FSSAI ने एक्सपोर्ट करने वाले देशों के सभी सक्षम अथॉरिटीज से मौजूदा निर्माताओं और उन लोगों की सूची देने का अनुरोध किया है जो इन फूड प्रोडक्ट्स को भारत में एक्सपोर्ट करने का इरादा रखते हैं
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्ली: विदेशी कंपनियां अब बिना रजिस्ट्रेशन दूध, मांस-मछली और बेबी फूड एक्सपोर्ट नहीं कर पाएंगी. फूड रेगुलेटर FSSAI ने विदेशी फूड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए जो भारत में मांस, दूध और बेबी फूड एक्सपोर्ट करती हैं, उनके लिए FSSAI के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. 1 फरवरी 2023 से ये नया नियम लागू हो जाएगा.
FSSAI का नया आदेश
खाद्य नियामक FSSAI ने सोमवार को एक आदेश जारी किया था, इस आदेश में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कहा कि यह फैसला लिया गया है कि इन खाद्य उत्पादों का एक्सपोर्ट करने वाले पांच फूड कैटेगरी के तहत आने वाले विदेशी फूड मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा. ये कैटेगरी हैं- दूध और दूध से बने उत्पाद, पोल्ट्री, मछली और उनके उत्पादों सहित मांस और मांस उत्पाद; अंडे का पाउडर; शिशु आहार; और न्यूट्रास्युटिकल्स.
FSSAI ने मांगी लिस्ट
FSSAI ने एक्सपोर्ट करने वाले देशों के सभी सक्षम अथॉरिटीज से मौजूदा निर्माताओं और उन लोगों की सूची देने का अनुरोध किया है जो इन फूड प्रोडक्ट्स को भारत में एक्सपोर्ट करने का इरादा रखते हैं. उनकी ओर से दी गई जानकारी के आधार पर FSSAI इन सुविधाओं को अपने पोर्टल पर दर्ज करेगा. FSSAI के नये आदेश से विदेशों से आने वाले खाद्य प्रोडक्ट्स अब ज्यादा सुरक्षित होंगे, उनकी बेहतर तरीके से मॉनिटरिंग हो सकेगी.
FSSAI के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है
आपको बता दें कि खाद्य उत्पादों से संबंधित भारत में अपना कारोबार शुरू करने वाले किसी भी व्यक्ति को खाद्य लाइसेंस लेना जरूरी होता है, चाहे वो निर्माता, ट्रांसपोर्टर, खुदरा विक्रेता, मार्केटर या डिस्ट्रीब्यूटर्स हों. हर किसी को FSSAI के तहत रजिस्ट्रेशन करना होता है. आपको बता दें कि FSSAI ने छोट-बड़े सभी स्तर के फूड ऑपरेटर के लिए बिल पर 14 अंकों का फूड लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन नंबर डालना अनिवार्य कर दिया है. यह नियम अक्टूबर 2021 से प्रभावी है.
पहले केवल पैकेज्ड फूड पर फूड लाइसेंस अनिवार्य था. बिल पर फूड लाइसेंस होने से ग्राहक का भरोसा बढ़ता है कि उन्हें बेची गई सामग्री गुणवत्तापूर्ण है. साथ ही सर्विस से असंतुष्ट रहने पर फूड लाइसेंस नंबर के आधार पर शिकायत करना ग्राहकों के लिए आसान होगा. हालांकि अभी तक विदेशी कंपनियां जो भारत में अपना सामान एक्सपोर्ट कर रही हैं उनके लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं था, नये आदेश के बाद अब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है.
15 मई के बाद यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर में आम लोगों को एक बार फिर ईंधन महंगाई का झटका लगा है. सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी कर दी है, वहीं दिल्ली-एनसीआर में सीएनडी भी 1 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है. नई दरें शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू हो चुकी हैं. लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब आम लोगों के मासिक बजट, परिवहन खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों पर साफ दिखाई देने लगा है.
9 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुताबिक, 15 मई के बाद यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है. इससे पहले 15 मई को करीब चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक साथ 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद 19 मई और अब 23 मई को फिर कीमतें बढ़ाई गई हैं.
दिल्ली-एनसीआर में CNG भी महंगी
पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG उपभोक्ताओं को भी राहत नहीं मिली है. दिल्ली में CNG की कीमत में 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद नई कीमत 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है. नई दरें लागू होने के बाद ऑटो, टैक्सी, कैब और निजी CNG वाहनों की लागत बढ़ गई है. पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए यह एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.
