जानिए, रवि शास्त्री के बयान पर टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री मनोज तिवारी ने क्या कहा...
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चंदन कुमार
नई दिल्ली: 28 अगस्त सभी क्रिकेट फैंस के लिए सबसे बड़ा दिन है, क्योंकि इसी दिन एशिया कप टी20 टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच कांटे की टक्कर होनी है. जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच कोई मुकाबला होता है, तो रोमांच अपने चरम पर होता है. यह एक ऐसा मुकाबला होता है, जिसे भारत-पाकिस्तान के लोग ही नहीं, पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस भी मिस नहीं करना चाहते.
रवि शास्त्री की सलाह
इस मैच की टीआरपी इतनी ज्यादा होती है कि खिलाड़ियों पर स्वाभाविक रूप से ज्यादा दबाव बन जाता है. खिलाड़ियों को इससे बचने के लिए टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने कहा कि कुछ दिन क्रिकेटर्स को मोबाइल से दूरी बना लेनी चाहिए. इस मामले पर टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री मनोज तिवारी की अलग राय है.
'मोबाइल से दूरी बना लेना सॉल्यूशन नहीं'
BW Hindi से बातचीत करते हुए मनोज तिवारी ने कहा, "खिलाड़ियों का मोबाइल से दूरी बना लेना कोई सॉल्यूशन नहीं है. सोशल मीडिया का जमाना है. उससे आप दूर नहीं रह सकते. जरूरी है कि आप मोबाइल का इस्तेमाल किस काम के लिए कर रहे हैं. कई खिलाड़ी तो खुद को रिलैक्स करने के लिए भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं."
खिलाड़ियों पर दबाव रहता है या नहीं?
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया के जो भी खिलाड़ी खेलने वाले हैं, वे सभी मैच्योर हैं. हम जो ये बातें करते हैं कि भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर खिलाड़ियों पर दबाव ज्यादा रहता है, वो गलत है. दबाव तो हर मैच के लिए रहता है, लेकिन वो मैच कंडीशन का रहता है. जैसे यदि बॉल स्विंग करने लगे तो उसका कैसे सामना करें. मैच की स्ट्रैटजी को लेकर प्रेशर होता है. इसके अलावा मैदान के बाहर जो भी बातें चल रही होती हैं, उसका दबाव इस बड़े मैच के खिलाड़ियों पर नहीं होता. सभी 10-12 साल से क्रिकेट खेल रहे हैं. उन्हें इस तरह का दबाव झेलने की आदत हो चुकी है."
'जरूरत से ज्यादा फोकस भी खतरनाक'
मनोज तिवारी ने आगे कहा, "सबकी अपनी-अपनी राय होती है. रवि शास्त्री बड़े कोच रह चुके हैं, लेकिन सीनियर खिलाड़ियों को मोबाइल देखने से नहीं रोका जा सकता. हां, ये सही है कि फोकस के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फोकस भी नुकसानदायक होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि हम समय से पहले किसी चीज को लेकर इतना फोकस कर लेते हैं कि जब जरूरत होती है तब ध्यान भटक जाता है. जरूरत से ज्यादा फोकस भी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है. इसलिए इस बात से बचना चाहिए."
'खिलाड़ियों की बैट्री ऑटोमैटिक रिचार्ज हो जाती है'
पाकिस्तान के खिलाफ मैच के दौरान टीम इंडिया के खिलाड़ियों को सलाह देने के सवाल पर मनोज तिवारी ने कहा, "पाकिस्तान के खिलाफ मैच को लेकर किसी को कुछ बोलना नहीं पड़ता है. सभी खिलाड़ियों की बैट्री ऑटोमैटिक रिचार्ज हो जाती है. सभी खिलाड़ियों को मैच की अहमियत पता होती है. बस, सभी नेचुरल गेम खेलें और जीत तो हमारी ही पक्की है."
'मैच जीतते ही सारी गलतियां माफ हो जाती हैं'
इस मैच को लेकर फैंस के अतिउत्साह पर पूर्व क्रिकेटर और विधायक मनोज तिवारी ने कहा, "ये स्वाभाविक है. इसके पीछे एक बड़ा कारण दोनों देशों के बीच वर्तमान में जैसा संबंध है, वो भी है. भले ही, आप पूरे साल रन नहीं बना पाए हों, भले ही आप ज्यादा मैच नहीं जीत पाए हों, लेकिन यदि पाकिस्तान के खिलाफ मैच जीत जाते हैं तो फैंस सारी गलतियां भूल जाते हैं. आपको सिर आंखों पर बैठाते हैं. इसलिए इस मैच का महत्व सबसे ज्यादा होता है."
आपको बता दें कि मनोज तिवारी इन दिनों राजनीति में काफी व्यस्त हैं. बावजूद उन्होंने कहा, "पॉपकॉर्न खाते-खाते मैं ये मैच जरूर देखूंगा और हमारी टीम ही जीतेगी. टीम इंडिया को बेस्ट ऑफ लक."
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टेरो इंडिया ने नई दिल्ली में मुए थाई पहल की शुरुआत की. कंपनी का फोकस भारतीय कोच और खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराने पर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टेरो इंडिया ने भारत में मुए थाई को एक संगठित खेल के रूप में विकसित करने की पहल शुरू की है. इस पहल के तहत टेरो इंडिया का लक्ष्य भारत में मुए थाई के लिए ट्रेनिंग, कोचिंग और प्रतिस्पर्धी अवसरों का एक इकोसिस्टम तैयार करना है. इसके लिए कंपनी थाईलैंड के प्रशिक्षकों और कैंप के साथ साझेदारी करने की योजना पर काम कर रही है.
