाने की क्षमता रखते हैं और कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ इस प्रक्रिया में शामिल किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि SMR विनिर्माण का स्थानीयकरण 'मेक इन इंडिया' के उद्देश्य के अनुरूप है, जो सामरिक तकनीकों में घरेलू भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है. PHWR में उपयोग होने वाली कई भारी इंजीनियरिंग क्षमताएँ — जैसे विशेष स्टील, प्रेशर वेसल के लिए बड़े फोर्जिंग, प्राइमरी कुलेंट पंप, हीट एक्सचेंजर, कंट्रोल रॉड ड्राइव असेंबली, इंस्ट्रुमेंटेशन और कंट्रोल सिस्टम — SMR की आवश्यकताओं के लिए अनुकूलित की जा सकती हैं. इस बदलाव के दौरान उद्योगों को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है.

रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी SMR संयंत्रों के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से बढ़ सकती है. सिंह ने कहा कि यह मॉडल कंपोनेंट निर्माण से लेकर प्लांट कंस्ट्रक्शन और दीर्घकालिक सर्विसिंग तक एक समग्र घरेलू इकोसिस्टम विकसित करेगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया में अर्जित विशेषज्ञता भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर भी प्रदान कर सकती है, क्योंकि कई देश SMR तैनाती योजनाओं पर काम कर रहे हैं.

BARC पहले ही प्रेसराइज्ड वाटर रिऐक्टर (PWR) तकनीक पर आधारित दो SMR मॉडल विकसित कर रहा है. इनमें 200 मेगावॉट इलेक्ट्रिकल ‘भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिऐक्टर’ और 55 मेगावॉट इलेक्ट्रिकल रिऐक्टर शामिल है, जिसे कोयला आधारित बिजलीघरों के पुनर्प्रयोग, ऊर्जा-गहन उद्योगों और दूरस्थ ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए विकसित किया जा रहा है.

मंत्री ने कहा कि SMR अभी डिजाइन चरण में हैं और 200 मेगावॉट मॉडल के विस्तृत इंजीनियरिंग कार्य के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) से संपर्क किया गया है. न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) BARC के साथ तकनीकी दस्तावेज़ीकरण पर काम कर रहा है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार जल्द ही ‘एटॉमिक एनर्जी बिल 2025’ पेश करने की तैयारी कर रही है, जो भारत के परमाणु विनिर्माण ढांचे में होने वाले आगामी बदलावों का मार्ग प्रशस्त करेगा.

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FY26 में MECs का आउटलुक स्थिर, लेकिन टैरिफ जोखिम और ग्लोबल दबाव से चुनौतियां बरकरार: Ind-Ra रिपोर्ट

एजेंसी ने बताया कि उसने अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए उन कंपनियों पर नकारात्मक रेटिंग कार्रवाई की है, जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल और तरलता में गिरावट की आशंका थी. हालांकि, ऐसी कार्रवाई का दायरा सीमित रहा है

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Published - Thursday, 11 December, 2025
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Thursday, 11 December, 2025
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इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडियम एंड इमर्जिंग कॉरपोरेट्स (MECs) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में रेटिंग आउटलुक स्थिर बना हुआ है, लेकिन कुछ सेक्टर टैरिफ जोखिम और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण दबाव में हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पतले मार्जिन पर काम करने वाली कंपनियां अप्रत्याशित झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनी हुई हैं.

Ind-Ra द्वारा MECs पर किए गए छमाही अध्ययन में संकेत दिया गया है कि FY26 में इन कंपनियों की राजस्व वृद्धि और लाभप्रदता समग्र स्तर पर टिकाऊ रहने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट मेट्रिक्स भी स्थिर रहने की उम्मीद है. “हालांकि आउटलुक स्थिर है, लेकिन तरलता से जुड़े जोखिमों और वैश्विक चुनौतियों के बीच लाभप्रदता और क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखना MECs के लिए अहम होगा,” Ind-Ra में इमर्जिंग कॉरपोरेट्स के सीनियर डायरेक्टर अभाष शर्मा ने कहा.

एजेंसी ने बताया कि उसने अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हुए उन कंपनियों पर नकारात्मक रेटिंग कार्रवाई की है, जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल और तरलता में गिरावट की आशंका थी. हालांकि, ऐसी कार्रवाई का दायरा सीमित रहा है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि FY26 के लिए कई MECs के मीडियन लीवरेज अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया गया है.

