दिल्ली की हवा फिर हुई खराब, AIIMS के पास AQI 255 पर पहुंचा; सांस के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने से हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है. CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह AIIMS के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक 255 दर्ज किया गया.

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
BWHindi

दिल्ली में शुक्रवार, 23 अक्टूबर की सुबह वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, AIIMS के आसपास एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 255 पर पहुंच गया, जो खराब श्रेणी में आता है. हवा की गुणवत्ता बिगड़ने से राजधानी के लोगों को प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सामना करना पड़ रहा है.

200 के पार AQI, खराब श्रेणी में हवा

भारत के वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, 201 से 300 के बीच AQI को खराब श्रेणी में रखा जाता है. इस स्तर के प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है. इसका असर खासतौर पर सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों, बच्चों और बुजुर्गों पर अधिक पड़ सकता है.

AQI के बढ़ने का मतलब है कि हवा में प्रदूषकों का स्तर स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता का विषय बन रहा है. ऐसे में लोगों को अपने आसपास की वायु गुणवत्ता पर नजर रखने और प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने से बचने की जरूरत है.

सर्दियों से पहले क्यों बढ़ती है प्रदूषण की चिंता?

दिल्ली में अक्टूबर के दौरान वायु प्रदूषण एक बड़ी चिंता बन जाता है. मौसम में बदलाव, विभिन्न स्रोतों से होने वाला उत्सर्जन और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव में कमी जैसे कारक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. इन परिस्थितियों में प्रदूषक वातावरण में जमा होने लगते हैं, जिससे AQI बढ़ सकता है.

हालांकि, प्रदूषण का स्तर पूरे शहर में एक जैसा नहीं होता. अलग-अलग इलाकों में स्थानीय परिस्थितियों और प्रदूषण के स्रोतों के आधार पर वायु गुणवत्ता में अंतर हो सकता है. इसलिए किसी एक मॉनिटरिंग स्टेशन पर दर्ज AQI पूरे दिल्ली-एनसीआर की स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता.

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर लोगों को अपने इलाके का AQI नियमित रूप से जांचना चाहिए. खराब हवा में लंबे समय तक बाहर रहने और अधिक शारीरिक मेहनत वाली गतिविधियों को सीमित करना उपयोगी हो सकता है.

बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. यदि प्रदूषण के दौरान सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

CPCB कैसे रखता है हवा की गुणवत्ता पर नजर?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली में विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों के जरिए हवा की गुणवत्ता पर नजर रखता है. इन स्टेशनों से प्रदूषकों के स्तर और समग्र AQI से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं. इन आंकड़ों की मदद से लोग अपने आसपास की हवा की स्थिति समझ सकते हैं और उसी के अनुसार जरूरी सावधानियां बरत सकते हैं.

 


दिल्ली में ट्रैफिक को लेकर एडवाइजरी जारी, 30 जगहों पर डायवर्जन की चेतावनी; गैर-जरूरी यात्रा से बचें

सेंट्रल दिल्ली, कनॉट प्लेस और प्रमुख सड़कों पर पाबंदियों के चलते यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है.

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
BWHindia

दिल्ली में सोमवार को कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने और सफर के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की अपील की है. पुलिस के मुताबिक, मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए राजधानी में 30 स्थानों पर ट्रैफिक की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है.

ट्रैफिक डायवर्जन सुबह 6 बजे से जमीनी हालात के आधार पर लागू किए जाएंगे. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यातायात प्रबंधन से जुड़े फैसले मौके की स्थिति के अनुसार लिए जाएंगे. जरूरत पड़ने पर प्रतिबंधों को बढ़ाया या उनमें ढील दी जा सकती है.

सेंट्रल दिल्ली और कनॉट प्लेस में ट्रैफिक पर असर

ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली, कनॉट प्लेस, राजनयिक क्षेत्र और राजधानी के अन्य हिस्सों में यातायात प्रभावित हो सकता है. जिन प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक बाधित होने की आशंका है, उनमें मंडी हाउस, झंडेवालान, पंचकुइयां, धौला कुआं फ्लाईओवर, लोधी रोड फ्लाईओवर, विंडसर प्लेस, पटेल चौक, रेल भवन और आरएमएल अस्पताल के पास का गोलचक्कर शामिल हैं.

इसके अलावा जंतर-मंतर रोड, संसद मार्ग, अशोक रोड, जनपथ, बाराखंभा रोड और दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के आसपास भी यातायात प्रतिबंध लागू हो सकते हैं. इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों को देरी का सामना करना पड़ सकता है.

रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्री रखें ध्यान

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के रास्ते रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.

संभावित ट्रैफिक जाम और डायवर्जन के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है. ऐसे में लोगों को घर से पर्याप्त समय लेकर निकलने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है.

गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील

पुलिस ने लोगों से प्रतिबंध लागू रहने के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है. साथ ही, वाहन चालकों को ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करने और मौके पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अपना रास्ता तय करने को कहा गया है.

एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यातायात व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जाएगी. जमीनी हालात के आधार पर प्रतिबंधों में बदलाव किया जा सकता है. इसलिए यात्रियों को सफर पर निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है.

 


दवाओं और जांचों के नाम हिंदी में लिखें डॉक्टर, ब्रजेश पाठक ने की अपील

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, चिकित्सा व्यवस्था में हिंदी और भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल से मरीजों को इलाज समझने में मिल सकती है आसानी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
BWHindia

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है. उन्होंने चिकित्सकों को लिखे पत्र को शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया. उनका कहना है कि इससे मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें कौन सी दवा दी जा रही है और कौन सी जांच कराने की सलाह दी गई है.

पाठक ने अपने संदेश में लिखा, "राष्ट्र नायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा." इसके साथ उन्होंने चिकित्सकों से दवाओं एवं जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है, ताकि मरीज को यह पता रहे कि वह कौन सी दवा ले रहा है.

उन्होंने अपने पत्र में चिकित्सा व्यवस्था में भारतीय भाषा के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया है. चिकित्सा क्षेत्र में दवाओं, जांचों और उपचार से जुड़ी कई जानकारियां आमतौर पर अंग्रेजी में लिखी जाती हैं. ऐसे में हिंदी या मरीज की समझ की भाषा में जानकारी मिलने से उसे अपने इलाज से जुड़ी बातों को समझने में सुविधा हो सकती है.

मरीज को इलाज की जानकारी समझाने पर जोर

चिकित्सक और मरीज के बीच संवाद इलाज की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. दवा का नाम, उसकी मात्रा, जांच की जानकारी और चिकित्सकीय सलाह मरीज को स्पष्ट रूप से समझ में आना जरूरी है. ऐसे में मरीज की भाषा में जानकारी उपलब्ध कराने से चिकित्सा संबंधी निर्देशों को समझने और उनका पालन करने में मदद मिल सकती है.

पाठक की अपील इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ी है. उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखे जाएं, ताकि मरीज को यह जानने में आसानी हो कि उसे क्या दवा दी गई है और कौन सी जांच कराने के लिए कहा गया है.

25 सितंबर को दीनदयाल उपाध्याय की जयंती

पाठक ने यह अपील 25 सितंबर को की है, जो एकात्म मानव दर्शन के प्रतिपादक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती भी है. अपने संदेश में उन्होंने भारतीय भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही है.

उनके संदेश का फोकस चिकित्सा क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल पर है. इसका एक उद्देश्य मरीजों के लिए चिकित्सा संबंधी जानकारी को अधिक सहज और समझने योग्य बनाना है. हालांकि दवाओं और जांचों के नाम लिखते समय वैज्ञानिक नाम, ब्रांड नाम और अन्य जरूरी चिकित्सकीय विवरणों की स्पष्टता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.

हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं की भी गुंजाइश

भारत में मरीजों की भाषाई पृष्ठभूमि अलग-अलग है. हिंदी भाषी क्षेत्रों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, कन्नड़, मलयालम, गुजराती समेत कई भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल होता है. ऐसे में चिकित्सा संवाद को मरीज की सुविधा और भाषाई पृष्ठभूमि के अनुरूप बनाने की जरूरत पर भी चर्चा होती रही है.

मरीज अगर डॉक्टर की सलाह को अपनी समझ की भाषा में बेहतर तरीके से समझता है तो दवा लेने, जांच कराने और उपचार से जुड़ी सावधानियों का पालन करना उसके लिए आसान हो सकता है. इसी वजह से चिकित्सा क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल को मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं से भी जोड़कर देखा जाता है.

भाषा की बाधा कम करने की कोशिश

चिकित्सा विज्ञान की अपनी तकनीकी शब्दावली है, लेकिन मरीज के लिए यह समझना जरूरी है कि उसे कौन सी दवा लेनी है, किस जांच की जरूरत है और उपचार के दौरान किन बातों का ध्यान रखना है. ऐसे में चिकित्सा संबंधी जरूरी जानकारी को मरीज की समझ की भाषा में उपलब्ध कराना डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद को आसान बनाने में मदद कर सकता है.

