पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के नाते हमारी जिम्‍मेदारी भी बड़ी है :भूपेन्‍द्र यादव 

केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि अगर हमने अपने जीने के तरीके को लेकर बदलाव नहीं किया तो हमारे लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा. उन्‍होंने ये भी कहा कि हमें प्रकृति को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा.

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Tuesday, 20 June, 2023
Bhupendra Yadav

 बिजनेस वर्ल्‍ड BW Sustainable World Conclave 2023 में अपनी बात रखते हुए केन्‍द्रीय श्रम, रोजगार, और पर्यावरण मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कई अहम बातें कही. उन्‍होंने कहा कि आज भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था और तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था है. ऐसे में पर्यावरण को लेकर हमारी जिम्‍मेदारी भी ज्‍यादा हो जाती है. सबसे महत्‍वपूर्ण बात उन्‍होंने ये भी कही हमें प्रकृति के संसाधनों के इस्‍तेमाल को लेकर अपनी अप्रोच को बदलना होगा. इस कार्यक्रम में बिजनेस वर्ल्‍ड के एडिटर-इन-चीफ और समाचार4मीडिया के फाउंडर अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे. 

पिछले कुछ समय में मीडिया में बढ़ा है फोकस 
केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि पिछले कुछ समय में सस्‍टेनेबिलिटी को लेकर जिस तरह से मीडिया का फोकस बड़ा है उससे लगता है कि अब ये लक्ष्‍य दूर नहीं है.  हमारी सरकार इस बारे में जनता के प्‍वाइंट ऑफ व्‍यू को मोबिलाइज कर रही है और उस पर एक नजरिया बनाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में मैं बिजनेस वर्ल्‍ड की टीम को बधाई देता हूं कि उन्‍होंने ऐसे महत्‍वपूर्ण विषय को चुना, जो आज की सबसे बड़ी जरुरतों में एक है.
हम आज सस्‍टेनेबिलिटी पर इसलिए चर्चा कर रहे हैं क्‍योंकि यही हमारा भविष्‍य है. इतनी बात साफ है कि अगर हमने अपने लाइफस्‍टाइल के तरीके को और चीजों को खर्च करने की प्रवृति को नहीं बदला तो ये धरती ये प्‍लेनेट ज्‍यादा समय तक नहीं रह पाएंगे. मुझे लगता है कि अगर एक बार दुनिया इस समस्‍या को समझ जाएंगी तो फिर हम समस्‍या की जड़ से दूर नहीं रह पाएंगे.

बिना समस्‍या जाने कोई नहीं दे सकता हल 
 केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि ऐसा कोई जीनियस नहीं है जो बिना समस्‍या को समझे इसका हल बता सकता है. मैं इस समस्‍या को आपके सामने विस्‍तार से कहना चाहता हूं. इसके दो पहलू हैं. इनमें पहला पहलू ये है कि आज इसे लेकर दो तरह के सोचने वाले हमारे सामने आते हैं, इनमें एक वो हैं जो कैटेस्‍टोफिजम पर विश्‍वास रखते हैं. जो ये मानते हैं कि ये दुनिया जल्‍द ही खत्‍म होने वाली है और दूसरे वो हैं जो टेक्‍नोआप्‍टिमिस्टिक हैं. जो ये मानते हैं कि समूची अर्थ में कई तरह की संभावना हैं.  

जो मानते हैं कि इंसान किसी भी तरह की समस्‍या से लड़ सकता है. आज इंसान अपनी जरूरत के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है. इंसानों को लगता है कि उनकी समझदारी प्रकृति को पीछे कर सकती है. हमें इस बात को समझना होगा कि इस प्‍लेनेट पर हमारे सर्वाइव करने के चांस तभी बढ़ेंगे जब हम अपने तानाशाही रवैये को पीछे छोड़ेगें. अमेरिकी वैज्ञानिक और इकोलॉजिस्‍ट एल्‍डो ल्‍यूपड इसे लैंड एथेनिक धरती और इंसानों के बीच के संबंध को इंटरवाइन कहते हैं. हमारे मंत्रालय का भी मोटो वाक्‍य है प्रकृति: रक्षित: रक्षत: जब आप प्रकृति की रक्षा करते हैं तभी वो आपकी रक्षा करती है.   हमारे पास प्रकृति को ओवरपावर करने की क्षमता नहीं है.

जी 20 में भारत निभा रहा है अहम भूमिका
केन्‍द्रीय मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि जी 20 की अध्‍यक्षता के बीच पीएम मोदी के नेतृत्‍व में भारत इसे पूरी दुनिया के संज्ञान में लाने की कोशिश कर रहा है. जी-20 वर्किंग ग्रुप की मीटिंग में इसे लेकर कई विषयों पर बात हुई है. इसमें जिन मुददों पर बात हुई वो है लैंड डिग्रेडेशन, एक्‍सीलेटिंग इकोनोमिक डिग्रेडेशन एंड एनरिचिंग बॉयोडॉयवर्सिटी. दूसरा प्रमोटिंग सस्‍टेनेबल एंड क्‍लाइमेट ब्‍लू इकोनॉमी सहित कई ऐसे विषय हैं जिनको भारत ने विश्‍व के देशों के सामने रखा है. आप लोगों में  से ज्‍यादातर ये जानना चाहते होंगें कि हम मिशन लाइफ का हिस्‍सा कैसे बन सकते हैं. मैं आप लोगों को सुझाव देना चाहूंगा कि अगर आपका एक्‍शन पर्यावरण की इंटीग्रेटी , स्‍टेबिलिटी और ब्‍यूटी को बढ़ाता है तो आप इसे अपनी जिंदगी का हिस्‍सा बना सकते हैं. दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था और तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्‍यवस्‍था में हमारी जिम्‍मेदारी और बढ़ जाती है. 