मांग के प्रति अनिश्चितता और वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए कई कंपनियां पूंजीगत निवेश को लेकर सतर्क हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मीडियन कैपेक्स इंटेंसिटी में अनुमानित गिरावट दर्शाती है कि नए निवेश मुख्य रूप से मजबूत खिलाड़ियों तक सीमित रह सकते हैं, जबकि अन्य कंपनियां तरलता के दबाव और मार्जिन में कमी के कारण अपने विस्तार योजनाओं को टाल सकती हैं या छोटा कर सकती हैं. इससे सेक्टर में तेज़ी से कंसोलिडेशन बढ़ने की संभावना है.

Ind-Ra ने अनुमान लगाया है कि FY26 में MECs की राजस्व वृद्धि 8.6 प्रतिशत YoY रहेगी, जो FY25 के 9 प्रतिशत से थोड़ी कम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ उतार-चढ़ाव और वैश्विक विकास में सुस्ती का प्रभाव MECs पर बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक पड़ेगा, क्योंकि उनकी प्राइसिंग पावर कम होती है, वित्त पोषण तक पहुंच सीमित रहती है और वे अक्सर एक ही निर्यात बाज़ार पर निर्भर होते हैं.

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AMPIN Energy Transition West Bengal में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी

कंपनी लगाएगी 1–2 गीगावॉट सोलर सेल प्लांट, राज्य में नए सोलर प्रोजेक्ट भी होंगे विकसित

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 10 December, 2025
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Wednesday, 10 December, 2025
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स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी AMPIN Energy Transition ने West Bengal में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की घोषणा की है. यह निवेश सोलर सेल निर्माण क्षमता विकसित करने और राज्य में नए सोलर पावर प्लांट लगाने में किया जाएगा.

कंपनी लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च कर 1 से 2 गीगावॉट क्षमता वाला सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी. इसके लिए AMPIN राज्य के विभिन्न औद्योगिक पार्कों में 15 से 20 एकड़ जमीन की तलाश कर रही है. यह प्रोजेक्ट करीब 1,500 प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार सृजित कर सकता है, जिससे स्थानीय कौशल विकास और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

इसके अलावा, कंपनी West Bengal में लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से कई सोलर पावर प्लांट भी स्थापित करेगी. इन परियोजनाओं से विशेष रूप से डेटा सेंटर, वाणिज्यिक इकाइयों और औद्योगिक ग्राहकों की बढ़ती ग्रीन एनर्जी मांग पूरी होने की उम्मीद है.

AMPIN के पास वर्तमान में 22 राज्यों में 5 GWp से अधिक की नवीकरणीय क्षमता है, जिसमें सोलर, विंड, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड प्रोजेक्ट शामिल हैं. नया निवेश कंपनी की Eastern India में मौजूदगी को मजबूत करेगा.

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन क्षेत्रों में घरेलू सोलर वैल्यू चेन को मजबूत करेगा जहां अब तक निर्माण गतिविधि सीमित रही है. यह पहल भारत के सोलर कॉम्पोनेंट्स में आयात निर्भरता कम करने और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने के मिशन को समर्थन देगी.

AMPIN का यह निर्णय West Bengal की औद्योगिक नीतियों और राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पर बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है. बढ़ती ऊर्जा मांग और कार्बन उत्सर्जन कम करने के दबाव के बीच यह निवेश राज्य को पूर्वी भारत का उभरता सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकता है.

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ICICI प्रुडेंशियल AMC का IPO 12 दिसंबर को खुलेगा, वैल्यूएशन लक्ष्य Rs 1.07 ट्रिलियन

तीन दिवसीय IPO, जिसकी कुल कीमत Rs 1.06 ट्रिलियन है, 12 दिसंबर से 16 दिसंबर के बीच निवेशकों के लिए खुला रहेगा

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Published - Monday, 08 December, 2025
Last Modified:
Monday, 08 December, 2025
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ICICI प्रुडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) अपने आगामी प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में Rs 1.07 ट्रिलियन तक का वैल्यूएशन हासिल करने का लक्ष्य रख रही है. कंपनी ने रविवार को जारी नियामकीय फाइलिंग में बताया कि शेयर का प्राइस बैंड Rs 2,061 से Rs 2,165 तय किया गया है. यह इश्यू पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा.

