रेलवे का बड़ा फैसला! इन स्टेशंस पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमतें तीन गुना बढ़ीं

त्योहारी सीजन में छठ पूजा तक रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ जुटती है. इसमें कई लोग ऐसे होते हैं, जो अपने रिश्तेदारों को ट्रेन में बैठाने आते हैं.

Last Modified:
Wednesday, 05 October, 2022
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नई दिल्ली: यदि आप भी किसी को ट्रेन पर बैठाने रेलवे स्टेशन जा रहे हैं, तो पहले यह खबर पढ़ लीजिए. जब भी आप किसी को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाते हैं तो प्लेटफॉर्म पर प्रवेश करने से पहले आपको प्लेटफॉर्म टिकट लेना पड़ता है. हम आपको बता दें कि भारतीय रेलवे ने प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत सीधे तीन गुना बढ़ा दी है. यानी प्लेटफॉर्म टिकट अब 10 रुपये की जगह 30 रुपये में मिलेगा.

इन स्टेशनों पर लागू होंगी नई दरें
प्लेटफॉर्म टिकट की नई दर दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, निजामुद्दीन, आनंद विहार और गाजियाबाद पर 5 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2022 तक लागू रहेगी. यदि आप इन स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर जाएंगे तो आपको 10 रुपय की जगह 30 रुपये देने होंगे. त्योहारी सीजन में छठ पूजा तक रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ जुटती है. इसमें कई लोग ऐसे होते हैं, जो अपने रिश्तेदारों को ट्रेन में बैठाने आते हैं. इस कारण प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ इकट्ठा हो जाती है, जिससे अव्यवस्था फैलने का खतरा बना रहता है. इसी पर कंट्रोल करने के लिए भारतीय रेलवे ने लिमिटेड टाइम के लिए प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ा दी है.

दक्षिण रेलवे ने भी बढ़ाई कीमत
दक्षिण रेलवे ने भी कुछ दिन पहले ही प्‍लेटफॉर्म टिकट के दामों में इजाफा किया है. दक्षिण रेलवे का ये निर्णय 1 अक्‍टूबर 2022 से 31 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा. 31 जनवरी, 2023 तक आम आदमी को दक्षिण रेलवे के सभी स्‍टेशनों पर प्‍लेटफॉर्म टिकट के लिए 10 रुपये की बजाए 20 रुपये चुकाने होंगे. गौरतलब है कि पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में ये निर्णय लिया गया था कि प्‍लेटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ाने का फैसला DRM खुद ले सकेंगे. तब से लेकर अब तक यही व्‍यवस्‍था चली आ रही है.

स्पेशल ट्रेन की सौगात
वहीं, दूसरी तरफ त्योहारी सीजन में भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने डेढ़ सौ से ज्यादा स्पेशल गाड़ियां चलाने का फैसला किया है. भारतीय रेलवे ने ऐलान किया कि वह आगामी त्योहारी सीजन के लिए 179 स्पेशल ट्रेनें चलाएगा. यह सभी ट्रेनें 2269 ट्रिप लगाएगी. इन स्पेशल गाड़ियों में देश के बड़े स्टेशनों को जोड़ने की योजना है, जिससे हर जगह के यात्री को आसानी से ट्रेन मिल सके और उसे परेशानी का सामना ना करना पड़े.

रेलवे चलाएगा 179 स्पेशल गाड़ियां
दुर्गा पूजा से शुरू होने वाला त्योहारी सीजन दिवाली के बाद पड़ने वाले छठ पूजा तक मनाया जाता है. हर राज्य में मनाए जाने वाले अलग-अलग त्योहारों के चलते लोग एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं.

VIDEO : अब तक बदल चुके हैं कई एयरपोर्ट्स के नाम, देखें लिस्ट

 


अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा, जानिए नई सुविधा और नियम

नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य ATM और UPI के जरिए सीधे अपने PF खाते से पैसा निकाल सकेंगे. इसका उद्देश्य लोगों को तेज, आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.

Last Modified:
Monday, 06 April, 2026
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने EPFO 3.0 के जरिए अपने सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस नए अपडेट के तहत अब PF का पैसा निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य ATM और UPI के जरिए सीधे अपने PF खाते से पैसा निकाल सकेंगे. इसका उद्देश्य लोगों को तेज, आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.

EPFO 3.0 में क्या हैं बड़े बदलाव

EPFO 3.0 के तहत कई अहम सुधार प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें PF अकाउंट तक आसान पहुंच, ऑटो क्लेम सेटलमेंट और सीधे बैंक खाते में तेज ट्रांसफर जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा सदस्य अब UPI प्लेटफॉर्म पर अपना PF बैलेंस भी चेक कर सकेंगे. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ATM और UPI के जरिए तुरंत PF निकासी संभव होगी.