 


दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती, BS-6 वाहनों को ही एंट्री, पीयूसी के बिना पेट्रोल पर रोक

एक ओर जहां प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली में वाहनों को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम की मार से हवाई यातायात भी प्रभावित है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 17 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 17 December, 2025
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राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. अब दूसरे राज्यों से केवल बीएस-6 मानक वाले वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. इसके साथ ही जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं मिल सकेगा. यह नई व्यवस्था 18 दिसंबर से लागू की जा रही है.

एक दिन की राहत, दस्तावेज दुरुस्त करने का मौका
वाहन चालकों को अपने कागजात पूरे कराने के लिए सरकार की ओर से एक दिन की अस्थायी छूट दी गई है. इस अवधि में वाहन मालिक पीयूसी सहित जरूरी दस्तावेज अपडेट करा सकेंगे, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो.

कैमरों से होगी पहचान
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर लगाए गए कैमरे बिना पीयूसी वाले वाहनों की स्वतः पहचान करेंगे. सिस्टम से जुड़ी मशीनें ऐसे वाहनों में ईंधन भरने से इनकार कर देंगी. पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी, जिसमें किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा.

हवा की हालत में मामूली सुधार
मंगलवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. हालांकि, यह सोमवार के 498 के स्तर से कुछ बेहतर रहा. सुप्रीम कोर्ट की ओर से GRAP-4 नियमों में आंशिक ढील दिए जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली है.

घने कोहरे का असर, दूसरे दिन भी उड़ानें रद्द
उत्तर भारत में घने कोहरे का असर विमान सेवाओं पर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला. खराब दृश्यता के कारण करीब 200 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि सैकड़ों उड़ानें देरी से संचालित हुईं. अकेले दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम 5.40 बजे तक लगभग 131 उड़ानें रद्द हो चुकी थीं.

 


‘जंगल सिर्फ पेड़ और बाघ नहीं हैं’: कर्नाटक ने जलवायु-लचीले भविष्य के लिए हरित शासन को नए सिरे से परिभाषित किया

वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग के प्रधान सचिव आईएफएस श्रीनिवासुलु का कहना है कि भारत के वन “कार्बन संतुलन की दोधारी तलवार” हैं और इन्हें आजीविका, जलवायु सुरक्षा और स्वयं प्रकृति से सीखने के इंजन के रूप में प्रबंधित किया जाना चाहिए

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Friday, 24 October, 2025
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भारत के वनों को अब केवल वन्यजीवों के आवास या वृक्षावरण के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि ये मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र हैं, ऐसा कहना है श्रीनिवासुलु, आईएएस, प्रधान सचिव, कर्नाटक सरकार, वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग का। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज वन क्षेत्र जलवायु लचीलापन, ग्रामीण आजीविका और वैज्ञानिक नवाचार के संगम पर खड़ा है — और इसे “वैश्विक तापमान वृद्धि के खिलाफ लड़ाई में दोधारी तलवार” बताया।

“वन जलवायु पहल में एक प्रमुख क्षेत्र है — यह एक दोधारी तलवार है,” श्रीनिवासुलु ने समझाया. “वनों में वृद्धि कार्बन सिंक को बढ़ाती है, लेकिन वनों का क्षरण या आगजनी हज़ारों वर्षों से संचित कार्बन को मुक्त कर सकती है.”

पेरिस समझौते के बाद की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अपने 2.9 बिलियन टन के लक्ष्य में से लगभग 2.5 बिलियन टन कार्बन सिंक हासिल कर लिया है, जिसे उन्होंने “वन क्षेत्र का उल्लेखनीय प्रयास” बताया.
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि वन पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनका संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए. “हमें वन क्षेत्र को बहुत सावधानी से संभालना होगा — यह या तो जलवायु परिवर्तन को कम कर सकता है या उसे बढ़ा सकता है,” उन्होंने कहा.

कर्नाटक की नई वन परिभाषा: पेड़ों और बाघों से आगे
कर्नाटक में सरकार पारंपरिक वन प्रबंधन की परिभाषा से आगे बढ़ रही है. “वन का मतलब केवल पेड़ और बाघ नहीं है,” श्रीनिवासुलु ने कहा. “हम आम आदमी के लिए एक व्यापक परिभाषा प्रस्तुत कर रहे हैं — जिसमें आजीविका, संस्कृति और जलवायु नियमन शामिल हैं.”