तीन स्तरों पर सहयोग करेगी थाईलैंड की स्पोर्ट्स अथॉरिटी
इस मौके पर स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ थाईलैंड के गवर्नर डॉ. गोंगसाक योदमनी का वीडियो संदेश भी दिखाया गया. उन्होंने कहा कि थाईलैंड की रॉयल सरकार मुए थाई को सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आर्थिक विकास और देश की सॉफ्ट पावर से जुड़ी गतिविधि के तौर पर देखती है. उन्होंने बताया कि भारत में इस पहल को तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग दिया जाएगा. इनमें भारतीय कोच और खिलाड़ियों के लिए मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण, भारत-थाईलैंड संबंधों एवं स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा देना और प्रमाणित उपकरण, जिम एक्रेडिटेशन तथा इवेंट आयोजन के जरिए मुए थाई के इकोसिस्टम को विकसित करना शामिल है.
भारत में मुए थाई के विस्तार की योजना
टेरो इंडिया के एमडी और सीईओ तथा टेरो एंटरटेनमेंट के पार्टनर चंद्रकांत सिंह ने कहा कि कंपनी भारत में मुए थाई को जागरूकता और पहुंच बढ़ाने से लेकर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी स्तर तक विकसित करने पर ध्यान देगी. इसके लिए थाईलैंड के प्रमुख कैंप और कोच के साथ साझेदारी कर भारतीय प्रतिभाओं को तैयार करने की योजना है. उन्होंने कहा कि मुए थाई केवल एक कॉम्बैट स्पोर्ट नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी थाई परंपरा से जुड़ा अनुशासन है, जिसमें सम्मान, फोकस और मजबूती पर जोर दिया जाता है.
3x3 बास्केटबॉल के बाद मुए थाई पर फोकस
टेरो एंटरटेनमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर और फाउंडर ब्रायन एल. मार्कर ने कहा कि कंपनी ने 1990 में अपनी शुरुआत की थी और थाईलैंड में बड़े खेल आयोजनों के आयोजन एवं प्रचार का लंबा अनुभव रखती है. भारत में टेरो इंडिया की शुरुआत 3x3 बास्केटबॉल और मुए थाई से की जा रही है. कंपनी आगे अन्य खेलों और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों तक विस्तार की योजना भी बना रही है.
लाइव मुए थाई प्रदर्शन रहा आकर्षण
इस दौरान थाईलैंड के फेयरटेक्स के ट्रेनर खुन अरियावत “प्रेम” और उनकी टीम ने लाइव मुए थाई प्रदर्शन किया. साथ ही वाई क्रू और राम मुए की परंपरा के बारे में भी जानकारी दी गई. यह पारंपरिक प्रदर्शन मुए थाई मुकाबले से पहले किया जाता है और इसमें फाइटर्स अपने गुरुओं, पूर्वजों और माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं. टेरो इंटरनेशनल के सीएमओ विकास टंडन ने कहा कि इस पहल के जरिए कंपनी भारत में थाई विरासत और मुए थाई की परंपरा को पेश करने के साथ दोनों देशों के बीच खेल के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना चाहती है.
साझेदारी के बाद टूर्नामेंट को ‘ITW Universe Classic NCR Golf Premier League’ के नाम से जाना जाएगा. पांच सप्ताह तक चलने वाले इस सीजन में 13 टीमें और 156 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ITW Universe ने Classic NCR Golf League के पांचवें सीजन के लिए टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल की है. यह टूर्नामेंट 21 अगस्त से 27 सितंबर 2026 तक गुरुग्राम स्थित ITC Classic Golf & Country Club में आयोजित किया जाएगा. इस साझेदारी के तहत ITW Universe की इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सर्विसेज डिवीजन ITW IMS ब्रांड और स्पॉन्सरशिप इंटीग्रेशन की जिम्मेदारी संभालेगी.
13 टीमें और 156 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा
साझेदारी के बाद टूर्नामेंट को ‘ITW Universe Classic NCR Golf Premier League’ के नाम से जाना जाएगा. पांच सप्ताह तक चलने वाले इस सीजन में 13 टीमें और 156 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे. लीग में बिजनेस ओनर्स, CXOs और वरिष्ठ कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स शामिल होंगे. इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धी गोल्फ के साथ बिजनेस नेटवर्किंग और प्रोफेशनल रिलेशनशिप को बढ़ावा देना है.
ITW IMS, ITW Universe की इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सर्विसेज डिवीजन है, जो ब्रांड स्ट्रैटेजी और कम्युनिकेशन, क्रिएटिव प्रोडक्शन, मीडिया, सोशल मीडिया, एक्टिवेशन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप जैसी सेवाओं को एक मंच पर लाती है. Classic NCR Golf League के लिए ITW IMS ब्रांड विजिबिलिटी, एंगेजमेंट और एक्टिवेशन से जुड़े अवसरों को संभालेगी.
खेल के साथ बिजनेस नेटवर्किंग पर फोकस
ITW Universe के लिए यह साझेदारी खेल, कारोबार और कम्युनिटी के बीच स्वाभाविक जुड़ाव को दर्शाती है. लीग के जरिए वरिष्ठ कारोबारी और कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स बोर्डरूम से बाहर एक अनौपचारिक माहौल में एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे, विचार साझा कर सकेंगे और नए कारोबारी संबंध विकसित कर सकेंगे.