ब्रजेश पाठक की चिकित्सकों से की गई अपील इसी दिशा में है. उन्होंने दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया है, ताकि चिकित्सा संबंधी जानकारी मरीजों के लिए अधिक स्पष्ट और सहज हो सके.


जंतर-मंतर के 1.5 किमी दायरे में आज रात 12 बजे तक बंद रहेगा मोबाइल इंटरनेट, गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश

मंत्रालय का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा, आपात स्थिति, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के अपराध के लिए उकसावे को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
BWHindia

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर जंतर-मंतर के आसपास 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित करने का आदेश जारी किया है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रतिबंध 23 जुलाई को शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक प्रभावी रहेगा. आदेश दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है.

गृह मंत्रालय के अनुसार, यह आदेश दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 20(2)(b) और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है. मंत्रालय का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा, आपात स्थिति, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के अपराध के लिए उकसावे को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

आदेश में कहा गया है कि प्रतिबंध के दौरान जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में सभी तकनीकों पर आधारित मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी. यह आदेश 23 जुलाई को शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक प्रभावी रहेगा.

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय को केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी प्राप्त है. आदेश गृह मंत्रालय के अवर सचिव महेंद्र विक्रम सिंह द्वारा जारी किया गया है. इसकी प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है.

सरकार ने आदेश में कहा है कि यह कदम पूरी तरह एहतियातन उठाया गया है ताकि क्षेत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके और किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.
 


दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती, BS-6 वाहनों को ही एंट्री, पीयूसी के बिना पेट्रोल पर रोक

एक ओर जहां प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली में वाहनों को लेकर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम की मार से हवाई यातायात भी प्रभावित है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 17 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 17 December, 2025
BWHindia

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं. अब दूसरे राज्यों से केवल बीएस-6 मानक वाले वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. इसके साथ ही जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं मिल सकेगा. यह नई व्यवस्था 18 दिसंबर से लागू की जा रही है.

एक दिन की राहत, दस्तावेज दुरुस्त करने का मौका
वाहन चालकों को अपने कागजात पूरे कराने के लिए सरकार की ओर से एक दिन की अस्थायी छूट दी गई है. इस अवधि में वाहन मालिक पीयूसी सहित जरूरी दस्तावेज अपडेट करा सकेंगे, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो.

कैमरों से होगी पहचान
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर लगाए गए कैमरे बिना पीयूसी वाले वाहनों की स्वतः पहचान करेंगे. सिस्टम से जुड़ी मशीनें ऐसे वाहनों में ईंधन भरने से इनकार कर देंगी. पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी, जिसमें किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा.

हवा की हालत में मामूली सुधार
मंगलवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. हालांकि, यह सोमवार के 498 के स्तर से कुछ बेहतर रहा. सुप्रीम कोर्ट की ओर से GRAP-4 नियमों में आंशिक ढील दिए जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली है.

घने कोहरे का असर, दूसरे दिन भी उड़ानें रद्द
उत्तर भारत में घने कोहरे का असर विमान सेवाओं पर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला. खराब दृश्यता के कारण करीब 200 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि सैकड़ों उड़ानें देरी से संचालित हुईं. अकेले दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम 5.40 बजे तक लगभग 131 उड़ानें रद्द हो चुकी थीं.

 


‘जंगल सिर्फ पेड़ और बाघ नहीं हैं’: कर्नाटक ने जलवायु-लचीले भविष्य के लिए हरित शासन को नए सिरे से परिभाषित किया

वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग के प्रधान सचिव आईएफएस श्रीनिवासुलु का कहना है कि भारत के वन “कार्बन संतुलन की दोधारी तलवार” हैं और इन्हें आजीविका, जलवायु सुरक्षा और स्वयं प्रकृति से सीखने के इंजन के रूप में प्रबंधित किया जाना चाहिए

Last Modified:
Friday, 24 October, 2025
BWHindia

भारत के वनों को अब केवल वन्यजीवों के आवास या वृक्षावरण के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि ये मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र हैं, ऐसा कहना है श्रीनिवासुलु, आईएएस, प्रधान सचिव, कर्नाटक सरकार, वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग का। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज वन क्षेत्र जलवायु लचीलापन, ग्रामीण आजीविका और वैज्ञानिक नवाचार के संगम पर खड़ा है — और इसे “वैश्विक तापमान वृद्धि के खिलाफ लड़ाई में दोधारी तलवार” बताया।

“वन जलवायु पहल में एक प्रमुख क्षेत्र है — यह एक दोधारी तलवार है,” श्रीनिवासुलु ने समझाया. “वनों में वृद्धि कार्बन सिंक को बढ़ाती है, लेकिन वनों का क्षरण या आगजनी हज़ारों वर्षों से संचित कार्बन को मुक्त कर सकती है.”