राज्य का दृष्टिकोण स्थानीय समुदायों के लिए संरक्षण को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने की दिशा में है, जिसमें इको-टूरिज्म और टिकाऊ वन-आधारित आजीविकाएं शामिल हैं। “इको-टूरिज्म फल-फूल रहा है। लोग बिना एसी और टाइल्स वाले एक जंगल लॉज के लिए रात का 30,000 रुपये भुगतान कर रहे हैं क्योंकि वे प्रकृति के बीच रहने का अनुभव महत्व देते हैं. यह दिखाता है कि संरक्षण एक आर्थिक उपकरण भी बन सकता है,” उन्होंने कहा.

कृषि और वनों को जोड़ते हुए श्रीनिवासुलु ने रेखांकित किया कि भारत की लगभग 30–40 प्रतिशत जनसंख्या अब भी कृषि पर निर्भर है, और दोनों “गहराई से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र” हैं। जलवायु परिवर्तन का संदेश प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिए उन्होंने कहा कि इसे किसानों की भाषा में समझाया जाना चाहिए.

“हमारा पारंपरिक कृषिपंचांग इसलिए काम करता था क्योंकि मौसम अनुमानित था. जलवायु परिवर्तन ने उस तालमेल को तोड़ दिया है — किसानों को यह अपने शब्दों में समझना होगा,” उन्होंने कहा, जोड़ते हुए कि कर्नाटक का वन विभाग “जलवायु लचीलापन को आम आदमी की शब्दावली में अनुवाद करने” पर काम कर रहा है.

COP21 पेरिस सम्मेलन में अपने योगदान को याद करते हुए श्रीनिवासुलु ने एक व्यक्तिगत उपलब्धि साझा की. उनका काली टाइगर रिज़र्व — जिसे पहले डांडेली अंशी कहा जाता था — पर बनाया गया वृत्तचित्र शांति संसारा वीडियो का हिस्सा था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया था. “उस वृत्तचित्र ने न सिर्फ अभयारण्य का नाम बदलने में मदद की बल्कि यह भी दिखाया कि नदी कैसे लोगों और जैव विविधता को आकार देती है. इसे COP21 में प्रदर्शित होते देखना सम्मान की बात थी,” उन्होंने कहा.

CSR को ‘कॉरपोरेट पर्यावरणीय दायित्व’ के रूप में पुनर्परिभाषित करना
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव के रूप में, श्रीनिवासुलु ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को कॉरपोरेट एनवायरनमेंटल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) में बदलने का आग्रह किया है. “उद्योगों को अस्पताल बनाने या किताबें बांटने से आगे बढ़ना चाहिए,” उन्होंने कहा. “उन्हें मिट्टी, वायु और जल की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए — भूजल को पुनर्भरण करना चाहिए, अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को पास के गांवों तक बढ़ाना चाहिए और स्थानीय जलवायु प्रभावों को कम करना चाहिए। यही असली सामाजिक सेवा है.”

मानव–वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे पर श्रीनिवासुलु ने “360-डिग्री दृष्टिकोण” की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कई संघर्ष इसलिए उत्पन्न होते हैं क्योंकि लोग वन क्षेत्रों के भीतर सीमित आजीविका विकल्पों के साथ रहते हैं.

“लोग सोचते हैं कि बुनियादी ढांचा उनकी समस्या है — सड़कें, स्कूल, बिजली — लेकिन असल में गरीबी ही मूल समस्या है,” उन्होंने कहा. “हमें उन्हें ऐसे रोजगार अवसरों से जोड़ना होगा जो अबाध्य वन क्षेत्रों के बाहर हों. गरीबी उन्मूलन से वनों पर दबाव कम होगा.”

‘वन एक जीवंत प्रयोगशाला है’
वनों को “जीवन की जीवंत प्रयोगशाला” बताते हुए श्रीनिवासुलु ने कहा कि जैव विविधता में भविष्य की चिकित्सा और तकनीकी खोजों के उत्तर निहित हैं. “आधुनिक दवाओं में से लगभग 25 प्रतिशत की उत्पत्ति वनों से हुई है,” उन्होंने बताया. “कल वह देश जो इस आनुवंशिक पुस्तकालय को संभालेगा, जैव प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व करेगा — जैसे आज दुर्लभ धातुएं आईटी क्रांति को संचालित कर रही हैं.”

उन्होंने अंत में याद दिलाया: “वन हमें संतुलन सिखाते हैं. प्रकृति में प्रदूषण नहीं है क्योंकि वह हर चीज़ को पुनर्चक्रित करती है. हमें यह सीखना होगा — विविधता अपनाना, पुन: उपयोग करना और जीवन के चक्रों का सम्मान करना. संरक्षण कोई दान नहीं है; यह अस्तित्व है.”

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त्योहारी सीजन में कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज? सरकार ने ई‑कॉमर्स कंपनियों पर कसा शिकंजा

त्योहारी सेल के दौरान ग्राहकों को लुभाने की कोशिशों के बीच अगर कंपनियां गलत तरीके अपनाती हैं तो सरकार सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 04 October, 2025
Last Modified:
Saturday, 04 October, 2025
BWHindia

त्योहारी सीजन में जीएसटी कटौती से जहां बाजार में बिक्री के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, वहीं कुछ ई‑कॉमर्स कंपनियों की चालाकियों से उपभोक्ता परेशान हैं. दरअसल, 'कैश ऑन डिलीवरी' (COD) विकल्प पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने और रिफंड में देरी जैसी शिकायतों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है और इसे ‘डार्क पैटर्न’ करार देते हुए कहा है कि उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी.

