सभी कस्टमाइज्ड लाभों का एक कार्ड पर फायदा उठाने के लिए पे-पर फीचर (Pay-Per-Feature) सुविधा की शुरुआत की गई है.
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अभिषेक मेहरोत्रा
नई दिल्ली: AU Small Finance Bank ने बुधवार को एक ऐसा इनोवेटिव क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया जो सिर्फ और सिर्फ आपके फायदे के लिए है. उसपर किसी और की नहीं, सिर्फ आपकी ही मनमानी चलेगी. ये क्रेडिट कार्ड बाजार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, ऐसा बैंक ने दावा किया है. एयू बैंक का LIT (लीव-इट-टुडे) क्रेडिट कार्ड में ग्राहक अपनी मर्जी से जितने समय के लिए और जो-जो सुविधाएं चाहते हैं, सब मिलेगा.
ग्राहकों के लिए एक ही कार्ड में सभी सुविधाएं
ग्राहकों के लिए एक ही कार्ड में ऐसी सभी सुविधाएं मिलना मुश्किल होता है. यह एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है, जिससे कार्ड होल्डर्स खुश हुए बिना नहीं रह सकते. इससे उनकी तमाम जरूरतें पूरी हो सकती हैं. बैंक के दावे के अनुसार, ट्रैवल करना हो या फिर ऑन लाइन शॉपिंग, यह क्रेडिट कार्ड कस्टमर्स को सबसे ज्यादा फायदा देगा. LIT क्रेडिट कार्ड के साथ, बैंक ने ग्राहकों के हाथों में एक कार्ड में हर तरह की सुविधाओं को चुनने की आजादी दी है. इसके अलावा उन्हें अपनी बदलती जीवनशैली की आवश्यकताओं के अनुसार इन सुविधाओं को चालू या बंद करने की आजादी भी मिलती है.
हर चीज का कंट्रोल कस्टमर्स के पास
LIT क्रेडिट कार्ड AU0101 ऐप के माध्यम से ग्राहकों को उच्च स्तर की सहभागिता प्रदान करता है क्योंकि वे अपने लाभों को अधिकतम करने के लिए प्रतिदिन अपनी बचत / कमाई को ट्रैक कर सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्ड में कई लाभ हैं और ग्राहक एक छोटी सुविधा शुल्क के लिए वास्तविक समय में किसी भी सुविधा को सक्रिय कर सकते हैं.
ग्राहकों का ऑफर और फी पर पूरी तरह कंट्रोल
LIT कार्डधारक को अपने ऑफर और फी पर पूरी तरह कंट्रोल देता है. वे उन ऑफर के लिए स्पष्ट, पारदर्शी तरीके से भुगतान करते हैं और कार्डधारकों द्वारा उपयोग न किए जाने वाले लाभों के लिए वार्षिक/नवीकरण शुल्क की बड़ी बचत करता है. कार्डधारक प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का उपयोग करके कैशबैक और रिवार्ड पॉइंट दोनों का लाभ उठा सकते हैं.
LIT क्रेडिट कार्ड लेने के 5 फायदे
- लाउंज की सुविधा: जहां ग्राहक प्रति तिमाही एक या दो लाउंज एक्सेस का विकल्प चुन सकते हैं.
- माइलस्टोन बेनिफिट्स: इसके द्वारा, अधिक रिवॉर्ड पॉइंट या कैशबैक प्राप्त कर सकते हैं.
- OTT और लाइफस्टाल मेम्बरशिप: जहां वह विभिन्न प्लेटफार्मों और सेवाओं के लिए मुफ्त सदस्यता प्राप्त कर सकते हैं.
- रिवार्ड बढ़ाने की सुविधा: ग्राहक ऑनलाइन और पीओएस लेनदेन के लिए उच्च रिवार्ड पॉइंट प्राप्त कर सकते हैं.
- अन्य विशेषताएं: फ्यूल सरचार्ज छूट, ग्रॉसरी पर कैशबैक समेत अन्य लाभ
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ श्री संजय अग्रवाल ने कहा, "एयू बैंक में हमने हमेशा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का लाभ उठाकर मौजूदा स्थिति को चुनौती देने में विश्वास किया है ताकि बैंकिंग उद्योग में बदलाव लाया जा सके."