पेरिस समझौते के बाद की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अपने 2.9 बिलियन टन के लक्ष्य में से लगभग 2.5 बिलियन टन कार्बन सिंक हासिल कर लिया है, जिसे उन्होंने “वन क्षेत्र का उल्लेखनीय प्रयास” बताया.
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि वन पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनका संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता होना चाहिए. “हमें वन क्षेत्र को बहुत सावधानी से संभालना होगा — यह या तो जलवायु परिवर्तन को कम कर सकता है या उसे बढ़ा सकता है,” उन्होंने कहा.

कर्नाटक की नई वन परिभाषा: पेड़ों और बाघों से आगे
कर्नाटक में सरकार पारंपरिक वन प्रबंधन की परिभाषा से आगे बढ़ रही है. “वन का मतलब केवल पेड़ और बाघ नहीं है,” श्रीनिवासुलु ने कहा. “हम आम आदमी के लिए एक व्यापक परिभाषा प्रस्तुत कर रहे हैं — जिसमें आजीविका, संस्कृति और जलवायु नियमन शामिल हैं.”

राज्य का दृष्टिकोण स्थानीय समुदायों के लिए संरक्षण को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने की दिशा में है, जिसमें इको-टूरिज्म और टिकाऊ वन-आधारित आजीविकाएं शामिल हैं। “इको-टूरिज्म फल-फूल रहा है। लोग बिना एसी और टाइल्स वाले एक जंगल लॉज के लिए रात का 30,000 रुपये भुगतान कर रहे हैं क्योंकि वे प्रकृति के बीच रहने का अनुभव महत्व देते हैं. यह दिखाता है कि संरक्षण एक आर्थिक उपकरण भी बन सकता है,” उन्होंने कहा.

कृषि और वनों को जोड़ते हुए श्रीनिवासुलु ने रेखांकित किया कि भारत की लगभग 30–40 प्रतिशत जनसंख्या अब भी कृषि पर निर्भर है, और दोनों “गहराई से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र” हैं। जलवायु परिवर्तन का संदेश प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिए उन्होंने कहा कि इसे किसानों की भाषा में समझाया जाना चाहिए.

“हमारा पारंपरिक कृषिपंचांग इसलिए काम करता था क्योंकि मौसम अनुमानित था. जलवायु परिवर्तन ने उस तालमेल को तोड़ दिया है — किसानों को यह अपने शब्दों में समझना होगा,” उन्होंने कहा, जोड़ते हुए कि कर्नाटक का वन विभाग “जलवायु लचीलापन को आम आदमी की शब्दावली में अनुवाद करने” पर काम कर रहा है.

COP21 पेरिस सम्मेलन में अपने योगदान को याद करते हुए श्रीनिवासुलु ने एक व्यक्तिगत उपलब्धि साझा की. उनका काली टाइगर रिज़र्व — जिसे पहले डांडेली अंशी कहा जाता था — पर बनाया गया वृत्तचित्र शांति संसारा वीडियो का हिस्सा था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया था. “उस वृत्तचित्र ने न सिर्फ अभयारण्य का नाम बदलने में मदद की बल्कि यह भी दिखाया कि नदी कैसे लोगों और जैव विविधता को आकार देती है. इसे COP21 में प्रदर्शित होते देखना सम्मान की बात थी,” उन्होंने कहा.

CSR को ‘कॉरपोरेट पर्यावरणीय दायित्व’ के रूप में पुनर्परिभाषित करना
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव के रूप में, श्रीनिवासुलु ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को कॉरपोरेट एनवायरनमेंटल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) में बदलने का आग्रह किया है. “उद्योगों को अस्पताल बनाने या किताबें बांटने से आगे बढ़ना चाहिए,” उन्होंने कहा. “उन्हें मिट्टी, वायु और जल की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना चाहिए — भूजल को पुनर्भरण करना चाहिए, अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को पास के गांवों तक बढ़ाना चाहिए और स्थानीय जलवायु प्रभावों को कम करना चाहिए। यही असली सामाजिक सेवा है.”

मानव–वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे पर श्रीनिवासुलु ने “360-डिग्री दृष्टिकोण” की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि कई संघर्ष इसलिए उत्पन्न होते हैं क्योंकि लोग वन क्षेत्रों के भीतर सीमित आजीविका विकल्पों के साथ रहते हैं.

“लोग सोचते हैं कि बुनियादी ढांचा उनकी समस्या है — सड़कें, स्कूल, बिजली — लेकिन असल में गरीबी ही मूल समस्या है,” उन्होंने कहा. “हमें उन्हें ऐसे रोजगार अवसरों से जोड़ना होगा जो अबाध्य वन क्षेत्रों के बाहर हों. गरीबी उन्मूलन से वनों पर दबाव कम होगा.”

‘वन एक जीवंत प्रयोगशाला है’
वनों को “जीवन की जीवंत प्रयोगशाला” बताते हुए श्रीनिवासुलु ने कहा कि जैव विविधता में भविष्य की चिकित्सा और तकनीकी खोजों के उत्तर निहित हैं. “आधुनिक दवाओं में से लगभग 25 प्रतिशत की उत्पत्ति वनों से हुई है,” उन्होंने बताया. “कल वह देश जो इस आनुवंशिक पुस्तकालय को संभालेगा, जैव प्रौद्योगिकी क्रांति का नेतृत्व करेगा — जैसे आज दुर्लभ धातुएं आईटी क्रांति को संचालित कर रही हैं.”

उन्होंने अंत में याद दिलाया: “वन हमें संतुलन सिखाते हैं. प्रकृति में प्रदूषण नहीं है क्योंकि वह हर चीज़ को पुनर्चक्रित करती है. हमें यह सीखना होगा — विविधता अपनाना, पुन: उपयोग करना और जीवन के चक्रों का सम्मान करना. संरक्षण कोई दान नहीं है; यह अस्तित्व है.”

TAGS Karnataka

त्योहारी सीजन में कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज? सरकार ने ई‑कॉमर्स कंपनियों पर कसा शिकंजा

त्योहारी सेल के दौरान ग्राहकों को लुभाने की कोशिशों के बीच अगर कंपनियां गलत तरीके अपनाती हैं तो सरकार सख्त कार्रवाई के लिए तैयार है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 04 October, 2025
Last Modified:
Saturday, 04 October, 2025
BWHindia

त्योहारी सीजन में जीएसटी कटौती से जहां बाजार में बिक्री के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, वहीं कुछ ई‑कॉमर्स कंपनियों की चालाकियों से उपभोक्ता परेशान हैं. दरअसल, 'कैश ऑन डिलीवरी' (COD) विकल्प पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने और रिफंड में देरी जैसी शिकायतों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है और इसे ‘डार्क पैटर्न’ करार देते हुए कहा है कि उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन पर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी.

"डार्क पैटर्न" के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को एक्स (X) पर एक पोस्ट करते हुए बताया है कि मंत्रालय को कई शिकायतें मिली हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां कैश ऑन डिलीवरी के लिए अतिरिक्त चार्ज ले रही हैं या जानबूझकर इस विकल्प को कम आकर्षक बना रही हैं. जोशी ने कहा, “इस तरह की गतिविधियों को ‘डार्क पैटर्न’ कहा जाता है, जिसमें उपभोक्ताओं को गुमराह कर उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है.” उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय इन प्लेटफॉर्म्स की गहराई से जांच कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

त्योहारी सीजन में बिक्री का रिकॉर्ड टूटा, पर ग्राहक परेशान

GST में कटौती के बाद उपभोक्ताओं को 400 से ज्यादा वस्तुएं सस्ते दामों पर मिल रही हैं. इसके चलते नवरात्र के दौरान सभी श्रेणियों में बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. कार, दोपहिया वाहन, बड़े स्क्रीन वाले टीवी और स्मार्टफोन जैसे प्रोडक्ट्स की बिक्री में भारी तेजी आई है. हालांकि, इस बिक्री उछाल के बीच कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनने पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्राहक इसे न चुनें. दूसरा शिकायत ये मिली है कि प्रीपेड ऑर्डर कैंसिल होने के बावजूद रिफंड में देरी हो रही है.

ई-कॉमर्स कंपनियों से मांगा गया जवाब

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में संबंधित ई-कॉमर्स कंपनियों से जवाब तलब किया जा रहा है. मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जीएसटी राहत और त्योहारों की बिक्री का वास्तविक लाभ ग्राहकों तक पहुंचे, न कि मुनाफाखोरी का जरिया बने.

ग्राहक अधिकारों के उल्लंघन पर नहीं होगी रियायत

सरकार ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि जीएसटी में दी गई राहत अगर उपभोक्ताओं को नहीं पहुंचाई जाती, तो उस पर वित्तीय दंड और कार्रवाई की जाएगी. मंत्रालय की फील्ड टीमें बाजार में सक्रिय हैं और ग्राहक शिकायतों की मॉनिटरिंग की जा रही है.

 

 


अगस्त में खुदरा महंगाई 2% के पार, एसबीआई रिसर्च ने दी राहत की उम्मीद

मानसून और खाद्य कीमतों से निकट भविष्य में दबाव, पर मध्यम अवधि में महंगाई घटने की उम्मीद जताई गई

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 September, 2025
Last Modified:
Saturday, 13 September, 2025
BWHindia

देश की खुदरा महंगाई अगस्त में 2 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कीमतों का दबाव धीरे-धीरे कम होगा. हालांकि निकट भविष्य में मानसूनी बारिश और खाद्य पदार्थों की कीमतें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नीतिगत राह को जटिल बना सकती हैं.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 1.55 प्रतिशत थी. खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में तेजी आने से यह वृद्धि दर्ज हुई. कोर इन्फ्लेशन 4.16 प्रतिशत पर पहुंच गया. ग्रामीण महंगाई 1.69 प्रतिशत रही, जबकि शहरी महंगाई 2.47 प्रतिशत दर्ज हुई.

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के बाद का परिदृश्य अपेक्षाकृत बेहतर दिख रहा है. रिपोर्ट का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी का असर कीमतों पर दिखेगा. “वित्त वर्ष 2026-27 में सीपीआई महंगाई 65 से 75 आधार अंकों तक कम हो सकती है. इसमें आवश्यक वस्तुओं पर 25-30 आधार अंकों और सेवाओं पर 40-45 आधार अंकों की गिरावट शामिल होगी.”

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना जैसे प्रमुख फसल उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से निकट भविष्य में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. 1 अगस्त से 11 सितंबर तक राष्ट्रीय वर्षा सामान्य से 8.7 प्रतिशत अधिक रही, जबकि कुछ राज्यों में यह 100 प्रतिशत से भी ऊपर दर्ज हुई.

“यह चिंता की बात है क्योंकि प्रभावित राज्य भारत के बड़े खरीफ फसल उत्पादक हैं,” एसबीआई रिसर्च ने कहा. हालांकि, देश के सबसे बड़े अनाज उत्पादक उत्तर प्रदेश में अब तक मौसम की चरम स्थितियों से बचाव रहा है.

क्षेत्रीय स्तर पर महंगाई में बड़ा अंतर देखा गया. अगस्त में 35 में से 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महंगाई 4 प्रतिशत से नीचे रही. वहीं केरल में नारियल तेल की कीमतों और व्यक्तिगत देखभाल व सोने के उच्च भार के चलते महंगाई 9.04 प्रतिशत पर पहुंच गई. लक्षद्वीप एकमात्र ऐसा अन्य क्षेत्र रहा जहां महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर रही.

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में महंगाई दर 2 प्रतिशत के स्तर से थोड़ी ही ऊपर रही है, लेकिन आरबीआई द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है. “अगस्त का आंकड़ा थोड़ा ऊंचा रहने के कारण अक्टूबर में दर कटौती मुश्किल दिख रही है. यहां तक कि दिसंबर में भी दर कटौती कठिन होगी यदि पहली और दूसरी तिमाही की वृद्धि के आंकड़े देखें जाएं,” रिपोर्ट में कहा गया.

कुल मिलाकर बैंक ने निष्कर्ष निकाला कि मौसम की अनिश्चितता और खाद्य कीमतों की अस्थिरता से अल्पकालिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं. लेकिन मध्यम अवधि में महंगाई का रुख अनुकूल दिखता है, जो भविष्य में केंद्रीय बैंक को नीति निर्धारण के लिए पर्याप्त गुंजाइश देगा.

TAGS bw-hindi

वित्तीय संकट में Good Glamm Group, संस्थापक Darpan Sanghvi ने स्वीकारा हालात बिगड़े

एक अधूरी डील ने बढ़ाई पूंजी संकट की मुश्किलें, कर्मचारियों और विक्रेताओं के भुगतान पर असर

Last Modified:
Saturday, 05 July, 2025
BWHindia

पर्सनल केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में चर्चित Good Glamm Group इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्पण संघवी ने सार्वजनिक रूप से कंपनी की कठिन आर्थिक स्थिति को स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि एक अधूरी ब्रांड बिक्री डील ने कंपनी की नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) और परिचालन व्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है.

संघवी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कंपनी एक ब्रांड बिक्री को अंतिम रूप देने के करीब थी, जिससे जरूरी पूंजी प्राप्त होती, लेकिन डील उस वक्त टूट गई जब अधिग्रहण करने वाली कंपनी के सीईओ ने अंतिम क्षणों में इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस घटनाक्रम को “गट पंच” यानी भावनात्मक झटका करार दिया और कहा कि इसके बाद कंपनी को नए निवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा.

इस संकट के चलते Good Glamm Group समय पर वेतन और विक्रेताओं का भुगतान नहीं कर पाया है. पूर्व में खबर आई थी कि कंपनी ने दो महीने से अधिक समय तक कर्मचारियों का वेतन रोके रखा था। साथ ही, जिन कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया है, उन्हें फुल एंड फाइनल सेटलमेंट भी नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

हाल ही में कई वरिष्ठ अधिकारी भी कंपनी से विदा ले चुके हैं. WYN Beauty के पूर्व चीफ पीपल ऑफिसर और बोर्ड सदस्य कार्तिक राव अब भर्ती मंच Vahan.ai से जुड़ गए हैं.

कंपनी ने लागत घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं. दिल्ली के वसंत कुंज कार्यालय को बंद कर पहले ग्रेटर कैलाश में स्थानांतरित किया गया और फिर रिमोट वर्क मॉडल अपनाया गया. Good Glamm Group अपने पोर्टफोलियो में शामिल कई ब्रांड्स को बेचने या हिस्सेदारी घटाने की कोशिश कर रहा है.

फरवरी में, कंपनी ने Sirona को लगभग Rs 150 करोड़ में उसके मूल संस्थापकों को वापस बेच दिया, जबकि इसका अधिग्रहण Rs 450 करोड़ में किया गया था. इसी तरह, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ScoopWhoop को महज Rs 18-20 करोड़ में WLDD को बेचा गया – जो 2021 की वैल्यूएशन के मुकाबले काफी कम है.

अन्य बिक्री में MissMalini Entertainment को Creativefuel को बेचना और Organic Harvest में अपनी हिस्सेदारी मूल प्रमोटरों को बेचने की बातचीत शामिल है. The Moms Co और POPxo को लेकर भी विकल्पों पर विचार चल रहा है.

मार्च 2025 में, Good Glamm Group ने अपने मौजूदा निवेशकों – Warburg Pincus, Prosus Ventures, Bessemer Venture Partners, और Accel – से USD 30 मिलियन का निवेश जुटाया ताकि तत्काल कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके. हालांकि, एक बड़े फॉलो-ऑन राउंड की अभी भी प्रतीक्षा है.

TAGS bw-hindi

आधार ऑथेंटिकेशन ने छुआ नया शिखर, जून 2025 में दर्ज हुए रिकॉर्ड 229.33 करोड़ ट्रांजैक्शन

फेस ऑथेंटिकेशन में तीन गुना वृद्धि, कुल ऑथेंटिकेशन 15,452 करोड़ पार; UIDAI ने डिजिटल समावेशन में आधार की भूमिका को बताया अहम

Last Modified:
Friday, 04 July, 2025
BWHindia

आधार कार्डधारकों ने जून 2025 में रिकॉर्ड 229.33 करोड़ ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन किए, जो न सिर्फ मई 2025 की तुलना में अधिक है, बल्कि जून 2024 के मुकाबले 7.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि भी दर्शाता है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किए गए आंकड़े आधार की भूमिका को भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के मजबूत स्तंभ के रूप में रेखांकित करते हैं.

अब तक कुल आधार आधारित ऑथेंटिकेशन की संख्या 15,452 करोड़ को पार कर चुकी है. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधार कैसे सेवाओं की डिलीवरी को सुगम, सटीक और समावेशी बना रहा है.

जून 2025 में AI/ML-सक्षम फेस ऑथेंटिकेशन ने जबरदस्त वृद्धि दर्ज की. इस महीने 15.87 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन हुए, जबकि जून 2024 में यह संख्या 4.61 करोड़ थी—यानी तीन गुना से भी अधिक वृद्धि. अब तक इस ऑथेंटिकेशन मोड का उपयोग 175 करोड़ बार किया जा चुका है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है.

एक UIDAI अधिकारी ने कहा, “फेस ऑथेंटिकेशन आधारधारकों को एक सुरक्षित और बाधारहित पहचान सत्यापन का तरीका देता है, जिसमें सिर्फ एक फेस स्कैन से काम हो जाता है.” यह सुविधा 100 से अधिक सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों, तेल कंपनियों और टेलीकॉम प्रदाताओं द्वारा बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है.