इस सीजन को House Of Glenfiddich, Yatra, Thriwe, IGPL, Hero MotoCorp, Callaway, Mamaearth, Carlsberg Water, Kia और BMW जैसे प्रमुख ब्रांड्स का भी समर्थन मिला है. इससे NCR में इस कॉरपोरेट स्पोर्टिंग प्लेटफॉर्म के प्रति बढ़ती व्यावसायिक रुचि का संकेत मिलता है.
लीग-कम-नॉकआउट फॉर्मेट में होगा मुकाबला
टूर्नामेंट लीग-कम-नॉकआउट फॉर्मेट में खेला जाएगा. लीग चरण में पांच राउंड होंगे, जिनमें Modified Stableford और Match Play स्कोरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. लीग चरण के बाद शीर्ष आठ टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंचेंगी. इसके बाद सेमीफाइनल और ग्रैंड फाइनल का आयोजन होगा.
डायनेमिक हैंडीकैपिंग और Modified Stableford स्कोरिंग के जरिए अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों को एक समान फॉर्मेट में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा.
टाइटल स्पॉन्सर को मिलेगी व्यापक ब्रांड विजिबिलिटी
टाइटल स्पॉन्सर के तौर पर ITW Universe को लीग के नामकरण अधिकार मिलेंगे. इसके अलावा ऑन-कोर्स ब्रांडिंग, इवेंट कोलेटरल्स, डिजिटल और सोशल मीडिया इंटीग्रेशन के साथ ओपनिंग सेरेमनी और गाला डिनर जैसे प्रमुख आयोजनों में भी ब्रांड की मौजूदगी रहेगी.
ITW Universe के को-फाउंडर भैरव शांत ने कहा कि गोल्फ हमेशा से खेल और कारोबार के बीच एक स्वाभाविक मिलन बिंदु रहा है. उनके मुताबिक, यह लोगों को उनके पेशेवर दायरे से बाहर जुड़ने का समय और अवसर देता है और ऐसी बातचीत अक्सर लंबे समय तक चलने वाले संबंधों में बदल जाती है. उन्होंने कहा कि Classic NCR Golf League ने बिजनेस लीडर्स की एक मजबूत कम्युनिटी तैयार की है और ITW Universe ऐसे मंच का हिस्सा बनकर खुश है, जहां खेल, प्रतिस्पर्धा और कम्युनिटी एक साथ आते हैं.
Classic Golf & Country Club के GM - Golf Operations & Marketing केशव कुमार ने कहा कि पांचवें सीजन के टाइटल स्पॉन्सर के तौर पर ITW Universe का स्वागत करते हुए क्लब बेहद उत्साहित है. उन्होंने कहा कि ITW Universe की भागीदारी प्रतिस्पर्धी गोल्फ, कॉरपोरेट सौहार्द और प्रभावी नेटवर्किंग पर आधारित इस लीग के लिए महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ती है. उनके मुताबिक, अलग-अलग संगठनों और ब्रांड पार्टनर्स की भागीदारी के साथ यह लीग NCR के लिए एक अलग पहचान वाले कॉरपोरेट स्पोर्टिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो रही है.
3x3 क्वेस्ट इंडिया 2026 की शुरुआत दिल्ली से होगी, विजेता टीम को मंगोलिया में FIBA 3x3 वर्ल्ड सीरीज़ में खेलने का मौका; खिलाड़ियों को मिलेंगे रैंकिंग पॉइंट
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में 3x3 बास्केटबॉल को नई पहचान और अंतरराष्ट्रीय मंच देने की दिशा में टेरो एंटरटेनमेंट ने 3x3 क्वेस्ट इंडिया 2026 लॉन्च किया है. बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) और FIBA के समर्थन से शुरू की गई इस पहल का पहला आयोजन 12 और 13 सितंबर को दिल्ली के DLF Promenade- Emporio में होगा. इसका उद्देश्य युवा भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से जोड़ने के साथ देश में 3x3 बास्केटबॉल का मजबूत स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम तैयार करना है.
खेल के साथ म्यूजिक और फैन एंटरटेनमेंट
3x3 क्वेस्ट इंडिया 2026 में बास्केटबॉल मुकाबलों के साथ म्यूजिक, इंटरैक्टिव फैन जोन और लाइव एंटरटेनमेंट का भी आयोजन होगा. टेरो के मुताबिक, 3x3 महज एक खेल नहीं है, बल्कि युवा संस्कृति, प्रतियोगिता, संगीत, क्रिएटर्स और सोशल मीडिया को जोड़ने वाला एक नया अनुभव है.
लॉन्च कार्यक्रम के दौरान टेरो एंटरटेनमेंट, FIBA, BFI और टेरो इंडिया के प्रतिनिधियों ने भारत में 3x3 बास्केटबॉल के विकास को लेकर अपना विजन और रोडमैप साझा किया. इस दौरान टूर्नामेंट की ट्रॉफी और जर्सी भी लॉन्च की गई.
5-on-5 से अलग क्यों है 3x3?
पारंपरिक 5-on-5 बास्केटबॉल की तुलना में 3x3 फॉर्मेट अधिक तेज और हाई-एनर्जी माना जाता है. इसमें प्रत्येक टीम के तीन खिलाड़ी हाफ-कोर्ट पर मुकाबला करते हैं. मैच में 12 सेकंड की शॉट क्लॉक होती है और मुकाबला अधिकतम 10 मिनट तक चलता है. हालांकि, यदि कोई टीम इससे पहले 21 अंक हासिल कर लेती है तो मैच वहीं समाप्त हो जाता है.
