कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े बैंकों के मुकाबले अधिक ब्याज दरों की पेशकश करते हैं. हालांकि, ब्याज दर बैंक, जमा की अवधि और ग्राहक की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
एक साल के लिए 1 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं. सूर्योदय और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक साल की एफडी पर 7.25% सालाना ब्याज मिल रहा है, जबकि जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की ब्याज दर 7% है. इन दरों के आधार पर जानिए कि एक साल बाद किस बैंक में आपका पैसा कितना हो सकता है.
एफडी पर कितना ब्याज दे रहे हैं बैंक?
बैंक में एफडी निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प है, क्योंकि इसमें तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है और उस पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज मिलता है. कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े बैंकों के मुकाबले अधिक ब्याज दरों की पेशकश करते हैं. हालांकि, ब्याज दर बैंक, जमा की अवधि और ग्राहक की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.
यहां तीन स्मॉल फाइनेंस बैंकों की एक साल की एफडी पर मिलने वाले ब्याज की तुलना की गई है.
1. सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: एक साल की एफडी पर 7.25% सालाना ब्याज दर.
2. उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: एक साल की एफडी पर 7.25% सालाना ब्याज दर.
3. जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: एक साल की एफडी पर 7% सालाना ब्याज दर.
1 लाख रुपये की एफडी पर एक साल में कितना मिलेगा?
अगर कोई ग्राहक सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक साल के लिए 1 लाख रुपये की एफडी करता है, तो दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मैच्योरिटी पर उसे करीब 1,07,450 रुपये मिल सकते हैं. यानी ब्याज के रूप में लगभग 7,450 रुपये मिलेंगे.
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी 7.25% की ब्याज दर के आधार पर एक लाख रुपये की एफडी पर मैच्योरिटी राशि करीब 1,07,450 रुपये बताई गई है.
वहीं, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक साल की एफडी पर 7% ब्याज दर के हिसाब से मैच्योरिटी राशि करीब 1,07,186 रुपये हो सकती है. इस तरह, इन तीनों बैंकों की तुलना में सूर्योदय और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की ब्याज दर सबसे अधिक है.
तीनों बैंकों की एफडी पर एक नजर
सूर्योदय और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की एक साल की एफडी पर ब्याज दर 7.25% है, जबकि जना स्मॉल फाइनेंस बैंक 7% ब्याज दे रहा है. हालांकि, एफडी की वास्तविक मैच्योरिटी राशि बैंक की ब्याज गणना पद्धति, भुगतान की शर्तों और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकती है.
एफडी कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
एफडी में निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा ब्याज दर, जमा की अवधि, समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाले जुर्माने और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर लें. वरिष्ठ नागरिकों को कुछ बैंकों में सामान्य ग्राहकों की तुलना में अतिरिक्त ब्याज भी मिल सकता है.
स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनते समय केवल ब्याज दर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. बैंक की शर्तों, जमा बीमा की पात्रता और अपनी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. एफडी पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य भी हो सकता है.
नई साझेदारी से निवेशकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी बॉन्ड की जानकारी, विकल्पों की तुलना और निवेश की सुविधा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बॉन्ड में निवेश को आसान और सुलभ बनाने के लिए PB मनी को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर (OBPP) का लाइसेंस मिला है. कंपनी पैसाबाजार के साथ रणनीतिक साझेदारी के जरिए निवेशकों को बॉन्ड से जुड़ी जानकारी हासिल करने, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करने और निवेश की प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा देगी. इस पहल का उद्देश्य रिटेल निवेशकों के बीच बॉन्ड निवेश के प्रति जागरूकता बढ़ाना और फिक्स्ड इनकम के विकल्पों तक उनकी पहुंच आसान बनाना है.
एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी निवेश की सुविधा
OBPP लाइसेंस मिलने के बाद PB मनी निवेशकों को बॉन्ड में निवेश की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करा सकेगा. इसमें रजिस्ट्रेशन और केवाईसी (KYC) से लेकर बॉन्ड की जानकारी, निवेश विकल्पों का मूल्यांकन, ऑर्डर देना, भुगतान और निवेश के बाद मिलने वाली सेवाएं शामिल हैं. इससे निवेशकों को अलग-अलग प्रक्रियाओं के लिए कई प्लेटफॉर्म का सहारा लेने की जरूरत कम होगी.
निवेशक PB मनी के प्लेटफॉर्म पर बॉन्ड की यील्ड यानी संभावित रिटर्न, क्रेडिट रेटिंग और न्यूनतम निवेश राशि जैसे मानकों के आधार पर विभिन्न विकल्पों की तुलना कर सकेंगे. इससे उन्हें उपलब्ध विकल्पों को समझने और अपनी वित्तीय जरूरतों के अनुरूप निवेश संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी.