"डार्क पैटर्न" के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को एक्स (X) पर एक पोस्ट करते हुए बताया है कि मंत्रालय को कई शिकायतें मिली हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां कैश ऑन डिलीवरी के लिए अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं या जानबूझकर इस विकल्प को कम आकर्षक बना रही हैं. जोशी ने कहा, “इस तरह की गतिविधियों को ‘डार्क पैटर्न’ कहा जाता है, जिसमें उपभोक्ताओं को गुमराह कर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है.” उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय इन प्लेटफॉर्म्स की गहराई से जांच कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

त्योहारी सीजन में बिक्री का रिकॉर्ड टूटा, पर ग्राहक परेशान

GST में कटौती के बाद उपभोक्ताओं को 400 से ज्यादा वस्तुएं सस्ते दामों पर मिल रही हैं. इसके चलते नवरात्र के दौरान सभी श्रेणियों में बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. कार, दोपहिया वाहन, बड़े स्क्रीन वाले टीवी और स्मार्टफोन जैसे प्रोडक्ट्स की बिक्री में भारी तेजी आई है. हालांकि, इस बिक्री उछाल के बीच कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनने पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्राहक इसे न चुनें. दूसरा शिकायत ये मिली है कि प्रीपेड ऑर्डर कैंसिल होने के बावजूद रिफंड में देरी हो रही है.

ई-कॉमर्स कंपनियों से मांगा गया जवाब

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में संबंधित ई-कॉमर्स कंपनियों से जवाब तलब किया जा रहा है. मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जीएसटी राहत और त्योहारों की बिक्री का वास्तविक लाभ ग्राहकों तक पहुंचे, न कि मुनाफाखोरी का जरिया बने.

ग्राहक अधिकारों के उल्लंघन पर नहीं होगी रियायत

सरकार ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि जीएसटी में दी गई राहत अगर उपभोक्ताओं को नहीं पहुंचाई जाती, तो उस पर वित्तीय दंड और कार्रवाई की जाएगी. मंत्रालय की फील्ड टीमें बाजार में सक्रिय हैं और ग्राहक शिकायतों की मॉनिटरिंग की जा रही है.

 

 


अगस्त में खुदरा महंगाई 2% के पार, एसबीआई रिसर्च ने दी राहत की उम्मीद

मानसून और खाद्य कीमतों से निकट भविष्य में दबाव, पर मध्यम अवधि में महंगाई घटने की उम्मीद जताई गई

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 September, 2025
Last Modified:
Saturday, 13 September, 2025
BWHindia

देश की खुदरा महंगाई अगस्त में 2 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कीमतों का दबाव धीरे-धीरे कम होगा. हालांकि निकट भविष्य में मानसूनी बारिश और खाद्य पदार्थों की कीमतें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नीतिगत राह को जटिल बना सकती हैं.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 1.55 प्रतिशत थी. खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में तेजी आने से यह वृद्धि दर्ज हुई. कोर इन्फ्लेशन 4.16 प्रतिशत पर पहुंच गया. ग्रामीण महंगाई 1.69 प्रतिशत रही, जबकि शहरी महंगाई 2.47 प्रतिशत दर्ज हुई.

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के बाद का परिदृश्य अपेक्षाकृत बेहतर दिख रहा है. रिपोर्ट का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी का असर कीमतों पर दिखेगा. “वित्त वर्ष 2026-27 में सीपीआई महंगाई 65 से 75 आधार अंकों तक कम हो सकती है. इसमें आवश्यक वस्तुओं पर 25-30 आधार अंकों और सेवाओं पर 40-45 आधार अंकों की गिरावट शामिल होगी.”

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना जैसे प्रमुख फसल उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से निकट भविष्य में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. 1 अगस्त से 11 सितंबर तक राष्ट्रीय वर्षा सामान्य से 8.7 प्रतिशत अधिक रही, जबकि कुछ राज्यों में यह 100 प्रतिशत से भी ऊपर दर्ज हुई.

“यह चिंता की बात है क्योंकि प्रभावित राज्य भारत के बड़े खरीफ फसल उत्पादक हैं,” एसबीआई रिसर्च ने कहा. हालांकि, देश के सबसे बड़े अनाज उत्पादक उत्तर प्रदेश में अब तक मौसम की चरम स्थितियों से बचाव रहा है.

क्षेत्रीय स्तर पर महंगाई में बड़ा अंतर देखा गया. अगस्त में 35 में से 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महंगाई 4 प्रतिशत से नीचे रही. वहीं केरल में नारियल तेल की कीमतों और व्यक्तिगत देखभाल व सोने के उच्च भार के चलते महंगाई 9.04 प्रतिशत पर पहुंच गई. लक्षद्वीप एकमात्र ऐसा अन्य क्षेत्र रहा जहां महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर रही.