4 महानगरों में पेट्रोल के नए दाम
सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें इस प्रकार हैं:
दिल्ली – 99.51 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता – 110.64 रुपये प्रति लीटर
मुंबई – 100.49 रुपये per लीटर
चेन्नई – 105.31 रुपये प्रति लीटर
डीजल के ताजा रेट
डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है:
दिल्ली – 92.49 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता – 97.02 रुपये प्रति लीटर
मुंबई – 95.02 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई – 96.98 रुपये प्रति लीटर
अन्य शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें
नोएडा – पेट्रोल 99.51 रुपये, डीजल 92.84 रुपये
लखनऊ – पेट्रोल 99.28 रुपये, डीजल 92.64 रुपये
पटना – पेट्रोल 110.49 रुपये, डीजल 96.53 रुपये
रांची – पेट्रोल 102.60 रुपये, डीजल 97.66 रुपये
भोपाल – पेट्रोल 111.71 रुपये, डीजल 96.85 रुपये
कच्चे तेल में तेजी से बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 103.5 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 96.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है.
परिवहन लागत बढ़ने की आशंका
सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है. दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग रोजाना CNG ऑटो, टैक्सी और कैब सेवाओं पर निर्भर रहते हैं. ईंधन महंगा होने से ड्राइवरों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर किराए में बढ़ोतरी के रूप में यात्रियों को झेलना पड़ सकता है. ऑटो चालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों से उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है.
रोजमर्रा की चीजें भी हो सकती हैं महंगी
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा. माल ढुलाई महंगी होने से सब्जियां, फल और रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
ऐसे चेक करें अपने शहर का ताजा रेट
पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें हर दिन सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं. ग्राहक SMS के जरिए भी अपने शहर के ताजा रेट जान सकते हैं.
- इंडियन ऑयल ग्राहक: RSP <शहर कोड> लिखकर 9224992249 पर भेजें
- BPCL ग्राहक: RSP <शहर कोड> लिखकर 9223112222 पर भेजें
- HPCL ग्राहक: HPPRICE <शहर कोड> लिखकर 9222201122 पर भेजें
सरकार के मुताबिक, जिन मकानों पर पहले करीब 16 लाख रुपये तक IFC देना पड़ता था, अब उन्हें लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये ही चुकाने होंगे. इससे घर बनवाने और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सस्ती हो जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली सरकार ने राजधानी के लोगों को बड़ी राहत देते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (IFC) में भारी कटौती का ऐलान किया है. नए नियमों के तहत अब IFC एरिया के बजाय पानी की वास्तविक खपत के आधार पर तय होगा. सरकार का दावा है कि इससे कई मकान मालिकों का खर्च 80% तक कम हो जाएगा और लाखों रुपये की बचत होगी.
क्या है IFC और क्यों था विवाद?
IFC यानी इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज वह शुल्क है, जो दिल्ली जल बोर्ड पानी और सीवर लाइन की सुविधा देने के बदले वसूलता है. पहले यह चार्ज परिवार की जरूरत और पानी की खपत के हिसाब से लिया जाता था, लेकिन वर्ष 2019 में इसे प्रति वर्गफुट के आधार पर लागू कर दिया गया. इसके बाद लोगों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया था.
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि पुराने नियमों के कारण छोटे परिवारों को भी बड़े प्लॉट के आधार पर भारी रकम चुकानी पड़ती थी. अब सरकार ने इसे सरल और व्यावहारिक बना दिया है.
16 लाख की जगह अब भरने होंगे सिर्फ 2 लाख रुपये
प्रवेश वर्मा ने बताया कि जिन मकानों पर पहले करीब 16 लाख रुपये तक IFC देना पड़ता था, अब उन्हें लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये ही चुकाने होंगे. इससे घर बनवाने और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सस्ती और आसान हो जाएगी.
पहले MCD से बिल्डिंग प्लान पास कराने के दौरान जल बोर्ड से IFC की NOC लेना अनिवार्य होता था. नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
सरकार ने चुनावी वादा भी किया पूरा
प्रवेश वर्मा ने कहा कि IFC में राहत देना सरकार का चुनावी वादा था. उन्होंने बताया कि लोगों से कहा गया था कि वे सिर्फ 25% चार्ज जमा करें, बाकी रकम सरकार बाद में पानी के बिल में एडजस्ट करेगी. खास बात यह है कि योजना औपचारिक रूप से लागू होने से पहले ही लोगों को इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है.