रिटेल निवेशकों तक बॉन्ड की पहुंच बढ़ाने पर जोर
बॉन्ड निवेशकों को नियमित ब्याज आय का अवसर देने के साथ उनके निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने का विकल्प भी उपलब्ध कराते हैं. हालांकि, रिटेल निवेशकों के बीच इस निवेश विकल्प को लेकर जागरूकता अभी सीमित है. ऐसे में PB मनी और पैसाबाज़ार की साझेदारी के जरिए अधिक निवेशकों तक पहुंचने और उन्हें बॉन्ड निवेश के बारे में जानकारी देने की कोशिश की जाएगी.
इस साझेदारी के तहत निवेशक बॉन्ड के विभिन्न विकल्पों को समझ सकेंगे, उनकी तुलना कर सकेंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. इससे बॉन्ड बाजार में व्यक्तिगत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
निवेश के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की योजना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, PB मनी की डायरेक्टर और पैसाबाजार की सीईओ संतोष अग्रवाल ने कहा, “हमारा लक्ष्य लोगों की बदलती वित्तीय जरूरतों को समझना और उन्हें पूरा करने में उनकी मदद करना है. निवेश भी उनकी वित्तीय जरूरतों का एक अहम हिस्सा है. भारत में बॉन्ड फिक्स्ड इनकम में निवेश का एक महत्वपूर्ण विकल्प है, लेकिन अभी भी कई रिटेल निवेशकों को इस बारे में कम जानकारी है.
उन्होंने कहा कि PB मनी को OBPP लाइसेंस मिलना बॉन्ड में निवेश की पूरी प्रक्रिया को आसान और सहज बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. इससे लोगों को बॉन्ड के बारे में जानकारी प्राप्त करने, उनके विकल्पों को समझने और उनकी तुलना करने में मदद मिलेगी, ताकि वे अपने निवेश के फैसले बेहतर तरीके से ले सकें. उपभोक्ताओं की बदलती वित्तीय जरूरतों के साथ कंपनी उनके लिए निवेश के अधिक विकल्प सुलभ बनाने की व्यापक संभावनाएं देखती है.
PB मनी का फोकस बॉन्ड निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाने और निवेशकों के लिए फिक्स्ड इनकम से जुड़े अधिक विकल्प उपलब्ध कराने पर है. कंपनी के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशक बॉन्ड की विशेषताओं का मूल्यांकन कर अपनी वित्तीय जरूरतों और निवेश लक्ष्यों के अनुरूप फैसले ले सकेंगे.
इस साल जनवरी में घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. मौजूदा भाव उस रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गांधी जयंती के दिन सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिली है. दिल्ली में 2 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,49,400 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 22 कैरेट सोना 1,36,940 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इस सप्ताह सोने की कीमत में करीब 2,800 रुपये यानी लगभग 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. चांदी की कीमत भी कमजोर हुई है और यह 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है.
दिल्ली में 22 और 24 कैरेट सोने का भाव
राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,49,400 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, 22 कैरेट सोना 1,36,940 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत में 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी.
अन्य प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है. मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,49,230 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,36,790 रुपये प्रति 10 ग्राम है. चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और बेंगलुरु में भी 24 कैरेट सोने का भाव 1,49,230 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,36,790 रुपये प्रति 10 ग्राम है.
जयपुर और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव 1,49,400 रुपये, जबकि 22 कैरेट सोना 1,36,940 रुपये प्रति 10 ग्राम है. अहमदाबाद और भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,49,280 रुपये और 22 कैरेट 1,36,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.29 डॉलर प्रति औंस पर है. अमेरिकी महंगाई के कमजोर आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीदें कम हुई हैं. इससे वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को कुछ समर्थन मिला है.
हालांकि, घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों से तय नहीं होतीं. रुपये की चाल, आयात लागत, स्थानीय मांग और अन्य घरेलू कारकों का भी इन पर असर पड़ता है.
HSBC ने घटाया सोने की कीमत का अनुमान
रॉयटर्स के मुताबिक, HSBC ने 2026 और 2027 के लिए सोने की औसत कीमत के अनुमान में कटौती की है. बैंक ने 2026 के लिए औसत अनुमान घटाकर 4,490 डॉलर प्रति औंस और 2027 के लिए 4,825 डॉलर प्रति औंस कर दिया है.
HSBC का मानना है कि निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, कीमतों में बड़ी गिरावट की स्थिति में केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों को सहारा मिल सकता है.
चांदी की कीमत भी फिसली
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है. 2 अक्टूबर की सुबह घरेलू बाजार में चांदी 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 60.51 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है. इस साल जनवरी में घरेलू बाजार में चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. मौजूदा भाव उस रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है.
एनएसई इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट को बढ़ावा देने के लिए 15 अक्टूबर से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा. एक्सचेंज अगले एक साल में संग्रह केंद्रों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) को आम निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की तैयारी कर रहा है. एक्सचेंज 15 अक्टूबर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा, जिसके तहत निवेशक अधिकृत संग्रह केंद्रों पर फिजिकल सोना जमा कर उसे इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट में बदल सकेंगे. सोने की शुद्धता और वजन की जांच पूरी होने के बाद ईजीआर कुछ ही घंटों में निवेशक के डीमैट खाते में दिखाई देगी.