तीन दिवसीय IPO, जिसकी कुल कीमत Rs 1.06 ट्रिलियन है, 12 दिसंबर से 16 दिसंबर के बीच निवेशकों के लिए खुला रहेगा. एंकर निवेशकों की बोली 11 दिसंबर को होगी. कंपनी के शेयर 19 दिसंबर को घरेलू एक्सचेंजों पर लिस्ट होने की संभावना है.

यह ऑफर केवल प्रमोटर प्रुडेंशियल कॉरपोरेशन होल्डिंग्स द्वारा शेयर बिक्री का है. प्रुडेंशियल, जिसने पहले कम हिस्सेदारी बेचने का संकेत दिया था, अब बोनस शेयर जारी होने के बाद लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा.

ICICI बैंक, जिसके पास AMC की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इस IPO में कोई शेयर नहीं बेच रहा है.

ICICI प्रुडेंशियल AMC, जो ICICI बैंक और यूके स्थित प्रुडेंशियल के बीच एक संयुक्त उद्यम है, Rs 10 ट्रिलियन की संपत्तियों का प्रबंधन करता है. कंपनी का शुद्ध लाभ 30 सितंबर तक छह महीनों में 22 प्रतिशत बढ़कर Rs 16.2 बिलियन हो गया.

यह लिस्टिंग भारत में 2025 के IPO फंडरेजिंग को पिछले साल के USD 20.5 बिलियन के रिकॉर्ड से आगे ले जा सकती है. इस साल LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और ह्युंडई मोटर इंडिया जैसी वैश्विक कंपनियों की भारतीय इकाइयों की मजबूत लिस्टिंग, साथ ही Groww और आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स जैसे नए मार्केट एंट्री, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते बाजार सक्रिय बना हुआ है.

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अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार में शामिल भारतीय कंपनियों और व्यक्तियों पर लगाए प्रतिबंध

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान से तेल और एलपीजी के अवैध निर्यात में शामिल भारतीय नागरिकों और कंपनियों को OFAC SDN सूची में शामिल किया

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 21 November, 2025
Last Modified:
Friday, 21 November, 2025
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संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश और वित्त विभाग ने 21 नवंबर को ईरान से अवैध तेल बिक्री के माध्यम से धन जुटाने में मदद करने वाले शिपिंग नेटवर्क पर प्रतिबंध की घोषणा की. विदेश विभाग ने कहा कि वह भारत, पनामा और सेशेल्स सहित देशों के 17 संस्थानों, व्यक्तियों और जहाजों को ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में उनकी भूमिका के लिए जोड़ रहा है.

साथ ही, वित्त विभाग ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने के लिए 41 अन्य संस्थानों, व्यक्तियों, जहाजों और विमानों को नामित किया है. विदेश विभाग के अनुसार, इन गतिविधियों से होने वाली आय ईरान को क्षेत्रीय आतंकवादी प्रॉक्सी का समर्थन करने और ऐसे हथियार प्रणालियों को खरीदने में मदद करती है जो अमेरिकी बलों और उनके सहयोगियों के लिए प्रत्यक्ष खतरा हैं. अमेरिकी प्रशासन ने उन समुद्री ऑपरेटरों और व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का वचन दिया है जिन पर ईरानी कच्चे तेल के परिवहन का आरोप है.

भारतीय संस्थान और व्यक्तियों पर कार्रवाई
वित्त विभाग की OFAC SDN सूची में शामिल भारतीय नागरिकों में ज़ैर हुसैन इकबाल हुसैन सईद और ज़ुलफिकार हुसैन रिज़वी सईद शामिल हैं. सूचीबद्ध कंपनियों में महाराष्ट्र स्थित RN शिप मैनेजमेंट और पुणे स्थित TR6 पेट्रो इंडिया शामिल हैं.

प्रशासन का आरोप है कि TR6 पेट्रो इंडिया, एक पेट्रोलियम उत्पादों की ट्रेडिंग कंपनी, ने अक्टूबर 2024 से जून 2025 के बीच ईरानी मूल के 8 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के बिटुमेन का आयात किया. विदेश विभाग ने कहा कि कंपनी ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल होने के लिए प्रतिबंधित की जा रही है.