ATM और UPI से PF निकालने की सीमा

नई व्यवस्था के तहत सदस्य अपने PF खाते में जमा कुल रकम का अधिकतम 50 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे. यह सीमा इसलिए तय की गई है ताकि भविष्य के लिए कुछ बचत सुरक्षित रह सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक EPFO जल्द ही अपने सदस्यों को ATM कार्ड भी जारी कर सकता है. ये कार्ड सीधे PF खाते से जुड़े होंगे, जिससे ATM से पैसा निकालना और आसान हो जाएगा.

किन लोगों को मिलेगी यह सुविधा

ATM और UPI के जरिए PF निकासी का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी.

1. सदस्य के पास एक्टिव यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होना जरूरी है.
2. मोबाइल नंबर UAN से लिंक और एक्टिव होना चाहिए.
3. UAN का आधार. पैन. बैंक खाता और IFSC कोड से लिंक होना अनिवार्य है.

इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही सदस्य इस नई सुविधा का लाभ उठा पाएंगे.

बैंकों के साथ साझेदारी से तेज होगा प्रोसेस

EPFO ने सेवा को और बेहतर बनाने के लिए 32 सरकारी और निजी बैंकों के साथ समझौता किया है. इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां सीधे कर्मचारियों के PF खाते में पैसा जमा कर सकेंगी और क्लेम प्रोसेस तेजी से पूरा होगा. 

उम्मीद की जा रही है कि EPFO 3.0 को 2026 के मध्य तक पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. इसके लागू होने के बाद PF से जुड़ी अधिकांश सेवाएं डिजिटल और तुरंत उपलब्ध होंगी. इस तरह EPFO 3.0 कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जहां PF निकासी अब लंबी प्रक्रिया नहीं बल्कि कुछ मिनटों का काम बन जाएगी.


चुनाव से पहले सख्ती तेज: जब्ती का आंकड़ा 650 करोड़ रुपये के पार, पश्चिम बंगाल सबसे आगे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई.

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Monday, 06 April, 2026
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भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा और उपचुनावों से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए नकदी, शराब, ड्रग्स और अन्य प्रलोभनों की जब्ती को तेज कर दिया है. आयोग के मुताबिक अब तक कुल जब्ती 650 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो चुनावी उल्लंघनों पर सख्त निगरानी को दर्शाता है.

निर्वाचन आयोग ने बताया कि 26 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक सीज़र मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने के बाद से प्रवर्तन एजेंसियों ने करीब 651.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. इस कदम का उद्देश्य चुनावों में मतदाताओं को प्रलोभन से मुक्त रखना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है.

इन राज्यों में होने हैं चुनाव

आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था. इसके साथ ही छह राज्यों में उपचुनाव भी प्रस्तावित हैं. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आचार संहिता का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा जब्ती

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई. इसके बाद तमिलनाडु में 170 करोड़ रुपये और असम में 97 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई.

जब्त की गई वस्तुओं में 53.2 करोड़ रुपये नकद, लगभग 79.3 करोड़ रुपये की शराब, 230 करोड़ रुपये की ड्रग्स, 58 करोड़ रुपये के कीमती धातु और 231 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त उपहार व अन्य सामान शामिल हैं.

निगरानी के लिए बड़ी तैनाती

निर्वाचन आयोग ने बताया कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,100 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं, जो 100 मिनट के भीतर प्रतिक्रिया देते हैं. इसके अलावा 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें प्रमुख स्थानों पर अचानक जांच कर रही हैं.

आयोग ने चुनाव वाले राज्यों और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य सचिवों, पुलिस प्रमुखों और अन्य एजेंसियों के साथ कई समीक्षा बैठकें भी की हैं, ताकि चुनाव हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं से मुक्त रह सकें.

नागरिकों के लिए शिकायत व्यवस्था

आम नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए जिला स्तर पर शिकायत समितियां बनाई गई हैं. साथ ही मतदाताओं और राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी आयोग के C-Vigil मोबाइल ऐप के जरिए दें.

 


डिजिटल टोलिंग की ओर बड़ा कदम: 10 अप्रैल से हाईवे पर कैश पेमेंट पूरी तरह खत्म

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 10 अप्रैल से पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल पेमेंट ही स्वीकार किए जाएंगे. इसमें मुख्य रूप से FASTag और UPI जैसे माध्यम शामिल होंगे.

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Saturday, 04 April, 2026
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देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने टोल भुगतान प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है. 10 अप्रैल से सभी टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट बंद कर दिया जाएगा और अब केवल FASTag व UPI के जरिए ही टोल फीस जमा की जा सकेगी. इस कदम का उद्देश्य ट्रैफिक को सुगम बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है.