IFC नियमों में हुए बड़े बदलाव
1. पानी की मांग के आधार पर लगेगा चार्ज: अब पानी और सीवर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज वास्तविक पानी की जरूरत और खपत के आधार पर तय किए जाएंगे.
2. नई डेवलपमेंट पर ही लागू होगा IFC: IFC केवल नई बिल्डिंग या अतिरिक्त निर्माण पर लागू होगा. ऐसे रीडेवलपमेंट मामलों में IFC नहीं लगेगा, जहां पानी की मांग में कोई बदलाव नहीं होगा.
3. गैर-FAR और अनकवर्ड एरिया को मिली राहत: गैर-FAR और खुले क्षेत्रों को अब IFC गणना में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे शुल्क और कम होगा.
4. E, F, G और H श्रेणी की कॉलोनियों को विशेष छूट: सरकार ने अलग-अलग श्रेणी की कॉलोनियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया है. E और F श्रेणी की कॉलोनियों को 50% छूट मिलेगी. वहीं, G और H श्रेणी की कॉलोनियों को 70% तक की छूट दी जाएगी.
5. 200 वर्गमीटर तक के प्लॉट को बड़ी राहत: अब IFC केवल उन्हीं यूनिट्स पर लगाया जाएगा, जिनका प्लॉट आकार 200 वर्गमीटर से अधिक होगा. इससे छोटे मकान मालिकों को सीधा फायदा मिलेगा.
6. छोटे फ्लैट्स को अतिरिक्त छूट: 200 वर्गमीटर से बड़े प्लॉट पर बने 50 वर्गमीटर या उससे छोटे आवासीय यूनिट्स को पानी और सीवर IFC पर अतिरिक्त 50% छूट दी जाएगी.
धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को भी फायदा
आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को नेट IFC पर अतिरिक्त 50% की छूट मिलेगी.
पर्यावरण अनुकूल बिल्डिंग्स को प्रोत्साहन
जिन व्यावसायिक और संस्थागत संपत्तियों में जीरो सीवरेज डिस्चार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर और मानकों के अनुरूप STP सिस्टम होगा, उन्हें सीवर IFC में 50% की छूट दी जाएगी. हालांकि, यदि STP सिस्टम चालू नहीं पाया गया तो दी गई छूट पर प्रतिदिन 0.05% का जुर्माना लगाया जाएगा.
लोगों को क्या होगा फायदा?
नई नीति लागू होने के बाद दिल्ली में घर बनवाने, अतिरिक्त निर्माण कराने और नक्शा पास कराने का खर्च काफी कम हो जाएगा. खासतौर पर मध्यम वर्ग, छोटे मकान मालिकों और रीडेवलपमेंट कराने वालों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे भवन निर्माण प्रक्रिया तेज होगी और लोगों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा.
नए Aadhaar App में यूजर्स को फिंगरप्रिंट, फेस और आईरिस डेटा लॉक करने का विकल्प भी मिलेगा. यानी यूजर खुद तय कर सकेंगे कि उनका बायोमेट्रिक डेटा कब और कैसे इस्तेमाल हो.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में डिजिटल पहचान व्यवस्था को और सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बड़ा कदम उठाया है. UIDAI ने नया Aadhaar App लॉन्च किया है, जिसमें यूजर्स को पहले से ज्यादा प्राइवेसी, सुरक्षा और डेटा कंट्रोल मिलेगा. इसके साथ ही पुराने mAadhaar ऐप को धीरे-धीरे बंद किया जा रहा है. नए ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन, QR कोड वेरिफिकेशन और ‘Selective Share’ जैसे एडवांस फीचर्स दिए गए हैं, जिससे आधार इस्तेमाल करना पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान हो जाएगा.
पुराने mAadhaar ऐप की जगह लेगा नया Aadhaar App
UIDAI ने साफ किया है कि अब डिजिटल आधार सेवाओं के लिए नया Aadhaar App इस्तेमाल किया जाएगा. पुराने mAadhaar ऐप को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा रहा है. ऐसे में यूजर्स को जल्द से जल्द नए प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट होने की सलाह दी गई है. नया ऐप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और इसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है.