नॉर्दर्न रेलवे ने अब तक 832 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरे रेलवे जोन से करीब 155 फेरे ऐसी स्पेशल ट्रेनों के होंगे, जो दिल्ली आएंगी और नॉर्दर्न रेलवे के जरिए संचालित होंगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिवाली और छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का बड़ा प्लान तैयार किया है. नॉर्दर्न रेलवे इस फेस्टिव सीजन में करीब 3,000 स्पेशल ट्रेन फेरे चलाने की तैयारी कर रहा है. अब तक करीब 1,987 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों की घोषणा हो चुकी है. इनमें बिहार और पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों के लिए चलने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं.
अब तक 1987 स्पेशल फेरों की घोषणा
रेलवे के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे ने अब तक 832 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है. इसके अलावा दूसरे रेलवे जोन से करीब 155 फेरे ऐसी स्पेशल ट्रेनों के होंगे, जो दिल्ली आएंगी और नॉर्दर्न रेलवे के जरिए संचालित होंगी. इस तरह कुल घोषित और प्रस्तावित स्पेशल फेरों की संख्या करीब 1,987 हो गई है.
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की मांग और भीड़ को देखते हुए त्योहार से पहले स्पेशल ट्रेनों और उनके फेरों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा सकती है. पिछले साल दिवाली और छठ के दौरान करीब 5,000 स्पेशल ट्रेन फेरों की घोषणा की गई थी.
बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए खास इंतजाम
छठ पूजा के दौरान बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इसे देखते हुए बिहार के प्रमुख शहरों के लिए अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं पर खास फोकस किया जा रहा है. आनंद विहार-भागलपुर स्पेशल ट्रेन के कुल 47 फेरे निर्धारित किए गए हैं. इसके अलावा नई दिल्ली-दानापुर सुपरफास्ट स्पेशल के 8 अतिरिक्त फेरे भी चलाए जाएंगे.
इन रूटों पर भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें
रेलवे ने 16 सितंबर को कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल के 9 फेरे, योग नगरी ऋषिकेश-कोलकाता स्पेशल के 6 फेरे और अमृतसर-कोलकाता स्पेशल के 8 फेरे निर्धारित किए गए हैं. वहीं, अमृतसर-बरौनी स्पेशल ट्रेन के 9 फेरे चलाए जाएंगे. इसके अलावा नई दिल्ली-दानापुर सुपरफास्ट स्पेशल के 8 अतिरिक्त फेरे यात्रियों को उपलब्ध होंगे.
त्योहार से पहले बढ़ सकती है ट्रेनों की संख्या
रेलवे का फोकस दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और प्रमुख रूटों पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने पर है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यात्रियों की मांग और ट्रैफिक को देखते हुए स्पेशल ट्रेनों के फेरों की संख्या में और बढ़ोतरी की जा सकती है.
राजधानी दिल्ली में 18 सितंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट देखने को मिली है. 18 सितंबर की सुबह दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया. वहीं 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,317.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.
दिल्ली में सोने का भाव
राजधानी दिल्ली में 18 सितंबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. इससे एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत में 600 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई थी.
प्रमुख शहरों में आज सोने की कीमत
18 सितंबर को दिल्ली में 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,240 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोना 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम है. मुंबई में 22 कैरेट सोना 1,40,090 रुपये और 24 कैरेट 1,52,830 रुपये प्रति 10 ग्राम है. अहमदाबाद और भोपाल में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,40,140 रुपये, जबकि 24 कैरेट का भाव 1,52,880 रुपये प्रति 10 ग्राम है. चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,090 रुपये और 24 कैरेट सोना **1,52,830 रुपये** प्रति 10 ग्राम है. वहीं जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में 22 कैरेट सोना 1,40,240 रुपये और 24 कैरेट सोना 1,52,980 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.
10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सोना
सोने की कीमतों को लेकर Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने बड़ा अनुमान दिया है. उनका मानना है कि सोने की कीमत आगे चलकर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. Jefferies India Forum 2026 के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में वुड ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की कोशिशों से डॉलर कमजोर हो सकता है. ऐसे माहौल में सोने को फायदा मिल सकता है. मौजूदा स्तर से 10,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर काफी बड़ी तेजी को दर्शाएगा.
चांदी की कीमत भी घटी
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई. 18 सितंबर की सुबह घरेलू बाजार में चांदी का भाव घटकर 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 64.06 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.
सोने और चांदी की घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान के साथ-साथ डॉलर-रुपया विनिमय दर, वैश्विक ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और घरेलू मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.
(नोट: यहां दिए गए सोने-चांदी के भाव 18 सितंबर 2026 की सुबह उपलब्ध दरों पर आधारित हैं. स्थानीय ज्वेलर्स के भाव में टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतर हो सकता है.)
NPCI ने चुनिंदा P2M लेनदेन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट तय किया, ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 होगी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
UPI के जरिए बड़े भुगतान करने वाले मर्चेंट के लिए 15 अक्टूबर 2026 से नया शुल्क ढांचा लागू होने जा रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नए नियम के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा. हालांकि, यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाएगा. ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है.
₹2,000 तक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं
NPCI के नए ढांचे के तहत ₹2,000 तक के P2M UPI लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगेगा. इसी तरह Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान भी पहले की तरह मुफ्त रहेंगे. छोटे मर्चेंट को भी इस शुल्क से राहत दी गई है. ऐसे मर्चेंट जिनके UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक की प्राप्तियां होती हैं, वे MDR के दायरे से बाहर रहेंगे.
ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा शुल्क
नए नियम का सीधा असर UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं होगा. MDR मर्चेंट की ओर से भुगतान श्रृंखला में लिया जाने वाला शुल्क है. वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि मर्चेंट इस शुल्क को UPI के जरिए भुगतान करने वाले ग्राहकों पर न डालें.
MDR से मिलने वाली राशि भुगतान श्रृंखला में शामिल पक्षों, जैसे बैंक और भुगतान सेवा से जुड़े अन्य भागीदारों के बीच वितरित होती है. इसे सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं माना जाता.
कुछ सेवाओं के लिए फ्लैट ₹5 शुल्क
सभी मर्चेंट कैटेगरी पर 0.4 फीसदी MDR लागू नहीं होगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल, बिजली वितरण, नगर निगम जल शुल्क और पाइप्ड नेचुरल गैस जैसी कुछ कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर फ्लैट ₹5 MDR तय किया गया है.
कैपिटल मार्केट लेनदेन पर 0.02% MDR
कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ UPI लेनदेन के लिए MDR की दर 0.02 फीसदी रखी गई है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी. इसमें म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर को किए जाने वाले कुछ भुगतान शामिल हैं.
UPI ऑटोपे और नियमित भुगतान पर अलग व्यवस्था
UPI ऑटोपे या बार-बार होने वाले भुगतान के लिए कोई सामान्य 0.4 फीसदी MDR तय नहीं किया गया है. इसमें यूटिलिटी बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और नियमित निवेश जैसे भुगतान शामिल हैं. शिक्षा से जुड़े कुछ भुगतान के लिए भी अलग फ्लैट या कैप्ड प्रोसेसिंग शुल्क व्यवस्था रखी गई है.
UPI का इस्तेमाल जारी रहेगा मुफ्त
NPCI के नए ढांचे का उद्देश्य बड़े मर्चेंट भुगतान पर भुगतान प्रणाली की लागत को बांटना है, जबकि रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतान को मुफ्त बनाए रखना है. NPCI के अनुसार ₹2,000 तक के छोटे मूल्य वाले लेनदेन UPI के कुल P2M ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 95 फीसदी से अधिक हिस्सा हैं. ([The Times of India][5])
इस तरह 15 अक्टूबर से UPI पर MDR की शुरुआत होने के बावजूद आम ग्राहक के लिए दुकान पर UPI से भुगतान करने की लागत में बदलाव नहीं होगा. बदलाव मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन की लागत व्यवस्था में होगा.
तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर के पार जा चुकी हैं. पिछले सप्ताह भी ब्रेंट और WTI दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स में तेजी दर्ज की गई थी. अब नए हमलों और सप्लाई रूट पर बढ़ते जोखिम ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अहम तेल आपूर्ति मार्गों पर बढ़ते जोखिम का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.8 फीसदी उछलकर 107.54 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 2.3 फीसदी बढ़कर 102.34 डॉलर प्रति बैरल हो गया. सऊदी अरब की अहम पाइपलाइन बंद होने, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर हमले और कूटनीतिक बातचीत टलने से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
सऊदी अरब ने बंद की अहम पाइपलाइन
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव प्रमुख वजह है. सऊदी अरब में ड्रोन हमलों के बाद देश ने अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया. इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर के पार जा चुकी हैं. पिछले सप्ताह भी ब्रेंट और WTI दोनों कॉन्ट्रैक्ट्स में तेजी दर्ज की गई थी. अब नए हमलों और सप्लाई रूट पर बढ़ते जोखिम ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट का संकट सिर्फ पाइपलाइन तक सीमित नहीं है. दुनिया के प्रमुख समुद्री तेल व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में भी तनाव बढ़ गया है. रविवार को इस इलाके में एक मर्चेंट जहाज को निशाना बनाया गया. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि तीन अन्य घायल हुए.
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है. ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है.
ईरान के सख्त नियमों से बढ़ी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान ने भी नियम सख्त कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अब कुछ जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए अनुमति लेने की जरूरत पड़ रही है. ईरान की ओर से जहाजों से सर्विस फीस लेने की व्यवस्था तैयार करने की भी बात सामने आई है.
इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है. इससे बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिम जल्द खत्म नहीं होंगे.
कूटनीतिक बातचीत टलने से बढ़ी बाजार की चिंता
मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की कोशिशों को भी झटका लगा है. ओमान ने ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली अहम बातचीत को फिलहाल टाल दिया है. इस बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय तनाव को लेकर समाधान तलाशने की उम्मीद थी.
बातचीत टलने के बाद बाजार में यह चिंता बढ़ गई है कि मिडिल ईस्ट संकट का जल्द समाधान मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि निवेशकों ने तेल की कीमतों में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है और ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,720 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,840 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गणेश चतुर्थी के दिन घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,54,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि मुंबई और चेन्नई में यह 1,54,570 रुपये पर कारोबार कर रहा है. पिछले सप्ताह भी सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी.
शहरों के हिसाब से सोने के भाव
दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,720 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,840 रुपये प्रति 10 ग्राम है. मुंबई और चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,54,570 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,41,690 रुपये प्रति 10 ग्राम है. अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,54,620 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,41,740 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
कोलकाता, हैदराबाद, पुणे और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,54,570 रुपये, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,41,690 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना 1,54,720 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,41,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,363.01 डॉलर प्रति औंस पर है. घरेलू बाजार में पिछले सप्ताह 24 कैरेट सोने की कीमत में 220 रुपये तक और 22 कैरेट सोने में 200 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई.
चांदी भी हुई सस्ती
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है. 14 सितंबर को चांदी का भाव 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले 5,000 रुपये कम है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर 64.54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.
जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी
जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, अगस्त में भारत का जेम्स एंड ज्वैलरी निर्यात सालाना आधार पर 3.14 फीसदी बढ़कर 2.30 अरब डॉलर यानी करीब 21,945.87 करोड़ रुपये रहा. इस दौरान गोल्ड ज्वैलरी का निर्यात 11.81 फीसदी बढ़कर 999.8 मिलियन डॉलर यानी करीब 9,546.12 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, सिल्वर ज्वैलरी के निर्यात में गिरावट रही. अगस्त में इसका निर्यात 39.66 फीसदी घटकर 86.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 827.20 करोड़ रुपये रह गया.
सोना खरीदते समय स्थानीय भाव जरूर जांचें
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतें शहर, ज्वैलर, टैक्स और मेकिंग चार्ज के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं. ऐसे में खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वैलर से मौजूदा कीमत और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेना जरूरी है.
नए कानून में कागजी रिकॉर्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड पर मौजूद बैंकिंग डेटा को भी कानूनी साक्ष्य के तौर पर मान्यता दी जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के तौर पर पेश करने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार 1 अक्टूबर 2026 से बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 लागू करेगी. यह 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा. नए कानून का मकसद बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक के अनुरूप कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना है.
डिजिटल और क्लाउड रिकॉर्ड भी दायरे में
वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए कानून के तहत बैंकर्स बुक्स की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है. अब इसमें केवल कागजी या लिखित रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, ऑफसाइट और क्लाउड पर सुरक्षित बैंकिंग डेटा भी शामिल होगा. इस बदलाव से डिजिटल बैंकिंग के दौर में तैयार होने वाले रिकॉर्ड को अदालत में कानूनी साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए स्पष्ट आधार मिलेगा.
