e4mDNPA:अच्‍छा कंटेंट देना, फेक न्‍यूज से बचना और मॉनेटाइजेशन सबसे बड़ी चुनौती

मीडिया इंडस्‍ट्री के लिए अपने कंज्‍यूमर को अच्छी न्‍यूज प्रोवाइड करने के साथ-साथ एक अच्छा बिजनेस मॉडल बनाना भी बहुत बड़ी चुनौती है.

Last Modified:
Friday, 20 January, 2023
eveny

राजधानी दिल्‍ली में हो रहे e4m DNPA digital Media Conference 2023 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के बाद बिजनेस वर्ल्‍ड ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ व चेयरमैन और एक्‍सचेंज फॉर मीडिया के संस्‍थापक डॉ.अनुराग बत्रा ने मीडिया इंडस्‍ट्री के चार बड़ी शख्सियतों के साथ बात करते हुए पहले सेशन की शुरुआत की. उनके साथ इस सेशन में एबीपी न्‍यूज के सीईओ अविनाश पांडे , पुनीत जैन, सीईओ, हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, संजय सिदवानी, सीईओ, इंडियन एक्‍सप्रेस डिजिटल और हेमंत जैन, प्रेसीडेंट एंड बिजनेस हेड, लोकमत ने भाग लिया.

कंज्‍यूमर तक सही से पहुंचना बड़ी चुनौती 
एबीपी न्यूज़ के सीईओ अविनाश पांडे ने कहा कि डिजिटल मीडिया के लिए 1 साल बहुत लंबा समय है जब एक ऐसी दुनिया में जहां सब लोग ब्रॉडकास्टर और पब्लिशर बन गए हो उसमें अपनी कंजूमर तक सही तरीके से पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. उन्‍होंने कहा कि आपके कंज्‍यूमर तक ऑथेंटिक न्यूज़ कैसे पहुंचती हैं और आप उसे कैसे मॉनेटाइजेशन करते हैं यह भी अपने आप में एक बहुत बड़ा चैलेंज है.

अलग-अलग कैटेगिरी के यूजर
हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के सीईओ पुनीत जैन ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज सभी पब्लिशर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज यूजर की पसंद अलग-अलग कैटेगरी की है. हमने कोविड-19 का सामना किया लेकिन बावजूद उसके अच्छी बात यह है कि रीडर्स का इंटरेस्ट लगातार बना हुआ है. हमारी न्यूज़ पर आज कई मिलियन व्यूज आते हैं जोकि बहुत अच्छी बात है. हमने सटीक पत्रकारिता के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें बड़े रिसोर्सेज का भी इस्तेमाल किया है. बड़ी संख्या में व्‍यूज होने के बावजूद उसे मॉनेटाइजेशन करना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. बड़ी चुनौती यह भी है कि हम पब्लिशर और प्लेटफॉर्म के बीच में कैसे व्‍यूवरों को मैनेज करते हैं.

 उपभोक्‍ता को अच्‍छा कंटेंट मिलना चाहिए
इस विषय पर बात रखते हुए संजय सिदवानी, सीईओ, इंडियन एक्‍सप्रेस डिजिटल ने कहा कि मैं समझता हूं आज के दौर में कंज्‍यूमर को संतुष्‍ट करना सबसे बड़ा चैलेंज है. उसे अच्‍छा कंटेंट देना, ऑथेंटिक जानकारी देना और उसके लिए पे करना यह अपने आप में सबसे बड़ा चैलेंज मुझे लगता है. आज के दौर में कॉस्ट भी अपने आप एक बहुत बड़ा विषय है. इसके साथ फेक न्यूज़ हमारे आस पास रहती है उसे मैनेज करना भी अपने आप में एक बड़ा टॉस्‍क होता है. डेमोक्रेसी में मुझे लगता है कि लोगों को अच्‍छा और आथेंटिक कंटेंट मिलना चाहिए और उसके लिए उन्हें पे करना भी सीखना चाहिए.  

आज शार्ट वीडियो का जमाना है
हेमंत जैन, प्रेसीडेंट एंड बिजनेस हेड लोकमत ने कहा कि आज मॉनेटाइजेशन सभी के लिए एक बहुत बड़ा विषय बना हुआ है. ऐसे में अपने कंज्‍यूमर को इकोसिस्‍टम के सेंटर में रखते हुए हमें यह सोचना होगा कि पिछले कुछ समय में उसके व्‍यवहार में बड़ा बदलाव आया है. आज कोई भी कंज्‍यूमर किसी भी कंटेंट पर 3-6 सेकंड से ज्यादा नहीं रुकता है, तो ऐसे में आपको इस बारे में सोचना होगा कि आप ऐसा क्या नया न्यूज कंटेंट लेकर आए जो आपके कंज्‍यूमर को रोक सके. आज जबकि हम देख रहे हैं कि वीडियो कंटेंट जो पहले 8 से 9 मिनट के होते थे आज वह 9 सेकंड में आ गए हैं. ऐसे में सभी लोग यह देख रहे हैं कि कैसे हम लोग वीडियो को शॉर्ट वीडियो में कन्वर्ट कर सकते हैं. हमारे सामने एक बड़ा चैलेंज है कि कंज्‍यूमर को ऐसा क्या प्रोवाइड कराया जाए जिससे उसका अटेंशन ज्यादा अपनी तरफ लाया जा सके और विज्ञापन को लाया जा सके, जिससे रेवेन्यू जेनरेट हो. 