भारतीय संबंध वाले शिपिंग फर्मों पर आरोप
वित्त विभाग ने कई शिपिंग फर्मों पर भी आरोप लगाए जिनका संबंध भारतीय नागरिकों से है. आरोप है कि भारतीय नागरिक वरुण पुला की मालिकाना वाली बर्था शिपिंग ने जुलाई 2024 से चीन को लगभग चार मिलियन बैरल ईरानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पहुंचाई.

इसी तरह, भारतीय नागरिक इयप्पन राजा की मालिकाना वाली एवी लाइन्स ने अप्रैल 2025 से चीन को एक मिलियन से अधिक बैरल ईरानी LPG पहुँचाया. भारतीय नागरिक सोनिया श्रेष्ठ की Vega Star Ship Management पर जनवरी 2025 से पाकिस्तान को ईरानी LPG ले जाने वाले जहाज का संचालन करने का आरोप है.

यह कार्रवाई अक्टूबर में लगाए गए प्रतिबंधों के बाद की है, जब ईरानी कच्चे तेल और LPG निर्यात में शामिल 50 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाया गया था. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये कदम तेहरान पर अधिकतम दबाव अभियान का हिस्सा हैं.

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अक्टूबर 2025 में व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर, Q3 में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने की आशंका: Icra

अक्टूबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट USD 41.7 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष के USD 26.2 बिलियन से काफी अधिक है

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Published - Friday, 21 November, 2025
Last Modified:
Friday, 21 November, 2025
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भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट अक्टूबर 2025 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. Icra की एक थीमैटिक रिपोर्ट के अनुसार यह अभूतपूर्व घाटा दिसंबर तिमाही में देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को sharply बढ़ा सकता है, भले ही नवंबर और दिसंबर में मामूली सुधार की उम्मीद जताई गई है.

अक्टूबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट USD 41.7 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष के USD 26.2 बिलियन से काफी अधिक है. यह उछाल आयात में 16.6 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि के कारण आया, जो बढ़कर USD 76.1 बिलियन तक पहुंच गया. वहीं, निर्यात 12 प्रतिशत घटकर USD 34.4 बिलियन रह गया. Icra ने आयात उछाल का बड़ा कारण सोने के आयात में तीन गुना वृद्धि को बताया, जो अक्टूबर में USD 14.7 बिलियन तक पहुंच गया. त्योहारों की मांग और ऊंची कीमतों के बीच सट्टा खरीदारी इसकी वजह मानी गई है.

नॉन-ऑयल नॉन-गोल्ड आयात भी 12.4 प्रतिशत बढ़कर USD 46.5 बिलियन रहा, जो घरेलू मांग की मजबूती दर्शाता है. दूसरी तरफ, ऑयल और नॉन-ऑयल दोनों श्रेणियों के निर्यात में गिरावट आई. नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स 12 प्रतिशत घटे, जिसकी वजह शुरुआती त्योहारों की टाइमिंग और अमेरिका द्वारा लगाए गए steep टैरिफ का असर रहा.

Icra का कहना है कि इस असाधारण व्यापार असंतुलन के चलते Q3 FY2026 में CAD काफी बढ़ सकता है और GDP के 2.4–2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि सितंबर तिमाही के लिए 1.8 प्रतिशत का अनुमान था. यदि अमेरिका का 50 प्रतिशत टैरिफ मार्च 2026 तक जारी रहता है तो FY2026 में CAD-to-GDP अनुपात लगभग 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

ऐतिहासिक अक्टूबर घाटे के बावजूद Icra का अनुमान है कि नवंबर और दिसंबर में व्यापार अंतर कुछ “कूल” होगा, क्योंकि सोने के आयात में क्रमिक कमी आएगी और त्योहारों के बाद निर्यात में सुधार दिखेगा. कमोडिटी मांग के सामान्य होने और आउटवर्ड शिपमेंट्स के बढ़ने से ट्रेड प्रेशर में अस्थायी राहत मिल सकती है, हालांकि पूरे वर्ष की चुनौती बरकरार है.

अक्टूबर में अमेरिका—जो भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है—को निर्यात 8.6 प्रतिशत घटा, जबकि सितंबर में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. ऊंचे टैरिफ के चलते प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हुई है. नॉन-US बाजारों को निर्यात भी तेज़ी से 12.5 प्रतिशत घटा. FY2026 की शुरुआत में अमेरिकी आयातकों द्वारा अग्रिम खरीदारी के कारण निर्यात तेज़ था, लेकिन हालिया गिरावट ने समग्र गति को कमजोर कर दिया है.

अक्टूबर का एकमात्र उजला पक्ष इलेक्ट्रॉनिक सामान रहा, जिसने 19 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की और व्यापक निर्यात गिरावट को आंशिक सहारा दिया. FY2026 के पहले सात महीनों में कुल निर्यात सिर्फ 0.6 प्रतिशत बढ़कर USD 254.3 बिलियन रहा. वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स 37.8 प्रतिशत बढ़े. इलेक्ट्रॉनिक्स को छोड़कर भारत के आउटबाउंड शिपमेंट्स इस अवधि में 2.4 प्रतिशत घट गए.

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ट्रम्प के दौर की कूटनीति

संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐतिहासिक रूप से कभी किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए अन्य विश्व नेताओं को फटकारने या अपने पूर्ववर्तियों की घरेलू नीतियों की आलोचना करने का मंच नहीं रहा है, लेकिन ट्रम्प के आठ महीने के कार्यकाल को देखते हुए यह आश्चर्यजनक नहीं था कि उन्होंने ऐसा किया

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Published - Tuesday, 30 September, 2025
Last Modified:
Tuesday, 30 September, 2025
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लेखिका: सानिया कुलकर्णी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में दिया गया भाषण विश्व राजनीति में एक यादगार क्षण था, यह कहना गलत नहीं होगा. संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए कि यह “किसी भी समस्या का समाधान” नहीं कर सका है से लेकर यूरोपीय देशों को उनकी हरित ऊर्जा और आप्रवासन पर रुख के कारण “नरक में जा रहे” बताने तक, राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बिल्कुल भी शब्दों को नहीं तोला.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐतिहासिक रूप से कभी किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए अन्य विश्व नेताओं को फटकारने या अपने पूर्ववर्तियों की घरेलू नीतियों की आलोचना करने का मंच नहीं रहा है, लेकिन ट्रम्प के आठ महीने के कार्यकाल को देखते हुए यह आश्चर्यजनक नहीं था कि उन्होंने ऐसा किया. विश्लेषकों का कहना है कि लगभग एक घंटे लंबे भाषण में विदेश नीति पर कम और घरेलू राजनीतिक आधार को संबोधित करने जैसी बातें अधिक थीं. प्रवासियों पर “विशाल आक्रमण” को रोकने, अमेरिका को “दुनिया का सबसे गर्म देश” बताने और अपनी आर्थिक नीतियों की डींग मारने जैसी बातें एक चुनावी रैली के भाषण जैसी ही लग रही थीं. यह बहुत अलग नहीं था जे.डी. वेंस के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दिए गए भाषण से, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नेताओं पर “यूरोप के पतन” को लेकर तीखा हमला बोला था.

यह अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि ट्रम्प प्रशासन ने विश्व राजनीति के पुनर्गठन में बड़ी भूमिका निभाई है, जिसे कई अमेरिकी सहयोगियों और भागीदारों पर लगाए गए शुल्कों ने और तेज कर दिया. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में आई खटास भी वाशिंगटन की अप्रत्याशित विदेश नीति का सीधा परिणाम थी. भारत पारंपरिक रूप से अमेरिका का एक महत्वपूर्ण मित्र रहा है, खासकर इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने की कोशिश में. हालांकि, रूस से तेल खरीदना जारी रखने पर भारत पर ट्रम्प द्वारा लगाए गए हालिया दंडात्मक शुल्क ने दशकों से बनाए गए विश्वास और मित्रता को चोट पहुँचाई है.

भारत और चीन दोनों का ट्रम्प के संयुक्त राष्ट्र भाषण में “रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रमुख वित्तपोषक” के रूप में उल्लेख हुआ, हालांकि उन्होंने नाटो देशों को भी “खुद के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित” करने के लिए दोषी ठहराया.