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में महंगाई दर 2 प्रतिशत के स्तर से थोड़ी ही ऊपर रही है, लेकिन आरबीआई द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है. “अगस्त का आंकड़ा थोड़ा ऊंचा रहने के कारण अक्टूबर में दर कटौती मुश्किल दिख रही है. यहां तक कि दिसंबर में भी दर कटौती कठिन होगी यदि पहली और दूसरी तिमाही की वृद्धि के आंकड़े देखें जाएं,” रिपोर्ट में कहा गया.

कुल मिलाकर बैंक ने निष्कर्ष निकाला कि मौसम की अनिश्चितता और खाद्य कीमतों की अस्थिरता से अल्पकालिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं. लेकिन मध्यम अवधि में महंगाई का रुख अनुकूल दिखता है, जो भविष्य में केंद्रीय बैंक को नीति निर्धारण के लिए पर्याप्त गुंजाइश देगा.

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वित्तीय संकट में Good Glamm Group, संस्थापक Darpan Sanghvi ने स्वीकारा हालात बिगड़े

एक अधूरी डील ने बढ़ाई पूंजी संकट की मुश्किलें, कर्मचारियों और विक्रेताओं के भुगतान पर असर

Last Modified:
Saturday, 05 July, 2025
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पर्सनल केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में चर्चित Good Glamm Group इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्पण संघवी ने सार्वजनिक रूप से कंपनी की कठिन आर्थिक स्थिति को स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि एक अधूरी ब्रांड बिक्री डील ने कंपनी की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) और परिचालन व्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है.

संघवी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कंपनी एक ब्रांड बिक्री को अंतिम रूप देने के करीब थी, जिससे जरूरी पूंजी प्राप्त होती, लेकिन डील उस वक्त टूट गई जब अधिग्रहण करने वाली कंपनी के सीईओ ने अंतिम क्षणों में इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस घटनाक्रम को “गट पंच” यानी भावनात्मक झटका करार दिया और कहा कि इसके बाद कंपनी को नए निवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा.

इस संकट के चलते Good Glamm Group समय पर वेतन और विक्रेताओं का भुगतान नहीं कर पाया है. पूर्व में खबर आई थी कि कंपनी ने दो महीने से अधिक समय तक कर्मचारियों का वेतन रोके रखा था। साथ ही, जिन कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है, उन्हें फुल एंड फाइनल सेटलमेंट भी नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

हाल ही में कई वरिष्ठ अधिकारी भी कंपनी से विदा ले चुके हैं. WYN Beauty के पूर्व चीफ पीपल ऑफिसर और बोर्ड सदस्य कार्तिक राव अब भर्ती मंच Vahan.ai से जुड़ गए हैं.

कंपनी ने लागत घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं. दिल्ली के वसंत कुंज कार्यालय को बंद कर पहले ग्रेटर कैलाश में स्थानांतरित किया गया और फिर रिमोट वर्क मॉडल अपनाया गया. Good Glamm Group अपने पोर्टफोलियो में शामिल कई ब्रांड्स को बेचने या हिस्सेदारी घटाने की कोशिश कर रहा है.

फरवरी में, कंपनी ने Sirona को लगभग Rs 150 करोड़ में उसके मूल संस्थापकों को वापस बेच दिया, जबकि इसका अधिग्रहण Rs 450 करोड़ में किया गया था. इसी तरह, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ScoopWhoop को महज Rs 18-20 करोड़ में WLDD को बेचा गया – जो 2021 की वैल्यूएशन के मुकाबले काफी कम है.

अन्य बिक्री में MissMalini Entertainment को Creativefuel को बेचना और Organic Harvest में अपनी हिस्सेदारी मूल प्रमोटरों को बेचने की बातचीत शामिल है. The Moms Co और POPxo को लेकर भी विकल्पों पर विचार चल रहा है.

मार्च 2025 में, Good Glamm Group ने अपने मौजूदा निवेशकों – Warburg Pincus, Prosus Ventures, Bessemer Venture Partners, और Accel – से USD 30 मिलियन का निवेश जुटाया ताकि तत्काल कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. हालांकि, एक बड़े फॉलो-ऑन राउंड की अभी भी प्रतीक्षा है.

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आधार ऑथेंटिकेशन ने छुआ नया शिखर, जून 2025 में दर्ज हुए रिकॉर्ड 229.33 करोड़ ट्रांजैक्शन

फेस ऑथेंटिकेशन में तीन गुना वृद्धि, कुल ऑथेंटिकेशन 15,452 करोड़ पार; UIDAI ने डिजिटल समावेशन में आधार की भूमिका को बताया अहम

Last Modified:
Friday, 04 July, 2025
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आधार कार्डधारकों ने जून 2025 में रिकॉर्ड 229.33 करोड़ ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन किए, जो न सिर्फ मई 2025 की तुलना में अधिक है, बल्कि जून 2024 के मुकाबले 7.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि भी दर्शाता है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किए गए आंकड़े आधार की भूमिका को भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के मजबूत स्तंभ के रूप में रेखांकित करते हैं.

अब तक कुल आधार आधारित ऑथेंटिकेशन की संख्या 15,452 करोड़ को पार कर चुकी है. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधार कैसे सेवाओं की डिलीवरी को सुगम, सटीक और समावेशी बना रहा है.