हमारी वैल्यू समझनी होगी

डॉक्टर बत्रा के इस सवाल के जवाब में कि यदि मौजूदा समय में रिवेन्यु के लिए कोई एक बदलाव करना हो तो वो क्या होगा? इसके जवाब में लोकमत के बिजनेस हेड-डिजिटल हेमंत जैन ने कहा कि प्रमुख स्टेक होल्डर - यानी हमारे कंज्यूमर और विज्ञापनदाताओं को हमारी वैल्यू समझनी होगी. न केवल जो कंटेंट हम बनाते हैं उसकी वैल्यू करनी होगी, बल्कि इंटरनेट के जरिए उन्हें जो कंटेंट मिलता है उसकी भी वैल्यू करनी होगी, क्योंकि ज़्यादातर लोग ये सोचते हैं कि इंटरनेट फ्री है. पुनीत जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें कंज्यूमर केंद्रित प्रोडक्ट बनाने में निवेश करना होगा. संजय सिधवानी ने कहा कि कंज्यूमर किंग है, लिहाजा हमें उसे ये दिखाना पड़ेगा कि हम जो पेश कर रहे है, उसका उसकी जिन्दगी पर प्रभाव है. और ये हम पर है कि हम उसे कैसे क्रिएट करते हैं. आज चुनौती ये है कि हर कोई पब्लिशर है, ऐसे में कंज्यूमर के पास जो कुछ पहुंचता है, उसे पता नहीं होता कि क्या सही है और क्या गलत. वो उसी के आधार पर एक राय कायम कर लेता है.


कैंसर की 543 दवाएं होंगी सस्ती, 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें; मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

इस व्यवस्था के तहत कई प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी की गई है. इनमें 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं शामिल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 02 November, 2026
Last Modified:
Monday, 02 November, 2026
BWHindia

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर के इलाज को किफायती बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्राधिकरण ने 9 नवंबर 2026 से 543 कैंसर-रोधी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में कटौती की है. इस फैसले से मरीजों के जेब से होने वाले सालाना खर्च में 2,500 से 3,500 करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है.

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, NPPA ने विभिन्न ब्रांडों की 543 कैंसर-रोधी दवाओं की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतें तय की हैं. प्राधिकरण ने बताया कि फिलहाल जारी मूल्य सूची में 27 अक्टूबर तक दवा कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी शामिल है. जिन कंपनियों की ओर से गैर-अनुसूचित (नॉन-शेड्यूल्ड) कैंसर-रोधी दवाओं की संशोधित कीमतों की जानकारी बाद में दी जाएगी, उनके आधार पर सूची को अपडेट किया जाएगा.

137 कैंसर दवाओं पर लागू होगा ट्रेड मार्जिन का नया नियम

इससे पहले 17 अक्टूबर को NPPA ने जनहित में 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (TMR) लागू करने की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना और कैंसर के मरीजों के लिए इलाज की लागत कम करना है.

इस व्यवस्था के तहत कई प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी की गई है. इनमें 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं शामिल हैं. इसके अलावा स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली डेनोसुमैब (Denosumab), कैंसर मरीजों में न्यूट्रोपेनिया की रोकथाम के लिए दी जाने वाली पेगफिल्ग्रास्टिम (Pegfilgrastim) और कोलन, ओवेरियन तथा सर्वाइकल कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेवासिजुमैब (Bevacizumab) जैसी दवाएं भी इस दायरे में आती हैं.

सालाना 3,500 करोड़ रुपये तक बच सकते हैं मरीजों के

NPPA के अनुसार, भारत में कैंसर-रोधी दवाओं का बाजार करीब 12,500 करोड़ रुपये का है. इसमें लगभग 225 दवाएं और 500 फॉर्मूलेशन शामिल हैं. मिंट की 27 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों और दस्तावेजों के हवाले से बताया गया था कि कीमतों में इस कटौती से मरीजों के जेब से होने वाले खर्च में सालाना 2,500 से 3,500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है.

कीमतों में सबसे बड़ी कटौती कुछ प्रमुख कैंसर दवाओं में देखने को मिली है. कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाले थायोटेपा (Thiotepa) इंजेक्शन के ब्रांड सैमटेपा (Samtepa) की 100 मिलीग्राम शीशी की कीमत 80,071.86 रुपये से घटाकर 7,150.33 रुपये कर दी गई है. यानी इसकी कीमत में 72,921.53 रुपये या करीब 91.1 फीसदी की कमी आई है. इस दवा का इस्तेमाल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से पहले और ब्लैडर कैंसर के इलाज में किया जाता है.

वहीं, स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पैल्बोसाइक्लिब (Palbociclib) के ब्रांड पैल्बोप्रो (Palbopro) के 125 मिलीग्राम वाले 21 कैप्सूल के पैक की कीमत 40,421.33 रुपये से घटकर 2,720 रुपये रह गई है. इसमें करीब 93.3 फीसदी की कटौती हुई है. यानी मरीजों को एक पैक पर 37,701.33 रुपये की बचत होगी.

इन प्रमुख कैंसर दवाओं की कीमतों में भी कटौती

HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पर्टुज़ुमैब (Pertuzumab) के ब्रांड हर्टुमैब (Hertumab) की प्रति शीशी कीमत 94,951 रुपये से घटाकर 30,593 रुपये कर दी गई है. इस तरह इसकी कीमत में 64,358 रुपये की कमी आई है. इसी दवा के दूसरे ब्रांड लुपीहर (Lupiher) 420 मिलीग्राम की कीमत 83,520 रुपये से घटकर 37,358.35 रुपये हो गई है.

इसके अलावा बेवासिजुमैब (Bevacizumab) की कीमतों में भी बड़ी कटौती की गई है. इस दवा का इस्तेमाल मेटास्टैटिक कोलोरेक्टल कैंसर, नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन ट्यूमर के इलाज में किया जाता है.

- इवजुमैब (Ivzumab) 400 मिलीग्राम इंजेक्शन की कीमत 69,852.12 रुपये से घटकर 13,512 रुपये हो गई है.
- बेवासिजैब (Bevacizab) 400 मिलीग्राम की कीमत 65,205.09 रुपये से घटकर 8,956.75 रुपये रह गई है.
- सिजुमैब (Cizumab) 400 मिलीग्राम की कीमत 57,816 रुपये से घटाकर 10,211 रुपये कर दी गई है.

ओवेरियन, स्तन और पैंक्रियाटिक कैंसर के कुछ मरीजों में इस्तेमाल होने वाली ओलापारिब (Olaparib) की कीमत में भी कमी की गई है. इसके ब्रांड बीआरसीएवन (Brcaone) 150 मिलीग्राम पैक की कीमत 46,364.05 रुपये से घटकर 11,573.68 रुपये हो गई है.

इसी तरह एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली पेगास्पार्गिनेज (Pegasparginase) के इंजेक्शन ब्रांड पेग एल-एस्पारागिन (Peg L-Aparagin) की कीमत 41,845.97 रुपये से घटाकर 7,766.85 रुपये कर दी गई है.

मेटास्टैटिक प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एबिराटेरोन एसीटेट (Abiraterone Acetate) के ब्रांड एबिरैट (Abirat) की 250 मिलीग्राम की 120 टैबलेट वाली बोतल की कीमत 36,088.81 रुपये से घटकर 4,064.48 रुपये रह गई है.

कई अन्य कंपनियों की दवाएं भी होंगी सस्ती

कीमतों में कटौती का लाभ एबॉट हेल्थकेयर, RPG लाइफ साइंसेज, हेटेरो हेल्थकेयर, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और नैटको फार्मा जैसी कंपनियों के कुछ दवा ब्रांडों को भी मिलेगा.

एबॉट हेल्थकेयर की बेवाजीकैब (Bevazicab) की 4 मिलीलीटर शीशी की कीमत 21,767.70 रुपये से घटाकर 5,930.10 रुपये कर दी गई है. RPG लाइफ साइंसेज की फुलब्रेका (Fullbreca) की कीमत 26,072.16 रुपये से घटकर 5,491 रुपये हो गई है.

हेटेरो हेल्थकेयर की फ्लूडानॉक्स (FLUDANOX) शीशी की कीमत 14,235 रुपये से घटाकर 2,432 रुपये कर दी गई है. वहीं, RPG लाइफ साइंसेज की डेब्रुमैब (Debrumab) 60 मिलीग्राम की कीमत 22,031.25 रुपये से घटकर 5,941 रुपये रह गई है.

इसके अलावा RPG लाइफ साइंसेज की एनुटा (Enuta) के 28 कैप्सूल वाले पैक की कीमत 6,578.20 रुपये से घटाकर 2,232 रुपये कर दी गई है. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की एजासाइटिन (Azacitidine) की कीमत 6,337 रुपये से घटकर 1,495 रुपये और नैटको फार्मा की डसनाट 20 (Dasnat 20) की 60 टैबलेट वाली पैकिंग की कीमत 2,812.50 रुपये से घटकर 1,085.90 रुपये हो गई है.

इस फैसले से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आएगी. हालांकि, मरीजों को वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि उनके इलाज में कौन-सी दवा, कौन-सा ब्रांड और कितनी मात्रा में इस्तेमाल हो रहा है.


दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 31 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
BWHindia

दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने वाहनों की आवाजाही को लेकर सख्ती की है. 1 नवंबर से दूसरे राज्यों में पंजीकृत बीएस-6 से पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा. यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा. हालांकि, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है.

किन वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर रहेगी रोक?

दिल्ली सरकार के फैसले के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से दूसरे राज्यों में पंजीकृत ऐसे वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं कर सकेंगे, जो भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करते हैं. यानी बीएस-6 से पुराने मानकों वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.

यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा. सरकार ने यह कदम सर्दियों में वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों को कम करने के उद्देश्य से उठाया है.

किन वाहनों को मिलेगी छूट?

इस प्रतिबंध से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) से चलने वाले वाहनों को छूट दी गई है. इन वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी. वहीं, दूसरे राज्यों में पंजीकृत बीएस-6 मानकों से पुराने वाहनों को प्रतिबंध की अवधि के दौरान दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा.

गुरुग्राम और फरीदाबाद के वाहन होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों शहरों से दिल्ली आने वाले हर 10 में से करीब 3 वाहन बीएस-6 से पुराने उत्सर्जन मानकों वाले हैं.

गौरतलब है कि बीएस-6 देश में लागू वाहनों का सबसे सख्त उत्सर्जन मानक है. इसे 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू किया गया था. दिल्ली में पंजीकृत कुल वाहनों में से करीब 69 फीसदी वाहन बीएस-6 मानकों के अनुरूप हैं.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रैप भी लागू

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ परिवहन क्षेत्र भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की पीएम 2.5 में हिस्सेदारी करीब 23 फीसदी है. हालांकि, प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी पीएम से आता है. यह वायुमंडल में गैसीय प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनता है. इसमें पेट्रोल, डीजल और भारी वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन की भूमिका होती है.

वायु गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए सरकार ने 21 अक्टूबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को भी लागू कर दिया है. इसके तहत प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं.
 


सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 31 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 31 October, 2026
BWHindia

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए बड़ी खबर है. शुक्रवार रात कमोडिटी बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का दिसंबर वायदा करीब 5 फीसदी यानी 10 हजार रुपये से अधिक टूट गया. वहीं सोने की कीमत में करीब 3 फीसदी यानी 4,200 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इस बिकवाली के चलते दोनों धातुओं के भाव पिछले एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गए.

MCX पर सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट

शुक्रवार रात करीब 8 बजे MCX पर कारोबार के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट तेज हो गई. दिसंबर वायदा वाली चांदी करीब 5 फीसदी टूटकर 1,78,900 से 1.79 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई. इसमें एक झटके में 10 हजार रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

वहीं सोने का दिसंबर वायदा करीब 3 फीसदी गिरकर 1,38,250 से 1,38,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में पहुंच गया. सोने की कीमत में करीब 4,200 रुपये की कमी आई. बाजार में आई इस गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गए.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव

घरेलू बाजार की तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3.3 फीसदी से अधिक टूटकर 3,900 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे आ गया. कारोबार के दौरान इसकी कीमत गिरकर 3,880 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई. पिछले साल अक्टूबर के बाद यह इसका सबसे निचला स्तर है.

इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत भी करीब 5.12 फीसदी गिरकर 49 से 49.70 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई. बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि निवेशकों ने कीमती धातुओं में अपनी पोजीशन कम करना शुरू कर दिया.

IBJA पर 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट के बाद अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के भाव भी नीचे आ गए हैं.

- 24 कैरेट सोना: करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
- 22 कैरेट सोना: करीब 1.28 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
- 18 कैरेट सोना: करीब 1.05 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
- चांदी (999 शुद्धता): 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम

ये IBJA के बताए गए भाव हैं. इन पर GST और मेकिंग चार्ज अलग से लागू हो सकते हैं. ज्वैलरी की दुकान पर अंतिम कीमत इससे अलग हो सकती है.

आखिर क्यों आई सोने-चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार में आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली और अमेरिका से मिले आर्थिक संकेतों को माना जा रहा है. हाल के दिनों में कीमतों में तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा.

इसके अलावा अमेरिका के GDP आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं. वहीं महंगाई का दबाव भी बना हुआ है. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है.

दूसरी तरफ कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कुछ अधिकारियों की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख के संकेत मिलने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है.

दरअसल, जब ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका बढ़ती है, तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की आकर्षकता कम हो सकती है. ऐसे में निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं. बाजार में इसी बदलाव और मुनाफावसूली के चलते दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट देखने को मिली.

नोट: सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. इसलिए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ज्वैलर से ताजा भाव जरूर जांच लें.


रेलवे की डोर-टू-डोर पार्सल सेवा जल्द, 8 शहरों में घर बैठे भेज सकेंगे सामान; ऐप से होगी बुकिंग

रेलवे की 'रेल पार्सल ऐप-घर से घर तक' सेवा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे में शुरू की जाएगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सफल पायलट के बाद रेलवे इस सेवा को लागू करने की तैयारी कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2026
BWHindia

भारतीय रेलवे जल्द ही दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु समेत आठ बड़े शहरों में डोर-टू-डोर पार्सल सेवा शुरू करने जा रहा है. इसके तहत ग्राहक मोबाइल ऐप से पार्सल बुक कर सकेंगे. रेलवे के लॉजिस्टिक्स पार्टनर घर से सामान उठाकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचाएंगे और गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद उसे ग्राहक के बताए पते पर डिलीवर करेंगे. इससे लोगों को पार्सल भेजने के लिए रेलवे स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

इन 8 शहरों में शुरू होगी सेवा

रेलवे की 'रेल पार्सल ऐप-घर से घर तक' सेवा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु और पुणे में शुरू की जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सफल पायलट के बाद रेलवे इस सेवा को लागू करने की तैयारी कर रहा है.

इस सुविधा का लाभ आम लोगों के साथ छोटे कारोबारियों और ऑनलाइन विक्रेताओं को भी मिल सकता है. ग्राहक ऐप के जरिए बुकिंग और ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे. जरूरत के मुताबिक पैकेजिंग जैसी अतिरिक्त सेवाएं भी ली जा सकेंगी.

ट्रेन रवाना होने से 15 दिन पहले कर सकेंगे बुकिंग

जानकारी के अनुसार, पार्सल की बुकिंग ट्रेन रवाना होने से 15 दिन पहले शुरू हो जाएगी. ग्राहक ट्रेन छूटने से एक दिन पहले तक बुकिंग कर सकेंगे. वहीं, लॉजिस्टिक्स पार्टनर को ट्रेन रवाना होने से कम से कम एक घंटे पहले पार्सल रेलवे कर्मचारियों को सौंपना होगा. इस व्यवस्था में घर से पार्सल उठाने और गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी रेलवे के चुने हुए लॉजिस्टिक्स पार्टनर की होगी. इसके बाद सामान को ट्रेन के जरिए संबंधित शहर तक भेजा जाएगा.

बुकिंग कैंसिल करने पर कितना मिलेगा रिफंड?

अगर ग्राहक पार्सल उठाए जाने से पहले बुकिंग रद्द करता है, तो 10 रुपये क्लर्केज चार्ज काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी. हालांकि, घर से सामान उठाने और अंतिम पते तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स पार्टनर की ओर से लिया गया शुल्क उनके अपने नियमों के मुताबिक वापस किया जाएगा. बुकिंग के समय ग्राहकों को इन शर्तों की जानकारी दी जाएगी.

पार्सल कोच की राउंड ट्रिप बुकिंग पर भी छूट

रेलवे ने दिवाली और क्रिसमस के दौरान कारोबारियों को राहत देने के लिए पार्सल कोच की राउंड ट्रिप बुकिंग पर भी छूट दी है. इसके तहत पार्सल एग्रीगेटर्स एक तरफ की बुकिंग के बजाय डेढ़ गुना किराये में आने-जाने की बुकिंग कर सकेंगे. रेलवे के मुताबिक, इससे दोनों तरफ की यात्रा के कुल मालभाड़े में 25 फीसदी की कमी आएगी. यह छूट रेलवे की सभी पार्सल बुकिंग पर लागू नहीं होगी. इसका लाभ विशेष रूप से पार्सल एग्रीगेटर्स को मिलेगा.

बाइक, कार और घरेलू सामान भी भेज सकते हैं रेलवे से

भारतीय रेलवे के जरिए बाइक, कार, फर्नीचर, घरेलू उपकरण और कारोबार से जुड़ा सामान भी भेजा जा सकता है. फिलहाल सामान्य पार्सल सेवा के लिए ग्राहकों को सामान खुद रेलवे स्टेशन तक पहुंचाना होता है. नई डोर-टू-डोर सेवा शुरू होने के बाद चयनित शहरों में घर से सामान उठाने और गंतव्य तक पहुंचाने की सुविधा भी मिल सकेगी.

रेलवे की मौजूदा पार्सल सेवाओं में सामान्य पार्सल बुकिंग, एक्सप्रेस पार्सल सेवा, पार्सल वैन की बुकिंग और तापमान नियंत्रित रखने वाले सामान के लिए विशेष वैन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. पार्सल की बुकिंग और नियमों से जुड़ी जानकारी रेलवे के आधिकारिक पोर्टल (parcel.indianrail.gov.in) पर उपलब्ध है.

कितना भारी पार्सल भेज सकते हैं?

रेलवे के पार्सल पोर्टल के मुताबिक, सामान्य ब्रॉड गेज और मीटर गेज में एक पैकेज का अधिकतम वजन 150 किलोग्राम है. नैरो गेज में यह सीमा 125 किलोग्राम है. ब्रॉड गेज और मीटर गेज में पैकेज का अधिकतम आकार 2 मीटर लंबा, 1.5 मीटर चौड़ा और 1.25 मीटर ऊंचा बताया गया है. हालांकि, बुकिंग से पहले संबंधित सेवा और सामान की श्रेणी के नियमों की पुष्टि करना जरूरी है.

रेलवे के नियमों के तहत विस्फोटक, ज्वलनशील तरल पदार्थ और प्रतिबंधित रसायनों जैसी वस्तुओं को सामान्य पार्सल के रूप में नहीं भेजा जा सकता. नकदी, सोना और चांदी जैसी कीमती वस्तुओं पर भी प्रतिबंध लागू हैं.

नमो भारत ट्रेन में भी मिलेगी पार्सल डिलीवरी की सुविधा

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर भी पार्सल डिलीवरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी है. इसके लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने ब्लू डार्ट के साथ समझौता किया है. इस व्यवस्था के तहत दिल्ली से मेरठ तक पार्सल करीब एक घंटे में पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है.

 


राजस्थान की 3 लाख ग्रामीण महिलाएं डिजिटल पेमेंट से जुड़ेंगी, BHIM ऐप के इस्तेमाल को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल 'यूपीआई फॉर हर 2.0' कार्यक्रम का हिस्सा है. NPCI और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग ने 'यूपीआई फॉर हर' कार्यक्रम के जरिए महिलाओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
BWHindia

राजस्थान ग्रामीण बैंक, एनपीसीआई भीम और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग ने राज्य की ग्रामीण महिलाओं के बीच डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए साझेदारी की है. इसके तहत एक साल में 3 लाख महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है. इस पहल के जरिए महिलाओं को डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक करने, उनका आत्मविश्वास बढ़ाने और रोजमर्रा के वित्तीय कामों में यूपीआई के नियमित इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा.

राजस्थान ग्रामीण बैंक (RGB), एनपीसीआई भीम और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग (WWB) ने राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को डिजिटल भुगतान से जोड़ने के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है. इस पहल के तहत भीम पेमेंट्स ऐप के माध्यम से एक साल में 3 लाख महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसका उद्देश्य उन महिलाओं को डिजिटल भुगतान का नियमित इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिनके पास बैंक खाता और स्मार्टफोन होने के बावजूद वे इस सुविधा का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पा रही हैं.

यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर

यह पहल 'यूपीआई फॉर हर 2.0' कार्यक्रम का हिस्सा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग ने 'यूपीआई फॉर हर' कार्यक्रम के जरिए महिलाओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया है. उपलब्ध शोध के अनुसार, भारत में लगभग 20 करोड़ महिलाओं के पास स्मार्टफोन और बैंक खाता है. हालांकि, डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद सभी महिलाएं इसका नियमित इस्तेमाल नहीं करती हैं.

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत में पैसे भेजने, प्राप्त करने और वित्तीय लेन-देन करने की प्रक्रिया को आसान बनाया है. इसके बावजूद ग्रामीण और वंचित समुदायों की महिलाओं को डिजिटल भुगतान अपनाने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इनमें डिजिटल लेन-देन को लेकर भरोसे की कमी, तकनीक का इस्तेमाल करने में झिझक, पर्याप्त जानकारी का अभाव और ऐप के संचालन में आने वाली मुश्किलें शामिल हैं.

नई साझेदारी के तहत इन बाधाओं को दूर करने के लिए स्थानीय बैंकों के साथ महिलाओं के भरोसे का लाभ उठाया जाएगा. इसके अलावा, उनकी जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन, सामुदायिक भागीदारी और डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा.

स्थानीय बैंकों के भरोसे से बढ़ेगी डिजिटल भागीदारी

इस पहल में राजस्थान ग्रामीण बैंक की ग्रामीण समुदायों के बीच स्थापित विश्वसनीयता और भीम पेमेंट्स ऐप की डिजिटल भुगतान सुविधाओं को एक साथ लाने का प्रयास किया जाएगा. संबंधित संस्थाएं मिलकर ऐसी रणनीतियां तैयार करेंगी, जिनसे महिलाएं डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल शुरू करने के साथ इसे अपने रोजमर्रा के वित्तीय लेन-देन का हिस्सा बना सकें.

एनपीसीआई भीम की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ललिथा नटराज ने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति का पूरा लाभ उठाने के लिए महिलाओं को इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए. खासकर कम आय वाले परिवारों की महिलाओं के लिए डिजिटल भुगतान वित्तीय प्रबंधन को आसान बना सकता है. इससे वे विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकती हैं और अपने परिवार की वित्तीय सुरक्षा बेहतर करने की दिशा में कदम उठा सकती हैं.

उन्होंने कहा कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों की 100 से अधिक महिलाएं रोजमर्रा के लेन-देन में भीम पेमेंट्स ऐप का इस्तेमाल कर रही हैं और इसके फायदे अनुभव कर चुकी हैं. राजस्थान ग्रामीण बैंक और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग के साथ साझेदारी का उद्देश्य राज्य की अधिक महिलाओं तक डिजिटल भुगतान की सुविधा और इसके इस्तेमाल से जुड़े अवसर पहुंचाना है.

राजस्थान ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष मुकेश भारतीय ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का ग्रामीण समुदायों के साथ विश्वास का मजबूत रिश्ता है. इस भरोसे के साथ भीम की डिजिटल सुविधाओं को जोड़कर महिलाओं को डिजिटल वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल शुरू करने में मदद मिल सकती है. इससे डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ गांवों और परिवारों तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी.

वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग की दक्षिण एशिया प्रमुख कल्पना अजयन् ने कहा कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अपनाने में भरोसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कई महिलाओं के लिए डिजिटल भुगतान औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ने का पहला कदम होता है. नियमित रूप से डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करने से उनके लिए बचत, कर्ज, बीमा और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी अन्य सेवाओं तक पहुंच के अवसर भी बढ़ सकते हैं.

उन्होंने कहा कि राजस्थान ग्रामीण बैंक के साथ महिलाओं की जरूरतों के अनुरूप तैयार की गई सुविधाओं और सामुदायिक सहयोग को जोड़कर इस साझेदारी के जरिए राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

डिजिटल भुगतान का नियमित इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश

इस पहल का उद्देश्य केवल महिलाओं को भीम पेमेंट्स ऐप डाउनलोड करने या उसका इस्तेमाल शुरू करने तक सीमित नहीं है. इसके तहत महिलाओं को नियमित रूप से डिजिटल भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा.

उदयपुर में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान डिजिटल सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा हुई. महिलाओं को भीम पेमेंट्स ऐप के इस्तेमाल का प्रदर्शन दिखाया गया और ऐप का उपयोग करने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान से घर के खर्च का प्रबंधन करने, पैसे प्राप्त करने, समय बचाने और स्थानीय कारोबार में भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है.

राजस्थान में शुरू की गई इस पहल से यह समझने में भी मदद मिलेगी कि ग्रामीण महिलाओं के बीच डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बड़े स्तर पर कैसे बढ़ाया जा सकता है. इससे मिलने वाले अनुभव राज्य में डिजिटल वित्तीय समावेशन से जुड़ी नीतियों और योजनाओं को तैयार करने में उपयोगी हो सकते हैं. साथ ही, यह पहल देश में महिलाओं की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को भी दिशा दे सकती है.


विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के लिए प्रेस काउंसिल के नए दिशानिर्देश, पत्रकारों को ID कार्ड और सुरक्षा पर जोर

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने विरोध प्रदर्शनों और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए नए दिशानिर्देश अपनाए हैं.

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
BWHindia

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने विरोध प्रदर्शनों और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए नए दिशानिर्देश अपनाए हैं. 14 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में इन दिशानिर्देशों को मंजूरी दी गई. इनका उद्देश्य मीडिया कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने तथा पत्रकारों, मीडिया संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. 

प्रेस काउंसिल ने यह पहल ऐसे समय में की है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हुए प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान कई पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं. *इंडिया टुडे* और *हिंदुस्तान टाइम्स* की रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया और कुछ के फोन व रिपोर्टिंग उपकरण भी जब्त किए गए. 

पत्रकारों को पहचान पत्र प्रदर्शित करने की सलाह

प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को अपने मीडिया संस्थान की ओर से जारी वैध पहचान पत्र साथ रखने और कवरेज के दौरान उसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने की सलाह दी है. जहां लागू हो, पत्रकार प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) या सूचना एवं प्रचार निदेशालय (DIP) से मिली मान्यता का इस्तेमाल कर सकते हैं.

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि पत्रकारों को प्रदर्शन के दौरान तटस्थता और पेशेवर आचरण बनाए रखना चाहिए. उन्हें किसी प्रदर्शन में भाग लेने, किसी पक्ष का समर्थन करने, टकराव भड़काने या प्रदर्शनकारियों, विरोधी समूहों अथवा पुलिस के काम में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए. साथ ही, तनावपूर्ण परिस्थितियों में बहस से बचने और सुरक्षा के लिए जारी वैध पुलिस निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है. जरूरत पड़ने पर पत्रकार शांतिपूर्वक अपनी पेशेवर पहचान भी स्पष्ट कर सकते हैं. 

भीड़ और टकराव वाली जगहों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर

दिशानिर्देशों के अनुसार, पत्रकारों को पुलिस कार्रवाई की आशंका या तनाव बढ़ने की स्थिति में टकराव वाली जगहों से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए. उन्हें भीड़ के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने और पहले से बाहर निकलने के सुरक्षित रास्तों की पहचान करने की सलाह दी गई है.

आंसू गैस या धुएं की स्थिति में पत्रकारों को ऐसे रास्तों से बाहर निकलना चाहिए, जो उन्हें भीड़ के और भीतर ले जाने के बजाय सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएं. इसके अलावा, कैमरे या रिकॉर्डिंग उपकरणों को पुलिस की बैरिकेडिंग अथवा वाहनों पर इस तरह लगाने से बचने को कहा गया है, जिससे आवाजाही बाधित हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचे. 

प्राथमिक उपचार और आपातकालीन किट रखने की सलाह

प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को कवरेज के दौरान जरूरत के मुताबिक आपातकालीन किट साथ रखने की सलाह दी है. इसमें प्राथमिक उपचार का सामान, जरूरी दवाएं, पीने का पानी, पौष्टिक स्नैक्स, टॉर्च, तौलिया या कपड़ा और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा शामिल हो सकते हैं.

खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षात्मक हेलमेट और बॉडी आर्मर जैसे उपकरणों पर भी विचार किया जा सकता है. पत्रकारों को प्राथमिक उपचार की बुनियादी जानकारी रखने और सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल पहले से सीखने की सलाह दी गई है. दिशानिर्देशों में आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग उपकरणों या धुआं पैदा करने वाले ग्रेनेड को छूने अथवा हटाने से भी मना किया गया है.

न्यूजरूम और पुलिस के साथ बेहतर समन्वय पर जोर

मीडिया संगठनों को सलाह दी गई है कि वे प्रदर्शन की कवरेज पर भेजे गए पत्रकारों के संपर्क में रहें और आपात स्थिति में मदद के लिए एक जिम्मेदार संपर्क व्यक्ति नियुक्त करें. स्वतंत्र पत्रकारों (फ्रीलांसर) को भी अपने किसी भरोसेमंद संपादक या संपर्क व्यक्ति को अपनी लोकेशन, असाइनमेंट की योजना और लौटने के संभावित समय की जानकारी देने को कहा गया है.

पहले से निर्धारित प्रदर्शनों की कवरेज के लिए मीडिया संगठनों को संबंधित पुलिस अधिकारियों, जन सूचना अधिकारियों या मीडिया संपर्क अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी गई है. इससे संवाद की प्रक्रिया स्पष्ट करने और मीडिया कर्मियों के लिए निर्धारित स्थानों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है. 

निष्पक्ष रिपोर्टिंग और तथ्यों की पुष्टि जरूरी

प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को घटनाओं की सटीक, वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की सलाह दी है. रिपोर्टिंग में सत्यापित तथ्यों, आरोपों, विचारों और अपुष्ट दावों के बीच स्पष्ट अंतर रखने पर जोर दिया गया है.

पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकार की ओर से किए गए दावों की समान रूप से जांच करने तथा जहां संभव हो, कई स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करने को कहा गया है. दिशानिर्देशों में पुलिस की वास्तविक समय की तैनाती, रणनीतिक गतिविधियों या सुरक्षित निकास मार्गों की जानकारी प्रकाशित करने से बचने की सलाह भी दी गई है, यदि इससे सुरक्षा या अभियान की गोपनीयता प्रभावित हो सकती हो.

नाबालिगों, घायलों और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में मौजूद लोगों की तस्वीरें या पहचान सार्वजनिक करते समय उनकी निजता और सुरक्षा का ध्यान रखने पर भी जोर दिया गया है. प्रेस काउंसिल की यह पहल विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा, पेशेवर आचरण और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है. इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य पत्रकारों को अपना काम प्रभावी ढंग से करने में मदद देना और संवेदनशील परिस्थितियों में जोखिम कम करना है.
 


SIR के बाद मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान, एक महीने में पूरा होगा सत्यापन

एसआईआर के बाद मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान, एक महीने में पूरा होगा सत्यापन

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
BWHindia

चुनाव आयोग ने उन राज्यों में मतदाता सूची से छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है. इस अभियान के तहत पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और अब तक मतदाता के रूप में पंजीकरण नहीं करा सके पात्र नागरिकों को भी सूची में शामिल किया जाएगा.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक के बाद ये निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है. ऐसे में एसआईआर के दौरान जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल नहीं हो सके, वे भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं.

पुराने और नए मतदाता सूची का मिलान करेंगे बीएलओ

चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मौजूदा मतदाता सूची का एसआईआर से पहले की सूची के साथ मिलान करने को कहा है. इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनके नाम पुरानी सूची में दर्ज थे, लेकिन संशोधित मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं.

इसके बाद बीएलओ घर-घर जाकर इन मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे. सत्यापन के दौरान पात्र पाए जाने वाले लोगों का नाम फॉर्म 6 के माध्यम से मतदाता सूची में जोड़ा जा सकेगा. इसके अलावा, अभियान के दौरान पहचाने गए पात्र पहली बार के और युवा मतदाताओं के आवेदन भी भरवाए जाएंगे.

हर सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन

आयोग ने प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन करने का लक्ष्य दिया है. इस पूरी प्रक्रिया को एक महीने के भीतर पूरा करने की योजना है. सत्यापन के दौरान अधिकारियों को प्रत्येक मतदाता की स्थिति दर्ज करनी होगी. साथ ही, जिन मामलों में फॉर्म 6 के जरिए आवेदन किया गया है, उसका भी रिकॉर्ड रखा जाएगा.

अभियान के तहत तैयार की गई सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के साथ साझा की जाएंगी. आयोग के अनुसार, इससे मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

एसआईआर के बाद मतदाता सूची में 10.2% की गिरावट

यह अभियान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच शुरू किया जा रहा है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं.

चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूचियों में 10.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इस दौरान 60 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए.

हालांकि, मतदाता सूची में दर्ज कुल नामों में आई कमी के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं. विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अधिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

चुनाव आयोग ने कहा- सर्वसम्मति से लिए गए फैसले

एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच यह विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है. आयोग ने कहा है कि एसआईआर से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.

आयोग ने यह भी दोहराया है कि जिन लोगों के नाम एसआईआर के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची से छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
 


अक्टूबर की शुरुआत में महंगाई का झटका, कमर्शियल LPG ₹62.50 महंगा; ATF के दाम भी बढ़े

कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में होता है. ऐसे में कीमत बढ़ने से इन कारोबारों की परिचालन लागत बढ़ सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
BWHindia

तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 62.50 रुपये की बढ़ोतरी की है. दिल्ली में अब यह सिलेंडर 2,810 रुपये का हो गया है. वहीं, विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमत भी 16 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है. कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और खान-पान से जुड़े कारोबार की लागत बढ़ सकती है, जबकि एटीएफ की कीमत बढ़ने का असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ सकता है.

अक्टूबर की शुरुआत कारोबारियों के लिए लागत बढ़ने के साथ हुई है. तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी और विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी की है. एक तरफ 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 62.50 रुपये बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर एटीएफ की कीमत में 16 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है.

दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2,810 रुपये का हुआ

1 अक्टूबर 2026 से दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है. इससे पहले सितंबर की शुरुआत में भी कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में होता है. ऐसे में कीमत बढ़ने से इन कारोबारों की परिचालन लागत बढ़ सकती है.

खाने-पीने की चीजों पर पड़ सकता है असर

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी सीधे तौर पर खाद्य कारोबार की लागत को प्रभावित करती है. होटल और रेस्टोरेंट के अलावा छोटे ढाबे और खान-पान से जुड़े कारोबारी भी इसका इस्तेमाल करते हैं. अगर कारोबारी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो आने वाले समय में खाने-पीने की कुछ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर कारोबारियों की लागत संरचना और कीमत तय करने की रणनीति पर निर्भर करेगा.

घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव नहीं

कमर्शियल एलपीजी की कीमत बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है. दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये में मिल रहा है. मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये, चेन्नई में 957.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये है.

इस तरह अक्टूबर की शुरुआत में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ा है, जबकि घरेलू रसोई गैस की कीमतें स्थिर रखी गई हैं.

एटीएफ भी 16 रुपये प्रति लीटर महंगा

विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में भी 1 अक्टूबर से बड़ी बढ़ोतरी की गई है. घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत 121 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 137 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. इससे पहले सितंबर में एटीएफ की कीमत 6.28 रुपये प्रति लीटर यानी 5.46 फीसदी बढ़ाई गई थी. अगस्त में भी इसमें 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी.

एयरलाइंस की लागत पर बढ़ेगा दबाव

एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में एटीएफ की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी तक हो सकती है. ऐसे में विमान ईंधन की कीमत में लगातार बढ़ोतरी एयरलाइंस की लागत पर दबाव बढ़ा सकती है.

एयरलाइंस इस अतिरिक्त लागत को किस हद तक वहन करती हैं और कितना हिस्सा किराए में शामिल करती हैं, यह ईंधन लागत, प्रतिस्पर्धा और मांग समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा. इसलिए एटीएफ की कीमत बढ़ने का असर हवाई किराए पर तुरंत और समान रूप से पड़ना जरूरी नहीं है.
 


दिवाली-छठ पर घर जाने वालों को राहत, रेलवे ने तैयार किया 3000 स्पेशल फेरों का प्लान

नॉर्दर्न रेलवे ने अब तक 832 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरे रेलवे जोन से करीब 155 फेरे ऐसी स्पेशल ट्रेनों के होंगे, जो दिल्ली आएंगी और नॉर्दर्न रेलवे के जरिए संचालित होंगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2026
Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
BWHindia

दिवाली और छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का बड़ा प्लान तैयार किया है. नॉर्दर्न रेलवे इस फेस्टिव सीजन में करीब 3,000 स्पेशल ट्रेन फेरे चलाने की तैयारी कर रहा है. अब तक करीब 1,987 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा हो चुकी है. इनमें बिहार और पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों के लिए चलने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं.

अब तक 1987 स्पेशल फेरों की घोषणा

रेलवे के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे ने अब तक 832 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरे रेलवे जोन से करीब 155 फेरे ऐसी स्पेशल ट्रेनों के होंगे, जो दिल्ली आएंगी और नॉर्दर्न रेलवे के जरिए संचालित होंगी. इस तरह कुल घोषित और प्रस्तावित स्पेशल फेरों की संख्या करीब 1,987 हो गई है.

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की मांग और भीड़ को देखते हुए त्योहार से पहले स्पेशल ट्रेनों और उनके फेरों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा सकती है. पिछले साल दिवाली और छठ के दौरान करीब 5,000 स्पेशल ट्रेन फेरों की घोषणा की गई थी.

बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए खास इंतजाम

छठ पूजा के दौरान बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इसे देखते हुए बिहार के प्रमुख शहरों के लिए अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं पर खास फोकस किया जा रहा है. आनंद विहार-भागलपुर स्पेशल ट्रेन के कुल 47 फेरे निर्धारित किए गए हैं. इसके अलावा नई दिल्ली-दानापुर सुपरफास्ट स्पेशल के 8 अतिरिक्त फेरे भी चलाए जाएंगे.

इन रूटों पर भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें

रेलवे ने 16 सितंबर को कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल के 9 फेरे, योग नगरी ऋषिकेश-कोलकाता स्पेशल के 6 फेरे और अमृतसर-कोलकाता स्पेशल के 8 फेरे निर्धारित किए गए हैं. वहीं, अमृतसर-बरौनी स्पेशल ट्रेन के 9 फेरे चलाए जाएंगे. इसके अलावा नई दिल्ली-दानापुर सुपरफास्ट स्पेशल के 8 अतिरिक्त फेरे यात्रियों को उपलब्ध होंगे.

त्योहार से पहले बढ़ सकती है ट्रेनों की संख्या

रेलवे का फोकस दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और प्रमुख रूटों पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने पर है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यात्रियों की मांग और ट्रैफिक को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों के फेरों की संख्या में और बढ़ोतरी की जा सकती है. 
 


सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 24 कैरेट का भाव ₹1.53 लाख के पार; चांदी भी फिसली

राजधानी दिल्ली में 18 सितंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2026
Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
BWHindia

सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट देखने को मिली है. 18 सितंबर की सुबह दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया. वहीं 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,317.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.

दिल्ली में सोने का भाव

राजधानी दिल्ली में 18 सितंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. इससे एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत में 600 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई थी.

प्रमुख शहरों में आज सोने की कीमत

18 सितंबर को दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोना 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है. मुंबई में 22 कैरेट सोना 1,40,090 रुपये और 24 कैरेट 1,52,830 रुपये प्रति 10 ग्राम है. अहमदाबाद और भोपाल में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,40,140 रुपये, जबकि 24 कैरेट का भाव 1,52,880 रुपये प्रति 10 ग्राम है. चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,090 रुपये और 24 कैरेट सोना **1,52,830 रुपये** प्रति 10 ग्राम है. वहीं जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये और 24 कैरेट सोना 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.

10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सोना

सोने की कीमतों को लेकर Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने बड़ा अनुमान दिया है. उनका मानना है कि सोने की कीमत आगे चलकर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. Jefferies India Forum 2026 के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में वुड ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की कोशिशों से डॉलर कमजोर हो सकता है. ऐसे माहौल में सोने को फायदा मिल सकता है. मौजूदा स्तर से 10,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर काफी बड़ी तेजी को दर्शाएगा.

चांदी की कीमत भी घटी

सोने के साथ चांदी की कीमत में भी शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई. 18 सितंबर की सुबह घरेलू बाजार में चांदी का भाव घटकर 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 64.06 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.

सोने और चांदी की घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान के साथ-साथ डॉलर-रुपया विनिमय दर, वैश्विक ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और घरेलू मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.

(नोट: यहां दिए गए सोने-चांदी के भाव 18 सितंबर 2026 की सुबह उपलब्ध दरों पर आधारित हैं. स्थानीय ज्वेलर्स के भाव में टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतर हो सकता है.)