अब पहले से कहीं ज्यादा, ट्रम्प का दुनिया के साथ बातचीत करने का तरीका यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आज भी पारंपरिक कूटनीति जिंदा है या फिर राज्यों के कूटनीति करने के तरीकों में बुनियादी बदलाव हो रहा है. मूल रूप से, ट्रम्प की विदेश नीति अब भी काफी हद तक उनके कारोबारी नजरिए को दर्शाती है और उनकी कूटनीति का तरीका सीधा उनकी ‘आर्ट ऑफ द डील’ की सोच जैसा है. संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में उनका अविश्वास विश्व व्यवस्था के प्रति उनके दृष्टिकोण को साफ दिखाता है. नाटो की आलोचना न करने का एकमात्र समय वह था जब उन्होंने रक्षा खर्च बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताने वाले सदस्यों की प्रशंसा की, जिसे अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को “अधिक न्यायसंगत” बनाने के एक और प्रयास के रूप में देखा जा सकता है.

अमेरिकी प्रभुत्व में आई गिरावट एक खंडित दुनिया को जन्म दे रही है, जिसमें कई शक्ति केंद्र उभर रहे हैं. भारत के पास अब पहले से कहीं ज्यादा वजह है कि वह अपनी रणनीतिक हेजिंग नीति पर कायम रहे. अगस्त के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की चीन यात्रा भारत की स्वायत्तता दिखाने का मंच बनी. जहाँ रूस-भारत-चीन (आरआईसी) त्रिपक्षीय सहयोग अभी केवल हित-आधारित संरेखण है, न कि अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी क्रम का कोई विकल्प, वहीं यह भारत के लिए रणनीतिक पुनर्संरेखण प्रदर्शित करने का अवसर है. अंततः, भारत का अमेरिका के साथ ट्रम्प प्रशासन से कहीं अधिक मेल है, और भले ही अस्थायी खटास मुश्किल हो, आगे का रास्ता जितना संभावनाओं से भरा है, उतना ही अनिश्चित भी.

अगर डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में कोई एक बात निश्चित कही जा सकती है, तो वह है उनकी अनिश्चितता. जिस नई कूटनीति की नींव वह रख रहे हैं, वह लेन-देन आधारित और आख्यानों व दिखावे पर भारी निर्भर लगती है. पुनर्गठन के इस दौर में सतर्क नेविगेशन और हित-आधारित संरेखण बनाए रखते हुए साझेदारियों को अलग-थलग किए बिना आगे बढ़ना शायद वही रास्ता है जो बहु-संकटों वाली इस दुनिया में टिके रहने की संभावना को सुनिश्चित कर सकता है.

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रिलायंस रिटेल ने Dunzo में किया गया पूरा निवेश किया राइट-ऑफ

जनवरी 2022 में, रिलायंस ने 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग राउंड के जरिए Dunzo में 25.8 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 09 August, 2025
Last Modified:
Saturday, 09 August, 2025
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रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की रिटेल शाखा रिलायंस रिटेल ने हाइपरलोकल डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म Dunzo में किया गया अपना पूरा निवेश, जो कुल 1,645 करोड़ रुपये का था, राइट-ऑफ कर दिया है. यह जानकारी कंपनी की वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है. यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी ने तीन साल पहले बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप में क्विक-कॉमर्स सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ी फंडिंग का नेतृत्व किया था.

जनवरी 2022 में, रिलायंस ने 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग राउंड के जरिए Dunzo में 25.8 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी. इस राउंड में लाइटबॉक्स, लाइटरॉक, अल्टेरिया कैपिटल और 3एल कैपिटल भी शामिल थे. निवेश का उद्देश्य रिलायंस रिटेल के ओम्नी-चैनल विस्तार को सहयोग देना और जियोमार्ट व अन्य रिटेल फॉर्मेट्स के लिए लास्ट-माइल डिलीवरी समाधान सक्षम करना था.

2014 में स्थापित Dunzo को पिछले दो वर्षों में फंडिंग की कमी और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इसके चलते कंपनी ने कई बार कर्मचारियों की छंटनी की, वेतन भुगतान में देरी की और कारोबार का आकार घटाया. अगस्त 2024 में कंपनी ने 150 कर्मचारियों को निकाला, जिसके बाद सप्लाई और मार्केटप्लेस टीमों में लगभग 50 लोग ही बचे.

इस साल की शुरुआत में सह-संस्थापक और सीईओ कबीर बिस्वास ने कंपनी छोड़ दी और फ्लिपकार्ट के नए क्विक-कॉमर्स वर्टिकल ‘Minutes’ का नेतृत्व संभाला. उनके जाने के बाद फंडिंग और परिचालन पुनर्गठन के बीच कंपनी का नेतृत्व अनिश्चित हो गया.