रिकॉर्ड के प्रमाणन की प्रक्रिया होगी आसान
नए कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड के सत्यापन और प्रमाणन की प्रक्रिया को भी सरल और मानकीकृत किया गया है. रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाणपत्रों को मैनुअल के साथ-साथ डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए भी प्रमाणित किया जा सकेगा. इससे बैंकिंग रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है.
डिजिटल रिकॉर्ड के लिए साइबर सुरक्षा जरूरी
किसी इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किए जाने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी. इनमें संबंधित कंप्यूटर सिस्टम का सही तरीके से काम करना, अधिकृत तरीके से डेटा दर्ज किया जाना, रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव से सुरक्षा और सुरक्षित डेटा ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. यानी डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित करना जरूरी होगा.
बैंक अधिकारी और मूल रिकॉर्ड पेश करने पर भी नियम
नए कानून में बैंक अधिकारियों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. अगर किसी कानूनी मामले में बैंक खुद पक्षकार नहीं है, तो उसके अधिकारियों को गवाह के तौर पर बुलाने या मूल बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा. हालांकि, अगर अदालत को रिकॉर्ड की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह हो, नियमित रिकॉर्ड-कीपिंग में कोई बाधा आई हो या बैंक ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया हो, तो विशेष कारण दर्ज करने के बाद ऐसा आदेश दिया जा सकता है.
अन्य वित्तीय संस्थाएं भी आ सकती हैं दायरे में
केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार इस कानून के प्रावधानों को कुछ अन्य वित्तीय संस्थानों या संस्थानों की विशेष श्रेणियों पर भी लागू कर सकेगी. इसके लिए सरकार अलग से शर्तें, अपवाद या जरूरी बदलाव अधिसूचित कर सकती है.
1891 के कानून की जगह लेगा नया एक्ट
नया कानून बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त कर देगा. हालांकि, पुराने कानून के तहत पहले से बने अधिकारों और देनदारियों के साथ-साथ जांच और कानूनी कार्यवाहियों को सुरक्षित रखा जाएगा.
नए कानून को बैंकिंग व्यवस्था में तकनीकी बदलावों के अनुरूप कानूनी ढांचे को अपडेट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में डिजिटल डेटा के इस्तेमाल के लिए ज्यादा स्पष्ट और आधुनिक कानूनी व्यवस्था उपलब्ध होगी.
सितंबर के पहले दिन विमान ईंधन और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी, घरेलू LPG, पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सितंबर की शुरुआत आम लोगों और कारोबारियों के लिए मिली-जुली खबर लेकर आई है. सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी. इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल LPG सिलेंडर भी 9.50 रुपये महंगा हो गया है. हालांकि, घरेलू LPG सिलेंडर के साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
6.28 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ ATF
तेल कंपनियों के मुताबिक, घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत 6.28 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 121.28 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. यह लगातार दूसरा महीना है जब विमान ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 1 अगस्त को भी ATF के दाम में करीब 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी.
एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में विमान ईंधन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है और यह कई मामलों में करीब 40 फीसदी तक पहुंच सकती है. ऐसे में ATF महंगा होने से एयरलाइंस की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.
क्या महंगी हो सकती है हवाई यात्रा?
ATF की कीमत बढ़ने का सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ता है. हालांकि, इसका पूरा बोझ यात्रियों पर डाला जाएगा या नहीं, यह एयरलाइन की रणनीति, किसी रूट पर मांग, प्रतिस्पर्धा और अन्य परिचालन लागत पर निर्भर करता है. अगर विमान ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो हवाई किराए पर भी दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, मौजूदा बढ़ोतरी के आधार पर टिकट की कीमतों में तत्काल कितनी वृद्धि होगी, यह तय नहीं कहा जा सकता.
19 किलो का कमर्शियल LPG सिलेंडर 9.50 रुपये महंगा
कमर्शियल LPG की कीमत में भी बढ़ोतरी की गई है. 19 किलो के सिलेंडर का दाम 2,738 रुपये से बढ़ाकर 2,747.50 रुपये कर दिया गया है. यानी अब एक सिलेंडर के लिए 9.50 रुपये अधिक चुकाने होंगे. कमर्शियल LPG का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में होता है. ऐसे में गैस की लागत बढ़ने से इन कारोबारों के खर्च पर मामूली दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा 5 किलो के बाजार भाव वाले LPG सिलेंडर की कीमत भी 762 रुपये से बढ़ाकर 764 रुपये कर दी गई है.
लगातार दो कटौतियों के बाद फिर बढ़े कमर्शियल LPG के दाम
कमर्शियल LPG की कीमत में यह बढ़ोतरी लगातार दो महीनों की बड़ी कटौती के बाद हुई है. 1 अगस्त को 19 किलो के सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की कटौती की गई थी. इससे पहले 1 जुलाई को भी कीमत 183.50 रुपये घटाई गई थी.
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद जून में कमर्शियल LPG की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. फरवरी में 19 किलो के सिलेंडर की कीमत 1,740.50 रुपये थी, जो जून में बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई थी.
घरेलू LPG की कीमत में कोई बदलाव नहीं
घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के LPG सिलेंडर की कीमत इस बार स्थिर रखी गई है. इसकी कीमत 942 रुपये प्रति सिलेंडर बनी हुई है. घरेलू LPG की कीमत आखिरी बार 7 जून को 29 रुपये बढ़ाई गई थी. इससे पहले मार्च में पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी.
पेट्रोल-डीजल भी स्थिर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी मंगलवार को कोई बदलाव नहीं हुआ. मई में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे. इसके बाद से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. ATF और LPG की कीमतों की समीक्षा आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को की जाती है. इनके दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कारकों के आधार पर तय होते हैं. राज्यों में अलग-अलग VAT और स्थानीय करों के कारण वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है.
सोयाबीन से लेकर पाम और सूरजमुखी तेल तक पर बढ़ा दबाव, बढ़ती मांग और ग्लोबल सप्लाई संकट से त्योहारों में जेब पर पड़ेगा ज्यादा बोझ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही आम लोगों के रसोई बजट पर महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है. खाद्य तेलों की कीमतों में अगस्त में करीब 15 फीसदी तक की तेजी आ चुकी है और आने वाले महीनों में भी राहत मिलने के आसार कम हैं. घरेलू बाजार में त्योहारी मांग बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयातित तेलों की सप्लाई में रुकावट ने कीमतों को और हवा दे दी है.
खुदरा बाजार में कई खाद्य तेलों के दाम 200 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुके हैं. ऐसे में त्योहारों पर पकवान बनाने से लेकर रोजमर्रा की रसोई तक, खाद्य तेल की बढ़ती कीमत सीधे घरेलू बजट पर असर डाल सकती है. कारोबारियों का मानना है कि मांग बढ़ने के साथ कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है.
अगस्त में 15% तक चढ़े खाद्य तेलों के भाव
अगस्त महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. थोक बाजार में सोयाबीन तेल का भाव बढ़कर 15,800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. गुजरात मूंगफली तेल 17,000 रुपये, पामोलीन 15,850 रुपये और सरसों तेल 2,820 रुपये प्रति टिन (15 किलो) तक पहुंच गया है. औद्योगिक मांग बढ़ने और बाजार में उपलब्धता कम होने से बिनौला तेल भी महंगा हुआ है. इसका भाव बढ़कर 17,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
200 रुपये के पार पहुंचा खुदरा भाव
खाद्य तेलों की थोक कीमतों में तेजी का असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है. कई जगह खाद्य तेल 200 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है. कीमतों में तेजी का असर कम दिखाने के लिए कुछ ब्रांडेड कंपनियां एक लीटर के बजाय 910 ग्राम के पैकेट भी बाजार में उतार रही हैं.
सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाने में जुटीं रिफाइनरियां
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच भारतीय रिफाइनरियां सोयाबीन तेल का आयात बढ़ा रही हैं. अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. यह मौजूदा मार्केटिंग ईयर के औसत मासिक आयात 4,24,549 टन से करीब 46 फीसदी अधिक है.
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन तेल की बेहतर कीमत, भारत में बढ़ती मांग और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आ रही बाधाओं के चलते भारतीय रिफाइनरियां सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ा रही हैं.
पाम तेल की कीमतों पर भी बढ़ा दबाव
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर के अनुसार, पहले कम बारिश के कारण उत्पादन घटने की आशंका से खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी आई. इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और इंडोनेशिया के जैव ईंधन में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ाने के फैसले ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को ऊपर धकेला है. अब सूरजमुखी तेल की सप्लाई प्रभावित होने से भी बाजार में दबाव बढ़ गया है. ऐसे में त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने पर उपभोक्ताओं को खाद्य तेल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.
रूस-यूक्रेन युद्ध से सूरजमुखी तेल की सप्लाई पर असर
भारत सूरजमुखी तेल की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से आयात करता है. दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के कारण काला सागर क्षेत्र से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है. अगस्त-सितंबर में शिपमेंट के लिए निर्धारित करीब 1.40 लाख टन सूरजमुखी तेल की खेपें संघर्ष के कारण विलंबित हुई हैं. डीलरों के मुताबिक, अगस्त में भारत का सूरजमुखी तेल आयात करीब 1,80,000 मीट्रिक टन रह सकता है, जो फरवरी 2026 के बाद सबसे कम और पिछले महीने की तुलना में करीब 28 फीसदी कम है.
कम हुआ निर्यात, लेकिन बढ़ी कमाई
अप्रैल-मई 2026 में भारत ने 41,438 टन खाद्य तेल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 720.85 करोड़ रुपये रही. पिछले साल इसी अवधि में 49,100 टन खाद्य तेल का निर्यात हुआ था और इसकी कीमत 707.09 करोड़ रुपये थी.
यानी निर्यात की मात्रा करीब 16 फीसदी घटने के बावजूद कुल निर्यात मूल्य करीब 2 फीसदी बढ़ा है. इस दौरान मूंगफली तेल का निर्यात सबसे ज्यादा रहा. इसके बाद सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का स्थान रहा.
त्योहारों में और महंगा हो सकता है खाद्य तेल
खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी बड़ी वजह है. सोयाबीन तेल का बढ़ता आयात कुछ हद तक सप्लाई संभालने में मदद कर सकता है, लेकिन सूरजमुखी और पाम तेल की वैश्विक सप्लाई पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में अगर त्योहारी सीजन में मांग अनुमान से ज्यादा बढ़ती है, तो खाद्य तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आ सकती है. इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है.
औसत खुदरा कीमत 42 रुपये किलो तक पहुंची, दिल्ली में 65 रुपये; बफर स्टॉक से चरणबद्ध तरीके से सस्ता प्याज बाजार में उतारेगी सरकार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है. देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 45 फीसदी अधिक है. बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार सोमवार से अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने जा रही है. इसके तहत नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे उन शहरों के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनें चलाई जाएंगी, जहां प्याज की कीमतें राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हैं.
एक साल में 45 फीसदी महंगा हुआ प्याज
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 42 रुपये प्रति किलो रही. यह एक साल पहले की तुलना में 45 फीसदी और पिछले महीने के मुकाबले 19 फीसदी अधिक है. बड़े शहरों में कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल रहा है. दिल्ली में शनिवार को प्याज 65 रुपये प्रति किलो बिका, जबकि एक साल पहले इसकी कीमत 35 रुपये प्रति किलो थी. इसी तरह चेन्नई में प्याज 58 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जो पिछले साल 33 रुपये प्रति किलो था. केरल और असम के कुछ हिस्सों में भी प्याज की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं.
नासिक से बड़े शहरों तक पहुंचेगा सस्ता प्याज
सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्याज के बफर स्टॉक को चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारने का फैसला किया है. इसके लिए नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी समेत उन प्रमुख शहरों तक प्याज पहुंचाया जाएगा, जहां खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं. सरकार का कहना है कि उसके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मांग के मुताबिक प्याज को कम कीमतों पर व्यवस्थित तरीके से बाजार में उतारा जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक, कुछ कारोबारी कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए स्टॉक को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा.