15 अक्टूबर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
एनएसई की योजना शुरुआत में एक से दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट चलाने की है. इसके बाद इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा. एक्सचेंज के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन के अनुसार, शुरुआती चरण में करीब 50 से 100 अतिरिक्त संग्रह केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है.
एनएसई की योजना अगले एक साल में अधिकृत संग्रह केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाकर 1,000 से अधिक करने की है. आगे चलकर इनकी संख्या कुछ हजार तक पहुंचाने की संभावना भी जताई गई है. ये केंद्र देश के अलग-अलग शहरों में स्थापित किए जाएंगे.
फिजिकल सोने से ईजीआर बनने तक क्या होगा?
पायलट प्रोजेक्ट के तहत निवेशक अपना फिजिकल सोना अधिकृत संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे. केंद्र पर सोने के वजन और शुद्धता की जांच की जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके बराबर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट तैयार की जाएगी, जो निवेशक के डीमैट खाते में दिखाई देगी.
इसके बाद निवेशक इन ईजीआर का एनएसई के ईजीआर सेगमेंट में कारोबार कर सकेंगे. यानी फिजिकल सोने को घर या लॉकर में रखने के बजाय निवेशक उसके स्वामित्व को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखकर एक्सचेंज पर खरीद-बिक्री कर सकेंगे.
छह मूल्यवर्ग में उपलब्ध कराने की तैयारी
ईजीआर को छोटे निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए एनएसई छह मूल्यवर्ग पेश करने की योजना बना रहा है. इनमें 10 मिलीग्राम, 100 मिलीग्राम, 1 ग्राम, 10 ग्राम, 100 ग्राम और 1 किलोग्राम के ई-गोल्ड शामिल होंगे.
एक्सचेंज के मुताबिक, छोटे मूल्यवर्ग से खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. साथ ही, इससे बाजार में ईजीआर की मांग और कारोबार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
ऐप के जरिए भी खरीद-बिक्री की सुविधा
एनएसई 15 अक्टूबर से खुदरा ट्रेडरों और निवेशकों को अपने ऐप के जरिए भी ईजीआर खरीदने और बेचने की सुविधा देने की योजना बना रहा है. इससे ईजीआर बाजार तक छोटे निवेशकों की पहुंच बढ़ सकती है.
ईजीआर ऐसी डीमैट प्रतिभूतियां हैं, जो मान्यता प्राप्त डिपॉजिटरी या तिजोरियों में सुरक्षित रखे गए फिजिकल सोने के स्वामित्व को दर्शाती हैं. इन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है और एक्सचेंज पर इनका कारोबार किया जा सकता है.
अब तक बेहद कम रहा है ईजीआर में कारोबार
एनएसई ने मई में ईजीआर सेगमेंट शुरू किया था, लेकिन शुरुआत के बाद से इसमें कारोबार सीमित रहा है. सितंबर में इस सेगमेंट में रोजाना कारोबार करीब 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये के बीच रहा. इस दौरान प्रतिदिन ट्रेड की संख्या भी करीब 50 रही.
कम कारोबार को देखते हुए एनएसई के सामने ईजीआर बाजार को दो तरफ से विकसित करने की चुनौती है. एक ओर एक्सचेंज को बुलियन विक्रेताओं के जरिए फिजिकल सोने को ईजीआर में बदलने की मात्रा बढ़ानी होगी, वहीं दूसरी ओर छोटे मूल्यवर्ग के जरिए खुदरा निवेशकों के बीच मांग पैदा करनी होगी.
रिफाइनर और तिजोरी प्रबंधकों के साथ करेगा समझौता
ईजीआर व्यवस्था को विस्तार देने के लिए एनएसई रिफाइनरों, गुणवत्ता परखने वाली एजेंसियों, तिजोरी प्रबंधकों और डिपॉजिटरी के साथ समझौते करेगा. इसका उद्देश्य फिजिकल गोल्ड के जमा होने से लेकर ईजीआर बनने और उसके डीमैट खाते में पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाना है.
एक्सचेंज के लिए यह भी जरूरी होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पर्याप्त संग्रह केंद्र उपलब्ध हों, ताकि निवेशकों और बुलियन कारोबारियों के लिए फिजिकल गोल्ड को ईजीआर में बदलना आसान हो सके.
कर व्यवस्था में बदलाव से बढ़ सकती है मांग
उद्योग का मानना है कि ईजीआर को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए कर संबंधी मुद्दों का समाधान जरूरी होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सचेंजों को दोहरे कराधान से बचने के लिए जीएसटी से जुड़े मुद्दे को नियामकों के सामने उठाना चाहिए. जब तक इस संबंध में स्पष्टता नहीं आती, तब तक ईजीआर की मांग पर दबाव बना रह सकता है. ऐसे में एनएसई का नया पायलट प्रोजेक्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि फिजिकल गोल्ड और एक्सचेंज आधारित इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड के बीच निवेशकों के लिए कितना व्यावहारिक जुड़ाव बन पाता है.