FIBA के 3x3 मुकाबलों में दर्शक खिलाड़ियों के काफी करीब रहते हैं और पूरे मैच के दौरान म्यूजिक का इस्तेमाल होता है. तेज रफ्तार, कम समय और स्ट्रीट कल्चर का मेल इस फॉर्मेट को पारंपरिक बास्केटबॉल से अलग पहचान देता है.
ओलंपिक में शामिल होने के बाद बढ़ी लोकप्रियता
3x3 बास्केटबॉल को टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया था. इसके बाद इस फॉर्मेट की वैश्विक लोकप्रियता में तेजी आई. पेरिस 2024 ओलंपिक में भी इसे दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली. लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में 3x3 के लिए टीमों की संख्या आठ से बढ़ाकर 12 करने की योजना है. यह फॉर्मेट कॉमनवेल्थ गेम्स का भी हिस्सा बन चुका है.
भारतीय खिलाड़ियों के लिए खुलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
3x3 क्वेस्ट इंडिया 2026 की सबसे बड़ी खासियत भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर देना है. टूर्नामेंट में टीमें नॉकआउट फॉर्मेट में खेलेंगी, जिसमें क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले शामिल होंगे.
टूर्नामेंट की विजेता टीम को मंगोलिया में होने वाली FIBA 3x3 वर्ल्ड सीरीज़ में खेलने का मौका मिलेगा. इसके अलावा भारतीय खिलाड़ियों को FIBA रैंकिंग पॉइंट भी हासिल होंगे. टेरो के मुताबिक, यह भारतीय 3x3 खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि बड़ी संख्या में खिलाड़ी अब तक घरेलू या गैर-रैंकिंग प्रतियोगिताओं तक सीमित रहे हैं.
जमीनी स्तर से तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन
टेरो इंडिया के एमडी और सीईओ चंद्रकांत सिंह ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य भारत में 3x3 बास्केटबॉल को जमीनी स्तर से विकसित करना है. इसके तहत युवा खिलाड़ियों को खेल सीखने, प्रतिस्पर्धा करने और प्रतियोगिताओं के जरिए आगे बढ़ने के अवसर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि कंपनी खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता उपलब्ध कराना चाहती है, ताकि भारत से भविष्य के 3x3 चैंपियन तैयार किए जा सकें.
भारत को बड़े 3x3 बाजार के रूप में देख रहा टेरो
टेरो एंटरटेनमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर और संस्थापक ब्रायन एल. मार्कर ने भारत को 3x3 बास्केटबॉल के लिए दुनिया के सबसे बड़े अवसरों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी, खेलों के प्रति उत्साह और बदलती मनोरंजन संस्कृति देश को 3x3 के विस्तार के लिए एक आकर्षक बाजार बनाती है. उन्होंने कहा कि खेल, संगीत और क्रिएटर्स का संयोजन युवाओं को ऐसा अनुभव देता है, जिसमें वे सिर्फ दर्शक नहीं रहते, बल्कि एक कम्युनिटी का हिस्सा बनकर जुड़ते हैं.
खेल, संगीत और सोशल मीडिया का संगम
टेरो इंटरनेशनल के सीएमओ विकास टंडन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी खेल, संगीत, क्रिएटर्स, रील्स और पॉप कल्चर से तेजी से जुड़ रही है. ऐसे में 3x3 इन सभी क्षेत्रों को जोड़ने वाला फॉर्मेट बन सकता है. उनके मुताबिक, खेल की तेज रफ्तार और विजुअल अपील इसे सोशल मीडिया के लिए भी अनुकूल बनाती है. इससे दर्शकों को आकर्षित करने के साथ 3x3 के आसपास एक मजबूत कम्युनिटी तैयार करने की संभावना बढ़ती है.
FIBA ने भी जताया भरोसा
FIBA के 3x3 स्पोर्ट्स प्रेजेंटेशन मैनेजर टॉम सिवानमई ने कहा कि FIBA और टेरो के पास 3x3 के विकास को लेकर मजबूत विजन है. उन्होंने कहा कि टेरो को अंतरराष्ट्रीय 3x3 आयोजनों का अनुभव है और BFI के साथ मिलकर भारत में इस खेल के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया जा सकता है.
युवा आबादी से बड़े बाजार की उम्मीद
भारत की करीब 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है. टेरो का मानना है कि देश की युवा आबादी और खेल एवं मनोरंजन के प्रति बढ़ती दिलचस्पी 3x3 बास्केटबॉल को तेजी से लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
दिल्ली से शुरू होने वाला 3x3 क्वेस्ट इंडिया 2026 इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. कंपनी की योजना इसे केवल एक टूर्नामेंट तक सीमित रखने की नहीं है. टेरो भारतीय खिलाड़ियों और टीमों को वैश्विक 3x3 इकोसिस्टम से जोड़कर भारत को इस खेल के भविष्य के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की दिशा में काम करना चाहता है. टेरो एंटरटेनमेंट ने इस पहल के लिए बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) और दिल्ली बास्केटबॉल एसोसिएशन (DBA) के सहयोग के लिए आभार जताया है.
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन 39 पदकों के साथ किया. भारतीय दल 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीतकर स्वदेश लौट आए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया. भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते. इस बार मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जहां खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड सात स्वर्ण समेत कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रच दिया. अब भारत का ध्यान 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स पर है, जिसकी मेजबानी अहमदाबाद करेगा.
13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक जीते
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन 39 पदकों के साथ किया. भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते. कुल 38 भारतीय खिलाड़ी कम से कम एक पदक जीतकर स्वदेश लौटे. लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह दो पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय रहे. उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक अपने नाम किया.
मुक्केबाजों ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल साबित हुआ. भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत शामिल हैं. यह कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. खास बात यह रही कि पदक मुकाबले तक पहुंचने वाला हर भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने में सफल रहा.
भारत के लिए जैसमीन लम्बोरिया (महिला 57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (पुरुष 60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते.
वहीं, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहैन ने महिला 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता. जादुमणि सिंह (पुरुष 55 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90 किग्रा से अधिक) ने भी रजत पदक हासिल किया.
एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और पैरा स्पोर्ट्स में भी चमके भारतीय
एथलेटिक्स में ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में 85.83 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता. वहीं, यशवीर सिंह ने 84.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक हासिल किया.
वेटलिफ्टिंग में टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने महिला 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत का स्वर्ण पदक खाता खोला. जूडो में उन्नति शर्मा ने महिला 63 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता.
पैरा स्पोर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक जीते. सोमन राणा, शर्मिला धनखड़ और दिलीप गावित ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए.
दिल्ली और बर्मिंघम से अलग रहा ग्लासगो का प्रदर्शन
हालांकि ग्लासगो में भारत का पदक प्रदर्शन 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्ड 101 पदकों से काफी कम रहा. वहीं, बर्मिंघम 2022 में भारत ने 22 स्वर्ण समेत कुल 61 पदक जीते थे. हालांकि इस बार ग्लासगो में खेलों और पदक स्पर्धाओं की संख्या कम होने के कारण दोनों संस्करणों की सीधी तुलना उचित नहीं मानी जा रही है.
अब अहमदाबाद 2030 की तैयारी
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ ही भारत ने 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों का भी आगाज कर दिया है. नवंबर 2025 में मेजबानी के अधिकार मिलने के बाद अहमदाबाद 2030 के शताब्दी संस्करण की मेजबानी करेगा.
अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 से 17 खेलों को शामिल किए जाने की संभावना है. इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, टेबल टेनिस, बॉल्स, वेटलिफ्टिंग, जिम्नास्टिक, नेटबॉल और मुक्केबाजी की पुष्टि हो चुकी है. इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव और गुजरात पुलिस अकादमी के खेल परिसर सहित कई खेल अवसंरचना परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जिन्हें 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता और भारत को खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाते हुए इतिहास रच दिया है. मणिपुर की इस स्टार वेटलिफ्टर ने महिलाओं की 48 किलोग्राम कैटेगरी में खिताब का बचाव करते हुए लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड अपने नाम किया. इसके साथ ही वह लगातार तीन व्यक्तिगत कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं.
मणिपुर की रहने वाली चानू ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा. उन्होंने स्नैच कैटेगरी में दो बार कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा. पहले 82 किलोग्राम और फिर 85 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया. इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाते ही उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया. बढ़त अजेय होने के बाद उन्होंने आखिरी प्रयास नहीं करने का फैसला किया.
लगातार तीन गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय बनीं चानू
मीराबाई चानू अब लगातार तीन व्यक्तिगत कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं. उनसे पहले पहलवान विनेश फोगाट ने यह उपलब्धि हासिल की थी. चानू के शानदार करियर में अब ओलंपिक सिल्वर मेडल और वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब के साथ तीन कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल भी शामिल हो गए हैं.
भारत की मेडल टैली में इजाफा
चानू के गोल्ड के साथ भारत के पदकों की संख्या चार हो गई है. भारत के खाते में अब एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल है. शुरुआती दिनों के बाद भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर है. मेजबान ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड, 9 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज मेडल के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर है. वहीं इंग्लैंड और स्कॉटलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
वेटलिफ्टिंग में राजा मुथुपांडी ने जीता सिल्वर
भारत के वेटलिफ्टरों का शानदार प्रदर्शन जारी रहा. पुरुषों की 65 किलोग्राम कैटेगरी में तमिलनाडु के राजा मुथुपांडी ने सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया.
मुथुपांडी शुरुआत में 158 किलोग्राम के क्लीन एंड जर्क प्रयास में असफल रहे, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए 160 किलोग्राम वजन उठाया और दूसरा स्थान हासिल किया. मलेशिया के अज़निल बिन बिदिन मुहामद ने 299 किलोग्राम के कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता.
भारत के लिए अब तक चार मेडल
इससे पहले ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर भारत को पहला सामान्य वर्ग का पदक दिलाया था. उन्होंने स्नैच में कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया था. वहीं पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों की हेवीवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का खाता खोला था.
नीरज चोपड़ा समेत कई स्टार खिलाड़ी उतरेंगे मैदान में
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारत ने 122 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जो आठ सामान्य खेलों और पांच पैरा स्पोर्ट्स में हिस्सा ले रहा है. अभी कई बड़े भारतीय खिलाड़ी अपने अभियान की शुरुआत नहीं कर पाए हैं.
ओलंपिक जैवलिन थ्रो चैंपियन नीरज चोपड़ा आगे भारत की एथलेटिक्स चुनौती की अगुवाई करेंगे. इसके अलावा बॉक्सिंग, जूडो, स्विमिंग और जिम्नास्टिक्स में भी भारत को पदकों की उम्मीद है. टोक्यो ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं की 75 किलोग्राम कैटेगरी में क्वार्टर फाइनल में बाई मिलने के बाद कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है.