जून 2025 में AI/ML-सक्षम फेस ऑथेंटिकेशन ने जबरदस्त वृद्धि दर्ज की. इस महीने 15.87 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन हुए, जबकि जून 2024 में यह संख्या 4.61 करोड़ थी—यानी तीन गुना से भी अधिक वृद्धि. अब तक इस ऑथेंटिकेशन मोड का उपयोग 175 करोड़ बार किया जा चुका है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है.

एक UIDAI अधिकारी ने कहा, “फेस ऑथेंटिकेशन आधारधारकों को एक सुरक्षित और बाधारहित पहचान सत्यापन का तरीका देता है, जिसमें सिर्फ एक फेस स्कैन से काम हो जाता है.” यह सुविधा 100 से अधिक सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों, तेल कंपनियों और टेलीकॉम प्रदाताओं द्वारा बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है.

जून 2025 में 39.47 करोड़ ई-KYC ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए. बैंकिंग, एनबीएफसी और टेलीकॉम क्षेत्रों में ग्राहक को तेज़ी से जोड़ने और परिचालन लागत कम करने के लिए ई-KYC एक प्रभावी माध्यम बन चुका है.

UIDAI के अनुसार, ये आंकड़े यह साबित करते हैं कि आधार न केवल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है, बल्कि नागरिकों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

सार रूप में, आधार ऑथेंटिकेशन और ई-KYC में लगातार हो रही वृद्धि डिजिटल समावेशन, सरकारी सेवा डिलीवरी और निजी क्षेत्र की दक्षता को एक नई दिशा दे रही है.

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आज 1 मई से लागू हुए ये 5 बड़े बदलाव, आम आदमी की जेब पर सीधा असर

1 मई 2025 से रसोई गैस, एटीएम चार्ज, रेलवे टिकट और बैंकिंग नियमों में बदलाव होंगे. जानिए ये 5 बड़े बदलाव आपकी जेब और जीवन पर कैसे असर डालेंगे.

Last Modified:
Thursday, 01 May, 2025
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आज 1 मई के साथ नए महीने की शुरुआत हो चुकी है. इसी के साथ कई अहम बदलाव भी देश में आज से लागू हो गए हैं. आज से एटीएम ट्रांजैक्‍शन चार्जेज से लेकर दूध और सिलेंडर की कीमतों तक, कई चीजोंं के दाम को संशोधित किया गया है. वहीं रेलवे टिकट बुकिंग से जुड़े नियम में भी बड़ा बदलाव आज से लागू हो गया है. इनका सीधा असर आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ेगा. आइए जानते हैं कि मई के पहले दिन देश में क्‍या-क्‍या बदल गया.

1. रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें

हर महीने की तरह, 1 मई 2025 को भी तेल कंपनियां रसोई गैस (14 किलो) और कमर्शियल गैस सिलेंडर (19 किलो) की कीमतों को अपडेट करेंगी. पिछले महीने रसोई गैस की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि कमर्शियल सिलेंडर सस्ता हुआ था. इस बार लोग उम्मीद कर रहे हैं कि रसोई गैस के दाम कम हों, जिससे घर का बजट थोड़ा राहत पाए.

2. सीएनजी, पीएनजी और हवाई ईंधन के दाम

1 मई से सीएनजी, पीएनजी, और हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में बदलाव हो सकता है. तेल कंपनियां हर महीने इनके दाम अपडेट करती हैं. अगर सीएनजी के दाम बढ़ते हैं, तो गाड़ी चलाने का खर्च बढ़ेगा. पीएनजी महंगी होने से घरेलू गैस बिल पर असर पड़ेगा. साथ ही, हवाई ईंधन के दाम बढ़ने से हवाई यात्रा की टिकटें महंगी हो सकती हैं.

3. एटीएम से पैसे निकालना होगा महंगा

अगर आप एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो 1 मई से ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एटीएम इंटरचेंज फीस बढ़ाने की अनुमति दी है. इसका मतलब है कि अगर आप अपने बैंक के अलावा किसी दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, तो हर बार ज्यादा चार्ज लगेगा. उदाहरण के लिए, HDFC बैंक ने बताया कि फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर शुल्क 21 रुपये + टैक्स से बढ़कर 23 रुपये + टैक्स हो जाएगा. बैलेंस चेक करने का शुल्क भी 6 रुपये से बढ़कर 7 रुपये होगा.

4. रेलवे टिकट बुकिंग के नए नियम

1 मई 2025 से भारतीय रेलवे के टिकट बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव हो रहा है. अब वेटिंग टिकट सिर्फ जनरल कोच में ही मान्य होगा. यानी, आप वेटिंग टिकट के साथ स्लीपर या AC कोच में यात्रा नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा, एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) को 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया गया है. इसका मतलब है कि आप अब सिर्फ 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर पाएंगे.

5. ‘वन स्टेट-वन RRB’ योजना लागू

1 मई से 11 राज्यों में ‘One State-One RRB’ योजना शुरू हो रही है. इसके तहत हर राज्य में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनाया जाएगा. इससे बैंकिंग सेवाएं बेहतर होंगी और ग्राहकों को ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी. यह योजना उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लागू होगी.
 