CBDT के फैसले के बाद असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट और इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिली है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने उन करदाताओं के लिए डेडलाइन बढ़ा दी है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है. अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 21 अक्टूबर 2026 तक और संबंधित इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिए 21 नवंबर 2026 तक का समय मिलेगा.
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की नई डेडलाइन
CBDT के फैसले के बाद असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है. यानी टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं को अब 21 दिन की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी. इन मामलों में संबंधित ऑडिट रिपोर्ट आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर दाखिल की जाती है. आयकर विभाग के अनुसार, AY 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के लिए अभी इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल किए जाते हैं.
ऑडिट केस में ITR की डेडलाइन भी बढ़ी
टैक्स ऑडिट वाले मामलों में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख भी बढ़ाई गई है. पहले ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दिया गया है. इस तरह टैक्स ऑडिट कराने वाले करदाताओं को पहले ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 21 अक्टूबर तक और उसके बाद ITR दाखिल करने के लिए 21 नवंबर तक का समय मिलेगा.
किन्हें मिलेगा फायदा?
यह राहत मुख्य रूप से उन व्यक्तियों, कारोबारियों और अन्य करदाताओं के लिए है, जिनके खातों का इनकम टैक्स कानून के तहत ऑडिट कराना जरूरी है. आयकर विभाग के अनुसार, टैक्स ऑडिट की आवश्यकता कारोबार और पेशे से होने वाली आय तथा निर्धारित शर्तों के आधार पर तय होती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बदलाव असेसमेंट ईयर 2026-27 से जुड़े ऑडिट मामलों के लिए है. इसलिए टैक्सपेयर्स और टैक्स प्रोफेशनल्स को नई डेडलाइन के अनुसार अपनी ऑडिट रिपोर्ट और ITR दाखिल करने की तैयारी करनी होगी.
IRDAI ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. इसके जरिए ग्राहक बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और वितरक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक जगह देख सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बीमा नियामक आईआरडीएआई (IREDAI) ने बीमा की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. नए प्रस्तावों में पहले साल मिलने वाले ऊंचे कमीशन को कम करने, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर एजेंटों की जवाबदेही तय करने, ऋण के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक और ग्राहकों को एजेंट का रिकॉर्ड देखने की सुविधा देने जैसे कदम शामिल हैं. नए नियमों को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक सुझावों और मसौदा नियमों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा.
पहले साल के भारी कमीशन पर लगाम की तैयारी
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई ने 23 सितंबर को बीमा वितरण की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर दो हिस्सों वाला परामर्श पत्र जारी किया है. इसमें बीमा कंपनियों की वितरण लागत, कमीशन और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है.
आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ ने कहा है कि बीमा में गलत बिक्री की एक बड़ी वजह पहले साल मिलने वाला ऊंचा कमीशन है. उनके मुताबिक, नए कारोबार पर पहले साल एजेंट का कमीशन 40 से 50 फीसदी तक हो सकता है, जबकि पॉलिसी के जारी रहने से जुड़ा प्रोत्साहन अपेक्षाकृत कम होता है. इससे बिक्री पर ज्यादा जोर पड़ने की आशंका रहती है.
प्रस्तावित व्यवस्था में पहले साल के कमीशन को कम करने और पॉलिसी के नवीनीकरण के साथ कमीशन का अधिक हिस्सा देने की दिशा में बदलाव सुझाया गया है. इसका उद्देश्य केवल बिक्री पर ध्यान देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और ग्राहक के लिए उपयुक्त बीमा उत्पाद बेचने पर जोर देना है.
ग्राहकों को मिल सकता है एजेंट का रिकॉर्ड देखने का अधिकार
आईआरडीएआई ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. इसके जरिए ग्राहक बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और वितरक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक जगह देख सकेंगे. अजय सेठ के मुताबिक, ग्राहकों को अपने बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और बीमा वितरक के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का विचार है. इसमें उत्पादों की उपलब्धता और प्रदर्शन, बीमा कंपनी या वितरक के खिलाफ शिकायतों तथा दावों के निपटारे से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है.
प्रस्ताव में पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को संबंधित पॉलिसी से जोड़ने और गलत बिक्री की घटनाओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का भी प्रावधान सुझाया गया है. इसके अलावा, गलत बिक्री साबित होने पर एजेंट को पहले दिया गया कमीशन वापस लेने का प्रस्ताव भी है.
ऋण के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक
आईआरडीएआई ने बीमा को दूसरे वित्तीय उत्पादों के साथ जबरन जोड़ने की प्रथा पर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा है. खासतौर पर बैंक या अन्य ऋणदाता द्वारा ऋण के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक लगाने की दिशा में नियम प्रस्तावित किए गए हैं.
अजय सेठ के मुताबिक, कोई ऋणदाता अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर जीवन बीमा की मांग कर सकता है, लेकिन उस बीमा प्रीमियम से कमीशन कमाने की उम्मीद नहीं कर सकता. हालांकि, ऐसा पैकेज जिसमें कर्ज लेने वाले और ऋणदाता दोनों के लिए स्पष्ट लाभ हो, कुछ शर्तों के साथ स्वीकार्य हो सकता है.