अर्जेंटीना की जीत के साथ फीफा विश्व रैंकिंग की शीर्ष चार टीमें, अर्जेंटीना, इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली. मुकाबले का फैसला 112वें मिनट में हुआ, जब जूलियन अल्वारेज ने शानदार लंबी दूरी का गोल दागकर अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई. इसके बाद अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में लाउतारो मार्टिनेज ने तीसरा गोल कर टीम की जीत पक्की कर दी. अब सेमीफाइनल में अर्जेंटीना का सामना इंग्लैंड से होगा. इंग्लैंड ने इससे पहले खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में नॉर्वे को 2-1 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी.
मैक एलिस्टर ने दिलाई शुरुआती बढ़त
अर्जेंटीना ने मैच की शानदार शुरुआत की और 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली. लियोनेल मेसी के बाएं छोर से लिए गए कॉर्नर पर एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने हेडर के जरिए गेंद को गोल में पहुंचाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई.
मेसी इस मुकाबले में गोल नहीं कर सके, जिसके साथ विश्व कप में लगातार नौ मैचों में गोल करने का उनका सिलसिला समाप्त हो गया. हालांकि, पूरे मैच में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौके बनाए और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई.
स्विट्जरलैंड ने की वापसी, फिर VAR ने बदला मैच
स्विट्जरलैंड ने 67वें मिनट में डैन एनडोये के गोल की बदौलत मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया. इसके कुछ मिनट बाद मैच का सबसे बड़ा विवाद सामने आया. लिएंड्रो परेडेस को शुरू में ब्रील एम्बोलो पर फाउल करने के लिए येलो कार्ड दिखाया गया था. लेकिन VAR समीक्षा में पाया गया कि एम्बोलो संपर्क होने से पहले ही गिर गए थे. चूंकि एम्बोलो को पहले ही एक येलो कार्ड मिल चुका था, इसलिए फीफा के "Mistaken Identity" प्रोटोकॉल के तहत दूसरा येलो कार्ड एम्बोलो को दे दिया गया.
दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद एम्बोलो को मैदान छोड़ना पड़ा और स्विट्जरलैंड 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया. विश्व कप के इतिहास में यह केवल दूसरा मौका था जब "Mistaken Identity" नियम का इस्तेमाल कर येलो कार्ड का फैसला बदला गया.
अल्वारेज और लाउतारो ने दिलाई जीत
एक खिलाड़ी अधिक होने के बावजूद अर्जेंटीना निर्धारित 90 मिनट में गोल नहीं कर सका और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया. 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज ने बॉक्स के बाहर से शानदार लंबी दूरी का शॉट लगाकर अर्जेंटीना को 2-1 की बढ़त दिलाई. इसके बाद जब स्विट्जरलैंड बराबरी की कोशिश में आगे बढ़ा, तो अतिरिक्त समय के अंतिम पलों में लाउतारो मार्टिनेज ने तीसरा गोल कर 3-1 की जीत सुनिश्चित कर दी.
लगातार 12 मैचों से अजेय है अर्जेंटीना
इस जीत के साथ अर्जेंटीना का फीफा विश्व कप में अजेय रहने का सिलसिला 12 मैचों तक पहुंच गया. मौजूदा चैंपियन टीम ने पूरे नॉकआउट चरण में कठिन मुकाबलों का सामना किया है. क्वार्टर फाइनल से पहले उसे केप वर्डे के खिलाफ अतिरिक्त समय तक खेलना पड़ा था, जबकि प्री-क्वार्टर फाइनल में मिस्र के खिलाफ दो गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी कर जीत दर्ज की थी.
सेमीफाइनल में दुनिया की टॉप-4 टीमें
अर्जेंटीना की जीत के साथ फीफा विश्व रैंकिंग की शीर्ष चार टीमें, अर्जेंटीना, इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं. अब फुटबॉल प्रशंसकों को अंतिम चार में बेहद रोमांचक मुकाबलों का इंतजार रहेगा.
कंपनी के अनुसार, उसके डिजिटल स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म ZEE5 पर टूर्नामेंट के उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान 60 लाख दर्शकों ने फीफा से जुड़ी सामग्री देखी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक खेल आयोजन फीफा विश्व कप (FIFA World Cup 2026) के शुरुआती सप्ताहांत में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) को बड़ी सफलता मिली है. कंपनी ने डिजिटल, टेलीविजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुल 10 करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंच बनाने का दावा किया है.
कंपनी के अनुसार, उसके डिजिटल स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म (ZEE5) पर टूर्नामेंट के उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान 60 लाख दर्शकों ने फीफा से जुड़ी सामग्री देखी. यह आंकड़ा वैश्विक फुटबॉल आयोजनों के प्रति भारतीय दर्शकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है.
सोशल मीडिया पर भी टूर्नामेंट को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर फीफा विश्व कप 2026 से जुड़ी सामग्री को 36 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए. वहीं, कंपनी के #Watchega अभियान ने 33 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई.
डिजिटल और टीवी प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत प्रदर्शन
कंपनी ने बताया कि 11 से 14 जून 2026 के बीच उद्घाटन सप्ताहांत में ZEE5 ने लाखों समवर्ती उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तकनीकी बाधा के सेवा प्रदान की. दर्शकों ने लाइव मैचों, हाइलाइट्स और स्टूडियो प्रोग्रामिंग में व्यापक रुचि दिखाई.