प्राइवेसी और डेटा कंट्रोल पर सबसे ज्यादा फोकस
नए Aadhaar App की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें यूजर को अपने डेटा पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा. अब लोग जरूरत के हिसाब से ही अपनी जानकारी साझा कर सकेंगे. ‘Selective Share’ फीचर के जरिए यूजर केवल वही जानकारी दिखा पाएंगे, जिसकी जरूरत हो. उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति सिर्फ नाम और फोटो साझा कर सकता है या केवल उम्र और पता दिखा सकता है. पूरा आधार नंबर शेयर करना जरूरी नहीं होगा. इस फीचर को यूजर्स की प्राइवेसी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
फेस ऑथेंटिकेशन और QR कोड से होगा इंस्टेंट वेरिफिकेशन
नए ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरे की पहचान के जरिए पहचान सत्यापन की सुविधा दी गई है. इसके अलावा QR कोड आधारित आधार शेयरिंग फीचर भी जोड़ा गया है. इससे किसी भी अधिकृत संस्था या सेवा प्रदाता के पास तेजी से पहचान सत्यापित की जा सकेगी और बार-बार पूरा आधार नंबर दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
बायोमेट्रिक लॉक फीचर से बढ़ेगी सुरक्षा
नए Aadhaar App में यूजर्स को फिंगरप्रिंट, फेस और आईरिस डेटा लॉक करने का विकल्प भी मिलेगा, यानी यूजर खुद तय कर सकेंगे कि उनका बायोमेट्रिक डेटा कब और कैसे इस्तेमाल हो. UIDAI ने यह भी कहा है कि अगर किसी यूजर का रजिस्टर्ड मोबाइल phone खो जाता है, तो कुछ समय के लिए आधार सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है.
पुराने ऐप का डेटा अपने आप ट्रांसफर नहीं होगा
UIDAI के मुताबिक पुराने mAadhaar ऐप का डेटा नए ऐप में ऑटोमैटिक ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. यूजर्स को नए सिरे से प्रोफाइल बनाकर सेटअप करना होगा. हालांकि, नए ऐप में एक साथ अधिकतम 5 परिवार सदस्यों के आधार प्रोफाइल जोड़ने की सुविधा दी गई है.
ऐसे करें नए Aadhaar App में रजिस्ट्रेशन
नए ऐप में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बेहद आसान रखी गई है. इसके लिए यूजर्स को सबसे पहले ऐप डाउनलोड करना होगा और अपनी पसंद की भाषा चुननी होगी. इसके बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP वेरिफिकेशन करना होगा. फिर 12 अंकों का आधार नंबर डालकर दोबारा OTP से पुष्टि करनी होगी. अंत में फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करने के बाद 6 अंकों का पासवर्ड सेट करना होगा, जिसके बाद ऐप इस्तेमाल किया जा सकेगा.
डिजिटल पहचान व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि नया Aadhaar App भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तेज और यूजर-फ्रेंडली बनाएगा. खासतौर पर डेटा प्राइवेसी और सीमित जानकारी साझा करने की सुविधा भविष्य में डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल का तरीका बदल सकती है.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य ATM और UPI के जरिए सीधे अपने PF खाते से पैसा निकाल सकेंगे. इसका उद्देश्य लोगों को तेज, आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने EPFO 3.0 के जरिए अपने सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस नए अपडेट के तहत अब PF का पैसा निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य ATM और UPI के जरिए सीधे अपने PF खाते से पैसा निकाल सकेंगे. इसका उद्देश्य लोगों को तेज, आसान और बिना परेशानी वाली सुविधा देना है.
EPFO 3.0 में क्या हैं बड़े बदलाव
EPFO 3.0 के तहत कई अहम सुधार प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें PF अकाउंट तक आसान पहुंच, ऑटो क्लेम सेटलमेंट और सीधे बैंक खाते में तेज ट्रांसफर जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा सदस्य अब UPI प्लेटफॉर्म पर अपना PF बैलेंस भी चेक कर सकेंगे. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ATM और UPI के जरिए तुरंत PF निकासी संभव होगी.
ATM और UPI से PF निकालने की सीमा
नई व्यवस्था के तहत सदस्य अपने PF खाते में जमा कुल रकम का अधिकतम 50 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे. यह सीमा इसलिए तय की गई है ताकि भविष्य के लिए कुछ बचत सुरक्षित रह सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक EPFO जल्द ही अपने सदस्यों को ATM कार्ड भी जारी कर सकता है. ये कार्ड सीधे PF खाते से जुड़े होंगे, जिससे ATM से पैसा निकालना और आसान हो जाएगा.
किन लोगों को मिलेगी यह सुविधा
ATM और UPI के जरिए PF निकासी का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी.
1. सदस्य के पास एक्टिव यूनिवर्सल अकाउंट नंबर होना जरूरी है.
2. मोबाइल नंबर UAN से लिंक और एक्टिव होना चाहिए.
3. UAN का आधार. पैन. बैंक खाता और IFSC कोड से लिंक होना अनिवार्य है.
इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही सदस्य इस नई सुविधा का लाभ उठा पाएंगे.
बैंकों के साथ साझेदारी से तेज होगा प्रोसेस
EPFO ने सेवा को और बेहतर बनाने के लिए 32 सरकारी और निजी बैंकों के साथ समझौता किया है. इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां सीधे कर्मचारियों के PF खाते में पैसा जमा कर सकेंगी और क्लेम प्रोसेस तेजी से पूरा होगा.
उम्मीद की जा रही है कि EPFO 3.0 को 2026 के मध्य तक पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा. इसके लागू होने के बाद PF से जुड़ी अधिकांश सेवाएं डिजिटल और तुरंत उपलब्ध होंगी. इस तरह EPFO 3.0 कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जहां PF निकासी अब लंबी प्रक्रिया नहीं बल्कि कुछ मिनटों का काम बन जाएगी.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा और उपचुनावों से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए नकदी, शराब, ड्रग्स और अन्य प्रलोभनों की जब्ती को तेज कर दिया है. आयोग के मुताबिक अब तक कुल जब्ती 650 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो चुनावी उल्लंघनों पर सख्त निगरानी को दर्शाता है.
निर्वाचन आयोग ने बताया कि 26 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक सीज़र मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने के बाद से प्रवर्तन एजेंसियों ने करीब 651.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. इस कदम का उद्देश्य चुनावों में मतदाताओं को प्रलोभन से मुक्त रखना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है.
इन राज्यों में होने हैं चुनाव
आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था. इसके साथ ही छह राज्यों में उपचुनाव भी प्रस्तावित हैं. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आचार संहिता का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा जब्ती
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई. इसके बाद तमिलनाडु में 170 करोड़ रुपये और असम में 97 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई.
जब्त की गई वस्तुओं में 53.2 करोड़ रुपये नकद, लगभग 79.3 करोड़ रुपये की शराब, 230 करोड़ रुपये की ड्रग्स, 58 करोड़ रुपये के कीमती धातु और 231 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त उपहार व अन्य सामान शामिल हैं.
निगरानी के लिए बड़ी तैनाती
निर्वाचन आयोग ने बताया कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,100 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं, जो 100 मिनट के भीतर प्रतिक्रिया देते हैं. इसके अलावा 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें प्रमुख स्थानों पर अचानक जांच कर रही हैं.
आयोग ने चुनाव वाले राज्यों और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य सचिवों, पुलिस प्रमुखों और अन्य एजेंसियों के साथ कई समीक्षा बैठकें भी की हैं, ताकि चुनाव हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं से मुक्त रह सकें.
नागरिकों के लिए शिकायत व्यवस्था
आम नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए जिला स्तर पर शिकायत समितियां बनाई गई हैं. साथ ही मतदाताओं और राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी आयोग के C-Vigil मोबाइल ऐप के जरिए दें.
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 10 अप्रैल से पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल पेमेंट ही स्वीकार किए जाएंगे. इसमें मुख्य रूप से FASTag और UPI जैसे माध्यम शामिल होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने टोल भुगतान प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है. 10 अप्रैल से सभी टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट बंद कर दिया जाएगा और अब केवल FASTag व UPI के जरिए ही टोल फीस जमा की जा सकेगी. इस कदम का उद्देश्य ट्रैफिक को सुगम बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है.
10 अप्रैल से लागू होगा डिजिटल टोलिंग सिस्टम
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 10 अप्रैल से पूरे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर केवल डिजिटल पेमेंट ही स्वीकार किए जाएंगे. इसमें मुख्य रूप से FASTag और UPI जैसे माध्यम शामिल होंगे. यह फैसला पहले चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा था, लेकिन अब इसे पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि टोल कलेक्शन को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जाएगा.
क्या होंगे इस बदलाव के फायदे?
टोल पेमेंट के डिजिटलीकरण से कई अहम फायदे सामने आने की उम्मीद है. सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और जाम से राहत मिलेगी. इसके अलावा डिजिटल भुगतान से ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और कैश हैंडलिंग से जुड़ी समस्याएं खत्म होंगी. अधिकारियों के मुताबिक, इससे यात्रियों को तेज और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा. देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर 1,150 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां यह नया सिस्टम लागू होगा.
उत्तर प्रदेश में टोल दरों में बढ़ोतरी
डिजिटल सिस्टम लागू होने के साथ ही कुछ राज्यों में टोल दरों में भी बढ़ोतरी की गई है. उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैसेंजर कार के लिए टोल करीब 10% तक बढ़ा दिया गया है. वहीं, एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में 1.5% से 3.5% तक की वृद्धि की गई है.
किन रूट्स पर बढ़े नए रेट?
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कार और SUV के लिए टोल 665 रुपये से बढ़ाकर 675 रुपये कर दिया गया है. वहीं दोपहिया वाहनों के लिए शुल्क 330 रुपये से बढ़ाकर 335 रुपये कर दिया गया है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर कार के लिए टोल 295 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 145 रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा कमर्शियल वाहनों को भी अब ज्यादा शुल्क देना होगा.
यात्रियों के लिए क्या जरूरी?
अब हाईवे पर सफर करने से पहले वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके वाहन में FASTag एक्टिव हो या उनके पास UPI पेमेंट की सुविधा उपलब्ध हो. कैश पेमेंट पूरी तरह बंद होने के बाद बिना डिजिटल भुगतान के टोल पार करना संभव नहीं होगा, जिससे यात्रियों को पहले से तैयारी करनी होगी.
इस फैसले के साथ भारत का हाईवे नेटवर्क तेजी से डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में स्मार्ट और सुगम परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
भारतीय रिजर्व बैंक का यह कदम डिजिटल पेमेंट को अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. हालांकि शुरुआत में यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में यह यूजर्स के हित में साबित होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला लिया है. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत अब हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA जरूरी होगा. इससे यूजर्स के पैसे की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी.
अप्रैल से बदल जाएगा पेमेंट का तरीका
1 अप्रैल 2026 से डिजिटल पेमेंट करने की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा. नए नियम के मुताबिक अब सिर्फ OTP के जरिए ट्रांजैक्शन पूरा नहीं होगा. इसके साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा जांच भी जरूरी होगी. यानी हर भुगतान में यूजर की पहचान दो अलग-अलग तरीकों से सत्यापित की जाएगी.
क्या है 2FA और कैसे करेगा काम
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA एक ऐसी सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें यूजर की पहचान दो स्तरों पर जांची जाती है. इसमें कुछ आपके पास होता है, जैसे मोबाइल या कार्ड, कुछ आप जानते हैं, जैसे PIN या पासवर्ड या फिर आपकी पहचान, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी के जरिए जांच की जाएगी. अब पेमेंट करते समय OTP के साथ इन तरीकों में से किसी एक का इस्तेमाल भी करना होगा. इससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाएगी.
क्यों लिया गया यह फैसला
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कदम उठाकर ऑनलाइन भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश की है. नए सिस्टम से यूजर्स के पैसे को धोखाधड़ी से बचाने में मदद मिलेगी.
आम लोगों पर क्या होगा असर
इस नए नियम के लागू होने के बाद पेमेंट करने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. क्योंकि हर ट्रांजैक्शन में एक अतिरिक्त स्टेप पूरा करना होगा. लेकिन इसके बदले यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित अनुभव मिलेगा. हर बार दूसरा ऑथेंटिकेशन फैक्टर अलग होगा, जिससे अगर किसी एक जानकारी के लीक होने पर भी आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा.
फ्रॉड होने पर किसकी होगी जिम्मेदारी
रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी बैंक या पेमेंट कंपनी की लापरवाही से ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी. ऐसे मामलों में यूजर को पूरा मुआवजा दिया जाएगा. साथ ही अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन के लिए भी अक्टूबर 2026 तक और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की योजना है.
स्पेशल ट्रेन चलने से पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और दिल्ली-एनसीआर के रूट्स पर यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सफर की सुविधा मिलेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
होली के त्योहार पर घर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई होली स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है, हर साल की तरह इस बार भी त्योहार के दौरान लंबी वेटिंग लिस्ट और ट्रेनों में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त फेरे चलाए जा रहे हैं, इन स्पेशल ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और वे अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे.