ऑनलाइन बीमा खरीदते समय 'डार्क पैटर्न' पर भी नजर
नए प्रस्तावों में ऑनलाइन बीमा बिक्री में इस्तेमाल होने वाले भ्रामक डिजिटल तरीकों पर भी रोक लगाने की बात कही गई है. उदाहरण के तौर पर, ग्राहक को केवल प्रीमियम की कीमत जानने के लिए मोबाइल नंबर देने के लिए मजबूर करना और उसके बाद लगातार प्रचारात्मक फोन करना चिंता का विषय माना गया है.
आईआरडीएआई का कहना है कि बीमा की कीमत और उत्पाद से जुड़ी जानकारी ग्राहकों के लिए आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए. ग्राहक को ऐसी जानकारी देने या ऐसा विकल्प चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जिसे वह लेना नहीं चाहता.
बीमा कंपनियों के खर्च में भी कटौती का प्रस्ताव
आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों के प्रबंधन खर्च को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव रखा है. जीवन बीमा कंपनियों के लिए कंपनी स्तर पर प्रबंधन खर्च की सीमा को दो साल में 15 फीसदी और पांच साल में 12.5 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है. वहीं सामान्य बीमा में पांच साल में प्रबंधन खर्च की सीमा को सकल प्रत्यक्ष लिखित प्रीमियम के 20 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है.
अजय सेठ ने कहा है कि लागत में होने वाली बचत का लाभ पॉलिसीधारकों तक पहुंचना चाहिए. यह कम प्रीमियम, प्रीमियम बढ़ोतरी की धीमी दर, बचत आधारित बीमा उत्पादों में बेहतर रिटर्न या सामान्य बीमा में बेहतर दावा अनुपात के रूप में सामने आ सकता है.
कब लागू हो सकते हैं नए नियम?
फिलहाल ये प्रस्ताव परामर्श पत्र के स्तर पर हैं. सार्वजनिक और उद्योग से सुझाव मिलने के बाद मसौदा नियम जारी किए जाएंगे और उसके बाद अंतिम नियम अधिसूचित होंगे. अजय सेठ के अनुसार, नए ढांचे को 1 जनवरी 2027 या 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है. सार्वजनिक टिप्पणियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं.
इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए ये बदलाव प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम नियम नहीं. अंतिम व्यवस्था मसौदा और सार्वजनिक सुझावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी.
कंपनी के अनुसार, भारत में वर्ष 2030 तक करीब 2.2 करोड़ अतिरिक्त घरों की मांग बढ़ने का अनुमान है. वहीं, मौजूदा समय में देश में आवास ऋण लेने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कम आय वाली महिलाओं के लिए घर खरीदना आसान बनाने के उद्देश्य से आईआईएफएल होम फाइनेंस लिमिटेड (IIFL) और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के बीच 15 करोड़ डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. इस समझौते के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) की पात्र महिलाओं को आवास ऋण उपलब्ध कराया जाएगा.
जेआईसीए से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल आईआईएफएल होम फाइनेंस के जरिए शहरी और शहरों के आसपास के इलाकों में घर खरीदने वाली कम आय वाली महिलाओं को कर्ज देने के लिए किया जाएगा. इस परियोजना में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और एमयूएफजी बैंक समेत अन्य वित्तीय संस्थानों की भी भागीदारी होगी.
कंपनी के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य कम आय वाली महिलाओं तक आवास वित्त की पहुंच बढ़ाना है. समझौते के तहत जेआईसीए की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली राशि पात्र महिला ग्राहकों को आवास ऋण के रूप में दी जाएगी.
आईआईएफएल होम फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गिरीश कौसगी ने कहा कि जेआईसीए के साथ यह पहल कम आय वाली अधिक महिलाओं तक आवास ऋण पहुंचाने में मदद करेगी. उनके मुताबिक, अपना घर होने से महिलाओं और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है और जीवन स्तर में सुधार हो सकता है.
कंपनी के अनुसार, भारत के शहरी क्षेत्रों में एक करोड़ से अधिक घरों की कमी है. वर्ष 2030 तक करीब 2.2 करोड़ अतिरिक्त घरों की मांग बढ़ने का अनुमान है. वहीं, मौजूदा समय में देश में आवास ऋण लेने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है.
आवास वित्त क्षेत्र में प्रशिक्षण पर भी जोर
इस समझौते के तहत केवल ऋण उपलब्ध कराने तक ही पहल सीमित नहीं रहेगी. जेआईसीए, जापान हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी और अन्य साझेदार भारतीय आवास वित्त क्षेत्र से जुड़े नियामकों तथा आईआईएफएल होम फाइनेंस के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करने की योजना बना रहे हैं.
प्रशिक्षण में किफायती आवास और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण के तरीकों से जुड़े विषय शामिल होंगे. कंपनी के मुताबिक, यह पहल भारत सरकार के 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य के अनुरूप है.
इसमें समझौते की राशि, लाभार्थी वर्ग और आवास ऋण की पहुंच को शुरुआत में रखा गया है, जबकि प्रशिक्षण और ‘सभी के लिए आवास’ वाला हिस्सा खबर के अंत में बैकग्राउंड के रूप में रखा गया है.
नए नियमों में 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली बल्क डिपॉजिट को भी शामिल किया गया है. ऐसे डिपॉजिट के लिए बैंक को हर दिन अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दर अपडेट करनी होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं, जिनका मकसद बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है. नए नियमों के तहत बैंकों को अपनी FD योजनाओं की ब्याज दरें पहले से अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होंगी. इसके अलावा 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क डिपॉजिट के लिए बैंकों को हर कारोबारी दिन सुबह 10 बजे तक नई ब्याज दरें वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी. हालांकि, पहले से चल रही FD पर इन बदलावों का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा और वह तय ब्याज दर और अवधि के मुताबिक जारी रहेगी.
1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
RBI के नए दिशानिर्देशों के तहत किसी बैंक की एक ही अवधि वाली FD पर अलग-अलग शाखाओं में अलग ब्याज दरें लागू नहीं होंगी. यानी ग्राहक देश के किसी भी हिस्से में बैंक की शाखा में FD कराता है, तो संबंधित अवधि के लिए बैंक की घोषित दर एक समान होगी. स्थान या शाखा के आधार पर ब्याज दर में अंतर नहीं होगा.
इसके साथ ही बैंकों को FD की ब्याज दरों की जानकारी ग्राहकों को केवल मौखिक रूप से देने के बजाय अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से उपलब्ध करानी होगी. इससे ग्राहक FD कराने से पहले बैंक की वेबसाइट पर लागू ब्याज दर की जानकारी ले सकेंगे और अलग-अलग विकल्पों की तुलना करना आसान होगा.
बल्क FD के लिए रोज अपडेट होंगी ब्याज दरें
नए नियमों में 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली बल्क डिपॉजिट को भी शामिल किया गया है. ऐसे डिपॉजिट के लिए बैंक को हर दिन अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दर अपडेट करनी होगी. यह जानकारी सुबह 10 बजे तक उपलब्ध करानी होगी और अधिकतम 10 मिनट के ग्रेस पीरियड के साथ इसे सुबह 10:10 बजे तक अपडेट करना होगा.
इसका असर खास तौर पर उन बड़े जमाकर्ताओं पर पड़ेगा जो बड़ी रकम को बल्क FD में लगाते हैं. उन्हें बैंक से अलग से संपर्क किए बिना वेबसाइट पर रोजाना उपलब्ध ब्याज दर की जानकारी मिल सकेगी.
मौजूदा FD पर क्या होगा असर?
1 अक्टूबर से लागू होने वाले इन बदलावों का पहले से चल रही FD पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. अगर आपने पहले से किसी बैंक में FD करा रखी है, तो वह उसी तय ब्याज दर, अवधि और शर्तों के अनुसार जारी रहेगी. नए नियम मुख्य रूप से भविष्य में होने वाली FD और बैंकों की ब्याज दरों की जानकारी सार्वजनिक करने की प्रक्रिया से जुड़े हैं.
इसलिए जिन ग्राहकों की FD पहले से चल रही है, उन्हें केवल इन नए नियमों की वजह से अपनी जमा राशि को बंद कराने या दोबारा निवेश करने की जरूरत नहीं होगी.
बैंक FD की ब्याज दर कैसे तय करते हैं?
बैंक अलग-अलग अवधि और जमा राशि के आधार पर FD की ब्याज दर तय करते हैं. आम तौर पर खुदरा जमा और बल्क डिपॉजिट के लिए अलग-अलग दरें हो सकती हैं. खुदरा जमा में सामान्य ग्राहकों की 3 करोड़ रुपये से कम की FD शामिल होती है, जबकि 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि बल्क डिपॉजिट की श्रेणी में आती है.
बैंकों को अलग-अलग अवधि वाली घरेलू टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दर तय करने की स्वतंत्रता RBI ने 22 अक्टूबर 1997 से दी हुई है. इसलिए अलग-अलग बैंक एक ही अवधि की FD पर अलग ब्याज दरें पेश कर सकते हैं.
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा ब्याज दरों को लेकर बढ़ी पारदर्शिता के रूप में सामने आएगा. ग्राहक FD कराने से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित अवधि की ब्याज दर देख सकेंगे. वहीं बड़ी रकम जमा करने वाले ग्राहकों को बल्क FD की रोजाना अपडेट होने वाली दरों की जानकारी भी ऑनलाइन मिल सकेगी.
इससे बैंक शाखा में जाकर ब्याज दर पूछने या केवल मौखिक जानकारी पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी. साथ ही ग्राहक अलग-अलग बैंकों की उपलब्ध FD दरों की तुलना करके निवेश का फैसला ले सकेंगे.
FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट या सावधि जमा को आमतौर पर तय ब्याज दर और निश्चित अवधि वाले निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है. हालांकि, FD में निवेश से पहले ब्याज दर के साथ-साथ अवधि, समय से पहले निकासी के नियम, टैक्स और बैंक की अन्य शर्तों को भी देखना जरूरी है.
इस सुविधा के तहत ग्राहक अपने निवेश को बेचे बिना निजी या कारोबारी जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने ग्राहकों के लिए bob PAL (Portfolio-backed Approved Limit) नाम से डिजिटल ओवरड्राफ्ट सुविधा शुरू की है. इसके तहत पात्र ग्राहक अपने इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर 1 लाख रुपये से 5 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट लिमिट हासिल कर सकते हैं. इस सुविधा के तहत ग्राहक अपने निवेश को बेचे बिना निजी या कारोबारी जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे.
क्या है bob PAL?
bob PAL सिक्योरिटीज के बदले मिलने वाली डिजिटल ओवरड्राफ्ट सुविधा है. इसका उद्देश्य ग्राहकों को अपने निवेश को भुनाए बिना जरूरत के समय फंड उपलब्ध कराना है. बैंक के मुताबिक, यह सुविधा निवेश पोर्टफोलियो को बनाए रखते हुए अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.
किन निवेशों के बदले मिलेगा लोन?
इस सुविधा के तहत पात्र ग्राहक कई तरह की सिक्योरिटीज को गिरवी रख सकते हैं. इनमें इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) शामिल हैं. मिलने वाली क्रेडिट लिमिट गिरवी रखी गई सिक्योरिटीज और लागू नियमों के आधार पर तय होगी.
1 करोड़ रुपये तक की लिमिट के लिए डिजिटल सुविधा
बैंक के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये तक की ओवरड्राफ्ट लिमिट के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध है. ग्राहक bob World, इंटरनेट बैंकिंग और बैंक की वेबसाइट के जरिए इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं.
जितना इस्तेमाल, उतना ब्याज
bob PAL ओवरड्राफ्ट सुविधा है, इसलिए ग्राहक को पूरी स्वीकृत लिमिट पर ब्याज नहीं देना होगा. ब्याज इस्तेमाल की गई राशि पर लगेगा. इससे जरूरत के मुताबिक उपलब्ध क्रेडिट का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है.
निवेश बेचने की जरूरत नहीं
इस सुविधा की एक प्रमुख विशेषता यह है कि ग्राहक फंड की जरूरत पूरी करने के लिए अपने निवेश को बेचने के बजाय उसे सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे में गिरवी रखे गए निवेश से मिलने वाले लागू लाभ, जैसे डिविडेंड और बोनस, निवेशक को मिलते रह सकते हैं, हालांकि यह संबंधित सिक्योरिटी और बैंक की शर्तों के अधीन होगा.
बैंक ने क्या कहा?
बैंक ऑफ बड़ौदा के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संजय मुदलियार ने कहा कि फंड की जरूरत पूरी करने के लिए लंबे समय में संपत्ति बनाने की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ना चाहिए. उनके मुताबिक, bob PAL ग्राहकों को अपने निवेश को बनाए रखते हुए जरूरत के समय उनकी वित्तीय संपत्तियों की वैल्यू का इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. उन्होंने कहा कि ओवरड्राफ्ट स्ट्रक्चर और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए बैंक ग्राहकों को सुविधाजनक और लचीला वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है.
bob PAL की प्रमुख बातें
1. क्रेडिट लिमिट: 1 लाख रुपये से 5 करोड़ रुपये तक
2. सिक्योरिटी: इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, डिबेंचर और SGB
3. ब्याज: इस्तेमाल की गई राशि पर
4. निवेश: सिक्योरिटी गिरवी रखने के बाद भी निवेश पोर्टफोलियो बरकरार
5. डिजिटल सुविधा: 1 करोड़ रुपये तक की लिमिट के लिए उपलब्ध
6. डिजिटल माध्यम: bob World, इंटरनेट बैंकिंग और बैंक की वेबसाइट
अनियमित आय वाले लोगों के लिए रोजाना छोटी रकम निवेश करने का विकल्प; पिछले साल बॉन्ड और एफडी के बाद कंपनी ने बढ़ाया निवेश उत्पादों का दायरा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पैसाबाजार ने म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अपना प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. इसके साथ कंपनी ने बचत और निवेश से जुड़े उत्पादों का दायरा बढ़ाया है. कंपनी ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को अलग-अलग म्यूचुअल फंड योजनाओं को खोजने, उनकी तुलना करने और निवेश करने की सुविधा मिलेगी. म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म के साथ कंपनी ने ‘डेली SIP’ की सुविधा भी शुरू की है. इसके तहत निवेशक हर महीने एकमुश्त रकम निवेश करने के बजाय रोजाना छोटी राशि से निवेश कर सकते हैं. कंपनी के मुताबिक, इस सुविधा में न्यूनतम ₹10 से रोजाना निवेश किया जा सकता है.
अनियमित आय वालों के लिए विकल्प
डेली SIP का उद्देश्य ऐसे लोगों के लिए नियमित निवेश को आसान बनाना है, जिनकी आय हर महीने एक समान नहीं रहती. इसमें स्वरोजगार करने वाले लोग, छोटे कारोबारी और दुकानदार जैसे उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं.
रोजाना छोटी राशि निवेश करने का विकल्प निवेशकों को अपने नकदी प्रवाह के अनुसार निवेश करने की सुविधा दे सकता है. हालांकि, म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन होते हैं और किसी भी योजना में निवेश से पहले उससे जुड़े जोखिमों और शर्तों को समझना जरूरी है.
बॉन्ड और एफडी के बाद म्यूचुअल फंड
पैसाबाजार ने पिछले साल बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े उत्पाद शुरू किए थे. अब म्यूचुअल फंड को जोड़ने के साथ कंपनी लोन, बचत और निवेश से जुड़े उत्पाद एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
पैसाबाजार के सीईओ संतोष अग्रवाल ने कहा कि कंपनी की मौजूदा गतिविधियों में क्रेडिट की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन उपभोक्ताओं की वित्तीय जरूरतें केवल लोन तक सीमित नहीं हैं. उनके मुताबिक, म्यूचुअल फंड की शुरुआत कंपनी के वित्तीय उत्पादों के विस्तार का हिस्सा है.
कई एएमसी की योजनाओं में निवेश की सुविधा
कंपनी के अनुसार, उसके म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर विभिन्न एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) की योजनाएं उपलब्ध हैं. निवेशक इन योजनाओं को देख और उनकी तुलना कर सकते हैं तथा अपनी जरूरत के अनुसार निवेश कर सकते हैं. पैसाबाजार में म्यूचुअल फंड के प्रमुख तुषार गुप्ता ने कहा कि डेली SIP के जरिए अलग-अलग आय पैटर्न वाले लोगों के लिए निवेश को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है.
12 साल बाद बढ़ाई गई EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा, 15,000 से 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए वेतन की ऊपरी सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है. सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकेंगे.
आसान भाषा में समझें तो अभी तक जिन नए कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये प्रति माह से ज्यादा था, वे अनिवार्य EPF कवरेज में नहीं आते थे. अब यह सीमा 25,000 रुपये होने के बाद 15,000 से ज्यादा और 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य EPFO कवरेज में शामिल किया जा सकेगा.
कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?
EPFO के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलता है. EPF के जरिए कर्मचारी के रिटायरमेंट के लिए बचत होती है. वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा का प्रावधान है.
सरकार का कहना है कि वेतन सीमा बढ़ाने से बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा, जो मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे.
12 साल बाद बदली EPFO की वेतन सीमा
EPFO की वेतन सीमा में करीब 12 साल बाद बदलाव किया गया है. सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था. इसके बाद से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ था. सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में कर्मचारियों की आय और वेतन स्तर में बदलाव आया है. कई राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब पहुंच गया है. ऐसे में अब अनिवार्य EPFO कवरेज की सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है.
क्या मौजूदा कर्मचारियों का PF भी बढ़ जाएगा?
नई वेतन सीमा का मतलब यह नहीं है कि सभी मौजूदा कर्मचारियों के PF योगदान में अपने आप एक तय रकम की बढ़ोतरी हो जाएगी. सरकार ने सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है, लेकिन इसके लागू होने के बाद अलग-अलग वेतन वर्ग के कर्मचारियों के PF योगदान और पेंशन की गणना पर कितना असर पड़ेगा, यह संबंधित नियमों और प्रक्रिया से स्पष्ट होगा.
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO को इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले से EPF का लाभ ले रहे हर कर्मचारी के खाते में हर महीने निश्चित रूप से ज्यादा रकम जमा होगी.
सरकार पर कितना बढ़ेगा खर्च?
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस फैसले के बाद सालाना खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. फिलहाल इस मद में सरकार की सालाना बजटीय मदद करीब 10,250 करोड़ रुपये है.
अगले पांच वर्षों में सरकार का कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. इस प्रस्ताव पर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा हुई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी.
अभी कितने कर्मचारी EPFO से जुड़े हैं?
सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, EPFO के करीब 7.98 करोड़ ऐसे सदस्य हैं, जिनके खातों में फिलहाल योगदान किया जा रहा है. ये कर्मचारी करीब 7.68 लाख कंपनियों और अन्य संस्थानों से जुड़े हैं. इसके अलावा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत करीब 82 लाख लोगों को पेंशन मिल रही है.
नई वेतन सीमा कब से लागू होगी?
केंद्रीय कैबिनेट ने EPFO की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दे दी है. हालांकि, नई व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी और PF योगदान की गणना में किस तरह बदलाव होगा, इसकी पूरी जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO की ओर से जारी होने वाले नियमों और निर्देशों से स्पष्ट होगी.
इसलिए फिलहाल कर्मचारियों के लिए सबसे अहम बदलाव यह है कि 25,000 रुपये तक वेतन पाने वाले ज्यादा संख्या में नए कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकेंगे.