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WhatsApp, Facetime, Skype से कॉलिंग पर पहरे की तैयारी, जानिए क्या है माजरा

टेलीकॉम ऑपरेटर्स शुरू से ही ये मांग करते रहे हैं कि OTTs को रेगुलेशन के तहत लाना चाहिए, इनका कहना है कि सिर्फ वो ही क्यों सरकार को लाइसेंस फीस दें,

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: WhatsApp, Signal, Google Meet, Skype, Facetime और Viber जैसी ऐप्स से वॉयस कॉल सर्विस पर सरकारी पहरा लगाने की तैयारी हो रही है. हालांकि मैसेजिंग को इससे दूर रखा जाएगा, क्योंकि ये पहले से ही रेगुलेटेड है.  

TRAI से मांगा गया सुझाव 
टेलीकॉम मंत्रालय (DoT) ने टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI को पिछले हफ्ते इसे लेकर उसके सुझाव मांगे थे. जिसमें इन ऐप्स के जरिए होने वाली वॉयस कॉलिंग को लेकर एक फ्रेमवर्क बनाने की बात कही गई थी. TRAI जब इसे लेकर अपने सुझाव सरकार को सौंपेगी तब नए नियमों को बनाकर लागू किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक - TRAI से मांगे गए सुझाव के पीछे टेलीकॉम डिपार्टमेंट की नियुक्त एक पैनल की साल 2015 की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया था कि ऐप्स के जरिए होने वाली इंटरनेट कॉल्स को रेगुलेट करना चाहिए. 

इंटरनेट कॉलिंग के लिए लाइसेंस ?
हालांकि नियमों में बहुत ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं होगी, मैसेजिंग के लिए कोई नया रेगुलेशन नहीं होगा, लेकिन अगर कंपनियां लोकल या लॉन्ग डिस्टेंस कॉल सर्विसेज देना चाहती हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार से लाइसेंस लेना होगा. ये 'रेफरेंस' टेलीकॉम मंत्रालय के अंदर काफी चर्चा के बाद TRAI को भेजा गया था, ये जानने के लिए कि इसमें रेगुलेटर के इनपुट की जरूरत है या नहीं. इसके पीछे वजह ये है कि ट्राई ने सितंबर 2020 में सरकार से सिफारिश की थी कि फेसबुक, व्हाट्सएप, गूगल, वाइबर, टेलीग्राम जैसे OTT खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाने की जरूरत नहीं है, सिर्फ मार्केट पर नजर निगरानी की जरूरत है. अगर कहीं जरूरत हो तो उचित समय पर दखल दिया जा सकता है.

OTTs पर रेगुलेशन की मांग पुरानी 
टेलीकॉम ऑपरेटर्स शुरू से ही ये मांग करते रहे हैं कि OTTs को रेगुलेशन के तहत लाना चाहिए, इनका कहना है कि सिर्फ वो ही क्यों सरकार को लाइसेंस फीस दें, जबकि ये ऐप्स बिना किसी लाइसेंस फीस के अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन पर किसी तरह का कोई रेगुलेशन नहीं है.TRAI ने साल 2008 में TRAI ने सिफारिश की थी कि इंटरनेट सेवा प्रोवाइडर्स (ISP) को सामान्य टेलीफोन नेटवर्क पर कॉल सहित इंटरनेट टेलीफोनी देने की इजाजत मिलनी चाहिए. लेकिन उन्हें टेलीकॉम ऑपरेटर्स को इंटरकनेक्शन चार्ज देना होगा. फिर TRAI  ने जनवरी 2021 से टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए इंटरकनेक्शन चार्ज खत्म कर दिया. 

इससे क्या होगा 
अब सवाल उठता है कि इससे क्या होगा? देखिए जब इंटरनेट कॉलिंग को लाइसेंस फ्रेमवर्क में लाया जाएगा तो कंपनियों को कॉल्स की लीगल इंटरसेप्शन सिक्योरिटी एजेंसीज को मुहैया करानी होंगी, जैसा कि अभी देश की टेलीकॉम कंपनियां करती हैं. इसके अलावा कंपनियों को सालाना लाइसेंस फीस भी सरकार को देनी होंगी. 
ये सुझाव क्यों दिया गया, दरअसल इसके पीछे नेट न्यूट्रैलिटी का हवाला दिया गया है, जिससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स और OTT प्लेयर्स को बराबर का मौका मिल सके. 

VIDEO: IPO आवेदन के लिए SEBI के नए नियम


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