जून 2025 में 39.47 करोड़ ई-KYC ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए. बैंकिंग, एनबीएफसी और टेलीकॉम क्षेत्रों में ग्राहक को तेज़ी से जोड़ने और परिचालन लागत कम करने के लिए ई-KYC एक प्रभावी माध्यम बन चुका है.

UIDAI के अनुसार, ये आंकड़े यह साबित करते हैं कि आधार न केवल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है, बल्कि नागरिकों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

सार रूप में, आधार ऑथेंटिकेशन और ई-KYC में लगातार हो रही वृद्धि डिजिटल समावेशन, सरकारी सेवा डिलीवरी और निजी क्षेत्र की दक्षता को एक नई दिशा दे रही है.

TAGS bw-hindi

आज 1 मई से लागू हुए ये 5 बड़े बदलाव, आम आदमी की जेब पर सीधा असर

1 मई 2025 से रसोई गैस, एटीएम चार्ज, रेलवे टिकट और बैंकिंग नियमों में बदलाव होंगे. जानिए ये 5 बड़े बदलाव आपकी जेब और जीवन पर कैसे असर डालेंगे.

Last Modified:
Thursday, 01 May, 2025
BWHindia

आज 1 मई के साथ नए महीने की शुरुआत हो चुकी है. इसी के साथ कई अहम बदलाव भी देश में आज से लागू हो गए हैं. आज से एटीएम ट्रांजैक्‍शन चार्जेज से लेकर दूध और सिलेंडर की कीमतों तक, कई चीजोंं के दाम को संशोधित किया गया है. वहीं रेलवे टिकट बुकिंग से जुड़े नियम में भी बड़ा बदलाव आज से लागू हो गया है. इनका सीधा असर आपकी जेब और जिंदगी पर पड़ेगा. आइए जानते हैं कि मई के पहले दिन देश में क्‍या-क्‍या बदल गया.

1. रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें

हर महीने की तरह, 1 मई 2025 को भी तेल कंपनियां रसोई गैस (14 किलो) और कमर्शियल गैस सिलेंडर (19 किलो) की कीमतों को अपडेट करेंगी. पिछले महीने रसोई गैस की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि कमर्शियल सिलेंडर सस्ता हुआ था. इस बार लोग उम्मीद कर रहे हैं कि रसोई गैस के दाम कम हों, जिससे घर का बजट थोड़ा राहत पाए.

2. सीएनजी, पीएनजी और हवाई ईंधन के दाम

1 मई से सीएनजी, पीएनजी, और हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में बदलाव हो सकता है. तेल कंपनियां हर महीने इनके दाम अपडेट करती हैं. अगर सीएनजी के दाम बढ़ते हैं, तो गाड़ी चलाने का खर्च बढ़ेगा. पीएनजी महंगी होने से घरेलू गैस बिल पर असर पड़ेगा. साथ ही, हवाई ईंधन के दाम बढ़ने से हवाई यात्रा की टिकटें महंगी हो सकती हैं.

3. एटीएम से पैसे निकालना होगा महंगा

अगर आप एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो 1 मई से ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एटीएम इंटरचेंज फीस बढ़ाने की अनुमति दी है. इसका मतलब है कि अगर आप अपने बैंक के अलावा किसी दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं, तो हर बार ज्यादा चार्ज लगेगा. उदाहरण के लिए, HDFC बैंक ने बताया कि फ्री लिमिट से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर शुल्क 21 रुपये + टैक्स से बढ़कर 23 रुपये + टैक्स हो जाएगा. बैलेंस चेक करने का शुल्क भी 6 रुपये से बढ़कर 7 रुपये होगा.

4. रेलवे टिकट बुकिंग के नए नियम

1 मई 2025 से भारतीय रेलवे के टिकट बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव हो रहा है. अब वेटिंग टिकट सिर्फ जनरल कोच में ही मान्य होगा. यानी, आप वेटिंग टिकट के साथ स्लीपर या AC कोच में यात्रा नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा, एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) को 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दिया गया है. इसका मतलब है कि आप अब सिर्फ 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर पाएंगे.

5. ‘वन स्टेट-वन RRB’ योजना लागू

1 मई से 11 राज्यों में ‘One State-One RRB’ योजना शुरू हो रही है. इसके तहत हर राज्य में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनाया जाएगा. इससे बैंकिंग सेवाएं बेहतर होंगी और ग्राहकों को ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी. यह योजना उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लागू होगी.