लाइव मैचों के दौरान औसतन प्रति दर्शक 190 मिनट से अधिक का एंगेजमेंट दर्ज किया गया, जिसमें उद्घाटन समारोह भी शामिल था. यह दर्शकों की लगातार बनी हुई रुचि और गहन सहभागिता को दर्शाता है.
दूसरी ओर, कंपनी के रैखिक स्पोर्ट्स चैनल Unite8 Sports ने भी टूर्नामेंट का निर्बाध प्रसारण सुनिश्चित किया. कंपनी का अनुमान है कि इन चैनलों की पहुंच देशभर के 2.5 करोड़ से अधिक घरों तक रही, जिससे टूर्नामेंट की दृश्यता और बढ़ी.
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फीफा विश्व कप 2026 के लिए सभी प्लेटफॉर्म्स पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्साहजनक है. डिजिटल और टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान देखने को मिला व्यापक एंगेजमेंट भारत में फुटबॉल के प्रति बढ़ते जुनून को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य इस वैश्विक खेल आयोजन को अधिकतम दर्शकों तक पहुंचाना और उन्हें निर्बाध व उच्च गुणवत्ता वाला अनुभव उपलब्ध कराना है. दर्शकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर प्लेटफॉर्म को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है.
दर्शकों के लिए विशेष अनुभव
फुटबॉल प्रशंसकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए ZEE5 ने लाइव मैच स्ट्रीमिंग के साथ स्टूडियो शो, विशेषज्ञ विश्लेषण और बहुभाषी कमेंट्री की सुविधा भी उपलब्ध कराई. इसके अलावा कंपनी ने विभिन्न सार्वजनिक स्क्रीनिंग ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है और कई शहरों में फैन पार्क तथा एक्सपीरिएंशियल ज़ोन आयोजित किए हैं, ताकि दर्शक टूर्नामेंट का रोमांच सामूहिक रूप से महसूस कर सकें.
आने वाले मैचों के साथ बढ़ सकती है दर्शकों की संख्या
कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा और बड़े मुकाबले सामने आएंगे, प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. Z का कहना है कि वह पूरे टूर्नामेंट के दौरान हर मैच और हर महत्वपूर्ण पल को देश के हर घर और हर स्क्रीन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था. वे एशियाई खेलों में शूटिंग में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के दिग्गज खेल प्रशासक और पूर्व निशानेबाज रणधीर सिंह का बुधवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. कुछ दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली. रणधीर सिंह भारतीय खेल जगत के सबसे सम्मानित चेहरों में गिने जाते थे और उन्होंने खिलाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासक तक की भूमिका में अहम योगदान दिया.
एशियाई खेलों में रचा था इतिहास
रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था. वे एशियाई खेलों में शूटिंग में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने थे. इस उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई. उन्होंने अपने खेल करियर के दौरान पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया. खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
खेल प्रशासन में भी निभाई बड़ी भूमिका
रणधीर सिंह केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली खेल प्रशासक भी थे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, भारतीय ओलंपिक संघ और विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी समेत कई प्रमुख संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष पद से हटे थे. वर्ष 2024 में वे इस पद पर चुने गए थे और एशियाई ओलंपिक परिषद का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बने थे. इसके अलावा उन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में उपाध्यक्ष की भूमिका भी निभाई थी.
खेल जगत ने दी श्रद्धांजलि
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने रणधीर सिंह के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “रणधीर सिंह जी के निधन की खबर से बेहद दुख हुआ. उन्होंने अपना पूरा जीवन खेलों को समर्पित किया. एक ओलंपियन, खेल प्रशासक और भारतीय व विश्व खेलों में बड़ा योगदान देने वाले व्यक्ति के रूप में उनकी विरासत हमेशा याद रखी जाएगी.”
भारतीय खेल जगत ने खोया बड़ा चेहरा
रणधीर सिंह का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है. खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास का अहम हिस्सा रहेगा. उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर है.
3 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्लो ओवर रेट का नियम तोड़ा. इससे पहले भी गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में उन पर इसी वजह से जुर्माना लगाया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मुकाबले के बाद पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर पर बड़ी कार्रवाई हुई है. दरअसल, स्लो ओवर रेट की गलती दोहराने पर बीसीसीआई ने उन पर ₹24 लाख का जुर्माना लगाया, जबकि पूरी टीम को भी आर्थिक सजा झेलनी पड़ी. जीत के बावजूद यह मुकाबला पंजाब के लिए विवादों में घिर गया.
लगातार दूसरी बार लगा जुर्माना
3 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्लो ओवर रेट का नियम तोड़ा. इससे पहले भी गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में उन पर इसी वजह से जुर्माना लगाया गया था. लगातार दूसरी बार हुई इस चूक ने टीम को सख्त सजा दिला दी. आईपीएल आचार संहिता के तहत दूसरी बार स्लो ओवर रेट का दोषी पाए जाने पर श्रेयस अय्यर पर ₹24 लाख का जुर्माना लगाया गया. यह उल्लंघन नियमों के आर्टिकल 2.22 के अंतर्गत आता है, जिसके तहत कप्तान को कड़ी सजा दी जाती है.
पूरी टीम को भी भुगतनी पड़ी सजा
सिर्फ कप्तान ही नहीं, बल्कि इम्पैक्ट प्लेयर समेत पूरी प्लेइंग इलेवन पर भी जुर्माना लगाया गया. टीम के सभी खिलाड़ियों की मैच फीस से ₹6 लाख या 25 प्रतिशत (जो भी कम हो) काटे जाएंगे. इस फैसले ने टीम के प्रदर्शन पर भी असर डालने की चर्चा शुरू कर दी है.