अमृतसर–पटना रिजर्व्ड होली स्पेशल (04664/04663)
अमृतसर जंक्शन से पटना जंक्शन के बीच 04664/04663 नंबर की रिजर्व्ड होली स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, अमृतसर से पटना के लिए यह ट्रेन 27 फरवरी, 2 मार्च और 5 मार्च 2026 को कुल तीन ट्रिप में संचालित होगी, वहीं पटना से अमृतसर के लिए यह ट्रेन 28 फरवरी, 3 मार्च और 6 मार्च 2026 को तीन ट्रिप लगाएगी, पंजाब और बिहार के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी,
आनंद विहार–गोरखपुर होली स्पेशल (04026/04025)
आनंद विहार टर्मिनल से गोरखपुर जंक्शन के बीच 04026/04025 नंबर की रिजर्व्ड होली स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, आनंद विहार से गोरखपुर के लिए यह ट्रेन 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक कुल चार ट्रिप में संचालित होगी, वहीं गोरखपुर से आनंद विहार के लिए यह सेवा 28 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक चार ट्रिप लगाएगी, दिल्ली-एनसीआर और पूर्वांचल के यात्रियों के लिए यह रूट सबसे व्यस्त माना जाता है, ऐसे में यह स्पेशल ट्रेन काफी उपयोगी रहेगी,
मऊ–वलसाड स्पेशल (05017/05018)
मऊ से वलसाड के बीच 05017/05018 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, 05017 मऊ–वलसाड स्पेशल 28 फरवरी से 7 मार्च 2026 के बीच दो ट्रिप में संचालित होगी और मऊ से दोपहर 3:45 बजे प्रस्थान करेगी, वहीं 05018 वलसाड–मऊ स्पेशल 1 मार्च से 8 मार्च 2026 के बीच दो ट्रिप में चलेगी और मऊ में रात 12:45 बजे पहुंचेगी, उत्तर प्रदेश और गुजरात के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इससे सीधा लाभ मिलेगा,
प्रयागराज रामबाग–अयोध्या कैंट स्पेशल (05140/05139)
प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन के बीच 05140/05139 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, यह ट्रेन पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त यात्रा विकल्प प्रदान करेगी और क्षेत्रीय स्तर पर भीड़ को कम करने में मदद करेगी,
कलबुर्गी–हजरत निजामुद्दीन स्पेशल (01301/01302)
कलबुर्गी से हजरत निजामुद्दीन जंक्शन के बीच 01301/01302 नंबर की स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी, 01301 कलबुर्गी–हजरत निजामुद्दीन स्पेशल 26 फरवरी 2026 को एक ट्रिप में सुबह 6 बजे रवाना होगी, वहीं 01302 हजरत निजामुद्दीन–कलबुर्गी स्पेशल 1 मार्च 2026 को एक ट्रिप में चलेगी और सुबह 8:30 बजे पहुंचेगी, दक्षिण भारत से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सेवा खास तौर पर लाभदायक रहेगी,
होली के मौके पर पहले भी कई स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जा चुकी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त सेवाएं जोड़ी जा सकती हैं, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते टिकट बुक करा लें और यात्रा से पहले ट्रेन की टाइमिंग की पुष्टि जरूर कर लें, ताकि त्योहार का सफर सुगम और सुरक्षित बन सके.
इस कानून के क्रियान्वयन के लिए ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी. इन योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना, संतृप्ति आधारित विकास सुनिश्चित करना और सेवाओं की समन्वित डिलीवरी करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्रामीण आजीविका को मजबूती देने और स्थानीय विकास को राष्ट्रीय योजना से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने VB-G RAM-G अधिनियम, 2025 लागू किया है. यह कानून ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप गांवों में आय सुरक्षा और समन्वित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. ग्रामीण विकास राज्य मंत्री Kamlesh Paswan ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से इस अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी है. सरकार का मानना है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को राष्ट्रीय अवसंरचना और विकास रणनीति के साथ जोड़कर गांवों में आय वृद्धि, पारदर्शिता और समग्र विकास को नई गति देगा.
125 दिन का गारंटीकृत रोजगार
नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के उन वयस्क सदस्यों को हर वर्ष 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जो स्वेच्छा से काम करने के लिए पंजीकरण कराते हैं. इससे ग्रामीण परिवारों को आय सुरक्षा मिलने और पलायन में कमी आने की उम्मीद है.
‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के जरिए समन्वित विकास
इस कानून के क्रियान्वयन के लिए ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी. इन योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना, संतृप्ति आधारित विकास सुनिश्चित करना और सेवाओं की समन्वित डिलीवरी करना है.
ये योजनाएं PM Gati Shakti से जोड़ी गई हैं और इन्हें भू-स्थानिक मैपिंग तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन प्राप्त है. स्वीकृत योजनाओं को ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समेकित किया जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार पहलें व्यापक विकास लक्ष्यों के अनुरूप संचालित हों.
पंचायत राज संस्थाओं की स्पष्ट भूमिका
अधिनियम की धारा 16 में Panchayati Raj Institutions की भूमिका स्पष्ट की गई है. जिला, मध्यवर्ती और ग्राम स्तर की पंचायतों को योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है.
जिला स्तर पर, पंचायतें योजनाओं का समन्वय, स्वीकृति और निगरानी करेंगी तथा अन्य कार्यक्रमों से अभिसरण सुनिश्चित करेंगी.
मध्यवर्ती स्तर पर, पंचायतें ब्लॉक स्तर की योजनाएं तैयार करेंगी और ग्राम पंचायतों को क्रियान्वयन में सहयोग देंगी.
ग्राम पंचायत स्तर पर, पंजीकरण, कार्य आवंटन, रिकॉर्ड संधारण और तकनीकी मानकों के पालन की जिम्मेदारी होगी.
50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से अनिवार्य
अधिनियम में प्रावधान है कि कुल लागत के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के जरिए ही कराए जाएंगे. मस्टर रोल, बिल, वाउचर, माप पुस्तिका और जियो-टैग डिजिटल रिकॉर्ड जैसे सभी दस्तावेज ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि सामाजिक अंकेक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके.
मनरेगा के अनुभव से तैयार ढांचा
इस ढांचे को तैयार करने में Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act के क्रियान्वयन के अनुभवों का भी उपयोग किया गया है. इससे जवाबदेही और संस्थागत जिम्मेदारियों को मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है.
अधूरे प्रोजेक्ट पर पूरी वसूली की व्यवस्था खत्म होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा. 15 फरवरी से लागू होने जा रहे ये नियम सड़क परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर के वाहन चालकों के लिए राहत की बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने टोल वसूली के नियमों में अहम बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल नहीं लिया जाएगा. जितनी सड़क चालू और उपयोग योग्य होगी, उतने हिस्से का ही शुल्क देना होगा. नए नियम 15 फरवरी 2026 से लागू होंगे और इससे निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस ऑपरेटरों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरी वसूली अब बंद
पहले की व्यवस्था के तहत, यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से तैयार होता था, तब भी यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल वसूला जाता था. यानी सड़क का बड़ा हिस्सा निर्माणाधीन होने के बावजूद वाहन चालकों को पूरा शुल्क चुकाना पड़ता था. अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया है कि केवल चालू और उपयोग योग्य हिस्से के लिए ही टोल लिया जाएगा. इससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद पूरा शुल्क देने को मजबूर थे.
नियमों में क्या हुआ बदलाव
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया है. नए प्रावधानों के अनुसार अब आंशिक रूप से चालू नेशनल एक्सप्रेसवे पर पूरा टोल नहीं वसूला जाएगा और केवल चालू हिस्से के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्ग की दरों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा. यह प्रावधान एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि यह फैसला यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
मौजूदा टोल स्ट्रक्चर और नई व्यवस्था
वर्तमान में नेशनल एक्सप्रेसवे पर टोल दरें सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक हैं. ऐसे में अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा शुल्क वसूला जाना यात्रियों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होता था. नई व्यवस्था के तहत अधूरे एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में अनुपातिक कमी होगी और यात्रियों को केवल उपयोग किए गए हिस्से का ही भुगतान करना होगा. मंत्रालय का मानना है कि इससे समानांतर चल रहे पुराने नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ट्रैफिक जाम से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आ सकती है.
15 फरवरी 2026 से होंगे लागू
संशोधित नियम नेशनल हाईवे शुल्क (दर निर्धारण एवं वसूली) (संशोधन) नियम, 2026 के तहत 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे. यह प्रावधान एक वर्ष तक या संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का मानना है कि इस बदलाव से निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस संचालकों को भी लाभ मिलेगा. टोल शुल्क में कमी से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका असर माल भाड़े और उपभोक्ता कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.
यात्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा
टोल में अनुपातिक कटौती से लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को सीधी राहत मिलेगी. ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए यह निर्णय परिचालन लागत कम करने में सहायक हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एक्सप्रेसवे का बेहतर उपयोग होगा और समानांतर हाईवे पर भीड़ घटेगी, जिससे यात्रा और सुगम हो सकती है.