10 अप्रैल से लागू होगा डिजिटल टोलिंग सिस्टम

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 10 अप्रैल से पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल पेमेंट ही स्वीकार किए जाएंगे. इसमें मुख्य रूप से FASTag और UPI जैसे माध्यम शामिल होंगे. यह फैसला पहले चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा था, लेकिन अब इसे पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि टोल कलेक्शन को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जाएगा.

क्या होंगे इस बदलाव के फायदे?

टोल पेमेंट के डिजिटलीकरण से कई अहम फायदे सामने आने की उम्मीद है. सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और जाम से राहत मिलेगी. इसके अलावा डिजिटल भुगतान से ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और कैश हैंडलिंग से जुड़ी समस्याएं खत्म होंगी. अधिकारियों के मुताबिक, इससे यात्रियों को तेज और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा. देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर 1,150 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां यह नया सिस्टम लागू होगा.

उत्तर प्रदेश में टोल दरों में बढ़ोतरी

डिजिटल सिस्टम लागू होने के साथ ही कुछ राज्यों में टोल दरों में भी बढ़ोतरी की गई है. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैसेंजर कार के लिए टोल करीब 10% तक बढ़ा दिया गया है. वहीं, एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में 1.5% से 3.5% तक की वृद्धि की गई है.

किन रूट्स पर बढ़े नए रेट?

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कार और SUV के लिए टोल 665 रुपये से बढ़ाकर 675 रुपये कर दिया गया है. वहीं दोपहिया वाहनों के लिए शुल्क 330 रुपये से बढ़ाकर 335 रुपये कर दिया गया है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर कार के लिए टोल 295 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 145 रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा कमर्शियल वाहनों को भी अब ज्यादा शुल्क देना होगा.

यात्रियों के लिए क्या जरूरी?

अब हाईवे पर सफर करने से पहले वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके वाहन में FASTag एक्टिव हो या उनके पास UPI पेमेंट की सुविधा उपलब्ध हो. कैश पेमेंट पूरी तरह बंद होने के बाद बिना डिजिटल भुगतान के टोल पार करना संभव नहीं होगा, जिससे यात्रियों को पहले से तैयारी करनी होगी.

इस फैसले के साथ भारत का हाईवे नेटवर्क तेजी से डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में स्मार्ट और सुगम परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


डिजिटल पेमेंट पर RBI का सख्त कदम, 1 अप्रैल से हर ट्रांजैक्शन में डबल सिक्योरिटी अनिवार्य

भारतीय रिजर्व बैंक का यह कदम डिजिटल पेमेंट को अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. हालांकि शुरुआत में यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में यह यूजर्स के हित में साबित होगी.

Last Modified:
Monday, 30 March, 2026
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देश में डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला लिया है. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत अब हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA जरूरी होगा. इससे यूजर्स के पैसे की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी.

अप्रैल से बदल जाएगा पेमेंट का तरीका

1 अप्रैल 2026 से डिजिटल पेमेंट करने की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा. नए नियम के मुताबिक अब सिर्फ OTP के जरिए ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होगा. इसके साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच भी जरूरी होगी. यानी हर भुगतान में यूजर की पहचान दो अलग-अलग तरीकों से सत्यापित की जाएगी.

क्या है 2FA और कैसे करेगा काम

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA एक ऐसी सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें यूजर की पहचान दो स्तरों पर जांची जाती है. इसमें कुछ आपके पास होता है, जैसे मोबाइल या कार्ड, कुछ आप जानते हैं, जैसे PIN या पासवर्ड या फिर आपकी पहचान, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी के जरिए जांच की जाएगी. अब पेमेंट करते समय OTP के साथ इन तरीकों में से किसी एक का इस्तेमाल भी करना होगा. इससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाएगी.

क्यों लिया गया यह फैसला

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कदम उठाकर ऑनलाइन भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश की है. नए सिस्टम से यूजर्स के पैसे को धोखाधड़ी से बचाने में मदद मिलेगी.

आम लोगों पर क्या होगा असर

इस नए नियम के लागू होने के बाद पेमेंट करने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. क्योंकि हर ट्रांजैक्शन में एक अतिरिक्त स्टेप पूरा करना होगा. लेकिन इसके बदले यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित अनुभव मिलेगा. हर बार दूसरा ऑथेंटिकेशन फैक्टर अलग होगा, जिससे अगर किसी एक जानकारी के लीक होने पर भी आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा.