मैच में पंजाब की शानदार जीत
मैच की बात करें तो चेन्नई सूपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 209 रन बनाए. टीम की ओर से आयुष म्हात्रे ने 73 रन की तेज पारी खेली, जबकि शिवम दुबे ने नाबाद 45 रन बनाए और सरफराज खान ने 32 रन का योगदान दिया.
जवाब में पंजाब किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 210 रन का लक्ष्य 18.4 ओवर में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया. कप्तान श्रेयस अय्यर ने 50 रन की पारी खेली. प्रभसिमरन सिंह ने 43, प्रियांश आर्य ने 39 और कूपर कोनोली ने 36 रन बनाकर जीत में अहम भूमिका निभाई.
गेंदबाजों का प्रदर्शन
पंजाब की ओर से विजयकुमार विशक ने 2 विकेट लिए, जबकि जेवियर बार्टलेट, मार्को यानसन और युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला. वहीं चेन्नई की तरफ से मैट हेनरी और अंशुल कंबोज ने 2-2 विकेट झटके, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके.
पंजाब किंग्स ने मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर जीत जरूर हासिल की, लेकिन अनुशासनहीनता ने इस जीत की चमक फीकी कर दी. श्रेयस अय्यर और उनकी टीम के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचना जरूरी होगा, वरना सजा और भी कड़ी हो सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स इस टूर्नामेंट की सबसे पुरानी टीम है, जिसकी औसत उम्र 29.3 वर्ष है. इसके ठीक पीछे मुंबई इंडियंस हैं, जिनकी औसत उम्र 29.1 वर्ष है. यह दर्शाता है कि कुछ फ्रैंचाइजियों ने अनुभव, संयम और बड़े मैचों की समझ को प्राथमिकता दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
2026 के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और Rediffusion के ICYMI प्लेटफॉर्म की एक रिपोर्ट इस सीज़न की कहानी पर रोशनी डालती है: फ्रैंचाइजियों के बीच एक पीढ़ीगत अंतर, जहाँ अनुभव और युवा प्रतिभा केवल खिलाड़ियों की विशेषताएँ नहीं, बल्कि रणनीतिक दर्शन भी बन गए हैं. ‘IPL 2026 स्क्वाड्स, दो पीढ़ियों की कहानी’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब टीमों में उम्र का सामंजस्य केवल आकस्मिक नहीं रह गया है, बल्कि यह टीम रणनीति का केंद्र बन चुका है.
अनुभव बनाम युवा प्रतिभा
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स इस टूर्नामेंट की सबसे पुरानी टीम है, जिसकी औसत उम्र 29.3 वर्ष है. इसके ठीक पीछे मुंबई इंडियंस हैं, जिनकी औसत उम्र 29.1 वर्ष है. यह दर्शाता है कि कुछ फ्रैंचाइजियों ने अनुभव, संयम और बड़े मैचों की समझ को प्राथमिकता दी है.
इसके विपरीत, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमें सबसे युवा स्क्वाड्स के साथ मैदान में उतर रही हैं, जिनकी औसत उम्र 27.0 वर्ष है. इनकी रणनीति लंबी अवधि के दृष्टिकोण को दर्शाती है, कच्ची प्रतिभा, निडर क्रिकेट और भविष्य की क्षमता को महत्व देना.
कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात टाइटन्स (दोनों 28.9 वर्ष) तथा रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (28.6 वर्ष) जैसी टीमें संतुलन साध रही हैं, युवा और अनुभव को मिलाकर निरंतरता हासिल करने का प्रयास कर रही हैं.
चरम अंतर
रिपोर्ट में टीमों के भीतर उम्र के बड़े अंतर को भी उजागर किया गया है. चेन्नई सुपर किंग्स में एमएस धोनी (44.7 वर्ष) और आयुष म्हात्रे (18.7 वर्ष) के बीच उम्र का अंतर 26 साल है, जो लीग का सबसे बड़ा है. मुंबई इंडियंस में भी ऐसे अंतर हैं, जहाँ रोहित शर्मा एक ऐसे स्क्वाड का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें खिलाड़ी उनसे लगभग दो दशक छोटे हैं.
लीग के सबसे युवा खिलाड़ी हैं राजस्थान रॉयल्स के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जो इस नई पीढ़ी का प्रतीक हैं, जो पहले से ही प्रमुख मंच पर अपनी छाप छोड़ रही है. वहीं, विराट कोहली, सुनील नराइन और रविंद्र जडेजा जैसी वरिष्ठ खिलाड़ी अपनी टीमों के लिए निरंतर आधार बने हुए हैं, उम्र को चुनौती देते हुए अपनी पकड़ बनाए रख रहे हैं.
IPL 2026: केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों की टकराहट
ICYMI रिपोर्ट के अनुसार, यह सीजन सिर्फ मैचों का संग्रह नहीं है, बल्कि टाइमलाइन का संघर्ष है. “कुछ फ्रैंचाइजियों ने विरासत को चुना, कुछ ने संभावनाओं को. और अधिकांश ने दोनों को मिलाकर इसे संतुलन कहा.” दस टीमों, विभिन्न रणनीतियों और ड्रेसिंग रूम में पीढ़ियों के अंतर के साथ, IPL 2026 सिर्फ क्रिकेट की रोमांचक कार्रवाई ही नहीं लाएगा, बल्कि यह देखने का मौका भी देगा कि आखिरकार कौन सी पीढ़ी बाजी मारती है.