आम आदमी के लिए राहत की खबर, लगातार दूसरे महीने सस्ता हुआ गैस सिलेंडर, जानें नए रेट

हर महीने की शुरुआत में गैस की कीमतें रिवाइज होती है. जरूरी नहीं कि इसमें बदलाव ही हो लेकिन इसे रिवाइज किया जाता है और फिर इसमें घटोतरी-बढ़ोतरी या स्थिर रखने का फैसला किया जाता है.

Last Modified:
Thursday, 01 May, 2025
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देश के चारों महानगरों में घरेलू गैस सिलेंडर के साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में महीने की पहली तारीख में बदलाव हो गया है. खास बात तो ये है कि देश में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें 7 महीने के लोअर लेवल यानी 1,700 रुपए से नीचे आ गई हैं. वैसे कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार दूसरे महीने में कटौती की गई है. जबकि पिछले महीने की 8 तारीख को घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपए प्रति गैस सिलेंडर का इजाफा देखने को मिला था. देश के पेट्रोलियम मिनिस्टर की ओर से इसकी घोषणा की गई थी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर घरेलू गैस सिलेंडर के साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें कितनी हो गई हैं.

14.5 रुपये हुए कम

रसोई गैस यानी 14.2 किग्रा वजन वाले गैस सिलेंडर की कीमतों में अभी तो कोई बदलाव नहीं दिख रहा है लेकिन 19 किग्रा वाले सिलेंडर के दाम घटाए गए हैं. एक मई को गैस की कीमतों में जो बदलाव हुआ है, उसके हिसाब से दो महीने में 19 किग्रा वाले सिलेंडर की गैस के लिए अब राजधानी दिल्ली में 1747.50 रुपये देने पड़ेंगे. पिछले महीने इसके लिए 1762 रुपये और मार्च में 1803 रुपये देने पड़ते थे. इसका मतलब हुआ कि दो महीने में 19 किग्रा वजन वाले गैस सिलेंडर के दाम 55.5 रुपये और एक महीने में 14.5 रुपये कम हुए हैं.

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

19 किग्रा वजन वाले गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कॉमर्शियल तौर पर होता है जैसे कि होटल, रेस्टोरेंट्स इत्यादि. ऐसे में अगर इसके दाम होते हैं तो होटल, रेस्टोरेंट्स इत्यादि अपने मेन्यू में प्राइस कट कर सकते हैं, जिसका फायदा आम लोगों को मिल सकता है. 

19 किग्रा वाले सिलेंडर के नए-पुराने दाम

दिल्ली:           1762.00 रुपये 1747.50 रुपये
कोलकाता:     1868.50 रुपये 1851.50 रुपये
मुंबई:            1713.50 रुपये 1699.00 रुपये
चेन्नई:            1921.50 रुपये 1906.00 रुपये

अप्रैल में महंगा हुआ था घरेलू गैस

पिछले महीने सरकार ने 7 अप्रैल को घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिये थे. तब सरकार ने रसोई गैस सिलेंडर 50 रुपये महंगा किया था. ये बढ़ोतरी उज्जवला योजना के तहत आने वाले लाभार्थी और आम लोग दोनों पर लागू हुई थी. दोनों के लिए सिलेंडर पर 50 रुपये बढ़ाये थे. 7 अप्रैल की बढ़ोतरी के बाद उन्हें LPG सिलेंडर 550 रुपये में मिल रहा है. वहीं, आम लोगों को सिलेंडर की कीमत 853 रुपये पड़ रही है.

7 अप्रैल को जारी हुए थे नए रेट्स

सामान्य उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 803 रुपये से बढ़कर 853 रुपये हो गई. उज्ज्वला योजना के तहत उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले एक सिलेंडर की कीमत अब 503 रुपये से बढ़कर 553 रुपये हो गई.

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की ये है कीमत

दिल्ली:           853.00 रुपये
कोलकाता:     879.00 रुपये
मुंबई:            852.50 रुपये
चेन्नई:            868.50 रुपये
 


Mother Dairy ने दिया महंगाई का बड़ा झटका, इतने रुपये बढ़ा दिए दूध के दाम, जानें नई कीमत

आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. मदर डेयरी ने एक बार फिर दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 30 April, 2025
Last Modified:
Wednesday, 30 April, 2025
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आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. मदर डेयरी ने एक बार फिर दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. कंपनी ने 30 अप्रैल से दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं. दिल्ली-एनसीआर में दूध एवं डेयरी प्रोडक्ट्स की विक्रेता मदर डेयरी ने खरीद लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है.

जानें कितने बढ़े दाम

मदर डेयरी ने अब दूध के नए दाम भी जारी कर दिए हैं. पहले मदर डेयरी का अल्ट्रा प्रीमियम फुल क्रीम मिल्क 76 रुपये प्रति लीटर था जो अब बढ़कर 78 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं मदर डेयरी का फुल क्रीम मिल्क अब 70 रुपये प्रति लीटर हो गया है. मदर डेयरी का टोंड मिल्क पहले 56 रुपये प्रति लीटर था जो अब बढ़कर 58 रुपये प्रति लीटर हो गया है. 

वहीं मदर डेयरी का डबल टोंड मिल्क अब 51 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो पहले 49 रुपये था. मदर डेयरी के कॉउ मिल्क के दामों में भी वृद्धि हुई है. पहले कॉउ मिल्क 29 रुपये का आधा लीटर मिलता था, जो अब 30 रुपये हो गया है. यानी मदर डेयरी के कॉउ मिल्क की कीमत अब 60 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

कंपनी ने क्या कहा?

मदर डेयरी के अधिकारी ने कहा, खरीद लागत में हुई वृद्धि से निपटने के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है. पिछले कुछ महीनों में लागत चार-पांच रुपये प्रति लीटर बढ़ चुकी है. अधिकारी ने कहा कि खरीद कीमतों में उछाल मुख्य रूप से गर्मियों की शुरुआत होने के अलावा लू की स्थिति के कारण भी आई है. उन्होंने कहा, हम अपने दुग्ध उत्पादक किसानों की आजीविका का समर्थन करते हुए उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अधिकारी ने कहा कि यह मूल्य संशोधन बढ़ी हुई लागत का केवल आंशिक प्रभाव दर्शाता है, जिसका उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों का ख्याल रखना है.
 


RBI का बड़ा फैसला, अब 10 साल के बच्चे भी खुद ऑपरेट कर सकेंगे अपना बैंक अकाउंट

RBI ने 10 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को खुद का बैंक अकाउंट खोलने और चलाने की इजाजत दी है. वे सेविंग और टर्म डिपॉजिट अकाउंट रख सकेंगे, साथ ही ATM, नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं.

Last Modified:
Tuesday, 22 April, 2025
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RBI की तरफ से बच्चों को जल्दी वित्तीय आजादी देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. आरबीआई के नए नि‍यम के अनुसार अब 10 साल या उससे बड़ी उम्र के बच्चे अपने सेव‍िंग और एफडी अकाउंट को खुद ओपन कर सकेंगे और ऑपरेट कर सकेंगे. इस न‍ियम को आरबीआई की तरफ से 21 अप्रैल 2025 को जारी किया गया है. आरबीआई (RBI) की तरफ से बैंकों को निर्देश दिया गया है क‍ि वे 10 साल से बड़े बच्चों को अपने सेव‍िंग और एफडी अकाउंट खोलने और ऑपरेट करने की अनुमति दें. हालांकि, बैंक अपने रिस्‍क न‍ियमों के आधार पर कुछ सीमाएं तय करेंगे. यह नियम बच्चों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने का बड़ा कदम है.

माता-पिता या कानूनी अभिभावक ऑपरेट करेंगे

10 साल से छोटे बच्चों के लिए भी खाता खोला जा सकता है लेकिन इसे उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक ऑपरेट करेंगे. आरबीआई (RBI) ने 1976 के अपने पुराने नियम को दोहराया है जिसमें मां को भी अभिभावक बनने की अनुमति है. 10 साल या इससे बड़ी उम्र के बच्चे अपने अकाउंट को खुद ऑपरेट कर सकते हैं. लेकिन बैंक अपने नियमों के अनुसार कुछ ल‍िमि‍ट तय करेंगे, जैसे कि कितना पैसा जमा क‍िया या निकाला जा सकता है. ये नियम बच्चों और उनके अभ‍िभावकों को साफ तौर पर बताए जाएंगे.

18 साल होने पर क्या होगा?

जब बच्चा 18 साल का हो जाएगा तो बैंक को उससे नए साइन लेने होंगे. अगर अकाउंट अभिभावक चला रहे थे तो बैलेंस की पुष्टि की जाएगी. आरबीआई (RBI) की तरफ से बैंकों से कहा गया क‍ि वे इस बदलाव को आसान बनाने के लिए पहले से तैयारी करें. बैंक बच्चों को इंटरनेट बैंकिंग, ATM/डेबिट कार्ड और चेकबुक जैसी सुविधाएं दे सकते हैं. लेकिन यह उनके र‍िस्‍क पर निर्भर करेगा. इससे बच्चे मॉडर्न बैंकिंग को समझ सकेंगे.

ओवर ड्रॉफ्ट की परम‍िशन नहीं

खाता बच्चा खुद ऑपरेट करे या उसके अभिभावक, उसमें ओवरड्राफ्ट (यानी खाते में जमा राशि से ज्यादा निकासी) की अनुमति नहीं होगी. खाता हमेशा क्रेडिट में रहना चाहिए. बच्चों के अकाउंट खोलते समय बैंकों को KYC नियमों का पालन करना होगा. यह RBI के 2016 के KYC नियमों के अनुसार होगा.

कब से लागू होगा?

यह नियम सभी कमर्शियल बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर लागू होगा. बैंकों को 1 जुलाई, 2025 तक अपने नियमों को अपडेट करना होगा. यह कदम बच्चों को छोटी उम्र से ही पैसे बचाने और मैनेज करने में मदद करेगा. वे बैंकिंग सिस्टम को समझेंगे और वित्तीय जिम्मेदारी सीखेंगे. माता-पिता को अपने बच्चों को फाइनेंश‍ियल फ्रीडम देने में आसानी होगी. आरबीआई (RBI) का यह नियम बच्चों के भविष्य को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है.