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सरकारी बैंकों ने दी राहत: मिनिमम बैलेंस रखने की अनिवार्यता हुई खत्म, करोड़ों ग्राहकों को होगा फायदा
सरकारी बैंकों के इस फैसले से लाखों ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी, यह कदम न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और ग्राहक-केंद्रित सोच को भी दर्शाता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
पब्लिक सेक्टर के बड़े बैंकों ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक (Canara Bank) और इंडियन बैंक (Indian Bank) जैसे प्रमुख बैंकों ने सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता को हटाने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि अब अगर खाताधारक न्यूनतम शेष राशि नहीं रखते हैं, तो उन्हें जुर्माना नहीं देना पड़ेगा.
BOB ने खत्म किया चार्ज
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने सेविंग्स अकाउंट ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले चार्ज को समाप्त कर दिया है. यह नया नियम 1 जुलाई 2025 से प्रभावी हो चुका है. हालांकि, यह सुविधा केवल सामान्य सेविंग्स खातों पर लागू होगी. प्रीमियम सेविंग्स अकाउंट्स जैसे BOB मास्टर स्ट्रोक, BOB सुपर सेविंग और शुभ बचत खातों पर अभी भी न्यूनतम बैलेंस की शर्त बनी रहेगी.
PNB और अन्य बैंकों ने भी बदला रुख
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी हाल ही में ऐसा ही कदम उठाते हुए मिनिमम एवरेज बैलेंस (MAB) न रखने पर लगने वाले पेनल्टी चार्ज को पूरी तरह माफ कर दिया है. यह निर्णय वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है. इसके साथ ही केनरा बैंक और इंडियन बैंक ने भी सेविंग्स अकाउंट्स में न्यूनतम शेष राशि की बाध्यता को हटाने का ऐलान किया है.
SBI पहले ही कर चुका है यह बदलाव
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) इस दिशा में सबसे आगे रहा है. उसने साल 2020 में ही सेविंग्स अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता को खत्म कर दिया था, जिससे करोड़ों ग्राहकों को सीधी राहत मिली थी.
बैंकों ने क्यों लिया यह फैसला?
बैंकों के इस फैसले के पीछे एक प्रमुख कारण यह है कि अब बैंकों को बचत और करंट अकाउंट से जमा राशि में कमी देखने को मिल रही है. ऐसे में बैंक अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) जैसे विकल्पों के जरिए फंड जुटा रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक ब्याज दर पर फंडिंग मिल रही है.
2023-24 में ₹2,331 करोड़ की वसूली सिर्फ मिनिमम बैलेंस चार्ज से
वित्त वर्ष 2023-24 में सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों ने 2,331 करोड़ रुपये की वसूली केवल मिनिमम बैलेंस न रखने के चलते की है. यह राशि पिछले साल 1,855.43 करोड़ रुपये की तुलना में 25.63% अधिक है. पिछले तीन वर्षों में, इन बैंकों ने इस आधार पर कुल 5,614 करोड़ रुपये की वसूली की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार PNB ने सबसे अधिक 633.4 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 386.51 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक ने 369.16 करोड़ रुपये वसूले हैं. इन बैंकों ने चार्ज वसूली के लिए भौगोलिक क्षेत्र और ग्राहक प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग स्लैब बनाए थे.
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