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गाड़ी में पीछे बैठे व्यक्ति ने नहीं पहनी है सीट बेल्ट तो क्या मिलता है एक्सीडेंट क्लेम?
इसके अलावा एक सवाल और लोगों के मन में है कि क्या एक्सीडेंट होने पर और सीट बेल्ट न पहनने पर इंश्योरेंस क्लेम मिलने पर किसी तरह की कोई दिक्कत आ जाती है?
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइसर मिस्त्री की असमय कार एक्सीडेंट में मौत के बाद ये सवाल पूरे देश में उठ रहा है कि क्या कार में पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य कर देना चाहिए? इसके अलावा एक सवाल और लोगों के मन में है कि क्या एक्सीडेंट होने पर और सीट बेल्ट न पहनने पर इंश्योरेंस क्लेम मिलने पर किसी तरह की कोई दिक्कत आ जाती है? केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि वो पीछे की सीट पर बेल्ट लगाने के नियम को अनिवार्य करने पर विचार कर रहे हैं.
क्या मिलता है क्लेम
सीट बेल्ट कानूनों का पालन न करने से न केवल वाहन में सवार लोगों की जान जोखिम में पड़ती है, दुर्घटना की स्थिति में उनके परिजनों को भी नियमों के "उल्लंघन" के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से कम मुआवजा मिल सकता है. ऐसा कोई कानून नहीं है जो कहता है कि अगर कोई व्यक्ति सीट बेल्ट नहीं पहनता है और सड़क दुर्घटना में मारा जाता है या घायल हो जाता है, तो उसे मुआवजा नहीं मिलेगा.
ऐसे मामलों में, ट्रिब्यूनल या अदालतें कारणों की जांच करेंगी और मोटर दुर्घटना के दावों के मामलों से निपटने वाले एक वकील दीपक के नाग ने कहा, सीट बेल्ट नियम के उल्लंघन को मृत्यु या चोट के लिए एक योगदान कारक माना जा सकता है. ट्रिब्यूनल या अदालतें कम मुआवजा देने के लिए इच्छुक हो सकती हैं.
बीमा पॉलिसी के कवरेज को भी देखेंगी अदालतें
बीमा नियामक आईआरडीएआई के मुख्य महाप्रबंधक (कानूनी) के रूप में सेवानिवृत्त हुए हरि अनंतकृष्णन ने कहा कि अदालत या न्यायाधिकरण न केवल दुर्घटना के कारण बल्कि बीमा पॉलिसी के कवरेज को भी देखेगा. "मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य न्यूनतम कवर निजी वाहनों में यात्रा करने वाले 'अनगिनत यात्रियों' को कवर नहीं करता है, उनका एक व्यापक नीति के तहत बीमा किया जाता है. ऐसे मामलों में, ट्रिब्यूनल प्रावधानों का पालन करने सहित मुआवजा देने से पहले सभी पहलुओं पर गौर करेगा."
अक्टूबर 2002 से पिछली सीट पर बेल्ट पहनना अनिवार्य
जबकि ड्राइवर और आगे बैठने वाले व्यक्ति के लिए सीट बेल्ट पहनने का नियम 1993 से लागू है, वहीं पिछली सीट पर बैठे व्यक्तियों के लिए ये नियम अक्टूबर 2002 से लागू है. 2019 में सरकार ने पिछली सीट पर बेल्ट न लगाने वालों पर 1000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान कर दिया था. हालांकि इस नियम को बहुत कम लोग ही मानते हैं. 2017 में भारत और 2019 सेवलाइफ फाउंडेशन ने सीट बेल्ट कानूनों के कम अनुपालन का खुलासा किया था. पहले सर्वे के अनुसार, बमुश्किल 4% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने सीट बेल्ट का इस्तेमाल किया. दूसरे सर्वे में पाया गया कि 37% उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि पिछली सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य नहीं था और 9% ने महसूस किया कि इससे सुरक्षा में कोई इजाफा नहीं हुआ.
नहीं खुलते हैं सारे एयरबैग्स
अगर व्यक्ति चाहे वो गाड़ी के आगे बैठा हो या फिर पीछे, सीट बेल्ट न पहनने पर एक्सीडेंट के वक्त गाड़ी में मौजूद सारे एयरबैग्स भी नहीं खुल पाते हैं. सीट बेल्ट न पहनने से 2018-2020 तक 60466 एक्सीडेंट में सीट बेल्ट न पहनना मौत का एक बड़ा कारण बताया गया है.
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