फ्रॉड होने पर किसकी होगी जिम्मेदारी

रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी बैंक या पेमेंट कंपनी की लापरवाही से ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी. ऐसे मामलों में यूजर को पूरा मुआवजा दिया जाएगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन के लिए भी अक्टूबर 2026 तक और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की योजना है.

 

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होली पर सफर आसान! रेलवे चलाएगी स्पेशल ट्रेनें, देखिए पूरी लिस्ट और तारीखें

स्पेशल ट्रेन चलने से पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और दिल्ली-एनसीआर के रूट्स पर यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सफर की सुविधा मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 27 February, 2026
Last Modified:
Friday, 27 February, 2026
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होली के त्योहार पर घर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई होली स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है, हर साल की तरह इस बार भी त्योहार के दौरान लंबी वेटिंग लिस्ट और ट्रेनों में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त फेरे चलाए जा रहे हैं, इन स्पेशल ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और वे अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे.

अमृतसर–पटना रिजर्व्ड होली स्पेशल (04664/04663)

अमृतसर जंक्शन से पटना जंक्शन के बीच 04664/04663 नंबर की रिजर्व्ड होली स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, अमृतसर से पटना के लिए यह ट्रेन 27 फरवरी, 2 मार्च और 5 मार्च 2026 को कुल तीन ट्रिप में संचालित होगी, वहीं पटना से अमृतसर के लिए यह ट्रेन 28 फरवरी, 3 मार्च और 6 मार्च 2026 को तीन ट्रिप लगाएगी, पंजाब और बिहार के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी,

आनंद विहार–गोरखपुर होली स्पेशल (04026/04025)

आनंद विहार टर्मिनल से गोरखपुर जंक्शन के बीच 04026/04025 नंबर की रिजर्व्ड होली स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, आनंद विहार से गोरखपुर के लिए यह ट्रेन 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक कुल चार ट्रिप में संचालित होगी, वहीं गोरखपुर से आनंद विहार के लिए यह सेवा 28 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक चार ट्रिप लगाएगी, दिल्ली-एनसीआर और पूर्वांचल के यात्रियों के लिए यह रूट सबसे व्यस्त माना जाता है, ऐसे में यह स्पेशल ट्रेन काफी उपयोगी रहेगी,

मऊ–वलसाड स्पेशल (05017/05018)

मऊ से वलसाड के बीच 05017/05018 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, 05017 मऊ–वलसाड स्पेशल 28 फरवरी से 7 मार्च 2026 के बीच दो ट्रिप में संचालित होगी और मऊ से दोपहर 3:45 बजे प्रस्थान करेगी, वहीं 05018 वलसाड–मऊ स्पेशल 1 मार्च से 8 मार्च 2026 के बीच दो ट्रिप में चलेगी और मऊ में रात 12:45 बजे पहुंचेगी, उत्तर प्रदेश और गुजरात के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इससे सीधा लाभ मिलेगा,

प्रयागराज रामबाग–अयोध्या कैंट स्पेशल (05140/05139)

प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन के बीच 05140/05139 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, यह ट्रेन पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त यात्रा विकल्प प्रदान करेगी और क्षेत्रीय स्तर पर भीड़ को कम करने में मदद करेगी,

कलबुर्गी–हजरत निजामुद्दीन स्पेशल (01301/01302)

कलबुर्गी से हजरत निजामुद्दीन जंक्शन के बीच 01301/01302 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, 01301 कलबुर्गी–हजरत निजामुद्दीन स्पेशल 26 फरवरी 2026 को एक ट्रिप में सुबह 6 बजे रवाना होगी, वहीं 01302 हजरत निजामुद्दीन–कलबुर्गी स्पेशल 1 मार्च 2026 को एक ट्रिप में चलेगी और सुबह 8:30 बजे पहुंचेगी, दक्षिण भारत से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा खास तौर पर लाभदायक रहेगी,

होली के मौके पर पहले भी कई स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जा चुकी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त सेवाएं जोड़ी जा सकती हैं, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते टिकट बुक करा लें और यात्रा से पहले ट्रेन की टाइमिंग की पुष्टि जरूर कर लें, ताकि त्योहार का सफर सुगम और सुरक्षित बन सके.
 


VB-G RAM-G अधिनियम 2025: ग्रामीण रोजगार को ‘पीएम गति शक्ति’ से जोड़ने की नई पहल

इस कानून के क्रियान्वयन के लिए ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी. इन योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना, संतृप्ति आधारित विकास सुनिश्चित करना और सेवाओं की समन्वित डिलीवरी करना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 14 February, 2026
Last Modified:
Saturday, 14 February, 2026
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ग्रामीण आजीविका को मजबूती देने और स्थानीय विकास को राष्ट्रीय योजना से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने VB-G RAM-G अधिनियम, 2025 लागू किया है. यह कानून ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप गांवों में आय सुरक्षा और समन्वित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. ग्रामीण विकास राज्य मंत्री Kamlesh Paswan ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से इस अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी है. सरकार का मानना है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को राष्ट्रीय अवसंरचना और विकास रणनीति के साथ जोड़कर गांवों में आय वृद्धि, पारदर्शिता और समग्र विकास को नई गति देगा.

