क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कॉमेंट्री की दुनिया में 40 साल पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर उन्होंने बताया है कि उन्हें पहले मैच के लिए कितना पैसा मिला था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
आप क्रिकेट का शौक रखते हों या नहीं, लेकिन आपने हर्षा भोगले (Harsha Bhogle) का नाम जरूर सुना होगा. हर्षा दुनिया के शानदार क्रिकेट कॉमेंटेटर्स में शुमार हैं, वह क्रिकेट से जुड़े विज्ञापनों में भी नजर आ जाते हैं. अपने एक अलग अंदाज के चलते उन्हें काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. हर्षा भोगले को कॉमेंट्री की दुनिया में काम करते हुए 40 साल हो गए हैं. इस मौके पर उन्होंने अपनी पहली पेमेंट की स्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. उन्होंने बताया है कि ODI कॉमेंट्री के लिए दूरदर्शन से उन्हें कितना पैसा मिला था.
40 years ago today. My first ODI. Still remember that young man trying frantically to get opportunities. And a kind producer from DD-Hyd giving him this break. I sat on a roller the previous evening, in a simple t-shirt, doing the curtain raiser. And got two commentary stints the… pic.twitter.com/wV0bj382Xv
— Harsha Bhogle (@bhogleharsha) September 10, 2023
इस तरह मिला पहला ब्रेक
हर्षा भोगले ने बताया है कि उन्हें कॉमेंट्री में पहला ब्रेक 10 सितंबर, साल 1883 को मिला था. भोगले ने अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर अकाउंट पर दूरदर्शन से मिले इन्विटेशन की स्लिप शेयर की है. इसके साथ उन्होंने लिखा है - आज से चार दशक (40 साल) पहले इसी दिन मुझे अपना पहला ODI कॉमेंट्री ब्रेक मिला था. मुझे आज भी याद है कि मैं अवसरों की तलाश में था और DD-हैदराबाद प्रड्यूसर ने मुझे ये मौका दिया. मैच से एक शाम पहले, मैं सामान्य टी-शर्ट पहनकर रोलर पर बैठा था. अगले दिन, मेरे पास दो कॉमेंट्री स्टिंट्स थे. अगले 14 महीनों में मुझे दो और ODI और एक टेस्ट मैच की कॉमेंट्री का अवसर मिला. मैं इसके लिए सभी का आभारी रहूंगा.
हर तरफ से मिल रही बधाई
भोगले ने दूरदर्शन से मिले इन्विटेशन की जो स्लिप शेयर की है, उसमें उनकी फीस का भी जिक्र है. इस लिप पर ऊपर दूरदर्शन लिखा है और नीचे फीस के तौर पर 350 रुपए अंकित हैं. जिसका मतलब है कि हर्षा को अपनी पहली कॉमेंट्री के लिए 350 रुपए मिले थे. ये वनडे मैच भारत और पाकिस्तान के बीच 10 सितंबर, 1983 को खेला गया था. उस दिन से आज तक हर्षा भोगले अपनी कॉमेंट्री से सभी को प्रभावित करते आ रहे हैं. अपने करियर के 40 साल पूरा करने के मौके पर हर्षा को अपने फैंस और शुभचिंतकों से बधाई मिल रही है.
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन 39 पदकों के साथ किया. भारतीय दल 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीतकर स्वदेश लौट आए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया. भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते. इस बार मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जहां खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड सात स्वर्ण समेत कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रच दिया. अब भारत का ध्यान 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स पर है, जिसकी मेजबानी अहमदाबाद करेगा.
13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक जीते
भारत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन 39 पदकों के साथ किया. भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते. कुल 38 भारतीय खिलाड़ी कम से कम एक पदक जीतकर स्वदेश लौटे. लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह दो पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय रहे. उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक अपने नाम किया.
मुक्केबाजों ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल साबित हुआ. भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत शामिल हैं. यह कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. खास बात यह रही कि पदक मुकाबले तक पहुंचने वाला हर भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने में सफल रहा.
भारत के लिए जैसमीन लम्बोरिया (महिला 57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (पुरुष 60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते.
वहीं, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहैन ने महिला 75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता. जादुमणि सिंह (पुरुष 55 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90 किग्रा से अधिक) ने भी रजत पदक हासिल किया.
एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और पैरा स्पोर्ट्स में भी चमके भारतीय
एथलेटिक्स में ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में 85.83 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता. वहीं, यशवीर सिंह ने 84.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक हासिल किया.
वेटलिफ्टिंग में टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने महिला 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत का स्वर्ण पदक खाता खोला. जूडो में उन्नति शर्मा ने महिला 63 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता.
पैरा स्पोर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक जीते. सोमन राणा, शर्मिला धनखड़ और दिलीप गावित ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए.
दिल्ली और बर्मिंघम से अलग रहा ग्लासगो का प्रदर्शन
हालांकि ग्लासगो में भारत का पदक प्रदर्शन 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के रिकॉर्ड 101 पदकों से काफी कम रहा. वहीं, बर्मिंघम 2022 में भारत ने 22 स्वर्ण समेत कुल 61 पदक जीते थे. हालांकि इस बार ग्लासगो में खेलों और पदक स्पर्धाओं की संख्या कम होने के कारण दोनों संस्करणों की सीधी तुलना उचित नहीं मानी जा रही है.
अब अहमदाबाद 2030 की तैयारी
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ ही भारत ने 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों का भी आगाज कर दिया है. नवंबर 2025 में मेजबानी के अधिकार मिलने के बाद अहमदाबाद 2030 के शताब्दी संस्करण की मेजबानी करेगा.
अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 से 17 खेलों को शामिल किए जाने की संभावना है. इनमें एथलेटिक्स, तैराकी, टेबल टेनिस, बॉल्स, वेटलिफ्टिंग, जिम्नास्टिक, नेटबॉल और मुक्केबाजी की पुष्टि हो चुकी है. इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव और गुजरात पुलिस अकादमी के खेल परिसर सहित कई खेल अवसंरचना परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, जिन्हें 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता और भारत को खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाते हुए इतिहास रच दिया है. मणिपुर की इस स्टार वेटलिफ्टर ने महिलाओं की 48 किलोग्राम कैटेगरी में खिताब का बचाव करते हुए लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड अपने नाम किया. इसके साथ ही वह लगातार तीन व्यक्तिगत कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं.
मणिपुर की रहने वाली चानू ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा बनाए रखा. उन्होंने स्नैच कैटेगरी में दो बार कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा. पहले 82 किलोग्राम और फिर 85 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया. इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाते ही उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया. बढ़त अजेय होने के बाद उन्होंने आखिरी प्रयास नहीं करने का फैसला किया.
लगातार तीन गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय बनीं चानू
मीराबाई चानू अब लगातार तीन व्यक्तिगत कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं. उनसे पहले पहलवान विनेश फोगाट ने यह उपलब्धि हासिल की थी. चानू के शानदार करियर में अब ओलंपिक सिल्वर मेडल और वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब के साथ तीन कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल भी शामिल हो गए हैं.
भारत की मेडल टैली में इजाफा
चानू के गोल्ड के साथ भारत के पदकों की संख्या चार हो गई है. भारत के खाते में अब एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल है. शुरुआती दिनों के बाद भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर है. मेजबान ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड, 9 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज मेडल के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर है. वहीं इंग्लैंड और स्कॉटलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
वेटलिफ्टिंग में राजा मुथुपांडी ने जीता सिल्वर
भारत के वेटलिफ्टरों का शानदार प्रदर्शन जारी रहा. पुरुषों की 65 किलोग्राम कैटेगरी में तमिलनाडु के राजा मुथुपांडी ने सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया.
मुथुपांडी शुरुआत में 158 किलोग्राम के क्लीन एंड जर्क प्रयास में असफल रहे, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए 160 किलोग्राम वजन उठाया और दूसरा स्थान हासिल किया. मलेशिया के अज़निल बिन बिदिन मुहामद ने 299 किलोग्राम के कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता.
भारत के लिए अब तक चार मेडल
इससे पहले ऋषिकांत सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर भारत को पहला सामान्य वर्ग का पदक दिलाया था. उन्होंने स्नैच में कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया था. वहीं पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुषों की हेवीवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का खाता खोला था.
नीरज चोपड़ा समेत कई स्टार खिलाड़ी उतरेंगे मैदान में
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारत ने 122 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जो आठ सामान्य खेलों और पांच पैरा स्पोर्ट्स में हिस्सा ले रहा है. अभी कई बड़े भारतीय खिलाड़ी अपने अभियान की शुरुआत नहीं कर पाए हैं.
ओलंपिक जैवलिन थ्रो चैंपियन नीरज चोपड़ा आगे भारत की एथलेटिक्स चुनौती की अगुवाई करेंगे. इसके अलावा बॉक्सिंग, जूडो, स्विमिंग और जिम्नास्टिक्स में भी भारत को पदकों की उम्मीद है. टोक्यो ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं की 75 किलोग्राम कैटेगरी में क्वार्टर फाइनल में बाई मिलने के बाद कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर लिया है.
अर्जेंटीना की जीत के साथ फीफा विश्व रैंकिंग की शीर्ष चार टीमें, अर्जेंटीना, इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड को अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली. मुकाबले का फैसला 112वें मिनट में हुआ, जब जूलियन अल्वारेज ने शानदार लंबी दूरी का गोल दागकर अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई. इसके बाद अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में लाउतारो मार्टिनेज ने तीसरा गोल कर टीम की जीत पक्की कर दी. अब सेमीफाइनल में अर्जेंटीना का सामना इंग्लैंड से होगा. इंग्लैंड ने इससे पहले खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में नॉर्वे को 2-1 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी.
मैक एलिस्टर ने दिलाई शुरुआती बढ़त
अर्जेंटीना ने मैच की शानदार शुरुआत की और 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली. लियोनेल मेसी के बाएं छोर से लिए गए कॉर्नर पर एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने हेडर के जरिए गेंद को गोल में पहुंचाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई.
मेसी इस मुकाबले में गोल नहीं कर सके, जिसके साथ विश्व कप में लगातार नौ मैचों में गोल करने का उनका सिलसिला समाप्त हो गया. हालांकि, पूरे मैच में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौके बनाए और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई.
स्विट्जरलैंड ने की वापसी, फिर VAR ने बदला मैच
स्विट्जरलैंड ने 67वें मिनट में डैन एनडोये के गोल की बदौलत मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया. इसके कुछ मिनट बाद मैच का सबसे बड़ा विवाद सामने आया. लिएंड्रो परेडेस को शुरू में ब्रील एम्बोलो पर फाउल करने के लिए येलो कार्ड दिखाया गया था. लेकिन VAR समीक्षा में पाया गया कि एम्बोलो संपर्क होने से पहले ही गिर गए थे. चूंकि एम्बोलो को पहले ही एक येलो कार्ड मिल चुका था, इसलिए फीफा के "Mistaken Identity" प्रोटोकॉल के तहत दूसरा येलो कार्ड एम्बोलो को दे दिया गया.
दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद एम्बोलो को मैदान छोड़ना पड़ा और स्विट्जरलैंड 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया. विश्व कप के इतिहास में यह केवल दूसरा मौका था जब "Mistaken Identity" नियम का इस्तेमाल कर येलो कार्ड का फैसला बदला गया.
अल्वारेज और लाउतारो ने दिलाई जीत
एक खिलाड़ी अधिक होने के बावजूद अर्जेंटीना निर्धारित 90 मिनट में गोल नहीं कर सका और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया. 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज ने बॉक्स के बाहर से शानदार लंबी दूरी का शॉट लगाकर अर्जेंटीना को 2-1 की बढ़त दिलाई. इसके बाद जब स्विट्जरलैंड बराबरी की कोशिश में आगे बढ़ा, तो अतिरिक्त समय के अंतिम पलों में लाउतारो मार्टिनेज ने तीसरा गोल कर 3-1 की जीत सुनिश्चित कर दी.
लगातार 12 मैचों से अजेय है अर्जेंटीना
इस जीत के साथ अर्जेंटीना का फीफा विश्व कप में अजेय रहने का सिलसिला 12 मैचों तक पहुंच गया. मौजूदा चैंपियन टीम ने पूरे नॉकआउट चरण में कठिन मुकाबलों का सामना किया है. क्वार्टर फाइनल से पहले उसे केप वर्डे के खिलाफ अतिरिक्त समय तक खेलना पड़ा था, जबकि प्री-क्वार्टर फाइनल में मिस्र के खिलाफ दो गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी कर जीत दर्ज की थी.
सेमीफाइनल में दुनिया की टॉप-4 टीमें
अर्जेंटीना की जीत के साथ फीफा विश्व रैंकिंग की शीर्ष चार टीमें, अर्जेंटीना, इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं. अब फुटबॉल प्रशंसकों को अंतिम चार में बेहद रोमांचक मुकाबलों का इंतजार रहेगा.
कंपनी के अनुसार, उसके डिजिटल स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म ZEE5 पर टूर्नामेंट के उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान 60 लाख दर्शकों ने फीफा से जुड़ी सामग्री देखी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक खेल आयोजन फीफा विश्व कप (FIFA World Cup 2026) के शुरुआती सप्ताहांत में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) को बड़ी सफलता मिली है. कंपनी ने डिजिटल, टेलीविजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुल 10 करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंच बनाने का दावा किया है.
कंपनी के अनुसार, उसके डिजिटल स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म (ZEE5) पर टूर्नामेंट के उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान 60 लाख दर्शकों ने फीफा से जुड़ी सामग्री देखी. यह आंकड़ा वैश्विक फुटबॉल आयोजनों के प्रति भारतीय दर्शकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है.
सोशल मीडिया पर भी टूर्नामेंट को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर फीफा विश्व कप 2026 से जुड़ी सामग्री को 36 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए. वहीं, कंपनी के #Watchega अभियान ने 33 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई.
डिजिटल और टीवी प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत प्रदर्शन
कंपनी ने बताया कि 11 से 14 जून 2026 के बीच उद्घाटन सप्ताहांत में ZEE5 ने लाखों समवर्ती उपयोगकर्ताओं को बिना किसी तकनीकी बाधा के सेवा प्रदान की. दर्शकों ने लाइव मैचों, हाइलाइट्स और स्टूडियो प्रोग्रामिंग में व्यापक रुचि दिखाई.
लाइव मैचों के दौरान औसतन प्रति दर्शक 190 मिनट से अधिक का एंगेजमेंट दर्ज किया गया, जिसमें उद्घाटन समारोह भी शामिल था. यह दर्शकों की लगातार बनी हुई रुचि और गहन सहभागिता को दर्शाता है.
दूसरी ओर, कंपनी के रैखिक स्पोर्ट्स चैनल Unite8 Sports ने भी टूर्नामेंट का निर्बाध प्रसारण सुनिश्चित किया. कंपनी का अनुमान है कि इन चैनलों की पहुंच देशभर के 2.5 करोड़ से अधिक घरों तक रही, जिससे टूर्नामेंट की दृश्यता और बढ़ी.
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फीफा विश्व कप 2026 के लिए सभी प्लेटफॉर्म्स पर मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्साहजनक है. डिजिटल और टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर उद्घाटन सप्ताहांत के दौरान देखने को मिला व्यापक एंगेजमेंट भारत में फुटबॉल के प्रति बढ़ते जुनून को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य इस वैश्विक खेल आयोजन को अधिकतम दर्शकों तक पहुंचाना और उन्हें निर्बाध व उच्च गुणवत्ता वाला अनुभव उपलब्ध कराना है. दर्शकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर प्लेटफॉर्म को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है.
दर्शकों के लिए विशेष अनुभव
फुटबॉल प्रशंसकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए ZEE5 ने लाइव मैच स्ट्रीमिंग के साथ स्टूडियो शो, विशेषज्ञ विश्लेषण और बहुभाषी कमेंट्री की सुविधा भी उपलब्ध कराई. इसके अलावा कंपनी ने विभिन्न सार्वजनिक स्क्रीनिंग ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है और कई शहरों में फैन पार्क तथा एक्सपीरिएंशियल ज़ोन आयोजित किए हैं, ताकि दर्शक टूर्नामेंट का रोमांच सामूहिक रूप से महसूस कर सकें.
आने वाले मैचों के साथ बढ़ सकती है दर्शकों की संख्या
कंपनी का मानना है कि जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा और बड़े मुकाबले सामने आएंगे, प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. Z का कहना है कि वह पूरे टूर्नामेंट के दौरान हर मैच और हर महत्वपूर्ण पल को देश के हर घर और हर स्क्रीन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था. वे एशियाई खेलों में शूटिंग में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के दिग्गज खेल प्रशासक और पूर्व निशानेबाज रणधीर सिंह का बुधवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. कुछ दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली. रणधीर सिंह भारतीय खेल जगत के सबसे सम्मानित चेहरों में गिने जाते थे और उन्होंने खिलाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासक तक की भूमिका में अहम योगदान दिया.
एशियाई खेलों में रचा था इतिहास
रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था. वे एशियाई खेलों में शूटिंग में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने थे. इस उपलब्धि ने भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई. उन्होंने अपने खेल करियर के दौरान पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया. खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
खेल प्रशासन में भी निभाई बड़ी भूमिका
रणधीर सिंह केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली खेल प्रशासक भी थे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, भारतीय ओलंपिक संघ और विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी समेत कई प्रमुख संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष पद से हटे थे. वर्ष 2024 में वे इस पद पर चुने गए थे और एशियाई ओलंपिक परिषद का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बने थे. इसके अलावा उन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में उपाध्यक्ष की भूमिका भी निभाई थी.
खेल जगत ने दी श्रद्धांजलि
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने रणधीर सिंह के निधन पर गहरा दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “रणधीर सिंह जी के निधन की खबर से बेहद दुख हुआ. उन्होंने अपना पूरा जीवन खेलों को समर्पित किया. एक ओलंपियन, खेल प्रशासक और भारतीय व विश्व खेलों में बड़ा योगदान देने वाले व्यक्ति के रूप में उनकी विरासत हमेशा याद रखी जाएगी.”
भारतीय खेल जगत ने खोया बड़ा चेहरा
रणधीर सिंह का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है. खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास का अहम हिस्सा रहेगा. उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर है.
3 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्लो ओवर रेट का नियम तोड़ा. इससे पहले भी गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में उन पर इसी वजह से जुर्माना लगाया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मुकाबले के बाद पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर पर बड़ी कार्रवाई हुई है. दरअसल, स्लो ओवर रेट की गलती दोहराने पर बीसीसीआई ने उन पर ₹24 लाख का जुर्माना लगाया, जबकि पूरी टीम को भी आर्थिक सजा झेलनी पड़ी. जीत के बावजूद यह मुकाबला पंजाब के लिए विवादों में घिर गया.
लगातार दूसरी बार लगा जुर्माना
3 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्लो ओवर रेट का नियम तोड़ा. इससे पहले भी गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में उन पर इसी वजह से जुर्माना लगाया गया था. लगातार दूसरी बार हुई इस चूक ने टीम को सख्त सजा दिला दी. आईपीएल आचार संहिता के तहत दूसरी बार स्लो ओवर रेट का दोषी पाए जाने पर श्रेयस अय्यर पर ₹24 लाख का जुर्माना लगाया गया. यह उल्लंघन नियमों के आर्टिकल 2.22 के अंतर्गत आता है, जिसके तहत कप्तान को कड़ी सजा दी जाती है.
पूरी टीम को भी भुगतनी पड़ी सजा
सिर्फ कप्तान ही नहीं, बल्कि इम्पैक्ट प्लेयर समेत पूरी प्लेइंग इलेवन पर भी जुर्माना लगाया गया. टीम के सभी खिलाड़ियों की मैच फीस से ₹6 लाख या 25 प्रतिशत (जो भी कम हो) काटे जाएंगे. इस फैसले ने टीम के प्रदर्शन पर भी असर डालने की चर्चा शुरू कर दी है.
मैच में पंजाब की शानदार जीत
मैच की बात करें तो चेन्नई सूपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 209 रन बनाए. टीम की ओर से आयुष म्हात्रे ने 73 रन की तेज पारी खेली, जबकि शिवम दुबे ने नाबाद 45 रन बनाए और सरफराज खान ने 32 रन का योगदान दिया.
जवाब में पंजाब किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 210 रन का लक्ष्य 18.4 ओवर में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया. कप्तान श्रेयस अय्यर ने 50 रन की पारी खेली. प्रभसिमरन सिंह ने 43, प्रियांश आर्य ने 39 और कूपर कोनोली ने 36 रन बनाकर जीत में अहम भूमिका निभाई.
गेंदबाजों का प्रदर्शन
पंजाब की ओर से विजयकुमार विशक ने 2 विकेट लिए, जबकि जेवियर बार्टलेट, मार्को यानसन और युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला. वहीं चेन्नई की तरफ से मैट हेनरी और अंशुल कंबोज ने 2-2 विकेट झटके, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके.
पंजाब किंग्स ने मैदान पर शानदार प्रदर्शन कर जीत जरूर हासिल की, लेकिन अनुशासनहीनता ने इस जीत की चमक फीकी कर दी. श्रेयस अय्यर और उनकी टीम के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचना जरूरी होगा, वरना सजा और भी कड़ी हो सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स इस टूर्नामेंट की सबसे पुरानी टीम है, जिसकी औसत उम्र 29.3 वर्ष है. इसके ठीक पीछे मुंबई इंडियंस हैं, जिनकी औसत उम्र 29.1 वर्ष है. यह दर्शाता है कि कुछ फ्रैंचाइजियों ने अनुभव, संयम और बड़े मैचों की समझ को प्राथमिकता दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
2026 के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और Rediffusion के ICYMI प्लेटफॉर्म की एक रिपोर्ट इस सीज़न की कहानी पर रोशनी डालती है: फ्रैंचाइजियों के बीच एक पीढ़ीगत अंतर, जहाँ अनुभव और युवा प्रतिभा केवल खिलाड़ियों की विशेषताएँ नहीं, बल्कि रणनीतिक दर्शन भी बन गए हैं. ‘IPL 2026 स्क्वाड्स, दो पीढ़ियों की कहानी’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब टीमों में उम्र का सामंजस्य केवल आकस्मिक नहीं रह गया है, बल्कि यह टीम रणनीति का केंद्र बन चुका है.
अनुभव बनाम युवा प्रतिभा
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली कैपिटल्स इस टूर्नामेंट की सबसे पुरानी टीम है, जिसकी औसत उम्र 29.3 वर्ष है. इसके ठीक पीछे मुंबई इंडियंस हैं, जिनकी औसत उम्र 29.1 वर्ष है. यह दर्शाता है कि कुछ फ्रैंचाइजियों ने अनुभव, संयम और बड़े मैचों की समझ को प्राथमिकता दी है.
इसके विपरीत, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमें सबसे युवा स्क्वाड्स के साथ मैदान में उतर रही हैं, जिनकी औसत उम्र 27.0 वर्ष है. इनकी रणनीति लंबी अवधि के दृष्टिकोण को दर्शाती है, कच्ची प्रतिभा, निडर क्रिकेट और भविष्य की क्षमता को महत्व देना.
कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात टाइटन्स (दोनों 28.9 वर्ष) तथा रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (28.6 वर्ष) जैसी टीमें संतुलन साध रही हैं, युवा और अनुभव को मिलाकर निरंतरता हासिल करने का प्रयास कर रही हैं.
चरम अंतर
रिपोर्ट में टीमों के भीतर उम्र के बड़े अंतर को भी उजागर किया गया है. चेन्नई सुपर किंग्स में एमएस धोनी (44.7 वर्ष) और आयुष म्हात्रे (18.7 वर्ष) के बीच उम्र का अंतर 26 साल है, जो लीग का सबसे बड़ा है. मुंबई इंडियंस में भी ऐसे अंतर हैं, जहाँ रोहित शर्मा एक ऐसे स्क्वाड का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें खिलाड़ी उनसे लगभग दो दशक छोटे हैं.
लीग के सबसे युवा खिलाड़ी हैं राजस्थान रॉयल्स के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जो इस नई पीढ़ी का प्रतीक हैं, जो पहले से ही प्रमुख मंच पर अपनी छाप छोड़ रही है. वहीं, विराट कोहली, सुनील नराइन और रविंद्र जडेजा जैसी वरिष्ठ खिलाड़ी अपनी टीमों के लिए निरंतर आधार बने हुए हैं, उम्र को चुनौती देते हुए अपनी पकड़ बनाए रख रहे हैं.
IPL 2026: केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों की टकराहट
ICYMI रिपोर्ट के अनुसार, यह सीजन सिर्फ मैचों का संग्रह नहीं है, बल्कि टाइमलाइन का संघर्ष है. “कुछ फ्रैंचाइजियों ने विरासत को चुना, कुछ ने संभावनाओं को. और अधिकांश ने दोनों को मिलाकर इसे संतुलन कहा.” दस टीमों, विभिन्न रणनीतियों और ड्रेसिंग रूम में पीढ़ियों के अंतर के साथ, IPL 2026 सिर्फ क्रिकेट की रोमांचक कार्रवाई ही नहीं लाएगा, बल्कि यह देखने का मौका भी देगा कि आखिरकार कौन सी पीढ़ी बाजी मारती है.
पहले चरण के मैच देश के कई प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे. इनमें बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, गुवाहाटी और मुल्लांपुर शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के पहले चरण का कार्यक्रम जारी कर दिया है. इस सीजन का पहला मुकाबला 28 मार्च को खेला जाएगा. आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस बार टूर्नामेंट को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है. पहले चरण में 28 मार्च से 12 अप्रैल के बीच कुल 20 मैच खेले जाएंगे.
28 मार्च को होगा सीजन का पहला मुकाबला
IPL 2026 का उद्घाटन मुकाबला 28 मार्च को बेंगलुरु में खेला जाएगा. इस मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का सामना सनराइजर्स हैदराबाद से होगा. यह मुकाबला नए सीजन की शुरुआत करेगा और क्रिकेट प्रशंसकों के लिए रोमांचक सीजन की नींव रखेगा.
दूसरे दिन मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने
टूर्नामेंट के दूसरे दिन यानी 29 मार्च को पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस अपने घरेलू मैदान पर कोलकाता नाइट राइडर्स से भिड़ेगी. वहीं 30 मार्च को राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच गुवाहाटी में मुकाबला खेला जाएगा.
कई शहरों में खेले जाएंगे पहले चरण के मुकाबले
पहले चरण के मैच देश के कई प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे. इनमें बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, गुवाहाटी और मुल्लांपुर शामिल हैं. इससे अलग-अलग शहरों के दर्शकों को लाइव मुकाबलों का आनंद लेने का मौका मिलेगा.
चुनावों के कारण दो हिस्सों में होगा टूर्नामेंट
BCCI के अनुसार, आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए इस बार IPL को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है. हालांकि टूर्नामेंट के दूसरे चरण की तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है.
IPL 2026 होगा अब तक का सबसे बड़ा सीजन
IPL 2026 टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे बड़ा सीजन होगा. इस बार कुल 84 मुकाबले खेले जाएंगे, जो पहले के मुकाबले अधिक हैं. इससे लीग का रोमांच और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
RCB करेगी खिताब बचाने की कोशिश
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु इस सीजन में डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरेगी. टीम ने 2025 में पहली बार IPL खिताब जीता था. जब उसने फाइनल में पंजाब किंग्स को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी.
कहां देख सकेंगे मैच
IPL 2026 के मैचों का डिजिटल प्रसारण जियोहॉटस्टार प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा. जबकि टेलीविजन पर इसका प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा. पहले चरण के मुकाबलों के लिए टिकट बिक्री भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है.
टी20 वर्ल्ड कप 2026 आक्रामक बल्लेबाजी, रणनीतिक गेंदबाजी और करीबी मुकाबलों के लिए याद किया जाएगा. इस टूर्नामेंट के आंकड़े क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रोमांच को भी दर्शाते हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 ने क्रिकेट प्रशंसकों को रोमांचक मुकाबलों, आक्रामक बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी का शानदार मिश्रण देखने को दिया. रेडिफ्यूजन और ICYMI के एक विश्लेषण के अनुसार इस टूर्नामेंट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए, जिन्होंने इसे हाल के सबसे यादगार टी20 टूर्नामेंटों में शामिल कर दिया.
सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी
ICYMI की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. उन्होंने कुल 383 रन बनाए. उनके बाद न्यूजीलैंड के टिम सिफर्ट 326 रनों के साथ दूसरे स्थान पर रहे.
भारत के संजू सैमसन और ईशान किशन भी टूर्नामेंट के शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल रहे. सैमसन ने 321 रन बनाए, जबकि किशन ने 317 रन बनाए. न्यूजीलैंड के फिन एलन 298 रनों के साथ शीर्ष पांच बल्लेबाजों की सूची में शामिल रहे.
सिक्स हिटिंग में संजू सैमसन सबसे आगे
टूर्नामेंट में आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाज साफ दिखाई दिया. भारत के संजू सैमसन ने 24 छक्के लगाकर सिक्स हिटिंग की सूची में पहला स्थान हासिल किया. न्यूजीलैंड के फिन एलन ने 20 छक्के लगाए, जबकि वेस्टइंडीज के शिमरॉन हेटमायर ने 19 छक्के जड़े. ईशान किशन और साहिबजादा फरहान ने भी टूर्नामेंट में 18-18 छक्के लगाए.
गेंदबाजी में बुमराह और वरुण चक्रवर्ती का दबदबा
गेंदबाजी में भारत के जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे. दोनों ने टूर्नामेंट में 14-14 विकेट लिए. उनके बाद शैडली वैन शाल्कविक, आदिल राशिद और ब्लेसिंग मुजरबानी ने 13-13 विकेट लेकर प्रभावशाली प्रदर्शन किया.
इकॉनमी रेट में मोहम्मद मोहसिन सबसे किफायती
पाकिस्तान के मोहम्मद मोहसिन ने कम से कम 12 ओवर फेंकने वाले गेंदबाजों में सबसे बेहतर इकॉनमी रेट दर्ज की. उनका इकॉनमी रेट 6.00 रन प्रति ओवर रहा. भारत के जसप्रीत बुमराह 6.21 की इकॉनमी के साथ दूसरे स्थान पर रहे. वहीं मैथ्यू फोर्ड, मिचेल सैंटनर और राशिद खान ने भी किफायती गेंदबाजी का प्रदर्शन किया.
टीम प्रदर्शन में भारत सबसे आगे
टीम प्रदर्शन की बात करें तो भारत ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा आठ मैच जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया. दक्षिण अफ्रीका सात जीत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि इंग्लैंड ने छह मुकाबले जीते. वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड पांच-पांच जीत के साथ शीर्ष पांच टीमों में शामिल रहे.
कई हाई-स्कोरिंग मुकाबले भी देखने को मिलेटूर्नामेंट में कई हाई-स्कोरिंग मुकाबले भी देखने को मिले. भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 4 विकेट पर 256 रन बनाकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा स्कोर दर्ज किया. इसके अलावा भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 विकेट पर 255 रन बनाए. वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 6 विकेट पर 254 रन बनाए, जबकि भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 7 विकेट पर 253 रन बनाए.
भारतीय टीम ने फाइनल में धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन बनाए, जो T20 वर्ल्ड कप फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय क्रिकेट टीम ने 2026 के आईसीसी पुरुष T20 वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर इतिहास रच दिया. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए रिकॉर्ड 255 रन बनाए और फिर शानदार गेंदबाजी के दम पर न्यूजीलैंड को लक्ष्य से काफी दूर रोक दिया. इस जीत के साथ भारत T20 वर्ल्ड कप का खिताब सफलतापूर्वक बचाने वाली पहली टीम बन गया.
फाइनल में भारत का रिकॉर्ड स्कोर
भारतीय टीम ने फाइनल में धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन बनाए, जो T20 वर्ल्ड कप फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा.
इस जीत के साथ भारत मेजबान देश के रूप में अपने ही घर में पुरुष T20 वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला देश भी बन गया. इससे पहले भारत ने 2024 में रोहित शर्मा की कप्तानी में अमेरिका और वेस्टइंडीज में आयोजित टूर्नामेंट में खिताब जीता था.
सैमसन की धमाकेदार पारी
भारत की बड़ी जीत की नींव विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन की शानदार पारी ने रखी. उन्होंने 46 गेंदों में 89 रन बनाए और अपनी पारी में कई चौके-छक्के जड़कर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की जमकर खबर ली. सैमसन ने अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए सिर्फ 7.1 ओवर में 98 रन जोड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई. अभिषेक शर्मा ने भी 52 रन की उपयोगी पारी खेली. इसके बाद ईशान किशन ने 54 रन बनाकर रन गति को बनाए रखा. भारत ने 15 ओवर के भीतर ही 200 रन का आंकड़ा पार कर लिया, जिससे न्यूजीलैंड की टीम पूरी तरह दबाव में आ गई.
आखिरी ओवरों में तेज रन
न्यूजीलैंड के जेम्स नीशम ने 16वें ओवर में संजू सैमसन, ईशान किशन और कप्तान सूर्यकुमार यादव को आउट कर भारत को थोड़ा झटका जरूर दिया. हालांकि इसके बाद शिवम दुबे ने नाबाद 26 रन बनाकर टीम को मजबूत अंत दिलाया. उन्होंने आखिरी ओवर में ही 24 रन बटोर लिए. वहीं हार्दिक पांड्या ने 18 रन की पारी खेलकर भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचा दिया.
गेंदबाजों ने दिलाई शानदार जीत
256 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत खराब रही. भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाकर रखा और कीवी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया. फिन एलन और ग्लेन फिलिप्स जल्दी आउट हो गए. हालांकि टिम सिफर्ट ने 26 गेंदों में 52 रन बनाकर थोड़ी लड़ाई जरूर लड़ी, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे.
बुमराह और अक्षर की घातक गेंदबाजी
भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 रन देकर 4 विकेट लिए. वहीं ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने 27 रन देकर 3 विकेट झटके. इन दोनों गेंदबाजों की घातक गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड की पूरी टीम लक्ष्य से काफी दूर सिमट गई और भारत ने 96 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की.
न्यूजीलैंड की रणनीति भी पड़ी भारी
न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर का एक रणनीतिक फैसला भी टीम पर भारी पड़ा. बल्लेबाजों के अनुकूल पिच होने के बावजूद उन्होंने ऑफ स्पिनर कोल मैककॉन्ची को टीम में शामिल नहीं किया और उनकी जगह तेज गेंदबाज जैकब डफी को मौका दिया. हालांकि यह फैसला भारतीय बल्लेबाजों की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने ज्यादा असरदार साबित नहीं हुआ और मेजबान भारत ने शानदार प्रदर्शन के साथ खिताब अपने नाम कर लिया.