Google India के पास Dunzo में 19.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि Lightbox के पास 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है. अन्य निवेशकों में Blume Ventures और Lightrock शामिल हैं. बाकी हिस्सेदारी सह-संस्थापक कबीर बिस्वास, दलवीर सूरी, मुकुंद झा और अंकुर अग्रवाल के पास है.

अब तक Dunzo ने अपनी स्थापना से लेकर करीब 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग जुटाई है.

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एक शख्स को अपने घर में मिले 30 साल पुराने रिलायंस के शेयर्स, अब हो गए मालामाल!

चंडीगढ़ के रहने वाले रतन ढिल्लों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. एक दिन वह घर की साफ-सफाई कर रहे थे. उसी दौरान उन्हें साल 1998 में खरीदा गया रिलायंस के 30 शेयरों का सर्टिफिकेट मिला.

Last Modified:
Thursday, 13 March, 2025
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कभी-कभी किस्मत दरवाजे पर दस्तक देती है, लेकिन पहचानने के लिए सही नजर चाहिए, ऐसा ही कुछ हुआ रतन ढिल्लों के साथ, जिन्हें अपने घर में एक पुराने कागजात मिले, और जब उन्होंने इन्हें समझने की कोशिश की, तो पता चला कि यह 30 साल पुराने रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयर हैं. शुरुआत में यह सिर्फ एक कागज का टुकड़ा लगा, लेकिन जब एक्सपर्ट्स से सलाह ली, तो पता चला कि यह 30 साल पुरानी एक बड़ी इन्वेस्टमेंट डील थी, जिसकी कीमत अब लाखों में पहुंच चुकी है.

क्या है पूरा मामला?

रतन ढिल्लों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दस्तावेज शेयर किए और लोगों से पूछा कि क्या ये शेयर अब भी उनके पास हैं. उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने 1987 में 20 और 1992 में 10, यानी कुल 30 शेयर खरीदे थे. उस वक्त शेयर की कीमत सिर्फ 10 रुपये प्रति शेयर थी. अब सवाल यह था कि तीन दशक बाद इन शेयरों की कीमत कितनी होगी?

30 साल पुराने शेयर से जबरदस्त कमाई!

शेयर बाजार के जानकारों ने गणना की तो पता चला कि RIL के शेयरों में तीन बार स्प्लिट (Split) और दो बार बोनस जारी किए गए. इस प्रक्रिया के कारण अब इन 30 शेयरों की संख्या बढ़कर लगभग 960 हो गई. अगर आज के शेयर प्राइस (लगभग ₹1238 प्रति शेयर) से गणना करें, तो इनकी कुल कीमत 11.88 लाख रुपये हो चुकी है. यानी 30 साल पहले ₹300 में खरीदे गए शेयर आज ₹11.88 लाख में बदल गए.

सोशल मीडिया पर खबर हुई वायरल

जैसे ही रतन ढिल्लों ने यह खबर सोशल मीडिया पर शेयर की, लोगों ने मजेदार कमेंट्स की बौछार कर दी. एक यूजर ने लिखा, "भाई, आपकी तो मौज हो गई. ऐसे ही एक और यूजर्स ने कमेंट करते हुए कहा, "अब घर के हर कोने को अच्छे से खंगालो, MRF के शेयर भी मिल सकते हैं!" एक अन्य ने मजे लेते हुए लिखा, "रातों-रात लखपति बन गए, पार्टी कब दे रहे हो?"

अब आगे क्या? कैसे मिलेगी ये रकम?

इस तरह के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जहां किसी के दादा या पिता ने शेयर खरीदे थे, लेकिन परिवार को इसकी जानकारी नहीं थी. घर की सफाई या किसी पुराने दस्तावेज को खोजने के दौरान ऐसे कागज मिल जाते हैं, जो लोगों को कई सालों बाद अमीर बना देते हैं. अगर आपके पास भी पुराने फिजिकल शेयर्स हैं, तो उन्हें तुरंत डिजिटल फॉर्म में ट्रांसफर करवाएं. इसके लिए सबसे पहले शेयर होल्डर के नाम के दस्तावेज जमा करने होंगे. शेयर को Demat Account में ट्रांसफर करवाना होगा. एक बार Demat Account में आने के बाद, इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है.