125 दिन का गारंटीकृत रोजगार

नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के उन वयस्क सदस्यों को हर वर्ष 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जो स्वेच्छा से काम करने के लिए पंजीकरण कराते हैं. इससे ग्रामीण परिवारों को आय सुरक्षा मिलने और पलायन में कमी आने की उम्मीद है.

‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के जरिए समन्वित विकास

इस कानून के क्रियान्वयन के लिए ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी. इन योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना, संतृप्ति आधारित विकास सुनिश्चित करना और सेवाओं की समन्वित डिलीवरी करना है.

ये योजनाएं PM Gati Shakti से जोड़ी गई हैं और इन्हें भू-स्थानिक मैपिंग तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन प्राप्त है. स्वीकृत योजनाओं को ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समेकित किया जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार पहलें व्यापक विकास लक्ष्यों के अनुरूप संचालित हों.

पंचायत राज संस्थाओं की स्पष्ट भूमिका

अधिनियम की धारा 16 में Panchayati Raj Institutions की भूमिका स्पष्ट की गई है. जिला, मध्यवर्ती और ग्राम स्तर की पंचायतों को योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है.

जिला स्तर पर, पंचायतें योजनाओं का समन्वय, स्वीकृति और निगरानी करेंगी तथा अन्य कार्यक्रमों से अभिसरण सुनिश्चित करेंगी.

मध्यवर्ती स्तर पर, पंचायतें ब्लॉक स्तर की योजनाएं तैयार करेंगी और ग्राम पंचायतों को क्रियान्वयन में सहयोग देंगी.

ग्राम पंचायत स्तर पर, पंजीकरण, कार्य आवंटन, रिकॉर्ड संधारण और तकनीकी मानकों के पालन की जिम्मेदारी होगी.

50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से अनिवार्य

अधिनियम में प्रावधान है कि कुल लागत के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के जरिए ही कराए जाएंगे. मस्टर रोल, बिल, वाउचर, माप पुस्तिका और जियो-टैग डिजिटल रिकॉर्ड जैसे सभी दस्तावेज ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि सामाजिक अंकेक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके.

मनरेगा के अनुभव से तैयार ढांचा

इस ढांचे को तैयार करने में Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act के क्रियान्वयन के अनुभवों का भी उपयोग किया गया है. इससे जवाबदेही और संस्थागत जिम्मेदारियों को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है.

 


टोल टैक्स में बड़ा सुधार: अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा नहीं, सिर्फ बनी सड़क का ही लगेगा शुल्क

अधूरे प्रोजेक्ट पर पूरी वसूली की व्यवस्था खत्म होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा. 15 फरवरी से लागू होने जा रहे ये नियम सड़क परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकते हैं.

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Published - Saturday, 14 February, 2026
Last Modified:
Saturday, 14 February, 2026
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देशभर के वाहन चालकों के लिए राहत की बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने टोल वसूली के नियमों में अहम बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल नहीं लिया जाएगा. जितनी सड़क चालू और उपयोग योग्य होगी, उतने हिस्से का ही शुल्क देना होगा. नए नियम 15 फरवरी 2026 से लागू होंगे और इससे निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस ऑपरेटरों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. 

अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरी वसूली अब बंद

पहले की व्यवस्था के तहत, यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से तैयार होता था, तब भी यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल वसूला जाता था. यानी सड़क का बड़ा हिस्सा निर्माणाधीन होने के बावजूद वाहन चालकों को पूरा शुल्क चुकाना पड़ता था. अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया है कि केवल चालू और उपयोग योग्य हिस्से के लिए ही टोल लिया जाएगा. इससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद पूरा शुल्क देने को मजबूर थे.

नियमों में क्या हुआ बदलाव

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया है. नए प्रावधानों के अनुसार अब आंशिक रूप से चालू नेशनल एक्सप्रेसवे पर पूरा टोल नहीं वसूला जाएगा और केवल चालू हिस्से के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्ग की दरों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा. यह प्रावधान एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि यह फैसला यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

मौजूदा टोल स्ट्रक्चर और नई व्यवस्था

वर्तमान में नेशनल एक्सप्रेसवे पर टोल दरें सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक हैं. ऐसे में अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा शुल्क वसूला जाना यात्रियों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होता था. नई व्यवस्था के तहत अधूरे एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में अनुपातिक कमी होगी और यात्रियों को केवल उपयोग किए गए हिस्से का ही भुगतान करना होगा. मंत्रालय का मानना है कि इससे समानांतर चल रहे पुराने नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ट्रैफिक जाम से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आ सकती है.