महाराष्ट्र में उत्पादन घटने से बढ़ा दबाव
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में सबसे ज्यादा प्याज उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में करीब 5 से 7 फीसदी गिरावट की खबरों ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है. मौजूदा वित्त वर्ष के लिए NAFED और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) ने बफर स्टॉक के लिए करीब 1.2 लाख टन प्याज खरीदा है. मई में दोनों एजेंसियों ने प्याज खरीद की कीमत 1,270 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी. पिछले सप्ताह खरीद की रफ्तार बढ़ाने के लिए इसे बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया.
कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, 2025-26 फसल वर्ष में प्याज का उत्पादन करीब 307 लाख टन रहने का अनुमान है. यह 2024-25 फसल वर्ष में दर्ज उत्पादन के लगभग बराबर है.
पहले भी चलाई गई थी ‘कांदा एक्सप्रेस’
प्याज की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार पहले भी ‘कांदा एक्सप्रेस’ का इस्तेमाल कर चुकी है. अक्टूबर 2024 में नासिक से दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों तक प्याज पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं. इस बार भी सरकार का लक्ष्य बफर स्टॉक के जरिए उन बाजारों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाना है, जहां कीमतें ज्यादा हैं.
चीनी की कीमतें भी बढ़ीं
प्याज के साथ-साथ चीनी की खुदरा कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. शनिवार को खुली चीनी की कीमत 62.5 रुपये प्रति किलो रही, जो एक साल पहले के मुकाबले 34 फीसदी और एक महीने पहले की तुलना में करीब 28.5 फीसदी अधिक है.
दिल्ली में चीनी 65 रुपये प्रति किलो और मुंबई में 69 रुपये प्रति किलो बिकी. खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और बाजार में इसकी आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है.
पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन के बाद सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणी के पासपोर्ट की फीस बढ़ा दी गई है. 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के लिए अब 2,500 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि पहले इसके लिए 1,500 रुपये लगते थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने की योजना बना रहे हैं, तो 1 जुलाई 2026 से आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है. केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और तत्काल सेवा की फीस में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. नई दरें पूरे देश में 1 जुलाई से लागू होंगी. हालांकि बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को सरकार ने कुछ राहत भी दी है.
सामान्य और Tatkal पासपोर्ट दोनों हुए महंगे
पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन के बाद सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणी के पासपोर्ट की फीस बढ़ा दी गई है. 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट के लिए अब 2,500 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि पहले इसके लिए 1,500 रुपये लगते थे. वहीं, 36 पेज वाले Tatkal पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है.
60 पेज वाले पासपोर्ट के लिए भी बढ़ी फीस
अधिक पेज वाले पासपोर्ट पर भी नई दरें लागू होंगी. 60 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दी गई है. इसी तरह, 60 पेज वाले Tatkal पासपोर्ट के लिए अब 6,000 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि पहले इसकी फीस 4,000 रुपये थी.
पासपोर्ट की वैधता में नहीं होगा कोई बदलाव
फीस बढ़ने के बावजूद पासपोर्ट की वैधता अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के आवेदकों के लिए पासपोर्ट की वैधता 10 वर्ष तक बनी रहेगी. वहीं, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पासपोर्ट 5 वर्ष या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा.
बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को राहत
सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों के लिए शुल्क में छूट का भी प्रावधान किया है. 8 वर्ष तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को नए पासपोर्ट आवेदन पर 10 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. हालांकि यह रियायत केवल नए पासपोर्ट के लिए लागू होगी. पासपोर्ट के नवीनीकरण या री-इश्यू के मामलों में यह छूट नहीं मिलेगी.
आवेदन से पहले नई फीस जरूर जांचें
विदेश मंत्रालय ने आवेदकों को सलाह दी है कि 1 जुलाई के बाद आवेदन करने से पहले नई शुल्क दरों की जानकारी अवश्य जांच लें. जिन लोगों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उन्हें संशोधित शुल्क के अनुसार भुगतान करना होगा. ऐसे में यदि आप जल्द पासपोर्ट बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो नई फीस को ध्यान में रखते हुए अपना बजट तैयार करना बेहतर होगा.
नई फीस का असर लाखों आवेदकों पर
हर साल देशभर में लाखों लोग नए पासपोर्ट और नवीनीकरण के लिए आवेदन करते हैं. ऐसे में शुल्क में हुई यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर बड़ी संख्या में आवेदकों को प्रभावित करेगी. विशेष रूप से तत्काल सेवा का उपयोग करने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा.