बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश, हाउसिंग इंसेंटिव और नीतिगत स्पष्टता की बड़ी उम्मीद है.
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रितु राणा
यूनियन बजट 2026 से पहले भारत का रियल एस्टेट सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है. बीते कुछ वर्षों में सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए भारी निवेश ने हाउसिंग डिमांड, प्राइस ट्रेंड और निवेश के पैटर्न को साफ तौर पर प्रभावित किया है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, स्मार्ट सिटी, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अर्बन मोबिलिटी जैसे प्रोजेक्ट्स अब केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत के रियल एस्टेट मैप को दोबारा गढ़ने का काम कर रहे हैं. ऐसे में बजट 2026 को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश और हाउसिंग बूम के बीच निर्णायक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगा रियल एस्टेट का स्वरूप
एसीई–एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड के सीएफओ राजन लूथरा कहते हैं, “बजट 2026 के पास भारत के शहरी और बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देने का बड़ा मौका है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरों में अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाओं पर लगातार जोर देने से न सिर्फ निर्माण गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि देश के रियल एस्टेट का स्वरूप भी बदलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी के चलते अब मांग सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से नए आवासीय और व्यावसायिक विकास केंद्र के रूप में उभर रहे हैं.”
वे आगे कहते हैं कि निर्माण उपकरण उद्योग के लिए परियोजनाओं का तेजी से आवंटन और समय पर पूरा होना बेहद अहम है. निजी निवेश को बढ़ाने के लिए जीएसटी को सरल बनाना, ऋण की आसान उपलब्धता और कम ब्याज दरें जरूरी होंगी. यदि बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और एक संतुलित व टिकाऊ रियल एस्टेट विकास चक्र तैयार होगा.
ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ का आधार
जे इन्फ्राटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित जांदू का मानना है, “बड़े स्तर का ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है और बजट 2026 इस रफ्तार को बनाए रखने में मदद कर सकता है. राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है ताकि माल ढुलाई की दक्षता बढ़े, लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और क्षेत्रीय जुड़ाव मजबूत हो.”
उनके अनुसार, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से छोटे शहरों और प्रमुख कॉरिडोर के आसपास हाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और कमर्शियल हब की मांग बढ़ेगी. डिजिटल प्लानिंग, अनुमोदन और एसेट मैनेजमेंट की दिशा में मजबूत कदम परियोजनाओं के निष्पादन को तेज करेंगे और विकास को अधिक संतुलित बनाएंगे.
अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग पर बजट से सबसे बड़ी उम्मीदें
क्रेडाई वेस्ट यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ी उम्मीद अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग को लेकर है. उन्होंने कहा कि होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने, आयकर की धारा 80सी और 24(बी) में राहत देने तथा स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स के लिए आसान और सस्ती फंडिंग व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही सेक्टर को एक संगठित उद्योग के रूप में मान्यता देने की दिशा में ठोस पहल और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस को लेकर स्पष्ट नीति बनने से निवेश का माहौल बेहतर होगा. विकास प्राधिकरणों के लंबित बकाया के समाधान से भी रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है.
टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव से रियल एस्टेट को मिलेगा मजबूती का आधार
शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप के अनुसार यूनियन बजट में प्रमोटरों और घर खरीदारों के लिए क्रमशः टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो रियल एस्टेट सेक्टर की मज़बूत रीढ़ हैं. टैक्स को आसान बनाना, रेगुलेटरी क्लैरिटी, रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेटस, परियोजना से जुड़े अप्रूवल का सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और निर्माण सामग्री पर इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे लंबे समय से रुके हुए सुधार सभी कैटेगरी में प्रोजेक्ट डेवलपमेंट को काफी बढ़ावा दे सकते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट एक-दूसरे से गहरा जुड़ाव रखते हैं, इसलिए योजनाबद्ध निवेश और उसके साथ सामाजिक तथा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी लोकेशन पर हाउसिंग और कमर्शियल ग्रोथ को तेज़ करने के लिए जरूरी है.
उद्योग का दर्जा और होम लोन ब्याज में बड़ी राहत की अपेक्षा
सुरेश गर्ग, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, निराला वर्ल्ड के अनुसार हर साल की तरह, इस साल भी हमें बजट से कुछ अपेक्षाएँ हैं. हम आशा करते हैं कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा प्रदान करे. इसके अलावा, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार होम लोन ब्याज कटौती की सीमा को वर्तमान 2 लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये कर दे. 100% कटौती होना तो और भी बेहतर होगा. इनके अलावा, हमें बजट से कोई अन्य अपेक्षा नहीं है.
टियर-2 शहरों में बिक्री का मजबूत संकेत
युगेन इंफ्रा के एमडी शीशराम यादव कहते हैं कि यूनियन बजट 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर नीति निरंतरता और बेहतर इम्प्लीमेंटेशन को लेकर आशावादी है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास खासतौर पर मेट्रो रेल, हाईवे और स्मार्ट सिटी ने 2025 से ही रेजिडेंशियल डिमांड को नया आकार देना शुरू कर दिया है.
वे बताते हैं कि Q1 2025 में भारत के टॉप 15 टियर-2 शहरों में घरों की बिक्री का कुल मूल्य सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर ₹40,443 करोड़ पहुंच गया. लखनऊ में यूनिट सेल्स 25 प्रतिशत और वैल्यू 48 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कोयंबटूर में 50 प्रतिशत से अधिक की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की गई. गांधीनगर, मोहाली, गोवा, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और कोच्चि जैसे शहरों में भी सकारात्मक ग्रोथ देखने को मिली.
उनके अनुसार, यह ट्रेंड होम बायर्स की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है. बजट 2026 से ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, अफोर्डेबल हाउसिंग इंसेंटिव, आसान हाउसिंग फाइनेंस और टैक्सेशन में स्पष्टता की उम्मीद है. साथ ही वे लक्ज़री हाउसिंग पर जीएसटी घटाने की भी मांग करते हैं.
लाइफस्टाइल और सेकेंड-होम हाउसिंग को मिलेगा बढ़ावा
ALYF के फाउंडर और सीईओ सौरभ वोहरा कहते हैं, “बजट 2026 से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक बनने की उम्मीद है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हाउसिंग डिमांड को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है. मेट्रो, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स टियर-2 और टियर-3 शहरों को रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के अगले ग्रोथ इंजन में बदल रहे हैं.”
उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते खरीदार अब बड़े शहरों से बाहर बेहतर जीवन गुणवत्ता और दीर्घकालिक मूल्य वाले घरों की तलाश कर रहे हैं. दो सेल्फ-ऑक्यूपाइड घरों पर नोटियोनल रेंटल इनकम की छूट ने सेकेंड-होम ओनरशिप को और व्यवहार्य बना दिया है.
नोएडा और एनसीआर में हाई-ग्रोथ कॉरिडोर
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं, “जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब आ रहे हैं, नोएडा का रियल एस्टेट मार्केट एक अहम मोड़ पर है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार ने इस इलाके को हाई-ग्रोथ रेजिडेंशियल और कमर्शियल कॉरिडोर बना दिया है.”
वे मानते हैं कि सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को ₹5 लाख तक बढ़ाने से डिमांड को मजबूती मिलेगी. मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट, रेंटल हाउसिंग और लास्ट-माइल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने वाली नीतियां नोएडा को एक आत्मनिर्भर अर्बन इकॉनमी बना सकती हैं.
स्टार्टअप्स, एमएसएमई और टेक्नोलॉजी पर फोकस
वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन गौरव सिंह कहते हैं कि बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई डेवलपर्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है. नियमों और मंजूरियों को आसान करने, होम और बिजनेस लोन को सुलभ बनाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने से प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे और लागत घटेगी. उनके अनुसार, ग्रीन बिल्डिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी और आर एंड डी के लिए प्रोत्साहन से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और सेक्टर की दीर्घकालिक प्लानिंग आसान होगी.
रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों पर नजर
एलांते ग्रुप की एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट हेनाम खनेजा कहती हैं, “यूनियन बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को ऐसे उपायों की उम्मीद है जो रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की डिमांड को मज़बूत करें. होम लोन इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स छूट मौजूदा ऊंची ब्याज दरों के बीच खरीदारों को राहत देगी.” वे ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट के लिए इंसेंटिव की जरूरत पर भी जोर देती हैं.
टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम डिमांड
रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल कहते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी और बदलती जीवनशैली के कारण टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम खरीदारों की रुचि तेजी से बढ़ रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, सरल मंजूरी प्रक्रियाएं और मजबूत शहरी नीतियां इन शहरों में मांग और कीमतों दोनों को टिकाऊ रूप से बढ़ा सकती हैं.
स्थिर मांग और चुनिंदा प्राइस ग्रोथ
उमिया बिल्डकॉन लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी अनिरुद्ध मेहता कहते हैं, “मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे और शहरी पुनर्विकास में हो रहा निवेश कनेक्टिविटी के साथ-साथ दीर्घकालिक संपत्ति मूल्यों को भी आकार दे रहा है.” उनके अनुसार, अच्छी कनेक्टिविटी वाले माइक्रो-मार्केट्स में चुनिंदा मूल्य वृद्धि की संभावना बनी हुई है, खासकर प्रीमियम और हाई-एंड सेगमेंट में.
बजट 2026 को “निर्णायक क्षण”
टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर के सीईओ अक्षय तनेजा कहते हैं, “भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब एक इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन हाउसिंग बूम में प्रवेश कर रहा है, जिससे बजट 2026 एक निर्णायक क्षण बन गया है क्योंकि यह नया कर व्यवस्था लागू होने से पहले अंतिम नीतिगत संकेत देगा (1 अप्रैल से लागू). दिल्ली मेट्रो का सोनीपत विस्तार, द्वारका एक्सप्रेसवे, कुंडली–मानेसर–पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे, यूईआर-2 और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स एनसीआर के बाहरी इलाकों और टियर-2 शहरों को आत्मनिर्भर रिहायशी और लक्जरी हाउसिंग हब में बदल रहे हैं, और भारत के स्मार्ट सिटी विजन को आगे बढ़ा रहे हैं.”
वे आगे कहते हैं सेक्टर को नीति स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जिनमें सस्ती हाउसिंग की कैप को ₹45 लाख से बढ़ाकर ₹70–75 लाख करना, उद्योग का दर्जा देना और हाउसिंग को राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में मान्यता देना शामिल है.
अक्षय तनेजा का कहना है कि इससे संस्थागत और वैश्विक पूंजी आकर्षित होगी, रोजगार बढ़ेगा और रियल एस्टेट का जीडीपी में 7–8% योगदान और मजबूत होगा. वे यह भी कहते हैं कि सरल कर संरचना, अनुक्रमणिका सहित पूंजीगत लाभ का पुनर्गठन, जीएसटी और स्टांप ड्यूटी की समानता, बेहतर होम लोन लाभ, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और मजबूत पीएमएवाई अर्बन 2.0 से अफोर्डेबिलिटी बढ़ेगी, प्रोजेक्ट डिलीवरी तेज होगी और अगले दशक के लिए भारत की रियल एस्टेट तस्वीर बदल जाएगी.
संरचनात्मक बदलाव और उभरते शहरों का नया रोल
प्रॉपर्टी पिस्टल के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष नारायण अग्रवाल का मानना है कि, “टियर-2 और टियर-3 शहरों में बूम भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जहां विकास अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आत्मनिर्भर शहरी अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है. इंदौर, सूरत, जयपुर, लखनऊ, कोयंबटूर, त्रिची और मोहाली जैसे शहर तेजी से उभर रहे हैं, जहां अफोर्डेबिलिटी, बेहतर जीवनशैली और मजबूत निवेश संभावनाएं एक साथ देखने को मिल रही हैं.”
वे आगे कहते हैं कि एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार, एयरपोर्ट, वंदे भारत ट्रेन और आईटी पार्क, जीसीसी तथा इंडस्ट्रियल क्लस्टर के जरिए रोजगार का विकेंद्रीकरण इन शहरों में हाउसिंग डिमांड को मजबूती दे रहा है. आंकड़ों का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि सस्ती हाउसिंग का हिस्सा 2021 में 37 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 18 प्रतिशत रह गया है, जबकि ₹1.5 करोड़ से ऊपर के लक्ज़री होम्स का शेयर बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया है. यह ट्रेंड कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और प्रीमियम डिमांड को दर्शाता है. बजट 2026 से सेक्टर को कर संरचना में सुधार, जीएसटी में कमी, स्टांप ड्यूटी में समानता और पहली बार खरीदारों के लिए बेहतर लाभ की उम्मीद है.
ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम डेवलपमेंट पर जोर
ब्राह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस आशीष शर्मा कहते हैं, “बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर में बनी हुई गति को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. हमें उम्मीद है कि बजट ऐसे कदम उठाएगा जो बुनियादी ढांचे के विकास को तेज करें, दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुंच आसान बनाएं और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल करके परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में मदद करें.”
उनके अनुसार, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी में लगातार पूंजी निवेश मेट्रो शहरों के साथ-साथ उभरते शहरों में भी आवास और ऑफिस स्पेस की मांग को बढ़ाता रहेगा. इसके अलावा, ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम निर्माण के लिए कर नियमों और प्रोत्साहनों में स्पष्टता से न केवल लागत दक्षता बढ़ेगी, बल्कि संपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक वैल्यू भी मजबूत होगी. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भविष्य के लिए तैयार शहरी वातावरण विकसित होगा.
फाइनेंसिंग और मांग आधारित ग्रोथ की उम्मीद
अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल का कहना है कि, “बजट 2026 से पहले हमें ऐसे कदमों की उम्मीद है जो उपभोक्ता-आधारित विकास को मजबूत करें, निवेशकों का भरोसा बढ़ाएं और आवासीय तथा कमर्शियल रियल एस्टेट में वित्तपोषण तक पहुंच को आसान बनाएं.”
वे बताते हैं कि सेक्टर को ऐसी पहलों की जरूरत है जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को तेज करें, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और खासकर उभरते शहरी बाजारों में परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करें. उनके अनुसार, मांग पक्ष पर ध्यान और शहरी बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश बाजार की गति बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. बजट 2026 यदि कुशल वित्तपोषण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाता है, तो यह पूरे देश में आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा दे सकता है.
नीतिगत संतुलन और निवेश योग्य इकोसिस्टम
लैंडमार्क ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन संदीप छिल्लर कहते हैं, “बजट 2026 से पहले हमारी उम्मीद है कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी. व्यक्तियों के लिए टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने से हाउसिंग डिमांड को मजबूती मिल सकती है, जबकि तर्कसंगत टैक्सेशन और नीतिगत स्पष्टता से ऑफिस और रिटेल डेवलपमेंट की व्यवहार्यता बढ़ेगी.”
वे आगे कहते हैं कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिए तेज़ मंजूरी प्रक्रिया लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याओं को कम कर सकती है. उनके अनुसार, ऐसा बजट जो खरीदारों की सामर्थ्य, प्रोजेक्ट निष्पादन की दक्षता और लॉन्ग-टर्म कैपिटल डिप्लॉयमेंट के बीच संतुलन बनाए, वह न केवल डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट को व्यवहार्य बनाएगा, बल्कि घरेलू और संस्थागत निवेश को भी आकर्षित करेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर बना आर्थिक विकास की रीढ़
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रास का कहना है, “इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भारत की आर्थिक ग्रोथ की रीढ़ बना हुआ है और देश को मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण इनेबलर है. बजट 2026 से पूरी उम्मीद है कि सरकार नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसी प्रमुख पहलों को और गति देगी.”
वे बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर आवंटन न केवल बनाए रखना, बल्कि उसे बढ़ाना भी जरूरी है, क्योंकि इसका रोजगार, औद्योगिक विकास और शहरी विकास पर मल्टीप्लायर प्रभाव साबित हो चुका है. ट्रांसपोर्टेशन, एनर्जी, पानी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ा हुआ निवेश, स्मार्ट सिटी, अफोर्डेबल हाउसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस के साथ, भारत की ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा. साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीति में स्पष्टता और सहयोग को वे बेहद जरूरी मानते हैं.
अगला विकास चरण: नियोजित शहरीकरण और मिक्स्ड-यूज टाउनशिप
M3M नोएडा के डायरेक्टर यश गर्ग ने कहा केंद्रीय बजट से पहले, हमें उम्मीद है कि नोएडा जैसे क्षेत्रों पर मजबूत नीतिगत फोकस देखने को मिलेगा, जो जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर और तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के चलते परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी ने नोएडा के रियल एस्टेट परिदृश्य को काफी हद तक नया आकार दिया है, और विकास के अगले चरण को नियोजित शहरीकरण, एकीकृत टाउनशिप और सुव्यवस्थित मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट्स के जरिये आगे बढ़ाया जाना चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि बजट में उभरते कॉरिडोर्स में घर खरीदारों के लिए बेहतर टैक्स लाभ पेश किए जाएंगे और रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा, जिससे दीर्घकालिक फाइनेंसिंग तक पहुंच संभव हो सकेगी और समग्र निवेशक भरोसा मजबूत होगा. मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और सतत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश से नोएडा एक आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शहरी गंतव्य के रूप में विकसित हो सकेगा.
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा और नीति में स्थिरता बनी रही, तो यह रियल एस्टेट को एक संतुलित, टिकाऊ और निवेश-आकर्षक इकोसिस्टम में बदलने का काम करेगा. इस तरह बजट 2026 भारत के रियल एस्टेट मैप को नए शहरों, नए कॉरिडोर और नए निवेश मॉडल के साथ फिर से लिख सकता है.
यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्जरी परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में 2.67 एकड़ का एक बड़ा भूमि पार्सल 35 करोड़ रुपये में खरीदा है. यह भूमि हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (HoABL) से अधिग्रहित की गई है. HoABL रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी पारदर्शी भूमि स्वामित्व प्रणाली के लिए जाना जाता है.
यह सौदा एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश यादव द्वारा संपन्न किया गया. यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्ज़री परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.
अमिताभ बच्चन और HoABL का जुड़ाव
गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन जनवरी 2024 में “द सरयू” परियोजना के पहले निवेशक बने थे. अयोध्या में यह उनका HoABL के साथ तीसरा निवेश है. यह कदम शहर के बढ़ते महत्व और कंपनी के मॉडल में उनके विश्वास को दर्शाता है.
अयोध्या में विकास और पर्यटन
पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या ने बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते पर्यटन के कारण तेज़ी से प्रगति की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले जहां 5.75 करोड़ श्रद्धालु आते थे, वहीं जनवरी से जून 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 23 करोड़ हो गई है. साल के अंत तक यह आंकड़ा 50 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
HoABL के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने इस निवेश पर कहा कि भूमि को दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, जो पीढ़ियों तक मूल्य बनाए रखती है. उन्होंने अयोध्या को एक ऐसी “विरासत” बताया, जहां आस्था और निवेश दोनों का संगम होता है.
बॉलीवुड सितारों का निवेश
अमिताभ बच्चन ने HoABL की अलीबाग स्थित “सोल डी अलीबाग” परियोजना में भी निवेश किया है. इस परियोजना में कृति सेनन और कार्तिक आर्यन जैसे बॉलीवुड सितारे भी शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, उनके 65% से अधिक ग्राहक सीईओ, सीएक्सओ और बैंकिंग, फार्मा व मनोरंजन जगत से जुड़े प्रतिष्ठित लोग हैं.
अयोध्या का तेजी से होता विकास इसे भारत के प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और रियल एस्टेट केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है. इससे निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है.
शुभ आरंभ के साथ गोदरेज साउथ एस्टेट में शुरू हुआ यह नया अध्याय दिखाता है कि अगर पर्यावरण को केंद्र में रखा जाए, तो शहरी जीवन न सिर्फ बेहतर बल्कि ज्यादा स्वस्थ और संतुलित भी बन सकता है.
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रितु राणा
तेजी से प्रदूषित होते शहरी माहौल और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच, रियल एस्टेट में अब पर्यावरण और वेलनेस को केंद्र में रखने वाली सोच आकार ले रही है. इसी दिशा में गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अपने सिग्नेचर होम-हैंडओवर कार्यक्रम ‘शुभ आरंभ’ के ज़रिये दिल्ली में ग्रीन और हेल्दी अर्बन लिविंग की नई मिसाल पेश की है.
गोदरेज प्रॉपर्टीज की नॉर्थ ज़ोन की सीईओ गीतिका त्रेहान के मुताबिक, “शुभ आरंभ केवल घरों की चाबी सौंपने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे गृहस्वामियों के लिए एक सुविचारित जीवन अनुभव की शुरुआत है. आज लक्ज़री की परिभाषा बदल रही है, जहां वेलनेस, सोच-समझकर किया गया डिज़ाइन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सबसे अहम हो गए हैं.”
शुभ आरंभ के साथ सस्टेनेबल जीवन की शुरुआत
ओखला स्थित गोदरेज साउथ एस्टेट में आयोजित इस विशेष गृह-प्रवेश समारोह के दौरान परिवारों को न सिर्फ अपने नए घरों की चाबियां सौंपी गईं, बल्कि उन्हें एक ऐसे समुदाय का हिस्सा बनाया गया, जो स्वच्छ हवा, खुले हरित स्थानों और संतुलित जीवनशैली पर आधारित है. ‘शुभ आरंभ’ को एक भावनात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव के रूप में डिजाइन किया गया, ताकि घर की हैंडओवर प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता न रहकर नई शुरुआत का प्रतीक बने.
वेलनेस-आधारित डिजाइन में पर्यावरण की अहम भूमिका
दक्षिण दिल्ली के इस रिहायशी प्रोजेक्ट को खास तौर पर पर्यावरणीय संतुलन और निवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यहां ग्रीन बफर्स, ओपन स्पेस, बेहतर वेंटिलेशन और स्मार्ट प्लानिंग को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शहरी जीवन के बीच भी प्रकृति से जुड़ाव बना रहे.
गीतिका त्रेहान ने कहा कि गोदरेज साउथ एस्टेट में वायु गुणवत्ता, खुले स्थान और सूझबूझ भरी योजना को घरों की बुनियाद में शामिल किया गया है. उनका कहना है कि बदलती जीवनशैली के साथ होमबायर्स अब ऐसे घर चाहते हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन का आधार बन सकें.
क्लीन एयर टेक्नोलॉजी से बेहतर शहरी जीवन
पर्यावरणीय दृष्टि से इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यहां अपनाई गई उन्नत क्लीन-एयर तकनीक है. गोदरेज प्रॉपर्टीज ने इनडोर स्पेस के लिए सेंट्रलाइज़्ड ट्रीटेड फ्रेश एयर (CTFA) और आउटडोर क्षेत्रों के लिए मैकेनिकल फिल्टर-लेस फ्रेश एयर (MFFA) सिस्टम को एकीकृत किया है. इन तकनीकों की मदद से इनडोर और आउटडोर दोनों जगहों पर वायु गुणवत्ता में मापने योग्य सुधार दर्ज किया गया है.
यह पहल दिखाती है कि अगर रिहायशी परियोजनाओं को सही सोच और तकनीक के साथ डिज़ाइन किया जाए, तो वे प्रदूषण जैसी शहरी समस्याओं से निपटने में भी योगदान दे सकती हैं.
सेलिब्रिटी मौजूदगी ने बढ़ाया संदेश का असर
इस मौके पर डिजाइनर और अभिनेत्री रिद्धिमा कपूर साहनी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में स्वस्थ और स्वच्छ जीवन पर दिया गया यह ध्यान अब लग्ज़री नहीं, बल्कि समय की जरूरत बन चुका है. उनके अनुसार, गोदरेज साउथ एस्टेट जैसे प्रोजेक्ट्स यह दिखाते हैं कि आधुनिक शहरी जीवन में भी स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जा सकती है.
पर्यावरण-संवेदनशील रियल एस्टेट की ओर बढ़ता कदम
गोदरेज प्रॉपर्टीज का यह प्रयास इस बात का संकेत है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल कंस्ट्रक्शन और सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है. ग्रीन डिजाइन, स्वच्छ हवा, वेलनेस और सस्टेनेबिलिटी अब घर खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
बूट्स की दीर्घकालिक परिकल्पना ‘आत्मनिर्भर आवास’ की है, जहां घर बाहरी बिजली, पानी और सीवर प्रणालियों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ काम कर सकें.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नेट-जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी कंपनी बूट्स ने अब औपचारिक रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रख दिया है. कंपनी ने ₹6,300 करोड़ से अधिक की इन्वेंट्री के साथ अपने रियल्टी वर्टिकल की शुरुआत की घोषणा की है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश के प्रमुख शहर वायु प्रदूषण, जल संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.
पारंपरिक रियल एस्टेट से अलग होगा बूट्स का मॉडल
अब तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में हाई-परफॉर्मेंस और नेट-ज़ीरो इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम कर चुकी बूट्स, अपने इंजीनियरिंग अनुभव को सीधे आवासीय विकास में लागू कर रही है. कंपनी का कहना है कि उसका रियल एस्टेट मॉडल केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मापने योग्य जीवन गुणवत्ता सुधार पर आधारित है.
स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और कम ऊर्जा खपत पर जोर
बूट्स के प्रबंध निदेशक दीपक राय के अनुसार, कंपनी शहरी जीवन की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखकर आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इनडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहे और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नियंत्रित बना रहे.
जल सुरक्षा के लिए परियोजनाओं में लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो पानी की शुद्धता, प्रवाह और उपयोग की दक्षता पर लगातार नजर रखेंगे. वहीं ऊर्जा के मोर्चे पर, केंद्रीकृत और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के जरिए बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाने का दावा किया गया है.
नोएडा, अलवर और वृंदावन से शुरुआत
रियल एस्टेट क्षेत्र में बूट्स ने अपनी शुरुआत नोएडा, अलवर और वृंदावन से की है. पहले चरण में कंपनी 60 लाख वर्ग फुट से अधिक का सेलएबल एरिया विकसित कर रही है. नोएडा के ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 76 में प्रीमियम हाई-राइज़ आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें 4 बीएचके फ्लैट और डुप्लेक्स पेंटहाउस शामिल होंगे. इन परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-आधारित डिजाइन और स्वास्थ्य-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है.
अलवर में शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत
अलवर में बूट्स ने एक ऐसी परियोजना शुरू की है, जिसे शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत के रूप में चिन्हित किया जा रहा है. इसमें 2 और 3 बीएचके आवास उपलब्ध होंगे. इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा, स्वच्छ इनडोर वातावरण और ऊर्जा दक्षता को प्रमुख आधार बनाया गया है.
देश के कई शहरों में विस्तार की तैयारी
आगामी वर्षों में बूट्स मुंबई, लखनऊ, अयोध्या, देहरादून, कुरुक्षेत्र, झांसी, चित्रकूट और प्रयागराज जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रही है. कंपनी का फोकस मुख्य रूप से एंड-यूजर डिमांड पर रहेगा, न कि केवल निवेश आधारित विकास पर. इसके साथ ही विभिन्न शहरों में दोहराए जा सकने वाले आवासीय मॉडल विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है.
पहले भी कर चुकी है नेट-ज़ीरो परियोजनाएं पूरी
इंजीनियरिंग और सस्टेनेबिलिटी आधारित संगठन के रूप में बूट्स इससे पहले झांसी की दुनिया की पहली नेट-जीरो लाइब्रेरी और कुरुक्षेत्र के नेट-जीरो म्यूजियम जैसी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है. कंपनी का मानना है कि भारतीय आवास क्षेत्र का भविष्य केवल दिखावटी लग्जरी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्वास्थ्य, दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे ठोस मानकों पर आधारित होना चाहिए.
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर पॉलिसी सपोर्ट और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताएं 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर की दिशा तय करेंगी.
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रितु राणा
साल 2026 की दहलीज पर खड़ा भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल रिकवरी की कहानी नहीं, बल्कि एक अधिक परिपक्व, वैल्यू-ड्रिवन और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ मॉडल की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. महामारी के बाद के वर्षों में तेज़ उछाल देखने के बाद अब सेक्टर स्थिरता, क्वालिटी और सस्टेनेबिलिटी पर केंद्रित होता दिख रहा है. वैश्विक स्तर पर जहां ब्याज दरों और महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है, वहीं भारत में मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और शहरीकरण रियल एस्टेट को सहारा दे रहे हैं.
वैश्विक परिदृश्य और भारत की मजबूत स्थिति
युगेन इंफ्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर शीशराम यादव के अनुसार, 2025 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय और भारतीय रियल एस्टेट बाजारों ने किफायतीपन के दबाव और बदलती उपभोक्ता भावनाओं के बावजूद लचीलापन दिखाया है. अमेरिका में ऊंची मॉर्गेज दरों (6–7 प्रतिशत) के कारण 2025 में मौजूदा घरों की बिक्री ऐतिहासिक निचले स्तर पर रही और सालभर में केवल 2.8 प्रतिशत बिक्री दर्ज की गई. हालांकि, इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक 2026 में इसमें 1.7 प्रतिशत की रिकवरी संभव है, जबकि कुछ अर्थशास्त्री 14 प्रतिशत तक की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान भी जता रहे हैं.
भारत की तस्वीर इससे कहीं अधिक मजबूत दिखाई देती है. बदलती जीवनशैली, न्यूक्लियर फैमिली कल्चर और बढ़ती आय के चलते रेजिडेंशियल डिमांड मजबूत बनी हुई है. 2025 की पहली छमाही में लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में 36 प्रतिशत से अधिक मांग दर्ज की गई, जो प्री-कोविड स्तर से लगभग दोगुनी है. ₹4 करोड़ से ऊपर के घरों की बिक्री में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में कुल होम सेल्स वैल्यू 74.98 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच सकती है, जो सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि होगी.
गुरुग्राम, लग्जरी और इंफ्रास्ट्रक्चर-लीड ग्रोथ का पोस्टर बॉय
दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम, 2026 आउटलुक में सबसे मजबूत रियल एस्टेट माइक्रो-मार्केट के रूप में उभर रहा है. पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल के मुताबिक, गुरुग्राम लग्जरी हाउसिंग उछाल का केंद्र बना हुआ है. द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) जैसे हाई-ग्रोथ कॉरिडोर में तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ने नए लग्जरी लॉन्च को मजबूती दी है. उनका मानना है कि 2026 में बाजार वॉल्यूम से वैल्यू की ओर बढ़ेगा और फोकस स्पष्ट रूप से क्वालिटी पर रहेगा.
लैंडमार्क ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन संदीप छिल्लर भी इस रुझान की पुष्टि करते हैं. उनके अनुसार, 2025 में गुरुग्राम ने लग्जरी हाउसिंग और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस में ग्रोथ का नेतृत्व किया. बेहतर कनेक्टिविटी, मेट्रो और एक्सप्रेसवे नेटवर्क तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की बढ़ती मौजूदगी ने कीमतों और लीजिंग गतिविधि दोनों को सहारा दिया है.
होमलैंड ग्रुप के सीईओ उमंग जिंदल का कहना है कि गुरुग्राम को मजबूत लग्जरी डिमांड, वैश्विक कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रगति का दुर्लभ संयोजन मिला है. खरीदार अब केवल कीमत नहीं, बल्कि रहने की गुणवत्ता, पहुंच और कम्युनिटी प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं. 2026 में यह शहर सुनियोजित और स्केलेबल रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर पेश करेगा.
कमर्शियल रियल एस्टेट, हाइब्रिड वर्क के बावजूद मजबूत
जहां कुछ वर्षों पहले हाइब्रिड वर्क मॉडल को लेकर ऑफिस डिमांड पर सवाल उठे थे, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग दिखती है. वोलनी कमर्शियल रियल एस्टेट एडवाइजरी के फाउंडर रोहन सेठ के अनुसार, ग्लोबल ब्रांड्स, संस्थागत निवेशकों और भारत में नए प्रवेशकों की वजह से कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग संरचनात्मक रूप से मजबूत हो रही है. आने वाले दो वर्षों में किराए और पूंजी मूल्य मजबूत बने रहने की संभावना है, क्योंकि कंपनियां सीधे बिक्री के बजाय लॉन्ग-टर्म लीज मॉडल अपना रही हैं.
उनका यह भी कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए सेक्टर सक्रिय रूप से हाई-क्वालिटी ऑफिस स्पेस ले रहे हैं. ऑक्यूपायर्स का यह विविधीकरण दीर्घकालिक बाजार स्थिरता का मजबूत संकेत माना जा रहा है.
गोवा और टियर-2 शहर, नए निवेश हॉटस्पॉट
2026 के निवेश आउटलुक में गोवा एक सशक्त राज्य के रूप में उभर रहा है. जीएचडी ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भारत ठाकरान के मुताबिक, साउथ और नॉर्थ गोवा अब केवल वेकेशन होम डेस्टिनेशन नहीं रहे, बल्कि गंभीर एंड-यूज़र और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मार्केट बन चुके हैं. साउथ गोवा में मडगांव और आसपास के क्षेत्र बेहतर प्लानिंग और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते स्थिर रिटर्न दे रहे हैं, जबकि नॉर्थ गोवा के पोर्वोरिम और थिवीम बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कारण निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं.
इसी तरह, बूटेस के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक राय का कहना है कि 2026 तक रियल एस्टेट निवेश भारत के नेट-जीरो विजन के अनुरूप टियर-2 शहरों में ग्रीन डेवलपमेंट की ओर तेजी से बढ़ेगा. लखनऊ, अलवर, कुरुक्षेत्र, वृंदावन और झांसी जैसे शहर सस्टेनेबल हाउसिंग और इको-फ्रेंडली कम्युनिटीज के नए केंद्र बन रहे हैं.
लग्जरी हाउसिंग, बदलती परिभाषा
ट्राइडेंट रियल्टी के सीईओ परविंदर सिंह के अनुसार, 2026 लग्जरी हाउसिंग के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकता है. आज का खरीदार स्मार्ट टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी, वेलनेस और उत्कृष्ट कारीगरी को प्राथमिकता दे रहा है. लग्जरी अब केवल बड़े साइज या लोकेशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवनशैली अनुभव बन चुकी है.
M3M इंडिया के प्रेसिडेंटरॉबिन मंगला ने कहा "जैसे ही हम 2026 में प्रवेश कर रहे हैं, M3M इंडिया अपने दूरदर्शी नेतृत्व और मजबूत अनुभव के साथ आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हमारा उद्देश्य केवल प्रोजेक्ट्स बनाना नहीं है, बल्कि भारत के रियल एस्टेट विकास के अगले अध्याय को आकार देना है. हमारी रणनीति में स्मार्ट कम्युनिटीज का निर्माण शामिल है, जिसमें उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्टेनेबल डिजाइन, हरित क्षेत्र और उच्चतम सुरक्षा मानक शामिल हैं. 2025 में हमने विशेष रूप से टियर-2 और NCR के आसपास के ग्रोथ कॉरिडोर में 5000 से अधिक रेजिडेंशियल यूनिट्स और 1.2 मिलियन वर्ग फुट कमर्शियल स्पेस की सफलता हासिल की.
2026 में हमारा फोकस इन क्षेत्रों में विस्तार करने, नई टेक्नोलॉजी और ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस को अपनाने और ग्राहकों को लंबी अवधि के लिए बेहतर रिटर्न देने पर रहेगा। इसके अलावा, हम डिजिटल वर्चुअल टूर, स्मार्ट कम्युनिटी मैनेजमेंट और AI आधारित ग्राहक अनुभव जैसे पहलुओं में निवेश कर रहे हैं, ताकि खरीदार और निवेशक दोनों को सहज और भरोसेमंद अनुभव मिले."
2025 में भारतीय रियल एस्टेट ने ऊंची लागत और ब्याज दरों की चुनौतियों के बावजूद प्रीमियम डिमांड, मजबूत निवेश और नीति समर्थन के दम पर स्थिरता बनाए रखी और 2026 के लिए सस्टेनेबल ग्रोथ की मजबूत नींव तैयार की.
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रितु राणा
जैसे-जैसे वर्ष 2025 अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र ने तेज प्रगति और सुदृढ़ीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाया. उच्च ब्याज दरों, निर्माण लागत में वृद्धि और महंगाई ने बाजार पर दबाव डाला, लेकिन प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बाहरी‑घरेलू निवेश ने सेक्टर की स्थिति को संतुलित रखा. 2025 में देश के प्रमुख 7 शहरों में कुल रेजिडेंशियल बिक्री का कुल मूल्य ₹6 लाख करोड़ पार हुआ, जबकि यूनिट‑लेवल बिक्री में हल्की गिरावट देखी गई, जो बाजार की स्थिरता और निवेश आकार को दर्शाती है.
ब्याज दरें, निर्माण लागत और मांग पर असर
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज दरों में उतार‑चढ़ाव और महंगाई ने होम लोन महंगा किया, जिससे कुछ खरीदार निर्णय लेने में देरी कर रहे हैं. इससे विशेषकर मिड‑इनकम सेगमेंट में डिमांड दबाव महसूस हुआ, लेकिन प्रीमियम हाउसिंग जैसे ₹1 करोड़ से ऊपर वाली संपत्तियों में 107% तक की सालाना वृद्धि ने दिखाया कि उच्च‑एंड डिमांड अभी भी मजबूत है.
सेक्टर‑वार डिमांड और सप्लाई
रेजिडेंशियल हाउसिंग में लक्जरी और प्रीमियम सेगमेंट ने साल 2025 में बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मिड‑इनकम और अफोर्डेबल हाउसिंग ने स्थिर मांग दिखाई. सरकारी नीतियां, RERA के नियम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश ने सेक्टर को सहारा दिया.
कमर्शियल और ऑफिस स्पेस में हाइब्रिड वर्क मॉडल के कारण IT और GCC कंपनियों ने अपने ऑफिस स्पेस को ग्रेड‑A, क्लस्टर्ड और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस में बदलने की दिशा में निवेश बढ़ाया.
टियर‑2 और टियर‑3 शहरों में भी प्रीमियम सेगमेंट की मांग बढ़ी, जबकि सप्लाई और यूनिट‑बेस्ड बिक्री में गिरावट देखी गई. गोवा, विशेष रूप से साउथ और नॉर्थ गोवा, निवेशकों के लिए गंभीर एंड-यूजर और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मार्केट के रूप में उभर रहा है.
सरकारी नीतियां और भरोसा
RERA और स्मार्ट सिटी पहल, साथ ही सपोर्टिव मॉनेटरी और फिस्कल नीतियों ने सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बढ़ाया है. इन सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और हाउसिंग सप्लाई चेन को मजबूत किया.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अपेक्षित ब्याज दर स्थिरता से आवासीय मांग और निवेश में सुधार की उम्मीद है. प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट मजबूत रहेगा, जबकि टियर‑2 मार्केट में संतुलित ग्रोथ दिखाई देगी.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर-स्ट्रेटजी सुदीप भट्ट ने बताया "2025 भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक बदलाव वाला दौर रहा, क्योंकि ग्रोथ को तेज़ करने के लिए सपोर्टिव मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी एक साथ आईं. RBI द्वारा रेपो रेट में लगातार और सोच-समझकर की गई कमी से होम लोन की अफोर्डेबिलिटी में काफी सुधार हुआ, जिससे सभी सेगमेंट में खरीदारों का भरोसा और डिमांड बढ़ी. GST 2.0 ने टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाया, इनपुट कॉस्ट कम की और डेवलपर्स के लिए कंप्लायंस एफिशिएंसी बढ़ाई, जिससे ज़्यादा कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग का रास्ता खुला. RERA के मज़बूत नियमों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया, जबकि बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने नए रेजिडेंशियल और कमर्शियल कॉरिडोर खोले, खासकर NCR और उभरते टियर 2 मार्केट में, कुल मिलाकर, इन उपायों ने न केवल मार्केट की गति को फिर से जिंदा किया, बल्कि रियल एस्टेट को भारत के सबसे मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार सेक्टर्स में से एक के रूप में स्थापित किया, जिससे सस्टेनेबल ग्रोथ और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा मिला. 2025 में NCR में कुल निवेश लगभग ₹22,000 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 18% अधिक है."
एम3एम इंडिया के प्रेसिडेंट रॉबिन मंगला ने कहा "जैसे-जैसे वर्ष 2025 अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र तेज प्रगति और सुदृढ़ीकरण के एक महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता है. इसमें बेहतर होती मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता, महंगाई में नरमी और घर खरीदने की मांग में निरंतर वृद्धि का अहम योगदान रहा है. मेट्रोपॉलिटन बाजारों ने इस वृद्धि का नेतृत्व जारी रखा है, जिसे तेजी से पूरी हो रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, मजबूत रोजगार इकोसिस्टम और आवासीय व वाणिज्यिक दोनों सेगमेंट में बढ़ते निवेशक विश्वास का समर्थन मिला. इस व्यापक गति के बीच, एनसीआर क्षेत्र ने एक निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसमें नोएडा विशेष रूप से सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे बाजारों में से एक के रूप में उभरकर सामने आया है. बेहतर कनेक्टिविटी, सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे का विस्तार, तथा मजबूत होती आर्थिक आधारशिला ने एंड-यूजर्स और दीर्घकालिक निवेशकों, दोनों के बीच नोएडा की आकर्षण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है. NCR में 2025 में कुल रेजिडेंशियल बिक्री लगभग ₹1.2 लाख करोड़ रही, जो बाजार की स्थिरता और निवेशक रुचि को दर्शाती है."
प्रॉपर्टी मास्टर के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर गोल्डी अरोड़ा ने कहा "ब्याज दरों और महंगाई के असर से बाजार की गति कुछ समय के लिए धीमी हुई है, लेकिन इससे रियल एस्टेट की बुनियाद कमजोर नहीं हुई है. निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद डेवलपर्स ने क्वालिटी और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने पर फोकस बनाए रखा है. प्रीमियम सेगमेंट में यूनिट‑लेवल बिक्री 2025 में 107% बढ़ी, जो यह दर्शाता है कि उच्च‑एंड डिमांड अभी भी मजबूत है. खरीदार अब ज्यादा जागरूक होकर निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिर और टिकाऊ मांग बन रही है. आने वाले समय में जैसे ही ब्याज दरों में स्थिरता आएगी, रियल एस्टेट सेक्टर फिर से तेज रफ्तार पकड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है"
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशंक वासन ने कहा "2025 को उस साल के तौर पर याद किया जाएगा जब भारतीय रियल एस्टेट, खासकर दिल्ली NCR में, पॉलिसी में स्थिरता और मार्केट के भरोसे का मेल हुआ. RBI के स्थिर इंटरेस्ट रेट के रुख ने खरीदारों का भरोसा बहाल किया, अफोर्डेबिलिटी में सुधार किया, और एंड-यूजर्स को मजबूती से मार्केट में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया. साथ ही, GST 2.0 ने बहुत जरूरी क्लैरिटी और कंप्लायंस एफिशिएंसी लाई, जिससे इनपुट क्रेडिट आसान हुआ और डेवलपर्स के लिए टैक्सेशन को सुव्यवस्थित किया गया. NCR में, इसका नतीजा यह हुआ कि प्रोजेक्ट तेज़ी से पूरे हुए, घरों की मांग फिर से बढ़ी, और कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट में मजबूत तेजी आई. कुल मिलाकर, इन सुधारों ने एक ऐसा अनुकूल माहौल बनाया जहाँ पारदर्शिता, लिक्विडिटी और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ एक साथ आए."
रियलिस्टिक रियलटर्स के रीजनल डायरेक्टर मोहित बत्रा ने कहा "यह सच है कि बढ़ती ब्याज दरों, निर्माण लागत और महंगाई ने रियल एस्टेट सेक्टर पर कुछ दबाव बनाया है. होम लोन महंगे होने से खरीदार निर्णय लेने में थोड़ा समय ले रहे हैं, वहीं कच्चे माल और लेबर की लागत बढ़ने से डेवलपर्स की लागत जरूर बढ़ी है. हालांकि, यह भी साफ है कि घर की जरूरत एक बुनियादी मांग है. संगठित और विश्वसनीय डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स में एंड-यूजर की रुचि बनी हुई है. बेहतर प्लानिंग, लागत नियंत्रण और समय पर डिलीवरी के जरिए सेक्टर इस चुनौती को अवसर में बदल रहा है. NCR में कुल प्रोजेक्ट डिलीवरी का 65% समय पर पूरा हुआ है, जो सेक्टर की स्थिरता को दर्शाता है."
बिगटेक के सीओओ राज कुमार सिसोदिया के अनुसार "2025 में हाइब्रिड वर्क मॉडल के चलते IT और टेक्नोलॉजी कंपनियों में ऑफिस स्पेस का स्वरूप बदल रहा है. अब अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए आधुनिक और क्लस्टर्ड वर्कस्पेस को तरजीह दी जा रही है. भले ही वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प जारी हो, लेकिन बड़े टेक समूह और GCCs अभी भी ग्रेड-A ऑफिस स्पेस और वर्कस्पेस इनोवेशन में निवेश कर रहे हैं, ताकि टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और टीम कोलैबोरेशन मजबूत बना रहे. दिल्ली NCR में ग्रेड-A ऑफिस स्पेस का रिकवरी रेट 78% तक पहुँच गया है, जो 2024 की तुलना में 15% अधिक है."
GHD ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भारत ठाकरान ने कहा "2026 में रियल एस्टेट निवेश के नज़रिए से अगर किसी राज्य ने सबसे ज़्यादा मजबूती दिखाई है, तो वह गोवा है, जहाँ साउथ और नॉर्थ गोवा दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मजबूत माइक्रो-मार्केट्स के रूप में उभर रहे हैं. आज गोवा सिर्फ़ टूरिज़्म या वेकेशन होम डेस्टिनेशन नहीं रहा, बल्कि यह एक गंभीर एंड-यूजर और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट मार्केट बन चुका है. साउथ गोवा में मडगांव और उसके आसपास के क्षेत्र बेहतर प्लानिंग, कम भीड़ और मजबूत सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण स्थिर रिटर्न और बेहतर लाइफस्टाइल वैल्यू ऑफर कर रहे हैं. वहीं नॉर्थ गोवा में पोर्वोरिम और थिवीम जैसे इलाके बेहतर कनेक्टिविटी, उभरते रेजिडेंशियल क्लस्टर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते निवेशकों के लिए आकर्षक बनते जा रहे हैं. 2025 में गोवा में रियल एस्टेट निवेश लगभग ₹6,500 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 20% अधिक है."
एलांते ग्रुप के एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ कमर्शियल सेल्स हेनम खनेजा ने कहा "जैसा कि हम सभी जानते हैं, यह साल खत्म होने वाला है, और 2025 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बदलाव वाला साल रहा है. स्थिर ब्याज दरें, बढ़ती इनकम का भरोसा, और क्वालिटी-ड्रिवन डेवलपमेंट की तरफ साफ बदलाव, इन सभी ने मिलकर रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों सेक्टर में हमने जो मजबूत डिमांड देखी, उसमें योगदान दिया. आज के खरीदार ज़्यादा जानकार हैं और इंटीग्रेटेड लिविंग, सस्टेनेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म वैल्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं. टियर-2 मार्केट में भी तेजी आई क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हाइब्रिड वर्किंग मॉडल ने नए ग्रोथ पॉकेट बनाए. साल 2026 में, उम्मीद है कि मार्केट काफी हद तक संतुलित रहेगा, कुछ जगहों पर खरीदारों की तरफ थोड़ा झुकाव रहेगा क्योंकि इन्वेंट्री धीरे-धीरे बढ़ेगी. मॉर्गेज दरें स्थिर हो सकती हैं, जिससे खरीदने की क्षमता में सुधार होगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा. प्रीमियम और लग्ज़री सेगमेंट मजबूत बना रहेगा, जिसे ऐसे महत्वाकांक्षी और ज्यादा नेट-वर्थ वाले खरीदार चलाएंगे जो लाइफस्टाइल, डिजाइन और लॉन्ग-टर्म वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं. 2025 में टियर-2 शहरों में प्रीमियम प्रोजेक्ट की डिलीवरी लगभग 72% समय पर हुई है, जो सेक्टर की तेजी को दिखाता है."
गोवा अब केवल छुट्टियों का डेस्टिनेशन नहीं रह गया है, बल्कि लग्जरी रियल एस्टेट और सेकंड होम के लिए भारत का प्रमुख गंतव्य बन गया है. प्राकृतिक सुंदरता, साफ़ हवा, शांत माहौल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने इसे प्रीमियम निवेश के लिए आकर्षक बनाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गोवा अब सिर्फ छुट्टियों का गंतव्य नहीं रहा, बल्कि लग्जरी रियल एस्टेट और सेकंड होम बायर्स के लिए भारत का प्रमुख हॉटस्पॉट बन गया है. साफ़ हवा, शांत बीच, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रीमियम लाइफस्टाइल विकल्पों ने इसे निवेश और जीवन दोनों के लिए आकर्षक बना दिया है. हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि नॉर्थ गोवा के पोरवोरिम, थिविम और अस्सागाओ जैसी जगहों पर लग्ज़री विला की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जो इसे समझदार इन्वेस्टर्स और लाइफस्टाइल-केंद्रित खरीदारों के लिए पसंदीदा बना रही हैं.
लग्जरी विला की कीमतें मेट्रो शहरों के बराबर
सैविल्स इंडिया रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा में नई विला प्रॉपर्टी की कीमतें साउथ दिल्ली और साउथ मुंबई के अपार्टमेंट्स के बराबर हैं, लगभग 7 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच, NRIs, HNIs और अल्ट्रा HNIs का आकर्षण गोवा की रिच कल्चरल हेरिटेज और आरामदायक लाइफस्टाइल है. टियर-1 मेट्रो शहरों की भागदौड़ से थककर मिलेनियल्स और जेन Z यहाँ स्वास्थ्य, जीवनशैली और वित्तीय स्वतंत्रता के लिए आ रहे हैं.
इन्वेस्टमेंट हॉटस्पॉट: तेजी से बढ़ती कीमतें
ऑनलाइन रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म मैजिकब्रिक्स के अनुसार, गोवा में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट तेजी से बढ़ रहा है. रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज़ की कीमतों में साल-दर-साल 66.3% की वृद्धि हुई है, खासकर नॉर्थ गोवा के पोरवोरिम और थिविम इलाकों में लग्जरी विला और हॉलिडे होम की मांग लगातार बढ़ रही है.
प्रमुख डेवलपर्स की नजर में गोवा
जीएचडी ग्रुप के चेयरमैन भरत ठाकरान कहते हैं, “2012 से हम गोवा में प्रीमियम लिविंग स्पेस बना रहे हैं. प्रदूषण और ट्रैफिक वाले मेट्रो शहरों की तुलना में गोवा प्राकृतिक सुंदरता, साफ हवा और धीमी, सार्थक जीवन गति प्रदान करता है. डिजिटल-फर्स्ट काम और रिमोट लाइफस्टाइल के चलते लोग अब समुद्र के सामने अपार्टमेंट या हरी-भरी हरियाली वाले विला में रहकर काम कर सकते हैं. गोवा अब सिर्फ छुट्टियों की जगह नहीं, बल्कि भारत की पसंदीदा पहले घर और रिटायरमेंट डेस्टिनेशन बन गया है.”
सेकंड होम बायर्स के लिए आकर्षण
कोस्टल अपार्टमेंट 30-40 साल के युवा बायर्स के लिए आकर्षक हैं, लेकिन 15 करोड़ से ऊपर के लग्ज़री विला का दबदबा है. कोविड महामारी के बाद वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प बढ़ने और होलिस्टिक लिविंग की मांग के कारण लग्जरी विला की डिमांड बढ़ी. नॉर्थ गोवा के अर्जुना, अरपोरा, वागाटोर और कैंडोलिम में साल-दर-साल कीमतों में वृद्धि देखी गई है. सेकंड होम अब पर्सनल इस्तेमाल, रेंटल या लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए पॉपुलर हैं.
अस्सागाओ: लग्जरी विला का हॉटस्पॉट
कॉन्शिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के डायरेक्टर राजेश जैन कहते हैं, “अस्सागाओ गोवा में सबसे पसंदीदा इलाके में से एक बन गया है. यह हरे-भरे माहौल, पुराने जमाने का चार्म और आरामदायक लाइफस्टाइल प्रदान करता है. लग्जरी विला अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि पहचान और लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गए हैं.”
इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी पहल
गोवा के रियल एस्टेट ग्रोथ में मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, कोंकण एक्सप्रेसवे और PPP मॉडल के सरकारी प्रोजेक्ट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ये परियोजनाएं हाउसिंग और कॉमर्शियल डेवलपमेंट के अवसर बढ़ा रही हैं, जिससे मेट्रो शहरों से जुड़ाव आसान हुआ है.
स्थायी और प्रीमियम मार्केट
गोवा का रियल एस्टेट मार्केट अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी कदम है. तटीय अपार्टमेंट, लग्जरी विला और गेटेड समुदाय सेकंड होम बायर्स के लिए स्वर्ग बन गए हैं. बेहतर लाइफस्टाइल, स्थिर रेंटल इनकम और लंबे समय की कैपिटल एप्रिसिएशन गोवा को प्रीमियम, सुरक्षित और समझदार निवेश का विकल्प बनाती हैं.
2025 भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मजबूती, संतुलन और भरोसे का साल रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नीति समर्थन और बढ़ती उपभोक्ता मांग ने सेक्टर को स्थिर आधार दिया है.
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रितु राणा
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच 2025 भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्थिरता और संतुलित विकास का साल साबित हुआ है. कोलियर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हाउसिंग, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल, तीनों ही सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला. लगातार बनी उपभोक्ता मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस और निवेशक विश्वास ने इस सेक्टर को मजबूती दी है.
कमर्शियल और इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट में स्थिर ग्रोथ
कोलियर्स रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों में भारत में लगभग 5 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर दिया गया. आईटी, बैंकिंग-फाइनेंस, इंजीनियरिंग और फ्लेक्स ऑफिस कंपनियों की इसमें अहम भूमिका रही. वहीं, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार से इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेगमेंट में भी लगातार तेजी बनी रही. रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 में इस सेगमेंट में और मजबूती देखने को मिल सकती है.
हाउसिंग सेक्टर को मिला सपोर्ट
रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती आय, बेहतर अफोर्डेबिलिटी और बड़े शहरों में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों के चलते 2025 में हाउसिंग सेक्टर मजबूत बना रहा. मिड-इनकम हाउसिंग के साथ-साथ प्रीमियम रेजिडेंस, प्लॉटेड डेवलपमेंट और गेटेड कम्युनिटीज में भी स्थिर मांग देखने को मिली.
टियर-2 और टियर-3 शहर बने नए ग्रोथ इंजन
डेवलपर्स और निवेशकों का फोकस तेजी से टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर बढ़ रहा है. एक्सप्रेसवे, मेट्रो कॉरिडोर, रीजनल एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स ने इन शहरों की कनेक्टिविटी और आकर्षण को बढ़ाया है. सस्ती जमीन और बेहतर रिटर्न की संभावनाओं के कारण ये शहर अब बड़े मेट्रो के मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहे हैं.
सोनीपत बना दिल्ली-एनसीआर का उभरता हॉटस्पॉट
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन के मुताबिक, 2025 में सोनीपत ने दिल्ली-एनसीआर में एक मजबूत रियल एस्टेट मार्केट के रूप में अपनी पहचान बनाई है. मेट्रो विस्तार, एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स ने यहां रेजिडेंशियल डिमांड को बढ़ाया है. उन्होंने बताया कि दिल्ली-सोनीपत-पानीपत आरआरटीएस और मारुति सुजुकी प्लांट जैसे प्रोजेक्ट्स 2026 तक सोनीपत को लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए और आकर्षक बनाएंगे.
नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा भरोसा
जिंदल रियल्टी के सीईओ और प्रेजिडेंट अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि 2025 दिल्ली-एनसीआर रियल एस्टेट के लिए बदलाव का साल रहा. अनुकूल रेपो रेट, मजबूत रेरा नियम और जीएसटी 2.0 के आसान क्रियान्वयन ने मार्केट को अधिक पारदर्शी और निवेशक-मित्र बनाया है.
प्लॉटेड डेवलपमेंट और कस्टम होम्स की बढ़ती मांग
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर के अनुसार, टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्लॉटेड डेवलपमेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है. बेहतर सड़कें, मेट्रो नेटवर्क और दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी इन शहरों को खरीदारों और निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक बना रही है.
कनेक्टिविटी बनी सबसे बड़ा फैक्टर
न्यूस्टोन के सीईओ रजत बोकोलिया का कहना है कि केएमपी और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने सोनीपत के हाउसिंग मार्केट को नया बूस्ट दिया है. मास्टर प्लान 2031 के साथ सोनीपत एनसीआर में निवेश के लिए प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है.
दिल्ली-एनसीआर: निवेशकों की पहली पसंद
दिल्ली-एनसीआर में एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, मेट्रो विस्तार और गुरुग्राम-नोएडा जैसे हब्स के विकास से नए माइक्रो-मार्केट उभर रहे हैं. बड़े घर, गेटेड कम्युनिटीज और लाइफस्टाइल-फोकस्ड प्रोजेक्ट्स खरीदारों की प्राथमिकता बने हुए हैं.
2026 के लिए पॉजिटिव आउटलुक
कोलियर्स रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल एस्टेट सेक्टर 2026 तक अपनी मौजूदा रफ्तार बनाए रखेगा, जिसमें मजबूत घरेलू ग्रोथ, बढ़ती होम ओनरशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कनेक्टिविटी के कारण कमर्शियल और रेजिडेंशियल दोनों तरह की डिमांड अच्छी बनी रहेगी. रिपोर्ट यह भी बताती है कि निवेशकों की भागीदारी भी मजबूत बनी रहेगी. स्टेकहोल्डर्स के लिए 2026 स्थिर ग्रोथ का साल होने वाला है, जहाँ अनुशासित एग्जीक्यूशन, सस्टेनेबिलिटी के साथ तालमेल और कनेक्टिविटी बेहतर परफॉर्मेंस के लिए जरूरी होंगे.
गुरुग्राम का प्रीमियम रियल एस्टेट सेगमेंट 6.65 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार को चला रहा है, एनारॉक के अनुसार कुल आवास बिक्री में सालाना 20% वृद्धि की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय आवासीय बाजार बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. यह व्यापक मांग के चक्र से निकलकर प्रीमियम सेगमेंट के नेतृत्व में एक उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र में बदल रहा है. एनारॉक समूह के हालिया आंकड़ों के अनुसार, बाजार मूल्य रिकॉर्ड तोड़ने के कगार पर है, हालांकि इकाई बिक्री में स्थिरता बनी रहने की संभावना है. एनारॉक के शोध के अनुसार, शीर्ष सात शहरों में कुल घरों की बिक्री का मूल्य वित्त वर्ष 26 में सालाना 20% बढ़कर 6.65 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है. यह बढ़ोतरी बिक्री की संख्या से नहीं जुड़ी है, क्योंकि घरों की बिक्री या तो वैसी की वैसी रहेगी या सिर्फ 4% तक बढ़ेगी. इसका मतलब है कि अब बाजार में मुख्य ध्यान उच्च आय वाले घर खरीदारों की ओर बढ़ रहा है.
उत्साह और महत्वाकांक्षा में बढ़ती प्रवृत्ति
दिल्ली-एनसीआर में नए प्रोजेक्ट्स में यह बदलाव साफ़ दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में लॉन्च हुए नए प्रोजेक्ट्स में से 42% लक्जरी और अल्ट्रा-लक्जरी श्रेणी के हैं. अब बड़े घरों की मांग बढ़ रही है, जिनमें उच्च सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हैं. इस तरह के घर आमतौर पर HNIs, NRIs, स्टार्टअप के संस्थापक और कॉर्पोरेट जगत के धनी लोग खरीदते हैं. यह बदलाव खरीदारों की बढ़ती आय और जीवनशैली की पसंद के कारण हुआ है। साथ ही, सरकारी नीतियाँ, शेयर बाजार में बढ़त और नए प्रोजेक्ट लॉन्च इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दे रहे हैं.
गुरुग्राम- लक्जरी प्रॉपर्टी का केंद्र
एनसीआर इस लक्जरी-आधारित बाजार का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है. एनसीआर, चेन्नई के साथ वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में अन्य शहरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और केवल छह महीनों में अपने पूरे FY25 की बिक्री का 74% हासिल कर लिया. एनसीआर के भीतर, गुरुग्राम ने उत्तर भारत में प्रीमियम रियल एस्टेट का दर्जा प्राप्त कर लिया है. यह शहर उन संपन्न घर खरीदारों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो स्थायित्व, प्रतिष्ठा और गोपनीयता वाले हाई-एंड घरों की तलाश में हैं.
गुरुग्राम के मुख्य क्षेत्रों की जानकारी
1. द्वारका एक्सप्रेसवे: यह हाई-एंड घरों के लिए मुख्य जगह है. यहाँ प्रीमियम सुविधाएँ और कामकाजी केंद्रों तक आसान पहुँच है. निवेशक और घर खरीदने वाले लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि यहाँ नए और आधुनिक प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं.
2. गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड (GCER): यह पहले से ही प्रीमियम इलाका है. यहाँ ब्रांडेड और खास घर होने के कारण लोग महंगे लेन-देन के लिए आते हैं. इसके पास शॉपिंग और ऑफिस भी हैं.
3. सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR): यह तेजी से विकसित हो रहा इलाका है. यहाँ बड़ी जमीनें हैं और नए, बड़े प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे हैं. इससे महंगे विला और लक्ज़री अपार्टमेंट्स की बिक्री बढ़ रही है.
ये सभी इलाके सीधे तौर पर घर खरीदने वालों की जीवनशैली और निवेश की प्राथमिकताओं को पूरा करते हैं.
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर ने कहा, "भारत में लग्ज़री घरों की माँग मौसमी उछाल और चक्रीय उतार-चढ़ाव से आगे बढ़ गई है, यह अब एक संरचनात्मक वास्तविकता है. दिल्ली-एनसीआर उच्च-स्तरीय आवासीय विकास के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है, जहाँ द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे माइक्रो मार्केट में समझदार खरीदारों की निरंतर रुचि देखी जा रही है. महामारी के दौरान अनिश्चितता की प्रतिक्रिया के रूप में जो शुरू हुआ, वह भारतीयों की जीवनशैली, सुरक्षा और रियल एस्टेट में निवेश के प्रति दृष्टिकोण में एक दीर्घकालिक बदलाव के रूप में विकसित हुआ है. कोविड के वर्ष एक महत्वपूर्ण मोड़ थे. इसने प्राथमिकताओं का व्यापक पुनर्मूल्यांकन किया-स्थान, स्वास्थ्य, आराम और आत्मनिर्भरता घर के विचार के केंद्र में आ गए, लेकिन यह बदलाव केवल भावनात्मक नहीं है, मजबूत आर्थिक और संरचनात्मक बुनियादी ढाँचे इसके मूल में हैं."
बीपीटीपी के सीईओ मानिक मलिक इस विषय पर कहते हैं कि, "भारतीय आवास बाजार अब महंगे घरों की ओर बढ़ रहा है. कुल बिक्री की संख्या तो लगभग स्थिर है, लेकिन घरों की कीमतों में तेजी आई है, खासकर प्रीमियम और लक्जरी घरों में, यह बदलाव गुरुग्राम जैसे एनसीआर बाजारों में ज्यादा दिख रहा है, जहाँ खरीदार सस्ते या बड़े घरों की बजाय अच्छी क्वालिटी, सही जगह और बेहतर सुविधाओं वाले घरों को पसंद कर रहे हैं. बीपीटीपी के प्रीमियम प्रोजेक्ट्स पेशेवरों, जीसीसी निवासी और सपन्न घरेलू खरीदारों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. बाजार अब सिर्फ कीमतों के हिसाब से नहीं, बल्कि गेटेड कम्युनिटी, स्वास्थ्य-सुविधाएँ और टिकाऊ डिजाइन जैसी चीजों के हिसाब से भी परिपक्व हो रहा है. हमें भरोसा है कि यह महंगे घरों की ओर बढ़ती प्रवृत्ति मजबूत है और वित्त वर्ष 26 में भी इसे और बढ़ावा देगी."
न्यूस्टोन के सीईओ रजत बोकोलिया बताते हैं कि, "भारत के प्रमुख आवास बाजार अब अलग-अलग खंडों में बंट चुके हैं. FY25 में 4.2 लाख से अधिक घरों की बिक्री लगभग 5,59,290 करोड़ रुपये की हुई थी, और FY26 में यह बढ़कर 6.65 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने की उम्मीद है. प्रीमियम घरों की लगातार मांग बढ़ रही है, जिससे लेन-देन की औसत कीमत भी बढ़ रही है और कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. हालांकि, घरों की कुल संख्या में केवल थोड़ा ही बढ़ोतरी (4% से कम) होने की संभावना है. इसका मतलब है कि उच्च ब्याज दरें और सीमित उपलब्धता आम लोगों की खरीद को रोक रही हैं. बाजार अब ज्यादा संख्या में घर बेचने की बजाय महंगे और उच्च-मूल्य वाले घरों पर ध्यान दे रहा है, जिससे यह साफ़ होता है कि धनी खरीदार अब गुणवत्ता और सुविधाओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं."
गुरुग्राम के प्रीमियम रियल एस्टेट में लोगों का विश्वास बड़े डेवलपर्स द्वारा बड़े प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने से साफ़ दिखता है. जैसे-जैसे यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ रहा है और क्षेत्र की लंबी अवधि की आकर्षकता मजबूत हो रही है, एनारॉक के आंकड़े बताते हैं कि अब भारत के रियल एस्टेट में मुख्य रूप से धनी खरीदार सक्रिय हैं. गुरुग्राम के प्रीमियम इलाके और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स इस विकास की रफ्तार तय कर रहे हैं, जिससे यह बढ़ोतरी और भी साफ़ दिखाई दे रही है.
ब्याज सब्सिडी स्कीम की वापसी केवल एक वित्तीय राहत नहीं, बल्कि लाखों मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उम्मीद का पुनर्जागरण है. इससे EMI कम होगी, लोन लेना आसान होगा और रियल एस्टेट क्षेत्र में नई जान आएगी. घर खरीदना अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक और हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य बनता जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकार द्वारा ब्याज सब्सिडी स्कीम को दोबारा शुरू करने के बाद मिडिल-क्लास घर खरीदारों में नई उम्मीद जागी है. किफायती EMI, आसान लोन और सुलभ हाउसिंग विकल्पों के चलते यह योजना मध्यम आय वर्ग के लंबे समय से अधूरे सपने अपने खुद के घर को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. रियल एस्टेट सेक्टर भी इस फैसले से नई ऊर्जा महसूस कर रहा है.
सब्सिडी से EMI में राहत मिलेगी
युगेन इन्फ्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर शीशराम यादव ने कहा “ब्याज सब्सिडी स्कीम की वापसी मिडिल-क्लास घर खरीदारों के लिए बेहद फायदेमंद है. PMAY/CLSS के तहत मिलने वाली ब्याज राहत लोन की वास्तविक लागत कम करती है, जिससे EMI घट जाती है. पहले EWS/LIG को 6.5% और MIG-I को 4% तक सब्सिडी दी जाती थी, जिससे लोन का बोझ काफी कम होता था. इस कदम से मिडिल-इनकम परिवारों को किफायती EMI पर लोन लेने और किराये से आगे बढ़कर अपने घर का सपना पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे हाउसिंग सेक्टर में मांग और सप्लाई दोनों बढ़ेंगी.”
रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा नया प्रोत्साहन
भूटानी ग्रुप के सीईओ आशीष भूटानी ने बताया “ब्याज सब्सिडी स्कीम की पुनः शुरुआत रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक है. महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों की वजह से मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा था, लेकिन इस योजना से उनकी खरीद क्षमता बढ़ेगी. आवासीय मांग बढ़ेगी और डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट लाने के लिए प्रेरित होंगे. यह कदम ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के विजन को मजबूत करेगा और देश को ‘होम-ओनिंग नेशन’ बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा.”
मध्यम वर्ग को मिला आत्मविश्वास
CCS INFRATECH के डायरेक्टर जीशान असलम ने बताया “PMAY (U 2.0) के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी स्कीम मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है. अब आसान लोन उपलब्धता और ब्याज में छूट से घर खरीदना पहले से ज्यादा संभव हो गया है. यह योजना EMI कम करने के साथ-साथ लोगों में आत्मविश्वास भी बढ़ा रही है. किफायती और मध्यम आय वर्ग की हाउसिंग में नई ऊर्जा आई है. घर सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और अपनेपन का प्रतीक बन रहा है.”
पहली बार घर खरीदने वालों के लिए बड़ा अवसर
आकृति प्रॉपर्टीज की मैनेजिंग पार्टनर मंजुनाथ वी ने बताया “ब्याज-सब्सिडी योजना के पुनरुद्धार से मध्यम वर्ग का लंबे समय से अधूरा घर का सपना और करीब आ गया है. नीतिगत समर्थन की वजह से उधार लेने की लागत कम हुई है, जिससे पहले बार घर खरीदने वालों के लिए अवसर बढ़ गए हैं. खरीदार यदि पारदर्शी डेवलपर और स्पष्ट टाइटल वाली परियोजना चुनें, तो एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य की दिशा में यह बड़ा कदम साबित होगा.”
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार, बैंकों और डेवलपर्स के बीच तालमेल इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत वास्तव में एक ‘होम-ओनिंग नेशन’ बन सकता है.
यह वृद्धि दिल्ली-एनसीआर की स्थिति को एक अत्यधिक आकर्षक रियल एस्टेट निवेश और अंतिम-उपयोगकर्ता बाजार के रूप में मजबूत करती है. गुरुग्राम बेहतरीन वास्तुकला, कनेक्टिविटी और निवेश क्षमता वाले आवास बाजार का प्रमुख उदाहरण बना हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जुलाई-सितंबर तिमाही 2025 में भारत के शीर्ष आठ आवासीय बाजारों में संपत्ति की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 7% से 19% तक का उल्लेखनीय उछाल देखा गया. प्रॉप टाइगर की ताजा रिपोर्ट अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत अंतिम-उपयोगकर्ता मांग, निर्माण लागत में निरंतर वृद्धि और गुणवत्ता वाले घरों की सीमित उपलब्धता मुख्य कारण हैं. दिल्ली-एनसीआर इस वृद्धि में सबसे आगे रहा, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में भी दोहरे अंकों में कीमतों का उछाल दर्ज किया गया. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR), पुणे, चेन्नई और कोलकाता जैसे अन्य बड़े शहरों में एकल अंकों की वृद्धि ने डेवलपर्स के आत्मविश्वास और खरीदारों की स्थिर रुचि को दर्शाया.
प्रीमियम जीवनशैली की ओर बदलती प्राथमिकता
रिपोर्ट बताती है कि अब लोग साधारण घरों के बजाय प्रीमियम जीवनशैली वाले घरों को तरजीह दे रहे हैं. जबकि आठ प्रमुख शहरों में आवास बिक्री की मात्रा में साल-दर-साल 1% की मामूली गिरावट आई, बेची गई संपत्तियों का कुल मूल्य सालाना 14% बढ़कर ₹1.52 लाख करोड़ हो गया. यह बताता है कि खरीदार उच्च मूल्य वाली संपत्तियों का चयन कर रहे हैं. अब खरीदार ऐसे घर चाहते हैं जिनमें जिम के अलावा वेलनेस सेंटर, एयर और वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम, उच्च सुरक्षा, और वर्क फ्रॉम होम की सुविधाएँ हों. इसके साथ ही लोग अब लो-डेन्सिटी प्रोजेक्ट्स, बड़ी बालकनी, और कस्टम इंटीरियर डिज़ाइन वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
दिल्ली-एनसीआर: 19% उछाल के साथ मूल्य में अग्रणी
दिल्ली-एनसीआर मूल्य वृद्धि के ग्राफ में अग्रणी साबित हुआ, जहाँ भारित औसत संपत्ति मूल्य में 19% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. यह Q3 2024 में ₹7,479 प्रति वर्ग फुट से बढ़कर Q3 2025 में ₹8,900 प्रति वर्ग फुट हो गया. यह तेज बढ़ोतरी क्षेत्र में लक्जरी घरों की लगातार बढ़ती मांग और तेज़ी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का नतीजा है. गुरुग्राम, विशेष रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे कॉरिडोर, इस उछाल के केंद्र में रहे हैं. यहाँ चल रही बड़ी परियोजनाओं के शीघ्र पूरा होने और नए प्रीमियम हाउसिंग लॉन्च ने न केवल खरीदारों का भरोसा बढ़ाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में संपत्ति मूल्यों को भी ऊँचाई दी है. करीब 29 किलोमीटर लंबा और 16 लेन वाला यह हाईवे दिल्ली और गुरुग्राम को सीधे जोड़ता है और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक आसान पहुँच प्रदान करता है. इसकी वजह से इस क्षेत्र में लक्जरी प्रोजेक्ट्स और निवेशकों की रुचि दोनों में तेज़ी आई है.
नए विकास केंद्र: सोहना और एसपीआर
इसी तरह, सोहना और सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) जैसे इलाके भी अब विकास के नए केंद्र बन रहे हैं. इन क्षेत्रों को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और आईएमटी सोहना इंडस्ट्रियल हब जैसी परियोजनाओं से बड़ा लाभ मिल रहा है. एसपीआर, जो गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड जैसे प्रमुख कॉरिडोर से जुड़ता है, अपनी कॉर्पोरेट हब और बिजनेस पार्कों के करीब स्थित होने के कारण एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभर रहा है.
इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के विचार
नियोलिव के संस्थापक और सीईओ मोहित मल्होत्रा का कहना है कि नवीनतम प्रॉपटाइगर रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इस समय आवासीय संपत्तियों की कीमतों में सबसे आगे है. इस क्षेत्रीय उछाल के बीच, गुरुग्राम और नोएडा के बाद अब फरीदाबाद सबसे तेजी से उभरता हुआ बाजार बनकर सामने आया है. यहाँ तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और पूरे एनसीआर में बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यह इलाका एक उच्च संभावनाओं वाला माइक्रो-मार्केट बन गया है. आगामी जेवर एयरपोर्ट, नए एक्सप्रेसवे और मेट्रो लिंक परियोजनाएँ इस क्षेत्र की आकर्षण क्षमता को और बढ़ाने जा रही हैं, जिससे यह निवेशकों और घर खरीदने वालों दोनों के लिए प्रमुख गंतव्य बनता जा रहा है. नियोलिव में हमारा फरीदाबाद स्थित प्लॉटेड डेवलपमेंट इसी नई विकास लहर के अनुरूप तैयार किया गया है. यह प्रोजेक्ट आधुनिक जीवनशैली, निवेश के अवसर और दीर्घकालिक मूल्य- इन तीनों का संतुलित मिश्रण पेश करता है, जो आने वाले समय के लिए भविष्य-तैयार और सुव्यवस्थित रहने की जगहें प्रदान करता है.
रूट्स डेवलपर्स के सीओओ, सुमित रंजन का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर आज भारत की रियल एस्टेट ग्रोथ स्टोरी का नेतृत्व कर रहा है, और प्रॉपटाइगर की Q3 2025 रिपोर्ट इस तेज़ी को पूरी तरह प्रमाणित करती है. 19% सालाना और 9.8% तिमाही वृद्धि के साथ, इस क्षेत्र ने खुद को लगातार बढ़ती मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास के मजबूत उदाहरण के रूप में स्थापित किया है. द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख कॉरिडोर इस ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं, जहाँ तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और नए प्रीमियम हाउसिंग लॉन्च ने पूरे बाजार को नई दिशा दी है. यह विकास न सिर्फ बढ़ते खरीदार विश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि दिल्ली-एनसीआर अब एक भविष्य-तैयार रियल एस्टेट बाजार के रूप में उभर चुका है, जो एक साथ अंतिम उपयोगकर्ताओं और निवेशकों दोनों को आकर्षित कर रहा है.
वोमेकी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन, गौरव के. सिंह का कहना है कि दिल्ली एनसीआर का हाउसिंग मार्केट विकास का पैटर्न दिखा रहा है, जैसा कि प्रॉप टाइगर ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में 19% मूल्य वृद्धि दर्ज की है. नोएडा, मूल्यवृद्धि और खरीदार की रुचि दोनों के मामले में क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है. नोएडा के प्रमुख माइक्रो मार्केट, विशेष रूप से जेवर हवाई अड्डा और एफएनजी एक्सप्रेसवे, नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और मांग के कारण विकास को गति दे रहे हैं. इन माइक्रो मार्केट में प्रॉपर्टी की कीमतों में वृद्धि हुई है क्योंकि खरीदार उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाओं के साथ गुणवत्ता और जीवनशैली की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. परिणामस्वरूप, नोएडा अंतिम उपयोगकर्ताओं और निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बन गया है.
एसएस ग्रुप के एमडी और सीईओ अशोक सिंह जौनापुरिया का कहना है कि NCR में न्यू गुरुग्राम और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे गुरुग्राम के नए डेवलप हो रहे इलाकों में निवेश का माहौल बहुत मजबूत है, और ये जगहें तेजी से लोगों के रहने और व्यावसायिक काम-काज के लिए शहर के सबसे पसंदीदा हॉटस्पॉट बन रहे हैं.' उनका मानना है कि द्वारका एक्सप्रेसवे, बेहतर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और सुनियोजित टाउनशिप के साथ-साथ प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट्स जैसे बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चरल सुधारों के कारण, यह पूरा इलाका जीवन की गुणवत्ता और प्रॉपर्टी की कीमतों, दोनों में लगातार बढ़ोतरी देखेगा.
प्रतीक ग्रुप के एमडी, प्रतीक तिवारी कहते हैं एनसीआर में प्रॉपर्टी मार्केट की मौजूदा रफ्तार इस बात का संकेत है कि खरीदार अब सिर्फ घर नहीं, बल्कि बेहतर जीवनशैली की तलाश में हैं. लोगों की प्राथमिकताएं अब क्वालिटी, लोकेशन और आधुनिक सुविधाओं से भरपूर प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ रही हैं. गाज़ियाबाद के सिद्धार्थ विहार और नोएडा सेक्टर-150 जैसे इलाकों में पिछले दो वर्षों के दौरान डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है, जो इस बदलाव का साफ उदाहरण है. बेहतर कनेक्टिविटी, हरियाली और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने इन क्षेत्रों को निवेश और आवास दोनों के लिहाज से बेहद आकर्षक बना दिया है. आने वाले वर्षों में ये इलाके न सिर्फ रेजिडेंशियल, बल्कि वर्ल्ड-क्लास कमर्शियल फैसिलिटी के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करेंगे.
नॉर्थविंड एस्टेट्स के मार्केटिंग और सेल्स डायरेक्टर, शौर्य गर्ग के अनुसार, नोएडा अब NCR में सिर्फ 'सस्ता विकल्प' नहीं रह गया है, बल्कि यह उससे कहीं आगे निकल चुका है. उनका कहना है कि नोएडा के इस बड़े बदलाव के पीछे मास्टर प्लानिंग, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और ग्राहकों का बढ़ता भरोसा मुख्य वजहें हैं. खासकर, एक्सप्रेसवे बेल्ट की तेज़ी तो देखने लायक है, जिसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और बनने जा रहे औद्योगिक क्लस्टर्स से जबरदस्त गति मिली है. यह तेज़ी साफ दिखाती है कि नोएडा अब NCR के हाउसिंग मार्केट का नक्शा बदल रहा है और इसे प्रीमियम डेवलपमेंट का नया कॉरिडोर बना रहा है.
पिरामिड इंफ्राटेक के अश्वनी कुमार कहते हैं एनसीआर का रियल एस्टेट सेक्टर इस समय मजबूती के दौर में है, जहां लोगों का भरोसा और बाजार की स्थिरता दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं. खरीदार अब उन प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जो बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षित माहौल के साथ लंबी अवधि का मूल्य प्रदान करते हैं. आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और बेहतर कनेक्टिविटी इस ग्रोथ को और तेज करेंगे.