15 फरवरी 2026 से होंगे लागू

संशोधित नियम नेशनल हाईवे शुल्क (दर निर्धारण एवं वसूली) (संशोधन) नियम, 2026 के तहत 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे. यह प्रावधान एक वर्ष तक या संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का मानना है कि इस बदलाव से निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस संचालकों को भी लाभ मिलेगा. टोल शुल्क में कमी से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका असर माल भाड़े और उपभोक्ता कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

यात्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा

टोल में अनुपातिक कटौती से लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को सीधी राहत मिलेगी. ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए यह निर्णय परिचालन लागत कम करने में सहायक हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एक्सप्रेसवे का बेहतर उपयोग होगा और समानांतर हाईवे पर भीड़ घटेगी, जिससे यात्रा और सुगम हो सकती है.

 


साल में 5 बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो सस्पेंड हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र सरकार ने बदले नियम

सरकार का यह नया नियम सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश देता है. हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे जमीन पर कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से लागू किया जाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 January, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 January, 2026
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अब ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. दरअसल, केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में अहम बदलाव करते हुए बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर सख्ती बढ़ा दी है. नए प्रावधान के तहत अगर कोई व्यक्ति एक साल में पांच या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है.

युवाओं के लिए जरूरी हो चुका है ड्राइविंग लाइसेंस

आज के दौर में ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. खासकर युवा वर्ग के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाने के लिए डीएल अनिवार्य है. ऐसे में अगर आप भी वाहन चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है, क्योंकि छोटी-छोटी लापरवाहियां अब आपके लाइसेंस पर भारी पड़ सकती हैं.

साल में 5 गलतियां और लाइसेंस पर खतरा

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों में ताजा संशोधन किया है. इसका उद्देश्य उन ड्राइवरों पर लगाम लगाना है, जो बार-बार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं. नए नियम के अनुसार, यदि कोई चालक एक साल में पांच या उससे अधिक बार मोटर वाहन अधिनियम या उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है. लाइसेंस सस्पेंड होने की स्थिति में चालक को तीन महीने तक वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी. यह फैसला लाइसेंसिंग अथॉरिटी, जैसे आरटीओ या डीटीओ, द्वारा लिया जाएगा.

1 जनवरी से लागू हुआ नया नियम

केंद्र सरकार ने इस संबंध में हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह नियम 1 जनवरी से लागू हो चुका है. इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले वर्ष किए गए ट्रैफिक उल्लंघनों को अगले वर्ष की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा. यानी हर साल उल्लंघनों की गिनती नए सिरे से शुरू होगी.

पहले किन मामलों में सस्पेंड होता था डीएल

इससे पहले ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने से जुड़े 24 आधार तय थे. इनमें गाड़ी चोरी करना, यात्रियों से मारपीट, अपहरण, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग और सार्वजनिक स्थान पर वाहन छोड़ देना जैसे गंभीर अपराध शामिल थे. इन मामलों को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता था. अब नए नियम के तहत हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और रेड लाइट जंप करना जैसे सामान्य लेकिन बार-बार होने वाले उल्लंघन भी लाइसेंस सस्पेंशन की वजह बन सकते हैं.

विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा ने इस कदम को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है. उनका कहना है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती जरूरी है. हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों को पकड़ने में प्रवर्तन एजेंसियां अक्सर नाकाम रहती हैं. उन्होंने सीसीटीवी से दर्ज उल्लंघनों के लिए एक स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की जरूरत पर भी जोर दिया है.

‘कठोर लेकिन त्रुटिपूर्ण’ करार

मोटर वाहन कानूनों के विशेषज्ञ रोहित बलुजा ने इस संशोधन को कठोर और वैचारिक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि लाइसेंस सस्पेंशन को तभी लागू किया जाना चाहिए, जब निष्पक्ष और सुसंगत प्रवर्तन व्यवस्था मौजूद हो. उनके मुताबिक, असमान प्रवर्तन और कमजोर प्रक्रिया वाली व्यवस्था में यह नियम दुरुपयोग को बढ़ावा दे सकता है और सड़क सुरक्षा के मूल कारणों जैसे खराब सड़क डिजाइन, अपर्याप्त साइन बोर्ड और कमजोर ट्रैफिक इंजीनियरिंग को नजरअंदाज करता है.

चालान प्रक्रिया में भी किए गए बदलाव

नई अधिसूचना में ट्रैफिक चालान जारी करने और निपटाने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है. वर्दीधारी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी कर सकेंगे. ई-चालान स्वतः भी जनरेट हो सकते हैं.

उल्लंघन करने वाले को चालान का भुगतान करने या उसे चुनौती देने के लिए 45 दिन का समय मिलेगा. यदि इस अवधि में चालान को चुनौती नहीं दी जाती, तो इसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा और अगले 30 दिनों में जुर्माना भरना होगा. यदि चालान को चुनौती दी जाती है, तो संबंधित अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा. तय समय-सीमा का पालन नहीं होने पर चालान रद्द कर दिया जाएगा.


नए साल में नई जेब गणित: 1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये 10 बड़े बदलाव, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर

1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये बदलाव आम आदमी की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित करेंगे. कहीं राहत है तो कहीं अतिरिक्त बोझ भी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 01 January, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 January, 2026
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साल 2026 की शुरुआत आम लोगों के लिए कई अहम बदलावों के साथ हुई है. 1 जनवरी से ऐसे कई नियम और फैसले लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ेगा. कहीं राहत मिली है तो कहीं खर्च बढ़ने वाला है. पीएनजी सस्ती हुई है, लेकिन एलपीजी सिलेंडर और कारें महंगी हो गई हैं. इसके अलावा टैक्स, रेलवे टिकट, निवेश, सैलरी और डिजिटल लेन-देन से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुए हैं. आइए जानते हैं आज से लागू हुए 10 बड़े बदलावों के बारे में.

पीएनजी सस्ती, कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा

नए साल पर घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की कीमत में 70 पैसे प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर की कटौती की है. इसके बाद दिल्ली में PNG की कीमत घटकर 47.89 रुपये प्रति SCM हो गई है. वहीं दूसरी ओर 19 किलो वाला कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा हो गया है. दिल्ली में इसकी कीमत 111 रुपये बढ़कर 1,691.50 रुपये हो गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट में खाने-पीने का खर्च बढ़ सकता है.

आज से महंगी हो गईं कारें

नए साल के साथ ही कई कार कंपनियों ने गाड़ियों की कीमतें बढ़ा दी हैं. हुंडई की कारें औसतन 0.6 फीसदी महंगी हो गई हैं. रेनॉ इंडिया ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक बढ़ोतरी की है. वहीं मर्सिडीज-बेंज इंडिया भी 2 फीसदी तक कीमत बढ़ाने की तैयारी में है. JSW MG Motor India और निसान इंडिया ने भी बढ़ती इनपुट और लॉजिस्टिक्स लागत का हवाला देते हुए 2 से 3 फीसदी तक दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं.

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें यथावत

सरकार ने PPF, सुकन्या समृद्धि योजना और NSC जैसी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. हालांकि हाल ही में आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ब्याज दरें घट सकती हैं. लेकिन 1 जनवरी से शुरू हो रही तिमाही के लिए सरकार ने दरों को स्थिर रखा है.

PAN और आधार लिंक न कराने वालों पर असर

पैन और आधार लिंक करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुकी है. जिन लोगों ने आधार एनरोलमेंट आईडी के जरिए पैन बनवाया था और अब तक लिंक नहीं कराया है, उनका पैन निष्क्रिय हो सकता है. इससे टैक्स रिटर्न फाइल करना मुश्किल होगा, अधिक TDS कट सकता है और निवेश, KYC या FD से जुड़े आवेदन भी खारिज हो सकते हैं.

ITR से जुड़े नियम हुए सख्त

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रिवाइज्ड और बिलेटेड ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी. जिन लोगों ने समय पर रिटर्न फाइल नहीं किया है, उन्हें अब अपडेटेड रिटर्न भरना होगा. इस पर अतिरिक्त टैक्स और जुर्माना देना पड़ सकता है. साथ ही पुराने घाटे का क्लेम भी नहीं किया जा सकेगा.

रेलवे रिजर्वेशन के नए नियम

रेलवे ने टिकट बुकिंग को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए आधार-ऑथेंटिकेटेड बुकिंग सिस्टम लागू किया है. आधार से वेरिफाइड यूजर्स 5 जनवरी 2026 से एडवांस रिजर्वेशन पीरियड के पहले दिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक टिकट बुक कर सकेंगे. 12 जनवरी 2026 से यह समय सीमा बढ़ाकर रात 12 बजे तक कर दी जाएगी. इसका मकसद फर्जी आईडी और कालाबाजारी पर लगाम लगाना है.

REITs को लेकर निवेश नियम बदले

1 जनवरी 2026 से म्यूचुअल फंड्स और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स द्वारा REITs में किया गया निवेश इक्विटी निवेश माना जाएगा. सेबी ने REITs को इक्विटी कैटेगरी में शामिल कर लिया है ताकि इन फंड्स का निवेश बढ़ाया जा सके. हालांकि InvITs पहले की तरह हाइब्रिड कैटेगरी में ही बने रहेंगे.

आठवां वेतन आयोग लागू

सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी है. इसकी सिफारिशें भले ही बाद में आएं, लेकिन यह 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर के रूप में मोटी रकम मिलने की उम्मीद है.

डिजिटल लेन-देन के नियम हुए सख्त

डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सरकार और आरबीआई ने UPI प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियम लागू किए हैं. गूगल पे, फोन पे और व्हाट्सएप पे जैसे ऐप्स पर अब ज्यादा कड़ी KYC प्रक्रिया अपनानी होगी. मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन और अकाउंट लिंकिंग में अतिरिक्त सुरक्षा लेयर जोड़ी जा रही है.

फूड प्रोडक्ट्स के लिए नए सख्त नियम

नए साल से खाद्य उत्पादों की मंजूरी के नियम भी सख्त हो गए हैं. अब सिर्फ दावों के आधार पर किसी फूड प्रोडक्ट को सुरक्षित नहीं माना जाएगा. FSSAI ने तय किया है कि खाद्य सुरक्षा या मानकों में बदलाव से जुड़े सभी आवेदन अब एक तय और मानकीकृत प्रारूप में ही स्वीकार किए जाएंगे. कंपनियों को अपने दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक सबूत देने होंगे.

 


नए साल से पहले PAN-Aadhaar करें लिंक, वरना टैक्स और बैंक लेन-देन में होगी परेशानी

नए साल से पहले PAN-Aadhaar लिंक करना बेहद जरूरी है. यह न केवल बैंकिंग और निवेश की समस्याओं को रोकता है, बल्कि टैक्स रिफंड और क्रेडिट प्रक्रिया को भी सहज बनाता है. अभी कार्रवाई करें, ताकि आप 1 जनवरी, 2026 से कोई परेशानी में न फंसें.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 24 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 24 December, 2025
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अगर आपने अभी तक अपने PAN कार्ड को Aadhaar से लिंक नहीं किया है तो यह आपके लिए अंतिम चेतावनी है. दरएसल, आयकर विभाग के अनुसार, PAN-Aadhaar लिंकिंग की अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2025 है. इस समय सीमा के बाद आपका PAN कार्ड 1 जनवरी, 2026 से निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे बैंक लेन-देन, निवेश और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

अंतिम समय सीमा नजदीक
PAN-Aadhaar लिंकिंग की अंतिम तारीख करीब आ गई है. आयकर विभाग की अधिसूचना के अनुसार, जिन लोगों को 1 अक्टूबर, 2024 से पहले PAN कार्ड आवंटित किया गया था, उन्हें 31 दिसंबर, 2025 तक इसे Aadhaar से लिंक करना जरूरी है. समय पर लिंक न करने पर 1 जनवरी, 2026 से आपका PAN कार्ड पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएगा और 1,000 रुपये का जुर्माना भी देना होगा.

निष्क्रिय PAN के प्रभाव
एक बार PAN कार्ड निष्क्रिय हो जाने के बाद आप नए बैंक खाते नहीं खोल पाएंगे और न ही क्रेडिट या डेबिट कार्ड बनवा पाएंगे. 50,000 रुपये से अधिक नकद जमा और 10,000 रुपये से अधिक बैंकिंग लेन-देन में भी परेशानी आएगी. म्यूचुअल फंड और स्टॉकब्रोकर आपकी सेवाओं को रोक सकते हैं, जिससे निवेश फंस सकता है.

निष्क्रिय PAN के कारण आप ITR फाइल नहीं कर पाएंगे. अगर फाइल करते भी हैं तो विभाग इसे खारिज कर सकता है और आपको उच्च दर पर TDS/TCS देना पड़ सकता है. टैक्स क्रेडिट और रिफंड प्रक्रिया भी प्रभावित होगी.

PAN-Aadhaar लिंक करने का तरीका
लिंकिंग के लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं. 'Quick Links' में जाकर 'Link Aadhaar' विकल्प चुनें और 1,000 रुपये का जुर्माना भरें. भुगतान और सत्यापन के बाद अपने PAN और Aadhaar की जानकारी दर्ज करें. ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद आपका अनुरोध सबमिट हो जाएगा. ध्यान रखें कि PAN और Aadhaar में नाम और जन्मतिथि की जानकारी समान होनी चाहिए, ताकि वेरिफिकेशन में कोई दिक्कत न आए.